Tuesday, January 13, 2026

प्रेम ख़त्म नहीं होता

किसी किसी में इतना प्रेम भरा होता है कि ख़त्म ही नहीं होता। ज़िंदगी ख़त्म हो जाती है, पर प्रेम नहीं।


कोई उनके प्रेम को देखे या न देखे, कोई उन्हें प्रेम करे या न करे, कोई उनके प्रेम को स्वीकारे या न स्वीकारे, कोई उनके प्रेम को याद रखे या न रखे, उन्हें फ़र्क़ ही नहीं पड़ता।


उनका प्रेम ख़त्म ही नहीं होता। शायद प्रेम होता ही ऐसा है, कभी ख़त्म न होने वाला।


इसीलिए जब कोई कहता है कि इनका या उनका प्रेम ख़त्म हो गया, मैं सोचता हूँ, प्रेम ख़त्म कैसे हुआ?


हो ही कैसे सकता है?


जो अमर है, अविनाशी है, अनंत है; जो संभावनाओं और संवेदनाओं को जन्म देता है;


जो कण-कण की चेतना का हिस्सा है; जो कंकर को केसर कर देता है; जो इंसान को ईश्वर और ईश्वर को इंसान बना देता है, वो किसी एक के स्वीकार न किए जाने से कैसे ख़त्म हो सकता है? प्रेम कभी ख़त्म नहीं होता। हाँ, रिश्ते ख़त्म होते हैं, नाम ख़त्म होते हैं, क्योंकि रिश्ते और नाम ज़रूरत और स्वार्थ की नींव पर बने होते हैं, जो आज हैं और कल नहीं।


पर प्रेम, वो स्वतंत्र है। और जो स्वतंत्र है, वो ख़त्म नहीं होता।


वो रहता है, हमेशा, समय के अंत तक, और अंत के बाद भी।


उन लोगों में जो प्रेम में हैं, थे, या रहेंगे।


क्योंकि उन लोगों में प्रेम, ख़त्म नहीं होता...!!!

Sunday, January 11, 2026

रिश्ते चलते हैं भरोसे से

जब भरोसे की डोर धीरे-धीरे कटने लगती है


रिश्ते सिर्फ साथ रहने से नहीं चलते,

रिश्ते चलते हैं भरोसे से।


पति-पत्नी के रिश्ते में यह भरोसा सबसे कीमती होता है,

क्योंकि यहाँ इंसान अपना वह चेहरा दिखाता है

जो वह दुनिया से छुपाता है।


पुरुष की दुनिया बाहर से मजबूत दिखती है


लेकिन भीतर से वह भी उतना ही संवेदनशील होता है।


एक पुरुष दिन भर बाहर की दुनिया में लड़ता है

काम का दबाव, जिम्मेदारियों का बोझ,

कभी असफलता का डर,

कभी भविष्य की चिंता।


वह सब किसी को नहीं बताता।

क्योंकि उसे सिखाया गया है

“मर्द रोते नहीं”,

“कमज़ोरी मत दिखाओ।”


लेकिन जब वह घर लौटता है,

तो वह मर्द नहीं रहना चाहता

वह सिर्फ एक इंसान बनना चाहता है।


और उस इंसान को सबसे सुरक्षित जगह लगती है

अपनी पत्नी के पास।


वह सोचता है

“यह वही इंसान है जो मुझे जज नहीं करेगा,

जो मेरी बात को बाहर नहीं ले जाएगा,

जो मेरी कमजोरी को मेरी ताकत समझेगा।”


इसलिए वह अपनी असफलताएँ, डर, गुस्सा,

यहाँ तक कि अपने अधूरे सपने भी

सबसे पहले अपनी पत्नी से साझा करता है।


लेकिन स्त्री की भी अपनी दुनिया होती है


स्त्री अक्सर यह नहीं समझ पाती

कि जो बात उसके लिए साधारण बातचीत है,

वही बात पुरुष के लिए उसकी आत्मा का रहस्य हो सकती है।


वह कभी-कभी सोचती है

“मैंने तो यूँ ही मम्मी से कह दिया।”

“बस सहेली से शेयर किया था।”

“थोड़ा मज़ाक ही तो था।”


उसका इरादा बुरा नहीं होता।

वह दर्द देना नहीं चाहती।


लेकिन समस्या इरादे की नहीं,

असर की होती है।


जब पुरुष को पता चलता है

कि उसकी कही हुई बात

अब किसी और की जुबान पर है

तो उसके भीतर कुछ टूट जाता है।


वह सोचता है

“अगर मेरी सबसे निजी बात भी सुरक्षित नहीं,

तो मैं फिर किस पर भरोसा करूँ?”


यहीं से रिश्ते में चुप्पी जन्म लेती है


वह लड़ता नहीं।

शिकायत भी नहीं करता।


वह बस चुप हो जाता है।


अब वह कहता है

“कुछ खास नहीं।”

“सब ठीक है।”

“थक गया हूँ।”


लेकिन सच यह होता है

उसने अपने दिल का दरवाज़ा

धीरे से बंद कर लिया होता है।


स्त्री को लगता है

“वह बदल गया है।”

“अब पहले जैसा नहीं रहा।”


और पुरुष सोचता है

“अब बोलने का कोई मतलब नहीं।”


यहीं से रिश्ता

प्यार से उतरकर

सिर्फ जिम्मेदारी बन जाता है।


इस कहानी में कोई एक दोषी नहीं होता


यह लेख किसी स्त्री को दोषी ठहराने के लिए नहीं है,

और न ही पुरुष को पीड़ित साबित करने के लिए।


यह सिर्फ याद दिलाने के लिए है कि


भरोसा काँच की तरह होता है

एक बार टूट जाए, तो जुड़ तो जाता है

लेकिन दरार रह ही जाती है।


हर बात साझा करने की नहीं होती

कुछ बातें सिर्फ संभाल कर रखने के लिए होती हैं।


पति हो या पत्नी दोनों पहले इंसान हैं।


एक छोटा सा आत्म-मंथन


स्त्री खुद से पूछे

क्या मेरे पति आज भी मुझसे दिल की बात कहते हैं?

या मैंने अनजाने में उनकी चुप्पी की वजह बन गई?


पुरुष खुद से पूछे

क्या मैं अपनी पीड़ा को शब्दों में कह पा रहा हूँ?

या मैं सिर्फ सहता जा रहा हूँ?


