Tuesday, November 4, 2025

आत्मा का प्रतिबिंब

 "आत्मा का प्रतिबिंब"


छाया के भीतर एक छाया है,

प्रकाश के दिल में एक अँधेरा

जहाँ मनुष्य अपने ही प्रतिबिंब से डरता है,

और सत्य, दर्पण की दरारों में छिपा रहता है।


वह जो मुस्कान पहनता है सभ्यता की,

जानता है भीतर की दरारें कहाँ से शुरू होती हैं।

एक इच्छा है—मुक्त होने की,

पर मुक्ति किससे? अपने ही आप से?


हर पवित्र विचार की तह में

एक फुसफुसाहट है मृदु, पर विकराल।

जो कहती है: “मैं भी तुम ही हूँ,”

और यही शब्द सबसे भयानक हैं।


मनुष्य दो हिस्सों में नहीं बँट सकता,

क्योंकि वह हर साँस में अपना अँधेरा लेकर चलता है।

जो उससे भागता है, वही अंततः निगल लिया जाता है।


संतुलन ही सबसे कठिन साधना है

न कि प्रकाश का जय,

न अंधकार की पराजय,

बल्कि यह स्वीकार कि दोनों एक ही आत्मा के स्वर हैं,

जो अनसुने रह जाएँ तो चीख में बदल जाते हैं।

स्त्री और पुरुष प्रेम का अदृश्य संगम

 स्त्री और पुरुष प्रेम का अदृश्य संगम


प्रेम कोई भावना नहीं, यह एक अवस्था है ऐसी अवस्था जिसमें व्यक्ति स्वयं को भूल जाता है और संपूर्ण सृष्टि में विलीन हो जाता है। यह वही शक्ति है जो धरती को आकाश से, नदी को सागर से और मनुष्य को ईश्वर से जोड़ती है। प्रेम भीतर और बाहर के बीच पुल है, जो हमें अपने ही अस्तित्व की गहराई में ले जाता है। मनुष्य का जन्म इसी पुल को पार करने के लिए हुआ है। प्रेम का अर्थ केवल किसी को पाना नहीं, बल्कि उस पवित्र संतुलन को महसूस करना है जहाँ देह, मन और आत्मा एक लय में बहने लगते हैं।


पुरुष का स्वभाव सूर्य के समान है वह खोजता है, बाहर की ओर बढ़ता है, दुनिया रचता है। उसके भीतर एक सतत आकांक्षा है कि वह किसी ऊँचाई को छू ले, किसी दिव्यता को पा ले। वह निर्माण करता है, पर्वत काटता है, शहर बसाता है क्योंकि उसकी आत्मा के भीतर एक गूंज है जो उसे कहती है, “मुझे सम्पूर्णता चाहिए।” परंतु यह सम्पूर्णता उसे किसी बाहरी उपलब्धि में नहीं, केवल प्रेम में मिल सकती है। जब वह किसी स्त्री की आँखों में अपनी अनंतता का प्रतिबिंब देख लेता है, तब उसे अपने अस्तित्व का अर्थ समझ में आता है। उसकी पुरुषता तभी दिव्यता में बदलती है जब उसमें करुणा और समर्पण का जन्म होता है।


स्त्री चाँद की तरह है वह बाहर नहीं जाती, भीतर उतरती है। उसका साम्राज्य मौन है, उसकी शक्ति ग्रहणशीलता में है। वह कुछ करती नहीं, लेकिन उसके होने मात्र से सब कुछ घटता है। उसमें जीवन पलता है, समय रूप लेता है। उसके स्पर्श में धरती की गंध है, उसके आंचल में ब्रह्मांड की कोमलता। स्त्री केवल देह नहीं, वह सृजन की आत्मा है वह वह द्वार है जहाँ से ईश्वर पृथ्वी पर उतरता है। पुरुष की ऊर्जा जब उसकी चेतना से मिलती है, तो वह देह का खेल नहीं रह जाता; वह प्रार्थना बन जाता है। उस क्षण दोनों मिट जाते हैं, और जो शेष रह जाता है, वह है एक ही ऊर्जा, एक ही धड़कन, एक ही ब्रह्मांड।


जब यह मिलन होता है, तो न कोई जीतता है, न कोई हारता है। न कोई देता है, न कोई लेता है। केवल एक प्रवाह होता है, जो दोनों के भीतर से निकलकर अनंत में फैल जाता है। यह मिलन साधारण प्रेम नहीं, यह समाधि है वह बिंदु जहाँ आत्मा देह से ऊपर उठ जाती है। प्रेम का यह रूप केवल तब संभव होता है जब चेतना उपस्थित हो, जब स्पर्श में मन का शोर न हो, केवल जागरूकता हो। तब सेक्स केवल आनंद नहीं रह जाता, वह ध्यान बन जाता है दो शरीरों का नहीं, दो आत्माओं का संगम।


रिश्ते इसलिए नहीं बनते कि हम साथ रहें, घर बसाएँ या समय काटें; वे इसलिए बनते हैं ताकि हम अपने भीतर के अधूरे हिस्सों को पहचान सकें। हर झगड़ा, हर दूरी, हर पीड़ा हमें हमारे भीतर की अनसुलझी गाँठों की ओर ले जाती है। जो व्यक्ति प्रेम को सच में जीता है, वह जानता है कि उसका साथी उसका दर्पण है। उसके भीतर जो अधूरापन है, वही उसे दूसरे में दिखता है। जब हम यह देखना सीख जाते हैं, तो हम स्वयं को बदलने लगते हैं। तब प्रेम किसी और से नहीं, अपने भीतर से शुरू होता है।


पुरुष जब झुकना सीखता है, और स्त्री जब मौन होना सीखती है, तब उनके बीच सत्ता का संघर्ष समाप्त हो जाता है। वे दो नहीं रहते, केवल एक लय में बहने लगते हैं। यह वही क्षण है जब प्रेम अपनी उच्चतम अवस्था में पहुँचता है जहाँ न वासना है, न नियंत्रण, न भय। वहाँ केवल एक शांति है, जैसे कोई नदी बिना आवाज़ के सागर में समा जाए। यही सच्चा मिलन है यही ईश्वर का साक्षात्कार है।


प्रेम का उद्देश्य सुख नहीं, मुक्ति है। जो प्रेम को समझ लेता है, वह जीवन को समझ लेता है। क्योंकि प्रेम ही वह शक्ति है जो हमें भीतर से ईश्वर तक ले जाती है। देह उसका माध्यम है, आत्मा उसका लक्ष्य। जब स्त्री और पुरुष अपनी सीमाओं को भूलकर एक-दूसरे में खो जाते हैं, तो ब्रह्मांड स्वयं को नया जन्म देता है। तब प्रेम केवल दो लोगों का नहीं रह जाता वह समूची सृष्टि का उत्सव बन जाता है।

