Friday, January 30, 2026

स्त्रियों का वाद–विवाद

 स्त्रियों का वाद–विवाद: आधुनिक समय में मन, मौन और मानसिक संघर्ष"


आधुनिक युग की स्त्री बोलती है, पर हर बार सुनी नहीं जाती।

वह तर्क करती है, पर उसे भावुक कह दिया जाता है।

वह असहमति जताती है, पर उसे झगड़ालू मान लिया जाता है।


स्त्री का वाद–विवाद आज केवल सामाजिक प्रश्न नहीं रह गया है,

यह उसके मन, आत्मसम्मान और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा गहरा विषय बन चुका है।


1. “धीरे बोलो” की सीख और मन पर उसका बोझ


आज की शिक्षित और कामकाजी स्त्री को बार-बार यह सिखाया जाता है....


शांत रहोगी तो समझदार कहलाओगी


ज़्यादा बोलोगी तो कठिन समझी जाओगी


तर्क करोगी तो रिश्ते बिगड़ेंगे


ये बातें धीरे-धीरे उसके मन में यह विचार बैठा देती हैं कि

उसकी आवाज़ ही समस्या है।


आधुनिक उदाहरण:

कार्यालय की बैठक में जब कोई महिला किसी योजना पर प्रश्न उठाती है, तो कहा जाता है....


“इस विषय को इतना व्यक्तिगत मत बनाइए।”


पर वही प्रश्न कोई पुरुष रखे तो उसे सूझबूझ कहा जाता है।

यह अनुभव स्त्री के मन में एक चुपचाप चलने वाला संघर्ष पैदा करता है क्या मेरी सोच कमज़ोर है, या मुझे कम आँका जा रहा है?


2. घर के भीतर का वाद–विवाद और सिखाई गई चुप्पी


आज के घरों में स्त्री बोल सकती है,

पर हर विषय पर नहीं।


वह रसोई पर सुझाव दे सकती है


पर जीवन के निर्णयों पर नहीं


वह बच्चों पर राय दे सकती है


पर अपने सपनों पर नहीं


बार-बार उसकी बात टाल दी जाती है, और कहा जाता है...


“घर की शांति के लिए चुप रहना बेहतर है।”


यह चुप्पी बाहर से शांति लगती है,

पर भीतर यह भावनात्मक थकान बन जाती है।

धीरे-धीरे स्त्री बोलना नहीं छोड़ती,

वह बोलने की इच्छा खोने लगती है।


3. सामाजिक माध्यम और नई तरह का मानसिक दबाव


आज स्त्रियों के पास अपनी बात रखने के मंच हैं,

पर साथ ही अपमान और आक्रमण भी।


उदाहरण:

जब कोई स्त्री घरेलू हिंसा, माहवारी, मातृत्व का दबाव या कार्यस्थल की असमानता पर लिखती है, तो उसे कहा जाता है....


दिखावा कर रही है


परिवार बदनाम कर रही है


समस्या है तो सहन क्यों नहीं करती


यह विवाद विचारों पर नहीं,

उसके चरित्र पर किया जाता है।

लगातार ऐसी प्रतिक्रियाएँ स्त्री के मन में भय, घबराहट और आत्मग्लानि पैदा करती हैं।

अंततः वह फिर चुप हो जाती है।


4. रिश्तों में तर्क और अनुभव का否करण


आधुनिक रिश्तों में एक सूक्ष्म मानसिक हिंसा दिखाई देती है।


उदाहरण:

स्त्री कहती है....


“तुम मेरी बात बिना सुने टाल देते हो।”


उत्तर मिलता है....


“तुम हर बात को बढ़ा देती हो।”

“तुम्हारी सोच ही गलत है।”


यह तर्क नहीं,

बल्कि स्त्री के अनुभव को झुठलाना है।

धीरे-धीरे वह अपने ही मन पर शक करने लगती है शायद मैं ही गलत हूँ।


5. स्त्री का सबसे कठिन वाद–विवाद: स्वयं से


सबसे गहरा संघर्ष बाहर नहीं,

स्त्री के भीतर चलता है


बोलूँ तो रिश्ते टूटेंगे


चुप रहूँ तो खुद टूट जाऊँगी


सही हूँ, फिर भी अपराधबोध क्यों है?


यह आंतरिक वाद–विवाद उसे मानसिक रूप से थका देता है।

कई स्त्रियाँ मुस्कुराती रहती हैं,

पर भीतर से खाली होती जाती हैं।


6. मानसिक स्वास्थ्य और दबाई गई आवाज़


आज स्त्रियों में बढ़ती मानसिक समस्याओं का एक बड़ा कारण यह भी है कि


उनकी भावनाओं को महत्व नहीं दिया जाता


उनके अनुभवों को नकार दिया जाता है


उनकी असहमति को अपराध बना दिया जाता है


अभिव्यक्त न की गई भावनाएँ समाप्त नहीं होतीं,

वे मन पर बोझ बनकर रह जाती हैं।


7. वाद–विवाद नहीं, स्वीकार्यता चाहिए


स्त्री को झगड़ने का शौक नहीं है।

वह केवल यह चाहती है कि


उसकी बात सुनी जाए


उसके अनुभव को सच माना जाए


उसकी असहमति को अपमान न समझा जाए


स्त्री का वाद–विवाद दरअसल यह कहना है.... “मैं भी सोचती हूँ, महसूस करती हूँ, और मेरी अनुभूति भी वास्तविक है।”


जिस दिन समाज स्त्री की आवाज़ से डरना छोड़ देगा,

शायद उस दिन स्त्री खुद से लड़ना बंद कर सकेगी।


स्त्री की चाहत क्या है।


एक विद्वान को फांसी लगने वाली थी।


राजा ने कहा, आपकी जान बख्श दुंगा यदि सही उत्तर बता देगा तो


*प्रशन : आखिर स्त्री चाहती क्या है ??*


विद्वान ने कहा, मोहलत मिले तो पता कर के बता सकता हूँ।


राजा ने एक साल की मोहलत दे दी और साथ में बताया कि अगर उतर नही मिला तो फांसी पर चढा दिये जाओगे,


विद्वान बहुत घूमा बहुत लोगों से मिला पर कहीं से भी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।


आखिर में किसी ने कहा दूर एक जंगल में एक भूतनी रहती है वही बता सकती है।


भूतनी ने कहा कि मै इस शर्त पर बताउंगी यदि तुम मुझसे शादी करो।


उसने सोचा, जान बचाने के लिए शादी की सहमति देदी।


शादी होने के बाद भूतनी ने कहा, चूंकि तुमने मेरी बात मान ली है, तो मैंने तुम्हें खुश करने के लिए फैसला किया है कि 12 घन्टे मै भूतनी और 12 घन्टे खूबसूरत परी बनके रहूंगी,

अब तुम ये बताओ कि दिन में भूतनी रहूँ या रात को?