क्योंकि रिश्ता तभी बचता है

जब बोलने वाले को सुरक्षा मिले

और सुनने वाला उसे संभाल सके।

मेरी हथेली पर उनके नाम

 जब पहली बार...मेरी हथेली पर उनके नाम की मेहंदी रची थी, तब माँ ने बड़े चाव से कहा था कि यह रंग जितना गहरा होगा, प्यार उतना ही अटूट होगा। 

आज शीशे में खुद को देखती हूँ तो लगता है कि वह रंग शायद प्यार का नहीं, बल्कि उन समझौतों की स्याही थी जो मुझे ताउम्र खुद को मिटाकर लिखने थे। शादी की उस पहली रात से लेकर आज के इस सन्नाटे तक, सफर लंबा रहा है, पर मेरा अपना कुछ भी नहीं रहा। 

जिस दिन फेरे हुए, उसी दिन मेरी पहचान के आगे एक विराम लगा दिया गया और मुझे सिखाया गया कि अब मेरा हर सच, 

किसी की सुविधा के अनुसार तय होगा।

अजीब तमाशा है इस दुनिया का। जब तक मैं घूँघट की ओट में सिसकती रही, सब चुप थे। जैसे ही मैंने अपनी रीढ़ सीधी की और ज्यादतियों के खिलाफ एक दीवार खड़ी की, पूरा शहर मेरे दरवाजे पर सुलह की पोटली लेकर खड़ा हो गया। 

यह सुलह नहीं है, यह तो मेरे वजूद की नीलामी है। वे लोग, जो बरसों मेरे आंसुओं से बेखबर थे, आज अचानक मेरे घर की शांति के रखवाले बन बैठे हैं। वे पक्ष और विपक्ष की बात नहीं करते, वे बस मेरी गलतियों का हिसाब लेकर आए हैं। 

उनका कहना है कि मेरा स्वाभिमान दरअसल मेरा अहंकार है, और मेरा बोलना उनकी शान में गुस्ताखी।

भीड़ के शोर में खड़े वे सुलहकार क्या जानें कि सुलह के रास्ते असल में टूटे हुए कांच के टुकड़ों पर चलने जैसे हैं। कोई यह क्यों नहीं पूछता कि जिस दहलीज को मैंने मंदिर माना था, वहीं मेरी रूह को हर दिन क्यों कुचला गया? 

जब वह चिल्लाते थे, तब यह समाज बहरा क्यों हो जाता था?

नहीं, तब तुम सब निजी मामला कहकर अपनी खिड़कियाँ बंद कर लेते थे।

लेकिन जब मैंने अपनी आवाज खो दी, तो सबको मेरे मौन से तकलीफ होने लगी। उलाहनों की बौछार कुछ ऐसी है कि कलेजा छलनी हो जाता है— अरे, चार लोग क्या कहेंगे?

बच्चों का मुंह तो देख लिया होता!

औरत का धर्म झुकना है, पत्थर होना नहीं।

इन नसीहतों के शोर में मेरी वह चीख कहीं खो गई है, जो मैंने उस रात मारी थी जब पहली बार मैंने अपनी सिसकियों के बीच उनको समझाने की कोशिश की थी, 

तब तो उन्होंने कहा था—तुम्हारी औकात क्या है मेरे बिना? दो वक्त की रोटी मिल तो रही है ,छत है,आखिर दिक्कत क्या है तुमको? परिवार में रहना है तो थोड़ा बहुत सहना तो पड़ेगा ही।

वे शब्द आज भी मेरे कानों में तेजाब की तरह गिरते हैं। उस दिन उन्होंने मुझे नहीं, बल्कि उस रिश्ते की पवित्रता को मारा था। जब मेरी आंखों में आंखें डालकर कहा था—तुम्हारे जैसी हजार औरतें हैं, जो कितना कुछ सहती है और चुपचाप रहती हैं,एक तुम ही स्पेशल आई हो कहीं की महारानी,अगर इतनी ही तकलीफ़ है तो चली क्यों नही जाती?

तब सुलह करवाने वाला यह समाज कहाँ था? तब ये उलाहने देने वाले लोग किस गहरे सन्नाटे में सोए थे?

आज जब मैं उससे बैर ठाने बैठी हूँ, तो मैं अकेली नहीं हूँ। मेरे आस-पास नसीहतों का एक पूरा जंगल खड़ा है। हर कोई जज है, हर कोई वकील है, बस कोई इंसान नहीं है। 

उनके लिए मेरा दुख सिर्फ एक घरेलू अनबन है, 

पर मेरे लिए यह अपनी बिखरी हुई किर्चियों को समेटने की आखिरी कोशिश है। वे चाहते हैं कि मैं वापस उसी नरक में मुस्कुराते हुए चली जाऊं ताकि उनकी परंपरा का भ्रम बना रहे। 

वे मेरी गलतियाँ ऐसे गिनाते हैं जैसे किसी अपराधी का कच्चा चिट्ठा हो, पर उनके गुनाह? उन्हें तो मर्दानगी के पर्दों के पीछे सलीके से छुपा दिया गया है। 

उनको थोड़ा सा गुस्सैल है, तू ही सह लिया कर बोल के माफ कर दिया गया और मुझे अड़ियल कहकर कटघरे में खड़ा कर दिया गया।

शादी से आज तक का यह सफर दरअसल मुझे खुद से दूर करने की एक साजिश थी। ये जो सुलह करवाने आए हैं,दरअसल मुझे बचाने नहीं, बल्कि मुझे फिर से बांधने आए हैं। उनकी नजरों में मेरा अपना कोई पक्ष ही नहीं है—मैं या तो सहनशील हूँ या गलत। 

बीच का कोई रास्ता उन्होंने छोड़ा ही नहीं। मेरी आँखें आज नम हैं, पर कमजोर नहीं। यह नमी उन बरसों के लिए है जो मैंने दूसरों की खुशियों की वेदी पर चढ़ा दिए। 

कलम गवाह है कि एक औरत की सबसे बड़ी गलती सिर्फ यह होती है कि वह एक दिन यह तय कर लेती है कि अब उसे और नहीं टूटना है।

लेकिन.....

मिटा दिये मैंने वो हर हर्फ़ जो किसी और ने लिखे थे,

अब मैं अपनी तकदीर का मुकम्मल कोरा कागज़ हूँ।



हाँ मुझे पसन्द है

हाँ मुझे पसन्द है...


उसकी आँखें, उसकी बातें,,

उसे देखना जाते जाते..

हाँ..मुझे पसन्द है।


उसे रुठाना, उसे मनाना,,

सारी बातें, उसे बताना,,

रोज सपनों में उसे गले लगाना..

हाँ..मुझे पसन्द है।


उसकी सादगी, उसकी शरारत,,

उसके पास, आने की वो आहट,,

उसकी पूरी हर एक ईबादत..

हाँ,,मुझे पसन्द है।


उसका यूँ किस्से सुनाना,,

बात बात पर खुशी से झूम जाना,,

अपना छोड़, सबका ख़्याल कर जाना,,

हर ग़म को अपनी मुस्कान के पीछे छिपा जाना,,

औऱ, पूछने पर एक नया बहाना..

हाँ,,मुझे पसन्द है।


उसका यूँ सजना सँवरना,,

आंखों में काजल का रखना,,

रोज़ नए कपड़े बदलना,,

बारी बारी सबसे लड़ना..

