Monday, June 1, 2026

एक स्त्री क्या चाहती है

एक स्त्री 

पूरी तरह कभी नहीं खुलती,

जबकि वो चाहती है ऐसी जगह 

जहां पूरी तरह से खुल सके, 

अपने मन की बात बोल सके 

बिना किसी झिझक के, बिना किसी भय के,

बिना किसी भविष्य की चिंता के,


एक स्त्री,

हर जगह 

अपना थोड़ा सा बचा लेती है,

सर्वस्व न्योछावर नहीं करती, 

क्योंकि, उसे सिखाया जाता है, 

घूंघट में रहने का हुनर, 

घूंघट में रखने का हुनर,

संजो कर पल्लू में बांधने का हुनर,


एक स्त्री 

केवल पति नहीं चाहती,

केवल जीवनसाथी भी नहीं चाहती,

वो चाहती है, एक प्रेमी को,

जो उसकी देह से ज्यादा 

उसके हृदय को छुए उसकी आत्मा को छुए,


एक स्त्री 

चाहती है केवल एक आलिंगन ही...

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