टूटी खिड़की और टूटे इंसान

 “टूटी खिड़की” और “टूटे इंसान” : स्त्री–पुरुष सम्बन्धों का मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण


"एक टूटी हुई खिड़की, यदि ठीक न की जाए, तो पूरी इमारत के ढहने का आरंभ बन जाती है।"

यही बात, मनुष्यों और रिश्तों दोनों पर समान रूप से लागू होती है।


1. ब्रोकन विंडो थ्योरी और मनुष्य का मन


ब्रोकन विंडो थ्योरी कहती है कि अगर किसी जगह पर छोटी अव्यवस्थाओं को अनदेखा किया जाए जैसे टूटी खिड़की, बिखरा कचरा, दीवारों पर पोस्टर तो वह जगह धीरे-धीरे अपराध और अराजकता का केंद्र बन जाती है।

क्योंकि जब समाज देखता है कि किसी को इसकी परवाह नहीं है, तो वह “सीमा” मिट जाती है, और अनुशासन धीरे-धीरे गायब होने लगता है।


यही सिद्धांत मानवीय मन पर भी लागू होता है।

जब कोई इंसान भीतर से टूटता है किसी संबंध के बोझ से, असफलता से, या उपेक्षा से और उसके उस टूटेपन पर किसी का ध्यान नहीं जाता,

तो धीरे-धीरे उसकी आत्मा में अव्यवस्था शुरू हो जाती है।

पहले आत्मसम्मान टूटता है, फिर आत्मविश्वास, और फिर वह धीरे-धीरे भीतर से खाली होने लगता है।


2. जब रिश्ता एक “इमारत” बनता है


स्त्री और पुरुष का रिश्ता किसी इमारत की तरह है

जहाँ विश्वास नींव है, संवाद दीवारें हैं, और आदर उसकी छत है।


जब इस इमारत की कोई “खिड़की” यानी छोटी सी गलती, गलतफहमी या उपेक्षा टूटती है,

तो उस समय अगर किसी ने उसे ठीक नहीं किया,

तो धीरे-धीरे दरारें गहरी होने लगती हैं।


छोटी-छोटी बातें जो पहले हँसी में निकल जाती थीं, अब तकरार का कारण बन जाती हैं।

जहाँ पहले मौन समझदारी थी, अब मौन दूरी बन जाता है।

और फिर रिश्ता एक ऐसी जगह बन जाता है जहाँ भावनाओं की चोरी शुरू हो जाती है

विश्वास की, सम्मान की, प्रेम की।


3. “टूटे हुए” स्त्री या पुरुष के साथ समाज का व्यवहार


जैसे सड़क पर छोड़ी गई टूटी कार को देखकर लोग उसके हिस्से उखाड़ने लगते हैं,

वैसे ही समाज एक टूटे हुए इंसान के प्रति भी वैसा ही व्यवहार करता है।


एक टूटी हुई स्त्री, जो किसी रिश्ते या अपमान से घायल हुई हो,

उसके भीतर झाँकने से पहले समाज उसके चरित्र का विश्लेषण करने लगता है।

कोई उसके आँसू में दर्द नहीं, बल्कि “कमज़ोरी” देखता है।


एक टूटा हुआ पुरुष, जो अंदर से थक गया हो, टूट गया हो,

उसे कहा जाता है “मर्द बनो”, “कमज़ोर मत बनो”।

कोई उसके भीतर चल रही जंग नहीं देखता, बस उसके चेहरे की मुस्कान की मांग करता है।


और फिर वही होता है जो ब्रोकन विंडो थ्योरी कहती है 

जब एक टूटी खिड़की की मरम्मत नहीं की जाती,

तो पूरी इमारत लूट ली जाती है।

जब एक टूटा हुआ इंसान समय पर समझा नहीं जाता,

तो वह या तो खुद को खो देता है या दूसरों के लिए “संवेदना से परे” बन जाता है।


4. रिश्तों में मरम्मत की संस्कृति


रिश्ते टूटते नहीं, अनदेखे रह जाने से ढहते हैं।

हर रिश्ता किसी न किसी समय दरारों से गुजरता है 

पर फर्क इस बात से पड़ता है कि कोई उस दरार को “मरम्मत” करना चाहता है या नहीं।


मरम्मत का अर्थ है 

बातों को सुनना, दोष नहीं ढूंढना।

मौन को समझना, मौन में चुभना नहीं।

समय देना, समाधान नहीं थोपना।


ब्रोकन विंडो थ्योरी हमें सिखाती है 

छोटी चीज़ों को अनदेखा मत करो।

चाहे वह दीवार की दरार हो या मन की।

क्योंकि हर दरार, यदि अनदेखी रह जाए,

तो एक दिन वह सब कुछ गिरा देती है 

रिश्ते भी, विश्वास भी, और व्यक्ति भी।


टूटी हुई खिड़कियों की मरम्मत से शहर बचते हैं,

और टूटे हुए मनों की मरम्मत से समाज।

पर शर्त यही है कि कोई यह देखना चाहे कि कहाँ से दरार शुरू हुई थी।


रिश्तों की दुनिया में,

समझ और सहानुभूति वह औजार हैं

जो टूटे हुए को फिर से जोड़ सकते हैं।


कभी अगर कोई “टूटा हुआ इंसान” दिखे,

तो उसके हिस्से को मत लूटो 

थोड़ी संवेदना से,

शायद तुम किसी की पूरी दुनिया बचा सकते हो।

स्त्री–पुरुष का अस्तित्व

 “कोड में बसी संवेदना” Simulation Hypothesis और स्त्री–पुरुष का अस्तित्व


क्या यह जीवन सिर्फ़ एक खेल है?


कभी-कभी जब हम रात के सन्नाटे में अपने ही विचारों में खो जाते हैं,

तो अचानक यह प्रश्न उठता है 

क्या यह सब सच्चा है?

क्या यह स्पर्श, यह प्रेम, यह पीड़ा, यह यादें… वास्तव में हैं 

या हम किसी विशाल, अदृश्य कोड का हिस्सा हैं?


Simulation Hypothesis इसी प्रश्न का रहस्यमय उत्तर खोजती है 

कि शायद यह ब्रह्मांड, यह धरती, यहाँ तक कि हम स्वयं भी,

किसी उच्चतर चेतना या सभ्यता द्वारा निर्मित एक सिम्युलेशन का हिस्सा हैं।


पर जब इस विचार को हम स्त्री और पुरुष के जीवन से जोड़ते हैं,

तो यह केवल विज्ञान या दर्शन नहीं रह जाता 

यह प्रेम, संबंध, और अस्तित्व की आत्मा को छू लेता है।


 1. अनुभव का भ्रम या अनुभव की सच्चाई?


