“भगवान कहाँ मिलेंगे?
सत्य कहाँ है?”
पूरी जिंदगी इंसान
इसी खोज में भटकता रहता है।
कोई मंदिरों में ढूँढ रहा है…
कोई किताबों में…
तो कोई किसी गुरु के पीछे भाग रहा है।
हमें लगता है
सत्य कहीं बाहर छिपा हुआ है।
लेकिन ओशो कहते हैं —
यही सबसे बड़ी भूल है।
“सत्य को कहीं खोजने मत जाओ,
सत्य कोई वस्तु नहीं है।
जब मन पूरी तरह शांत और विचारशून्य हो जाता है…
तब जो शेष बचता है,
वही सत्य है।” 🧘♂️
सोचो…
अगर किसी तालाब में
तेज़ हवा चल रही हो,
लहरें उठ रही हों…
तो क्या उसकी तली साफ दिखाई देगी?
नहीं ना?
लेकिन जैसे ही हवा रुक जाती है…
पानी शांत हो जाता है…
तली अपने आप दिखने लगती है। 🌊
ठीक वैसे ही,
तुम्हारे मन की लहरें ही तुम्हारे विचार हैं।
और जब तक तुम सत्य को “खोजने” में लगे हो…
तब तक मन में नई लहरें पैदा होती रहती हैं।
ओशो कहते हैं —
सत्य को पाना नहीं है…
बस मन के शोर को शांत करना है।
जिस दिन भीतर का आखिरी विचार भी शांत हो जाता है…
उस गहरे सन्नाटे में
जो बचता है…
वही सत्य है। ✨
तुम्हें सत्य बाहर नहीं मिलेगा भाई…
क्योंकि तुम खुद ही सत्य हो।
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