Tuesday, November 25, 2025

शायद यही मोहब्बत है



कभी-कभी किसी से इतना गहरा लगाव हो जाता है, कि वो सिर्फ इंसान नहीं रहता एहसास बन जाता है।ऐसा एहसास, जो सांसों की तरह होता है… दिखता नहीं, पर उसके बिना सब कुछ अधूरा लगता है।

बस एक दिन उससे बात न हो, तो लगता है जैसे दिन अधूरा है

फोन की स्क्रीन बार-बार जलती है,

हर नोटिफिकेशन पर दिल धड़कता है 

“शायद उसी का मैसेज हो…”

पर जब नहीं होता, तो वो धड़कन भी खामोशी में बदल जाती है।

कभी लगता है खुद से कह दूं 

“क्या हुआ, एक दिन ही तो बात नहीं हुई।”

पर दिल मानता कहाँ है!

वो कहता है 

एक दिन नहीं, पूरी उम्र सूनी लग रही है बिना उसके।


उसकी हंसी याद आती है,

वो छोटे-छोटे नखरे, वो ‘पता नहीं’ बोलकर छेड़ना,वो हर बात में छिपा है 

वो जब कहती थी, “तुम पागल हो ना,”

और मैं जवाब देता था, तेरे लिए ही तो 

और फिर एहसास होता है 

प्यार का मतलब हमेशा साथ होना नहीं,

कभी-कभी बस उसका न होना ही ये जताने को काफी होता है

कि वो तुम्हारे भीतर कितना गहराई तक बस चुका है।

शायद यही मोहब्बत है 

जब एक दिन की खामोशी, हज़ार बातों से ज़्यादा बोल जाती है…

और उस खामोशी में भी बस एक ही आवाज़ आती है 

“कब बात होगी फिर?”

Sunday, November 23, 2025

Raj Sir Words


What is definition of ability & self confidence... Ability is allow to do something special but self confidence is instruct you to do anything else whatever you want in your planing life...


Who is your planner...Your own mind...Since your planning is on base of so many dream as per your life wish... According to it...your mind is more important than your thought...but both are cofused by your own society people... Never care about it...Go ahead... And do What your mind want to do... Friend once again I say... Our mind mad computer... Computer did not make our mind... Therefore computer is producer of our mind... Plan your work and work on your planing... Accelerat your mind as per your pickup... Your achievement will be in your foot...Raj Sir


इन हिंदी...




योग्यता और आत्मविश्वास की परिभाषा क्या है...योग्यता आपको कुछ खास करने की अनुमति देती है, लेकिन आत्मविश्वास आपको अपने नियोजित जीवन में जो चाहें करने का निर्देश देता है...


आपका योजनाकार कौन है...आपका अपना मन...चूँकि आपकी योजनाएँ आपके जीवन की इच्छाओं के अनुसार कई सपनों पर आधारित होती हैं... इसके अनुसार...आपका मन आपके विचारों से ज़्यादा महत्वपूर्ण है...लेकिन दोनों ही आपके अपने समाज के लोगों द्वारा भ्रमित किया जाता हैं...इसकी परवाह मत करो...आगे बढ़ो...और वही करो जो तुम्हारा मन करना चाहता है...दोस्त, एक बार फिर मैंने कहता हूँ...हमारे मन ने कंप्यूटर बनाया...कंप्यूटर ने हमारे मन को नहीं बनाया...इसलिए कंप्यूटर हमारे मन का आविष्कार है...अपने काम की योजना बनाओ और अपनी योजना पर काम करो...अपने मन को अपनी गति के अनुसार गति दो...आपकी उपलब्धि आपके कदमों में होगी...राज सर


दीवानो के किश्मत में तो तन्हाई और जुदाई है ही,पर कुछ लोग उनके फूलो के मौसम का बहुत गलत फ़ायदा उठाते दोस्त...तेरी दीवानगी का सरूर इतना है मेरे अंदर, की अब मैं तेरे प्यार में आवारगी करना सरु कर दिया है दोस्त...तेरे याद तो मुझमें पल पल रहती है और रहेगी, मेंरी मोहब्बत आजमाइस नहीँ गुजारिश है दोस्त...पता नहीं मैं तेरे ख्याल में रहता हूँ की नहीँ, पर तू तो मेंरी जिंदिगी की ख्वाब और खोवाइस दोनों हो दोस्त...सुन ना तेरे से एक बात कहनी है दोस्त, तू सोंच अपनी बदल दे क्यूंकि तेरी अनुमान मेरे अरमान को मार रहे दोस्त...प्यार की परिभाषा तो तूने मुझे समझाने की कोशिश की, जब मैं समझने लगा तो दूर क्यों जाना चाहते हो दोस्त... देख यार तेरी यारी मेरे लिए गद्दारी न बन जाय, इससे पहले हम दोनों को अपनी वफ़ादारी निभाना होगा दोस्त...कृष्ण रुक्मणि के होके भी राधा के रहे यार, मैं तो तेरा पहला कृष्ण था दोस्त...विश्वास कर अब तेरे प्यार में मैं कुछ ऐसा कर जाऊंगा, जो तेरे पुरे जिंदिगी कोइ नहीं कर पाएगा दोस्त... One Qutatetion in English for love ... Too much mony may be many things dost but it can never take place of so many peaceful place...दिल, जिगर, ज़िन्दगी क्या चीज क्या तेरे लिए है दोस्त...तुम तो ऐ बता पहली मोहब्बत आखरी खोइस क्या है उसपे सब कुर्बान है...दस्तूर और कसूर दोनों दिल और नजरो का कसूर होता है...पर इल्जाम सिर्फ दो दिलो के ऊपर होती है दोस्त...हो सकता है मेरे इस बेकरारी से तुझे करार आता हो, पर मैंने तुझ पर एतवार और तेरे इकरार दोनों को पाला है दोस्त...प्यार की वो सौगाते कैसे मैं भुलादू दोस्त, आज जो कुछ भी हूँ उसी के बदौलत हूँ... तेरा राज...

