पाठ 1
इस कदर वाकिफ है,
मेरे जज्बातों से मेरी कलम,
मैं “प्रेम” भी लिखना चाहूँ तो
“#प्रीति” लिख जाता हूं,,
#प्रीति पारस की तरह है,
#प्रीति सिर्फ मुझसे इश्क नहीं करती,
#प्रीति मेरे दिल में बसती है,,
मेरे साथ जिस रिश्ते में भी #प्रीति जीती है,,
उस रिश्ते को सकुन आनंद ख़ुशी हंसी
अल्हड़पन, नटखटता, संजिदगी से
भर देती है..... क्योंकि मेरे जीवन में
#प्रीति रंग हैं, #प्रीति चित्र है,
#प्रीति हिज्र है, #प्रीति संग है,
#प्रीति अल्हड मस्त मलंग है,,,
#प्रीति धूप है, #प्रीति शाम हैं,
पाती पाती #प्रीति का नाम है,,
#प्रीति दिन है, #प्रीति रात हैं,
#प्रीति अहसास हैं, #प्रीति जज़्बात है,,
#प्रीति प्याले में छलका जाम है,,
#प्रीति अनमोल दिल का रूआब है,,
मैंने कभी कंकर पत्थर जमा करने में
अपना जीवन व्यतीत नहीं किया इसलिए
ना करना मेरे जीवन में #प्रीति का हिसाब,
#प्रीति मेरे जीवन का शुद्ध सौ कॅरेट का
अनमोल हीरा हैं,, अनमोल हीरा है...
👏༺꧁ #प्रीति_ही_परमात्मा_है ꧂༻👏
*********************
मौन हुँ,
निःशब्द नहीं,
भीतर की आवाज हुँ,
गूँजता नहीं हूं...
जज़्बाती हुँ,
मगर कहता नही हूं,
झूठ का कभी
मैं साथ लेता नहीं हूं,
पहल नहीं करता हूं
कभी खूद को सच्चा बताने की
लेकिन #प्रीति के चरणों में
नतमस्तक होने से
डरता भी नही हूं....
पाठ 2...
यूं तो मुद्दे और मसले बहुत हैं दिमाग की खूराक को
मगर, दिल को..... #प्रीति का ही ज़िक्र सबसे ज्यादा अजीज़ है... क्योंकि मैं जीवन में जब कभी उस पड़ाव पर पहुंचा हूं, जहां प्रेम और समाज में से किसी एक को चुनना पड़ा, तब कुछ पल मन को शांत कर लिया...चिंतन किया... आंखें बंद करके विचारना की.... मन जब शांत हुआ तब #प्रीति ही मुझे सर्वोत्तम विकल्प लगी.... क्योंकि मैं जानता हूं यदि मैं मर भी गया तब भी कभी
समाज को संतुष्ट नहीं कर पाऊंगा.. और जब #प्रीति को चुना तो शुरवात में बहुत चुनौती आई... लेकिन फिर जैसे जैसे #प्रीति में मन रमता गया जिंदगी बहुत आसान हो गई, #प्रीति की अदाओं को अपने नेत्रों में समा लेना, #प्रीति पर शायरीयां करना, #प्रीति को निहारना रोजमर्रा का काम हो गया और जब भी #प्रीति पर लिखा दिल के किसी कोने से आवाज आती थी जो भी #प्रीति पर लिखा है अच्छा लिखा है पर कम लिखा है और बरसों से #प्रीति पर लिखते रहने के बाद भी आज भी
नहीं बांध पाता हूं मैं #प्रीति को शब्दों में
जब भी मैं प्रयत्न करता हूं #प्रीति को लिखने की
हर अक्षर #प्रीति के समक्ष बौने प्रतीत होते है,
#प्रीति होती है मेरे समीप जब मैं झांकता हूं मेरी ही आंखों में, टटोलता हूं जब अपने हृदय को #प्रीति रुप का तेज ऐसे बिखरता है जैसे समस्त ब्रह्मांड में #प्रीति से सुंदर कुछ भी नहीं है, मेरे अक्षर #प्रीति में कहीं विलीन हो जाते हैं, #प्रीति को देख रह जाती है स्तब्ध मेरी तूलिका और झंकृत होने लगता है एक प्रणय संगीत हृदय में, और हर क्षण बंध जाता हूं मैं #प्रीति की दिव्यता में, किंतु कितना भी लिखूं, कितना भी कहूं नहीं बांध पाता हूं मैं #प्रीति के तेज़ को अपने टूटें फ़ूटे शब्दों में।
पाठ 3...