हाँ,,मुझे पसन्द है।


उसका मुझसे यूँ दूर जाना,,

पास आने पर सहज सिमट जाना,,

सारा गुस्सा मुझे दिखाना,,

औऱ हर बार मेरा हार जाना..

हाँ,,मुझे पसन्द है।।

जीवनसाथी

सबसे ज़्यादा अधिकार अगर किसी का होता है आपकी भावनाओं पर, तो वह कोई और नहीं आपका जीवनसाथी होता है।


लेकिन अजीब बात है, हम अक्सर सबसे ज़्यादा लापरवाही भी उसी के साथ करते हैं।


कई लोग कहते हैं,

“उम्र के साथ भावनाएँ मर जाती हैं।”

असल में भावनाएँ नहीं मरतीं, हम उन्हें ज़िंदा रखने की कोशिश छोड़ देते हैं।


उम्र बढ़ने के साथ ज़िंदगी भारी हो जाती है।

ज़िम्मेदारियाँ बढ़ती हैं, थकान बढ़ती है,

मन में शिकायतें जमने लगती हैं।

धीरे-धीरे इंसान “महसूस करना” कम कर देता है,

और सिर्फ़ “निभाना” सीख लेता है।


यही वह जगह है जहाँ रिश्ते चुपचाप बदलने लगते हैं।


शुरुआती दिनों में हम बिना कहे समझते थे,

छोटी-छोटी बातों पर खुश हो जाते थे,

एक मुस्कान, एक स्पर्श, एक इंतज़ार काफ़ी होता था।


लेकिन समय के साथ हम यह मान लेते हैं कि

अब सामने वाला हमें समझ ही लेगा,

अब प्यार जताने की ज़रूरत नहीं,

अब साथ रहना ही काफ़ी है।


यहीं सबसे बड़ी भूल होती है।


प्यार कोई स्थायी भावना नहीं है,

प्यार एक लगातार किया जाने वाला अभ्यास है।


जैसे शरीर को हर दिन खाना चाहिए,

वैसे ही रिश्ते को हर दिन

ध्यान, समय और संवेदना चाहिए।


बहुत लोग यह कहते हैं 

“अब वो फीलिंग नहीं आती।”


सच यह है कि

फीलिंग अपने आप नहीं आती,

उसे बुलाना पड़ता है।


कभी जानबूझकर ध्यान देना पड़ता है,

कभी मन न होते हुए भी स्नेह दिखाना पड़ता है,

कभी अहंकार छोड़कर पहला कदम बढ़ाना पड़ता है।


शुरुआत में यह बनावटी लग सकता है।

लेकिन मनोविज्ञान कहता है 

व्यवहार भावना को जन्म देता है,

भावना हमेशा व्यवहार से पहले नहीं आती।


मतलब,

अगर आप प्यार जैसा व्यवहार करते रहेंगे,

तो दिमाग धीरे-धीरे उसी भावना में ढल जाएगा।


रिश्ते टूटते इसलिए नहीं कि प्यार खत्म हो जाता है,

बल्कि इसलिए कि

हम सामने वाले को

“देखना” बंद कर देते हैं।


हम सुनते नहीं,

हम समझने की कोशिश नहीं करते,

हम मान लेते हैं कि

अब सब अपने आप चल जाएगा।


लेकिन कोई भी रिश्ता

अपने आप नहीं चलता।


जो रिश्ते लंबे समय तक खूबसूरत रहते हैं,

उनमें लोग उम्र के साथ

ज़्यादा समझदार होते हैं,

ज़्यादा नरम होते हैं,

ज़्यादा सजग होते हैं।


वे यह नहीं कहते कि

“अब समय नहीं है”,

वे कहते हैं

“यही समय है।”


क्योंकि वे जानते हैं 

आज अगर ध्यान नहीं दिया,

तो कल सिर्फ़ आदत बचेगी,

और आदत में गर्माहट नहीं होती।


ज़िंदगी बहुत लंबी नहीं है।

और रिश्ते तो उससे भी छोटे होते हैं।


जब सब कुछ होते हुए भी

कोई रिश्ता सूना हो जाए,

तो उसका दर्द

सबसे गहरा होता है।


इसलिए,

जब समय है.... महसूस करें।

जब सामने वाला है....देखिए।

जब रिश्ता है....उसे सींचिए।


क्योंकि अंत में

सबसे ज़्यादा अफ़सोस

उसी चीज़ का होता है

जिसे बचाया जा सकता था

लेकिन हमने उसे

“बाद में” के लिए टाल दिया।


कुछ स्त्रियाँ आज भी हैं...

कुछ स्त्रियाँ आज भी हैं

जो समय के संग चलती हैं,

पर समय में घुलकर

अपनी जड़ों को नहीं भूलतीं।


वे जानती हैं

मोबाइल की चमक,

शहरों की तेज़ रफ्तार,

और आधुनिकता की भाषा,

फिर भी उनके मन में

रीति-रिवाज

अबूझ बोझ नहीं,

सांसों की तरह स्वाभाविक हैं।


आज भी वे

मांग में पूरा सिंदूर भरती हैं,

आधा नहीं, संकोच में नहीं,

पूरी आस्था के साथ,

जैसे ललाट पर

परंपरा स्वयं उतर आई हो।


बड़ी सी बिंदी

उनकी भौंहों के मध्य

केवल श्रृंगार नहीं,

संस्कृति का विराम-चिह्न है,

जो कहता है,

“मैं हूँ,

और अपनी पहचान के साथ हूँ।”


कलाई भर चूड़ियाँ

जब चलती हैं तो

घर के आंगन में

मधुर नाद भर देती हैं,

उनकी खनक में

माँ की सीख,

दादी की कथाएँ

और नानी का आशीष

एक साथ बज उठता है।


वे पूरा श्रृंगार करती हैं,

किसी को दिखाने के लिए नहीं,

बल्कि अपने भीतर

स्त्री होने के उत्सव को

प्रतिदिन मनाने के लिए।


साड़ी उनके लिए

वस्त्र नहीं,

विरासत है—

जिसकी एक-एक सिलवट में

पूर्वजों का अनुशासन,

मर्यादा और

संयम बुना हुआ है।


वे आज भी

उन नियमों में रहती हैं

जो कभी घरों ने गढ़े थे—

जहाँ रिश्ते पहले आते थे,

और स्वार्थ बाद में।

कहने को लोग उन्हें

पुरानी सोच का कह दें,

पर सच यह है—

यही स्त्रियाँ

समय की आँधी में

संस्कृति की दीया-बाती बनकर

जली रहती हैं।

वे पीछे नहीं,


वे जड़ हैं


और जड़ें ही तय करती हैं

कि वृक्ष

कितनी ऊँचाई तक जाएगा।

सभी मर्द एक जैसे होते हैं

सभी मर्द एक जैसे होते हैं...