जब तुम्हरा कोई बेगाना सा सलूक करे, तब तुम आँख बंद कर के अपने अफसाने को याद करना...ऐसे दीवाने बहुत कम लोगो के किश्मत के नशीब होते है...मेरे नजरओ का तो दीदार हो ही तुम, पर मेरे दिल के प्यार होने से क्यों कतराते हो यार... यार प्यार वसना नहीँ है,ऐ तो उन दो दिलो के उपसना और असना है जो न किसी का हुआ न किसी को किसी का होने दिया... तुम क्या सोचती जिस्म का मिलन इकरार है, पागल जब जिस्म जा रहा था तो रूह मुस्करा रहा था...और सुन दिल किसी खूबसूरत चेहरे को कभी नहीँ जनता, दिल उस चेहरा को जनता है जो उसके लिये हमेसा लाजबाब है...और बताऊ तुझे, बंदना, आरती, पूजा, उपसना, रोना धोना, हाथ पर ब्लेंड से लकीर खींचना हम दोनों के नाम के ये सब ऐ तेरे मोहब्बत की नशानी है...love statement for u... Monny may be many things for you & me.. But mind on this matter...it can never take place of evening things... Your love can be for you or not for me.... Because of it you have no knowledge what is definition of abilitys& self confidence...रात अधूरी होती जान तेरे बिना, पर तु अपनी अधूरी राते हँसी ख़ुशी के साथ सही गुजार रही है... तुझे ना देखु तो चैन मुझे आता नहीँ... इस पल में कोइ तेरे सिवा मुझे बहलता नहीं...किसी न किसी को किसी पर एतबार हो जाता है,एक अजनबी सा चेहरा ही यार हो जाता है,खूबियों से ही नही होती मोहब्बत सदा किसी की,कमीयो से भी कभी प्यार हो जाता है...राज


तन्हाई भी उस हरजाई हमसफ़र की तरह होती...


मैं अक्सर सोचता हूँ,कि ये जो शब्द काग़ज़ पर उतरते हैं,ये कहाँ से आते हैं...


शायद...जब तुम चुप हो जाती हो,तो तुम्हारी ख़ामोशी मेरे अंदर कुछ कहने लगती है..


जब तुम दूर हो जाती हो,तो तुम्हारी कमी अल्फ़ाज़ में आकार लेने लगती है...


मैं जब भी कुछ लिखता हूँ,तो वो कविता नहीं होती—

वो तुम्हारा अक्स होता है,तुम्हारे होने और न होने के बीच की लड़ाई...


लोग कहते हैं...बहुत गहराई है तुम्हारे शब्दों में…

उन्हें क्या पता,हर पंक्ति में मैंने तुम्हारा चेहरा गढ़ा है...


तुम मेरी कलम की सबसे प्यारी गलती हो,जिसे हर बार दोहराने का मन करता है...


तुम्हें भुलाने की कोशिश में ही मैंने लिखना सीखा है,

और अब...तुम्हें महसूस करते हुए हर शब्द बस 'तुम' बन जाता है...


कुछ तारीखें...कुछ लम्हें...और कुछ खास दिन होते हैं...जो वक़्त के सैलाब में भी फीके नहीं पड़ते...


ये वो सुनहरी यादें होती हैं...जो दिल के कोने-कोने में बस जाती हैं,हर दर्द को सहलाती हैं,और हर खुशी को दोगुना कर देती हैं...


ये यादें हमारे जज़्बातों की वो कश्ती हैं...जो हर तूफान में हमें किनारे तक पहुंचाती हैं...कुछ पल, कुछ चेहरे, कुछ बातें ऐसी होती हैं...जो ज़िंदगी की किताब में

सबसे खूबसूरत अफसाने बनकर रह जाती हैं...


जब कोई चुप हो, तो हम बोलने की बजाय बस उसके पास बैठ जाएँ, बिना घड़ी देखे, बिना कोई समाधान दिए...


जब कोई ग़लती कर बैठे, तो उसे उसकी ग़लती से ज़्यादा उसकी थकान को समझें और उसका हाथ पकड़ लें, "चलो, दोबारा कोशिश करते हैं" कहने के लिए...


जब हम ग़ुस्से में हों, तो जीतने की बजाय समझने की कोशिश करें — "क्या तुम थके हुए हो?" इतना पूछ लेना भी प्रेम है...


जब कोई हमें दूर करे, तो हम ज़बरदस्ती न करें — लेकिन एक छोटा सा संदेश छोड़ दें, "मैं यहीं हूँ, जब भी चाहो...


किसी का डर या अनजाना दुख दिखे, तो यह न कहें कि “डरने की ज़रूरत नहीं” — बस आँखों में आँखें डालकर कहें, “मैं समझता हूँ...


जब कोई हमारे करीब आना चाहे, अपने पूरे सच के साथ, तो हम खुद को थोड़ा सा खोल दें — ताकि वो देख सके कि वो अकेला नहीं है...


इस दर्शन में प्रेम चिल्लाता नहीं, वह धीरे से दरवाज़ा खोलता है...


शब्द नहीं, स्पर्श बनो...

वादे नहीं, उपस्थिति बनो...

समझदारी नहीं, समझ बनो...


Some Special line in English...


As you get older, you start to see life differently. You begin to understand that true happiness is not about how much money you make, how many degrees you have, or how big your house or car is. At some point, material things lose their value. What truly matters is peace in your heart, joy in your days, and calmness in your life...


When you're young, it’s common to chase after success, status, and wealth. We often think these things will make us happy forever. But over time, we learn that real happiness comes from the simple things—like sitting with loved ones, laughing over old memories, or just enjoying a quiet evening at home...


Family and true friends become your most valuable treasures. The people who care for you, who are there during tough times, who love you for who you are these are the ones that really matter. Their support means more than anything money can buy...


You stop needing more and start feeling thankful for what you already have. You learn that having a few close, real friends is better than having many fake ones. A small, peaceful home is better than a large, stressful one. And a heart full of love is more valuable than a bank account full of money...


With age, you discover the best things in life aren’t things at all. Love, peace, kindness, and simple joys bring the most happiness. And that’s when you truly start living...


In the end, life isn’t about what you own, it’s about how you feel, who you love, and how you spend your time...


Have a wonderful night Friends...



जो लोग प्यार प्यार की मायने समझते उनके के लिए... ऐ प्यार भरा शब्द है मेरे ओर से...राज...


