Tuesday, November 4, 2025

मिलन की धुंध

 "मिलन की धुंध"


कभी भी मेरी दुनिया में कदम मत रखना।

एक बार तुम मेरी दुनिया में आए,

और तुम्हारा दिल मेरा हो गया

अब तुम वापस नहीं जा सकते।

हर रास्ता, हर छुपने की जगह,

सिर्फ़ मुझे ही तुम्हें पकड़ने का इंतज़ार करती है।


मैं तुम्हें अपने भीतर कैद कर लूंगा।

प्यार की लहरें तुम्हें घेरेंगी,

हर साँस तुम्हारे भीतर मेरी चाहत की आग जगाएगी।

हमारे मिलन की धुंध, हमारी आग,

आसमान को रंगों और धुएँ से भर देगी,

जैसे कोई तूफान खुद को अपनी शक्ति में समेटे।


तुम्हारी आत्मा अब न तो स्वतंत्र है, न शांत।

एक मूक शिकारी की तरह,

हर पल का स्वाद चखती है,

हर सुख और पीड़ा को अपनी मांसपेशियों में महसूस करती है।

और मैं हर पल तुम्हें महसूस करता हूँ,

तुम मेरी धड़कनों में, मेरी साँसों में,

मेरे विचारों में घर कर चुके हो।


भागने की कोई जगह नहीं।

चाहे मैं खुद को रोकूँ, चाहे मैं खुद को आज़ाद समझूँ,

तुम मेरी हर सोच, मेरी हर कल्पना,

मेरे भीतर के हर कोने में मौजूद हो।

तुम मेरे हिस्से बन गए हो

हमेशा, अनंतकाल तक।


तुम अब केवल मेरे भीतर नहीं,

तुम मेरी हवा, मेरी आग,

मेरे हर एहसास का हिस्सा हो।

और मैं जानता हूँ,

कि चाहे मैं कितना भी चाहूँ, तुम्हारे बिना अधूरा रहूँगा।

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