कौन मर्द ?

जो बाप बनकर ताउम्र तुम्हारी हर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी ख्वाहिशों को पूरी करता है,जिसे अपने फटे हुए जूते सिलवाने याद रहे ना रहे लेकिन अपनी बिटिया के लिए स्कूल ड्रेस खरीदना कभी नहीं भूलता है जो महज तुम्हारी छोटी सी इलेक्ट्रॉनिक गुड़िया और एक तुम्हारी पहली स्कूटी और साइकिल के लिए रोज 4 घंटे ओवरटाइम के नाम पर घर लेट आया करता है तुम उसी मर्द की बात कर रही हो ना?


सभी मर्द एक जैसे होते हैं।

कौन मर्द ?

वही मर्द ना ,जो भाई बनकर ताउम्र अपनी ख्वाहिशों को मार कर अपने सारे खिलौने तुम्हे दे दिया करता है, तुम्हें डांट ना पड़े इसलिए अपने बाप से मार भी खा लिया करता है, लाख लापरवाह रहे हो वो, लेकिन तुम्हारे एक तरफ उठने वाली हर एक नजर को वह फोड़ दिया करता है वही मर्द ना जो जिंदगी भर पागलों की तरह हंसता रहता है लेकिन तुम्हारी विदाई में फूट फूट कर रोया करता है वही मर्द ना जो जिंदगी के भाग दौड़ में सबसे दूर भाग कर तुम्हारे एक फोन कॉल का इंतजार करता है तुम उसे मर्द की बात कर रही हो ना?


सभी मर्द एक जैसे होते हैं।

कौन मर्द ?

वही मर्द ना जो पति बनकर अपने लड़कपन को एक ही झटके में खत्म कर देता है 80 की रफ्तार से चलाने वाला बाइक अचानक से 40 की रफ्तार में अपने जिम्मेदारियों को थाम लेता है मंगलसूत्र का पहचान वह मर मर्द ता उमर तुम्हारी छोटी छोटी ख्वाहिशों के लिए अपने हर बड़े बड़े अरमानों को मार दिया करता है तुम उसी मर्द की बात कर रही हो ना जो पति बनकर हर उम्र में एक दोस्त की तरह तुम्हारा साथ दिया करता है बोलो ना तुम उसी की बात कर रही हो ना?


सभी मर्द एक जैसे होते हैं

कौन मर्द ?

वही मर्द ना जो प्रेमी बनकर पूरी दुनिया को भूलाकर बस तुमसे मोहब्बत करता है तुम्हारे हर झूठे तुम्हारे हर कहानी की बातों को सच मानकर तुमसे बेइंतेहा इश्क करता है वह तुम्हारी झूठ में भी खुद के लिए सच खोज लिया करता है तुम्हारी एक मुस्कान के लिए अपना सब कुछ निछावर कर दिया करता है तुम उसी मर्द की बात कर रही हो ना जो प्रेमी बनकर अपनी प्रेमिका के लिए पूरी दुनिया से लड़ जाया करता है अरे बोलो ना, अरे चुप क्यों हो, बताओ ना की बात कर रही हो ना?


सभी मर्द एक जैसे होते हैं । 

कौन मर्द ??

वही मर्द ना जो दोस्ती के रिश्ते में एक दोस्त बनकर तुम्हें परिवार का हिस्सा मान लेता है जो तुम्हें पिज़्ज़ा खिलाने के लिए खुद के लिए बल्ला खरीदने का पैसा निकाल कर तुम्हें पिज्जा खिला देता है, वही मर्द ना जो मात्र दोस्ती का रिश्ता होने के बावजूद भी पूरी दुनिया से तुम्हारे लिए लड़ जाया करता है तुम्हें सब से बचाता है तुमसे हमेशा गाली खाता है लेकिन तुम्हारी आंखों में कभी आंसू नहीं आने देता वही मर्द ना जो तुमसे लड़ता है झगड़ते है तुम्हें रुलाता है और फिर तुम्हें हंसाने के लिए खुद जोकर बन जाया करता है बताओ ना तुम उसी मर्द की बात कर रही हो ना?


सभी मर्द एक जैसे ही होते है 

कौन मर्द ??

वही मर्द जो एक बेटा बन कर हमेशा अपनी मां का ढाल बन कर खड़ा रहता है वही मर्द जिसकी हर तम्माना को पूरी करने के लिए मां रात भर जागती है और मां के बुढ़ापे में वही लड़का एक ढाल बन कर मां की सेवा करता है मां के लिए उसका बेटा ही सबसे बेहतर होता है मां के लिए उसका बेटा ही हीरो है , हां ये बात सही है कि शादी होने के बाद वही कुछ बेटे अपनी मां को घर से निकाल कर वृद्ध आश्रम में भेज देते है लेकिन उनके इस कुकर्म के लिए क्या सिर्फ मर्द ही जिमेद्दार होते है लेकिन इन सब से दूर हिंदुस्तान के आज भी हर घर में श्रवण कुमार जैसे बेटे रहते है जिनके लिए उनकी मां ही उनकी दुनिया है ,

बताओ ना क्या तुम उसी मर्द की बात कर रहीं हो जो अपनी मां के लिए जान भी देते हैं...

Friday, January 9, 2026

Raj sir Words




दोस्तों...प्रशंसा को हमेशा विनम्रता से स्वीकार करें और आलोचना पर गंभीरता से विचार करें...अगर ऊंचाई हासिल करनी है, तो बाज बनो धोखेबाज नहीं...स्वीकारना, सीखना, सुधारना और उभरना यही जीवन है। उजालों में असलियत नज़र नही आती,अंधेरा ही बता सकता है सितारा कौन है...जीवन मे हैसियत का परिचय तब देना चाहिए जब बात आत्म सम्मान की हो अन्यथा सादगी ही सबसे बड़ा परिचय होता है...कहानियों में प्रेम कुछ और है किताबों में कुछ और ये मोह को प्रेम समझने वाला चल रहा है दौर...चेहरों की नुमाइश में रूह को कौन देखता है यहाँ तो बस ज़रूरतों का खेल चल रहा है दोस्तों किताबें भरी पड़ी हैं वफ़ा के किस्सों से और बाहर बस दिल बहलाने का दौर चल रहा है। परिवर्तनो को स्वीकार करना जीवन को सहज बना देता है...जीवन में सबसे शक्तिशाली चीज़ हमारी सोच है,जो किसी भी परिस्थिति को बदलने की क्षमता रखती है। जो मनुष्य जीवन में धेर्य और संतोष को अपना साथी बना लेता है वह कभी दुखी नहीं रहता...धर्म कि दिवारें ऊंची होती जा रही है और इंसानियत उनके नीचे दबती जा रही है...कामयाबी की पहली सीढ़ी है कोशिश,कोशिश से ग़लती,ग़लती से सबक,सबक से तजुर्बा और तजुर्बे से कामयाबी मिलती है...ज़िंदगी कभी भी परफेक्ट नहीं होती...हर किसी के अपने कमियाँ होती हैं, अपनी चुनौतियाँ होती हैं, अपनी परेशानियाँ होती हैं—और अपना जीने का तरीका होता है। इसलिए खुद को दूसरों से तुलना न करें; जैसे हैं वैसे ही अच्छी तरह जीना काफ़ी है...राज Sir


