Tuesday, November 4, 2025

अंधकार और विश्वास

 स्त्री और पुरुष : अंधकार और विश्वास


जीवन का मार्ग हमेशा सीधा, उजला और सरल नहीं होता। हर इंसान चाहे वह स्त्री हो या पुरुष किसी न किसी समय अंधकार से होकर गुजरता है। यह अंधकार कई रूपों में सामने आता है भय, असफलता, टूटे हुए सपनों, खोए हुए रिश्तों या आत्म-संदेह के रूप में। कभी यह हमारे बाहर होता है, और कभी भीतर विचारों, भावनाओं और उम्मीदों के बीच। यही अंधकार हमें परखता है, हमें कमजोर करता है, परंतु इसी के बीच विश्वास का जन्म होता है।


विश्वास, वह शक्ति है जो जीवन के सबसे कठिन क्षणों में भी हमें थामे रखती है। स्त्री के भीतर यह विश्वास अक्सर ममता, धैर्य और करुणा का रूप लेकर प्रकट होता है। वह आँसुओं के बीच भी मुस्कुराना जानती है, टूटे हुए सपनों के बीच भी उम्मीद बुनना जानती है। वही विश्वास उसे माँ बनाता है, प्रेमिका बनाता है, एक ऐसी शक्ति बनाता है जो जीवन को पोषित करती है।


पुरुष के भीतर यह विश्वास दृढ़ता, साहस और जिम्मेदारी के रूप में प्रकट होता है। जब परिस्थितियाँ उसके विरुद्ध होती हैं, तब भी वह खड़ा रहता है न केवल अपने लिए, बल्कि अपने प्रियजनों के लिए। उसका विश्वास उसे आगे बढ़ने, संघर्ष करने और गिरकर भी फिर उठ खड़े होने की प्रेरणा देता है।


विश्वास का अर्थ यह नहीं कि जीवन में संघर्ष नहीं होगा। इसका अर्थ यह है कि चाहे रास्ते कितने ही कठिन क्यों न हों, हम उन्हें पार करने का साहस रखते हैं। यह वह ज्योति है जो अंधकार के बीच रास्ता दिखाती है छोटी सी लौ, पर इतनी गहरी कि पूरी रात को मात दे सके।


अंधकार हमेशा यह कहने की कोशिश करता है “तुम अकेले हो।”

पर विश्वास, एक शांत और स्थिर स्वर में उत्तर देता है “नहीं, तुम कभी अकेले नहीं थे।”

जब कोई स्त्री अपने भीतर की शक्ति को पहचानती है और हार मानने के बजाय प्रेम को चुनती है, जब कोई पुरुष भय के बजाय आशा को थामता है तब मानवता का हर कोना थोड़ा और प्रकाशित हो उठता है।


स्त्री और पुरुष, दोनों ही जीवन की इस यात्रा में प्रकाश के वाहक हैं। एक की करुणा और दूसरे की दृढ़ता मिलकर उस ऊर्जा को जन्म देती है जो हर अंधकार को पराजित कर सकती है। जब दोनों एक-दूसरे का विश्वास बनते हैं, तब जीवन का अर्थ और भी गहरा हो जाता है।


अंततः, अंधकार उतनी ही देर तक रहता है, जितनी देर तक हम उसे अपने भीतर रहने देते हैं।

विश्वास जो स्त्री के हृदय की कोमलता और पुरुष की आत्मा की स्थिरता से जन्मता है वही वह अमर प्रकाश है, जिसे कोई भी अंधकार मिटा नहीं सकता। 

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