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Friday, January 30, 2026

प्रेम और प्रेमी...

 पाठ 1


मेरी__प्रीति 


मेरे पास जो सबसे अच्छे शब्द हैं,

#प्रीति वो तुम्हारे जुड़े से आए है,, 

मेरे पास जो सबसे अच्छे दोहे हैं,

#प्रीति वो तुम्हारे कंगन से बने हैं,,

मेरी सबसे अच्छी पंक्तियाँ,

#प्रीति तुम्हारे गले के हार से बनी है ,

जो खूबसूरत शेर मैं कह पाता हूँ 

#प्रीति तुम्हारे झुमके से निकलते हैं, 

मेरी सबसे खनकती गजलें, 

#प्रीति तुम्हारी छमछम करती पाजेब से होती है,

मेरे सबसे नाजुक लेख,

#प्रीति तुम्हारे साफ उज्ज्वल बेदाग चरित्र से प्रफुल्लित होते हैं, 

मेरे पास जो सबसे अच्छी कविताएँ हैं,

#प्रीति वो तुम्हारी नजाकत भरी अदाओं से मेल खाती है, 

#प्रीति तुम पर लिखे मेरे 

#ये_शब्द_शेर_नज्म_गजलें_कविताएं_महाकाव्य

इस उम्र में मेरी ऐनक बनी है,,, 

जब मै दो इंच भी नहीं देख पाता हूँ तब

#प्रीति तुम्हारे रुपयौवन से सजी यही कविताएँ, 

मुझे दिखाती हैं 

#प्रीति तुम्हारी आंखों में सजी ओस की बूंद 

#प्रीति बर्फ सी शीतल तुम्हारी काया, 

#प्रीति गुलाब के पंखुडीयों से तुम्हारे लब, 

#प्रीति पक्षियों सी चहचहाहट करती तुम्हारी मधुर आवाज़ 

#प्रीति तितलियों सी खुलती बंद होती तुम्हारी पलकें

यही ग़ज़लें, तुम्हें बताती हैं 

यही कविताएँ, तुम्हें दिखाती हैं 

मेरा तुम्हारे प्रति #निश्छल_निस्वार्थ_प्रेम.....

#प्रीति वो प्रेम_पत्र जो तुम्हारे लिए लिखे गए,

मगर तुम्हें खोने के डर से तुम तक कभी पहुचाएं नहीं, 

इन्हीं कविताओं में तुम देखोगे 

#प्रीति तुम्हारा मान, #प्रीति तुम्हारा सम्मान,

#प्रीति तुम्हारे सौंदर्य की स्वर्णगाथा, 

#प्रीति तुम ही हो मेरी सोच मेरी प्रेरणा, 

मेरे जीने का जज्बा,,

जो मेरे शब्द शेर नज्म गजलें कविताएं को 

प्रेरित करती हैं....... 

#प्रीति तुम ही तुम मेरे इस जहाँ में हो 

और यही मेरी #संपत्ति है, यही मेरी दुनिया है..

#मेरी_प्रीति...


पाठ 2...

#प्रीति तुम वो हो जिसे देखकर मुझे सकुन मिलता है,,


#प्रीति तुम वो हो जो मेरे दिल और दिमाग दोनों में बसे हो,,


#प्रीति तुम वो हो जिससे बात करके मैं कभी बोर नहीं होता हूं,,


#प्रीति तुम मेरी ताकत भी हो और कमजोरी भी हों,,


#प्रीति तुम वो हो जिसे मैं कभी खोना नहीं चाहता हूं,,


#प्रीति तुम वो हो जिसे मैं हमेशा अपने साथ रखना चाहता हूं,


#प्रीति तुम वो हो जो मेरे रोम रोम में संचार करते हों,,


#प्रीति तुम वो हो जो मेरे दिल को धड़कनों के रूप में स्पंदन करते हो,, 


#प्रीति तुम बस तुम सिर्फ तुम हो क्योंकि मुझे तुमसे जो मिला है, जब भी इसका ख्याल आता है तो खुशी से पागल हो जाता हूं, बावला हो जाता हूं,, मैं अनंत तक नाचते रहता हूं उत्सव में....!


#प्रीति तुम्हारा गुणगान करते रहता हूं। तुम्हारी तस्वीर देखकर नतमस्तक होते रहता हूं। जब तुम्हारे तस्वीर के सामने नतमस्तक होता हूं तो यह अभास होता है कि मेरे आस-पास कहीं ईश्वर है और फिर किसी शख्स का, दुनिया का, समाज का, भय पैदा ही नहीं होता...!!


#प्रीति यह साहस, यह हिम्मत मेरे अंदर सिर्फ तुम्हारे प्रेम से होती है, कि जो तुमने दिया है, वह इतना ज्यादा है और बिना कारण दिया है....!!!


#प्रीति न मेरी कोई योग्यता है, न मेरे पास कोई लौटाने का उपाय है... अनंत है, चिरकाल है, शुन्य से लेकर ब्रम्हांड तक है, उस उम्र से लेकर इस उम्र तक मेरे जीवन में जो भी है 

#प्रीति..... वो बस तुम्हारा प्रेम है....


पाठ 3...


#प्रीति कई नज्म कई शेर कई गजले तुम्हारे लिये,,

मैंने इस साल लिखे....

#प्रीति तुम्हारी उलझी हुई जुल्फों में,,,

अपने अधूरे खयालात लिखे...

#प्रीति कुछ शिकायतो के दिन लिखे.. 

कुछ महीनो के प्यार लिखे...

#प्रीति कुछ तुम्हारी शरारते लिखी..

 कुछ अपने अंदाज लिखे....

#प्रीति जीवन के कई पहलु को नये रंग में सजाने,

तुम्हारी पलकों की कोर में अटके काजल की छटाओं

 को,, रंगे आफताब लिखे... 

#प्रीति तुम्हारे उलझे हुए सवालों के कई सुलझे हुए जवाब लिखे... 

हया के रंग लिखे,,, अदाओं के तेवर लिखे.... 

#प्रीति मैने जब भी लिखे 

 तुम्हारी खुबसुरती के नक्षबिंदु लिखे.... 

कई नज्म, कई शेर, कई गजले, तुम्हारे लिये 

हाँ.... #प्रीति मैने इस साल लिखे तुम्हारे लिए लिखे....


मैं वो किताब हूँ..... लिखा है जिसके

पहले पन्ने पर #प्रीति और आखिरी पन्ने पर #प्रीति...

बीच के 

किसी एक पन्ने पर #प्रीति के खामोश एहसास है,,

किसी एक पन्ने पर #प्रीति की चुलबुली ख्वाहिशें हैं,, 

किसी एक पन्ने पर #प्रीति के हुस्न का जादू है,,

किसी एक पन्ने पर #प्रीति के कर्ण मधुर आवाज का संगीत है,,

किसी एक पन्ने पर #प्रीति के घने काले जुल्फों की गाथा है,,

किसी एक पन्ने पर #प्रीति के सुराहीदार गर्दन की व्याख्या है,,

किसी एक पन्ने पर #प्रीति के मृगनयनों की परिभाषा है,,

किसी एक पन्ने पर #प्रीति के मुस्कुराहट की दाहोदिशा है,,

किसी एक पन्ने पर #प्रीति के खिलखिलाहट की शैली है,,

किसी एक पन्ने पर रुप की देवी #प्रीति का काव्य संग्रह है,,

किसी एक पन्ने पर #प्रीति के मिठे एहसास हैं,,

किसी एक पन्ने पर #प्रीति का अतीत है,,

किसी एक पन्ने पर #प्रीति का भविष्य है,,

जब सब लिखकर भी मन नहीं भरा और लगा कि 

अभी तो कुछ भी नहीं लिखा है तो

आखरी पन्ने पर लिख दिया #प्रीति....


पाठ 4...


#प्रीति जानते हो तुम...

मैं जितनी भी कहानियां, कविताएं लिखता हूं...

सबका आधार, प्रेम, आनंद, सकुन का शीर्षक 

#प्रीति बस तुम को लिखता हूं....

मेरे जीवन पटल पर मैं उन्मुख जब भी रहता हूं 

मेरे जीवन के सार का शीर्षक बस 

#प्रीति तुमको लिखता हूं....

लिखता हूं मैं वो सब जो कभी समक्ष ना 

आने के कारण मैं तुमसे कह ना सका 

मेरी हर अनकहे प्यार का हकदार 

#प्रीति मैं सिर्फ तुमको लिखता हूं....

मेरे शून्य में निहारते नैनो से निर्झर बहते 

अश्रु संग आती आंखों में चमक को

#प्रीति मैं सिर्फ और सिर्फ तुमको लिखता हूं 

मेरे जीवन के प्रेम आधार का शीर्षक

#प्रीति मैं बस तुमको लिखता हूं.........

जो पढ़ रहे है मुझे वो अपना ख्याल रखे,

मैं लाख बुरा सही ज़माने की नज़र में,

फिर भी मैं अपनी दुआओ में

#प्रीति बस तुमको लिख रहा हूं।।


मैं अहंकारी इतना की एक बार कोई दिल से 

उतर गया तो मैं उसके तरफ देखूं भी नहीं,,

और प्रेमी इतना की झूककर #प्रीति के पैर छू लेता हूं।


मैं जिसे भुख तक बर्दाश्त नहीं होती,,

#प्रीति के लिए मैने करवा चौथ भी रखता हूं।


मेरी ग़लती होने पर भी मैने किसी से माफी नहीं मांगी,

पर #प्रीति के आगे बिना गलती के हाथ जोड़कर खडा होता हूं।


मुझे सही से अपने शर्ट का क्रिच भी बनाना नहीं आता,

मगर बखूबी बनाता हूं मैं #प्रीति के साड़ी की प्लेट।


मैं आज भी सागर से गहरा प्रेम करता हूं,

बस #प्रीति नाम की माला जपकर मैं अपना जीवन समर्पित करता हूं....


पाठ 5...

जलते_तपते जीवन में....

#प्रीति शीतल_मधुर छाँव हो तुम...

.

पलकों की पगडंडियों पर ....

#प्रीति सपनों का गाँव हो तुम...

.

चिलमिलाती धूप में....

#प्रीति घडे का थंडा पानी हो तुम....

.

जुनून हो तुम सुकून हो तुम...

#प्रीति रूह में जान होती हैं जब साथ होती हो तुम...

.

अब भी पूछते हो मुकाम अपना....

कह तो दिया 

#प्रीति धडकनों का स्पंदन हो तुम...

.

तुम्हारा अक्स आंँखों में बस गया है कुछ ऐसा...,

ईश्वर के सजदे में आँखें बंद करता हूँ तो 

#प्रीति ईश्वर में भी दिखते हो तुम...

.

जिसे मैने अपनी जान का दर्जा दे रखा है

सुनो #प्रीति... #मां के बाद दूसरी औरत हो तुम.....


समर्पित है मेरा प्रेम #प्रीति तुम्हारे चरणों में बस.....

गुज़ारिश है ईश्वर से इस प्रेम का कभी अंत ना हो,

और प्रेम कितना किसको मिला इसका कभी हिसाब ना हो,

प्रेम कोई सौदा नहीं जो पुरा मिले तो ही अपनाना हो,

प्रेम तो एक अनुभूति हैं जो अधूरी रहकर भी 

पुरे जीवन का वज़न बन जाती है,

और शायद इसीलिए प्रेम सबसे महंगा शौक़ नहीं,

सबसे ईमानदार इम्तिहान होता है,

प्रेम का अर्थ है_ 

एक मुक्त जीवन, सभी मोह से मुक्ति,

एक भरोसा, एक जिम्मेदारी, 

और प्रेमी का अर्थ है_

सभी स्वतंत्रता के बाद भी अपने प्रेम के बंधन में बंधे रहना,,, 

जिनको प्रेम पर विश्वास है हिसाब उनके लिए नहीं है,

 जिनको विश्वास नहीं है हिसाब उनकी तरकीब है,

 जिनको प्रेम पर विश्वास है वो चल पड़ते हैं,  

छोटी सी रोशनी भी उन्हें उनकी मंजिल पर पहूंचा देती है,

 जिनको विश्वास ही नहीं है वो ज्ञान में डूबे होते हैं, 

बडे अंधकार का हिसाब लगा लेते हैं, उनको अंधकार घबरा देता है , पैर डगमगा जाते हैं, 

प्रेमी बनो ज्ञानी नहीं, प्रेम बिना जो ज्ञान आता है 

वो सब नफा नुकसान से भरा कुडा करकट है,,,

प्रेमी बनकर जो ज्ञान मिलता है आ..हा.. उसकी बात ही और है, निस्वार्थ...निश्छल....निष्कपट.....

मैं तो कहता हूं ___

प्रेम में जो चल पड़ा पहूंच गया, यह ज्ञान की नहीं प्रेम पर विश्वास कि बात है...


#प्रीति मेरे होश और हवास पे 

छा गए हो तुम।

किस कदर मुझको अपना 

बना गए हो तुम।।


#प्रीति मैं तुम्हारे अलावा कुछ 

सोच नहीं पाता।

इस कदर मेरे दिल में 

समा गए हो तुम।।


#प्रीति गुलाबों की महक भी 

फीकी सी लगती है।

ये कौन सी खुशबू मुझमें 

बसा गए हो तुम।।


#प्रीति जिंदगी क्या है 

तुम्हारी चाहत के सिवा।

ये कैसा ख्वाब मेरी आँखों को 

दिखा गए हो तुम।।


#प्रीति मेरे होठों पर रहता है 

तुम्हारा ही जिक्र।

जबसे तुम्हारे माथे को 

मेरे होंठों से लगा गये हो तुम....


पाठ 6...


#प्रीति तुम मेरे लिए ईश्वर की सबसे सुंदर रचना हो!

#प्रीति तुम मेरे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हो!

#प्रीति तुम, मेरे दिल का आईना हों!

#प्रीति तुम, मेरे लिए अकेलेपन का एकांत हो!

#प्रीति तुम, मेरी आत्माओं का झरोखा हो!

#प्रीति तुम, मेरे जीवन की शोभा हो!

#प्रीति तुम मेरे लिए भगवान का सबसे

 कीमती उपहार हो!

#प्रीति तुम मेरे दिल का स्पंदन हों!

#प्रीति तुम मेरे जीवन का ऑक्सीजन हों!

#प्रीति तुम मेरे रोम-रोम का सुकुन हो!

#प्रीति मेरी खुशी हो या उदासी, 

तुम हमेशा साथ निभाती हो!

#प्रीति मेरी खुशी तुम्हारे आंखों से व्यक्त होती है!

#प्रीति तुम्हारे दुख मेरी आंखों से व्यक्त होते हैं!

जब मुझे #प्रीति तुम पर प्यार आता है तो 

मैं इसे व्यक्त करने के लिए अपने अंतस्थ से मोतियों

से शब्द को चुनकर तुम्हारा श्रिंगार करता हूं, लेकिन

 #प्रीति मेरी आंखें तुम्हारे प्रति मेरे प्यार को

जगजाहिर कर देती है!

#हां_प्रीति.. मंत्रमुग्ध कर देने वाले तुम्हारे मुखड़े को

जब भी एक टक देखता हूं बावला हो जाता हूं !

#हां_प्रीति.. तुम्हारा मुखड़ा जब रेशम सी जुल्फों में

छुप जाता है तब वो मुझे ईश्वर से अवगत कराता हैं!

मुझे पढ़नेवाले मुझे #प्रीति तुम्हारा 

दीवाना या पागल कहते है!

#प्रीति मेरा रोम-रोम अभिव्यक्ति की मशीन हैं 

जो तुम्हारे प्रति मेरी सभी भावनाओं को व्यक्त करती हैं!