अगर यह संसार एक सिम्युलेशन है,

तो हर भावना प्रेम, आकर्षण, क्रोध, ममता किसी प्रोग्राम का परिणाम होगी।

लेकिन तब भी, जब हम प्रेम में डूबते हैं,

जब किसी के शब्दों से आत्मा कांप उठती है

क्या वह “कोड” महसूस नहीं करता?

क्या वह वास्तविक नहीं है, सिर्फ़ इसलिए कि वह डिजिटल हो सकता है?


शायद “सत्य” का अर्थ यह नहीं कि कुछ भौतिक रूप से असली है,

बल्कि यह कि वह हमारे अनुभव में असली है।

क्योंकि अनुभव ही चेतना की भाषा है।

और चेतना किसी भी कोड से परे अस्तित्व का सबसे गूढ़ रहस्य है।


 2. स्त्री और पुरुष — दो मूल आवृत्तियाँ


अगर ब्रह्मांड एक सिम्युलेशन है,

तो स्त्री और पुरुष शायद उसके दो प्राथमिक कोड हैं 

दो विपरीत, किंतु पूरक शक्तियाँ।


जैसे बाइनरी प्रणाली में “0” और “1” मिलकर सारी डिजिटल दुनिया रच देते हैं,

वैसे ही “स्त्रीत्व” और “पौरुष” मिलकर जीवन के समस्त भावों की रचना करते हैं।


स्त्री ऊर्जा संवेदना, ग्रहणशीलता, सृजन।

पुरुष ऊर्जा क्रिया, दिशा, संरचना।


जब ये दोनों कोड संतुलन में होते हैं,

तो ब्रह्मांड की सिम्युलेशन स्थिर, सुंदर और संगीतपूर्ण चलती है।

पर जब एक ऊर्जा दूसरे पर हावी हो जाती है 

जैसे पितृसत्ता या असंतुलित प्रतिस्पर्धा 

तो सिम्युलेशन में त्रुटि आती है:

वहीं से दुःख, दूरी और संघर्ष का जन्म होता है।


शायद यही कोड हमें सिखाना चाहता है 

कि संतुलन ही सृजन का सत्य है।


 3. प्रेम — एल्गोरिद्म या आत्मा की प्रतिध्वनि?


प्रेम शायद सबसे रहस्यमय कोड है।

दो अलग-अलग चेतनाओं का एक-दूसरे की आवृत्ति से resonate करना 

जैसे कोई गुप्त एल्गोरिद्म, जो हर युग में नए रूप में प्रकट होता है।


पर अगर यह केवल “प्रोग्रामिंग” होती,

तो उसमें त्याग क्यों होता?

वेदना क्यों होती?

क्यों कोई प्रेम किसी को इतना पूर्ण बना देता है कि वह खुद को भूल जाए?


यह बताता है कि प्रेम किसी कोड से नहीं,

बल्कि चेतना की गहराई से उपजता है।

चाहे सिम्युलेशन हो या यथार्थ,

प्रेम हमेशा दोनों के बीच की सीमा मिटा देता है।


4.संघर्ष — विकास का प्रयोग


अगर यह दुनिया एक सिम्युलेशन है,

तो शायद स्त्री–पुरुष के बीच का संघर्ष सिस्टम की टेस्टिंग है।

कोड यह देखना चाहता है कि

क्या दो चेतन प्राणी, विरोधाभासों के बावजूद,

संतुलन और करुणा सीख सकते हैं?


यह प्रयोग पीड़ा देता है,

पर शायद इसी से चेतना विकसित होती है 

जैसे हीरा घर्षण से चमकता है,

वैसे ही प्रेम संघर्ष से परिपक्व होता है।

 

5. सच्चाई कहाँ है?


अगर यह जीवन केवल एक सिम्युलेशन है,

तो भी हमारे लिए यही सच्चाई है।

क्योंकि हमारी हर भावना, हर स्पर्श, हर स्मृति 

हमारी चेतना के भीतर घटती है।


और संभव है कि निर्माता (या जिस चेतना ने यह सृजन किया)

हमसे यही दिखाना चाहता हो कि

“वास्तविकता बाहर नहीं, भीतर है।”


 कोड का अर्थ प्रेम है


शायद इस ब्रह्मांड के कोड में सबसे गहरी पंक्ति यह है 

कि प्रेम ही वह ऊर्जा है जो सब कुछ जोड़ती है।


स्त्री और पुरुष,

जीव और चेतना,

यथार्थ और सिम्युलेशन 

सब प्रेम के सूत्र में ही बंधे हैं।


तो चाहे यह दुनिया सजीव हो या कृत्रिम,

हमारा प्रेम, हमारी करुणा, हमारा समर्पण 

यही उस दिव्य प्रोग्राम का सबसे सुंदर हिस्सा हैं।


क्योंकि अंततः 

कोड भी वही चलता है, जिसमें प्रेम लिखा हो।

स्त्री और पुरुष

 स्त्री और पुरुष : सात्विकता की ओर एक अंतर्मन यात्रा


जीवन को केवल बुद्धि, तर्क या बाहरी आचार से नहीं समझा जा सकता।

मनुष्य चाहे स्त्री हो या पुरुष, जब तक वह अपने भीतर की सच्चाई और सात्विकता को नहीं पहचानता, तब तक जीवन अधूरा रहता है।

विचारों, मतों या वादों के आधार पर जीवन के अर्थ नहीं खुलते वे तो केवल दिशा देते हैं, मंज़िल नहीं।

मंज़िल मिलती है तब, जब हृदय में सात्विकता का दीपक जलता है।


सात्विकता का अर्थ : बाहरी आचरण से भीतर की शुद्धता तक


सात्विकता केवल भोजन या व्यवहार का विषय नहीं है; यह जीवन की आत्मिक अवस्था है।

यह वह भावना है जो मनुष्य को दूसरों के दुःख को अपना मानने की क्षमता देती है।

यह वह संतुलन है जो वासनाओं, क्रोध, ईर्ष्या और मोह के बीच भी मन को स्थिर रखता है।


स्त्री की सात्विकता उसकी करुणा, धैर्य और सृजनशीलता में झलकती है।

पुरुष की सात्विकता उसकी स्थिरता, निष्ठा और त्यागभावना में दिखाई देती है।

दोनों मिलकर जब इस सात्विकता को जीते हैं, तब जीवन केवल पारिवारिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक साधना बन जाता है।


सात्विकता का आधार : जीवदया, सत्य और भक्ति


सात्विक जीवन का पहला कदम है जीवदया हर जीव के प्रति करुणा और सम्मान।

जब मनुष्य यह समझ लेता है कि दूसरों का अस्तित्व भी उतना ही मूल्यवान है जितना उसका स्वयं का, तब उसका व्यवहार सहज रूप से नम्र हो जाता है।