दोस्त जिस हुस्न का सौदागर राज था, ओ जिस्म किसी और के हाथो बिक गया,हम वहाँ हैं जहाँ से हम को भी,कुछ हमारी ख़बर नहीं आती दोस्त...ये होंठ चूमने वाली प्रेमिकाएं कब समझेंगी परेशानी पुरुषों का, दोस्त प्रेम मे माथा चूमा जाता है होंठ नही...कई फोन बदले जाएंगे कई इमेल को भी बदला जाएगा,मगर पुरुषों के फोन मे प्रेमिकाओं की तस्वीरें हमेशा बरकार रहती है...जिस पर ज़हर तक असर नही करता, उन लोगो अक्सर तन्हाई मार देती है दोस्त..आत्मसम्मान पे लगे ज़ख्म,माफी की इजाजत कभी नहीं देते दोस्त....उसूलों के पक्के मर्द के लिए हुस्न माटी है,और किरदार की पक्की औरत के लिए पैसा राख दोस्त...असली परख हुस्न या दौलत से नहीं बल्कि किरदार से होती है,मजबूत उसूलों वाली शख्सियत हर चमक पर भारी होती है दोस्त...उसके भूतकाल पर विवाद क्या करना दोस्त,जिसके यादो साथ अनंत काल तक रहना हो...मुकम्मल कहां रही किसी की जिंदगी दोस्त,हर शख्स कुछ खोता ही रह गया कुछ पाने के लिए...लोगों की पहचान उनके वचन से नहीं उनके व्यवहार से होती है,अच्छे बोल सबके पास होते हैं,पर अच्छा दिल बहुत कम लोगों के पास होता है दोस्त...मैं भी नहीं अकेला हूँ दोस्त,शाम है‚ दर्द है‚ उदासी है और तेरी खूबसूरत यादें है...शिद्दत की प्यास है इस मुद्दत के प्यासे को,तरे हाथों से जो मिले तो दो बूंद ही काफी है दोस्त...चायपत्ती और पति मे क्या समानता है जानते हो दोस्त,दोनों के ही भाग्य मे जलना और उबलना लिखा है...फ़िर तेरे बाद कुछ खोया नही हमने दोस्त,तू मेरी ज़िंदगी का आखिरी नुकसान है ...हक़ीक़त की धुप में जलना मंजूर है दोस्त हमें पर,झुठ की छांव में बिकना मेरी फितरत नहीं...बदलते लोग, बदलते रिश्ते और बदलता मौसम,चाहे दिखाई ना दे मगर महसूस जरूर होते है दोस्त...जीवन में सबसे कठिन है लोगो को पहचानना, क्योंकि इंसान जैसा दिखता है वैसा होता नहीं दोस्त...अब तजुर्बा कहता है रिश्तो में फांसला रखिए ज़्यादा नजदीकियां अक़्सर दर्द से जाती हैं दोस्त...मैंने शराब और प्यार दोनों का स्वाद चखा है ,मुझ पर विश्वास कर दोस्त तेरे लिए हमेसा बेहतर थे और है...कोई क्या लगाएगा मेरे बर्दाश्त करने का अंदाजा दोस्त,मैंने मर जाने जैसा वक्त भी जी के गुजारा है...सूरत तो वह देखते हैं जिन्हें रात गुजारनी होती है दोस्त,जिंदगी गुजारने वाले सीरत देखा करते हैं...एक समझने वाला,हज़ारों चाहने वालों से बेहतर है दोस्त...कहां से लाए पक्के सबूत की तुम्हें कितना चाहते हैं.. दिल, दिमाग, नजर, सब तो तेरी कैद में है दोस्त... Raj


Have a wonderful night friends...

Thursday, January 8, 2026

दो शरीरों का मिलन

जब किसी पुरुष की ऊर्जा किसी स्त्री की ऊर्जा से गहरे सामंजस्य में मिलती है

तो कुछ ऐसा घटता है जो पारलौकिक है।

यह केवल दो शरीरों का मिलन नहीं होता —

यह दो ब्रह्मांडों का एक लय में विलय होना है।

जब यह पूर्णता से होता है, तब दोनों खो जाते हैं।

तब न पुरुष रहता है, न स्त्री;

केवल एक ऊर्जा रह जाती है — पूर्णता की ऊर्जा।


सामान्य प्रेम में तुम केवल सतह पर मिलते हो —

शरीर को छूते हो, बातें करते हो, भावनाएँ साझा करते हो —

लेकिन भीतर से अलग ही रहते हो।

जब प्रेम ध्यानमय हो जाता है, जब उसमें जागरूकता उपस्थित होती है,

तब यह मिलन दो व्यक्तियों का नहीं, दो ध्रुवों का हो जाता है।


पुरुष सूर्य की ऊर्जा लिए होता है — सक्रिय, पैठनेवाली, बाहर की ओर जानेवाली।

स्त्री चंद्रमा की ऊर्जा लिए होती है — ग्रहणशील, ठंडी, स्वागतपूर्ण।

जब ये दोनों ऊर्जा जागरूकता में मिलती हैं,

तब एक नई दिशा खुलती है — वही ईश्वर का द्वार है।


किसी पुरुष के लिए “पूर्ण स्त्री” वह नहीं जो उसकी इच्छाओं को पूरा करे,

बल्कि वह है जो उसके अस्तित्व का दर्पण बन जाए।

और किसी स्त्री के लिए “पूर्ण पुरुष” वह नहीं जो उस पर अधिकार करे,

बल्कि वह है जिसकी उपस्थिति में वह खिल सके।


पुरुष को कभी-कभी समर्पण करना सीखना होता है —

यही उसका स्त्री के माध्यम से दीक्षा है।

और स्त्री को मौन और साक्षी होना सीखना होता है —

यही उसकी पुरुष के माध्यम से दीक्षा है।


जब यह द्वंद्व नाच बन जाता है —

जब न शक्ति की लड़ाई होती है, न कोई माँग, न कोई भय —

तब उनके बीच जो ऊर्जा बहती है, वह आनंदमय, सृजनशील और प्रार्थनापूर्ण बन जाती है।

तब सेक्स अब सेक्स नहीं रहता — वह समाधि बन जाता है।

प्रेमी किसी विशालता में खो जाते हैं;