#प्रीति तुम मेरे लिए ब्रम्हांड की असली खूबसूरती हों!

दुनिया में सात आश्चर्य है, #प्रीति तुम्हारे नाम के भी अनगिनत लोग हैं लेकिन ईश्वर के हाथों तराशी गई 

#प्रीति तुम मेरे जीवन का अद्भुत आश्चर्य हो !

#प्रीति तुम मेरे जीवन का सबसे अभिव्यंजक हिस्सा हों!

 मेरे लिए ईश्वर के हाथों बनी सबसे आश्चर्यजनक 

अद्भुत अद्वितीय अकाल्पनिक अचंभित रचना 

#प्रीति तुम हो!


प्रेम क्या है?

कुछ नहीं है बस, 

हथेलियों के बीच छुपे 

#प्रीति तुम्हारे मुख की महिमा है।


प्रेम जादू है,

दो होठों का स्पर्श हैं, 

#प्रीति तुम्हारे अटूट आशा और 

विश्वास की गरिमा है।


प्रेम क्या है?

तृषित अनुराग है, समर्पण से भरा है,

#प्रीति तुम्हारे शीतल सम्मोहन की 

काव्याक्षरा है।


प्रेम तुम्हारी मौन स्वीकृति है,

मेरी योग्य निष्कृति है,

प्यार मैं हूं, प्यार तुम हो,

विरहिनी शीत ऋतु में, 

#प्रीति तुम्हारे स्पंदनों का आसरा है।


प्रेम शायर है, कविता है प्रेम,

दूरियों के गणित में मिलने का जोड़ है,

अनमोल है, अबोल है, 

#प्रीति तुम्हारा ये प्रेम बेजोड़ है।


#प्रीति तुम्हारे बिना मैं जीवन के 

रहस्यों को नहीं जानता था,

केवल जीवन की 

सतह को ही जानता था।


जैसे-जैसे प्रेम का #प्रीति में ध्यान गहरा हुआ है, 

वैसे-वैसे मैंने पाया मेरे भीतर #प्रीति तुम्हारा 

एक अपूर्व सौंदर्य लहरे ले रहा है।

#प्रीति इतना सौंदर्य तुमने उंडेल दिया की

मेरा सारा जगत सुंदर हो गया है।


पाठ 7...


#प्रीति मेरे पास पैसा नहीं है,

मै तुम्हे आभूषण से नहीं सजा सकता,

लेकिन मेरे पास कागज और कलम है,

और साथ में अथाह और निस्वार्थ प्रेम है,

जिससे #प्रीति मैंने तुम्हें वो रूप दिया है कि 

सुरज निकालने से पहले जिसके दीदार के लिए

इन्द्र को भी इस धरा पे आना पड़ता है,

#प्रीति अप्सराओं को भी अपने यौवन पर 

शर्माना पड़ता है,

#प्रीति मैने तुम्हे सजाया है अपने शब्दो से,

रस, छंद, अलंकार और वर्तनी से,

क्योंकि #प्रीति मै तुम्हारे प्रेम में डूबा

एक साधारण इंसान हूं,

ये टुटे फुटे शब्द ही मेरी पूंजी है,

#प्रीति तुम्हारे प्रति पागलपन ही मेरी धरोहर है,

#प्रीति मेरे अंदर तुम्हारे लिए असीम शक्ति है,

#प्रीति उस सूर्य ने भी अपनी सुबह की 

पहली किरण के लिए तुम्हारे रुप यौवन से तेज चुराया है,

#प्रीति एक स्वर्ग आरक्षित हैं तुम्हारे लिए इस नीले अम्बर में,

बस #प्रीति तुम पर लिखा है और #प्रीति तुम को ही पढ़ा है,

मूल्य #प्रीति तुम्हारा दिया तो #प्रीति तुम्हारा ब्याज ही बढ़ा है 

अब मन में #प्रीति तुम्हारी अथाह निधियां है 

तिजोरी अथाह सुकुन से मेरी प्रिय #प्रीति ने ऐसी भरी हैं

बस #प्रीति ही मेरी संपत्ति है #प्रीति ही मेरी धरोहर है।।


किसी ने मुझसे पुछा_

तुम इतना लिखते हो,,

#प्रीति_प्रीति करते हो,,

तुम्हारी जिंदगी में #प्रीति का 

वजूद या अस्तित्व क्या है...??


#प्रीति तुम्हारे लिए ज़रूरी है 

या फ़िर तुम्हारी ज़रूरत ...??


कई बार मेरे भी मन में आता है

कि मैं इसका क्या नया जवाब दूँ...

क्योंकि बहुत बार ज़वाब इसका दिया है,,

मैं जानता हूं मैं कितना ही #प्रीति के

बारे में बताऊं,, कितना ही प्रीति पर लिखूं, 

लेकिन लिखते वक्त जब मेरा लिखा ही

मैं पढ़ता हूं तो ऐसा लगता है

#प्रीति पर मैंने बस एक कतरा लिखा है,

पुरा समुंदर बाकी है फिर भी 

आज फिर से मैं एक छोटा सा 

प्रयास कर रहा हूँ ...

तुम्हारे साथ साथ बहुत लोगों का

यह सवाल होता है, जिसका जवाब 

कविता में समझा रहा हूँ..


आसान नहीं है #प्रीति के एहसास को 

शब्दों में पिरो पाना..

मगर फ़िर भी एक कोशिश 

नाकाम कर रहा हूँ...


#प्रीति मेरे लिए 

सुकून का वो झोंका है 

जिसमें मैं अपनी पीड़ा भूल 

कुछ पल जी खोल के 

मुस्कुराता हूँ , बेपरवाह होकर....

जैसे जिंदगी में 

सब बिल्कुल वैसा है जैसा

मैंने सोच रखा था 

ख़्यालों की दुनियाँ में...


#प्रीति मेरे लिए

बरसात की चंद बूँदें है 

जिसमे मेरा रोम - रोम भीगता है

 कितनी ही अतृप्त इच्छाएं

तृप्त हो जाती है और नई

कल्पनाओं के अंकुर विस्फूटित 

होकर कोमल फ़ूल 

प्रमुदित हो खिलखिलाते हैं 

सदाबहार से ....


#प्रीति मेरे लिए 

वो खूबसूरत लम्हा है 

जो गुज़र कर भी गुजरता नहीं है

मुझमें ही कहीं लहरों सा उमड़कर

शांत जम सा जाता है..

कितनी ही बाँतें , अनमोल

यादों के क्षण अनायास ही 

जुड़ते चले जाते हैं 

मुझे सांत्वना देने के लिए.....


#प्रीति मेरे लिए

एक सुंदर सपने का संसार है 

जिसमें सबकुछ जीवंत है

प्यार का मीठा झरना बहता है

जहां कटुता, कसैलापन 

और किसी के लिए मन में

बुरी भावना नहीं है , 

उस स्वप्न सागर में नौका 

विहार का सुख #प्रीति से ही तो

मिलता है ,जहाँ प्रेम नदी

बिन किनारे के 

बस बहती है निरंतरता लिए....


किसी ने मुझसे पुछा___

मैंने देखा है आपकी हर पोस्ट #प्रीति पर होती है,,

कभी #प्रीति पर तारीफ लिखते हो,,, 

कभी #प्रीति की याद में अश्कों को पिरो जाते हों, 

कभी उच्च कोटि के ब्रम्हांडीय शब्दों से 

#प्रीति को नवाजते हो,, 

पर कभी #प्रीति को लेकर कोई मजाक, 

जोक्स नहीं करते हों,,,,,

प्रेम तुम ऐसे कैसे हो,,,

ऐसा क्या है #प्रीति में...?

जब भी कुछ लिखते हो,, 

जब भी कुछ बात करते हो

हर बात में #प्रीति को लेकर आते हो...


मैंने कहा ___

प्रेम ऐसा ही है ।

दिन निकलते ही #प्रीति पर ग़ज़लें...

दोपहर होते-होते #प्रीति पर शेर…

शाम होते-होते #प्रीति पर ग्रंथ....

और रात होते-होते #प्रीति पर महाकाव्य

लिख सकता है ....

जिसका रोम_रोम तक मुझे ज़ुबानी याद है...

#प्रीति मेरी बातों में,, #प्रीति ही मेरी आंखों में,,

ज़र्रे ज़र्रे में #प्रीति है,,, जिधर नजर घुमाता हूं 

हर जगह बस #प्रीति ही #प्रीति होती है क्योंकि 


#प्रीति मेरा #वजूद है कोई #भद्दा_मज़ाक थोड़ी हैं.....!!

#प्रीति मेरी पूरी #कायनात है मात्र एक #स्त्री थोड़ी हैं....


#प्रीति सुर्ख_आँखें...नंगे_पांव...

 बिखरी_जुल्फें..ताजमहल_सा_बदन

मैने रंग दिया दिल का हर कोना #प्रीति 

तुम्हारी खूबसुरती से,

मेरी धडकनों से,

मेरे मस्तिष्क के नसों से,

#प्रीति तुम्हें याद करके आँखों में आते आँसुओं से,

कानों में गुंजती #प्रीति तुम्हारी मधुर आवाज़ से,

मेरी परछाई में दिखते #प्रीति तुम्हारे एहसास से,

मेरे रोम_रोम में लहराते #प्रीति तुम्हारे तरंगों से,

#प्रीति तुम्हें छुने को बेताब स्पंदन करती मेरी साँसों से

पूछो••••••••

सुकुन किसे कहते हैं.....!

क्योंकि कण_कण से #प्रीति तुम्हारी खूश्बु आती हैं,,,, 

जर्रे_जर्रे में #प्रीति तुम नजर आती हों,,, 

कस्तुरी बन महकती है साँसें मेरी कुछ इस तरह,,,, 

मेरे रोम_रोम में #प्रीति तुम निखार लाती हों....!

अब हर वक्त #प्रीति तुम्हारे इतने नशें पीने के बाद 

मेरे रोम-रोम में अठखेलियाँ करती 

#प्रीति तुम्हारी नटखट_अदाएं देख कर 

दिल से निकली गजल कहू,,

या रुह पर रक्स करते तुम्हारी अदाओं से 

निकले शेर पढुं,

या जग की चिंता छोड़ अपनी ही धुन में

इश्क़ कैसे निखार लाता है

यह बस.... #प्रीति तुम्हारी आंखों में आंखें डालकर 

देखता रहु....





प्रेम और प्रेमी

 पाठ 1

इस कदर वाकिफ है, 

मेरे जज्‍बातों से मेरी कलम, 

मैं “प्रेम” भी लिखना चाहूँ तो 

“#प्रीति” लिख जाता हूं,,

#प्रीति पारस की तरह है,

#प्रीति सिर्फ मुझसे इश्क नहीं करती,

#प्रीति मेरे दिल में बसती है,,

मेरे साथ जिस रिश्ते में भी #प्रीति जीती है,,

उस रिश्ते को सकुन आनंद ख़ुशी हंसी

अल्हड़पन, नटखटता, संजिदगी से 

भर देती है..... क्योंकि मेरे जीवन में 

#प्रीति रंग हैं, #प्रीति चित्र है, 

#प्रीति हिज्र है, #प्रीति संग है, 

#प्रीति अल्हड मस्त मलंग है,,,

#प्रीति धूप है, #प्रीति शाम हैं, 

पाती पाती #प्रीति का नाम है,,

#प्रीति दिन है, #प्रीति रात हैं, 

#प्रीति अहसास हैं, #प्रीति जज़्बात है,,

#प्रीति प्याले में छलका जाम है,,

#प्रीति अनमोल दिल का रूआब है,,

मैंने कभी कंकर पत्थर जमा करने में

अपना जीवन व्यतीत नहीं किया इसलिए 

ना करना मेरे जीवन में #प्रीति का हिसाब, 

#प्रीति मेरे जीवन का शुद्ध सौ कॅरेट का

अनमोल हीरा हैं,, अनमोल हीरा है...

👏༺꧁ #प्रीति_ही_परमात्मा_है ꧂༻👏

           *********************

              


मौन हुँ,

निःशब्द नहीं,

भीतर की आवाज हुँ,

गूँजता नहीं हूं...


जज़्बाती हुँ,

मगर कहता नही हूं,

झूठ का कभी

मैं साथ लेता नहीं हूं,


पहल नहीं करता हूं 

कभी खूद को सच्चा बताने की

लेकिन #प्रीति के चरणों में 

नतमस्तक होने से 

डरता भी नही हूं....


पाठ 2...

यूं तो मुद्दे और मसले बहुत हैं दिमाग की खूराक को

 मगर, दिल को..... #प्रीति का ही ज़िक्र सबसे ज्यादा अजीज़ है... क्योंकि मैं जीवन में जब कभी उस पड़ाव पर पहुंचा हूं, जहां प्रेम और समाज में से किसी एक को चुनना पड़ा, तब कुछ पल मन को शांत कर लिया...चिंतन किया... आंखें बंद करके विचारना की.... मन जब शांत हुआ तब #प्रीति ही मुझे सर्वोत्तम विकल्प लगी.... क्योंकि मैं जानता हूं यदि मैं मर भी गया तब भी कभी

समाज को संतुष्ट नहीं कर पाऊंगा.. और जब #प्रीति को चुना तो शुरवात में बहुत चुनौती आई... लेकिन फिर जैसे जैसे #प्रीति में मन रमता गया जिंदगी बहुत आसान हो गई, #प्रीति की अदाओं को अपने नेत्रों में समा लेना, #प्रीति पर शायरीयां करना, #प्रीति को निहारना रोजमर्रा का काम हो गया और जब भी #प्रीति पर लिखा दिल के किसी कोने से आवाज आती थी जो भी #प्रीति पर लिखा है अच्छा लिखा है पर कम लिखा है और बरसों से #प्रीति पर लिखते रहने के बाद भी आज भी 

नहीं बांध पाता हूं मैं #प्रीति को शब्दों में

जब भी मैं प्रयत्न करता हूं #प्रीति को लिखने की

हर अक्षर #प्रीति के समक्ष बौने प्रतीत होते है,

#प्रीति होती है मेरे समीप जब मैं झांकता हूं मेरी ही आंखों में, टटोलता हूं जब अपने हृदय को #प्रीति रुप का तेज ऐसे बिखरता है जैसे समस्त ब्रह्मांड में #प्रीति से सुंदर कुछ भी नहीं है, मेरे अक्षर #प्रीति में कहीं विलीन हो जाते हैं, #प्रीति को देख रह जाती है स्तब्ध मेरी तूलिका और झंकृत होने लगता है एक प्रणय संगीत हृदय में, और हर क्षण बंध जाता हूं मैं #प्रीति की दिव्यता में, किंतु कितना भी लिखूं, कितना भी कहूं नहीं बांध पाता हूं मैं #प्रीति के तेज़ को अपने टूटें फ़ूटे शब्दों में।


पाठ 3...


कलम हाथ में लिए मैं यूं ही बैठा था

शब्दों का इंतजार करते हुए तब

मम्मी की पुरानी बातें याद आ गई और

मैं मम्मी की बातों को याद करते हुए

मम्मी की पुरानी बातों में खो गया,,,

मुझे याद आया कि 

मेरी मम्मी अक्सर कहती थीं

"लल्ला! अपना कीमती सामान 

एक जगह मत रखो, अलग अलग रखो 

कुछ गुम गया तो दुख थोड़ा कम होगा।"


और फिर एक दिन मम्मी इस

दुनिया से चल बसी, फिर

मम्मी की वो बातें याद आने लगी,

भरा-पुरा परिवार होने के बावजूद

एक कमी सी लगने लगी,,

फिर मेरे जीवन में #प्रीति आई,

मम्मी की वो बातें याद आई कि

लल्ला अपना कीमती सामान

एक जगह मत रखो, अलग अलग रखो

और मेरे पास सबसे कीमती सामान

मेरा स्वाभिमान मेरा प्रेम था, 

जो निस्वार्थ, निश्छल और निष्कपट था,

फिर उस प्रेम को अलग-अलग लोगों में बांटने

के बजाए मैंने #प्रीति में ही सब रिश्तों को 

संजोकर देखने लगा,

कभी मां, कभी बहन, कभी बेटी,

 कभी सहेली, कभी प्रेमिका...