यह बात सच है कि जिन लोगों के करीब बहुत लोग होते हैं, उनसे अक्सर दूरी बनाना ही बेहतर होता है। क्योंकि जब आप बहुत करीब होते हैं, तो लोग आपकी अच्छाई को मान लेते हैं और आपकी कमजोरियों को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन जब आप दूरी बनाए रखते हैं, तो लोग आपकी अच्छाई को और भी ज्यादा महसूस करते हैं और आपकी जरूरत को समझते हैं।


यह वाक्य प्रेम की सच्चाई को दर्शाता है। प्रेम कभी भी संपत्ति या किसी और चीज़ की मांग नहीं करता, वह सिर्फ अपने प्रेमी के साथ और उनके प्रेम की मांग करता है। यह प्रेम की निस्वार्थ और शुद्ध भावना को प्रकट करता है।


बहुत ही सुंदर और रोमांटिक है आपका यह ख्याल! यह लाइनें दिल को छू जाती हैं और प्यार की गहराई को दर्शाती हैं। आपकी ख्यालों की दुनिया में उनका होना कितना खास है, यह बात बहुत ही खूबसूरती से व्यक्त की गई है।


यह एक गहरा और सुंदर विचार है! इसका अर्थ है कि अगर किसी से सच्चा प्रेम हो जाता है, तो उससे द्वेष या नफरत करना असंभव हो जाता है, भले ही वह व्यक्ति हमारे साथ गलत करे। प्रेम की भावना इतनी शक्तिशाली होती है कि वह हमारे दिल में द्वेष की जगह नहीं रहने देती।


Have a wonderful night friend...

Tuesday, November 4, 2025

माँ अनपढ़ सही, पर जीवन की किताब है

 "माँ अनपढ़ सही, पर जीवन की किताब है"


एक बच्चा नंबर लाया, नब्बे प्रतिशत पास,

बाप ने खुश हो बोला, आज बनेगा खास पकवान।

माँ दौड़ी आई बोली दिखा तो सही बेटा मेरा,

क्या कमाल कर दिया इसने, देखूँ मैं भी ज़रा।


पर बेटे ने कह डाला “माँ कुछ नहीं समझेगी,

ये अनपढ़ है, रिज़ल्ट क्या जानेगी?”

उसकी बात से माँ की आँखें भर आईं,

चुपचाप फिर रसोई में खीर बनाने चल पड़ी भाई।


पिता ने बेटे को समझाया 

हाँ बेटा, तेरी माँ अनपढ़ है,

पर सुन जो अब मैं बताता हूँ,

जिससे तेरी सोच का भ्रम हटता है।


जब शादी के बाद तू पेट में आया,

माँ ने हर ख्वाहिश, हर सपना तज दिया।

दूध से नफ़रत थी उसे, पर तेरे लिए पीती थी,

तेरे अच्छे स्वास्थ्य के लिए वो खुद से भी लड़ती थी।


हर सुबह उठकर तेरे लिए नाश्ता बनाती,

तू स्कूल जाए समय पे, इसलिए खुद नींद भूल जाती।

रात में तू पढ़ते-पढ़ते सो जाता,

माँ चुपचाप तेरी किताबें समेटती जाती।


तू बीमार रहता माँ सारी रात जागती,

सुबह होते ही फिर काम में लग जाती।

तेरे लिए ब्रांडेड कपड़े,

माँ ने अपना साड़ी भी सालों न बदले।


बेटा, पढ़े-लिखों का मतलब सिर्फ डिग्री नहीं होता,

माँ की ममता, त्याग उससे बड़ा कुछ नहीं होता।

माँ अनपढ़ सही, पर हर रिश्ते की जान है,

तेरी असली गुरू, तेरे जीवन की पहचान है।


बेटा रोते हुए बोला 

“माँ, मैंने तो बस अंक पाए हैं,

पर आपसे बड़ा ज्ञान कोई न पाए है।

आपने ही मुझे सिखाया क्या है जीवन,

आज भी मैं अनपढ़ हूँ,

अगर माँ को समझ न पाया ये मन।”


तो सलाम है उस माँ को,

जो पढ़ न सकी किताबें,

पर बना गई एक इंसान,

जो कर सके ज़िंदगी में कुछ कमाल।


दशहरा-दीवाली के इस पर्व के बाद,

चलो माँ को करें दिल से याद।

माँ है तो सब कुछ है,

वरना हर जीत अधूरी है।


🙏 "माँ को सम्मान दें, क्योंकि वही है जीवन का पहला पाठशाला।" 🙏

ग़रीबी की असली जड़

 "ग़रीबी की असली जड़"


ग़रीबी पैसे की कमी नहीं, सोच की हार है,

यह एक आदत है जो भीतर छिपा विकार है।

पचास हज़ार कमा कर भी कोई खाली रह जाता है,

क्योंकि पैसा नहीं, नियंत्रण ही दौलत का रास्ता है।


जब “ना” कहना मुश्किल हो, तब विनाश शुरू होता है,

भोग की चाह में मनुष्य अपने मूल से दूर होता है।

खर्च बढ़ता है जहाँ इच्छाएँ बेलगाम हो जाती हैं,

और भावनाओं की लहरों में पूरी कमाई बह जाती है।


कमी आमदनी की नहीं, आदतों की है जनाब,

कम में भी बचाया जाए तो बनता है हिसाब।

जो दो हज़ार बचा ले, वो बीस हज़ार उड़ाने वाले से आगे है,

क्योंकि वो भविष्य बनाता है, दूसरा दिखावे में भागे है।


भोग-विलास आज का नया जाल है,

मोबाइल, पार्टी, रिश्तों का बेहिसाब माल है।

हर "एंजॉयमेंट" जो जेब हल्की करे,

दरअसल वो ग़रीबी की चुपचाप रखी ईंटें गढ़े।


जिन्हें खुद पर काबू नहीं, वो कभी ऊँचा नहीं उड़ते,

थोड़ी सफलता पाते ही अपने ही बोझ से टूटते।

क्योंकि जो भूखे थे अनुशासन के,

वो अमीरी में मदहोश हो जाते हैं और खो देते हैं सबके सबके।


लोग आज मेहनत नहीं करते तरक्की के लिए,

बल्कि approval के लिए, validation के लिए।

महँगा फोन, महँगा कपड़ा, दिखावे का प्यार,

इन सबसे ना कोई बचत होती, ना कोई संवार।


ध्यान बंटा हो जहाँ-तहाँ, वहाँ फोकस कहाँ से आए?

ऊर्जा बहे व्यर्थ में तो लक्ष्य तक कौन जाए?

स्त्री, शराब, सोशल मीडिया यही तो खलीफा हैं,

जो हर पुरुष की ताक़त को चुपचाप लुटा देते हैं।


असली अमीरी शांति में बसती है, शोर में नहीं,

जो कम कमाता है पर सोचता गहरे वो गरीब नहीं।

जो नियंत्रण में जीता है, भविष्य उसी के क़दम चूमता है,

और जो उछलता है अभी वो कल आँसू में डूबता है।


तो सुन लो अब एक अंतिम चेतावनी की बात,

पैसे की भूख नहीं नियंत्रण की कमी है असली ज़हर की सौगात।

अगर खुद को ना संभाल सको 

तो लाखों भी आएं, फिर भी तुम फटेहाल रहोगे।


ज़रूरत नहीं है ज़्यादा कमाने की,

ज़रूरत है खुद को साधने की।

क्योंकि जहाँ नियंत्रण है, वहाँ उन्नति निश्चित है 

और जहाँ सिर्फ़ इच्छाएँ हैं, वहाँ ग़रीबी अपरिहार्य है।

मन की दौड़

 "मन की दौड़"


ज़िन्दगी कोई प्रतियोगिता नहीं,

हर कोई अपनी राह पर है,

वक़्त की रेत पर सबके पाँव

अलग दिशा में चलते हैं।


कोई मंज़िल जल्दी पा लेता है,

कोई देर से पहुँचता है 

पर रास्ते वही सबसे गहरे होते हैं

जहाँ अकेलापन भी साथी बन जाता है।


हर आत्मा का एक संघर्ष है,

हर मुस्कान के पीछे एक सिसकती रात।

तू देखता है मुझे और सोचता है 

"ये तो कुछ भी नहीं झेलता होगा…"


पर सच तो ये है कि

हम सब बिखरे हुए हैं किसी न किसी रूप में,

कुछ ज़ख़्म हँसकर छुपा लेते हैं,

कुछ खुद को "बुरा" कहलवाकर

अपने दर्द से बदला लेते हैं।


हाँ, मेरा अहंकार ऊँचा है,

इतना कि नफ़रत भी अब इज़्ज़त सी लगती है,

लोग जब पीठ पीछे बुरा कहते हैं,

तो यकीन हो जाता है 

अब मैं खुद के सच के क़रीब हूँ।


क्योंकि "अच्छा" बनकर भी

कई बार बिखर जाते हैं लोग,

पर "बुरा" बनकर 

वो अपनी हदों से वाक़िफ़ हो जाते हैं।


शायद यही वजह है

कि कुछ औरतें “बुरे लड़कों” की ओर खिंच जाती हैं 

जो दर्द छुपाकर हँसते हैं,

जो ज़िन्दगी की किताब बिना मुखपृष्ठ के पढ़ते हैं।


ऐसा नहीं कि उन्हें प्यार की तमीज़ नहीं,

पर वो गहराई में उतरने से डरते नहीं।

जो सच को कहने की हिम्मत रखते हैं,

और झूठ की पॉलिश में चमकते नहीं।


पर जब कोई ऐसा मिल जाता है,

जो तुम्हारे मन की भाषा समझता है 

बिना कहे पढ़ लेता है वो बातें

जो तुमने कभी खुद से भी न कहीं हों 


तो उस एक क्षण में,

हर भ्रम टूट जाता है,

हर दीवार गिर जाती है,

और तुम जान जाते हो 


“शरीर का साथ एक सुख है,

पर मन की समझ 

वो तो परम आत्मीयता है।”


तो चलो 

न तुलना करें, न दौड़ें,

अपनी चाल में चलें,

अपने सत्य में जलें।


क्योंकि अंत में,

सबसे सुंदर प्रेम वो होता है

जो तुम्हारे भीतर के तूफ़ान को

बिना डरे थाम लेता है।

समानता के रेखाचित्र

 "समानता के रेखाचित्र"


मांगना एक कर्म नहीं केवल यह संवाद है,

जहाँ अपनापन जन्म लेता है, जहां विस्थापित आत्माएं पाती हैं घर।

दौलत का माप, आर्थिक भूख की सीमा नहीं,

यह हृदय की गहराई, जहाँ बंधन बुनते हैं सहानुभूति के धागे।


विनम्रता वह कला है जो बराबरी में रंग भरती है,

मांगना और देना दो समानांतर धाराएँ जो मिलती हैं,

मज़लूमों के पैरों तले जब रखा जाए गरम रेत का बोझ,

तब ही समझ में आता है साझा दर्द का अर्थ और मूल्य।


जो मांगते हैं, वे खुद को मिटाते नहीं, वे अस्तित्व की पुष्टि करते हैं,

उनके छोटे-छोटे अनुरोधों में छुपा है समुदाय का आधार।

रिश्तों का ढांचा तब तक मजबूत रहता है, जब तक सहारा एकतरफा नहीं होता,

एक-दूसरे की जरूरतों को महसूस करना, यही है असली मानवता।


यह वही शिक्षा है जो माँ से मिली

कि सहानुभूति का अर्थ है कमजोर को कमजोर न समझना,

बल्कि उसे बराबर की ताकत देना,

जिसमें दोनों तरफ़ छिपी होती है परस्पर निर्भरता की महिमा।


यह ज्ञान नहीं, जीवन का अनिवार्य पाठ है

समाज तभी टिकता है जब हम एक-दूसरे के लिए सच्चे रहें,

जब माँग और देना, दोनों में हो गरिमा का समान वितरण,

तभी बनती है वह दुनिया जहाँ हर कोई महसूस करे “मैं भी यहाँ हूँ”।

देह, नशा और मनुष्य

 “आनंद की तलाश: देह, नशा और मनुष्य"


सेक्स यह शब्द अक्सर समाज में दो अतियों के बीच झूलता रहा है। कुछ इसे केवल प्राकृतिक प्रवृत्ति मानकर “जानवरों जैसी जरूरत” तक सीमित कर देते हैं, जबकि कुछ इसे जीवन की सबसे गूढ़ और रहस्यमय अनुभूति के रूप में देखते हैं। सच तो यह है कि सेक्स केवल शारीरिक क्रिया नहीं, बल्कि एक गहरी मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक यात्रा भी है।