कलम हाथ में लिए मैं यूं ही बैठा था
शब्दों का इंतजार करते हुए तब
मम्मी की पुरानी बातें याद आ गई और
मैं मम्मी की बातों को याद करते हुए
मम्मी की पुरानी बातों में खो गया,,,
मुझे याद आया कि
मेरी मम्मी अक्सर कहती थीं
"लल्ला! अपना कीमती सामान
एक जगह मत रखो, अलग अलग रखो
कुछ गुम गया तो दुख थोड़ा कम होगा।"
और फिर एक दिन मम्मी इस
दुनिया से चल बसी, फिर
मम्मी की वो बातें याद आने लगी,
भरा-पुरा परिवार होने के बावजूद
एक कमी सी लगने लगी,,
फिर मेरे जीवन में #प्रीति आई,
मम्मी की वो बातें याद आई कि
लल्ला अपना कीमती सामान
एक जगह मत रखो, अलग अलग रखो
और मेरे पास सबसे कीमती सामान
मेरा स्वाभिमान मेरा प्रेम था,
जो निस्वार्थ, निश्छल और निष्कपट था,
फिर उस प्रेम को अलग-अलग लोगों में बांटने
के बजाए मैंने #प्रीति में ही सब रिश्तों को
संजोकर देखने लगा,
कभी मां, कभी बहन, कभी बेटी,
कभी सहेली, कभी प्रेमिका...
#प्रीति के प्रति दिवानगी इतनी बढ़ने लगी
की उसके सामने सारी दुनिया
बौनी लगने लगीं,,
और फिर मैंने अपने प्रेम को
जैसे मम्मी ने कहा था वैसा
थोड़ा थोड़ा
सब #प्रीति के हिस्सों में बांट दिया
कुछ मां के हिस्से,
कुछ बहन के हिस्से,
कुछ बेटी के हिस्से,
कुछ सहेली के हिस्से और
एक हिस्सा प्रेमिका के लिए
और धीरे धीरे मैं अपने हिस्से कुछ ना रख सका,,
बाकी जो भी बचा #प्रीति को दे दिया
तुम सोच भी नहीं सकते कि
वह सबसे बड़ा हिस्सा था
मेरे मन का वह हिस्सा
जो #प्रीति के नाम लिखा था
वह अनमोल था।
दुनिया की सारी दौलत
उस हिस्से से कमतर थी मेरे लिए...
फिर एक दिन मेरी सबसे बड़ी दौलत
मेरा सबसे कीमती सामान
कहीं ग़ुम हो गया,
दुनियादारी के रस्मों रिवाजों में खो गया,,,
#प्रीति ने अपने इर्द-गिर्द इतनी भीड़ बना ली
जिसमें मैं नजर ही नहीं आ रहा था,
और अचानक #प्रीति भीड़ में खो गई।
मैंने उसे बहुत ढूंँढ़ा
गीली आंँखें, भीगे मन से।
अकेलेपन में चिल्लाया हूंँ ...
पूजा पाठ भी न करने वाला मै नास्तिक
लड़का भगवान के सामने गिड़गिड़ाया हूँ,
तकिए में अपने आंसू छुपाया हूं,
तेज़ गाने में सिसकन को दबाया हूं,
#प्रीति को मैंने बहुत ढूंढा
हर ओर ढूंढा ......
