पाठ 1
मेरी__प्रीति
मेरे पास जो सबसे अच्छे शब्द हैं,
#प्रीति वो तुम्हारे जुड़े से आए है,,
मेरे पास जो सबसे अच्छे दोहे हैं,
#प्रीति वो तुम्हारे कंगन से बने हैं,,
मेरी सबसे अच्छी पंक्तियाँ,
#प्रीति तुम्हारे गले के हार से बनी है ,
जो खूबसूरत शेर मैं कह पाता हूँ
#प्रीति तुम्हारे झुमके से निकलते हैं,
मेरी सबसे खनकती गजलें,
#प्रीति तुम्हारी छमछम करती पाजेब से होती है,
मेरे सबसे नाजुक लेख,
#प्रीति तुम्हारे साफ उज्ज्वल बेदाग चरित्र से प्रफुल्लित होते हैं,
मेरे पास जो सबसे अच्छी कविताएँ हैं,
#प्रीति वो तुम्हारी नजाकत भरी अदाओं से मेल खाती है,
#प्रीति तुम पर लिखे मेरे
#ये_शब्द_शेर_नज्म_गजलें_कविताएं_महाकाव्य
इस उम्र में मेरी ऐनक बनी है,,,
जब मै दो इंच भी नहीं देख पाता हूँ तब
#प्रीति तुम्हारे रुपयौवन से सजी यही कविताएँ,
मुझे दिखाती हैं
#प्रीति तुम्हारी आंखों में सजी ओस की बूंद
#प्रीति बर्फ सी शीतल तुम्हारी काया,
#प्रीति गुलाब के पंखुडीयों से तुम्हारे लब,
#प्रीति पक्षियों सी चहचहाहट करती तुम्हारी मधुर आवाज़
#प्रीति तितलियों सी खुलती बंद होती तुम्हारी पलकें
यही ग़ज़लें, तुम्हें बताती हैं
यही कविताएँ, तुम्हें दिखाती हैं
मेरा तुम्हारे प्रति #निश्छल_निस्वार्थ_प्रेम.....
#प्रीति वो प्रेम_पत्र जो तुम्हारे लिए लिखे गए,
मगर तुम्हें खोने के डर से तुम तक कभी पहुचाएं नहीं,
इन्हीं कविताओं में तुम देखोगे
#प्रीति तुम्हारा मान, #प्रीति तुम्हारा सम्मान,
#प्रीति तुम्हारे सौंदर्य की स्वर्णगाथा,
#प्रीति तुम ही हो मेरी सोच मेरी प्रेरणा,
मेरे जीने का जज्बा,,
जो मेरे शब्द शेर नज्म गजलें कविताएं को
प्रेरित करती हैं.......
#प्रीति तुम ही तुम मेरे इस जहाँ में हो
और यही मेरी #संपत्ति है, यही मेरी दुनिया है..
#मेरी_प्रीति...
पाठ 2...
#प्रीति तुम वो हो जिसे देखकर मुझे सकुन मिलता है,,
#प्रीति तुम वो हो जो मेरे दिल और दिमाग दोनों में बसे हो,,
#प्रीति तुम वो हो जिससे बात करके मैं कभी बोर नहीं होता हूं,,
#प्रीति तुम मेरी ताकत भी हो और कमजोरी भी हों,,
#प्रीति तुम वो हो जिसे मैं कभी खोना नहीं चाहता हूं,,
#प्रीति तुम वो हो जिसे मैं हमेशा अपने साथ रखना चाहता हूं,
#प्रीति तुम वो हो जो मेरे रोम रोम में संचार करते हों,,
#प्रीति तुम वो हो जो मेरे दिल को धड़कनों के रूप में स्पंदन करते हो,,
#प्रीति तुम बस तुम सिर्फ तुम हो क्योंकि मुझे तुमसे जो मिला है, जब भी इसका ख्याल आता है तो खुशी से पागल हो जाता हूं, बावला हो जाता हूं,, मैं अनंत तक नाचते रहता हूं उत्सव में....!
#प्रीति तुम्हारा गुणगान करते रहता हूं। तुम्हारी तस्वीर देखकर नतमस्तक होते रहता हूं। जब तुम्हारे तस्वीर के सामने नतमस्तक होता हूं तो यह अभास होता है कि मेरे आस-पास कहीं ईश्वर है और फिर किसी शख्स का, दुनिया का, समाज का, भय पैदा ही नहीं होता...!!