उसने सोचा यदि वह दिन में भूतनी हुई तो दिन नहीं कटेगा, रात में हुई तो रात नहीं कटेगी।


अंत में उस विद्वान कैदी ने कहा, जब तुम्हारा दिल करे परी बन जाना, जब दिल करे भूतनी बनना।


ये बात सुनकर भूतनी ने प्रसन्न हो के कहा, चूंकि तुमने मुझे अपनी मर्ज़ी की करने की छूट देदी है, तो मै हमेशा ही परी बन के रहा करूँगी।


यही तुम्हारे प्रश्न का उत्तर है।


*स्त्री अपनी मर्जी का करना चाहती है।


*यदि स्त्री को अपनी मर्ज़ी का करने देंगे तो ,


*वो परी बनी रहेगी वरना भूतनी 

😃😃☹☹


फैसला आप का ,

ख़ुशी आपकी


सभी विवाहित पुरुषों को समर्पित। 😉😀😃



रामचरितमानस में 14 प्रकार के व्यक्तियों को मरा हुआ माना है

 रामचरितमानस में 14 प्रकार के व्यक्तियों को मरा हुआ माना है । कौनसे वो चौदह प्रकार के व्यक्ति है जो जीवित होते हुए भी मरे हुए है।🐦🍁राम-रावण युद्ध चल रहा था, तब अंगद ने रावण से कहा- हे रावण! तू तो मरा हुआ है, मरे हुए को मारने से क्या फायदा?🐦


रावण बोला– मैं जीवित हूँ, मरा हुआ कैसे?


अंगद बोले, सिर्फ साँस लेने वालों को जीवित नहीं कहते - साँस तो लुहार की धौंकनी भी लेती है!🐦


कौल कामबस कृपिन विमूढ़ा।


अतिदरिद्र अजसि अतिबूढ़ा।।


सदारोगबस संतत क्रोधी।


विष्णु विमुख श्रुति संत विरोधी।।


तनुपोषक निंदक अघखानी।


जीवत शव सम चौदह प्रानी।।🐦


#फॉलो_मी ..….... परी पाण्डेय ✍️


१. कामवश: जो व्यक्ति अत्यंत भोगी हो, कामवासना में लिप्त रहता हो, जो संसार के भोगों में उलझा हुआ हो, वह मृत समान है। जिसके मन की इच्छाएं कभी खत्म नहीं होतीं और जो प्राणी सिर्फ अपनी इच्छाओं के अधीन होकर ही जीता है, वह मृत समान है। वह अध्यात्म का सेवन नहीं करता है, सदैव वासना में लीन रहता है।


२. वाममार्गी: जो व्यक्ति पूरी दुनिया से उल्टा चले, जो संसार की हर बात के पीछे नकारात्मकता खोजता हो, नियमों, परंपराओं और लोक व्यवहार के खिलाफ चलता हो, वह वाम मार्गी कहलाता है। ऐसे काम करने वाले लोग मृत समान माने गए हैं।


३. कंजूस: अति कंजूस व्यक्ति भी मरा हुआ होता है। जो व्यक्ति धर्म कार्य करने में, आर्थिक रूप से किसी कल्याणकारी कार्य में हिस्सा लेने में हिचकता हो, दान करने से बचता हो, ऐसा आदमी भी मृतक समान ही है।


४. अति दरिद्र: गरीबी सबसे बड़ा श्राप है। जो व्यक्ति धन, आत्म-विश्वास, सम्मान और साहस से हीन हो, वह भी मृत ही है। अत्यंत दरिद्र भी मरा हुआ है। गरीब आदमी को दुत्कारना नहीं चाहिए, क्योंकि वह पहले ही मरा हुआ होता है। दरिद्र-नारायण मानकर उनकी मदद करनी चाहिए।


५. विमूढ़: अत्यंत मूढ़ यानी मूर्ख व्यक्ति भी मरा हुआ ही होता है। जिसके पास बुद्धि-विवेक न हो, जो खुद निर्णय न ले सके, यानि हर काम को समझने या निर्णय लेने में किसी अन्य पर आश्रित हो, ऐसा व्यक्ति भी जीवित होते हुए मृतक समान ही है, मूढ़ अध्यात्म को नहीं समझता।


६. अजसि: जिस व्यक्ति को संसार में बदनामी मिली हुई है, वह भी मरा हुआ है। जो घर-परिवार, कुटुंब-समाज, नगर-राष्ट्र, किसी भी ईकाई में सम्मान नहीं पाता, वह व्यक्ति भी मृत समान ही होता है।


७. सदा रोगवश: जो व्यक्ति निरंतर रोगी रहता है, वह भी मरा हुआ है। स्वस्थ शरीर के अभाव में मन विचलित रहता है। नकारात्मकता हावी हो जाती है। व्यक्ति मृत्यु की कामना में लग जाता है। जीवित होते हुए भी रोगी व्यक्ति जीवन के आनंद से वंचित रह जाता है।


८. अति बूढ़ा: अत्यंत वृद्ध व्यक्ति भी मृत समान होता है, क्योंकि वह अन्य लोगों पर आश्रित हो जाता है। शरीर और बुद्धि, दोनों अक्षम हो जाते हैं। ऐसे में कई बार वह स्वयं और उसके परिजन ही उसकी मृत्यु की कामना करने लगते हैं, ताकि उसे इन कष्टों से मुक्ति मिल सके।


९. सतत क्रोधी: २४ घंटे क्रोध में रहने वाला व्यक्ति भी मृतक समान ही है। ऐसा व्यक्ति हर छोटी-बड़ी बात पर क्रोध करता है। क्रोध के कारण मन और बुद्धि दोनों ही उसके नियंत्रण से बाहर होते हैं। जिस व्यक्ति का अपने मन और बुद्धि पर नियंत्रण न हो, वह जीवित होकर भी जीवित नहीं माना जाता। पूर्व जन्म के संस्कार लेकर यह जीव क्रोधी होता है। क्रोधी अनेक जीवों का घात करता है और नरकगामी होता है।


१०. अघ खानी: जो व्यक्ति पाप कर्मों से अर्जित धन से अपना और परिवार का पालन-पोषण करता है, वह व्यक्ति भी मृत समान ही है। उसके साथ रहने वाले लोग भी उसी के समान हो जाते हैं। हमेशा मेहनत और ईमानदारी से कमाई करके ही धन प्राप्त करना चाहिए। पाप की कमाई पाप में ही जाती है और पाप की कमाई से नीच गोत्र, निगोद की प्राप्ति होती है।


११. तनु पोषक: ऐसा व्यक्ति जो पूरी तरह से आत्म संतुष्टि और खुद के स्वार्थों के लिए ही जीता है, संसार के किसी अन्य प्राणी के लिए उसके मन में कोई संवेदना न हो, ऐसा व्यक्ति भी मृतक समान ही है। जो लोग खाने-पीने में, वाहनों में स्थान के लिए, हर बात में सिर्फ यही सोचते हैं कि सारी चीजें पहले हमें ही मिल जाएं, बाकी किसी अन्य को मिलें न मिलें, वे मृत समान होते हैं। ऐसे लोग समाज और राष्ट्र के लिए अनुपयोगी होते हैं। शरीर को अपना मानकर उसमें रत रहना मूर्खता है, क्योंकि यह शरीर विनाशी है, नष्ट होने वाला है।


१२. निंदक: अकारण निंदा करने वाला व्यक्ति भी मरा हुआ होता है। जिसे दूसरों में सिर्फ कमियाँ ही नजर आती हैं, जो व्यक्ति किसी के अच्छे काम की भी आलोचना करने से नहीं चूकता है, ऐसा व्यक्ति जो किसी के पास भी बैठे, तो सिर्फ किसी न किसी की बुराई ही करे, वह व्यक्ति भी मृत समान होता है। परनिंदा करने से नीच गोत्र का बंध होता है।


१३. परमात्म विमुख: जो व्यक्ति ईश्वर यानि परमात्मा का विरोधी है, वह भी मृत समान है। जो व्यक्ति यह सोच लेता है कि कोई परमतत्व है ही नहीं; हम जो करते हैं, वही होता है, संसार हम ही चला रहे हैं, जो परमशक्ति में आस्था नहीं रखता, ऐसा व्यक्ति भी मृत माना जाता है।


१४. श्रुति संत विरोधी: जो संत, ग्रंथ, पुराणों का विरोधी है, वह भी मृत समान है। श्रुत और संत, समाज में अनाचार पर नियंत्रण (ब्रेक) का काम करते हैं। अगर गाड़ी में ब्रेक न हो, तो कहीं भी गिरकर एक्सीडेंट हो सकता है। वैसे ही समाज को संतों की जरूरत होती है, वरना समाज में अनाचार पर कोई नियंत्रण नहीं रह जाएगा।

Wednesday, January 28, 2026

महिलाओं के लिए एक सिनियर डाक्टर का अच्छी सलाह

 महिलाओं के लिए एक सिनियर डाक्टर ने बहुत अच्छी सलाह दी है..???जिसे आपको जरूर जानना चाहिए..???