मनुष्य जब किसी के साथ शारीरिक रूप से जुड़ता है, तो वह केवल देह नहीं, बल्कि अपने भीतर की एकांतता, जिज्ञासा और अधूरेपन को भी साझा कर रहा होता है। लेकिन अधिकांश लोग इस अनुभव की केवल सतह को छू पाते हैं वे उस गहराई में उतरने का साहस नहीं कर पाते, जहाँ देह के पार आत्मा का संवाद शुरू होता है।


समाज ने इस विषय को या तो पाप घोषित किया, या मनोरंजन का साधन बना दिया। परिणाम यह हुआ कि सेक्स एक ‘छिपाने योग्य’ अनुभव बन गया जबकि यह मनुष्य की भावनात्मक संरचना का अभिन्न हिस्सा है। इसी तरह नशे का आकर्षण भी उसी अनुभव-तृष्णा से जन्म लेता है। नशा केवल पदार्थ नहीं, बल्कि मन की एक खोज है एक ऐसी कोशिश जिससे व्यक्ति खुद को अपने सीमाओं से परे महसूस करना चाहता है।


सेक्स और नशा, दोनों में एक समानता है दोनों ही ‘स्व’ से परे जाने की लालसा हैं। कोई अपने भीतर की रिक्तता को देह के माध्यम से भरना चाहता है, तो कोई रसायन के सहारे चेतना को बदलना चाहता है। समाज इन प्रवृत्तियों को नियंत्रित करने की कोशिश करता है, पर यह नहीं समझ पाता कि इनकी जड़ में मानव-मनोविज्ञान की गहरी भूख है प्रेम, जुड़ाव, और अर्थ की भूख।


जब तक हम सेक्स या नशे को केवल वर्जना या अपराध की दृष्टि से देखेंगे, तब तक हम उस मनोवैज्ञानिक सत्य को नहीं समझ पाएँगे, जो इनके पीछे छिपा है कि मनुष्य केवल सुख नहीं, अर्थ की तलाश में जीता है। और जब अर्थ की कमी होती है, तो वह उसे आनंद, नशे या संबंधों के अतिरेक में खोजता है।


सच्चा समाधान दमन में नहीं, बल्कि समझ में है उस आंतरिक खालीपन की पहचान में, जो हमें इन अनुभवों की ओर खींचता है। जब हम इस खोज को समझने लगते हैं, तभी सेक्स देह से संवाद बनता है और नशा आत्म-अभिज्ञान का रूप ले सकता है।

मौन और पुरुषार्थ: आत्मसंयम की कला

 "मौन और पुरुषार्थ: आत्मसंयम की कला"


आज का विश्व शोर और हलचल से भरा हुआ है। हर कोई अपनी बात साबित करने, अपनी पहचान बनाने और किसी न किसी रूप में नजर आने में व्यस्त है। शब्दों की भरमार में अक्सर समझ की कमी हो जाती है। ऐसे समय में, जो व्यक्ति चुप्पी साधता है, उसे अक्सर कमजोर या उदासीन समझा जाता है। परन्तु सत्य यह है कि मौन केवल अनुपस्थिति नहीं, बल्कि अदृश्य शक्ति और आत्मसंयम का प्रतीक है।


वे सोचते हैं तुम्हारा मौन तुम्हारी हार है।

वे मानते हैं तुम्हारी शांति निष्क्रियता है।

वे कहते हैं तुम्हारा दूर रहना, अनिच्छा या उदासीनता है।

पर वे भूल जाते हैं कि मौन कभी पराजय का संकेत नहीं होता। यह आत्म-नियंत्रण और गहन समझ की भाषा है।


एक सच्चा पुरुष अपने हर कदम की घोषणा नहीं करता। वह गणना करता है, निरीक्षण करता है और सही समय आने पर प्रहार करता है। यह वही कला है जो अर्जुन ने महाभारत की युद्धभूमि में अपनाई केवल वही धनुष उठाता है, जो समय और परिस्थिति के अनुसार सबसे उपयुक्त हो। यही सच्चा पुरुषार्थ है धैर्य, विवेक और शक्ति का संयोजन।


मौन उसकी कमजोरी नहीं, संयम है।

शांति उसकी निष्क्रियता नहीं, संतुलन है।

धैर्य उसकी पराजय नहीं, तपस्या है।


इतिहास और पौराणिक कथाएँ हमें यही सिखाती हैं।

चाणक्य ने अपने अर्थशास्त्र में लिखा है कि सत्य और शक्ति का सही प्रयोग तभी वास्तविक प्रभाव डालता है, जब वह चुपचाप और सोच-समझकर किया जाए।

बुद्ध ने मौन और ध्यान को आत्मज्ञान का मार्ग बताया।

अर्जुन ने केवल सही समय पर ही धनुष उठाया और वही व्यक्ति सच्चा विजयी माना गया।


मौन उसकी तलवार है भ्रम और शोर को काटने वाली।

शांति उसका कवच है अज्ञान और जल्दबाजी से बचाने वाला।

संयम उसकी धारा है जो भीतर से शक्ति और स्पष्टता उत्पन्न करती है।

यह कला केवल शारीरिक शक्ति की नहीं, बल्कि मन और आत्मा की शक्ति की है।


जो व्यक्ति अपने भीतर का नियंत्रण पा चुका है, उसे बाहरी दुनिया जीतने की कोई जल्दी नहीं होती। उसने समझ लिया है कि सबसे बड़ा युद्ध स्वयं के भीतर का युद्ध है और सबसे महान विजय स्वयं पर विजय है।


मौन और संयम केवल व्यक्तिगत गुण नहीं, यह जीवन जीने की कला और दर्शन हैं। यह कला बुद्धिमत्ता, धैर्य और दूरदर्शिता से ही संभव होती है। जो इसे अपनाता है, वह शोर और हलचल से भरे संसार में भी संतुल और स्थिर रहता है।


सच्चे पुरुषार्थ का माप केवल बाहरी सफलताओं से नहीं, बल्कि मन और आत्मा की स्थिरता, निर्णय की स्पष्टता और कार्य की प्रभावशीलता से होता है। जो व्यक्ति इन गुणों को आत्मसात कर लेता है, वह जीवन की हर परिस्थिति में शांति और शक्ति का सामंजस्य बनाए रखता है।


