Pitta Prakriti - पित्त प्रकृति: समस्याएँ और उन्हें कंट्रोल करने का आयुर्वेदिक तरीका - इस पोस्ट में जानेंगे - पित्त प्रकृति वालों को आमतौर पर कौन-कौन सी समस्याएँ होती हैं
और किन आदतों, खानपान और लाइफस्टाइल से वे इन समस्याओं को कंट्रोल कर सकते हैं
पित्त का मतलब क्या है?
आयुर्वेद में पित्त का सीधा संबंध अग्नि (Fire) से है।
जैसे आग का नेचर गर्म, तेज़ और फैलने वाला होता है, वैसे ही पित्त प्रकृति वाले लोग भी-
गर्म नेचर के
तेज़ सोच वाले
जल्दी रिएक्ट करने वाले
और हाई एनर्जी वाले होते हैं
इसी वजह से इन्हें गर्मी से जुड़ी बीमारियाँ ज्यादा होती हैं।
पित्त प्रकृति में दिखने वाली आम शारीरिक समस्याएँ
पित्त का सबसे प्रमुख गुण है उष्ण (गर्मी)।
इसी गर्मी के कारण पित्त वालों में ये समस्याएँ जल्दी दिखती हैं:
कम उम्र में बाल सफेद होना
जवानी में ही बाल झड़ना
चेहरे पर जल्दी झुर्रियाँ
शरीर पर ज्यादा तिल या मोल्स
हाथ-पैरों में जलन और दाह
पसीना बहुत ज्यादा आना
इसके अलावा अंदरूनी तौर पर भी पित्त से जुड़ी समस्याएँ होती हैं, जैसे-
हेपेटाइटिस
नेफ्रोटिक डिसऑर्डर
मेनिन्जाइटिस
शरीर में बार-बार सूजन या इंफ्लेमेशन
इसलिए पित्त वालों को ऐसी चीज़ें अपनानी चाहिए जो ठंडी हों, शांत करने वाली हों और पित्त को दबा कर रखें।
पित्त को शांत रखने का सबसे बड़ा हथियार: घी
आयुर्वेदाचार्य वाग्भट साफ कहते हैं-
पित्त शमन के लिए घी से बढ़कर कोई औषधि नहीं।
घी-
पित्त को शांत करता है
जलन और दाह को कम करता है
दिमाग और शरीर दोनों को ठंडक देता है
पित्त वालों को घी का प्रयोग:
खाने में
नाक में (नस्य के रूप में)
पैरों के तलवों में मालिश
इन सभी तरीकों से करना चाहिए।
खासकर देसी गाय का घी पित्त वालों के लिए अमृत के समान है।
पित्त प्रकृति वालों के लिए घी का सही उपयोग
1. खाने में घी
कैसे: 1–2 चम्मच शुद्ध देसी गाय का घी
कब: सुबह खाली पेट या खाने के साथ
फायदा: शरीर की गर्मी, जलन और एसिडिटी शांत करता है
2. नाक में घी (नस्य)
कैसे: हल्का गुनगुना घी, 2–2 बूंद
कब: सुबह खाली पेट
फायदा: दिमाग की गर्मी, गुस्सा और सिर की जलन कम करता है
3. पैरों के तलवों में मालिश
कैसे: रात को सोने से पहले घी से हल्की मालिश
कितना: ½–1 चम्मच
फायदा: नींद बेहतर, शरीर और दिमाग दोनों को ठंडक
पित्त कंट्रोल का सबसे आसान फॉर्मूला: घी अंदर भी, बाहर भी।
पित्त का दूसरा गुण: तीक्ष्णता (Sharpness)
पित्त वाले लोग नेचर से-
तेज़
प्राउड
एग्रेसिव
और जल्दी झगड़े के लिए तैयार
होते हैं।
इसी तीक्ष्ण गुण की वजह से पित्त से जुड़ी ये समस्याएँ होती हैं:
नाक से खून आना
मल या मूत्र में खून
महिलाओं में ज्यादा ब्लीडिंग
प्लेटलेट्स का गिरना
रक्तपित्त जैसी बीमारियाँ
यह सब पित्त की अत्यधिक तीक्ष्णता का संकेत है।
तीक्ष्ण पित्त को कैसे कंट्रोल करें?