वे अस्तित्व के सार को छू लेते हैं।


“पूर्ण ऊर्जा” का मिलना किसी “पूर्ण व्यक्ति” को पाना नहीं है —

यह एक “पूर्ण अनुनाद” को पाना है।

यह किसी के साथ भी घट सकता है,

जब दोनों खुले हों, निडर हों, और उपस्थित हों।

जिस क्षण दोनों की ऊर्जाएँ एक स्वर में गूँजती हैं,

उसी क्षण तुमने दिव्य प्रिय को पा लिया।”



वासना सभी को भिखमंगा बना देती है। न कभी द्वार खुलते, न कभी भिक्षापात्र भरता। वासना सभी की आंखों को आंसुओं से भर देती है। वासना सभी के हृदय में कांटे बो देती है। वासना महादुख है।


मगर इसका यह अर्थ नहीं कि वासना का कोई उपयोग नहीं है। यही उपयोग है कि वासना तुम्हें जगाए, झंझोड़े; दुख, पीड़ा, अंधड़ उठें; और तुम चौकन्ने हो जाओ; तुम सावधान हो जाओ। वासना को देख-देख कर एक बात अगर तुम समझ लो, तो दुख का सारा सार निचोड़ लिया--कि मांगना व्यर्थ है। मांगे कुछ भी नहीं मिलता। दौड़ व्यर्थ है, दौड़कर कोई कहीं नहीं पहुंचता।


इतनी समझ आ जाए दुख में कि दौड़कर कोई कहीं नहीं पहुंचता और तुम रुक जाओ; इतनी समझ आ जाए कि मांगकर कुछ भी नहीं मिलता और तुम्हारी सब मांगें चली जाएं, तुम्हारी सब प्रार्थनाएं चली जाएं, तुम भिक्षापात्र तोड़ दो--उसी क्षण संन्यास का फूल खिल जाता है।


संन्यास का अर्थ क्या होता है? इतना ही अर्थ होता है: इस संसार में न कुछ मिलता है, न मिल सकता है। दौड़ है, आपाधापी है, खूब संघर्ष है, लेकिन संतुष्टि नहीं। जिसने यह देख लिया, जिसके भरम टूटे, जिसके सपन टूटे, जिसके ये सारे भीतर चलते हुए झूठे खयाल दुख से टकरा-टकरा कर खंडित हो गए, बिखर गए, उसको बड़ा लाभ होता है। लाभ होता है कि वह अपने में थिर हो जाता  है...

मेहनत से आगे की समझ...

खुद को प्रसिद्ध करने की कला: मेहनत से आगे की समझ


दुनिया में लाखों लोग दिन-रात मेहनत करते हैं।

कोई लिखता है, कोई गाता है, कोई पढ़ाता है, कोई व्यापार करता है।

फिर भी एक अजीब सच्चाई सामने आती है


कुछ लोग कम मेहनत में प्रसिद्ध हो जाते हैं,

और कुछ लोग जीवन भर मेहनत करके भी गुमनाम रह जाते हैं।


यह अन्याय नहीं है, यह कला और समझ का अंतर है।


केवल मेहनत क्यों पर्याप्त नहीं होती?


मेहनत तब तक अधूरी है जब तक उसमें यह सवाल न जुड़ा हो

“मैं किसके लिए कर रहा हूँ, और उन्हें अभी क्या चाहिए?”


उदाहरण 1: मेहनती लेखक बनाम समझदार लेखक


एक लेखक रोज़ 5 घंटे गहरी साहित्यिक रचनाएँ लिखता है

कठिन शब्द, जटिल विचार, भारी भाषा


दूसरा लेखक रोज़ 30 मिनट लिखता है

सरल भाषा, आज की समस्या, लोगों की भावना


परिणाम

पहला लेखक विद्वानों में सराहा जाता है,

दूसरा लेखक आम लोगों में प्रसिद्ध हो जाता है।


 कारण?

दूसरा लेखक लोगों की ज़रूरत लिखता है,

पहला लेखक अपनी विद्वता दिखाता है।


प्रसिद्धि = समस्या का समाधान + सही समय


लोग आपको तब सुनते हैं जब


वे उलझन में हों


दर्द में हों


डर में हों


या आशा ढूँढ रहे हों


उदाहरण 2: साधारण वीडियो, असाधारण प्रसिद्धि


एक व्यक्ति कैमरे के सामने बैठकर कहता है:


“अगर आज तुम्हें कोई समझ नहीं पा रहा,

तो इसका मतलब यह नहीं कि तुम गलत हो।”


तकनीकी रूप से कुछ भी खास नहीं।

पर वीडियो लाखों लोग देख लेते हैं।


क्यों?


क्योंकि उसने वही कहा जो उस समय लोगों के दिल में चल रहा था।


शौंदर्य साधना का रहस्य


यहाँ शौंदर्य का मतलब केवल बाहरी सुंदरता नहीं है, बल्कि


भाषा की सुंदरता


विचार की स्पष्टता


प्रस्तुति की सादगी


और भावनाओं की सच्चाई


उदाहरण 3: दो शिक्षक


शिक्षक A:


बहुत ज्ञानी


लेकिन कठिन भाषा


छात्रों से दूरी


शिक्षक B:


सामान्य ज्ञान


लेकिन उदाहरण जीवन से


छात्रों की भाषा में बात


प्रसिद्ध शिक्षक कौन?

शिक्षक B


 क्योंकि उसने ज्ञान के साथ अनुभव बाँटा।


संवेदना को समझना: प्रसिद्धि की असली चाबी


लोग यह नहीं पूछते कि आप कितने महान हैं।

वे यह देखते हैं


“क्या यह व्यक्ति मुझे समझता है?”


उदाहरण 4: दो समाजसेवी


एक भाषण देता है

“गरीबी खत्म होनी चाहिए!”


दूसरा कहता है

“मुझे पता है, महीने के आख़िरी 5 दिन कैसे लगते हैं।”


दूसरा अधिक प्रभावी क्यों?

क्योंकि उसने अनुभव की भाषा बोली।


फालतू मुद्दों से दूरी, अपने लक्ष्य पर ध्यान


जो व्यक्ति हर बहस में कूदता है,

हर ट्रेंड पर राय देता है,

वह खुद को बिखेर देता है।


प्रसिद्ध व्यक्ति जानता है


मुझे क्या बोलना है


और क्या छोड़ देना है


उदाहरण 5: शांत व्यक्ति की पहचान


जो हर बात पर प्रतिक्रिया नहीं देता,

लोग उसकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार करते हैं।


 कम बोलना + सही बोलना = प्रभाव


खुद की जागरूकता: मैं क्या कर रहा हूँ?


प्रसिद्ध होने वाला व्यक्ति


अंधाधुंध मेहनत नहीं करता


वह देखता है:


मैं क्यों कर रहा हूँ?


इसका परिणाम क्या होगा?


क्या यह मेरे लक्ष्य से जुड़ा है?