अतः मौन और आत्मसंयम केवल नैतिक गुण नहीं हैं, बल्कि जीवन के सबसे गहन रहस्यों की कुंजी हैं। यह वही रहस्य है जो हमें यह सिखाता है कि वास्तविक शक्ति दिखाने में नहीं, बल्कि समझने, सोचने और सही समय पर कार्य करने में है।


यह निबंध हमें यह याद दिलाता है कि सच्चा पुरुष वह है, जो चुप रहता है, पर भीतर से सबसे प्रखर होता है। जो संयमित है, वही मजबूत है। जो शांत है, वही संतुलित है। और जो अपने भीतर विजय प्राप्त कर चुका है, वही सच्चा स्वतंत्र और विजयी है।

मन की उदासी और भीतर की शांति की खोज

 "मन की उदासी और भीतर की शांति की खोज"


इंसान का जीवन सुख-सुविधाओं, सपनों और उम्मीदों से भरा हुआ है। हर कोई चाहता है कि उसे सुकून मिले, मन को ठहराव मिले। मगर यह सवाल हमेशा बना रहता है क्या यह सुकून बाहर की चीज़ों से मिलता है, या यह हमारे अंदर कहीं गहराई में छिपा है?


अक्सर जब ज़िंदगी हमारी उम्मीदों के अनुसार नहीं चलती, तो मन उदास हो जाता है। कभी किसी रिश्ते के टूटने से, कभी असफलता से, और कभी उस अजीब से खालीपन से जो सबकुछ होते हुए भी भीतर महसूस होता है। यही खालीपन इंसान को अंदर से तोड़ देता है और उसे अपने ही अस्तित्व से दूर कर देता है।


 उदासी की दो परतें बाहर की और अंदर की


हर उदासी की अपनी एक कहानी होती है। लेकिन उसकी जड़ें दो जगहों पर होती हैं बाहरी और भीतरी।


बाहरी उदासी


जब हालात इंसान के खिलाफ हो जाते हैं, तब यह उदासी जन्म लेती है।

जब कोई अपना साथ छोड़ दे, जब मेहनत के बावजूद सफलता न मिले, या जब सपने अधूरे रह जाएँ तब मन पर एक बोझ-सा छा जाता है।

यह उदासी कुछ समय की होती है, क्योंकि इसका कारण बाहरी दुनिया में छिपा होता है। जैसे ही परिस्थितियाँ बदलती हैं, यह भी बदल जाती है।


भीतरी उदासी


यह उदासी कहीं ज़्यादा गहरी होती है।

यह तब आती है जब इंसान के पास सबकुछ होता है, फिर भी भीतर से खालीपन महसूस होता है। यह उस ग़लत पहचान का परिणाम है जहाँ इंसान सोचने लगता है 


“मैं वही हूँ जो मेरे पास है।


लेकिन जब यह ‘पास’ छिन जाता है चाहे वह पैसा हो, संबंध हो या पहचान तब भीतर का आधार भी हिल जाता है। यही से शुरू होती है असली उदासी, जो किसी बाहरी कारण से नहीं, बल्कि खुद से दूर होने से पैदा होती है।


सुकून की तलाश में इंसान का भ्रम


हर इंसान सुकून चाहता है लेकिन वह उसे बाहरी चीज़ों में ढूँढता है।

धन, शोहरत, रिश्ते, ताम-झाम ये सब शरीर को आराम तो दे सकते हैं, लेकिन मन को स्थिरता नहीं दे सकते।


सच्चाई यह है कि शांति कोई वस्तु नहीं, जिसे पाया जा सके; यह तो एक अवस्था है, जो पहले से हमारे भीतर मौजूद है।

हम उसे इसलिए महसूस नहीं कर पाते क्योंकि हमारा मन निरंतर बाहर भागता रहता है तुलना में, अपेक्षा में, और अधूरेपन की दौड़ में।


“बाहर की दुनिया शोर से भरी है,

और भीतर का संसार मौन में खिलता है।”


जब इंसान यह समझने लगता है कि बाहरी साधन सिर्फ़ साधन हैं, मंज़िल नहीं तभी वह भीतर की यात्रा शुरू करता है।


भीतर की ओर यात्रा शांति की ओर लौटना


असली सुकून बाहर नहीं, भीतर है। उसे पाने के लिए किसी चमत्कार की नहीं, बल्कि आत्म-जागरूकता की ज़रूरत होती है।


मन का अवलोकन (Observation)


मन को बस देखिए।

विचार आ रहे हैं, भावनाएँ उठ रही हैं उन्हें बिना रोक-टोक बस देखें।

जब इंसान देखने वाला बन जाता है, तब मन का शोर अपने आप धीमा होने लगता है।


स्वीकृति (Acceptance)


जो भी महसूस हो रहा है उदासी, गुस्सा, डर उसे दबाएँ नहीं।

स्वीकार करें कि यह भी मेरी ही एक अवस्था है।

स्वीकृति से ही भीतर की ऊर्जा संतुलित होती है और मन हल्का हो जाता है।


साक्षीभाव (Witnessing)


धीरे-धीरे इंसान यह समझने लगता है कि “मैं” मेरे विचार या भावनाएँ नहीं हूँ, बल्कि उन्हें देखने वाला साक्षी हूँ।

यही आत्मा का पहला अनुभव है जब देखने वाला और विचार अलग दिखाई देने लगते हैं।


ध्यान और मौन (Meditation)


जब मन शांत होता है, तब भीतर का मौन जागता है।

उस मौन में जो सुकून मिलता है, वह किसी परिस्थिति पर निर्भर नहीं होता।

यह वही शांति है जो सदा हमारे भीतर थी, बस मन के शोर में दब गई थी।


 मन की यांत्रिकी कैसे बदलता है बेचैनी में सुकून


मन स्वयं ऊर्जा है।

जब यह ऊर्जा बाहर की इच्छाओं में भागती है, तो बिखर जाती है और इंसान अस्थिर हो जाता है।

लेकिन जब यही ऊर्जा ध्यान, जागरूकता और आत्म-अवलोकन के माध्यम से भीतर लौटती है, तो यह स्थिर और एकाग्र हो जाती है।


