Tuesday, November 4, 2025

समानता के रेखाचित्र

 "समानता के रेखाचित्र"


मांगना एक कर्म नहीं केवल यह संवाद है,

जहाँ अपनापन जन्म लेता है, जहां विस्थापित आत्माएं पाती हैं घर।

दौलत का माप, आर्थिक भूख की सीमा नहीं,

यह हृदय की गहराई, जहाँ बंधन बुनते हैं सहानुभूति के धागे।


विनम्रता वह कला है जो बराबरी में रंग भरती है,

मांगना और देना दो समानांतर धाराएँ जो मिलती हैं,

मज़लूमों के पैरों तले जब रखा जाए गरम रेत का बोझ,

तब ही समझ में आता है साझा दर्द का अर्थ और मूल्य।


जो मांगते हैं, वे खुद को मिटाते नहीं, वे अस्तित्व की पुष्टि करते हैं,

उनके छोटे-छोटे अनुरोधों में छुपा है समुदाय का आधार।

रिश्तों का ढांचा तब तक मजबूत रहता है, जब तक सहारा एकतरफा नहीं होता,

एक-दूसरे की जरूरतों को महसूस करना, यही है असली मानवता।


यह वही शिक्षा है जो माँ से मिली

कि सहानुभूति का अर्थ है कमजोर को कमजोर न समझना,

बल्कि उसे बराबर की ताकत देना,

जिसमें दोनों तरफ़ छिपी होती है परस्पर निर्भरता की महिमा।


यह ज्ञान नहीं, जीवन का अनिवार्य पाठ है

समाज तभी टिकता है जब हम एक-दूसरे के लिए सच्चे रहें,

जब माँग और देना, दोनों में हो गरिमा का समान वितरण,

तभी बनती है वह दुनिया जहाँ हर कोई महसूस करे “मैं भी यहाँ हूँ”।

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