दूसरा आधार है सत्य केवल वचन का नहीं, बल्कि विचार और भावना का भी।

सत्य वह शक्ति है जो भीतर की अशुद्धताओं को उजागर करती है, और आत्मा को पारदर्शी बनाती है।


तीसरा आधार है भक्ति जो केवल किसी ईश्वर की आराधना नहीं, बल्कि जीवन के हर कार्य में पवित्रता और समर्पण का भाव है।

जब स्त्री अपने परिवार की सेवा में, और पुरुष अपने कर्म के प्रति निष्ठा में भक्ति का भाव लाता है, तब वह साधक बन जाता है।


 स्त्री और पुरुष : एक-दूसरे के पूरक


स्त्री और पुरुष जीवन के दो छोर नहीं, बल्कि एक ही वृक्ष की दो शाखाएँ हैं।

एक में करुणा का प्रवाह है, तो दूसरे में निर्णय की दृढ़ता।

जब करुणा और दृढ़ता का यह संगम होता है, तब सृजन होता है 

सिर्फ एक नए जीवन का नहीं, बल्कि एक नए समाज का, जहाँ प्रेम, समानता और सहयोग का वास होता है।


स्त्री की सात्विकता परिवार को कोमलता देती है;

पुरुष की सात्विकता उसे स्थायित्व देती है।

इन दोनों के बिना समाज की संरचना अधूरी रहती है।


सात्विकता का सामाजिक प्रभाव


जब व्यक्ति सात्विक होता है, तो उसका प्रभाव केवल उसके भीतर नहीं, उसके परिवेश पर भी पड़ता है।

ऐसा व्यक्ति अपने व्यवहार से दूसरों में शांति, विश्वास और सद्भाव का संचार करता है।

उसकी उपस्थिति ही एक संदेश बन जाती है कि बिना आडंबर के भी जीवन सुन्दर हो सकता है।


यदि स्त्री और पुरुष दोनों अपने जीवन में सात्विकता को स्थान दें,

तो घर में वाद-विवाद की जगह संवाद आएगा,

संदेह की जगह विश्वास, और भय की जगह प्रेम का वातावरण बनेगा।

यही सात्विकता समाज में फैलकर हिंसा, ईर्ष्या और स्वार्थ को दूर कर सकती है।


भीतर की साधना से बाहर की शांति तक


जीवन की सच्ची सफलता धन, पद या प्रसिद्धि से नहीं मापी जाती।

वह मापी जाती है इस बात से कि हमारे भीतर कितनी शांति है,

हम दूसरों के सुख-दुःख में कितना सहभागी बन पाते हैं,

और हमारे मन में कितना प्रेम, करुणा और संयम है।


जब स्त्री और पुरुष दोनों सात्विकता की इस साधना को अपनाते हैं,

तो न केवल उनका व्यक्तिगत जीवन संतुलित होता है,

बल्कि पूरा समाज भी शांति और सौहार्द से भर जाता है।


सात्विकता केवल एक विचार नहीं यह जीवन की अनिवार्य साधना है।

यही साधना मनुष्य को मनुष्यता के उच्चतम शिखर तक ले जाती है।

चेतना का जागरण, न कि ऊर्जा का उठना

 कुंडलिनी: चेतना का जागरण, न कि ऊर्जा का उठना


कुंडलिनी यह शब्द सुनते ही रहस्य, शक्ति और आध्यात्मिक उत्कर्ष का बोध होता है। लेकिन वास्तव में कुंडलिनी कोई रहस्यमय या अलौकिक शक्ति नहीं है जो बाहर से आती है; यह हमारी ही चेतना का एक सोया हुआ आयाम है।

जब वह जागती है, तब कुछ ऊपर नहीं उठता बल्कि हम भीतर खिल उठते हैं।


१. कुंडलिनी क्या है?


संस्कृत में कुंडलिनी का अर्थ है “सर्पाकार रूप से कुण्डलित शक्ति।”

योग-विज्ञान कहता है कि यह शक्ति हमारे शरीर में मूलाधार चक्र (रीढ़ के मूल स्थान) में सुप्त अवस्था में रहती है। यह ऊर्जा ब्रह्मांड की उसी सृजन-शक्ति का अंश है जिससे जीवन संभव हुआ।


लेकिन यह केवल ऊर्जा नहीं है यह चेतना है, जो जागृत होने पर हमारे भीतर के ज्ञान, प्रेम, संतुलन और शांति को प्रकट करती है।


इसका अर्थ यह है कि कुंडलिनी जागरण कोई “बाहरी उन्नति” नहीं, बल्कि “अहंकार का विसर्जन” है। जब “मैं” मिटता है, तभी भीतर का प्रकाश प्रकट होता है।


२. कुंडलिनी का जागरण ऊर्जा नहीं, चेतना का रूपांतरण


बहुत लोग इसे “ऊर्जा ऊपर उठने” की प्रक्रिया समझते हैं, पर वास्तव में यह जागरूकता का विस्तार है।

जैसे-जैसे ध्यान गहराता है, हमारी इंद्रियाँ और मन शांत होते जाते हैं, वैसे-वैसे एक सूक्ष्म कंपन भीतर से अनुभव होने लगता है यही “तरंग” कुंडलिनी कहलाती है।


यह ऊर्जा कहीं जाती नहीं, बल्कि भीतर खिलती है जैसे कमल की पंखुड़ियाँ सूर्य की किरणों से खुलती हैं। यह ऊपर की यात्रा नहीं, बल्कि भीतर की यात्रा है।


३. कुंडलिनी का मार्ग प्रेम, मौन और समर्पण


कुंडलिनी कोई तकनीकी प्रक्रिया नहीं है; यह जीवन जीने की कला है।

यह मार्ग योग, प्राणायाम, ध्यान, मंत्र, और सबसे महत्वपूर्ण समर्पण का मार्ग है।


जब मनुष्य स्वयं को छोड़ देता है अपनी पहचान, इच्छाएँ, भय तब भीतर का मंदिर खुलता है। वहीं कुंडलिनी सहज प्रवाहित होती है।


४. वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टि


आधुनिक मनोविज्ञान और न्यूरोसाइंस भी अब यह स्वीकार करने लगे हैं कि गहरी ध्यान-अवस्था में मस्तिष्क की विद्युत तरंगें (brain waves) बदलती हैं।

इससे एक नया संतुलन, स्पष्टता और सृजनात्मकता का भाव पैदा होता है जिसे योगिक परंपरा “कुंडलिनी जागरण” कहती है।