#प्रीति यह साहस, यह हिम्मत मेरे अंदर सिर्फ तुम्हारे प्रेम से होती है, कि जो तुमने दिया है, वह इतना ज्यादा है और बिना कारण दिया है....!!!
#प्रीति न मेरी कोई योग्यता है, न मेरे पास कोई लौटाने का उपाय है... अनंत है, चिरकाल है, शुन्य से लेकर ब्रम्हांड तक है, उस उम्र से लेकर इस उम्र तक मेरे जीवन में जो भी है
#प्रीति..... वो बस तुम्हारा प्रेम है....
पाठ 3...
#प्रीति कई नज्म कई शेर कई गजले तुम्हारे लिये,,
मैंने इस साल लिखे....
#प्रीति तुम्हारी उलझी हुई जुल्फों में,,,
अपने अधूरे खयालात लिखे...
#प्रीति कुछ शिकायतो के दिन लिखे..
कुछ महीनो के प्यार लिखे...
#प्रीति कुछ तुम्हारी शरारते लिखी..
कुछ अपने अंदाज लिखे....
#प्रीति जीवन के कई पहलु को नये रंग में सजाने,
तुम्हारी पलकों की कोर में अटके काजल की छटाओं
को,, रंगे आफताब लिखे...
#प्रीति तुम्हारे उलझे हुए सवालों के कई सुलझे हुए जवाब लिखे...
हया के रंग लिखे,,, अदाओं के तेवर लिखे....
#प्रीति मैने जब भी लिखे
तुम्हारी खुबसुरती के नक्षबिंदु लिखे....
कई नज्म, कई शेर, कई गजले, तुम्हारे लिये
हाँ.... #प्रीति मैने इस साल लिखे तुम्हारे लिए लिखे....
मैं वो किताब हूँ..... लिखा है जिसके
पहले पन्ने पर #प्रीति और आखिरी पन्ने पर #प्रीति...
बीच के
किसी एक पन्ने पर #प्रीति के खामोश एहसास है,,
किसी एक पन्ने पर #प्रीति की चुलबुली ख्वाहिशें हैं,,
किसी एक पन्ने पर #प्रीति के हुस्न का जादू है,,
किसी एक पन्ने पर #प्रीति के कर्ण मधुर आवाज का संगीत है,,
किसी एक पन्ने पर #प्रीति के घने काले जुल्फों की गाथा है,,
किसी एक पन्ने पर #प्रीति के सुराहीदार गर्दन की व्याख्या है,,
किसी एक पन्ने पर #प्रीति के मृगनयनों की परिभाषा है,,
किसी एक पन्ने पर #प्रीति के मुस्कुराहट की दाहोदिशा है,,
किसी एक पन्ने पर #प्रीति के खिलखिलाहट की शैली है,,
किसी एक पन्ने पर रुप की देवी #प्रीति का काव्य संग्रह है,,
किसी एक पन्ने पर #प्रीति के मिठे एहसास हैं,,
किसी एक पन्ने पर #प्रीति का अतीत है,,
किसी एक पन्ने पर #प्रीति का भविष्य है,,
जब सब लिखकर भी मन नहीं भरा और लगा कि
अभी तो कुछ भी नहीं लिखा है तो
आखरी पन्ने पर लिख दिया #प्रीति....
पाठ 4...
#प्रीति जानते हो तुम...
मैं जितनी भी कहानियां, कविताएं लिखता हूं...
सबका आधार, प्रेम, आनंद, सकुन का शीर्षक
#प्रीति बस तुम को लिखता हूं....
मेरे जीवन पटल पर मैं उन्मुख जब भी रहता हूं
मेरे जीवन के सार का शीर्षक बस
#प्रीति तुमको लिखता हूं....
लिखता हूं मैं वो सब जो कभी समक्ष ना
आने के कारण मैं तुमसे कह ना सका
मेरी हर अनकहे प्यार का हकदार
#प्रीति मैं सिर्फ तुमको लिखता हूं....
मेरे शून्य में निहारते नैनो से निर्झर बहते
अश्रु संग आती आंखों में चमक को
#प्रीति मैं सिर्फ और सिर्फ तुमको लिखता हूं
मेरे जीवन के प्रेम आधार का शीर्षक
#प्रीति मैं बस तुमको लिखता हूं.........
