प्रेम का प्रमाण विद्रोह नहीं निर्वाह है...
इक हम हैं कि हम ने तुम्हें माशूक़ बनाया,इक तुम हो कि तुम हमें अपना हमदर्द भी नहीँ समझते दोस्त...तड़प और कसीस होनी चाहिए एक दूसरे से बात करने की, मांगा हुआ वक्त और मांगी हुई मोहब्बत कभी सुकून नहीं देती दोस्त...प्रेम हो या मित्रता हमेशा निस्वार्थ होकर निभाना,क्योंकि कोई देखे न देखे ऊपरवाला जरूर देखता है दोस्त...प्रेम में कितना दर्द होता हैं उस प्रेमी से पूछो,जो अधूरे प्रेम को पूरे मन से निभा रहा है दोस्त...प्रेम पहला दूसरा नहीं होता प्रेम वही होता है,जिसके बाद किसी की अभिलाषा न रहे दोस्त...कुछ लोग खाने-पीने के इतने शौकीन होते हैं, कि वो दूसरों की खुशियां ही खा जाते हैं दोस्त...यादें रुला देती है जब लोग चले जाते है, तब हृदय की पीड़ा केवल प्रकृति को ही ज्ञात होती है दोस्त...शिकवे तो सांसों के साथ खत्म हो जाते हैं,पर पछतावे उम्र भर दिल में बस जाते है दोस्त...शानदार रिश्ते चाहिए तो उन्हें गहराई से निभाइओ,लाज़वाब मोती कभी किनारों पे नहीं मिलते दोस्त…तुम्हें चाहना मेरी श्रद्धा है,और श्रद्धा कभी पाने की शर्तों पर नहीं टिकी होती दोस्त...मुझे तुम्हारे साथ पूरी कहानी नहीँ लिखनी है,तुम मेरे साथ सिर्फ एक ही पन्ने में सिमट जाओ वही मेरे लिए काफ़ी है दोस्त...कीमत तो वफ़ादारी की होती है,चेहरा तो तवायफ का भी सुन्दर होता है दोस्त...जो बोलकर नहीं दी जातीं,उन बद्दुआओं से बचना दोस्त... अक्सर अकेले रह जाते है वह लोग,जो ख़ुद से ज़्यादा दूसरों की फ़िक्र करते है दोस्त...प्रेम का प्रमाण विद्रोह नहीं निर्वाह है, और मैने तुम पे अपने आप निर्वाह कर दिया दोस्त...राज

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