मैंने #प्रीति में भी #प्रीति को ढूंढ़ा
पर #प्रीति नहीं मिली,
#प्रीति दुनिया के लोगों में खो गई,
जीवन का सबसे कीमती हिस्सा
खोने के बाद भी मैं जी रहा हूं
क्योंकि मैंने कुछ हिस्से
#प्रीति के अनेक रुप में बांट चुका हूं,
मां के नाम
कुछ बहन के नाम
कुछ बेटी के नाम
कुछ सहेली के नाम और
थोड़ा सा हिस्सा
#प्रीति की याद, #प्रीति के ख्यालात,
#प्रीति की खिलखिलाहट,
#प्रीति का अल्हड़पन, #प्रीति का बांकपन,
ऐसी अनगिनत
#प्रीति की मनमोहक अदाओं से
अपना रोम-रोम सिंच रखा हूं।
इन पांचों को मिलाकर
मैंने फिर से नई दुनिया बनाई ।
#प्रीति बिना कमी तो है
पर खुद को अधूरा नहीं कह सकता हूँ..
मांँ की आंँखों की चमक
बहन की नोंक-झोंक वाली खनक
बेटी का अल्हड़पन,
सहेली का भरोसा
मुझे टूटने से संभाल लेती है,
और फिर #प्रीति को याद करके
आनेवाले आंसुओं से
निकली मुस्कुराहट
मुझे प्यारी लगने लगी है।
मैं बस #प्रीति को लिखने लगा हूं,
जिंदगी तब भी खूबसूरत थी
ज़िंदगी अब भी खूबसूरत है
ज़िंदगी हमेशा खूबसूरत रहेगी
क्योंकि #प्रीति कहीं भी रहो
हर रिश्ते में #प्रीति मेरे साथ है.....
और मेरी ख्यालों की दुनिया हो
या वास्तविक दुनिया हो
सब #प्रीतिमय है....
मैंने निस्वार्थ भाव से #प्रीति को प्रेम किया है और इसलिए मेरा ईश्वर मुझे कभी नहीं भुलता,, मैं जानता हूं कि जिस क्षण से कोई भी किसी एक से निस्वार्थ भाव से प्रेम करने लगता है उस पल से वो अपने ईश्वर को याद हो जाता है और मेरा #प्रीति से ऐसा रिश्ता है जिसमें मेरे निस्वार्थ भाव से किए प्रेम का विस्तार होता है, अक्सर लोग क्षणभंगुर प्रेम से भरते है अपना खालीपन, पर मैंने सीखा है शून्य में भी #प्रीति को करते रहना निस्वार्थ प्रेम और लेते रहना ईश्वर के दर्शन, #प्रीति पास नहीं तो क्या, #प्रीति के अहसास तो है, #प्रीति की मुस्कुराहट मेरे चारों ओर बिखरी है, #प्रीति की खिलखिलाहट मेरे कानों में मधूर संगीत की तरह गूंजती है, मेरे ह्रदय के स्पंदन पर #प्रीति के पदचाप की आवाज आती है, मेरा प्रेम कैद नहीं, निश्छल निष्कपट भाव से #प्रीति को आजाद रखता है, #प्रीति कहीं भी रहो, पर मुझमें ही रहती है.....
"मेरे तन के मन मंदिर में,
#प्रीति पहले से प्रतिष्ठित हैं ।।
याद #प्रीति की आते ही,
अश्कों से आंखें सिंचित हैं ll
ख्यालों में भी #प्रीति आ जाए
तो धड़कनों का रक्स निश्चित हैं ll
आपसी प्रेम और विश्वास से,
#प्रीति के सारे मार्ग चिन्हित हैं ll
आदि से अनंतकाल तक,
मेरे रोम रोम में #प्रीति ही अविजित हैं
इसलिए हर किसी पर नहीं मरता मेरा दिल ,
जो मेरी #प्रीति है वो पुरे ब्रम्हांड में एक है....
पाठ 4...