जो पढ़ रहे है मुझे वो अपना ख्याल रखे,
मैं लाख बुरा सही ज़माने की नज़र में,
फिर भी मैं अपनी दुआओ में
#प्रीति बस तुमको लिख रहा हूं।।
मैं अहंकारी इतना की एक बार कोई दिल से
उतर गया तो मैं उसके तरफ देखूं भी नहीं,,
और प्रेमी इतना की झूककर #प्रीति के पैर छू लेता हूं।
मैं जिसे भुख तक बर्दाश्त नहीं होती,,
#प्रीति के लिए मैने करवा चौथ भी रखता हूं।
मेरी ग़लती होने पर भी मैने किसी से माफी नहीं मांगी,
पर #प्रीति के आगे बिना गलती के हाथ जोड़कर खडा होता हूं।
मुझे सही से अपने शर्ट का क्रिच भी बनाना नहीं आता,
मगर बखूबी बनाता हूं मैं #प्रीति के साड़ी की प्लेट।
मैं आज भी सागर से गहरा प्रेम करता हूं,
बस #प्रीति नाम की माला जपकर मैं अपना जीवन समर्पित करता हूं....
पाठ 5...
जलते_तपते जीवन में....
#प्रीति शीतल_मधुर छाँव हो तुम...
.
पलकों की पगडंडियों पर ....
#प्रीति सपनों का गाँव हो तुम...
.
चिलमिलाती धूप में....
#प्रीति घडे का थंडा पानी हो तुम....
.
जुनून हो तुम सुकून हो तुम...
#प्रीति रूह में जान होती हैं जब साथ होती हो तुम...
.
अब भी पूछते हो मुकाम अपना....
कह तो दिया
#प्रीति धडकनों का स्पंदन हो तुम...
.
तुम्हारा अक्स आंँखों में बस गया है कुछ ऐसा...,
ईश्वर के सजदे में आँखें बंद करता हूँ तो
#प्रीति ईश्वर में भी दिखते हो तुम...
.
जिसे मैने अपनी जान का दर्जा दे रखा है
सुनो #प्रीति... #मां के बाद दूसरी औरत हो तुम.....
समर्पित है मेरा प्रेम #प्रीति तुम्हारे चरणों में बस.....
गुज़ारिश है ईश्वर से इस प्रेम का कभी अंत ना हो,
और प्रेम कितना किसको मिला इसका कभी हिसाब ना हो,
प्रेम कोई सौदा नहीं जो पुरा मिले तो ही अपनाना हो,
प्रेम तो एक अनुभूति हैं जो अधूरी रहकर भी
पुरे जीवन का वज़न बन जाती है,
और शायद इसीलिए प्रेम सबसे महंगा शौक़ नहीं,
सबसे ईमानदार इम्तिहान होता है,
प्रेम का अर्थ है_
एक मुक्त जीवन, सभी मोह से मुक्ति,
एक भरोसा, एक जिम्मेदारी,
और प्रेमी का अर्थ है_
सभी स्वतंत्रता के बाद भी अपने प्रेम के बंधन में बंधे रहना,,,
जिनको प्रेम पर विश्वास है हिसाब उनके लिए नहीं है,
जिनको विश्वास नहीं है हिसाब उनकी तरकीब है,
जिनको प्रेम पर विश्वास है वो चल पड़ते हैं,
छोटी सी रोशनी भी उन्हें उनकी मंजिल पर पहूंचा देती है,
जिनको विश्वास ही नहीं है वो ज्ञान में डूबे होते हैं,
बडे अंधकार का हिसाब लगा लेते हैं, उनको अंधकार घबरा देता है , पैर डगमगा जाते हैं,
प्रेमी बनो ज्ञानी नहीं, प्रेम बिना जो ज्ञान आता है
वो सब नफा नुकसान से भरा कुडा करकट है,,,
प्रेमी बनकर जो ज्ञान मिलता है आ..हा.. उसकी बात ही और है, निस्वार्थ...निश्छल....निष्कपट.....
मैं तो कहता हूं ___
प्रेम में जो चल पड़ा पहूंच गया, यह ज्ञान की नहीं प्रेम पर विश्वास कि बात है...