#प्रीति के प्रति दिवानगी इतनी बढ़ने लगी

की उसके सामने सारी दुनिया

बौनी लगने लगीं,,

और फिर मैंने अपने प्रेम को 

जैसे मम्मी ने कहा था वैसा

थोड़ा थोड़ा 

सब #प्रीति के हिस्सों में बांट दिया

कुछ मां के हिस्से,

कुछ बहन के हिस्से,

कुछ बेटी के हिस्से,

कुछ सहेली के हिस्से और 

एक हिस्सा प्रेमिका के लिए

और धीरे धीरे मैं अपने हिस्से कुछ ना रख सका,,


बाकी जो भी बचा #प्रीति को दे दिया 

तुम सोच भी नहीं सकते कि 

वह सबसे बड़ा हिस्सा था 

मेरे मन का वह हिस्सा 

जो #प्रीति के नाम लिखा था 

वह अनमोल था।

दुनिया की सारी दौलत 

उस हिस्से से कमतर थी मेरे लिए... 

फिर एक दिन मेरी सबसे बड़ी दौलत 

 मेरा सबसे कीमती सामान

 कहीं ग़ुम हो गया,

दुनियादारी के रस्मों रिवाजों में खो गया,,,

#प्रीति ने अपने इर्द-गिर्द इतनी भीड़ बना ली

जिसमें मैं नजर ही नहीं आ रहा था,

और अचानक #प्रीति भीड़ में खो गई।

 मैंने उसे बहुत ढूंँढ़ा 

 गीली आंँखें, भीगे मन से।


अकेलेपन में चिल्लाया हूंँ ...

पूजा पाठ भी न करने वाला मै नास्तिक

लड़का भगवान के सामने गिड़गिड़ाया हूँ,

तकिए में अपने आंसू छुपाया हूं,

तेज़ गाने में सिसकन को दबाया हूं,

#प्रीति को मैंने बहुत ढूंढा 

हर ओर ढूंढा ......

मैंने #प्रीति में भी #प्रीति को ढूंढ़ा 

पर #प्रीति नहीं मिली,

#प्रीति दुनिया के लोगों में खो गई,

जीवन का सबसे कीमती हिस्सा 

खोने के बाद भी मैं जी रहा हूं

क्योंकि मैंने कुछ हिस्से 

#प्रीति के अनेक रुप में बांट चुका हूं,

मां के नाम 

कुछ बहन के नाम

कुछ बेटी के नाम 

कुछ सहेली के नाम और 

थोड़ा सा हिस्सा

#प्रीति की याद, #प्रीति के ख्यालात, 

#प्रीति की खिलखिलाहट,

#प्रीति का अल्हड़पन, #प्रीति का बांकपन,

ऐसी अनगिनत 

#प्रीति की मनमोहक अदाओं से 

अपना रोम-रोम सिंच रखा हूं।

इन पांचों को मिलाकर 

मैंने फिर से नई दुनिया बनाई ।


#प्रीति बिना कमी तो है 

पर खुद को अधूरा नहीं कह सकता हूँ..


मांँ की आंँखों की चमक 

बहन की नोंक-झोंक वाली खनक 

बेटी का अल्हड़पन,

सहेली का भरोसा 

मुझे टूटने से संभाल लेती है,


और फिर #प्रीति को याद करके

आनेवाले आंसुओं से

निकली मुस्कुराहट 

मुझे प्यारी लगने लगी है।

मैं बस #प्रीति को लिखने लगा हूं,

जिंदगी तब भी खूबसूरत थी 

ज़िंदगी अब भी खूबसूरत है

ज़िंदगी हमेशा खूबसूरत रहेगी

क्योंकि #प्रीति कहीं भी रहो

हर रिश्ते में #प्रीति मेरे साथ है.....

और मेरी ख्यालों की दुनिया हो

या वास्तविक दुनिया हो

सब #प्रीतिमय है....


मैंने निस्वार्थ भाव से #प्रीति को प्रेम किया है और इसलिए मेरा ईश्वर मुझे कभी नहीं भुलता,, मैं जानता हूं कि जिस क्षण से कोई भी किसी एक से निस्वार्थ भाव से प्रेम करने लगता है उस पल से वो अपने ईश्वर को याद हो जाता है और मेरा #प्रीति से ऐसा रिश्ता है जिसमें मेरे निस्वार्थ भाव से किए प्रेम का विस्तार होता है, अक्सर लोग क्षणभंगुर प्रेम से भरते है अपना खालीपन, पर मैंने सीखा है शून्य में भी #प्रीति को करते रहना निस्वार्थ प्रेम और लेते रहना ईश्वर के दर्शन, #प्रीति पास नहीं तो क्या, #प्रीति के अहसास तो है, #प्रीति की मुस्कुराहट मेरे चारों ओर बिखरी है, #प्रीति की खिलखिलाहट मेरे कानों में मधूर संगीत की तरह गूंजती है, मेरे ह्रदय के स्पंदन पर #प्रीति के पदचाप की आवाज आती है, मेरा प्रेम कैद नहीं, निश्छल निष्कपट भाव से #प्रीति को आजाद रखता है, #प्रीति कहीं भी रहो, पर मुझमें ही रहती है.....

"मेरे तन के मन मंदिर में, 

 #प्रीति पहले से प्रतिष्ठित हैं ।।

 याद #प्रीति की आते ही, 

 अश्कों से आंखें सिंचित हैं ll

 ख्यालों में भी #प्रीति आ जाए 

 तो धड़कनों का रक्स निश्चित हैं ll

 आपसी प्रेम और विश्वास से, 

 #प्रीति के सारे मार्ग चिन्हित हैं ll

 आदि से अनंतकाल तक, 

 मेरे रोम रोम में #प्रीति ही अविजित हैं

इसलिए हर किसी पर नहीं मरता मेरा दिल ,

जो मेरी #प्रीति है वो पुरे ब्रम्हांड में एक है....


पाठ 4...


#प्रीति मेरे लिए कोई भी दुसरा 

तुम जैसा नहीं हो सकता,


#प्रीति मेरे दिल में तुम हो जहां हमेशा तुम ही रहोगे, 

मैं तुम्हारे बगैर हस तो सकता हूं 

मगर खुश नहीं रह सकता,


#प्रीति मेरे लिए खुशी सकुन आनंद का मतलब 

सिर्फ और सिर्फ तुम...... इसलिए 


#प्रीति तुम्हें पता है यदि मुझे ईश्वर ने

कभी निर्जीव वस्तु बनाया तो मैं होना चाहूँगा

तुम्हारे कमरे की दीवार पे टंगा दर्पण।


ताकि #प्रीति तुम्हारी श्रिंगार रुपी देह और 

जगमगाती रूह को 

अपने नेत्रों पे प्रतिबिम्बित कर सकूँ,,,


क्योंकि #प्रीति ये वही सुंदरता है 

जिसका आंकलन मैंने

हमेशा अपनी हर शायरी, ग़ज़लें, 

कविताएं, महाकाव्य में किया है लेकिन 

यह सब देखने में

#प्रीति तुम हमेशा से असमर्थ रही हो


इसलिए आइना बन

#प्रीति तुम्हारा दीदार तुम्हें कराऊंगा

तुम कितनी खूबसूरत हो यह

#प्रीति तुम्हारे आंखों से तुम्हें दिखाऊंगा..


#प्रीति तुम्हारा मौन और मेरा मौन मिलकर प्रेम बन जाते है। इस क्षण कलम और कागज में जो घट रहा है यह प्रेम है। इधर मेरा शून्य #प्रीति तुम्हें लिख रहा है, उधर तुम्हारा शून्य मुझे पढ रहा है। लिखना तो बहाना है। इस निमित्त मेरा शून्य #प्रीति तुम्हारे शून्य से मिल रहा है। इस निमित्त #प्रीति तुम्हारा शून्य मेरे शून्य के साथ नाच रहा है, तरंगायित हो रहा है। इधर #प्रीति तुम्हारा शून्य शब्द बन परोस रहा हैं कलम बने मेरे शून्य को। मेरा लिखना तो एक खूंटी है; उस पर मैंने टांग दिया अपने शून्य को, #प्रीति तुमने टांग दिया अपने शून्य को— दो शून्य मिल कर जहां एक हो जाते हैं वहां प्रेम है। और #प्रीति दो शून्य पास आएं तो एक हो ही जाते हैं। दो शून्य मिल कर दो शून्य नहीं होते, एक शून्य होते है। #प्रीति हजार शून्य मिल कर भी एक ही शून्य होगा, हजार नहीं। इसी तरह दूर कहीं शून्य में दिखती #प्रीति तुम्हारे साये से लिपट के रह जाती है आत्मा मेरी, और मैं #प्रीति तुम्हारी देह से टूटा दूर से तुम्हें शून्य में देखता आखिरी हिस्सा हूं!

मस्ती प्रेम की पढा गई एक पाठ

जिसके मन में गाॅंठ नहीं बस उसके है ठाठ

ढूंढा सब जहां में पाया #प्रीति तुम्हारा पता नहीं

जब पता #प्रीति तुम्हारा मिला अब पता मेरा नहीं......

इसलिए भावुक हूं, आनंदित हूं, मर्यादित हूं, प्रेममग्न हूं,

संतुष्ट हूं,निःशब्द हूं ।। मैं बस "#प्रीतिमय" हूं ।।


पाठ 5....


#प्रीति______

तुम्हें चांद का टुकड़ा कहूं या तुम्हें खूबसूरत

 रुप की अप्सरा कहूं,,

काली जुल्फें, काजल से भरी काली काली आंखें,

 मख़मल से कोमल देह को क्या कहूं,,

#प्रीति तुम्हें भगवान ने धरती पर भेजा सिर्फ मेरा 

हमसफ़र बनने को,,

तुम तो मेरी धडकनों का स्पंदन बन गई 

तुम्हें दिल की महारानी कहूं,,

#प्रीति तुम्हें तराशा है भगवान ने अपने हाथों से,

एक एक अंग को बनाया सबसे खूबसूरत 

अपनी कलाओं से,,

गुलाब की पंखुड़ियों से लाल होंठ,, 

मृग जैसी कत्थई आंखें , 

सुराहीदार गर्दन,

काली घटाओं सा जुल्फों का रंग, 

संगेंमरमर सा शफ्फाक बदन,, 

जब जब भी तुम्हें देखता बावला हो जाता हूं, 

तुम्हें चांद का टुकड़ा कहूं या तुम्हें खूबसूरत 

रुप की देवी कहूं,,

#प्रीति शब्द कम पड जाते हैं, जब जब भी 

तुम्हारी खूबसूरती पर लिखना चाहता हूं,,

आंखों से आंखें मिलाकर तुम्हारी तस्वीर के 

रास्ते तुम्हारे कोमल ह्रदय में रहना चाहता हूं,,

मैं पागल हूं और बहुत पागल हूं पर यह भी

बात सच है की केवल तुम्हारा दिवाना हूं,

अब तुम ही बताओ #_प्रीति_____

जब तुम झुककर मेरा माथा चुमती हो,

तुम्हारे मुखड़े को चांद कहूं या 

मल्लिका_ए_जिंदा_ताजमहल कहूं...


एक दिन कहीं ऐसा ना हो कि

तुम मुझे कॉल करो,,

और वो कॉल रिसीव ही न की जाये...


फिर तुम एक और कोशिश करो,,कॉल करने की,,

और फिर रिसीव न हो...

फिर एक अरसे बाद,तुम्हे थोड़ी फ़िक्र हो,,

तुम मैसेज करो मुझे,,वो मैसेज...जिसका कोई भी जवाब अब कभी नहीं आएगा...


फिर तुम सच में थोडे और परेशान हो जाओ... और

तुम्हें मेहसूस हो हीरा मेरे पास था और मैं कंकर जमा करने में हीरे को तडा दे दिया तब 

तुम सोचो मेरे बारे में, मेरी हर बात,, मेरी आवाज़, मेरा चेहरा....

तुम्हारे लिए मेरी फ़िक्र..


मेरे साथ बिताया हर एक लम्हा..

फिर तुम मुझे एक और कॉल करो,,

और फिर कोई रेस्पांस न मिले...

तुम फिर मुझे मैसेज करो..

जिसका कोई जवाब न मिले..

तुम अचानक बहुत बेचैन हो जाओ..

तुम्हें सब कुछ याद आता रहे...

तुम लगातार मेरे बारे में सोचो...

तुम्हे सब कुछ याद आये.

सब कुछ...


और एक दिन जब तुम्हें नींद न आये.. 

बस मेरी याद आये...

तुम मुझे सोशल मीडिया पर ढूंढो..

फिर मैसेज करो..

फिर कॉल करो.

फिर कोई जवाब न मिले..

तब तुम फोन गैलरी खोलकर..

मेरी तस्वीरें देखो...


तुम्हे गुस्सा आये, चिढ हो,तुम्हे रोना आये..

तुम्हें एहसास हो कि मैं किस हाल में रह रहा हूँ..

परेशान होना क्या होता है..

टूट जाना क्या होता है...


फिर कुछ अच्छा ही नहीं लगेगा..

तब तुम हर जगह मुझे ही ढूंढो..


बस एक आखिरी बार मुझे देखना चाहो,

मुझे सुनना चाहो..

मेरे सीने से लगना चाहो...

मुझसे लिपटकर रोना चाहो..

तुम पागल हो जाओ उस प्यार के लिए,

जो सिर्फ और सिर्फ मुझसे मिल सकता था..

और उस हाल में,

तुम्हे सुनने वाला

तुम्हारे माथे को चूमने वाला...

तुम्हे सीने से लगाने वाला...

"मैं"...

कहीं दूर...अंधेरे में...

अपने कमरे में...

आधी रात को,,

वो हर एक मैसेज पढ़कर,,

तुम्हे याद करूँ...फिर वो मैसेज डिलीट कर दूँ..

उसका कभी कोई जवाब नहीं आएगा..


तुम महसूस करो दिल का टूटना,

अकेलेपन में रोना..किसी से कुछ न कह पाने की बेबसी..

सारे काम ज़बरदस्ती लगने लगे,

बस हर वक़्त मेरी बाहों की ज़रूरत लगे,

नींद की गोलियां भी किसी काम की न रह जाएं..


हर वक़्त..

सोते जागते,मुझे याद करो..

बस मैं ही हर वक़्त तुम्हारे दिलो दिमाग में रहूँ...

उस वक़्त...जब ये सब हो..

शायद तुम्हे समझ आये..

कि तुम कितनी गलत थे...तुमने क्या किया..

और तुम्हे क्या मिला था..

और तुमने क्या खो दिया...

तब तुम्हें समझ आएगा...मैं कैसा था...


हाँ..सच में..

तुम एक बार महसूस कर सको..

वो सब जो मैं करता हूँ...


पाठ 6...


दुनिया में अनगिनत लोग हैं और हर कोई

अपने अनुभव से बताते है कि प्रेम क्या है...?

जीवन में केवल प्रेम ही है जो दिखाता है कि 

#प्रीति कौन है....

#प्रीति क्या है......

