Monday, February 9, 2026

पूजा से पहले स्नान क्यूँ

 पूजा से पहले स्नान: केवल एक रस्म नहीं, एक गहरा विज्ञान 

हम अक्सर सुनते हैं कि पूजा-पाठ, जप या होम से पहले स्नान अनिवार्य है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे का वास्तविक कारण क्या है? हमारे शास्त्र इस पर क्या कहते हैं?

यह सिर्फ शरीर की धूल-मिट्टी धोने के बारे में नहीं है, बल्कि यह मन और आत्मा की शुद्धि की पहली सीढ़ी है।

📜 शास्त्रों का मत:

1️⃣ कूर्मपुराण के अनुसार, सोये हुए व्यक्ति के मुख से निरंतर लार बहती है, जिससे शरीर अशुद्ध हो जाता है। प्रातः स्नान न केवल इस अशुद्धि को दूर करता है, बल्कि दुःस्वप्न और बुरे विचारों का भी नाश करता है।

2️⃣ भविष्यपुराण स्पष्ट करता है कि स्नान के बिना चित्त की निर्मलता और भावशुद्धि संभव नहीं है।

3️⃣ देवीभागवत में चेतावनी दी गई है कि स्नान किए बिना किए गए दिन भर के सभी कर्म फलहीन हो जाते हैं।

✨ दो प्रकार की पवित्रता:

केवल जल और साबुन से बाहरी शरीर को धोना ही पर्याप्त नहीं है। सच्ची पवित्रता तब आती है जब बाहरी स्नान के साथ-साथ 'भीतरी स्नान' भी हो।

बाहरी शुद्धि: जल और सात्विक आहार से।

भीतरी शुद्धि: काम, क्रोध, लोभ और अहंकार जैसे विकारों को त्यागने से।

🌿 स्नान के 10 अद्भुत लाभ (विश्वामित्र स्मृति):

विधिपूर्वक प्रातः स्नान करने वाले को रूप, तेज, बल, पवित्रता, आयु, आरोग्य, निर्लोभता, तप, मेधा (बुद्धि) की प्राप्ति होती है और दुःस्वप्नों का नाश होता है।

निष्कर्ष:

स्कंदपुराण कहता है, "जिसने मन का मैल धो डाला है, वही वास्तव में शुद्ध है।" इसलिए, अगली बार जब आप पूजा से पहले स्नान करें, तो केवल शरीर को नहीं, अपने मन को भी विकारों से मुक्त करने का संकल्प लें।

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