सलाह बहुत साधारण हैं परन्तु जीवन में बेहद उपयोगी हैं इसलिए अधिकाधिक महिलाओं तक पहुँचनी चाहिए ताकि महिलाएं स्वस्थ जीवन जी सकें।


1 :-आप घर के सारे काम एक बार में ही खत्म नहीं कर सकती, क्योंकि ये अन्तहीन हैं। जिन महिलाओं ने ऐसा करने की कोशिश की, वे बीमार हो गई या जल्दी ही भगवान को प्यारी हो गई।


 2 :-काम के बीच में अपने आराम का भी समय निकालिए, यह कोई पाप नहीं है। थोड़ी देर पैर फैलाकर सोफे, बिस्तर या फर्श पर बैठिये, थोड़ी देर कुछ मूंगफली, फूले हुए मक्का या भुने हुए चने के दाने खाइए,कोई मनपसंद गीत गुनगुनाइए या सुनिए, अपनी मनपसंद पुस्तक पढ़िये। आप जल्दी ही आराम महसूस करेंगी।


3 :-घर के काम करते हुए यदि सिर में दर्द हो गया हो, बहुत थकान हो रही हो तो थोडी देर के लिए एक झपकी ले लीजिये।* यकीन मानिए, आपका सिरदर्द, थकान छूमन्तर हो जायेगी। जिन्होंने आराम को हराम समझा, वे अपने परिवार से जल्दी ही विदा हो गई।


4 :-सोने के लिए कभी भी नींद या नशे की गोलियों का सहारा मत लीजिये। इनके बुरे प्रभाव से दिमाग और शरीर के अनेक अंग खराब हो जाते हैं।भूलने की समस्या पैदा हो जाती है। *सोने के लिए अपने दिमाग को शान्त कीजिये, सोचिये मत, चिन्ता बिल्कुल मत कीजिये।सबकुछ अपने समय पर ही सही हो जाता है। *चिन्ता करने से आप शरीर में Diabetes, Hypertension (BP), Heart stroke, brain stroke, किड़नी और लीवर की बीमारियों आदि की शिकार हो सकती हैं।


5 :-कुछ समय प्रकृति के सानिध्य में भी गुजारिए। किसी पार्क या उपवन में आराम से बैठिये। कुछ सोचिये मत, लम्बी साँस लीजिये और बस फूलों, पौधों तथा तितलियों जैसे छोटे छोटे जीव जन्तुओं को ध्यान से देखकर ईश्वर की कारीगरी की तारीफ कीजिये। उठकर वापस चलने की जल्दी बिल्कुल मत कीजिये। आपका सारा तनाव छूमन्तर हो जायेगा।


6 :-कभी कभी अपने बैड़रूम या बाथरूम में लगे दर्पण के सामने खड़े होकर अपने आपको निहारिए, सँवारिये। इसलिये नहीं कि आपको किसी पार्टी में जाना है या किसी को दिखाना है, बस अपने लिए, अपने खुद के लिए स्वयं पर ध्यान दीजिये।


मन करे तो अपने शीशे के सामने थोड़ा मुस्कुराइए, हँसिये या फिर कुछ गुनगुनाकर डाँस कीजिये। उन पलों को याद कीजिये जब आपके पतिदेव आपकी सुन्दरता की खुलकर तारीफ किया करते थे। यदि आपको अपनी आंखों के नीचे काले घेरे या त्वचा पर झुर्रियां नजर आयें तो अपने आप पर तरस मत खाइये, बस थोड़ी सी मलाई अपनी त्वचा पर मलिये और धीरे धीरे मालिश कीजिये।बाद में किसी हल्के फेशवॉश से मुँह धो लीजिए। यकीन मानिए, आप स्वयं को सुन्दर और तरोताज़ा महसूस करेंगी।


7 :-किसी दिन जरा सा समय मिले तो अपनी यादों का पिटारा, अपनी शादी की अलबम खोल लीजिए। उन पलों और उनसे जुड़ी हँसी ठिठोली को याद कीजिये।निश्चित ही आपके चेहरे पर अद्भुत मुस्कान आ जायेगी। बुरी यादों को मकड़ी के गन्दे जालों की तरह झाड़ कर बाहर फेंक दीजिये।


8 :-यदि मन करे तो अपने लिए भी बाहर से कोई स्नैक या सॉफ्टड्रिंक, जूस आदि लेकर उसका आनन्द लीजिए। आप हमेशा ही परिवार, बच्चों, पौत्रों आदि के बारे में सोचती रही हैं। कभी कभी अपने लिए भी कुछ लीजिये।


9 :-घर में काम ज्यादा हो तो घर मेंबर ऐसी मशीनें (Gadgets) लाइये जिनसे कुछ काम आसान हो जायें। जरूरत हो तो किसी कामवाली बाई की मदद भी लीजिये। मगर रसोई में खाना बनाना और परोसना अपने हाथ में ही रखिये। बच्चों और आपके पतिदेव को इतने प्यार से दूसरा कोई भोजन नहीं करा सकता जितना कि आप स्वयं। अधिक काम से अधिक तनाव होता है और यह अनजाने में ही लाखों लोगों की जान ले लेता है।


10 :-यदि आपकी तबीयत ठीक नहीं है और आप बीमार हैं तो यह छुपाइये मत। इसके लिए सही डॉक्टर, हास्पिटल आदि से इलाज लेकर सही उपचार लीजिए।समय से इलाज मिलने पर बीमारी गम्भीर रूप धारण नहीं कर पायेगी। यह आपके जीवन का प्रश्न है इसमें लापरवाही बिल्कुल मत कीजिये।


11 :-समय समय पर अपना BP, Sugar चैक करते रहिये, चाहे आप बीमार हों या नहीं। इससे कोई बीमारी होने से पहले ही पता चल जाता है और परेशानी गम्भीर नहीं हो पाती।


12 :-यह हमेशा याद रखिये कि आप अपने परिवार के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं,भले ही कोई आपको यह जताये या नहीं। आपकी अनुपस्थिति में परिवार बिखर जायेगा, परेशान हो जायेगा। इसलिए अपना पूरा ध्यान रखना भी आपकी ही जिम्मेदारी है।


आपको यदि दी गई जानकारी ठीक लगे तो इस बात को अपनी हर उस मित्र शुभचिंतक परिजन तक पहुँचाइए जिसे आप वास्तव में स्वस्थ देखना चाहते /चाहती हैं.?