मेरा आकार भी #प्रीति, 

मेरा आधार भी #प्रीति,

मेरा प्यार भी #प्रीति,

 मेरा त्यौहार भी #प्रीति,

मेरा अंत भी #प्रीति, 

मेरा आगाज भी #प्रीति,

मेरी जान भी #प्रीति, 

मेरे सिर का ताज भी #प्रीति,

मेरे लिए मेरी दुनिया है #प्रीति,

छु कर जो गुजरे वो हवा है #प्रीति,

मैंने जो मांगी वो दुआ है #प्रीति,

मेरे चेहरे की कशिश है #प्रीति,

सितारों के बिच चांद की चमक है #प्रीति,

सारे जहां का करार है #प्रीति,

बस और कुछ नहीं है #प्रीति 

मेरी जिंदगी है #प्रीति.........


पाठ 7...


मैं जब भी ये गजले, ये शायरियां,... लिखता हूं,,,,  

जहन में #प्रीति का चांद सा मुखड़ा सजाता हूं..

मैं जब भी ग़ज़लों में अंत्रा लिखता हूं,,

#प्रीति की मुस्कान को कलम बनाता हूं,,,

मैं जब भी श्रिंगार रस लिखता हूं,

#प्रीति की एक एक अदाओं को शब्द रस में घोलता हूं,,

काली घटाओं सी जुल्फों की जब बात आती है,

#प्रीति के सुराहीदार गर्दन को मैं दाऊत बनाता हूं,,

नयन नशीले लिखने के लिए

मैं #प्रीति के काजल से रंग चुराता हूं,,

ये ग़ज़लें, शायरियां, कविताएं, काव्य मुझे यह

सब लिखना नहीं आता है,,

मैं तो बस #प्रीति की तस्वीर कागज़ पर लगा देता हूं.....

जब भी #प्रीति की मुस्कान कोरे पन्नों पर बिखरती है,

अक्षर न अक्षर को अपने आप उमड़ने देता हूं....


भीतर भरे भय वहम शक से खाली हो जाओ, 

ब्रह्मांडीय प्रेम की ऊर्जा आपके अंदर महसूस होने लगेगी क्योंकि प्रेम के तज़ुर्बे पर कभी ना पुछना मुझसे,

मैंने प्रेम में प्रेम पर हजार पन्नों की कोरी किताब लिखीं हैं,

जानते हो प्रेम क्या है अपने वक्त के कीमती लम्हें किसी को देना किसी की सुन लेना। 

किसी की आंख से आंसूओं को चुन लेना। 

किसी के ज़ख्मों पर मीठे बोल के मरहम लगा देना।

बिना किसी रिश्ते के बिना किसी संबंध के 

किसी के दर्द का एहसास होना। 

यहीं तो प्रेम है। 

प्रेम में दो अनजान इंसान एक दूसरे के प्राण बन जाते है 

बिना एक दूसरे के एक पल भी रह नहीं पाते  

परमात्मा के बाद

अगर दुनिया में कोई पवित्र चीज है तो वो है प्रेम....

सच मैं प्रेम का एहसास अनोखा होता है...


पाठ 8...


#प्रीति तुम्हारी सुंदरता को मैंने कभी तुम्हारे शरीर से नहीं देखा,

क्योंकी मुझे पता है एक दिन यह मांस पिंड का शरीर

अग्नि शिखा में लिप्त होगा,,

#प्रीति तुम्हारा होना मैंने तुम्हारे अस्तित्व से समझा है ...

#प्रीति मैंने जाना की तुम अनंत हो.. 

काया क्षीण होगी ..दृष्टि समाप्त होगी.. 

बाल गिरने लगेंगे लेकिन 

मैं और मेरा शाश्वत प्रेम 

#प्रीति तुम्हारे लिए अबाधित रहेगा

अजीवन अस्पर्शित...

#प्रीति तुम्हारी तस्वीर को देखते ही दिल को सुकून, 

#प्रीति तुम्हारी आंखों पर नज़र पड़ते ही दिल को चैन,

#प्रीति तुम्हारे होंठों पर मुस्कान देखकर रुह को मिठास, और

#प्रीति लिखते लिखते तुम्हारी तस्वीर को 

सिने से लगाते ही प्रेम पर एक नशें का 

सुरूर सा छा जाता है, क्योंकि

एक पुरुष अपनी पसंदीदा स्त्री को 

निश्चल और निस्वार्थ भाव से जब प्रेम करता है 

तो उसके ह्रदय में उस स्त्री का स्थान 

एक देवी के समान होता है और 

ह्रदय में उस स्त्री के प्रति सदैव 

सम्मान की भावना होती है और 

वो पुरुष अपने पुरे जीवन काल में 

उसी स्त्री को अपने जीवन का

आपादमस्तक मानता है....


#प्रीति एक ऐसी शख्सियत की मालकिन है....

जिसको मैंने अपने जीवन में 

कुछ ऐसे लिखा है,

लोगों को मेरे जीवन से

#प्रीति को मिटाने के लिए

रबर को नहीं

अपने आप को घिसना पड़ेगा..

क्योंकि मुझे जब चुनाव करना पड़ा 

दुनिया और #प्रीति में

तब भी मैंने सिर्फ #प्रीति को चुना,,

दुनिया की नश्वर घृणा से कर ली दूरी 

जब #प्रीति से मेरे प्रेम को अमरत्व मिला,,

तब भी मैंने मांगा हर जनम में 

कोई रुप कोई जीवन

केवल एक #प्रीति पर मरने के लिए,

लौटूंगा वैसे ही #प्रीति तुम तक

 धुप बारिश बसंत बनकर,,

फिर #प्रीति तुम्हारी बाहों में सिमटने के लिए,,,

एक और बार #प्रीति को चुनूंगा 

 एक और बार आऊंगा मैं

केवल #प्रीति तुम्हें प्रेम करने के लिए....


जब पुकारना हो मुझे

#प्रीति मेरा नाम लेने से पहले शरमा जाती है...

#प्रीति मेरे इश्क का माहताब है

 काली घटाओं में से निकल कर आती है...

#प्रीति अपने नयनों से कह दो यूं तारों के बिच से 

मुस्कुराकर न देखा करे मुझे,

यह दिल पहले से ही #प्रीति तुम्हारी अदाओं से पागल है..

उपर से #प्रीति तुम्हारा नशीली निगाहों से देखने से 

मेरे दिल की धड़कने धड़कना भूल जाती है....

#प्रीति तुम पर लिखी ग़ज़ल, शायरी, कविताएं, 

कहानियां तो महज मेरे दिल का हिस्सा है...

#प्रीति स्पंदन की तरह मेरी हर बात में होती है,

अंधेरे से घिरे मेरे जीवन को 

#प्रीति जुगनू बन मेरे जीवन को रोशन करती है,

किस्सा कितना सुनाऊं मैं मेरी मोहब्बत का,

सितारों की भीड़ में भी मेरी चांद सी #प्रीति

मेरी आगोश में होती है.....






प्रेम और प्रेमी

पाठ 1...


किसी ने मुझसे पूछा

आपको इतनी #शायरी कैसे जमती हैं....

मैने कहा- 

झूम उठता हैं दिल 

एक #प्रीति के खयालों से 

और निकल आते हैं शायरी के लफ्ज़  

बहार के पत्तों की तरह

जब मन में शुरू होता है 

श्रृंगार_ए_हुस्न  

#प्रीति के रुपयौवन का.... क्योंकि

मेरा आकार भी #प्रीति, 

मेरा आधार भी #प्रीति,

मेरा प्यार भी #प्रीति,

 मेरा त्यौहार भी #प्रीति,

मेरा अंत भी #प्रीति, 

मेरा आगाज भी #प्रीति,

मेरी जान भी #प्रीति, 

मेरे सिर का ताज भी #प्रीति,

मेरे लिए मेरी दुनिया है #प्रीति,

छु कर जो गुजरे वो हवा है #प्रीति,

मैंने जो मांगी वो दुआ है #प्रीति,

मेरे चेहरे की कशिश है #प्रीति,

सितारों के बिच चांद की चमक है #प्रीति,

सारे जहां का करार है #प्रीति,

बस और कुछ नहीं

मेरी जिंदगी है #प्रीति,

मेरा प्रेम सम्पूर्ण समर्पण है मेरे ह्रदय का,,

मैंने यहां #प्रीति में ही पूरी दुनियां देखी है....


पाठ 2...


मेरी_प्रीति...


दर्पण के सामने खड़ा होकर, 

जब भी #प्रीति को संवारता हूं,,

उस दर्पण में खुद को देख,

अचरज में पड़ जाता हूं,,,

  

#प्रीति शरमाकर कजरारी नज़रें नीचे झुका लेती हैं,,

पर कनखियों से मुझको ही देखा करती हैं,,,

यूं आँखों ही आँखों में पूछ लेती है इशारों में,,

बताओ कैसी लग रही हूँ इस बिंदिया के सितारों में,,


#प्रीति की टेढ़ी बिंदी सीधी कर

 मै जब अपना प्यार जताता हूँ,,, 

उस पल मै अपने स्पर्श से, 

उसको उससे चुरा ले जाता हूँ,,,


#प्रीति कहती है....

ये पायल चूड़ी झुमके कंगन

 सब देते हैं मुझे तुम्हारी संगत,,

इनकी खनकती आवाजों में 

सिर्फ तुम्हारा नाम पाती हूँ,,

दर्पण के सामने खड़ी होकर,

 जब भी खुद को सँवारती हूँ,,,


#प्रीति कहती है ये भी सच है.....

पहरों दर्पण के सामने बिता कर ,

सिर्फ तुमको रिझाना चाहती हूँ,,,

तुम मेरे लिए सबसे पहले हो 

,तुमको बताना चाहती हूँ,, 


#प्रीति एक अदा से जुल्फें झटककर कहती है...

कहने को ये श्रृंगार है मेरा, 

पर सही मानों में प्यार ओढ़ रखा है तेरा,,,

जिसे मैं हर बला की नज़र से बचा कर,

अपने पल्लू से बांधे रखना चाहती हूँ,,,

अपनी प्रीत हर रोज़ यूं ही सजा कर,

 तुम्हें सिर्फ अपना ख्याल देना चाहती हूँ,,


दर्पण के सामने खड़ा होकर, 

जब भी #प्रीति को संवारता हूं 

उस दर्पण में खुद को देख,

मैं अचरज में पड़ जाता हूं....

पाठ 3...

क्या लिखता हूं,,,,? क्यो लिखता हूं,,,,,

किसके लिए लिखता हूं,,,,?

छोड़िए इन सब बातों को,,

 एक लम्हा देखता हूं #प्रीति को आंखों में, 

बस उसी को अलग अलग तरीके से लिखता हूं.......

शब्द सारे फ़ीके पड जाते हैं तारीफ करते हुए,

और क्या क्या तारिफ करु मैं #प्रीति की,,,

मुझे खुद #प्रीति को अपने मन माफिक गढ़ने में

पुनर्जन्म लेकर आना पड़ा है.....

मेरे लिए #प्रीति जैसे दुःख में सुख की छांव है...

#प्रीति के आसपास होने भर का एहसास

दुःख के घने अंधेरे को चीर कर 

जैसे दुर कही टिमटिमाते दिए सा खास है...

बस प्रीति वहीं सुकून है...

मेरे लिए #प्रीति क्या है ..... 

हथेली पर रखा 

एक कपूर का टुकड़ा

टुकड़ा गल जाता है ..... 

खुशबू रह जाती है

पाठ 4

मेरे लिए प्रीति क्या है ....

बदन पर गिरा

शबनम का एक क़तरा

क़तरा बह जाता है ...... 

एहसास रह जाता है


मेरे लिए #प्रीति क्या है ..... 

माथे पर दिया गया

एक मीठा बोसा

बोसा छूट जाता है ...... 

तिलस्म रह जाता है 


मेरे लिए #प्रीति क्या है ..... 

आँखों का जादू

जादू चल जाता है ...... 

बुत थम जाता है


बस यूँ ही ..... 

#प्रीति तुम कलम पर छाई रहती हो,

कागज पर उतरते तुम्हारी अदाओं से

दिल बहलता रहता है,,


#प्रीति तुम्हारे ख्याल आता हैं 

गुदगुदा कर चला जाता हैं...

रह जाती हैं बस तुम्हारी मिठी मिठी यादें...

गीत लिखूं, ग़ज़ल लिखूं या लिखूं अब कोई रुबाइयां,,

#प्रीति नजदीकियां लिखूं, दुरियां लिखूं या लिखूं तुमसे जुदाईयां...


तुम्हारी बातें लिखूं, तुम्हारी मुस्कान लिखूं या लिखूं तुम्हारी रुसवाइयां,,

#प्रीति तुम्हें तकदीर लिखूं, दुआ लिखूं, या लिखूं तुम्हारी अच्छाईयां.....


वफा लिखूं, सदा लिखूं, या लिखूं गुंजती हूई शहनाईयां,,

#प्रीति आवारगी लिखूं, तुम्हारी सादगी लिखूं, या लिखूं ये तन्हाईयां.....


रुठना लिखूं, मनाना लिखूं या लिखूं अपनी लड़ाईयां,,

#प्रीति अदा लिखूं, दिल फिदा लिखूं या लिखूं तुम्हारी अंगड़ाइयां....


पाठ 4...


मैं प्रार्थना में तुम्हें याद करता हूँ #प्रीति ~


मैं प्रार्थना में तुम्हें याद करता हूँ #प्रीति___

अपने आप को बदलने के लिए ~


मै प्रार्थना में तुम्हें याद करता हूँ #प्रीति____

अपने आप को समझने के लिए ~


मैं प्रार्थना में तुम्हें याद करता हूँ #प्रीति____

 क्यूंकि मैं अपने आप खुद की मदद नहीं कर सकता ~


मैं प्रार्थना में तुम्हें याद करता हूँ #प्रीति______

क्यूंकि मैं असहाय लोगों की सहायता करता रहूँ ~


मै प्रार्थना में तुम्हें याद करता हूँ #प्रीति_____

क्यूंकि कोई लालच मेरे मन को ललचाए नहीं ~


मै प्रार्थना में तुम्हें याद करता हूँ #प्रीति______

क्यूंकि कोई झूठ मेरे कदम डगमगाए ना ~


मैं प्रार्थना में तुम्हें याद करता हूँ #प्रीति_______

क्यूंकि तुम्हारी आवश्यकता प्रति क्षण मेरे अंदर से बहती है - जागते सोते ~


मै प्रार्थना में तुम्हें याद करता हूँ #प्रीति_______

परमात्मा को धन्यवाद देने की उन्होंने अपनी परछाई मेरे जीवन में दी~


मैं प्रार्थना में तुम्हें याद करता हूं #प्रीति______

 क्यूंकि तुम्हारी छवी ईश्वर से मिलती है और 

प्रार्थना मेरी पुरी हो जाती है ~...~...~...


पाठ 5...

#प्रीति_मैं_तुम्हें_ढूँढ_लेता_हूँ_**


" आँखें मीचकर सोने से पहले, 

जज्बात पिघलकर रोने से पहले, 

जब अल्फाज सीने में दफ़न हो जाते हैं, 

तब यादों में पलकें भिगोने से पहले, 

तुम्हारे अक्स से बातें कर लेता हूँ, 

तुम्हारी तस्वीर को मनाकर, 

उन्ही से रुठ लेता हूँ, 

गुजरते हर लम्हें में.. 

............. #प्रीति_मैं_तुम्हें_ढूँढ_लेता_हूँ.............

*

सर्दियों के इस मौसम में जब सिकुडने लगता हूँ, 

रात ठण्ड के मारे जब छीकने लगता हूँ, 

तब लगता है दवा लेकर तुम चले आ रहे हो, 

कपकपाते हाथों की नर्म उंगलियों से 

बालों को सहला रहे हो, 

तुम्हारे होने के एहसास भर से ही, 

हर दर्द में सकुन पाता हूँ.. 