#प्रीति मेरे लिए कोई भी दुसरा
तुम जैसा नहीं हो सकता,
#प्रीति मेरे दिल में तुम हो जहां हमेशा तुम ही रहोगे,
मैं तुम्हारे बगैर हस तो सकता हूं
मगर खुश नहीं रह सकता,
#प्रीति मेरे लिए खुशी सकुन आनंद का मतलब
सिर्फ और सिर्फ तुम...... इसलिए
#प्रीति तुम्हें पता है यदि मुझे ईश्वर ने
कभी निर्जीव वस्तु बनाया तो मैं होना चाहूँगा
तुम्हारे कमरे की दीवार पे टंगा दर्पण।
ताकि #प्रीति तुम्हारी श्रिंगार रुपी देह और
जगमगाती रूह को
अपने नेत्रों पे प्रतिबिम्बित कर सकूँ,,,
क्योंकि #प्रीति ये वही सुंदरता है
जिसका आंकलन मैंने
हमेशा अपनी हर शायरी, ग़ज़लें,
कविताएं, महाकाव्य में किया है लेकिन
यह सब देखने में
#प्रीति तुम हमेशा से असमर्थ रही हो
इसलिए आइना बन
#प्रीति तुम्हारा दीदार तुम्हें कराऊंगा
तुम कितनी खूबसूरत हो यह
#प्रीति तुम्हारे आंखों से तुम्हें दिखाऊंगा..
#प्रीति तुम्हारा मौन और मेरा मौन मिलकर प्रेम बन जाते है। इस क्षण कलम और कागज में जो घट रहा है यह प्रेम है। इधर मेरा शून्य #प्रीति तुम्हें लिख रहा है, उधर तुम्हारा शून्य मुझे पढ रहा है। लिखना तो बहाना है। इस निमित्त मेरा शून्य #प्रीति तुम्हारे शून्य से मिल रहा है। इस निमित्त #प्रीति तुम्हारा शून्य मेरे शून्य के साथ नाच रहा है, तरंगायित हो रहा है। इधर #प्रीति तुम्हारा शून्य शब्द बन परोस रहा हैं कलम बने मेरे शून्य को। मेरा लिखना तो एक खूंटी है; उस पर मैंने टांग दिया अपने शून्य को, #प्रीति तुमने टांग दिया अपने शून्य को— दो शून्य मिल कर जहां एक हो जाते हैं वहां प्रेम है। और #प्रीति दो शून्य पास आएं तो एक हो ही जाते हैं। दो शून्य मिल कर दो शून्य नहीं होते, एक शून्य होते है। #प्रीति हजार शून्य मिल कर भी एक ही शून्य होगा, हजार नहीं। इसी तरह दूर कहीं शून्य में दिखती #प्रीति तुम्हारे साये से लिपट के रह जाती है आत्मा मेरी, और मैं #प्रीति तुम्हारी देह से टूटा दूर से तुम्हें शून्य में देखता आखिरी हिस्सा हूं!
मस्ती प्रेम की पढा गई एक पाठ
जिसके मन में गाॅंठ नहीं बस उसके है ठाठ
ढूंढा सब जहां में पाया #प्रीति तुम्हारा पता नहीं
जब पता #प्रीति तुम्हारा मिला अब पता मेरा नहीं......
इसलिए भावुक हूं, आनंदित हूं, मर्यादित हूं, प्रेममग्न हूं,
संतुष्ट हूं,निःशब्द हूं ।। मैं बस "#प्रीतिमय" हूं ।।
पाठ 5....