उदाहरण 6: दौड़ने वाला और दिशा जानने वाला


एक व्यक्ति तेज़ दौड़ रहा है


दूसरा धीरे चल रहा है लेकिन दिशा सही है


अंत में कौन पहुँचेगा?

 दूसरा


प्रसिद्धि का सूत्र


प्रसिद्धि का अर्थ शोर नहीं,

प्रसिद्धि का अर्थ सही जगह पर सही स्वर है।


 मेहनत ज़रूरी है

धैर्य ज़रूरी है

लेकिन साथ में चाहिए...


लोगों की जरूरत की समझ


समय की पहचान


संवेदना की गहराई


और स्वयं की स्पष्टता


जो व्यक्ति लोगों की भाषा में

उनके दर्द का समाधान बन जाता है,

वही बिना चिल्लाए प्रसिद्ध हो जाता है।

कौनसा ड्राई फ्रूट्स खाए

बहुत जरूरी है ये जानना किस बीमारी में कौनसा ड्राई फ्रूट्स खाए जरूरत के अनुसार कैसे और कब खाए ड्राई फ्रूट्स प्राकृतिक जीवन देखे उपयोग करने का तरीका सम्पूर्ण विवरण:-


1.बादाम:-


दिमाग़ की कमजोरी

याददाश्त कम होना

शारीरिक दुर्बलता

बच्चों में मानसिक विकास

कैसे सेवन करें

रात में 5–6 बादाम पानी में भिगो दें

सुबह छिलका उतारकर अच्छी तरह चबाएँ

चाहें तो 1 चम्मच शहद के साथ लें


क्यों लाभकारी

बादाम में विटामिन E, ओमेगा-3 और प्रोटीन होते हैं, जो मस्तिष्क व नसों को मज़बूत करते हैं।


2️⃣ काजू:-

किस बीमारी में लाभकारी

अत्यधिक कमजोरी

कम वजन

थकान

कैसे सेवन करें

3–4 काजू सुबह नाश्ते के साथ

या हल्का भूनकर

❌ कब न लें

मोटापा, शुगर और उच्च कोलेस्ट्रॉल में अधिक सेवन न करें।


3️⃣ अखरोट:-

किस बीमारी में लाभकारी

हृदय रोग

तनाव, चिंता

ब्रेन हेल्थ

कैसे सेवन करें

1–2 अखरोट सुबह खाली पेट

क्यों

अखरोट में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो दिल और दिमाग दोनों के लिए श्रेष्ठ है।


4️⃣ पिस्ता:-

किस बीमारी में लाभकारी

कमजोरी

आँखों की थकान

रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना

कैसे सेवन करें

6–8 पिस्ता दिन में कभी भी

बेहतर है भिगोकर या हल्का भूनकर


5️⃣ किशमिश:-

किस बीमारी में लाभकारी

कब्ज

खून की कमी

पेट की कमजोरी

कैसे सेवन करें

10–15 किशमिश रात को भिगोकर

सुबह पानी सहित सेवन करें


6️⃣ काली किशमिश:-

किस बीमारी में लाभकारी


एनीमिया


चक्कर आना


महिलाओं में कमजोरी


कैसे सेवन करें


8–10 काली किशमिश भिगोकर सुबह


7️⃣ खजूर:-

किस बीमारी में लाभकारी


अत्यधिक कमजोरी


कम रक्तचाप


प्रसव के बाद कमजोरी


कैसे सेवन करें


1–2 खजूर गुनगुने दूध के साथ


❌ मधुमेह में न लें


8️⃣ अंजीर:-

किस बीमारी में लाभकारी


पुरानी कब्ज


बवासीर


पेट की सूजन


कैसे सेवन करें


2 अंजीर रात को भिगोकर


सुबह खाली पेट


9️⃣ सूखी खुबानी:-

किस बीमारी में लाभकारी


खून की कमी


त्वचा रोग


कमजोरी


कैसे सेवन करें


2–3 खुबानी भिगोकर सुबह


🔟 मूंगफली:-

किस बीमारी में लाभकारी


कमजोरी


सर्दी में ऊर्जा


कैसे सेवन करें


भुनी हुई 1 मुट्ठी


❌ एसिडिटी व एलर्जी में न लें


1️⃣1️⃣ सूखा नारियल:-

किस बीमारी में लाभकारी


शरीर में रूखापन


कमजोरी


कैसे सेवन करें


1–2 छोटे टुकड़े दिन में


1️⃣2️⃣ मखाना:-

किस बीमारी में लाभकारी


मधुमेह


हृदय रोग


गर्भावस्था में कमजोरी


कैसे सेवन करें


घी में हल्का भूनकर 1 कटोरी


1️⃣3️⃣ हेज़लनट:-

किस बीमारी में लाभकारी


हृदय व नसों की कमजोरी


कैसे सेवन करें


3–4 दाने सुबह


1️⃣4️⃣ ब्राज़ील नट:-

किस बीमारी में लाभकारी


थायरॉयड


कैसे सेवन करें


सप्ताह में 2–3 बार केवल 1 दाना


1️⃣5️⃣ मैकाडेमिया नट:-

किस बीमारी में लाभकारी


हृदय स्वास्थ्य


कैसे सेवन करें


2–3 दाने

❌ अधिक मात्रा से वजन बढ़ता है


1️⃣6️⃣ पाइन नट:-

किस बीमारी में लाभकारी


कमजोरी


यौन दुर्बलता


कैसे सेवन करें


1 चम्मच सुबह


1️⃣7️⃣ सूखी क्रैनबेरी:-

किस बीमारी में लाभकारी


मूत्र संक्रमण (UTI)


कैसे सेवन करें


1 छोटा चम्मच


1️⃣8️⃣ सूखी ब्लूबेरी:-

किस बीमारी में लाभकारी


आँखों की कमजोरी


एंटीऑक्सीडेंट की कमी


कैसे सेवन करें


1 चम्मच दिन में


1️⃣9️⃣ प्रून्स (सूखा आलूबुखारा):-

किस बीमारी में लाभकारी


गंभीर कब्ज


कैसे सेवन करें


2–3 भिगोकर सुबह


2️⃣0️⃣ अंजीर स्लाइस:-

किस बीमारी में लाभकारी


कब्ज


हड्डियों की कमजोरी


कैसे सेवन करें


2–3 स्लाइस भिगोकर

Wednesday, January 7, 2026

कौनसा तेल है लाभकारी

किस शारीरिक व्याधि में कौनसा तेल है लाभकारी,कैसे और किस तेल का सेवन है स्वास्थ्यवर्धक,देखे डिटेल...