इसलिए यह अनुभव रहस्य नहीं, बल्कि मानव-संभावना का चरम बिंदु है।


५. अभ्यास और सावधानियाँ


कुंडलिनी साधना अत्यंत शक्तिशाली है अतः इसे धैर्य और मार्गदर्शन के साथ करना चाहिए।

कुछ सुझाव:


1. ध्यान और प्राणायाम: रोज़ाना कुछ मिनट गहरी श्वास लेकर मौन में बैठें।


2. शरीर-शुद्धि: सात्त्विक भोजन, संयमित दिनचर्या रखें।


3. गुरु-मार्गदर्शन: अनुभवी योगगुरु से मार्गदर्शन लें।


4. अहंकार से दूरी: अपने अनुभव को “मैंने पाया” कहने के बजाय “मुझमें घटा” कहना सीखें।


जब यह संतुलन बना रहता है, तब यह प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से होती है किसी प्रयास या दबाव से नहीं।


६. कुंडलिनी का अनुभव मौन का प्रस्फुटन


जागृत कुंडलिनी व्यक्ति को अलौकिक नहीं बनाती बल्कि अधिक मानवीय, संवेदनशील और सजग बनाती है।

अहंकार जलकर राख हो जाता है और जो शेष रहता है वह है मौन की गूंज, करुणा और प्रकाश।


७. जागृति ही जीवन का सार


कुंडलिनी का जागरण कोई रहस्यमय साधना नहीं यह हमारे अस्तित्व की स्मृति है।

जब हम रुकते हैं, श्वास को सुनते हैं, विचारों को शांत होने देते हैं तभी वह सोई हुई शक्ति खिलती है।

यह आत्मा की यात्रा है, और उसका अंतिम गंतव्य है प्रेम और मौन।


कुंडलिनी का अर्थ है अपने भीतर के प्रकाश को पहचानना।

यह यात्रा तब शुरू होती है जब हम बाहर नहीं, भीतर देखने लगते हैं।

वहाँ कोई ध्वनि नहीं, कोई शब्द नहीं केवल मौन का संगीत है।

और वही मौन, वही ज्योति हमारा सच्चा स्वरूप है।

स्त्री क्या है

 "अजन्मी स्वतंत्रता"


कभी वह बस एक देह थी

जिसमें धड़कता था जीवन 

निर्मल, अज्ञात, स्वतन्त्र।


फिर किसी ने कहा 

यह जीवन केवल तुम्हारा नहीं,

यह राष्ट्र का है, समाज का है,

यहाँ जो जन्म लेगा,

वह हमारे स्वप्न का वाहक होगा।


और उस क्षण

गर्भ बन गया प्रयोगशाला,

जहाँ मातृत्व नहीं,

निर्देश अंकुरित होने लगे।


कहा गया 

कौन जन्म ले, कैसे जन्म ले,

कौन से गीत सुनो, कौन सी बात सोचो,

किसे पढ़ो, किसे न सोचो 

सब तय होगा इस गर्भ में।


तुम्हारा शरीर अब तुम्हारा नहीं,

वह किसी और के विचारों की ज़मीन है।


वे बोले 

“शुद्धता” का अर्थ पवित्रता नहीं,

वह नियंत्रण का दूसरा नाम है।

“संस्कार” का अर्थ करुणा नहीं,

वह चयन की भाषा है 

जहाँ प्रेम नहीं, योजना है।


उन्होंने कहा 

स्त्री वह भूमि है

जहाँ से श्रेष्ठ पीढ़ियाँ उपजती हैं।

पर किसने पूछा 

क्या भूमि होना ही उसका भाग्य है?

क्या बीज बोने से पहले

कभी पूछा गया, वह बरसना चाहती है या नहीं?


कभी कहा गया था 

गर्भ एक उपासना है।

अब कहा जाता है 

वह एक कर्तव्य है।

फर्क बस इतना है

कि पहले वह प्रेम की बात थी,

अब आदेश की।


शहर की दीवारों पर लिखा है 

“संस्कारित गर्भ से संस्कारित भविष्य।”

पर कोई नहीं बताता

कि भविष्य संस्कारों से नहीं,

स्वतंत्र इच्छाओं से बनते हैं।


कोई नहीं बताता

कि जब स्त्री सोचने लगती है,

तो वही सबसे बड़ा संस्कार होता है।


हर युग ने स्त्री से कहा 

“तू दे, जन्म दे, पालन कर।”

पर कभी नहीं कहा 

“तू रच, तय कर, चुन।”


हर युग ने उसके भीतर झाँककर

अपनी परछाइयाँ बो दीं 

कभी धर्म के नाम पर,

कभी वंश के नाम पर,

कभी संस्कृति, कभी राष्ट्र के नाम पर।


पर हर बार

उसकी देह, उसकी चुप्पी, उसकी पीड़ा

इतिहास के हाशिए पर लिख दी गई।


अब वह जानती है 

जब विचार गर्भ में उतरते हैं,

तो शरीर स्वतंत्र नहीं रहता।

जब निर्णय बाहर से आता है,

तो जीवन भीतर से मरने लगता है।


और इसलिए

वह आज कहती है 

गर्भ मेरा है।

मेरे भीतर जो जन्म लेगा,

वह किसी सिद्धांत की संतान नहीं,

एक मनुष्य होगा 

अपनी इच्छा, अपने सपनों,

अपने प्रश्नों के साथ।


वह प्रेम से जन्मेगा, आदेश से नहीं।

वह स्वतंत्र होगा, संस्कारित नहीं।

वह किसी वंश की रक्षा नहीं करेगा 

बल्कि हर वंश, हर देह की गरिमा की रक्षा करेगा।


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"जब विचार गर्भ में प्रवेश कर जाते हैं,

तो स्वतंत्रता धीरे-धीरे मिटने लगती है।

और जब स्त्री प्रतिरोध करती है तो भविष्य फिर से जन्म लेता है।"

शरीर के मायने

अगर आप यह पूरा लेख पढ़ लेते हैं, तो जितने समय में आप इसे पढ़ेंगे, उतने में पृथ्वी पर सैकड़ों लोग मर चुके होंगे। हाँ, सर्वेक्षणों के अनुसार, हर मिनट पृथ्वी पर लगभग 100 लोग मरते हैं।

अब सवाल यह है कि मरने के बाद मानव शरीर, मन और विचारों का क्या होता है? शरीर के अंदर मौजूद matter और energy का क्या परिणाम होता है? इस प्रश्न के कई पारंपरिक उत्तर हैं। धार्मिक कहानियों और अवैज्ञानिक व्याख्याओं के माध्यम से लोग “आत्मा” जैसी एक अलौकिक और पूरी तरह से अवैज्ञानिक धारणा पर विश्वास करने लगते हैं। जबकि विज्ञान के दृष्टिकोण से देखें, तो इस प्रश्न का बहुत ही तार्किक और वैज्ञानिक उत्तर मौजूद है। आइए, उसे समझते हैं।