#प्रीति______
तुम्हें चांद का टुकड़ा कहूं या तुम्हें खूबसूरत
रुप की अप्सरा कहूं,,
काली जुल्फें, काजल से भरी काली काली आंखें,
मख़मल से कोमल देह को क्या कहूं,,
#प्रीति तुम्हें भगवान ने धरती पर भेजा सिर्फ मेरा
हमसफ़र बनने को,,
तुम तो मेरी धडकनों का स्पंदन बन गई
तुम्हें दिल की महारानी कहूं,,
#प्रीति तुम्हें तराशा है भगवान ने अपने हाथों से,
एक एक अंग को बनाया सबसे खूबसूरत
अपनी कलाओं से,,
गुलाब की पंखुड़ियों से लाल होंठ,,
मृग जैसी कत्थई आंखें ,
सुराहीदार गर्दन,
काली घटाओं सा जुल्फों का रंग,
संगेंमरमर सा शफ्फाक बदन,,
जब जब भी तुम्हें देखता बावला हो जाता हूं,
तुम्हें चांद का टुकड़ा कहूं या तुम्हें खूबसूरत
रुप की देवी कहूं,,
#प्रीति शब्द कम पड जाते हैं, जब जब भी
तुम्हारी खूबसूरती पर लिखना चाहता हूं,,
आंखों से आंखें मिलाकर तुम्हारी तस्वीर के
रास्ते तुम्हारे कोमल ह्रदय में रहना चाहता हूं,,
मैं पागल हूं और बहुत पागल हूं पर यह भी
बात सच है की केवल तुम्हारा दिवाना हूं,
अब तुम ही बताओ #_प्रीति_____
जब तुम झुककर मेरा माथा चुमती हो,
तुम्हारे मुखड़े को चांद कहूं या
मल्लिका_ए_जिंदा_ताजमहल कहूं...
एक दिन कहीं ऐसा ना हो कि
तुम मुझे कॉल करो,,
और वो कॉल रिसीव ही न की जाये...
फिर तुम एक और कोशिश करो,,कॉल करने की,,
और फिर रिसीव न हो...
फिर एक अरसे बाद,तुम्हे थोड़ी फ़िक्र हो,,
तुम मैसेज करो मुझे,,वो मैसेज...जिसका कोई भी जवाब अब कभी नहीं आएगा...
फिर तुम सच में थोडे और परेशान हो जाओ... और
तुम्हें मेहसूस हो हीरा मेरे पास था और मैं कंकर जमा करने में हीरे को तडा दे दिया तब
तुम सोचो मेरे बारे में, मेरी हर बात,, मेरी आवाज़, मेरा चेहरा....
तुम्हारे लिए मेरी फ़िक्र..
मेरे साथ बिताया हर एक लम्हा..
फिर तुम मुझे एक और कॉल करो,,
और फिर कोई रेस्पांस न मिले...
तुम फिर मुझे मैसेज करो..
जिसका कोई जवाब न मिले..
तुम अचानक बहुत बेचैन हो जाओ..
तुम्हें सब कुछ याद आता रहे...
तुम लगातार मेरे बारे में सोचो...
तुम्हे सब कुछ याद आये.
सब कुछ...
और एक दिन जब तुम्हें नींद न आये..
बस मेरी याद आये...
तुम मुझे सोशल मीडिया पर ढूंढो..
फिर मैसेज करो..
फिर कॉल करो.
फिर कोई जवाब न मिले..
तब तुम फोन गैलरी खोलकर..
मेरी तस्वीरें देखो...
तुम्हे गुस्सा आये, चिढ हो,तुम्हे रोना आये..
तुम्हें एहसास हो कि मैं किस हाल में रह रहा हूँ..
परेशान होना क्या होता है..
टूट जाना क्या होता है...
फिर कुछ अच्छा ही नहीं लगेगा..
तब तुम हर जगह मुझे ही ढूंढो..
बस एक आखिरी बार मुझे देखना चाहो,
मुझे सुनना चाहो..
मेरे सीने से लगना चाहो...
मुझसे लिपटकर रोना चाहो..
तुम पागल हो जाओ उस प्यार के लिए,
जो सिर्फ और सिर्फ मुझसे मिल सकता था..
और उस हाल में,
तुम्हे सुनने वाला
तुम्हारे माथे को चूमने वाला...
तुम्हे सीने से लगाने वाला...
"मैं"...
कहीं दूर...अंधेरे में...
अपने कमरे में...
आधी रात को,,
वो हर एक मैसेज पढ़कर,,
तुम्हे याद करूँ...फिर वो मैसेज डिलीट कर दूँ..
उसका कभी कोई जवाब नहीं आएगा..
तुम महसूस करो दिल का टूटना,
अकेलेपन में रोना..किसी से कुछ न कह पाने की बेबसी..