जिस तरह शांत झील में साफ़ आसमान का प्रतिबिंब दिखाई देता है,

उसी तरह जब मन शांत होता है, तो उसमें आत्मा का प्रकाश झलकने लगता है।

वही प्रकाश शांति है वही सुकून है।


 शांति की सच्चाई


मन की उदासी कोई दोष नहीं, बल्कि संकेत है 

यह बताती है कि अब भीतर झाँकने का समय है।


बाहर की दुनिया अस्थायी है, पर भीतर की शांति शाश्वत है।

जब इंसान खुद को देखना और स्वीकार करना सीख जाता है, तब बाहरी उतार-चढ़ाव भी उसकी आंतरिक शांति को नहीं डिगा पाते।


“शांति कोई जगह नहीं, बल्कि एक अनुभव है।

जब मन रुक जाता है तब आत्मा बोलने लगती है।”


इंसान को यह समझना होगा कि सुकून खरीदा नहीं जा सकता,

वह तो महसूस किया जाता है 

अपने भीतर लौटकर, खुद से मिलने पर।

जब भीतर और बाहर में संतुलन आता है, तभी जीवन में सच्ची स्थिरता और आनंद खिलता है।

प्यार का भ्रम

 



"प्यार का भ्रम"


प्यार… यह शब्द जितना सरल लगता है, उतना ही जटिल इसकी अनुभूति है। मनुष्य के अस्तित्व का सबसे सुंदर और सबसे खतरनाक भ्रम यही है प्यार का भ्रम।

यह भ्रम न स्त्री का है, न पुरुष का यह मानव मन की वह गहन स्थिति है जहाँ कल्पना, चाहत, अकेलापन, संवेदना और आत्म-प्रत्यय एक-दूसरे में विलीन होकर वास्तविकता का आभास देने लगते हैं।


मनोविज्ञान का दृष्टिकोण


मनोवैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो प्यार का भ्रम (Illusion of Love) एक ऐसी मानसिक अवस्था है जहाँ व्यक्ति दूसरे के प्रति अपने आकर्षण, अपेक्षाओं या भावनात्मक निवेश को ‘सच्चा प्रेम’ समझ बैठता है।

यह भ्रम इसलिए बनता है क्योंकि मानव मस्तिष्क संबंध की आवश्यकता से संचालित होता है।

हर व्यक्ति के भीतर एक अवचेतन भय होता है “अकेले रह जाने का भय।”

जब कोई व्यक्ति थोड़ी-सी सहानुभूति, कोमलता या ध्यान दिखाता है, तब यह भय शांत हो जाता है, और मन उसी क्षण ‘प्रेम का आभास’ महसूस करने लगता है।


कई बार यह प्रेम नहीं, बल्कि भावनात्मक निर्भरता (Emotional Dependency) होती है।

फिर भी मन उसे प्यार का नाम देता है, क्योंकि भ्रम में भी सुकून है, जबकि सत्य में दर्द।


भावनाओं का विस्तार


प्यार का भ्रम इसलिए स्थायी लगता है क्योंकि इसमें भावनाएँ सच्ची होती हैं 

भले ही उनका आधार झूठा हो।

जब कोई व्यक्ति किसी की हर बात में अपना प्रतिबिंब देखने लगता है,

जब दूसरे की मुस्कान अपने हृदय की धड़कन बन जाती है,

तो मन वास्तविकता और कल्पना की सीमा भूल जाता है।


भ्रम की यही सुंदरता है 

यह झूठ होते हुए भी सच्चे जैसा लगता है।

यह एक सपना है, जो खुली आँखों से देखा जाता है,

और जब वह सपना टूटता है, तो व्यक्ति खुद से प्रश्न करता है 

"क्या यह प्यार था, या सिर्फ़ एक भावनात्मक मृगतृष्णा?"


सामाजिक आयाम


समाज में प्यार का भ्रम अक्सर संस्कृति, मीडिया और सामाजिक अपेक्षाओं से भी जन्म लेता है।

फ़िल्में, कहानियाँ और गीत हमें यह सिखाते हैं कि प्यार में सब कुछ सम्भव है 

पर वास्तविक जीवन में प्यार की जगह समझ, सम्मान और धैर्य लेते हैं।


समाज हमें यह नहीं सिखाता कि प्यार का अंत भी शालीनता से हो सकता है।

इसलिए जब प्रेम मुरझाने लगता है, तो लोग स्वीकार नहीं कर पाते कि वह अब प्यार नहीं रहा 

वे भ्रम में जीते रहते हैं, जैसे अब भी वही जादू मौजूद है।


 दार्शनिक दृष्टिकोण


दार्शनिक रूप से, प्यार का भ्रम अस्तित्व की खोज है।

मनुष्य हमेशा किसी ‘दूसरे’ में खुद को खोजता है।

कभी यह खोज आत्मा का विस्तार होती है, कभी एक ग़लत पहचान।

भ्रम में डूबा प्रेम मनुष्य को सत्य की ओर नहीं, सपनों की ओर खींचता है 

फिर भी यही भ्रम जीवन को अर्थ देता है।


क्योंकि सत्य सूखा हो सकता है,

पर भ्रम में रस है, रंग है, कविता है।

कभी-कभी भ्रम ही मनुष्य की सबसे सुंदर सच्चाई बन जाता है।


प्यार का भ्रम किसी की गलती नहीं 

यह मनुष्य की संवेदनशीलता का प्रमाण है।

जिसे यह भ्रम हुआ, वह यह सिद्ध कर देता है कि उसके भीतर अभी भी महसूस करने की क्षमता जीवित है।

पर बुद्धिमत्ता यह नहीं कि हम भ्रम में न पड़ें,

बल्कि यह कि जब हमें उसका आभास हो

तो हम मुस्कराकर स्वीकार करें कि यह भी जीवन की एक सीख थी।


प्यार का भ्रम अंत नहीं, एक अध्याय है 

जो हमें सिखाता है कि सच्चा प्यार तब जन्म लेता है,

जब भ्रम का पर्दा हटता है और हम खुद से प्रेम करना सीखते हैं।


परछाइयों का अंधकार

 परछाइयों का अंधकार


अंधकार में परछाई गायब हो जाती है जैसे किसी का अस्तित्व ही अचानक लुप्त हो जाए। शायद उसी तरह कुछ लोग हमारे जीवन से ओझल हो जाते हैं। वे जो कभी हमारे साथ थे, हमारी मुस्कान में बसे थे, वे धीरे-धीरे हमारी दृष्टि से, और फिर हमारी आत्मा से भी मिटने लगते हैं।