मनुष्य के शरीर में लगभग 15% प्रोटीन, 20% वसा (fat), 2% कार्बोहाइड्रेट, 2% लवण, 1% विभिन्न गैसें और शेष लगभग 60% जल होता है। ये सभी तत्व मूलभूत कणों से बने होते हैं यानी हमारे शरीर की हड्डियाँ, मांस, त्वचा, बाल, नाखून सब इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन जैसे कणों का समूह हैं। हालांकि standard model of particle physics के अनुसार, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन मूलभूत कण नहीं हैं, फिर भी सरलता के लिए हम उन्हें यहाँ प्राथमिक कण मान लेते हैं।

जब कोई व्यक्ति मरता है, तो आमतौर पर उसका शरीर या तो जलाया जाता है या दफनाया जाता है। हम जानते हैं कि matter और energy न तो उत्पन्न की जा सकती है, न ही नष्ट की जा सकती है। इसका मतलब यह है कि मृत्यु के बाद भी आपके शरीर का कोई भी कण पूरी तरह से गायब नहीं होता। विश्वास करें या न करें आपके मरने के बाद भी आपके शरीर के हर कण किसी न किसी रूप में इस ब्रह्मांड में सदा के लिए मौजूद रहेंगे। कैसे? आइए, इसे थोड़ा विस्तार से समझते हैं।

यदि शरीर को जलाया जाता है, तो उसमें मौजूद सारा जल तेजी से वाष्पित होकर वातावरण में मिल जाता है और water cycle के नियमों के अनुसार बाद में वर्षा, नदी, समुद्र आदि में शामिल हो जाता है। अगर शरीर को दफनाया जाए, तो यह प्रक्रिया धीमी होती है, लेकिन होती ज़रूर है। यानी, आपके शरीर का हर जलकण पृथ्वी के वातावरण में बना रहेगा। हो सकता है कि आज आपने जो पानी पिया, उसका कोई अंश किसी समय गांधीजी या अकबर के शरीर में रहा हो! और 1000 साल बाद वही जलकण आपके किसी दूर के वंशज के शरीर में हो सकता है।

इसी प्रकार, जब पौधे मिट्टी से पानी सोखते हैं, तो वही जलकण photosynthesis के जरिए ऑक्सीजन और कार्बोहाइड्रेट में बदल जाते हैं। यानी, आपके मरने के बाद भी आपकी देह के अणु हवा में, पौधों में, जानवरों में और आने वाली पीढ़ियों में जीवित रहते हैं।

अब जल के अलावा शरीर में जो बाकी matter है, वह भी किसी न किसी रूप में पृथ्वी पर रहता है। हालांकि, एक छोटा अपवाद है हमारे शरीर में थोड़ी मात्रा में रेडियोधर्मी (radioactive) पदार्थ होते हैं, जैसे पोटेशियम, यूरेनियम आदि, जो decay होकर अन्य तत्वों में बदल जाते हैं और इस प्रक्रिया में कुछ helium gas उत्पन्न होती है। चूँकि पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण हीलियम को रोकने में सक्षम नहीं है, यह गैस अंतरिक्ष में निकल जाती है। इस तरह, आपके शरीर के कुछ परमाणु हमेशा के लिए ब्रह्मांड में घूमते रहेंगे!

अब बात करते हैं energy की।

यहीं से आत्मा, भूत, पिशाच जैसी कल्पनाएँ जन्म लेती हैं। कई लोग “आत्मा” के अस्तित्व को साबित करने की कोशिश करते रहे हैं विज्ञान के कुछ शब्दों का उपयोग करके अपनी बात को “वैज्ञानिक” बताने की कोशिश की गई है। उदाहरण के लिए, स्वामी अभेदानंद ने अपनी पुस्तक “मरणेर पार” (मरण के पार) में आत्मा की कल्पना को “वैज्ञानिक तर्क” के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की थी, लेकिन वास्तविकता में वह कल्पना मात्र है।

1907 में अमेरिकी चिकित्सक डंकन मैकडूगल (Duncan Macdougall) ने छह मृतप्राय व्यक्तियों पर प्रयोग किया और दावा किया कि आत्मा का वजन 21.3 ग्राम होता है। The New York Times ने इस पर समाचार भी प्रकाशित किया था, जिससे दुनिया भर में चर्चा हुई। लेकिन विज्ञान ने इस प्रयोग को अस्वीकार कर दिया क्योंकि यह प्रयोग वैज्ञानिक दृष्टि से त्रुटिपूर्ण था और परिणाम असंगत थे।

अब सवाल उठता है मरने के बाद हमारे शरीर की energy का क्या होता है?

विज्ञान के अनुसार, energy भी नष्ट नहीं होती, बस उसका रूप बदल जाता है। यह First Law of Thermodynamics से स्पष्ट होता है:

 Change in Energy = Heat - Work

मनुष्य के शरीर में तीन प्रकार की ऊर्जा होती है:

1. Electrical energy जो हमारे मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र (nervous system) को चलाती है।


2. Heat energy जो मांसपेशियों की गतिविधि से उत्पन्न होती है।


3. Chemical energy जो प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट के रूप में संग्रहीत रहती है (यानी हमारी देह की "मेद")।


जीवित रहते हुए यही chemical energy शरीर की क्रियाओं में kinetic और heat energy में परिवर्तित होती रहती है।

मृत्यु के बाद, यह प्रक्रिया बंद हो जाती है न कोई श्वास, न कोई रक्त प्रवाह, न ही कोई electrical activity।

इसलिए सोचने, महसूस करने या “चेतना” (consciousness) की कोई संभावना नहीं रहती।


आपके शरीर की सारी ऊर्जा अंततः heat energy में परिवर्तित होकर वातावरण में फैल जाती है। यही कारण है कि entropy (अव्यवस्था) हमेशा बढ़ती रहती है और यही Second Law of Thermodynamics का मूल सिद्धांत है।


तो अब सोचिए जब कोई व्यक्ति मर जाता है, तो “आत्मा की शांति” की प्रार्थना करने या “पिंडदान” करने का क्या वैज्ञानिक अर्थ रह जाता है?

थोड़ा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सोचिए आप पाएँगे कि “आत्मा” जैसी कोई वस्तु नहीं है, यह सिर्फ़ मनुष्य की कल्पना है, जो भय और परंपरा से उपजी है।

Saturday, October 18, 2025

Raj sir's Words




What is definition of ability & self confidence... Ability is allow to do something special but self confidence is instruct you to do anything else whatever you want in your planing life...