यादों की चादर ओढ़े हर रात 

.................. #प्रीति_मैं_तुम्हें_ढूँढ_लेता_हूँ..............

*

भीड में अकेलेपन का एहसास तुम्हारे बिना होता है, 

तुमसे थी सारी मुस्कुराहटे,

 तुम ही मेरी हर खुशी का जहाँ थे, 

मेरे आंसू अब सूख चुके हैं जब यह मौन हूए, 

अब तो बस तुम्हारी तस्वीर से बातें कर लेता हूँ, 

जिंदगी में घट रही हर अच्छी बुरी बात 

तुम्हारा माथा चुमकर तुम्हीसे शेअर कर लेता हूँ, 

................#प्रीति_मैं_तुम्हें_ढूंढ_लेता_हूं............

*

दिल कागज का बन जाता है जिसपर दर्द लिख देता हूँ.... 

उसी दर्द की दबी आवाज में.... 

लिखे हुए हर अल्फाज में.... 

जिंदगी में लगती ठोकरों में.... 

दबी हुई आह में.... 

अंदर ही अंदर घुटते हुए आँसू में.... 

कभी ना खत्म होने वाले तुम्हारे इंतजार में... 

***********#प्रीति_मैं_तुम्हें_ढूँढ_लेता_हूँ***********


पाठ 6...

सुनो.....#प्रीति_____


#प्रीति मैं चाहता हूं तुम्हें इतना 

कि मैं तुम्हारे रेशे रेशे को 

अपने अल्फाजों में ढालता हूं,


#प्रीति उतार कर छवि तुम्हारी 

मैं तो अपनी रचनाओं में ,

तुम्हें हर पल ही

अपना मैं बनाता हूं,


#प्रीति भरता हूं मैं रंग 

अपने ही जज्बातों के

और खूबसूरत एहसासों से

तुम्हें रोज ही मैं संवारता हूं,


#प्रीति देकर रंग अपने प्यार का मै 

तुम्हारा चेहरे की मुस्कान में 

अपनी मुस्कान मिलाकर

और भी निखारता हूं,


#प्रीति छू लेता हूं लबों को तुम्हारे

 मैं तो अपनी ही कलम से,

और फिर बिना छुए भी तुम्हें 

अक्सर छू ही जाता हूं,


#प्रीति तुम्हारी खूबसूरत छवि को 

कुछ ऐसे ही सामने बिठाकर मैं 

तुमसे अपने हाल_हवाल बताता हूं,

तुम्हारे हाल हवाल पुछकर

तुम्हारा ख्याल भी रखता हूं ,


#प्रीति नहीं कह सकता हूं तुमसे 

मैं कभी भी कि आखिर मैं 

तुम्हें कितना और क्यों चाहता हूं****

पाठ 7...

#प्रीति तुम्हारे साथ गुजारी 

एक चाँद रात……

तुमने कहा था तुलना करके बताओं 

इस चाँद रात की,

कि कितनी भारी थी वो चाँद रात

दुनिया की हर शै से

जिस चाँद रात हम साथ थे 

खुले आसमाँ में तारों की छाँव में,


मैंने तुम्हारी शर्त मानी और 

#प्रीति मैं ले आया तराजू एक

और रख दिया उसके एक पलड़े में

उस चाँद रात की…..सुनहली याद को , 

उसके एहसास को

फिर रखा मैंने दूसरे पलड़े में

इस जहां के सारे फूलों को

चाँद रात भारी रही,


#प्रीति मैंने तमाम रंग लिए 

कायनात के, धनक से चुरा

और रख दिये फूलों के संग

फिर से चाँद रात…..

वहीं थी नीचे झुकी..भारी,


#प्रीति मैं ले आया 

सातों समुंदरों का पानी सारा

रख दिया चाँद रात के पलड़े के खिलाफ

मगर चाँद रात तो चाँद रात रही...कहाँ झुकी

सोचा बहुत कि करूँ क्या,

 किसके साथ करूँ तुलना,


#प्रीति फिर मैंने रख दिये, 

गीतों, गजलों, कविताओं के

सब रस, भाव, और छंद…..

की चाँद रात झुके

मगर फिर भी ये हो न सका

बहुत भारी थी वो चाँद रात,


#प्रीति फिर आखिर मैंने बढ़ाया हाथ 

और तोड़ लिया सभी सितारों को

आसमाँ के आंचल से

चाँद रात तो चाँद रात ठहरी

न पलड़ा झुका ना मैं रुका

पर अब क्या था कि तोल सकूँ

क्या बचा था अब इस कायनात में

कि वो उस चाँद रात पर भारी पड़े,,


#प्रीति अचानक याद आया मुझे

कि मेरे बटुए में पड़ा था 

#प्रीति एक बाल तुम्हारा 

जो जाने कैसे आ गया था

लिपटकर मेरे कुर्ते की बाजू पर

और रख लिया था मैंने

संभाल कर उसे बटुए में

कोई ताबीज समझकर


#प्रीति मैंने दुसरे पलड़े से

वो सब चीजें हटा दी जो मैंने

चांद रात के खिलाफ रखी थी और

रख दिया वो बाल तराजू में

चाँद रात के खिलाफ,

फिर तो ग़जब हो गया

ब्रम्हांड में बिजलियां चमकने लगी,

बादल गरजने लगे, 

चारों ओर गर्जना होने लगी,

और झुक गया पलड़ा 

चाँद रात के खिलाफ था जो

ओह देखो #प्रीति तुम्हारा एक बाल भी

भारी था दुनिया की तमाम शै से,


#प्रीति अब समझो तुम क्या हो,,

ये दुनिया ये कायनात...

....और इसकी तमाम शै

कुछ नहीं हैं, #प्रीति तुम्हारे आगे,

बस तुम हो ...तुम हो...तुम हो

#प्रीति तुम्हीं हो…..

मेरे लिए तमाम

क़ायनात से भारी,  

दुनिया के कितने अब्ज

लोगों से न्यारी,

#प्रीति मेरा एकलौता खजाना हो 

तुम हो मुझे जान से प्यारी.....


पाठ 8...


मैं इतना साधा सा फ़कीर हूं कि #प्रीति तुम्हारी फोटो को भी देखता हूं तो मुलाक़ात समझता हूं,, मैंने जब अपने वास्तविक जीवन का ढंग बदला तब अपने अंतर्मन को #प्रीति तुम्हारी छवि से सुंदर बनाया और सभी को यह महसूस होने दिया कि #प्रीति तुम्हारा साथ होना मेरे लिए एक ईश्वरीय उपहार है क्योंकि #प्रीति मेरे लिए तुम्हारे होने का अर्थ है दिव्य और दुनिया का अर्थ है नया लेकिन अल्प। जिसमें अनगिनत लोग होते हैं, मिलते हैं, चले जाते हैं,, इसलिए मेरे लिए #प्रीति तुम कभी दुनिया नहीं हो सकती और जो दुनिया है वह कभी मेरी #प्रीति नहीं हो सकती। #प्रीति हमेशा #प्रीति रहेंगी - प्रीति मेरे लिए अपनी शाश्वत नवीनता और परम आनंद के कारण #प्रीति है। #प्रीति मेरे अस्तित्व का प्रगट रूप है....

"जो दिखाई पड़ती है आंखों से,

     जो कह पाती है बस आँखों से,

   जो हाथों से स्पर्श में आती है, 

   जो इंद्रियां से पहचान पाती हैं,

   जो इंद्रियों की प्यास होती है,

   ज़र्रे ज़र्रे में जिधर देखूं उधर

जो भी दृश्यमान है वह #प्रीति है,

 #प्रीति तुम्हारी इतनी बाते है, #प्रीति तुम संग के आनंद की इतनी चर्चा है, इतनी कविताएं, कितने ग्रंथ हैं, सब दिन रात #प्रीति तुम पर लिख रहा हूं लेकिन लगता ऐसा कि मैं #प्रीति तुम्हें थोड़ा भी लिख नहीं पाता हूं; सब शब्दो की बाजीगरी है, सब बातचीत है। #प्रीति फिर भी जब तुम्हारी एक एक अदाकारी याद आती है तब मैं बस शब्दों में उन्हें ढालते चला जाता हूं । और शायद इतनी बात मैं इसीलिए करता हूं क्योंकि "#प्रीति तुम तो मेरी भावनाओं और अहसासों की अनकही लहरें है जिन्हें मैं कितना भी कहूं, कितना भी लिखूं फिर भी शब्दो मे कहां बांध पाता हूं..... #प्रीति तो अनंत है.....

"मैं" अपने कमरे में बैठा

#प्रीति की तस्वीरें निहार रहा था...

तब"लोग" बंद दरवाजे के बाहर से

पूछ रहे थे....

क्या देख रहे हो...?


"मैं" हँसा, बोला....

कभी देखता हूँ,

कभी चूक जाता हूँ....

पर #प्रीति दोनों में....

वैसी ही दिखती रहती है...!!


"लोग" समझे नहीं...

"मैं" उठा और चला गया...

और छोड़ आया

खुला दरवाजा 

#प्रीति की तस्वीरें...

और देखने वाले भी....!!


जो शौहरत के लिए गिरना पड़े खुद अपनी नजरों से

तो फिर मेरे ईश्वर हरगिज मुझे मशहूर ना करना,,

मैं बुरा हूं, गलत हूं, धोखेबाज हूं, जो मुझे जैसे देखे वैसा हूं,

मैं सब साथ थे तब भी एक शख्स से प्रेम करता था और अब अकेला हूं तब भी उसी शख्स को पहले से दूगना प्रेम ही करता हूं और इससे ज्यादा करने लायक साहस का कोई काम नहीं है क्योंकि 

अकेले चलना प्रकृति का सच्चा रुप है,

न नाटक, न बेरहमी, बस समझदारी,,

जब अपना कहने वाले ही ना समझे तो 

ना शोर, ना कलह, ना कोई वाद-विवाद

बस चुपचाप वहां से चले जाना ही जीवन

बचाने की समझदारी है...दोस्त 

किसीने मुझसे कहा...

तुम पागलों की तरह गुमसुम बैठे रहते हो,

ना बाहर आते जाते हो, जीवन को जैसे

श्मशान बना बैठे हों,

"कभी तो खोदकर देखो तुम अपने दिल की कब्रे...... 

मिलेगी हजारे ख्वाहीशें जिनको तुमने अपने अंदर मार चुके हों"..........

मैंने कहा*******

#प्रीति की खुशी के लिए 

                 ख्वाहिशों को मारना मेरा जूनून था.....

अब #प्रीति के अलावा कोई ख्वाहिश ही ना रही

                                      इसी में मेरा सकुन है.….......

पाठ 9...


Friday, January 16, 2026

तुम्हारी यादें

सुबह आँख खुलती है

तो सबसे पहले बदन थकान माँगता है,

नींद पूरी होती है

पर आराम नहीं उतरता।

छाती भारी रहती है,

जैसे रात भर

किसी ने भीतर

तुम्हारा नाम रख छोड़ा हो।

कंधे झुके रहते हैं,

किसी बोझ से नहीं,

किसी कमी से।

हाथ खाली हैं

पर हथेलियाँ

कुछ पकड़े रहने की

आदत नहीं छोड़तीं।

रीढ़ में एक खिंचाव रहता है,

हर क़दम पर

थोड़ा-सा दर्द खिसकता है,

जैसे चलना नहीं,

अपने आप को

ढो रहा हूँ।

पेट भूख नहीं बताता,

वो बस जलन देता है

ऐसी जलन

जो खाने से नहीं बुझती।

हर कौर

सीधा गले से नहीं उतरता,

कुछ हिस्सा

सीने में अटक जाता है।

साँसें पूरी आती हैं,

पर सही जगह नहीं पहुँचतीं।

फेफड़े काम करते हैं,

मगर दिल को

हवा नहीं मिलती।

रात को लेटता हूँ

तो बदन

आराम की स्थिति में होता है,

पर भीतर

कुछ लगातार जागता रहता है

जाँघों में जकड़न,

पैरों में झनझनाहट,

और आँखों के पीछे

एक जलता हुआ खालीपन।

तुम्हारी याद

अब सोच नहीं रही।

वो नसों में दौड़ती है,

हड्डियों से टकराती है,

और हर सुबह

मुझे पूरे शरीर के साथ

तुम्हारे बिना

उठने पर मजबूर करती है।


             

Sunday, December 21, 2025

मेरी कौन हो तुम ?...

 



मेरी कौन हो तुम ?


एहसास हो तुम,

उस प्रेम का,

जो उपजता है,

पहली बार,

नाजुक से ह्रदय में.......


स्पर्श हो तुम,

उस स्नेह का,

जो महसूस होता है,

किसी अपने के कंधे पर,

सिर रखने में.......


प्रतीक्षा हो तुम,

उस मिलन रात की,

जो दुल्हन सजाती है,

अपने स्वप्नों में,

अपने ह्रदय में.......


एकान्तता हो तुम,

उस सागर किनारे जैसी,

जहाँ बैठ मैं सोचता हूँ,

तुमको ,सिर्फ तुमको.......


प्रेम हो तुम,

वह प्रेम जो उपजा था,

राधिका के ह्रदय से,

कनु के ह्रदय तक,

पहुँचने को,

सबसे अनभिज्ञ,सबसे सत्य.......


मैं पूछता हूँ,

खुद से,

आखिर कौन हो तुम?

वह कल्पना,

जो मेरे ह्रदय ने की थी,

प्रेम की,प्रेम से,

उस कल्पना का,

साक्षात हो,

यथार्थ हो तुम,

मेरा प्रेम हो तुम।। 💕💕

Wednesday, December 10, 2025

प्रेम का प्रमाण विद्रोह नहीं निर्वाह है...





प्रेम का प्रमाण विद्रोह नहीं निर्वाह है...

इक हम हैं कि हम ने तुम्हें माशूक़ बनाया,इक तुम हो कि तुम हमें अपना हमदर्द भी नहीँ समझते दोस्त...तड़प और कसीस होनी चाहिए एक दूसरे से बात करने की, मांगा हुआ वक्त और मांगी हुई मोहब्बत कभी सुकून नहीं देती दोस्त...प्रेम हो या मित्रता हमेशा निस्वार्थ होकर निभाना,क्योंकि कोई देखे न देखे ऊपरवाला जरूर देखता है दोस्त...प्रेम में कितना दर्द होता हैं उस प्रेमी से पूछो,जो अधूरे प्रेम को पूरे मन से निभा रहा है दोस्त...प्रेम पहला दूसरा नहीं होता प्रेम वही होता है,जिसके बाद किसी की अभिलाषा न रहे दोस्त...कुछ लोग खाने-पीने के इतने शौकीन होते हैं, कि वो दूसरों की खुशियां ही खा जाते हैं दोस्त...यादें रुला देती है जब लोग चले जाते है, तब हृदय की पीड़ा केवल प्रकृति को ही ज्ञात होती है दोस्त...शिकवे तो सांसों के साथ खत्म हो जाते हैं,पर पछतावे उम्र भर दिल में बस जाते है दोस्त...शानदार रिश्ते चाहिए तो उन्हें गहराई से निभाइओ,लाज़वाब मोती कभी किनारों पे नहीं मिलते दोस्त…तुम्हें चाहना मेरी श्रद्धा है,और श्रद्धा कभी पाने की शर्तों पर नहीं टिकी होती दोस्त...मुझे तुम्हारे साथ पूरी कहानी नहीँ लिखनी है,तुम मेरे साथ सिर्फ एक ही पन्ने में सिमट जाओ वही मेरे लिए काफ़ी है दोस्त...कीमत तो वफ़ादारी की होती है,चेहरा तो तवायफ का भी सुन्दर होता है दोस्त...जो बोलकर नहीं दी जातीं,उन बद्दुआओं से बचना दोस्त... अक्सर अकेले रह जाते है वह लोग,जो ख़ुद से ज़्यादा दूसरों की फ़िक्र करते है दोस्त...प्रेम का प्रमाण विद्रोह नहीं निर्वाह है, और मैने तुम पे अपने आप निर्वाह कर दिया दोस्त...राज

Tuesday, November 25, 2025

शायद यही मोहब्बत है



कभी-कभी किसी से इतना गहरा लगाव हो जाता है, कि वो सिर्फ इंसान नहीं रहता एहसास बन जाता है।ऐसा एहसास, जो सांसों की तरह होता है… दिखता नहीं, पर उसके बिना सब कुछ अधूरा लगता है।

बस एक दिन उससे बात न हो, तो लगता है जैसे दिन अधूरा है

फोन की स्क्रीन बार-बार जलती है,

हर नोटिफिकेशन पर दिल धड़कता है 

“शायद उसी का मैसेज हो…”

पर जब नहीं होता, तो वो धड़कन भी खामोशी में बदल जाती है।

कभी लगता है खुद से कह दूं 

“क्या हुआ, एक दिन ही तो बात नहीं हुई।”

पर दिल मानता कहाँ है!