#प्रीति मेरे होश और हवास पे
छा गए हो तुम।
किस कदर मुझको अपना
बना गए हो तुम।।
#प्रीति मैं तुम्हारे अलावा कुछ
सोच नहीं पाता।
इस कदर मेरे दिल में
समा गए हो तुम।।
#प्रीति गुलाबों की महक भी
फीकी सी लगती है।
ये कौन सी खुशबू मुझमें
बसा गए हो तुम।।
#प्रीति जिंदगी क्या है
तुम्हारी चाहत के सिवा।
ये कैसा ख्वाब मेरी आँखों को
दिखा गए हो तुम।।
#प्रीति मेरे होठों पर रहता है
तुम्हारा ही जिक्र।
जबसे तुम्हारे माथे को
मेरे होंठों से लगा गये हो तुम....
पाठ 6...
#प्रीति तुम मेरे लिए ईश्वर की सबसे सुंदर रचना हो!
#प्रीति तुम मेरे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हो!
#प्रीति तुम, मेरे दिल का आईना हों!
#प्रीति तुम, मेरे लिए अकेलेपन का एकांत हो!
#प्रीति तुम, मेरी आत्माओं का झरोखा हो!
#प्रीति तुम, मेरे जीवन की शोभा हो!
#प्रीति तुम मेरे लिए भगवान का सबसे
कीमती उपहार हो!
#प्रीति तुम मेरे दिल का स्पंदन हों!
#प्रीति तुम मेरे जीवन का ऑक्सीजन हों!
#प्रीति तुम मेरे रोम-रोम का सुकुन हो!
#प्रीति मेरी खुशी हो या उदासी,
तुम हमेशा साथ निभाती हो!
#प्रीति मेरी खुशी तुम्हारे आंखों से व्यक्त होती है!
#प्रीति तुम्हारे दुख मेरी आंखों से व्यक्त होते हैं!
जब मुझे #प्रीति तुम पर प्यार आता है तो
मैं इसे व्यक्त करने के लिए अपने अंतस्थ से मोतियों
से शब्द को चुनकर तुम्हारा श्रिंगार करता हूं, लेकिन
#प्रीति मेरी आंखें तुम्हारे प्रति मेरे प्यार को
जगजाहिर कर देती है!
#हां_प्रीति.. मंत्रमुग्ध कर देने वाले तुम्हारे मुखड़े को
जब भी एक टक देखता हूं बावला हो जाता हूं !
#हां_प्रीति.. तुम्हारा मुखड़ा जब रेशम सी जुल्फों में
छुप जाता है तब वो मुझे ईश्वर से अवगत कराता हैं!
मुझे पढ़नेवाले मुझे #प्रीति तुम्हारा
दीवाना या पागल कहते है!
#प्रीति मेरा रोम-रोम अभिव्यक्ति की मशीन हैं
जो तुम्हारे प्रति मेरी सभी भावनाओं को व्यक्त करती हैं!
#प्रीति तुम मेरे लिए ब्रम्हांड की असली खूबसूरती हों!
दुनिया में सात आश्चर्य है, #प्रीति तुम्हारे नाम के भी अनगिनत लोग हैं लेकिन ईश्वर के हाथों तराशी गई
#प्रीति तुम मेरे जीवन का अद्भुत आश्चर्य हो !
#प्रीति तुम मेरे जीवन का सबसे अभिव्यंजक हिस्सा हों!
मेरे लिए ईश्वर के हाथों बनी सबसे आश्चर्यजनक
अद्भुत अद्वितीय अकाल्पनिक अचंभित रचना
#प्रीति तुम हो!
प्रेम क्या है?
कुछ नहीं है बस,
हथेलियों के बीच छुपे
#प्रीति तुम्हारे मुख की महिमा है।
प्रेम जादू है,
दो होठों का स्पर्श हैं,
#प्रीति तुम्हारे अटूट आशा और
विश्वास की गरिमा है।
प्रेम क्या है?
तृषित अनुराग है, समर्पण से भरा है,
#प्रीति तुम्हारे शीतल सम्मोहन की
काव्याक्षरा है।
प्रेम तुम्हारी मौन स्वीकृति है,
मेरी योग्य निष्कृति है,
प्यार मैं हूं, प्यार तुम हो,
विरहिनी शीत ऋतु में,
#प्रीति तुम्हारे स्पंदनों का आसरा है।
प्रेम शायर है, कविता है प्रेम,
दूरियों के गणित में मिलने का जोड़ है,
अनमोल है, अबोल है,
#प्रीति तुम्हारा ये प्रेम बेजोड़ है।
#प्रीति तुम्हारे बिना मैं जीवन के
रहस्यों को नहीं जानता था,
केवल जीवन की
सतह को ही जानता था।
जैसे-जैसे प्रेम का #प्रीति में ध्यान गहरा हुआ है,
वैसे-वैसे मैंने पाया मेरे भीतर #प्रीति तुम्हारा
एक अपूर्व सौंदर्य लहरे ले रहा है।
#प्रीति इतना सौंदर्य तुमने उंडेल दिया की
मेरा सारा जगत सुंदर हो गया है।
पाठ 7...