Who is your planner...Your own mind...Since your planning is on base of so many dream as per your life wish... According to it...your mind is more important than your thought...but both are cofused by your own society people... Never care about it...Go ahead... And do What your mind want to do... Friend once again I say... Our mind mad computer... Computer did not make our mind... Therefore computer is producer of our mind... Plan your work and work on your planing... Accelerat your mind as per your pickup... Your achievement will be in your foot...Raj Sir


इन हिंदी...


योग्यता और आत्मविश्वास की परिभाषा क्या है...योग्यता आपको कुछ खास करने की अनुमति देती है, लेकिन आत्मविश्वास आपको अपने नियोजित जीवन में जो चाहें करने का निर्देश देता है...


आपका योजनाकार कौन है...आपका अपना मन...चूँकि आपकी योजनाएँ आपके जीवन की इच्छाओं के अनुसार कई सपनों पर आधारित होती हैं... इसके अनुसार...आपका मन आपके विचारों से ज़्यादा महत्वपूर्ण है...लेकिन दोनों ही आपके अपने समाज के लोगों द्वारा भ्रमित किया जाता हैं...इसकी परवाह मत करो...आगे बढ़ो...और वही करो जो तुम्हारा मन करना चाहता है...दोस्त, एक बार फिर मैंने कहता हूँ...हमारे मन ने कंप्यूटर बनाया...कंप्यूटर ने हमारे मन को नहीं बनाया...इसलिए कंप्यूटर हमारे मन का आविष्कार है...अपने काम की योजना बनाओ और अपनी योजना पर काम करो...अपने मन को अपनी गति के अनुसार गति दो...आपकी उपलब्धि आपके कदमों में होगी...राज सर


दिल की दूरी से कोई वास्ता नहीं होता दोस्त,जो खास रहता है वो हमेंशा पास रहता है...रोग और लोग दोनों मौका मिलते ही मार देते है दोस्त...मायने नहीँ रखती वो तरक्की दोस्त, जो मर्यादा और संस्कार रौंद कर मिली हो...अकेले रहना इस्तेमाल होने से बेहतर होता है दोस्त...तारीफ से ज्यादा सुन्दर होती वो आलोचना जो हमें सुधार करने में मदद करती है दोस्त...शांत और स्थिर मस्तिष्क प्रत्येक कठिन परिस्थिति के लिए ब्रह्मास्त्र समान है दोस्त...प्रेम के आराध्य में दो ही किरदार खूबसूरत होते हैं,इंतजार करता हुआ पुरुष और साथ निभाती हुई स्त्री दोस्त...किसी के हृदय में प्रेम जगाकर फिर उसे छोड़ देना, उसकी हत्या करने के समान होता है दोस्त...किताबो के आलावा जो चीज़ सबक,देती है उसका नाम है ज़िन्दगी दोस्त...राज


आत्मसम्मान की परवाह किए बिना, जब कोई व्यक्ति केवल अपने प्यार को पाने की आशा में अपनी गलती स्वीकार करता है, तो वह वास्तव में यह साबित करता है कि उसकी प्रेम की गहराई कितनी सच्ची है और उस व्यक्ति के प्रति उसका समर्पण कितना गहरा है। उसके लिए अपना अहम नहीं, बल्कि प्यार और वह प्रिय व्यक्ति अधिक मूल्यवान होता है दोस्त...


इसलिए, बीते हुए गलतियों को भुलाकर, माफ करके रिश्ते को फिर से पहले जैसा खूबसूरत और जीवंत बना लेना ही बेहतर होता है दोस्त...


गलती करना इंसान का स्वभाव है, और क्षमा करना इंसान का सबसे बड़ा गुण। इसलिए अपने प्रिय को कभी गलत मत समझिए। रिश्ते के महत्व को समझिए, अपने प्यार को सहेजिए और यह महसूस कराइए कि वह आपके जीवन का सबसे बड़ा आशीर्वाद है दोस्त...


Faithfulness in love...


Faithfulness in love isn’t just about what you don't do, but it’s about what you choose to do .... every single day.


It’s in the way you prioritize your partner’s heart, even in the smallest moments...


It’s choosing honesty, even when it’s uncomfortable...


It’s turning away from distractions and temptations, not because you have to, but because you want to honor the trust you’ve been given.. 


True loyalty is about showing up with your whole self...


It’s about the conversations you have, the stories you share, and the way you protect your relationship from anything that could dim its light...


It’s making sure your words, your actions, and your intentions all align with the love you promised...


Real commitment is built in the quiet spaces—when you choose to listen, to support, to encourage, and to be present...


It’s about making your partner feel seen, valued, and safe, not just when it’s easy, but especially when it’s hard...


Faithfulness is more than a boundary, it’s a daily act of devotion...


It’s the way you nurture trust, water the roots of your connection, and hold space for each other’s growth...


It’s about being the kind of person your partner can count on, not just with their secrets, but with their dreams...


Because in the end, the strongest relationships aren’t just built on avoiding mistakes, they’re built on choosing to love the same person so deeply, that it will stand the test of time for all eternity...


Have a good night friends...

Saturday, October 4, 2025

RAJ sir Words




किसी तूफान आंधी से हम कभी नही डरते, हवा के सर्त पर हम कोई सफर तय नही करते,सुनो ऐ अस्मा वाले हमें खुद पे भरोसा है,लगा के पँख औरों के हम उड़ान नही भरते...Plan your work & work on your planing and always Mind on Practice is more important than practical since A computer has limit of storage but our mind has no limitation of storage because our mind mad computer...Computer can never made a mind like our mind therefore never compare our mind to others mind...Your mind process is producer of your own graphic future...Raj Sir


Replace desires with goals...

Replace alcohol with water...

Replace spending with saving...

Replace television with reading...

Replace fear with determination...

Replace overthinking with action...

Replace influencers with creators...

Replace toxic friends with mentors...

Replace complaining with gratitude...

Replace Consumption with Creation...

Replace wasting money with investing...

Replace watching Porn with any hobby...

Replace sleeping in with early mornings...

Replace slouching with standing upright...

Replace procrastination with action-taking...

Replace chasing women/men with chasing your purpose...


It is amazing how by making small changes we can achieve big results...


But, this post is going separate those who actually want to do well in life from those who make excuses....


Yet, I'm rooting for you...never for me friends...


इक सूरत पर ख़र्च कर डाला दोस्त,जितना नूर था मेरी आंखों में कभी किसी वास्ते...राज


Have a wonderful night friends....