वो कहता है 

एक दिन नहीं, पूरी उम्र सूनी लग रही है बिना उसके।


उसकी हंसी याद आती है,

वो छोटे-छोटे नखरे, वो ‘पता नहीं’ बोलकर छेड़ना,वो हर बात में छिपा है 

वो जब कहती थी, “तुम पागल हो ना,”

और मैं जवाब देता था, तेरे लिए ही तो 

और फिर एहसास होता है 

प्यार का मतलब हमेशा साथ होना नहीं,

कभी-कभी बस उसका न होना ही ये जताने को काफी होता है

कि वो तुम्हारे भीतर कितना गहराई तक बस चुका है।

शायद यही मोहब्बत है 

जब एक दिन की खामोशी, हज़ार बातों से ज़्यादा बोल जाती है…

और उस खामोशी में भी बस एक ही आवाज़ आती है 

“कब बात होगी फिर?”

Tuesday, November 4, 2025

प्यार का भ्रम

 



"प्यार का भ्रम"


प्यार… यह शब्द जितना सरल लगता है, उतना ही जटिल इसकी अनुभूति है। मनुष्य के अस्तित्व का सबसे सुंदर और सबसे खतरनाक भ्रम यही है प्यार का भ्रम।

यह भ्रम न स्त्री का है, न पुरुष का यह मानव मन की वह गहन स्थिति है जहाँ कल्पना, चाहत, अकेलापन, संवेदना और आत्म-प्रत्यय एक-दूसरे में विलीन होकर वास्तविकता का आभास देने लगते हैं।


मनोविज्ञान का दृष्टिकोण


मनोवैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो प्यार का भ्रम (Illusion of Love) एक ऐसी मानसिक अवस्था है जहाँ व्यक्ति दूसरे के प्रति अपने आकर्षण, अपेक्षाओं या भावनात्मक निवेश को ‘सच्चा प्रेम’ समझ बैठता है।

यह भ्रम इसलिए बनता है क्योंकि मानव मस्तिष्क संबंध की आवश्यकता से संचालित होता है।

हर व्यक्ति के भीतर एक अवचेतन भय होता है “अकेले रह जाने का भय।”

जब कोई व्यक्ति थोड़ी-सी सहानुभूति, कोमलता या ध्यान दिखाता है, तब यह भय शांत हो जाता है, और मन उसी क्षण ‘प्रेम का आभास’ महसूस करने लगता है।


कई बार यह प्रेम नहीं, बल्कि भावनात्मक निर्भरता (Emotional Dependency) होती है।

फिर भी मन उसे प्यार का नाम देता है, क्योंकि भ्रम में भी सुकून है, जबकि सत्य में दर्द।


भावनाओं का विस्तार


प्यार का भ्रम इसलिए स्थायी लगता है क्योंकि इसमें भावनाएँ सच्ची होती हैं 

भले ही उनका आधार झूठा हो।

जब कोई व्यक्ति किसी की हर बात में अपना प्रतिबिंब देखने लगता है,

जब दूसरे की मुस्कान अपने हृदय की धड़कन बन जाती है,

तो मन वास्तविकता और कल्पना की सीमा भूल जाता है।


भ्रम की यही सुंदरता है 

यह झूठ होते हुए भी सच्चे जैसा लगता है।

यह एक सपना है, जो खुली आँखों से देखा जाता है,

और जब वह सपना टूटता है, तो व्यक्ति खुद से प्रश्न करता है 

"क्या यह प्यार था, या सिर्फ़ एक भावनात्मक मृगतृष्णा?"


सामाजिक आयाम


समाज में प्यार का भ्रम अक्सर संस्कृति, मीडिया और सामाजिक अपेक्षाओं से भी जन्म लेता है।

फ़िल्में, कहानियाँ और गीत हमें यह सिखाते हैं कि प्यार में सब कुछ सम्भव है 

पर वास्तविक जीवन में प्यार की जगह समझ, सम्मान और धैर्य लेते हैं।


समाज हमें यह नहीं सिखाता कि प्यार का अंत भी शालीनता से हो सकता है।

इसलिए जब प्रेम मुरझाने लगता है, तो लोग स्वीकार नहीं कर पाते कि वह अब प्यार नहीं रहा 

वे भ्रम में जीते रहते हैं, जैसे अब भी वही जादू मौजूद है।


 दार्शनिक दृष्टिकोण


दार्शनिक रूप से, प्यार का भ्रम अस्तित्व की खोज है।

मनुष्य हमेशा किसी ‘दूसरे’ में खुद को खोजता है।

कभी यह खोज आत्मा का विस्तार होती है, कभी एक ग़लत पहचान।

भ्रम में डूबा प्रेम मनुष्य को सत्य की ओर नहीं, सपनों की ओर खींचता है 

फिर भी यही भ्रम जीवन को अर्थ देता है।


क्योंकि सत्य सूखा हो सकता है,

पर भ्रम में रस है, रंग है, कविता है।

कभी-कभी भ्रम ही मनुष्य की सबसे सुंदर सच्चाई बन जाता है।


प्यार का भ्रम किसी की गलती नहीं 

यह मनुष्य की संवेदनशीलता का प्रमाण है।

जिसे यह भ्रम हुआ, वह यह सिद्ध कर देता है कि उसके भीतर अभी भी महसूस करने की क्षमता जीवित है।

पर बुद्धिमत्ता यह नहीं कि हम भ्रम में न पड़ें,

बल्कि यह कि जब हमें उसका आभास हो

तो हम मुस्कराकर स्वीकार करें कि यह भी जीवन की एक सीख थी।


प्यार का भ्रम अंत नहीं, एक अध्याय है 

जो हमें सिखाता है कि सच्चा प्यार तब जन्म लेता है,

जब भ्रम का पर्दा हटता है और हम खुद से प्रेम करना सीखते हैं।


मिलन की धुंध

 "मिलन की धुंध"


कभी भी मेरी दुनिया में कदम मत रखना।

एक बार तुम मेरी दुनिया में आए,

और तुम्हारा दिल मेरा हो गया

अब तुम वापस नहीं जा सकते।

हर रास्ता, हर छुपने की जगह,

सिर्फ़ मुझे ही तुम्हें पकड़ने का इंतज़ार करती है।


मैं तुम्हें अपने भीतर कैद कर लूंगा।

प्यार की लहरें तुम्हें घेरेंगी,

हर साँस तुम्हारे भीतर मेरी चाहत की आग जगाएगी।

हमारे मिलन की धुंध, हमारी आग,

आसमान को रंगों और धुएँ से भर देगी,

जैसे कोई तूफान खुद को अपनी शक्ति में समेटे।


तुम्हारी आत्मा अब न तो स्वतंत्र है, न शांत।

एक मूक शिकारी की तरह,

हर पल का स्वाद चखती है,

हर सुख और पीड़ा को अपनी मांसपेशियों में महसूस करती है।

और मैं हर पल तुम्हें महसूस करता हूँ,

तुम मेरी धड़कनों में, मेरी साँसों में,

मेरे विचारों में घर कर चुके हो।


भागने की कोई जगह नहीं।

चाहे मैं खुद को रोकूँ, चाहे मैं खुद को आज़ाद समझूँ,

तुम मेरी हर सोच, मेरी हर कल्पना,

मेरे भीतर के हर कोने में मौजूद हो।

तुम मेरे हिस्से बन गए हो

हमेशा, अनंतकाल तक।


तुम अब केवल मेरे भीतर नहीं,

तुम मेरी हवा, मेरी आग,

मेरे हर एहसास का हिस्सा हो।

और मैं जानता हूँ,

कि चाहे मैं कितना भी चाहूँ, तुम्हारे बिना अधूरा रहूँगा।

Thursday, May 9, 2024

परिवार...





परिवार 


परिवार अब कहाँ ,परिवार तो कब के मर गए !

आज जो है,वह उसका केवल टुकड़ा भर रह गए !


              पहले होता था दादा का ,

                   बेटों पोतों सहित ,

                   भरा पूरा परिवार ,

                 एक ही छत के नीचे ,

                    एक ही चूल्हे पर , 

                  पलता था उनके मध्य , 

                अगाध स्नेह और प्यार !


                 अब तो रिश्तों के आईने ,

                तड़क कर हो गए हैं कच्चे ,

                  केवल मैं और मेरे बच्चे ,

        माँ बाप भी नहीं रहे परिवार का हिस्सा ,

         तो समझिये खत्म ही हो गया किस्सा !


                     होगा भी क्यों नहीं ,

             माँ बाप भी आर्थिक चकाचोंध में ,

            बेटों को घर से दूर ठूंस देते हैं 

          किसी होस्टल में , पढ़ने के बहाने !

       वंचित कर देते हैं प्रेम से जाने अनजाने !


      "आज की शिक्षा"

                   हुनर तो सिखाती है ,

            पर संस्कार कहाँ दे पाती है !


     पढ़ लिख कर बेटा डॉलर की चकाचोंध में,

  आस्ट्रेलिया ,यूरोप या अमेरिका बस जाता है !

     बाप को कंधा देने भी कहाँ पहुंच पाता है !          


        बाकी बस जाते हैं बंगलोर,हैदराबाद, मुम्बई ,नोएडा या गुड़गांव में !

   फिर लौट कर नहीं आते माँ बाप की छांव में !


         पिछले वर्ष का है किस्सा ,

      ऐसा ही एक बेटा लेकर हिस्सा 

            पुस्तैनी घर बेचकर ,

       माँ के विश्वास को तोड़ गया !

            उसको यतीमों की तरह , 

       दिल्ली के एयर पोर्ट पर छोड़ गया !


       अभी अभी एक नालायक ने माँ से 

          बात नहीं की पूरे एक साल !

 आया तो देखा माँ का आठ माह पुराना कंकाल !

    माँ से मिलने का तो केवल एक बहाना था !

      असली मकसद फ्लैट बेचकर खाना था !


    आपसी प्रेम का खत्म होने को है पेटा 

             लड़ रहे हैं बाप और बेटा 

करोड़पति सिंघानियां को लाले पड़ गये हैं खाने के 

         बेटे ने घर से निकाल दिया ,

    चक्कर काट रहा है कोर्ट कचहरी थाने के !


        परिवार को तोड़ने में अब तो 

         कानून ने भी बो दिए हैं बीज 

        जायज है लिव इन रिलेशनशिप 

               और कॉन्ट्रैक्ट मैरिज 


    ना मुर्गी ना अंडा ना सास ससुर का फंडा 

 जब पति पत्नी ही नहीं तो परिवार कहाँ से बसते 

    कॉन्ट्रैक्ट खत्म , चल दिये अपने अपने रास्ते

            इस दौरान जो बच्चे हुए , 

           पलते हैं यतीमों की तरह 

          पीते हैं तिरस्कार का जहर !


      अर्थ की भागम भाग में मीलों पीछे 

          छूट गए हैं रिश्ते नातेदार !

             टूट रहे हैं घर परिवार

           सूख रहा है प्रेम और प्यार

            परिवारों का इस पीढ़ी ने 

           ऐसा सत्यानाश किया कि ,

   आने वाली पीढ़ियां सिर्फ किताबों में पढ़ेंगी !

            वन्स अपॉन अ टाइम

              देयर वाज लिवींग

          जोइंट फैमिली इन इंडिया 

            दैट इज कॉल्ड परिवार

Saturday, July 1, 2023

वक्त,बेवक्त, हर वक्त बस तेरी यादें ही हैं...


 अबतक का सबसे पॉवरफुल मोटिवेशन लाइन...


दोस्तों...खुद की pic पर song लगाकर story डालने से Future नही बनता...Success की सबसे खास बात है की, वो मेहनत करने वालों पर फ़िदा हो जाती है I योग्यताएं कर्म से पैदा होती हैं ,जन्म से तो हर व्यक्ति शून्य होता है! बिना दुरी तय किये हुए कही दूर आप नहीं पहुंच सकते I अगर ख्वाईश कुछ अलग करने की है तो दिल और दिमाग के बीच बगावत लाजमी है Iजिस काम में काम करने की हद पार ना फिर वो काम किसी काम का नहीं I सफलता तक पहुंचने के लिए असफलता के Road से गुजरनी पड़ेगी I तब तक अपने काम पर काम करें जब तक की आप सफल नहीं हो जाते I हर कोई जन्म से ही किसी ना किसी काम में Champion होता है I बस पता चलने की देर होती है I Luck का तो पता नहीं लेकिन अवसर जरूर मिलती है मेहनत करने वालों को I अगर आप खुद ही खुद पर भरोशा नहीं करोगे तो कोई और क्यों करेगा I जिसने भी खुद को खर्च किया है I, दुनिया ने उसी को Google पर Search किया है I या तो आप अपनी Journey में लग जाओ ,नहीं तो लोग आपको अपने Journey में शामिल कर लेंगे I इतना काम करिये की काम भी आप का काम देखकर थक जाय I कठोर परिश्रम कभी भी विफल नहीं होता उम्मीद और विश्वास का छोटा सा बीज, खुशियों के विशाल फलों से बेहतर और शक्तिशाली है। अवसर की प्रतीक्षा में मत बैठो। मेहनत की चाबी से ही सफलता का ताला खुलता है। आज का अवसर ही सर्वोत्तम है। परिश्रम सौभाग्य की जननी है । जितना कठिन संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी ! कोई व्यक्ति अपने कार्यों से महान होता है, अपने जन्म से नहीं। जो लोग अपनी सोच नहीं बदल सकते वे कुछ नहीं बदल सकते । अपनी काबिलियत बस आप ही पहचान सकते हैं। सौभाग्य भी उसी को मिलता है, जिसने अपने आप को उस काबिल बनाया है। आपका लक्ष्य आपके मेहनत करने के तरीके से पता चलता है । बड़ी कामयाबी पाने के लिए छोटे छोटे बदलाव करना बहुत ज़रूरी है। बढ़ता वही है जो बदलता है। एक श्रेष्ठ व्यक्ति कथनी में कम, करनी में ज़्यादा सफल होता है । महानता कभी न गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है। अगर आप हार नहीं मानते, तो आपको कोई नहीं हरा सकता। आपकी जीत आपकी मेहनत पर निर्भर करती है। संघर्ष और धैर्य के साथ ही आप बड़ी मंजिल हासिल कर सकते हैं। बड़ा लक्ष्य प्राप्त करने के लिए बस एक मजबूत सोच की ज़रुरत होती है। समस्या का गुलाम बनने वाले कभी खुद के भाग्य का निर्माता नहीं बन पाते। अपने आप को बदलने की कोशिश करो, भविष्य खुद ब खुद बदल जाएगा। आदतों को सफल बनाओ, आप खुद ब खुद सफल हो जाओगे। सफल होने के लिए आपको अपने काम से प्यार करना पड़ेगा। वो व्यक्ति कुछ नहीं पा सकता, जिसने उम्मीद खो दी है। मेहनत पर ऐतबार करने वालों को अपने काम में खुदा नजर आता है। ऊपर उठना है तो गिरने का भय मिटाना होगा। हार पहनने के लिए, हार को हराना पड़ता है। सोच अच्छी रखना, नजरिया खुद ही अच्छा होगा।अपने अंदर अक्सर बदलाव लाते रहो परिस्थिति अपने आप सही हो जाएगी।आपको आपसे बेहतर कोई नहीं जानता, खुद से बात करिए, सारी समस्याएं खुद ब खुद खत्म हो जाएंगी...पैरों का क्या है साथ चल ही देंगे लेकिन दिल से पूछो साथ चलेगा क्या ! यदि आप उड़ना चाहते हैं, तो वह सब कुछ छोड़ दें जो आपको नीचे खींचता है... राज सर


वक्त,बेवक्त, हर वक्त बस तेरी यादें ही हैं...