#प्रीति मेरे पास पैसा नहीं है,
मै तुम्हे आभूषण से नहीं सजा सकता,
लेकिन मेरे पास कागज और कलम है,
और साथ में अथाह और निस्वार्थ प्रेम है,
जिससे #प्रीति मैंने तुम्हें वो रूप दिया है कि
सुरज निकालने से पहले जिसके दीदार के लिए
इन्द्र को भी इस धरा पे आना पड़ता है,
#प्रीति अप्सराओं को भी अपने यौवन पर
शर्माना पड़ता है,
#प्रीति मैने तुम्हे सजाया है अपने शब्दो से,
रस, छंद, अलंकार और वर्तनी से,
क्योंकि #प्रीति मै तुम्हारे प्रेम में डूबा
एक साधारण इंसान हूं,
ये टुटे फुटे शब्द ही मेरी पूंजी है,
#प्रीति तुम्हारे प्रति पागलपन ही मेरी धरोहर है,
#प्रीति मेरे अंदर तुम्हारे लिए असीम शक्ति है,
#प्रीति उस सूर्य ने भी अपनी सुबह की
पहली किरण के लिए तुम्हारे रुप यौवन से तेज चुराया है,
#प्रीति एक स्वर्ग आरक्षित हैं तुम्हारे लिए इस नीले अम्बर में,
बस #प्रीति तुम पर लिखा है और #प्रीति तुम को ही पढ़ा है,
मूल्य #प्रीति तुम्हारा दिया तो #प्रीति तुम्हारा ब्याज ही बढ़ा है
अब मन में #प्रीति तुम्हारी अथाह निधियां है
तिजोरी अथाह सुकुन से मेरी प्रिय #प्रीति ने ऐसी भरी हैं
बस #प्रीति ही मेरी संपत्ति है #प्रीति ही मेरी धरोहर है।।
किसी ने मुझसे पुछा_
तुम इतना लिखते हो,,
#प्रीति_प्रीति करते हो,,
तुम्हारी जिंदगी में #प्रीति का
वजूद या अस्तित्व क्या है...??
#प्रीति तुम्हारे लिए ज़रूरी है
या फ़िर तुम्हारी ज़रूरत ...??
कई बार मेरे भी मन में आता है
कि मैं इसका क्या नया जवाब दूँ...
क्योंकि बहुत बार ज़वाब इसका दिया है,,
मैं जानता हूं मैं कितना ही #प्रीति के
बारे में बताऊं,, कितना ही प्रीति पर लिखूं,
लेकिन लिखते वक्त जब मेरा लिखा ही
मैं पढ़ता हूं तो ऐसा लगता है
#प्रीति पर मैंने बस एक कतरा लिखा है,
पुरा समुंदर बाकी है फिर भी
आज फिर से मैं एक छोटा सा
प्रयास कर रहा हूँ ...
तुम्हारे साथ साथ बहुत लोगों का
यह सवाल होता है, जिसका जवाब
कविता में समझा रहा हूँ..
आसान नहीं है #प्रीति के एहसास को
शब्दों में पिरो पाना..
मगर फ़िर भी एक कोशिश
नाकाम कर रहा हूँ...
#प्रीति मेरे लिए
सुकून का वो झोंका है
जिसमें मैं अपनी पीड़ा भूल
कुछ पल जी खोल के
मुस्कुराता हूँ , बेपरवाह होकर....
जैसे जिंदगी में
सब बिल्कुल वैसा है जैसा
मैंने सोच रखा था
ख़्यालों की दुनियाँ में...
#प्रीति मेरे लिए
बरसात की चंद बूँदें है
जिसमे मेरा रोम - रोम भीगता है
कितनी ही अतृप्त इच्छाएं
तृप्त हो जाती है और नई
कल्पनाओं के अंकुर विस्फूटित
होकर कोमल फ़ूल
प्रमुदित हो खिलखिलाते हैं
सदाबहार से ....
#प्रीति मेरे लिए
वो खूबसूरत लम्हा है
जो गुज़र कर भी गुजरता नहीं है
मुझमें ही कहीं लहरों सा उमड़कर
शांत जम सा जाता है..
कितनी ही बाँतें , अनमोल
यादों के क्षण अनायास ही
जुड़ते चले जाते हैं
मुझे सांत्वना देने के लिए.....
#प्रीति मेरे लिए
एक सुंदर सपने का संसार है
जिसमें सबकुछ जीवंत है
प्यार का मीठा झरना बहता है
जहां कटुता, कसैलापन
और किसी के लिए मन में
बुरी भावना नहीं है ,
उस स्वप्न सागर में नौका
विहार का सुख #प्रीति से ही तो
मिलता है ,जहाँ प्रेम नदी
बिन किनारे के
बस बहती है निरंतरता लिए....
किसी ने मुझसे पुछा___
मैंने देखा है आपकी हर पोस्ट #प्रीति पर होती है,,
कभी #प्रीति पर तारीफ लिखते हो,,,
कभी #प्रीति की याद में अश्कों को पिरो जाते हों,
कभी उच्च कोटि के ब्रम्हांडीय शब्दों से
#प्रीति को नवाजते हो,,
पर कभी #प्रीति को लेकर कोई मजाक,
जोक्स नहीं करते हों,,,,,
प्रेम तुम ऐसे कैसे हो,,,
ऐसा क्या है #प्रीति में...?
जब भी कुछ लिखते हो,,
जब भी कुछ बात करते हो
हर बात में #प्रीति को लेकर आते हो...
मैंने कहा ___
प्रेम ऐसा ही है ।
दिन निकलते ही #प्रीति पर ग़ज़लें...
दोपहर होते-होते #प्रीति पर शेर…
शाम होते-होते #प्रीति पर ग्रंथ....
और रात होते-होते #प्रीति पर महाकाव्य
लिख सकता है ....
जिसका रोम_रोम तक मुझे ज़ुबानी याद है...
#प्रीति मेरी बातों में,, #प्रीति ही मेरी आंखों में,,
ज़र्रे ज़र्रे में #प्रीति है,,, जिधर नजर घुमाता हूं
हर जगह बस #प्रीति ही #प्रीति होती है क्योंकि
#प्रीति मेरा #वजूद है कोई #भद्दा_मज़ाक थोड़ी हैं.....!!
#प्रीति मेरी पूरी #कायनात है मात्र एक #स्त्री थोड़ी हैं....
#प्रीति सुर्ख_आँखें...नंगे_पांव...
बिखरी_जुल्फें..ताजमहल_सा_बदन
मैने रंग दिया दिल का हर कोना #प्रीति
तुम्हारी खूबसुरती से,
मेरी धडकनों से,
मेरे मस्तिष्क के नसों से,
#प्रीति तुम्हें याद करके आँखों में आते आँसुओं से,
कानों में गुंजती #प्रीति तुम्हारी मधुर आवाज़ से,
मेरी परछाई में दिखते #प्रीति तुम्हारे एहसास से,
मेरे रोम_रोम में लहराते #प्रीति तुम्हारे तरंगों से,
#प्रीति तुम्हें छुने को बेताब स्पंदन करती मेरी साँसों से
पूछो••••••••
सुकुन किसे कहते हैं.....!
क्योंकि कण_कण से #प्रीति तुम्हारी खूश्बु आती हैं,,,,
जर्रे_जर्रे में #प्रीति तुम नजर आती हों,,,
कस्तुरी बन महकती है साँसें मेरी कुछ इस तरह,,,,
मेरे रोम_रोम में #प्रीति तुम निखार लाती हों....!
अब हर वक्त #प्रीति तुम्हारे इतने नशें पीने के बाद
मेरे रोम-रोम में अठखेलियाँ करती
#प्रीति तुम्हारी नटखट_अदाएं देख कर
दिल से निकली गजल कहू,,
या रुह पर रक्स करते तुम्हारी अदाओं से
निकले शेर पढुं,
या जग की चिंता छोड़ अपनी ही धुन में
इश्क़ कैसे निखार लाता है
यह बस.... #प्रीति तुम्हारी आंखों में आंखें डालकर
देखता रहु....