Tuesday, January 27, 2026

कहीं आप उलझ तो नहीं रहे…

 कहीं आप उलझ तो नहीं रहे…


अक्सर हम यह महसूस ही नहीं कर पाते कि हमारी ज़्यादातर ऊर्जा बड़ी समस्याओं में नहीं, बल्कि छोटी-छोटी बातों और घटनाओं में उलझकर ख़त्म हो जाती है। कोई हल्की-सी बात, किसी का एक वाक्य, बीती हुई कोई घटना, या भविष्य की बेवजह चिंता और हमारा मन उसी में अटक जाता है। धीरे-धीरे यही उलझन सकारात्मक ऊर्जा को कम और नकारात्मकता को बढ़ाने लगती है।


"छोटी बात, बड़ा असर"


मान लीजिए सुबह घर से निकलते समय किसी ने आपसे हल्की-सी कड़वी बात कह दी। बात छोटी थी, लेकिन आप पूरे रास्ते वही सोचते रहे।


ऑफिस पहुँचे तो मन काम में नहीं लगा


किसी और ने कुछ पूछा तो चिड़चिड़ाहट दिखी


शाम तक थकान ज़्यादा और संतुष्टि कम


असल में समस्या उस एक वाक्य की नहीं थी, समस्या थी उसी में उलझे रहना।


"मन की उलझन कैसे नकारात्मकता बनती है"


जब हम बार-बार किसी छोटी घटना को मन में दोहराते हैं, तो:


हमारा ध्यान वर्तमान से हट जाता है


मन शिकायत और तुलना में फँस जाता है


हम वो चीज़ें देख ही नहीं पाते जो सही चल रही होती हैं


जैसे...... 

“उसने ऐसा क्यों कहा?”

“मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है?”

“मैंने तब ऐसा क्यों नहीं कहा?”


ये सवाल जवाब नहीं, ऊर्जा चूसने वाले जाल बन जाते हैं।


सकारात्मक ऊर्जा कहाँ से आती है


सकारात्मक ऊर्जा किसी जादू से नहीं आती। वो आती है:


स्वीकार करने से


छोड़ देने से


वर्तमान में रहने से


उदाहरण के लिए, बारिश में भीग गए


एक इंसान गुस्सा करेगा: “दिन ही खराब हो गया”


दूसरा मुस्कुराएगा: “चलो, आज कुछ अलग हुआ”


घटना एक ही थी, दृष्टिकोण अलग।


उलझने की आदत कैसे पहचानें


आप शायद छोटी बातों में उलझ रहे हैं अगर:


आप पुरानी बातों को बार-बार याद करते हैं


दूसरों की कही बात मन से नहीं उतरती


छोटी बात पर मन भारी हो जाता है


खुश रहने की वजह होते हुए भी खुशी नहीं मिलती


बाहर निकलने का रास्ता


1. हर बात पर प्रतिक्रिया ज़रूरी नहीं

कुछ बातें जवाब नहीं, खामोशी माँगती हैं।


2. जो बदला नहीं जा सकता, उसे छोड़ना सीखें

बीता हुआ समय वापस नहीं आता, लेकिन वो मन ज़रूर खराब कर सकता है अगर आप उसे पकड़े रखें।


3. खुद से सवाल पूछें

“क्या यह बात एक साल बाद मायने रखेगी?”

ज़्यादातर जवाब होता है...नहीं।


4. ध्यान को वर्तमान में लाएँ

एक गहरी साँस, आसपास देखें, अभी के पल को महसूस करें।


ज़िंदगी की मुश्किलें कम नहीं होतीं, लेकिन हमारी उलझनें उन्हें और भारी बना देती हैं।

हर छोटी बात को दिल पर लेना, खुद के साथ अन्याय है।

सकारात्मक ऊर्जा बचानी है तो सीखिए

ज़रूरत से ज़्यादा उलझना छोड़ना।


कहीं आप भी तो नहीं उलझ रहे…?

अगर हाँ, तो आज ही एक छोटी बात छोड़कर देखिए मन हल्का लगेगा। 


विवाह उन सबसे कुरूप संस्थाओं में से एक है जिसे मनुष्य ने गढ़ा है।

 विवाह उन सबसे कुरूप संस्थाओं में से एक है जिसे मनुष्य ने गढ़ा है।

लेकिन यह अच्छे इरादों के साथ बनाया गया है, गहरी चिंता और सद्भावना के साथ।

मैं लोगों की नीयत पर शक नहीं करता,

मैं केवल उनकी बुद्धिमत्ता पर शक करता हूँ।


इरादा सही है,

लेकिन बुद्धि बहुत साधारण है।


यदि अच्छे इरादों के साथ थोड़ी समझ भी होती,

तो माता–पिता बच्चे को प्रेम के बारे में बताते—

अपने प्रेम के बारे में,

अपनी बेचैनियों,

अपनी उलझनों,

अपनी असफलताओं,

अपने निराशाओं के बारे में।


वे उसे बताते कि—

“ये सब जीवन का हिस्सा हैं।

और एक दिन तुम भी प्रेम के बवंडर में फँसोगे।

यह स्वाभाविक है।

डरो मत।


लेकिन याद रखना—

जो कवि कहते हैं, वह सच नहीं है।”


प्रेम कोई स्थायी, शाश्वत चीज़ नहीं है।

यह मानक मत अपनाओ कि

जो प्रेम सदा रहता है वही सच्चा है,

और जो क्षणिक है वह झूठा है।


नहीं!

इसके ठीक विपरीत सच है।


सच्चा प्रेम अत्यंत क्षणिक होता है—

लेकिन वह क्षण ऐसा होता है

कि उसके लिए कोई पूरी अनंतता को भी दाँव पर लगा सकता है।

उस एक पल के लिए

पूरी अनंतता खोने को तैयार हो सकता है।


कौन चाहता है कि वह क्षण स्थायी बन जाए?

और स्थायित्व को इतना मूल्य क्यों दिया जाए?


क्योंकि जीवन प्रवाह है, परिवर्तन है।

केवल मृत्यु स्थायी होती है।

मृत्यु में घड़ी रुक जाती है—

वहीं टिक जाती है, आगे नहीं बढ़ती।


लेकिन जीवन में

घड़ी निरंतर चलती रहती है,

हर दिन नए रास्तों की ओर बढ़ती रहती है।


फिर क्यों स्वयं को एक ही प्रेम में बाँध लिया जाए?

क्यों स्वयं को मजबूर किया जाए?


क्योंकि प्रकृति की मंशा ऐसी नहीं है।


जब तुम प्रकृति के विरुद्ध जाते हो,

तो प्रतिरोध पैदा होता है,

दुख आता है,

असंतोष आता है।


तब विवाह–परामर्श और थैरेपी की ज़रूरत पड़ती है…


प्रकृति चाहती है कि तुम प्रेम को

अनेक रूपों में जानो।


क्योंकि जो तुम एक स्त्री से जान सकते हो,

वह किसी दूसरी स्त्री से नहीं जान सकते।

जो अनुभव एक पुरुष से होगा,

वह किसी दूसरे से नहीं होगा।


हर प्रेम अनूठा है।


कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है।

कोई झगड़ा नहीं है।

और जितना अधिक तुम प्रेम करते हो,

उतना ही तुम्हारा अस्तित्व समृद्ध होता है।


इसलिए मैं उन सब परेशानियों के पक्ष में हूँ—

पीड़ा, चिंता, बेचैनी, निराशा।


बस एक बात जोड़ना चाहता हूँ—

बुद्धिमान बनो।


ये परेशानियाँ इसलिए नहीं हैं कि प्रेम समाप्त हो गया है,

ये इसलिए हैं कि तुम मूर्ख बने हुए हो।


अगर कुछ छोड़ना ही है,

तो अपनी मूर्खता छोड़ो।


लेकिन लोग प्रेम छोड़ देते हैं

और अपने मूर्ख मन को पकड़े रहते हैं।


बुद्धिमान बनो—

और प्रेम तुम्हें इंद्रधनुष के सभी रंग देगा।


तुम अनेक लोगों के माध्यम से

अनेक तरीकों से पूर्ण हो सकोगे।


क्योंकि एक स्त्री

तुम्हारे अस्तित्व के केवल एक पहलू को छुएगी,

बाकी पहलू भूखे रह जाएँगे।


एक पुरुष

तुम्हारे हृदय के किसी एक हिस्से को छुएगा,

बाकी हिस्से बिना विकास के रह जाएँगे।


अगर तुम चिपक गए,

तो एक हिस्सा राक्षस बन जाएगा

और बाकी सब सिकुड़ जाएँगे।


अगर मुझे दुनिया को सलाह देने की अनुमति हो,

तो मेरी सलाह होगी—


लोगों को जितना संभव हो, उतना प्रेम अनुभव करने में मदद करो।


प्रकृति चाहती है कि तुम प्रेम को

अनेक रूपों में जानो।


और जितना अधिक तुम प्रेम करते हो,

उतना ही तुम्हारा अस्तित्व समृद्ध होता है।


तब विवाह–परामर्श जैसी संस्थाएँ

अपने आप अप्रासंगिक हो जाती हैं।

Most important tips for health

#कितने प्रकार की रोटियां #कैसे और कब किस रोटी का आहार ले जानिए बीमारी अनुसार...
1️⃣ मधुमेह (डायबिटीज)
खाएँ: ज्वार, बाजरा, जौ, रागी की रोटी
लाभ: कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स, शुगर धीरे बढ़ती है
बचें: मैदा व बहुत मुलायम गेहूं की रोटी

2️⃣ मोटापा
खाएँ: जौ, ज्वार, बाजरा, ओट्स की रोटी
लाभ: अधिक फाइबर, देर तक पेट भरा रहता है
बचें: मैदा, घी-मक्खन लगी रोटियाँ

3️⃣ कब्ज
खाएँ: गेहूं (चोकर सहित), ज्वार, बाजरा की रोटी
लाभ: आँतों की गति सुधरती है
साथ में: पर्याप्त पानी

4️⃣ हृदय रोग
खाएँ: ज्वार, जौ, ओट्स, रागी की रोटी
लाभ: कोलेस्ट्रॉल घटाने में सहायक
बचें: रिफाइंड आटा

5️⃣ उच्च रक्तचाप
खाएँ: ज्वार, बाजरा, रागी की रोटी
लाभ: पोटैशियम व फाइबर से रक्तचाप संतुलन
बचें: बहुत नमक वाली रोटियाँ

6️⃣ एनीमिया (खून की कमी)
खाएँ: बाजरा, रागी, चना आटा की रोटी
लाभ: आयरन की अच्छी मात्रा
साथ में: विटामिन-C युक्त भोजन

7️⃣ थायरॉइड
खाएँ: ज्वार, बाजरा, रागी की रोटी
लाभ: पोषक तत्व संतुलित
बचें: अत्यधिक मैदा

8️⃣ कमजोरी व कुपोषण
खाएँ: गेहूं, चना आटा मिश्रित रोटी
लाभ: प्रोटीन व ऊर्जा में वृद्धि

9️⃣ पेट की गैस/अम्लता
खाएँ: जौ, रागी की हल्की रोटी
बचें: बहुत मोटी व अधपकी रोटियाँ

🔟 बच्चों व वृद्धों के लिए
खाएँ: नरम गेहूं या जौ की रोटी
लाभ: पचने में आसान

#जादुई है अश्वगंधा का सेवन करना #कई बीमारियों का इलाज छुपा है इसमें #जाने कैसे करे बीमारी अनुसार सेवन संपूर्ण विवरण......

1️⃣ कमजोरी व थकान
मात्रा: ½ चम्मच
तरीका: गुनगुने दूध के साथ
समय: रात को
लाभ: शरीर में बल व ऊर्जा बढ़ाता है

2️⃣ तनाव, चिंता व अवसाद
मात्रा: ½ चम्मच
तरीका: गुनगुने पानी या दूध के साथ
समय: सुबह खाली पेट या रात को
लाभ: मानसिक शांति, बेहतर नींद

3️⃣ अनिद्रा (नींद न आना)
मात्रा: ½ चम्मच
तरीका: दूध + थोड़ा शहद
समय: सोने से पहले
लाभ: गहरी व शांत नींद

4️⃣ पुरुषों में कमजोरी व बांझपन
मात्रा: 1 चम्मच
तरीका: दूध + मिश्री
समय: रात को
लाभ: वीर्य की गुणवत्ता व शक्ति में वृद्धि

5️⃣ महिलाओं में हार्मोन असंतुलन
मात्रा: ½ चम्मच
तरीका: गुनगुना दूध
समय: रात को
लाभ: हार्मोन संतुलन, थकान में राहत

6️⃣ गठिया व जोड़ों का दर्द
मात्रा: ½ चम्मच
तरीका: गुनगुने दूध के साथ
समय: रात को
लाभ: सूजन व दर्द में कमी

7️⃣ मधुमेह (शुगर)
मात्रा: ¼–½ चम्मच
तरीका: गुनगुना पानी
समय: सुबह खाली पेट
लाभ: शुगर नियंत्रण में सहायक

8️⃣ उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर)
मात्रा: ¼ चम्मच
तरीका: गुनगुना पानी
समय: सुबह
लाभ: तनाव कम कर BP संतुलन में मदद

9️⃣ रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होना
मात्रा: ½ चम्मच
तरीका: दूध या काढ़ा
समय: सुबह
लाभ: इम्यूनिटी मजबूत करता है

🔟 थायरॉयड
मात्रा: ¼ चम्मच
तरीका: गुनगुना पानी
समय: सुबह


औषधीय चटनियां जो करती हैं कई बीमारियों से हमारी रक्षा

 स्वास्थ्यवर्धक औषधीय चटनियां जो करती हैं कई बीमारियों से हमारी रक्षा,कैसे बनाए चटनी एवं किस बीमारी में कौनसी है लाभकारी जाने डिटेल...

1️⃣ हरी धनिया चटनी

विधि:

हरा धनिया, हरी मिर्च, अदरक, नींबू रस, थोड़ा नमक पीस लें।

लाभकारी:

👉 पाचन कमजोरी, गैस, भूख न लगना

2️⃣ पुदीना चटनी

विधि:

पुदीना पत्ते, धनिया, भुना जीरा, नींबू रस पीसें।

लाभकारी:

👉 एसिडिटी, मुंह की दुर्गंध, पेट की जलन

3️⃣ लहसुन की चटनी

विधि:

लहसुन, सूखी लाल मिर्च, नमक, थोड़ा सरसों तेल पीसें।

लाभकारी:

👉 उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, कोलेस्ट्रॉल

4️⃣ आंवला चटनी

विधि:

कद्दूकस आंवला, धनिया, जीरा, थोड़ा गुड़ मिलाकर पीसें।

लाभकारी:

👉 रोग प्रतिरोधक क्षमता, बाल झड़ना, कमजोरी

5️⃣ अलसी (तीसी) चटनी

विधि:

भुनी अलसी, लहसुन, हरी मिर्च पीसें।

लाभकारी:

👉 कब्ज, जोड़ों का दर्द, मोटापा

6️⃣ अदरक चटनी

विधि:

अदरक, नींबू रस, शहद, नमक पीसें।

लाभकारी:

👉 सर्दी-खांसी, गले में खराश, अपच

7️⃣ करी पत्ता चटनी

विधि:

करी पत्ता, नारियल, हरी मिर्च, राई पीसें।

लाभकारी:

👉 मधुमेह, बालों की कमजोरी, एनीमिया

8️⃣ नीम पत्ती चटनी

विधि:

कोमल नीम पत्ते, धनिया, नींबू रस पीसें।

लाभकारी:

👉 त्वचा रोग, रक्त शुद्धि, कील-मुंहासे

9️⃣ सहजन पत्ती चटनी

विधि:

सहजन पत्ते, लहसुन, नींबू रस पीसें।

लाभकारी:

👉 कमजोरी, सूजन, मधुमेह

🔟 तिल की चटनी

विधि:

भुने तिल, लहसुन, सूखी मिर्च पीसें।

लाभकारी:

👉 हड्डियों की कमजोरी, ठंड में जोड़ों का दर्द

1️⃣1️⃣ प्याज की चटनी

विधि:

प्याज, लहसुन, सूखी लाल मिर्च, नमक भूनकर पीसें।

लाभकारी:

👉 मधुमेह, कमजोरी, रक्त संचार

1️⃣2️⃣ टमाटर–लहसुन चटनी

विधि:

टमाटर, लहसुन, लाल मिर्च भूनकर पीसें।

लाभकारी:

👉 हृदय रोग, उच्च रक्तचाप

1️⃣3️⃣ तोरई के छिलके की चटनी

विधि:

धुले छिलके, लहसुन, हरी मिर्च पीसें।

लाभकारी:

👉 कब्ज, लीवर की कमजोरी

1️⃣4️⃣ केले के छिलके की चटनी

विधि:

उबले केले के छिलके, नारियल, जीरा पीसें।

लाभकारी:

👉 पेट के घाव, अल्सर, कब्ज

1️⃣5️⃣ कद्दू के छिलके की चटनी

विधि:

छिलके, लहसुन, हरी मिर्च भूनकर पीसें।

लाभकारी:

👉 वजन घटाने, पेट की सफाई

1️⃣6️⃣ इमली की चटनी

विधि:

इमली, गुड़, सौंफ, सोंठ उबालकर पीसें।

लाभकारी:

👉 अपच, भूख की कम


घर पर बनाए ये हेल्थी स्ट्रीट फूड

 घर पर बनाए ये हेल्थी स्ट्रीट फूड,स्वाद भी सेहत भी, देखें बनाने की संपूर्ण विधि...

1️⃣ अंकुरित मूंग चाट

विधि:

अंकुरित मूंग उबालें → प्याज़, टमाटर, हरा धनिया, नींबू रस, काला नमक मिलाएँ → हल्का चाट मसाला डालकर परोसें।

2️⃣ सब्ज़ी पोहा

विधि:

पोहा धोकर रखें → कढ़ाही में थोड़ा तेल, राई, करी पत्ता → सब्ज़ियाँ डालें → पोहा, हल्दी, नमक मिलाकर भाप में पकाएँ → नींबू डालें।

3️⃣ इडली–सांभर

विधि:

इडली बैटर को साँचे में भाप दें।

सांभर हेतु दाल उबालें → सब्ज़ी, इमली, सांभर मसाला डालकर उबालें।

4️⃣ मूंग दाल चीला

विधि:

भीगी मूंग दाल पीसें → अदरक, जीरा, नमक मिलाएँ → तवे पर पतला फैलाकर कम तेल में सेंकें।

5️⃣ स्टीम वेज मोमोज

विधि:

मैदे/गेहूँ आटे की लोई बनाएँ → सब्ज़ी भरें → मोमोज आकार देकर भाप में पकाएँ।

6️⃣ उबला भुट्टा

विधि:

मकई उबालें → नींबू, नमक, मिर्च छिड़कें।

7️⃣ कॉर्न चाट

विधि:

उबली मकई → प्याज़, टमाटर, शिमला मिर्च → नींबू, चाट मसाला मिलाएँ।

8️⃣ सब्ज़ी उत्तपम

विधि:

डोसा बैटर तवे पर डालें → ऊपर कटी सब्ज़ियाँ डालें → ढककर धीमी आँच पर पकाएँ।

9️⃣ पनीर टिक्का

विधि:

पनीर को दही, हल्दी, मिर्च, नमक में मेरिनेट करें → तवे/ग्रिल पर सेकें।

🔟 सादा डोसा

विधि:

फर्मेंटेड बैटर तवे पर फैलाएँ → कुरकुरा होने तक सेंकें।

11️⃣ ब्राउन ब्रेड वेज सैंडविच

विधि:

ब्रेड पर हरी चटनी → सब्ज़ियाँ रखें → ग्रिल/तवे पर हल्का सेंकें।

12️⃣ हेल्दी भेल

विधि:

मुरमुरा, उबला चना → प्याज़, टमाटर → इमली/हरी चटनी कम मात्रा में मिलाएँ।

13️⃣ वेज कटलेट

विधि:

उबली सब्ज़ियाँ मैश करें → मसाले मिलाएँ → टिक्की बनाकर शैलो फ्राय करें।

14️⃣ वेज फ्रैंकी

विधि:

गेहूँ रोटी सेंकें → सब्ज़ी भरें → लपेटकर परोसें।

15️⃣ चना चाट

विधि:

उबला काला चना → प्याज़, टमाटर → नींबू, काला नमक मिलाएँ।

16️⃣ ओट्स टिक्की

विधि:

ओट्स भिगोकर सब्ज़ियों संग मिलाएँ → टिक्की बनाकर तवे पर सेंकें।

17️⃣ वेज उपमा

विधि:

सूजी भूनें → सब्ज़ियाँ व पानी डालें → ढककर पकाएँ।

18️⃣ ढोकला

विधि:

बेसन में दही, ईनो मिलाएँ → भाप में पकाएँ → राई-हरी मिर्च का तड़का दें।

19️⃣ रागी डोसा

विधि:

रागी बैटर तवे पर फैलाएँ → कुरकुरा सेंकें।

20️⃣ वेज सूप

विधि:

सब्ज़ियाँ उबालें → काली मिर्च, नमक डालें → हल्का गाढ़ा कर परोसें।


सलाद के प्रकार और उनके लाभ

 हेल्थी सलाद खाए बीमारी दूर भगाए,जानिए किस बीमारी में कौनसी सलाद खानी चाहिए...


🥗 सलाद के प्रकार और उनके लाभ

1️⃣ हरा सलाद (खीरा, टमाटर, पत्ता गोभी, गाजर)

किसके लिए:

✔ वजन घटाने वाले

✔ कब्ज वाले

✔ त्वचा सुधार के लिए


2️⃣ फल सलाद (सेब, पपीता, अनार, केला, संतरा)

किसके लिए:

✔ कमजोरी में

✔ बच्चों और बुजुर्गों के लिए

✔ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने हेतु


3️⃣ अंकुरित सलाद (अंकुरित मूंग, चना, मसूर)

किसके लिए:

✔ मधुमेह रोगी

✔ प्रोटीन की कमी

✔ जिम/योग करने वाले


4️⃣ चुकंदर सलाद

किसके लिए:

✔ खून की कमी

✔ निम्न रक्तचाप

✔ गर्भवती महिलाएँ


5️⃣ गाजर सलाद

किसके लिए:

✔ आँखों की कमजोरी

✔ त्वचा व बालों के लिए

✔ पाचन सुधार हेतु


6️⃣ खीरा सलाद

किसके लिए:

✔ गर्मी में

✔ पेशाब की जलन

✔ शरीर की गर्मी शांत करने के लिए


7️⃣ पत्ता गोभी सलाद

किसके लिए:

✔ गैस व एसिडिटी

✔ पेट की सफाई

✔ वजन कम करने में सहायक


8️⃣ टमाटर सलाद

किसके लिए:

✔ हृदय रोगी

✔ उच्च रक्तचाप

✔ त्वचा निखार के लिए


9️⃣ अंकुरित + सब्ज़ी सलाद

किसके लिए:

✔ कमजोरी

✔ थकान

✔ लंबे समय तक ऊर्जा के लिए


🔟 दही सलाद (रायता)

किसके लिए:

✔ पेट की जलन

✔ मसालेदार भोजन के बाद

✔ पाचन सुधार हेतु


⚠️ जरूरी सलाह

❌ रात में ज्यादा कच्चा सलाद न खाएँ

✔ सुबह या दोपहर सबसे अच्छा समय

✔ हमेशा ताज़ा सलाद ही खाएँ


सिर के किस प्वाइंट में है किस दर्द का इलाज,

 सिर के किस प्वाइंट में है किस दर्द का इलाज,इनको दबाने या हल्की मसाज करने से मिलता है आराम...


🧠 सिर के कौन-से प्वाइंट किस बीमारी में राहत देते हैं

1️⃣ आज्ञा चक्र (भौंहों के बीच)

📍 स्थान: दोनों भौंहों के बीच

✅ लाभ:

सिरदर्द

माइग्रेन

मानसिक तनाव

नींद न आना

आँखों की थकान

👉 1–2 मिनट हल्का दबाव दें


2️⃣ कपाल मध्य बिंदु (सिर के ऊपर बीच में)

📍 स्थान: सिर के बिल्कुल बीच

✅ लाभ:

चक्कर आना

स्मरण शक्ति कमजोर होना

मानसिक थकान

एकाग्रता की कमी

👉 2 मिनट गोलाई में दबाएँ


3️⃣ कान के ऊपर का प्वाइंट

📍 स्थान: दोनों कानों के ऊपर हल्की गड्ढे जैसी जगह

✅ लाभ:

माइग्रेन

तनाव

जबड़े का दर्द

कानों में आवाज

👉 1–2 मिनट दबाएँ


4️⃣ कान के पीछे का प्वाइंट

📍 स्थान: कान के पीछे उभरी हड्डी के नीचे

✅ लाभ:

सिरदर्द

गर्दन दर्द

साइनस

थकान

👉 1 मिनट दोनों तरफ दबाएँ


5️⃣ कपाल किनारे (टेम्पल पॉइंट)

📍 स्थान: आँखों के पास सिर की साइड में

✅ लाभ:

तेज सिरदर्द

आँख दर्द

माइग्रेन

तनाव

👉 हल्के हाथ से 1–2 मिनट मालिश करें


6️⃣ बालों की जड़ का प्वाइंट (माथे की लाइन पर)

📍 स्थान: माथे पर बालों की जड़ के पास

✅ लाभ:

साइनस

नाक बंद

सिर भारीपन

जुकाम

👉 ऊपर से नीचे 1 मिनट दबाएँ


7️⃣ गर्दन से सिर जुड़ने का प्वाइंट

📍 स्थान: गर्दन और सिर के जोड़ पर दोनों ओर

✅ लाभ:

सर्वाइकल दर्द

सिरदर्द

आँखों में भारीपन

तनाव

👉 अंगूठे से 2 मिनट दबाएँ


⚠️ सावधानी

बहुत तेज दबाव न डालें

गर्भवती महिलाएँ डॉक्टर से पूछकर करें

रोज़ 1–2 बार करना लाभकारी

कौनसी आयुर्वेद दवा किस बीमारी में करें उपयोग

 कौनसी आयुर्वेद दवा किस बीमारी में करें उपयोग,इन दवाइयों का नियमित सेवन जड़ से खत्म करता है बीमारी को...


🌿 आयुर्वेदिक दवाएँ और उनका उपयोग

1️⃣ त्रिफला चूर्ण

👉 कब्ज, गैस, आँखों की कमजोरी, पाचन सुधार


2️⃣ च्यवनप्राश

👉 इम्युनिटी बढ़ाने, बार-बार सर्दी-खाँसी, कमजोरी


3️⃣ अश्वगंधा चूर्ण / कैप्सूल

👉 तनाव, अनिद्रा, कमजोरी, वीर्य वृद्धि, नसों की कमजोरी


4️⃣ शतावरी चूर्ण

👉 महिलाओं की कमजोरी, हार्मोन संतुलन, स्तनपान में वृद्धि


5️⃣ गिलोय घनवटी

👉 बुखार, इम्युनिटी, डेंगू-मलेरिया के बाद कमजोरी


6️⃣ सारिवाद्यासव

👉 त्वचा रोग, खुजली, फोड़े-फुंसी, रक्त शुद्धि


7️⃣ कुमारी आसव (एलोवेरा आसव)

👉 लीवर रोग, कब्ज, मासिक धर्म की समस्या


8️⃣ अर्जुन चूर्ण / अर्जुनारिष्ट

👉 हृदय रोग, हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल


9️⃣ ब्रह्मी वटी

👉 याददाश्त, मानसिक तनाव, सिरदर्द, अनिद्रा


🔟 योगराज गुग्गुल

👉 जोड़ दर्द, गठिया, कमर दर्द, साइटीका


गोंद का इस्तेमाल कैसे करें

 औषधीय गोंद का सेवन कब,किस बीमारी में और किस प्रकार करें जाने डिटेल से...

🌿 गोंद का इस्तेमाल कैसे करें

1️⃣ भिगोकर सेवन

👉 गोंद कतीरा, गोंद गोंदनी/रात में 1 चम्मच पानी में भिगो दें

सुबह दूध / पानी के साथ पिएँ/गर्मी, कब्ज, कमजोरी में लाभ

2️⃣ भूनकर सेवन

👉 गोंद बबूल, बरगद, पीपल/धीमी आंच पर हल्का भूनें

कूटकर चूर्ण बना लें/1 चम्मच दूध के साथ लें

3️⃣ चूर्ण बनाकर👉 अर्जुन, अशोक, साल, शल्लकी

सुखाकर पीस लें/1–3 ग्राम गुनगुने पानी या दूध के साथ

जोड़ों, हृदय, स्त्री रोग में लाभ

4️⃣ दूध के साथ 👉 बबूल, अर्जुन, मोरिंगा

1 चम्मच चूर्ण गर्म दूध में /रात को लेना श्रेष्ठ

5️⃣ 👉 पीपल, नीम, बेल/1 ग्राम चूर्ण + शहद

सुबह खाली पेट/खांसी, गले, संक्रमण में लाभ

6️⃣ 👉 आम, बेल, खैर/1 चम्मच चूर्ण छाछ में

दस्त व पेट के रोग में उपयोगी

7️⃣ 👉 गुग्गुल, हिंग, इमली/1–2 ग्राम गुनगुने पानी में

गैस, सूजन, मोटापा में सहायक

8️⃣ 👉 राल, लोबान, साल/पीसकर पानी / तेल में मिलाएँ

सूजन, घाव, दर्द पर लगाएँ

9️⃣ काढ़ा बनाकर

👉 अशोक, अर्जुन, पीपल

1 चम्मच चूर्ण 1 कप पानी में उबालें/आधा रहने पर छानकर 

🔟 धूप / धूम्र प्रयोग

👉 लोबान, साल/धूप जलाकर वातावरण शुद्ध करें

मानसिक शांति व कीटाणु नाशक

🌿 सभी गोंद के उपयोग का तरीका

1️⃣ गोंद कतीरा

रात में पानी में भिगोएँ, सुबह दूध/पानी के साथ शरीर की गर्मी, कब्ज, कमजोरी

2️⃣ गोंद बबूल हल्का भूनकर चूर्ण बनाएँ, दूध के साथ

हड्डियाँ, कमर दर्द, प्रसव बाद

3️⃣ गोंद गोंदनी (करया)

भिगोकर या चूर्ण बनाकर, पानी के साथ कब्ज, पाचन

4️⃣ गोंद धौरा / शल्लकी

चूर्ण बनाकर दूध या शहद के साथ जोड़ों का दर्द, सूजन

5️⃣ गोंद मोरिंगा (सहजन) चूर्ण बनाकर दूध के साथ

कमजोरी, इम्यूनिटी

6️⃣ गोंद आम चूर्ण बनाकर छाछ के साथ/दस्त, पेट रोग

7️⃣ गोंद नीम चूर्ण + शहद त्वचा रोग, खून साफ

8️⃣ गोंद पीपल चूर्ण + शहद खांसी, दमा

9️⃣ गोंद बरगद चूर्ण + मिश्री स्त्री रोग, कमजोरी

🔟 गोंद बेल चूर्ण + छाछ दस्त, पेचिश

1️⃣1️⃣ गोंद गुग्गुल गोली या चूर्ण, गुनगुने पानी के साथ

जोड़ों, मोटापा, सूजन

1️⃣2️⃣ गोंद लोबान धूप या बहुत कम मात्रा में सेवन

मानसिक शांति, दर्द

1️⃣3️⃣ गोंद राल लेप बनाकर बाहर लगाएँ घाव, सूजन

1️⃣4️⃣ गोंद हिंग चुटकी भर पानी में गैस, अपच

1️⃣5️⃣ गोंद अर्जुन चूर्ण दूध/पानी के साथ हृदय रोग

1️⃣6️⃣ गोंद अशोक काढ़ा या चूर्ण स्त्री रोग

1️⃣7️⃣ गोंद साल लेप या चूर्ण घाव, सूजन

1️⃣8️⃣ गोंद खैर कुल्ला या चूर्ण मुँह के छाले, दस्त

1️⃣9️⃣ गोंद इमली चूर्ण पानी के साथ पेट की गर्मी

2️⃣0️⃣ गोंद चिरैता बहुत कम मात्रा में काढ़ा बुखार, संक्रमण

🌿 लड्डू में उपयोग आने वाले गोंद

1️⃣ गोंद बबूल (खाने वाला गोंद)

सबसे ज़्यादा उपयोग होने वाला गोंद/प्रसव बाद लड्डू

हड्डियाँ, कमर, कमजोरी

2️⃣ गोंद गोंदनी (करया गोंद)/देसी ताकत के लड्डू

कब्ज नहीं करता पाचन में हल्का

3️⃣ गोंद कतीरा (कम मात्रा में)

ठंडक देने के लिए गर्मी में बनने वाले लड्डू

शरीर को शीतल रखता है

4️⃣ गोंद धौरा / शल्लकी जोड़ों व हड्डी के लड्डू

बुजुर्गों के लिए उपयोगी

5️⃣ गोंद साल पारंपरिक देसी लड्डू हड्डी मजबूती के लिए

6️⃣ गोंद अर्जुन हृदय शक्ति लड्डू कमजोरी व थकान में

7️⃣ गोंद अशोक महिलाओं के विशेष लड्डू/मासिक व कमजोरी 

8️⃣ गोंद पीपल खांसी–दमा वाले लड्डू

गले को मजबूत करता है

9️⃣ गोंद बरगद स्त्री शक्ति लड्डू/सफेद पानी, कमजोरी

🔟 गोंद खैर पाचन सुधार लड्डू पेट के लिए हल्का

🍯 लड्डू बनाने का सामान्य तरीका

100 ग्राम गोंद को घी में धीमी आँच पर फुलाएँ

ठंडा कर कूट लें/आटा/मेवा/बीज मिलाएँ

गुड़ या मिश्री डालें/लड्डू बाँध लें


फैटी लीवर कम करता है

 फैटी लीवर,लीवर सिरोसिस, एल्कोहोलिक लीवर,लीवर डिटॉक्स के लिए रामबाण आयुर्वेद टॉनिक,जानिए कब और कैसे किस टॉनिक का सेवन करें...


🌿 1. भूआँवला (Phyllanthus niruri) टॉनिक

लाभ:


फैटी लीवर कम करता है


लीवर की सूजन घटाता है


हेपेटाइटिस व पीलिया में उपयोगी


सेवन:

20–30 ml रस सुबह खाली पेट


🌿 2. कालमेघ (Kalmegh) टॉनिक

लाभ:


लीवर डिटॉक्स का सबसे शक्तिशाली टॉनिक


फैटी लीवर, पीलिया, लीवर इंफेक्शन में लाभकारी


सेवन:

15–20 ml रस दिन में 2 बार


🌿 3. पुनर्नवा टॉनिक

लाभ:


लीवर की सूजन कम करता है


लीवर सेल्स की मरम्मत करता है


शराब या दवाओं से खराब लीवर में लाभ


सेवन:

20 ml सुबह-शाम


🌿 4. कुटकी (कटुकी) टॉनिक

लाभ:


फैटी लीवर कम करने में अत्यंत प्रभावी


पित्त दोष संतुलित करता है


लीवर एंजाइम सुधारता है


सेवन:

10–15 ml टॉनिक या 1–2 ग्राम चूर्ण गुनगुने पानी से


🌿 5. भृंगराज टॉनिक

लाभ:


लीवर को मज़बूत करता है


लीवर डैमेज से बचाता है


रक्त शुद्धि में सहायक


सेवन:

20 ml सुबह खाली पेट


🌿 6. शारपुंखा टॉनिक

लाभ:


लीवर वृद्धि (Enlarged liver) में लाभ


फैटी लीवर में बहुत उपयोगी


पीलिया में सहायक


सेवन:

20 ml दिन में 2 बार


🌿 7. गिलोय टॉनिक

लाभ:


लीवर डिटॉक्स


सूजन व संक्रमण कम करता है


इम्युनिटी बढ़ाता है


सेवन:

20 ml सुबह खाली पेट


🌿 8. लिवर डिटॉक्स आयुर्वेदिक काढ़ा (घर पर)

सामग्री:

कालमेघ + भूआँवला + पुनर्नवा + गिलोय


विधि:

1 चम्मच मिश्रण 2 कप पानी में उबालकर 1 कप करें


सेवन:

सुबह खाली पेट 1 कप