तुम पढ़ नही पाओगे उदाशियां मेरी,मुस्कुराने के हुनर मैं इतने माहिर है हम दोस्त...जिक्र उसी की होती है जिसकी फ़िक्र खुद से ज्यादा होती है दोस्त...दिन तो दूसरों के कामों में बीत जाती है,पर राते सिर्फ तुम्हारी यादों के साथ गुजरती है दोस्त...वक्त,बेवक्त, हर वक्त बस तेरी यादें ही हैं मेरे साथ दोस्त...जुर्म का पता नहीं, बस सजा दिये जा रही है ज़िंदगी दोस्त...एक बेनाम सी मुहब्बत, मैंने किसी गुमनाम के नाम कर दी दोस्त...किसी से शिकायत किस बात की करनी, शायद हर शख़्स अपनी जगह सही है दोस्त...महफिलें तो तेरे बगैर भी रोशन रहते,बस चिरागों की जगह हम जलते दोस्त...प्रेम निःशुल्क होते हुए भी,इस सृष्टि का सबसे महंगा सुख है दोस्त...आकर्षण की एक अवधि होती है,प्रेम की कोई अवधि नहीं होती दोस्त...दो लफ्जों की है हमारी कहानी,इक नाम तुम्हारा इक मोहब्बत हमारी दोस्त...गुलजार सर की गजलों की तरह होते है कुछ लोग,हर हाल में अच्छे ही लगते हैं दोस्त...दो लोगो का रिश्ता हमेशा,किसी तीसरे की वजह से ख़राब होता है दोस्त...खैरियत पूछने वाले तो बहुत मिलेंगे,तलाश उसकी करो जो ख्याल भी रखे दोस्त...बस चार पल की ही तो बात है,वज़ू , कफ़न , दुआ और दफन दोस्त...तेरा बिछड़ना कोई आम वाकिया नहीं था दोस्त ,कई बरस लगे खुद को यकीन दिलाते हुए...कम ही होते हैं जज्बातों को समझने वाले इसलिए शायद, शायरों की बस्तियां नहीं होती दोस्त...आजकल लोग वफादार कम, अदाकारा ज्यादा होते जा रहे है दोस्त...कभी तड़प, कभी याद, कभी फिक्र में भी होती है,ज़रूरी नहीं कि मोहब्बत बयां सिर्फ जिक्र मे ही हो दोस्त...इश्क़ में फ़ना होने का अब दस्तूर कहां,मुसाफ़िर सा इश्क़ है आज यहां तो कल वहां दोस्त...क़ागज पर तो अदालत चलती है,मैंने तो तुझे निगाहों के फैसले से मंजूर किया था दोस्त...राज 


𝐄𝐠𝐨 𝐢𝐬 𝐭𝐡𝐞 𝐄𝐧𝐞𝐦𝐲...


𝟏. 𝐘𝐨𝐮𝐫 𝐰𝐨𝐫𝐬𝐭 𝐞𝐧𝐞𝐦𝐲 𝐥𝐢𝐯𝐞𝐬 𝐢𝐧 𝐲𝐨𝐮...


Wherever you are, whatever you’re doing, your worst enemy already lives inside you: your ego.Since pride is in us, it is either we feed it or starve it.How you deal with your pride makes the big difference...

𝟐. 𝐌𝐚𝐧𝐚𝐠𝐞 𝐲𝐨𝐮𝐫 𝐩𝐫𝐢𝐝𝐞...


Your ego is not some power you’re forced to satiate at every turn. It can be managed. It can be directed."As soon as you feel you are becoming egoistic, boastful, and proud – you can tell yourself to stop...


𝟑. 𝐏𝐫𝐢𝐝𝐞 𝐭𝐞𝐥𝐥𝐬 𝐲𝐨𝐮 𝐭𝐨 𝐭𝐚𝐥𝐤, 𝐡𝐮𝐦𝐢𝐥𝐢𝐭𝐲 𝐭𝐞𝐥𝐥𝐬 𝐲𝐨𝐮 𝐭𝐨 𝐥𝐢𝐬𝐭𝐞𝐧...


Ego encourages you to lift yourself and base your worth on nothing or false worth.On the other hand, humility tells you how important it is to listen to people...


𝟒. 𝐁𝐞𝐜𝐨𝐦𝐞 𝐚 𝐬𝐭𝐮𝐝𝐞𝐧𝐭...


Ego tells you not to listen to anyone.

As a result, you stop learning.When you become a student, you lay aside your pride.You admit to yourself that you don’t know everything. So, if you want to keep on learning, learn to be humble first...


𝟓. 𝐇𝐞𝐥𝐩 𝐩𝐞𝐨𝐩𝐥𝐞 𝐛𝐞𝐜𝐨𝐦𝐞 𝐠𝐫𝐞𝐚𝐭...


Ego focuses on self.Humility focuses on others.If you want to become great, you need to help other people become great...


Have a God Day Friends...

तेरे और मेरे मे फर्क क्या है...


 तेरे और मेरे मे फर्क क्या है...

जब अरमानो के गुल नहीं खिले न दोस्त,फिर जिंदगी की गुलशन किसी काम की नहीं होती...तू तो मिल सकी ना मुझको, पर मेरा दिल तेरे दिल का आशियाना है दोस्त...बे वक्त नहीं हर वक्त मेरा दिल तुझे दिल से याद करता है दोस्त...तू मेरी वो चाहत थी दोस्त, जिसे चाहने के बाद किसी और चाहत ही नहीं रहती... बेशस्क तू मेरी मोहोब्बत है दोस्त, पर अफ़सोस मै तेरा प्यार नहीं बन सका...प्यार का पता नहीं दोस्त, लेकिन बेवफाई तूने बहुत सूझ बुझ की...यशिका के संग ऐस तो नहीं रहा, लेकिन आँखों आंसू अब हर पल रहेंगे दोस्त...ये मेरी बदुआ नहीं है दोस्त, तेरे द्वारा मुझे पे किये गए सितम का अंजाम है... तू खुश तो है दोस्त, बस सिर्फ मुस्कुराने के वास्ते...मै तेरा तू मेरी थी,फिर बाद मे तू मेरी न मै तेरा रहा दोस्त...जब जब तेरी याद आती है न दोस्त, तेरी कसम से मर मर के जीता हूँ...तेरे और मेरे मे फर्क क्या है, जब तेरा दिल हँसता तो मै मुस्कुरता हूँ दोस्त...राज़ 


Top 20 lessons learned from "Emotional Intelligence...


#1 Rational and Emotional..


It is mentioned in the book that there are two different bits of intelligence. Throughout our lives, we make decisions by being influenced by these two types of intelligence. Who we are, what we do, our reactions depend entirely on it. The underlying reason for our very clever actions or our irrational but feel-good behaviors depends on these two types of intelligence.


#2 IQ Isn’t As Important As We Think


IQ can’t get you beyond being a good employee. It makes you graduate from school, but it can’t find you a job. When you go to the job interview, your diploma cannot answer the questions during the interview. You need to have good communication with the person who will hire you. It all depends on your emotional intelligence.


#3 Areas of Emotional Intelligence


Emotional intelligence is responsible for our motivation, awareness, empathy, and relationships. They’re all interconnected, and if you’re bad at one, you’re more likely to be bad at the others.


#4 The Emotional Brain Is Stronger


The outer upper part of our brain is the part where we make rational decisions, while the lower part is the part where we make emotional decisions. No matter how rational beings we may appear, we can very easily be deceived by the emotional brain. We can find excuses to trick the rational brain into doing what the emotional brain wants.


#5 Others’ Feelings


Thanks to our empathy, we can truly understand how others are feeling. If we could not distinguish between happy or angry people, there would be incredible chaos. Beyond these two basic emotions, we must develop an ability to empathize. In the absence of empathy, our communication aspect is affected very badly.


#6 Motivation


Our motivation, which enables us to endure the problems we face for a long time, is also a product of emotional intelligence. We can convince ourselves that we can solve problems. We can remain optimistic and have hope for the future.


#7 Awareness


One of our most difficult aspects to develop is our awareness. We must practice understanding how we truly feel. We must ask ourselves questions. We must listen to ourselves.


#8 Relationships


Relationships cannot be let go. It must be managed. This requires mutual tolerance and understanding. If you know how to resolve conflicts, it turns into a happy relationship for both parties.


#9 Negative and Positive Emotions


Our emotions change every moment, but the longer negative emotions stay, the more negatively they affect our lives. It prevents us from being successful in our work and relationships. Fortunately, these feelings are not difficult to change. You can learn to turn negative emotions into positive ones.


#10 Productivity


When your emotional intelligence gets stronger, your creativity starts to increase. Regardless of your field of work, you will start to see serious differences in your productivity. It will increase your performance. Longer hours allow you to work with the same efficiency.


#11 Emotional Intelligence Is The Key To Success


Since we cannot live a life independent of our emotions, the higher our emotional intelligence, the higher our quality of life will be. We know that successful managers are experts in managing their emotional intelligence. You can also take them as an example.


#12 Leadership


A commander cannot direct an entire army by saying “we are going to war”. You can’t manage a team by just saying what to do. You need to understand your team’s current feelings and level of motivation. You should encourage them to work. You have to use your emotional intelligence for all of these.


#13 Teams


Average talent teams that get along well with each other are more productive than gifted teams that don’t get along. It doesn’t matter how well a team with low emotional intelligence is in control of the numbers. They can’t even decide what to try to do.


#14 Stress


Difficulties at work and in our relationships put us under stress. Stress makes it difficult for us to find solutions to problems. When we can’t find solutions to problems, we get more stressed. To get rid of this dead end, we need to know how to manage our stressful situations.


#15 Marriage


The secret of long and happy marriages is sincerity in your feelings. If your marriage was not built on this basis of intimacy from the very beginning, it will begin to crack over the years. Even small problems become unsolvable. You have to be emotionally open at the beginning of the road.


#16 Leadership


Leadership does not mean dominance. Leading your colleagues to a common goal and making them believe in the reality of this purpose. Successful leaders are those who can keep their team’s motivation alive for many years. You have to make them desire the work to be done.


#17 Emotions Are All Normal


Anger, hatred, love, happiness… You can understand when and under what circumstances these feelings will emerge by following yourself. You may have these feelings depending on how you interpret the events you encounter. The important thing is to be able to react independently of your feelings. You may find yourself making promises that you cannot keep because you are happy, or you may resort to violence when you are angry.


#18 Being able to Express Your Emotions


Not everyone’s level of empathy can be very good. You may be in a difficult situation immediately. You may feel bad, but people may not understand it. In these situations, you may need to express your feelings a little more directly.


#19 You Are Not Your Emotions


Keep doing what you need to do, no matter how you feel. Success is achieved by people who cannot give up no matter what their feelings and thoughts are. Don’t let your feelings affect your actions.


#20 Timing


As soon as you feel a different emotion, try to think before you act. Because emotional intelligence moves faster than rational intelligence, it can make you act irrationally and make you say any unnecessary words..


Have a beautiful night friends...

Saturday, May 13, 2023

तड़प,बेचैनी,उलझन और ये उल्फ़ते...




Friends...Privacy & passion are the most powerful things in this world so keep both latent...पर्सनालिटी कैसी है यह महत्वपूर्ण नहीं है,मेंटालिटी कैसी है यह ज्यादा मायने रखता है। क्रोध बड़ा होकर प्रतिशोध बनता है और प्रतिशोध बूढ़ा होकर पश्चाताप। इत्र, मित्र, चित्र और चरित्र किसी के पहचान के मोहताज नहीं, ये चारों अपना परिचय स्वयं देते हैं...पवित्रता,धैर्य और दृढ़ता ये तीनों सफलता के लिए आवश्यक है परिस्थिति की पाठशाला ही इंसान को वास्तविक शिक्षा देती है। जीवन से बड़ा विज्ञान नहीं, शरीर से बड़ा कोई यंत्र नहीं...प्रकृति सबसे बड़ा वैज्ञानिक है, हम सब उसके विद्यार्थी हैं! अपना वो होता हैं जिसके साथ बातें खुलकर की जा सकें न कि संभलकर! अपने किरदार से महकता है इंसान,चरित्र को पवित्र करने का इत्र नहीं आता...अपनी फतेह पर गुरूर आने लगे तो चुपके से, मिट्टी से पूछ लेना आजकल सिकंदर कहां है...कल के लिए सबसे अच्छी तैयारी यही है कि आज अच्छा करो ।बहार से शांत दिखने के लिए अंदर से बहुत लड़ना पड़ता है! चांद को देखकर मुस्कुराना बेशक ईद है लेकिन इन्सान इन्सान को देखकर मुस्कुराये तो रोज ईद है। कुछ उलझनों के हल वक्त पर छोड़ देने चाहिए अच्छा वक्त जीने के लिए बुरे वक्त से लड़ना ही होगा...लोग गलत करने से पहले दाएं - बाएं तो देख लेते हैं बस ऊपर देखना भूल जाते है.संबंध बड़ी बड़ी बातें करने से नही,छोटे छोटे भावों को समझने से गहरे होते है ! अपनी तुलना दूसरों से कभी ना करें क्योंकि हर फल का स्वाद अलग-अलग होता है.सरल मन को सबसे अधिक छलते हैं लोग और तब तक छलते हैं जब तक वो अपनी सरलता न त्याग दे...लोगों को अपनी झूठी तारीफ सुनकर बरबाद होना तो मंजूर है परंतु सच्ची आलोचना सुनकर संभलना मंजूर नहीं। दिल अच्छा रखो हिसाब कमाई का नही कर्मों का होगा ! लड़ाई जारी रखो भाग्य से वक्त से और अपने आप से क्यूंकि हर एक सफल व्यक्ति का संघर्ष दर्दनाक होता है। बड़प्पन वह गुण है जो पद से नहीं संस्कारों से प्राप्त होता हैं। हमारा अस्तित्व हमारे कर्म से है किसी दूसरे के नजरिये से नहीं...भावनाओं को समझने वाला अनपढ़ व्यक्ति दुनिया का सबसे ज्ञानी व्यक्ति होता है। गिराने वालो का भी दिल से सुक्रिया करो क्योंकि उन्होंने ही आपको संभलना सिखाया है! टूट कर भी मुस्कुराना सिखा दे, सब्र ऐसी रूहानी ताकत होती है! तूफ़ान भी आना जरुरी है जिंदगी में तब पता चलता है कौन हाथ छुड़ाकर भागता है और कौन हाथ पकड़ कर ! हज़ार चाहने वालों में से एक समझने वाला बेहतर है। खुद की कहानी में गद्दार हो और वफादारी की बात करे ऐसे लोगो से सावधान रहो। जिनकी अकल छोटी होती है उनकी जुबान लंबी होती है. लोग मतलबी ऐसे हो रहे है जैसे अपना जनाजा भी खुद उठा के जाएंगे। बागी रहो उन महफिलो का जहां शोहरत तलवे चाटने से मिलती हो...Raj Sir 

तड़प,बेचैनी,उलझन और ये उल्फ़ते...

OYO में जामा की गई ID इस बात का गवाह है की जिस्म के भूखे सिर्फ लड़के नहीं होते दोस्त...इस दौर में मोहब्बत की इतनी सी दास्तान है,फ़ोन पर कोई और , दिल में कोई और, बिस्तर पर कोई और दोस्त...उतर गई उसकी भी मोहब्बत की खुमारी,जो कहती थी कभी हमसे इश्क़ इबादत है हमारी दोस्त...उजड़ जाते हैं सर से पाँव तक वो लोग,जो किसी बेपरवाह से बे-पनाह मोहब्बत करते हैं दोस्त...हम दर्द की उस दहलीज़ से भी होकर गुजरे है,जहाँ लोग अक्सर पँखे से लटक जाते है दोस्त...तुमने निकलते देखे होंगे जनाजे अरमानों के,हमने खुलेआम दफनाई है ख्वाहिशें अपनी दोस्त...किसी के छोड़ देने से मोहब्बत खत्म नहीं होती है,दिल में वो भी रहते है जो दुनिया छोड़ देते है दोस्त...कसम से धोखेबाज लोग शक्ल से बहुत मासूम दिखते हैं दोस्त...तड़प,बेचैनी,उलझन और ये उल्फ़ते,कितना कुछ है मेरे पास मुर्शद एक तेरे सिवा दोस्त...तेरे दर से आती थी खुशबू सुकून की,मेरे तमाम तकलीफों का तू इकलौता इलाज़ थी दोस्त...और क्या बताऊ अपनी जिंदगी की कहानियाँ तुझे,जिससे रौशनी की आश थी उसने ही आग लगा दिया दोस्त...जिंदगी जला ली हमने जब जैसी जलानी थी,अब धुएं पर तमाशा कैसा और राख पर बहस कैसी दोस्त...मुझे डर नही है अब कुछ खोने का क्योकि,मैने अपनी जिंदगी में जिंदगी को खोया है दोस्त...दूरियों में ही परखे जाते हैं रिश्ते,आखों के सामने तो सभी वफादार होते हैं दोस्त...पतझड़ में ही रिश्तो की परख होती है,बारिश में तो हर पत्ता हरा ही दिखता है दोस्त...सिर्फ लफ्ज़ नहीं ये दो दिलों की कहानी है,मेरी शायरी ही मेरे सच्चें प्यार की निशानी है दोस्त...जिनके खुद के किस्से अधूरे हो वो कहानियां बहतरीन लिखते हैं दोस्त...नाराज़ तो नही थे तेरे जाने से मगर,हैरान थे कि तूने मुड़कर भी नही देखा दोस्त...जताने का हक़ छीना जा सकता है,मगर चाहने का हक़ कोई नहीं छीन सकता दोस्त...ज़िन्दगी का सच बस इतना सा है ,इंसान बस पल भर में याद बन जाता है दोस्त...जिनकी मोहब्बत मुकम्मल नहीं होतीं,उनके शायरी के आशिक़ हजार होते हैं दोस्त ...उदासी अब मेरे बदन का हिस्सा हो गई,इसके बिना अब मैं अधुरा सा लगता हूं दोस्त...मेरा खालीपन बताता है मुझे, कितनी जगह दे रखी थी तुझे दोस्त...जिसे हम हर रोज लिखते है वो किसी और की कहानी का किरदार है दोस्त...Love never dies a natural death. It dies because we don’t know how to replenish its source. It dies of blindness and errors and betrayals. It dies of illness and wounds. it dies of weariness, of withering, of tarnishing friend...एक बात बताऊ तुझे तनहाई सौ गुना बेहतर है इस दुनिया के मतलबी लोगों से दोस्त...भरोसा नहीं है मुझपर ये बोल कर अनगिनत लोगो ने धोखे दिए है दोस्त...राज 


Life's Routine for Lifetime...


You work 8 hours to live 4…

You work 6 days to enjoy 1…

You work 8 hours to eat in 15 minutes…

You work 8 hours to sleep 5…

You work all year just to take a week or two vacation…

You work all your life to retire in old age…

And contemplate only your last breaths…

Eventually you realize that life is nothing but a parody of yourself practicing your own oblivion…

We have become so accustomed to material and social slavery that we no longer see the chains…

LIFE IS TOO SHORT… LIVE IT...


Have Wonderful Day friends...

Friday, April 14, 2023

तुझ से मिलते मिलते अपने आप से बिछड़ गए...

  तुझ से मिलते मिलते अपने आप से बिछड़ गए...



क्या खूब लिखा किसी शायर ने दोस्त...एक पल में एक सदी का मजा हमसे पूछिए, दूजे पल में जिंदगी क़ी सजा हमसे पूछिए,भूले है रफ्ता -रफ्ता उन्हें मुद्दतों में हम, किस्तों में खुद ख़ुशी की सजा हमसे पूछिए,आगाजे आशिकी का मजा आप लीजिये, अंजामे आशिकी क़ी सजा हमसे पूछिए...जरूरी तो नहीं हर पल तेरे पास रहुं,मुहोब्बत और ईबादत दूर से भी की जाती है दोस्त...चाहत, फिक्र, एहतराम, सादगी और वफा,मेरी इन्हीं आदतों ने मेरा तमाशा बना दिया दोस्त...तु ही बता हमारे रिश्ते का नाम क्या है,दोस्ती, मोहब्बत,जरूरत,जुनून,ख्वाहिश, या फिर ख़्वाबेइश्क़ दोस्त...इश्क वह खेल नहीं जो छोटे दिल वाले खेले,रूह कांप जाती है सदमे सहते सहते दोस्त...मुझको मेरे इश्क़ के द्वारा क्या खूब इनाम दिया गया,हर रात तेरे यादों में जागने का काम दिया गया दोस्त...तुझमें मैं ना सही तो क्या हुआ, तुम तो मुझमें बेसुमार हो न दोस्त...यह इश्क,महोब्बत की रवायतें अजीब है दोस्त, जिसको कभी पाया न हो उसे लोग कभी खोना नही चाहते...पत्थर में एक ही कमी है वह पिघलता नहीं है,पर यह उसकी खूबी भी है कि वह बदलता नहीं है दोस्त...मोहब्बत में पागल हो जाना आम बात है,एक ही शक्स के लिए पागल रहना खास बात है दोस्त...कुछ रिश्ते महोब्बत के ऐसे निभाएं जाते हैं,चंद लम्हों की मुलाकात के लिए तम्माम उम्र इंतजार में बिताएं जाते हैं दोस्त...कुछ हादसे ऐसे भी हुए है मेरी ज़िंदगी में,जिस ने जान भी ले ली और ज़िंदा भी छोड़ दिया दोस्त...अभी तक मौजूद है इस दिल में तेरे कदमों के निशान,मैंने तेरे बाद इस राह से किसी को भी नहीं गुजरने दिया दोस्त...देने वाले की हैसियत है,कोई प्यार देता है कोई धोखा दोस्त...सबको दिलासा देने वाला शख्स,अक्सर अपने दुखों में अकेला होता है दोस्त...तेरे बग़ैर ऐसे हैं हम जैसे इतवार के दिन वीरान स्कूल दोस्त...हम क़तरा क़तरा फ़ना हुए जर्रा जर्रा बिखर गए, ऐ दोस्त एक तुझ से मिलते मिलते अपने आप से बिछड़ गए...टूटे हुए लोग किसी को तकलीफ नहीं देते,वो बस खुद को अलग कर लेते है दोस्त...गम ये नहीं कि वक़्त ने साथ नहीं दिया,गम ये है जिसे वक़्त दिया उसने ही साथ न दिया दोस्त...मंज़िल पर पहुँच के करेंगे रास्तो की मुश्किलों का ज़िक्र,अभी तो बस आगे बढ़ने से फुर्सत नही है दोस्त...राज

 An imagination for a true love...for my will and wish... 




मोहब्बत की रिवायत को...

         हम दोनों यूं ही निभाएंगे...!!💕


कभी तुम याद आ जाना...


                 कभी हम याद आएंगे...!!💕


ख़फा नहीं होने देंगे कभी...


               दोनों एक-दूसरे को हम...!!💕


कभी तुम मुस्कुरा देना...


                  कभी हम मुस्कुराएंगे...!!💕


कोई कुछ भी कहता रहे...


            कहने दो सबकी आदत है...!!💕


हमारा दिल जो चाहेगा...


                हम वो करते ही जाएंगे...!!💕


शरारत का अगर मन हो तो...


              तुम यूं करना मेरे हमदम...!!💕


अचानक रूठ जाना तुम...


              और तुमको हम मनाएंगे...!!💕


 

Saturday, March 18, 2023

मेरे लिए मेरी दुनिया तेरी यादें है...


 मेरे लिए मेरी दुनिया तेरी यादें है...

दोस्त तुम्हारा तो पता नहीं मगर मेरा,दिल बहुत तरसता है तुमसे बात करने के लिए...दिल से आज भी दुआ निकलती है उसके लिए,जिसने मुझे दिल से निकाल दिया दोस्त...मैं बिछड़ कर तुझसे इसलिये भी नहीं रोया,कि तेरे बाद मेरे इन आंसुओं को सहारा कौन देता दोस्त...एक जख़्म ऐसा भी मिला जिंदगी में,किसी ने जान भी ले ली और जिंदा भी छोड़ दिया दोस्त...कुछ इस तरह से हमारी बातें कम हो गई ,कैसे हो पर शुरू और ठीक हूं पर खत्म हो गई दोस्त...हम दोनो को हम जैसे बहुत मिलेंगे,बस हम दोनो को हम दोनो कभी नहीं मिलेगें दोस्त...झूठ बोलते थे फिर भी दिल के सच्चे थे हम,ये उन दिनो की बात है जब बच्चे थे हम दोस्त...बहुत कुछ ही नहीं सब कुछ खोया है मैने,बस थोड़ा सा तेरा प्यार पाने के लिए दोस्त...सुकून देता है मुझे तेरा हर एहसास,मेरे लिए मेरी दुनिया तेरी यादें है दोस्त...सिसकियां लेता है वजूद मेरा, कुछ इस कदर नोच खा गई यादें तेरी दोस्त...वक्त के साथ घाव भर तो जाते हैं,लेकिन हादसे का शोर उम्र भर पीछा करता है दोस्त...आज भी मेरा दिल रोता है,जब जब तेरी बेवफ़ाई का अहसास होता है दोस्त...कुछ दर्द हमें अकेले ही झेलने होते हैं,जिंदगी का एकान्त बांटने कोई नहीं आता है दोस्त...तुमने देखे होंगे हजारों ख्वाब,हमने हर ख्वाब में सिर्फ तुमको देखा है दोस्त...मुझे थम जाना था बस तुम पर ही,किसी और बेहतर की तलाश नहीं थी मुझे दोस्त...फैसला करना था तुमने तो तमाम उम्र के लिए फासला कर लिया दोस्त...सारी दुनियाँ से मुलाक़ात एक तरफ,तेरे साथ बैठना और तुझे देखना एक तरफ दोस्त...इश्क़ वो लोग भी करते है दोस्त,जिनकी मुलाकातें कभी नही होती...उदास हूं तन्हा हूं अकेला हूं, शायद इसलिए अभी तक जिंदा हूं दोस्त...न जाने क्या सोंचकर फरेब किया उसने, जिंदगी समझ कर जिसके साथ खड़े थे हम दोस्त...जमाने लगते हैं सुबह होने में,जिन्हें रात को नींद नही आती दोस्त...जो रुला सकते हैं,वो हकीकत में भुला भी सकते हैं दोस्त...वो इश्क ही क्या जो किसी के चेहरे से हो,मज़ा तो तब है मोहब्बत किसी की बातों से हो दोस्त...एक उम्र में आकर समझ आया,क़ी क्यूँ लोग अकेले रहना पसंद करते हैं दोस्त...हमारे पास सिर्फ तुम्हारी यादें हैं,जिंदगी उन्हें मुबारक जिनके पास तुम हो दोस्त...रिश्ता चाहे जो भी हो, उसका पासवर्ड सिर्फ भरोसा होता है दोस्त...जिसके दम से थी रौनक मेरी तहरीरों में,वही एक शख़्स नहीं था मेरे हाथ की लकीरों में दोस्त...तहजीब अदब और सलीका भी तो कुछ है,झुका हुवा हर सख्श बेचारा नहीं होता दोस्त...जलील होने के बाद समझ आता है,जज्बात की कोई अहमियत नहीं होती दोस्त...राज

Thursday, March 9, 2023

जिंदगी किसी के लिए वफादार नहीं होती...





जिंदगी किसी के लिए वफादार नहीं होती...

प्यार करना हर किसी के बस की बात नहीं,जिगर चाहिए अपनी ही खुशियां बर्बाद करने के लिए दोस्त...मौका मिलने पर पलट देती है बाज़ी,जिंदगी किसी के लिए वफादार नहीं होती दोस्त...मैंने खुद को भी पढ़ कर देखा है,सिवाए मोहब्बत के कोई गुनाह न था दोस्त...कई ख्वाइशों को मारा है मैंने,मैं भी किसी कातिल से कम नही दोस्त...ज्यादा भी हुआ तो कम समझेंगे,हमदर्द का दर्द हैं दोस्त सिर्फ़ हम और तुम समझेंगे...जिसे सोच कर उठना और सोचते हुए सो जाना,पता नहीं कैसे वही बेवफा हो जाते है दोस्त...टूट जायेगी तुम्हारी जिद्द की आदत भी उस दिन,जब तुम्हे पता चलेगा कि तुम्हे याद करने वाला अब याद बन गया दोस्त...बहुत मिलेंगे तुम्हें तमीज और तहजीब वाले,पर याद आएंगी तुम्हें बदतमीज़ियां मेरी दोस्त...खूबसूरत होना उतना ज़रुरी नहीं है,पर जरूरी होना किसी एक लिए बहुत खूबसूरत है दोस्त...अकेले रोना भी क्या खूब कारीगरी है,सवाल भी खुद के होते है और जवाब भी दोस्त...नींद से क्या शिकवा जो आती नहीं,कसूर तो उस चेहरे का है जो सकून सोने नहीं देता दोस्त...तेरा नाम है या डाँकटर की दवा,जब भी लेता है बहुत शुकुन मिलता है दिल को दोस्त...खुदा ने सबको खूबसूरत बनाया हैं,किसी को अच्छी सूरत देकर किसी को अच्छा दिल देकर दोस्त...किस्मत तो लिखी थी मेरी सोने की कलम से,पर इसका क्या करें ज़ब स्याही में ही ज़हर था दोस्त...मुस्कुराहटें झूठी भी हुआ करती हैं दोस्त,इंसान को देखना नहीं बस समझना सीखा है मैने...औक़ात नही थी जमाने में जो मेरी कीमत लगा सके,कबख़्त इश्क में क्या गिरे मुफ़्त में नीलाम हो गए दोस्त...कितनी अजीब बात है ना दोस्त मिटटी से बना इंसान,डस्ट एलर्जी का शिकार है आज के डेट मे...सबक जिंदगी ने सिखाया मुझे,हर अपने ने रुलाया है मुझे,कोई अपना अपना नहीं होता, ऐ भी किसी अपने ने सिखाया है मुझे दोस्त...दुआ का रंग नहीं होता,मगर ये रंग ले आती है दोस्त...राज