❤️ हृदय रोग (Heart Disease)

लाभकारी तेल:जैतून तेल,सरसों तेल,अलसी का तेल 

सेवन विधि:

भोजन बनाने में 1–2 चम्मच प्रतिदिन

सलाद या सब्ज़ी में कच्चा उपयोग अधिक लाभकारी


🍬 मधुमेह (डायबिटीज)

लाभकारी तेल:नारियल तेल, मूंगफली तेल,सरसों का तेल

सेवन विधि:

तले भोजन से बचें

हल्की आँच पर बना भोजन, दिन में 1–2 चम्मच


🦴 जोड़ों का दर्द / गठिया

लाभकारी तेल:तिल का तेल,सरसों का तेल,अरंडी का तेल

सेवन/उपयोग:

बाहरी मालिश प्रतिदिन

अरंडी तेल ½ चम्मच गुनगुने दूध के साथ (सप्ताह में 2–3 बार)


🧠 तनाव व अनिद्रा

लाभकारी तेल:नारियल तेल,बादाम तेल 

उपयोग:

सिर की मालिश रात में

बादाम तेल 1 चम्मच गुनगुने दूध के साथ


🔥 पाचन समस्या व कब्ज

लाभकारी तेल:अरंडी तेल,जैतून का तेल

सेवन विधि:

अरंडी तेल ½–1 चम्मच रात को (डॉक्टर की सलाह से)

जैतून तेल सलाद या भोजन में


🧴 त्वचा रोग

लाभकारी तेल:नीम का तेल,नारियल तेल 

उपयोग:

प्रभावित स्थान पर दिन में 1–2 बार

नीम तेल को नारियल तेल में मिलाकर लगाएँ


🩸 उच्च रक्तचाप

लाभकारी तेल:जैतून तेल,अलसी तेल 

सेवन विधि:

1–2 चम्मच प्रतिदिन

नमक कम रखें, तेल सीमित मात्रा में लें


🧠 स्मरण शक्ति व मस्तिष्क कमजोरी

लाभकारी तेल:अखरोट का तेल,ब्राह्मी तेल

उपयोग विधि:

अखरोट तेल 1 चम्मच सुबह खाली पेट

ब्राह्मी तेल से रात में सिर की मालिश


👁️ आँखों की कमजोरी

लाभकारी तेल:बादाम तेल,अरंडी का तेल

सेवन/उपयोग:

बादाम तेल 1 चम्मच दूध के साथ

अरंडी तेल की 1 बूँद आँखों के चारों ओर (आँख के अंदर नहीं)


🩺 यकृत (लिवर) रोग

लाभकारी तेल:जैतून का तेल,अलसी तेल 

सेवन विधि:

भोजन में 1–2 चम्मच

तले भोजन से परहेज़


🤧 सर्दी-खाँसी व जुकाम

लाभकारी तेल:सरसों का तेल,नीलगिरी का तेल

उपयोग:

सरसों तेल में लहसुन डालकर छाती पर मालिश

नीलगिरी तेल की भाप


🦷 दाँत व मसूड़ों की समस्या

लाभकारी तेल:लांग का तेल,तिल का तेल 

उपयोग:

लौंग तेल की 1 बूँद दर्द वाले दाँत पर

तिल तेल से ऑयल पुलिंग (कुल्ला)


👩‍🦰 बाल झड़ना व रूसी

लाभकारी तेल:

नारियल का तेल

अरंडी का तेल

आँवला तेल

उपयोग:सप्ताह में 2–3 बार सिर की मालिश

नारियल + अरंडी तेल मिलाकर अधिक लाभ


🩸 एनीमिया (खून की कमी)

लाभकारी तेल:

तिल का तेल

मूंगफली का तेल

सेवन विधि:

भोजन में सीमित मात्रा

आयरन युक्त आहार के साथ लें


अधिक मात्रा में सेवन हानिकारक हो सकता है

Sunday, January 4, 2026

प्रेम की भावना और समझ...

 प्रेम: भावनाओं का जाल या समझ का रिश्ता?


आज के समय में प्रेम को बहुत गलत तरीके से समझ लिया गया है।

शुरुआत में कहा जाता है

“तुम जैसे कोई नहीं”,

“तुम ही सबसे अच्छे हो।”


लेकिन कुछ समय बाद वही शब्द बन जाते हैं

“तुम जैसे किसी को चाहना भी गलती थी”,

“तुम बहुत बुरे हो।”


यहीं से सवाल पैदा होता है

क्या यह सच में प्रेम था, या सिर्फ भावनाओं का नशा?


भावनाओं पर टिका प्रेम क्यों टूट जाता है?


आज ज़्यादातर रिश्ते भावनाओं की तेजी में शुरू होते हैं,

न कि समझ और धैर्य से।


जब तक सब ठीक चलता है


बातें मीठी लगती हैं


कमियाँ नज़र नहीं आतीं


भविष्य बहुत सुंदर दिखता है


लेकिन जैसे ही ज़िंदगी की सच्चाई सामने आती है


ज़िम्मेदारियाँ


पैसों की चिंता


परिवार का दबाव


सोच का अंतर


तब वही रिश्ता कमजोर पड़ने लगता है।


ब्रेकअप के बाद दर्द इतना क्यों होता है?


क्योंकि लोग इंसान से कम,

अपनी उम्मीदों से ज़्यादा जुड़ जाते हैं।


“हमेशा साथ रहेंगे”


“तुम्हारे बिना मैं अधूरा हूँ”


जब रिश्ता टूटता है,

तो सिर्फ इंसान नहीं जाता,

पूरा सपना टूट जाता है।


इसीलिए दर्द इतना गहरा होता है।


क्या ज़्यादातर प्रेम ट्रॉमा बन जाते हैं?


सच कड़वा है, लेकिन सच है

बिना समझ के किया गया प्रेम अक्सर दर्द छोड़ जाता है।


जहाँ...


बात कम और शक ज़्यादा हो


समझ कम और अधिकार ज़्यादा हो


सच से ज़्यादा दिखावा हो


वहाँ प्रेम धीरे-धीरे बोझ बन जाता है।


ऐसे रिश्तों में

भावनाओं से झूठ का महल बनाया जाता है,

जो सच्चाई की एक हवा में गिर जाता है।


सच्चा प्रेम कैसा होता है?


सच्चा प्रेम


धीरे-धीरे बढ़ता है


सवाल पूछने की आज़ादी देता है


मतभेद में भी सम्मान बनाए रखता है


और सबसे ज़रूरी

अलग होने पर भी इंसान को तोड़ता नहीं


जहाँ प्रेम होता है,

वहाँ इंसान खुद को खोता नहीं,

बल्कि और समझदार बनता है।


प्रेम गलत नहीं है,

गलत है उसे सिर्फ भावनाओं का खेल समझ लेना।


जब प्रेम में

समझ, धैर्य और सच्चाई नहीं होती,

तो वह

खुशी से ज़्यादा घाव देता है।


इसलिए प्रेम करें

दिल से ज़रूर करें,

लेकिन आँख बंद करके नहीं।