सारे काम ज़बरदस्ती लगने लगे,
बस हर वक़्त मेरी बाहों की ज़रूरत लगे,
नींद की गोलियां भी किसी काम की न रह जाएं..
हर वक़्त..
सोते जागते,मुझे याद करो..
बस मैं ही हर वक़्त तुम्हारे दिलो दिमाग में रहूँ...
उस वक़्त...जब ये सब हो..
शायद तुम्हे समझ आये..
कि तुम कितनी गलत थे...तुमने क्या किया..
और तुम्हे क्या मिला था..
और तुमने क्या खो दिया...
तब तुम्हें समझ आएगा...मैं कैसा था...
हाँ..सच में..
तुम एक बार महसूस कर सको..
वो सब जो मैं करता हूँ...
पाठ 6...
दुनिया में अनगिनत लोग हैं और हर कोई
अपने अनुभव से बताते है कि प्रेम क्या है...?
जीवन में केवल प्रेम ही है जो दिखाता है कि
#प्रीति कौन है....
#प्रीति क्या है......
मेरा आकार भी #प्रीति,
मेरा आधार भी #प्रीति,
मेरा प्यार भी #प्रीति,
मेरा त्यौहार भी #प्रीति,
मेरा अंत भी #प्रीति,
मेरा आगाज भी #प्रीति,
मेरी जान भी #प्रीति,
मेरे सिर का ताज भी #प्रीति,
मेरे लिए मेरी दुनिया है #प्रीति,
छु कर जो गुजरे वो हवा है #प्रीति,
मैंने जो मांगी वो दुआ है #प्रीति,
मेरे चेहरे की कशिश है #प्रीति,
सितारों के बिच चांद की चमक है #प्रीति,
सारे जहां का करार है #प्रीति,
बस और कुछ नहीं है #प्रीति
मेरी जिंदगी है #प्रीति.........
पाठ 7...
मैं जब भी ये गजले, ये शायरियां,... लिखता हूं,,,,
जहन में #प्रीति का चांद सा मुखड़ा सजाता हूं..
मैं जब भी ग़ज़लों में अंत्रा लिखता हूं,,
#प्रीति की मुस्कान को कलम बनाता हूं,,,
मैं जब भी श्रिंगार रस लिखता हूं,
#प्रीति की एक एक अदाओं को शब्द रस में घोलता हूं,,
काली घटाओं सी जुल्फों की जब बात आती है,
#प्रीति के सुराहीदार गर्दन को मैं दाऊत बनाता हूं,,
नयन नशीले लिखने के लिए
मैं #प्रीति के काजल से रंग चुराता हूं,,
ये ग़ज़लें, शायरियां, कविताएं, काव्य मुझे यह
सब लिखना नहीं आता है,,
मैं तो बस #प्रीति की तस्वीर कागज़ पर लगा देता हूं.....
जब भी #प्रीति की मुस्कान कोरे पन्नों पर बिखरती है,
अक्षर न अक्षर को अपने आप उमड़ने देता हूं....
भीतर भरे भय वहम शक से खाली हो जाओ,
ब्रह्मांडीय प्रेम की ऊर्जा आपके अंदर महसूस होने लगेगी क्योंकि प्रेम के तज़ुर्बे पर कभी ना पुछना मुझसे,
मैंने प्रेम में प्रेम पर हजार पन्नों की कोरी किताब लिखीं हैं,
जानते हो प्रेम क्या है अपने वक्त के कीमती लम्हें किसी को देना किसी की सुन लेना।
किसी की आंख से आंसूओं को चुन लेना।
किसी के ज़ख्मों पर मीठे बोल के मरहम लगा देना।
बिना किसी रिश्ते के बिना किसी संबंध के
किसी के दर्द का एहसास होना।
यहीं तो प्रेम है।
प्रेम में दो अनजान इंसान एक दूसरे के प्राण बन जाते है
बिना एक दूसरे के एक पल भी रह नहीं पाते
परमात्मा के बाद
अगर दुनिया में कोई पवित्र चीज है तो वो है प्रेम....
