कभी-कभी किसी से इतना गहरा लगाव हो जाता है, कि वो सिर्फ इंसान नहीं रहता एहसास बन जाता है।ऐसा एहसास, जो सांसों की तरह होता है… दिखता नहीं, पर उसके बिना सब कुछ अधूरा लगता है।
बस एक दिन उससे बात न हो, तो लगता है जैसे दिन अधूरा है
फोन की स्क्रीन बार-बार जलती है,
हर नोटिफिकेशन पर दिल धड़कता है
“शायद उसी का मैसेज हो…”
पर जब नहीं होता, तो वो धड़कन भी खामोशी में बदल जाती है।
कभी लगता है खुद से कह दूं
“क्या हुआ, एक दिन ही तो बात नहीं हुई।”
पर दिल मानता कहाँ है!
वो कहता है
एक दिन नहीं, पूरी उम्र सूनी लग रही है बिना उसके।
उसकी हंसी याद आती है,
वो छोटे-छोटे नखरे, वो ‘पता नहीं’ बोलकर छेड़ना,वो हर बात में छिपा है
वो जब कहती थी, “तुम पागल हो ना,”
और मैं जवाब देता था, तेरे लिए ही तो
और फिर एहसास होता है
प्यार का मतलब हमेशा साथ होना नहीं,
कभी-कभी बस उसका न होना ही ये जताने को काफी होता है
कि वो तुम्हारे भीतर कितना गहराई तक बस चुका है।
शायद यही मोहब्बत है
जब एक दिन की खामोशी, हज़ार बातों से ज़्यादा बोल जाती है…
और उस खामोशी में भी बस एक ही आवाज़ आती है
“कब बात होगी फिर?”
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