कभी-कभी यह गायब होना अचानक नहीं होता। यह धीरे-धीरे, अनकहे शब्दों और अनसुनी भावनाओं के बीच होता है। जब हम किसी को समझने की कोशिश छोड़ देते हैं, या जब कोई हमें समझना छोड़ देता है वहीं से अंधकार जन्म लेता है।


मनुष्य का मन भी अंधकार की तरह है गहराई में जितना उतरते जाओ, उतनी ही परछाइयाँ मिलती हैं। पर हर परछाई किसी प्रकाश की गवाही भी देती है। शायद इसलिए कुछ लोग पूरी तरह खो नहीं जाते; वे हमारे भीतर की किसी रोशनी में अब भी झिलमिलाते रहते हैं स्मृतियों की लौ बनकर।


अंधकार कभी पूरी तरह स्थायी नहीं होता। जब भी मन के किसी कोने में आशा की किरण जलती है, वे परछाइयाँ फिर लौट आती हैं कभी एक आह बनकर, कभी एक मुस्कान में घुलकर।

अंधकार और विश्वास

 स्त्री और पुरुष : अंधकार और विश्वास


जीवन का मार्ग हमेशा सीधा, उजला और सरल नहीं होता। हर इंसान चाहे वह स्त्री हो या पुरुष किसी न किसी समय अंधकार से होकर गुजरता है। यह अंधकार कई रूपों में सामने आता है भय, असफलता, टूटे हुए सपनों, खोए हुए रिश्तों या आत्म-संदेह के रूप में। कभी यह हमारे बाहर होता है, और कभी भीतर विचारों, भावनाओं और उम्मीदों के बीच। यही अंधकार हमें परखता है, हमें कमजोर करता है, परंतु इसी के बीच विश्वास का जन्म होता है।


विश्वास, वह शक्ति है जो जीवन के सबसे कठिन क्षणों में भी हमें थामे रखती है। स्त्री के भीतर यह विश्वास अक्सर ममता, धैर्य और करुणा का रूप लेकर प्रकट होता है। वह आँसुओं के बीच भी मुस्कुराना जानती है, टूटे हुए सपनों के बीच भी उम्मीद बुनना जानती है। वही विश्वास उसे माँ बनाता है, प्रेमिका बनाता है, एक ऐसी शक्ति बनाता है जो जीवन को पोषित करती है।


पुरुष के भीतर यह विश्वास दृढ़ता, साहस और जिम्मेदारी के रूप में प्रकट होता है। जब परिस्थितियाँ उसके विरुद्ध होती हैं, तब भी वह खड़ा रहता है न केवल अपने लिए, बल्कि अपने प्रियजनों के लिए। उसका विश्वास उसे आगे बढ़ने, संघर्ष करने और गिरकर भी फिर उठ खड़े होने की प्रेरणा देता है।


विश्वास का अर्थ यह नहीं कि जीवन में संघर्ष नहीं होगा। इसका अर्थ यह है कि चाहे रास्ते कितने ही कठिन क्यों न हों, हम उन्हें पार करने का साहस रखते हैं। यह वह ज्योति है जो अंधकार के बीच रास्ता दिखाती है छोटी सी लौ, पर इतनी गहरी कि पूरी रात को मात दे सके।


अंधकार हमेशा यह कहने की कोशिश करता है “तुम अकेले हो।”

पर विश्वास, एक शांत और स्थिर स्वर में उत्तर देता है “नहीं, तुम कभी अकेले नहीं थे।”

जब कोई स्त्री अपने भीतर की शक्ति को पहचानती है और हार मानने के बजाय प्रेम को चुनती है, जब कोई पुरुष भय के बजाय आशा को थामता है तब मानवता का हर कोना थोड़ा और प्रकाशित हो उठता है।


स्त्री और पुरुष, दोनों ही जीवन की इस यात्रा में प्रकाश के वाहक हैं। एक की करुणा और दूसरे की दृढ़ता मिलकर उस ऊर्जा को जन्म देती है जो हर अंधकार को पराजित कर सकती है। जब दोनों एक-दूसरे का विश्वास बनते हैं, तब जीवन का अर्थ और भी गहरा हो जाता है।


अंततः, अंधकार उतनी ही देर तक रहता है, जितनी देर तक हम उसे अपने भीतर रहने देते हैं।

विश्वास जो स्त्री के हृदय की कोमलता और पुरुष की आत्मा की स्थिरता से जन्मता है वही वह अमर प्रकाश है, जिसे कोई भी अंधकार मिटा नहीं सकता। 

मिलन की धुंध

 "मिलन की धुंध"


कभी भी मेरी दुनिया में कदम मत रखना।

एक बार तुम मेरी दुनिया में आए,

और तुम्हारा दिल मेरा हो गया

अब तुम वापस नहीं जा सकते।

हर रास्ता, हर छुपने की जगह,

सिर्फ़ मुझे ही तुम्हें पकड़ने का इंतज़ार करती है।


मैं तुम्हें अपने भीतर कैद कर लूंगा।

प्यार की लहरें तुम्हें घेरेंगी,

हर साँस तुम्हारे भीतर मेरी चाहत की आग जगाएगी।

हमारे मिलन की धुंध, हमारी आग,

आसमान को रंगों और धुएँ से भर देगी,

जैसे कोई तूफान खुद को अपनी शक्ति में समेटे।


तुम्हारी आत्मा अब न तो स्वतंत्र है, न शांत।

एक मूक शिकारी की तरह,

हर पल का स्वाद चखती है,

हर सुख और पीड़ा को अपनी मांसपेशियों में महसूस करती है।

और मैं हर पल तुम्हें महसूस करता हूँ,

तुम मेरी धड़कनों में, मेरी साँसों में,

मेरे विचारों में घर कर चुके हो।


भागने की कोई जगह नहीं।

चाहे मैं खुद को रोकूँ, चाहे मैं खुद को आज़ाद समझूँ,

तुम मेरी हर सोच, मेरी हर कल्पना,

मेरे भीतर के हर कोने में मौजूद हो।

तुम मेरे हिस्से बन गए हो

हमेशा, अनंतकाल तक।


तुम अब केवल मेरे भीतर नहीं,

तुम मेरी हवा, मेरी आग,

मेरे हर एहसास का हिस्सा हो।

और मैं जानता हूँ,

कि चाहे मैं कितना भी चाहूँ, तुम्हारे बिना अधूरा रहूँगा।