सच मैं प्रेम का एहसास अनोखा होता है...
पाठ 8...
#प्रीति तुम्हारी सुंदरता को मैंने कभी तुम्हारे शरीर से नहीं देखा,
क्योंकी मुझे पता है एक दिन यह मांस पिंड का शरीर
अग्नि शिखा में लिप्त होगा,,
#प्रीति तुम्हारा होना मैंने तुम्हारे अस्तित्व से समझा है ...
#प्रीति मैंने जाना की तुम अनंत हो..
काया क्षीण होगी ..दृष्टि समाप्त होगी..
बाल गिरने लगेंगे लेकिन
मैं और मेरा शाश्वत प्रेम
#प्रीति तुम्हारे लिए अबाधित रहेगा
अजीवन अस्पर्शित...
#प्रीति तुम्हारी तस्वीर को देखते ही दिल को सुकून,
#प्रीति तुम्हारी आंखों पर नज़र पड़ते ही दिल को चैन,
#प्रीति तुम्हारे होंठों पर मुस्कान देखकर रुह को मिठास, और
#प्रीति लिखते लिखते तुम्हारी तस्वीर को
सिने से लगाते ही प्रेम पर एक नशें का
सुरूर सा छा जाता है, क्योंकि
एक पुरुष अपनी पसंदीदा स्त्री को
निश्चल और निस्वार्थ भाव से जब प्रेम करता है
तो उसके ह्रदय में उस स्त्री का स्थान
एक देवी के समान होता है और
ह्रदय में उस स्त्री के प्रति सदैव
सम्मान की भावना होती है और
वो पुरुष अपने पुरे जीवन काल में
उसी स्त्री को अपने जीवन का
आपादमस्तक मानता है....
#प्रीति एक ऐसी शख्सियत की मालकिन है....
जिसको मैंने अपने जीवन में
कुछ ऐसे लिखा है,
लोगों को मेरे जीवन से
#प्रीति को मिटाने के लिए
रबर को नहीं
अपने आप को घिसना पड़ेगा..
क्योंकि मुझे जब चुनाव करना पड़ा
दुनिया और #प्रीति में
तब भी मैंने सिर्फ #प्रीति को चुना,,
दुनिया की नश्वर घृणा से कर ली दूरी
जब #प्रीति से मेरे प्रेम को अमरत्व मिला,,
तब भी मैंने मांगा हर जनम में
कोई रुप कोई जीवन
केवल एक #प्रीति पर मरने के लिए,
लौटूंगा वैसे ही #प्रीति तुम तक
धुप बारिश बसंत बनकर,,
फिर #प्रीति तुम्हारी बाहों में सिमटने के लिए,,,
एक और बार #प्रीति को चुनूंगा
एक और बार आऊंगा मैं
केवल #प्रीति तुम्हें प्रेम करने के लिए....
जब पुकारना हो मुझे
#प्रीति मेरा नाम लेने से पहले शरमा जाती है...
#प्रीति मेरे इश्क का माहताब है
काली घटाओं में से निकल कर आती है...
#प्रीति अपने नयनों से कह दो यूं तारों के बिच से
मुस्कुराकर न देखा करे मुझे,
यह दिल पहले से ही #प्रीति तुम्हारी अदाओं से पागल है..
उपर से #प्रीति तुम्हारा नशीली निगाहों से देखने से
मेरे दिल की धड़कने धड़कना भूल जाती है....
#प्रीति तुम पर लिखी ग़ज़ल, शायरी, कविताएं,
कहानियां तो महज मेरे दिल का हिस्सा है...
#प्रीति स्पंदन की तरह मेरी हर बात में होती है,
अंधेरे से घिरे मेरे जीवन को
#प्रीति जुगनू बन मेरे जीवन को रोशन करती है,
किस्सा कितना सुनाऊं मैं मेरी मोहब्बत का,
सितारों की भीड़ में भी मेरी चांद सी #प्रीति
मेरी आगोश में होती है.....
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