यहाँ सबसे बड़ा रोल निभाता है आंवला।
आंवला-
नेचर में ठंडा
पाँच रसों से युक्त
पित्त शमन में श्रेष्ठ
आंवले का सेवन आप इन रूपों में कर सकते हैं:
आंवला अचार
आंवला चटनी
आंवला मुरब्बा
आंवला कैंडी
या आंवला पाउडर (खाली पेट)
पित्त वालों के लिए आंवला
कैसे इस्तेमाल करें
सुबह खाली पेट:
1 ताज़ा आंवला या
1 चम्मच आंवला पाउडर + गुनगुना पानी
खाने के साथ:
आंवले की चटनी / मुरब्बा (कम मात्रा)
पित्त कंट्रोल का सबसे सस्ता और असरदार उपाय: रोज़ का आंवला।
जो लोग मानसिक रूप से बहुत हाइपर रहते हैं, जल्दी गुस्सा करते हैं, उनके लिए आंवला बेहद ज़रूरी है।
पित्त वालों की बड़ी परेशानी: ज्यादा पसीना और बदबू
गर्मी के कारण पित्त वालों में-
पसीना ज्यादा आता है
और उस पसीने से दुर्गंध भी ज्यादा होती है
आयुर्वेद इसे विश्रम गुण से जोड़ता है -
गर्मी में चीज़ें जल्दी खराब होती हैं,
वैसे ही पित्त वाले शरीर में भी सड़न जल्दी होती है।
पसीना और गर्मी कंट्रोल करने के उपाय
चंदन का लेप
ठंडी उबटन
शरीर पर शीतल लेप
इसके अलावा-
त्रिफला
बेलपत्र (5–6 पत्ते चबा कर)
ये पित्त की गर्मी और पसीने को कम करने में मदद करते हैं।
पित्त की गर्मी और ज्यादा पसीने के लिए सही मात्रा
त्रिफला
मात्रा: 1/2 से 1 चम्मच
कैसे: गुनगुने पानी के साथ
कब: रात को सोने से पहले
फायदा: पित्त शमन, शरीर की गर्मी और बदबूदार पसीना कम
बेलपत्र
मात्रा: 5–6 ताज़े पत्ते
कैसे: अच्छे से धोकर चबा-चबा कर
कब: सुबह खाली पेट या खाने के बीच
फायदा: पित्त की हीट, पसीना और जलन कंट्रोल
नियमित, सही मात्रा = पित्त शांत, शरीर ठंडा।
पित्त के अन्य गुण और सही आहार
पित्त के अन्य गुण हैं:
लघु (हल्का)
सर (फैलने वाला)
द्रव (तरल)
इसीलिए पित्त वालों को-
थोड़ा भारी और पौष्टिक भोजन करना चाहिए।
पित्त वालों की अग्नि तेज़ होती है,
इसलिए वे भारी चीज़ें भी आसानी से पचा लेते हैं।
पित्त वालों के लिए सही “भारी” आहार
भारी मतलब जंक या तला-भुना नहीं, बल्कि पोषण देने वाला भोजन
दूध, घी, मक्खन (देसी)
चावल, गेहूं, दलिया
खीर, दलिया, दूध वाली चीजें
मूंग दाल, मसूर (कम मसाले में)
मीठे फल – केला, अंगूर, अनार
उबली या घी में बनी सब्ज़ियां
पित्त के लिए सबसे अच्छे रस
1. मधुर रस (मीठा)
शरीर और दिमाग दोनों को शांत करता है
पित्त को बैलेंस करता है
2. तिक्त रस (कड़वा)
पसीना
बदबू
हीट
को कंट्रोल करता है
उदाहरण:
करेला
नीम
परवल
3. कषाय रस (कसैला)
आंवला इसका सबसे अच्छा उदाहरण है
पित्त वालों को किन चीज़ों से दूर रहना चाहिए
पित्त वालों के लिए सबसे खतरनाक चीज़ें:
नमक – बहुत ज्यादा पित्त बढ़ाता है
खट्टा – पित्त को भड़काता है
अत्यधिक तीखा – रेड हॉट चिली, मसाले
इनका सेवन जितना कम करेंगे, उतना फायदा होगा।
ठंडी और सुगंधित चीज़ों का महत्व
आयुर्वेद कहता है—
सुगंध पृथ्वी तत्व से जुड़ी होती है
और पृथ्वी तत्व पित्त को शांत करता है।
इसलिए:
फूलों की खुशबू
चंदन
कपूर
नेचुरल सुगंध
इनका प्रयोग पित्त वालों के लिए बहुत लाभदायक है।
चांदी पहनना, ठंडी माला या ठंडी धातु भी पित्त को शांत करती है।
पित्त वालों की सबसे सस्ती दवा: चंद्रमा की रोशनी
पित्त वालों के लिए—
सूर्य की तेज़ रोशनी नहीं
बल्कि चंद्रमा की ठंडी रोशनी फायदेमंद है
रात में चांदनी में बैठना, चंद्र दर्शन करना-
दिमाग और शरीर दोनों को ठंडक देता है।
पित्त और मन: शांत रहने के तरीके
मधुर संगीत
बांसुरी
वायलिन
शांत धुनें
डीजे, नाइट पार्टी, तेज़ म्यूज़िक
पित्त को और बढ़ाता है।
ध्यान, योग, शीतली–शीतकारी प्राणायाम
पित्त वालों के लिए वरदान है।
वाग्भट ऋषि के अनुसार 3 अनिवार्य चीज़ें
अगर सब कुछ करना मुश्किल लगे,
तो ये तीन चीज़ें ज़रूर अपनाइए:
घी – कोई विकल्प नहीं
दूध – देसी गाय का
विरेचन – साल में एक बार आयुर्वेदिक तरीके से
विरेचन और रक्तमोक्षण-
पित्त कंट्रोल की सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा है।
Conclusion
अगर आप पित्त प्रकृति के हैं,
तो आपकी एनर्जी बहुत स्ट्रॉन्ग है।
ज़रूरत है उसे शांत, संतुलित और सही दिशा में लगाने की।
सही खानपान, ठंडी आदतें, घी, आंवला, ध्यान
आपको लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं।