भाग्य क्या होता है .......
क्या सिर्फ भाग्य ही जीवन की दशा और दिशा निर्धारित करता है ....
या सिर्फ कर्म या दोनो.......
यह प्रश्न सबके मन में आता है
मान लीजिए कि आप जब पैदा हुए तो आपका जन्म नक्षत्र के आधार पर यह निश्चित हो जाता है की आपका स्वभाव या रुचि या आदतें या टेमोरामेंट कैसा होगा। यह सब आपके पूर्वजों के डीएनए पर निर्भर करता है।
जन्म नक्षत्र से सिर्फ यह फर्क पड़ेगा कि कौन से गुण आपने मां से कौन से गुण पिता से या दादा या दादी या नाना या नानी या उनके भी पूर्वजों के आयेंगे। क्योंकि कई गुण धर्म कई पीढ़ियों पीछे से आपके मां बाप में छिपी अवस्था या रिसेसिव स्टेट में रहते है जो आपके मां बाप में प्रकट या डोमिनेंट रूप में सामने नही आए।
जैसे किसी की मां में कलर ब्लाइंड के गुण छिपी अवस्था में होते है लेकिन खुद कलर ब्लाइंड नही है। अगर उसका बेटा होता है तो पचास प्रतिशत चांस है की वह कलर ब्लाइंड होगा। लेकिन अगर लड़की हुई तो जीरो प्रतिशत चांस है की वह कलर ब्लाइंड होगी। इसलिए स्त्री कलर ब्लाइंड नही हो सकती इसके 99 प्रतिशत चांस होते हैं।
अगर किसी कलर ब्लाइंड पुरष का पुत्र होता है तो वह कभी कलर ब्लाइंड नही होगा यह गुण इसी पीढ़ी में समाप्त हो जायेगा आगे की पीढ़ियों में नही जायेगा। लेकिन अगर उसी कलर ब्लाइंड पुरष की बेटी होती है तो वह भी कभी कलर ब्लाइंड नही होगी लेकिन यह गुण उसकी बेटी के बेटों में जा सकता है।
इसलिए पुरष कलर ब्लाइंड हो सकता है स्त्री कलर ब्लाइंड नही हो सकती।
लेकिन स्त्री कलर ब्लाइंड के गुण को अगली पीढ़ी तक पहुंचा सकती है।
कलर पहचानने का गुण x क्रोमोजोम में होता है y में नही। स्त्रीयों में दोनो x क्रोमोजोम की वजह से जिसमे बेस्ट कलर वाला गुण होगा वही प्रकट होगा। जबकि पुरष में एक ही x क्रोमोजोम होने के कारण बेस्ट सिलेक्शन की ऑप्शन नहीं होती। इसलिए पुरष आसानी से रंगों के विभिन्न शेड में अंतर नही कर पाता।
इसलिए किसी की जन्म कुंडली में शुक्र की स्थिति से यह निश्चित किया जाता है की कोई व्यक्ति कपड़ों का व्यापार ढंग से कर सकता है की नही क्योंकि इस प्रकार या स्त्रीयों के समान का व्यापार की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है की दुकानदार को रंगों का कितना ज्ञान है। ज्योतिष में रंगों का प्रतिनिधित्व शुक्र ग्रह करता है।
यही कारण है की किसी स्त्री के रंगों को पहचानने की क्षमता पुरुषों से बहुत अधिक होती है। इसी कारण पति पत्नी में कई बार झगड़ा होता है। पत्नी पूछती है जी मेरी लिपस्टिक कैसी लग रही है तो पति कहता है लाल रंग की और पत्नी उस पर टूट पड़ती है कहती है इन्हे मुझसे आजकल कोई मतलब नही मेरी किसी बात पर ध्यान नहीं देते अभी इनको अपनी x मिल जाए तो उसके सारे रंग ध्यान में आ जाए । मैने इतनी मुश्किल से इस शेड की लिपस्टिक ढूंढ कर खरीदी इनको तो मेरा कोई चिंता ही नही है। सारा ध्यान उस चुड़ैल पर रहता है।
जबकि बेचारे पुरुष की कोई गलती नही होती क्योंकि पुरुषों की रंगों में भेद करने की क्षमता कम होती है स्त्रीयों के मुकाबले। उसके लिए एक रंग के लगभग सारे शेड एक समान रंग के होते है जबकि स्त्रीयों को पता नही एक ही रंग के कितने अलग अलग शेड का ज्ञान होता है। इसलिए ज्यादातर पुरष रंगों के शेड पहचानने में गदहे साबित होते हैं।
अब जन्म नक्षत्र से स्वभाव तो तय हो गया। बस भाग्य इतना ही है जो आपके हाथ में नही है। आप अमीर और अच्छे मां बाप के यहां पैदा हुए या नहीं यही भाग्य है। लेकिन ग्रह कैसे पड़े हैं। उनके आधार पर ग्रहों की दशा अंतर्दशा से यह पता चलता है की कब कब जीवन में ग्राफ उपर जायेगा और कब कब नीचे। इसी के आधार पर व्यक्ति का समय और उसकी आदतें स्वभाव रुचि देख कर ज्योतिष में कई मानसिक या दूसरे उपायों से व्यक्ति के बुरे समय में दुखों में कुछ कमी की जा सकती है या अच्छे समय में ज्यादा प्राप्ति की जा सकती है। बस इतना ही खेल होता है ज्योतिष का।
अगर कोई अच्छे से इन उपायों को बता दे और करने वाला इनको ढंग से कर ले यही कर्म होता है। कर्म से आप आने वाले समय को बदल सकते है लेकिन कर्म अगर आपके मूल स्वभाव से मैच करते हों तब। नही तो जैसे बंदरों के स्वभाव में पढ़ना लिखना नही है तो अगर आप बंदर को पढ़ाने में जितना मर्जी जोर लगा लो उसका भाग्य नही बदल सकता।
इस प्रकार से भाग्य और कर्म दोनो का अपना महत्व अपनी अपनी जगह बराबर है।
आज अगर आप दुख भोग रहे हैं तो यह पिछले कर्म का नतीजा है लेकिन इस बुरे समय में भी आप अपने स्वभाव के अनुसार अगर ठीक कर्म करते रहें तो यह निश्चित है की आने वाले समय में उसके नतीजे भी ठीक प्राप्त होंगे।
ज्योतिष कोई चमत्कार नही पूरा विज्ञान है।
अब अगर कुछ लोग इसका गलत इस्तेमाल करते है तो इसका यह मतलब नहीं की यह कोई ठग विद्या है। वैसे तो मेडिकल साइंस में भी कुछ डॉक्टर लोगों को ठग लेते हैं तो इसका मतलब यह नहीं की मेडिकल साइंस कोई ठग विद्या है।