मारने के लिए तू ही काफ़ी थीं दोस्त, और मरने के लिए मै तो तेरे लिए हमेशा तैयार था...तुझे मालूम है तेरे बिन वो जिंदगी जीते है हम,जैसे कोई जिन्दा लास जल रहा हो दोस्त...तेरे प्रेम को तो मैने कई भाषाओ प्रभाषित किया, पर तुमने तो प्यार का परिभाषा हीं बदल दिया दोस्त...तुझे प्यार तो हम इस कदर करते है, जैसे तुम आज अपने झूठे परिवार को दे रही हो दोस्त...तुमने तो कहा था दो बदन है तो क्या है जिस्म और जान तो एक हीं है ना यार,देख ले दोस्त गल्फ में आज मै जर जर कर जी रहा हूँ...इश्क हमने हीं नही तूने भी लाजबाब किया था, पर हम दोनों का इजहार और इकरार दोनों ही बेवफा निकले दोस्त...देख मेरी जिंदगी चाहतो के बेवसी और दूरियों की गम, बेकारिया तो तुमने कूट कूट कर दिया है दोस्त...अनजान तो कभी नही थे हम दोनों, पर आज हम अजनबी बन गए दोस्त...


मेरे पास तुम्हें खो देने की सौ वजहें थीं और तुम्हें अपनाने की शून्य लेकिन उन सौ और शून्य वजहों से भी बड़ी मेरे पास एक वजह थी "बिना शर्त सिर्फ तुमसे प्रेम करना" और इस प्रेम ने न तुम्हें ठुकराया न तुम्हें अपनाया बस पा लेने और खो देने की सीमाओं से कहीं दूर एक सीमा बनाई और मैंने खुद को उसी सीमा पर खड़ा कर दिया जहाँ तुम्हें ख़ुद में जी लेना ही मेरी नियति बन गई अब न तुम मेरे हो, न मैं तुम्हारी" बस तुम्हारा होना मेरी सांसों में और मेरा होना तुम्हारी यादों में रह गया है... Raj


Friends today my above mentioned line may be for me... But may be apply for so many people same ...think my friend...This is not my own life may be happened with you like me...Raj Sir

Monday, September 22, 2025

Raj Sir's Words





सफलता 6 चीजों की मांग करती है,

1 कड़ी मेहनत...भाग्य पर विश्वास मत करो, कड़ी मेहनत पर विश्वास करो...

2 धैर्य...यदि आप धैर्य खो रहे हैं तो आप अपना लक्ष्य और सपने खो रहे हैं

3 बलिदान... यदि आप जो चाहते हैं उसके लिए बलिदान नहीं देते हैं, तो जो आप चाहते हैं वह बलिदान बन जाता है...

4 संगति...स्थिरता ही औसत को उत्कृष्टता में बदलती है...

5 अनुशासन...प्रेरणा आपको आगे बढ़ने में मदद करती है लेकिन अनुशासन आपको आगे बढ़ने में मदद करता है...

6 आत्मविश्वास... आत्मविश्वास ऐसा नहीं है कि वे मुझे पसंद करेंगे.. आत्मविश्वास यह है कि अगर वे मुझे पसंद नहीं करेंगे तो भी मैं ठीक हो जाऊंगा...

यहां जीवन के चार नियम और शर्तें दी गई हैं...

1 हर अच्छा उपहार एक कीमत मांगता है...

ताकत संघर्ष से आती है...साहस डर से पैदा होता है...आस्था संदेह के बीच जीवित रहती है...धैर्य मौन में बढ़ता है...बुद्धि विफलता से उगती है...महानता बलिदान में जीवित रहती है...

2 इस दुनिया में कुछ भी मुफ़्त नहीं है...

कोई अनुशासन नहीं, कोई परिणाम नहीं... कोई त्याग नहीं, कोई अवसर नहीं... कोई वफादारी नहीं, कोई प्यार नहीं, कोई भरोसा नहीं, कोई दोस्ती नहीं... कोई दर्द नहीं, कोई लाभ नहीं... कोई जोखिम नहीं, कोई पुरस्कार नहीं...

जीवन के 3 छह सत्य...

कार्रवाई के बिना प्रेम कुछ भी नहीं है... प्रयासों के बिना आशा कुछ भी नहीं है... साबित किए बिना विश्वास कुछ भी नहीं है... परिवर्तन के बिना क्षमा कुछ भी नहीं है... शांति के बिना जीवन कुछ भी नहीं है... दिल के बिना देना कुछ भी नहीं है

जीवन के 4 पांच सुनहरे नियम...

आपकी मदद कौन कर रहा है? उन्हें मत भूलिए... कौन आपका समर्थन कर रहा है? उन्हें नज़रअंदाज़ न करें... आप पर कौन भरोसा कर रहा है? उन्हें धोखा मत दो...तुम्हें कौन प्यार कर रहा है? उनसे नफरत मत करो...तुम्हारे प्रति दयालु कौन है? उनका फायदा मत उठाओ...

Success demand Six things

1 Hard Work...Don't believe in luck, believe in hard work...

2 Patience...If you are losing the patience then you losing the your target & dreams

3 Sacrifice...If you don't sacrifice for what you want,then what you want becomes the sacrifice...

4 Consistency...Consistency is what transforms average into excellence...

5 Discipline...Motivation gets you going but discipline keep you growing...

6 Self Confidence... Confidence is not like they will like me..Confidence is i will be fine if they don't like me...

Here is four terms & conditions of life...

1 Every Good Gift Demands a Cost...

Strength comes from struggle...Courage borns from fear...Faith survives trough doubt...Patience grows in silence... Wisdom rises from failure...Greatness lives in sacrifice...

2 Nothing is free in this world...

No discipline, No result...No sacrifice, No opportunity...No loyalty, No love, No trust No friendship...No pain, No gain...No risk No reward...

3 Six Truths of life...

Love is nothing without action...Hope is nothing without efforts...Trust is nothing without prove...Sorry is nothing without change...Life is nothing without peace...Give is nothing without heart

4 Five Golden rules of life...

Who is helping you? don't forget them...Who is supporting you? Don't ignore them...Who is trusting you? Don't cheat them...Who is loving you? Don't hate them...Who is kind to you? Don't take advantage of them...


Always remember...

Dedication is more important than designation...Sincerity is more important than seniority...Values are more important than valuables...Mind-set is more important than marks...Efforts are more important than the results... Loyalty is more important than royalty...Proper work is more than paper work...




Tuesday, September 9, 2025

Raj's Sir Words




दोस्तों...बग़ावत हमेंशा ईमानदार और स्वाभिमानी लोग करते है ,चालाक लोग तो चापलूसी और तलवे चाटते है...इंसान का बड़प्पन उसकी हैसियत नही इंसानियत तय करती है.बनकर छोटा जो सबसे मिलता हो उससे बड़ा कोई नही होता है...कौन क्या कर रहा है,कैसे कर रहा है, क्यों कर रहा है, इन सब से आप जितना दूर रहेंगे उतना ही खुश रहेंगे.कोई आपके वजह से खुश हो वो भी दान ही है.खुद को खुश रखिए यह भी आपके लिए एक बड़ी जिम्मेदारी है...आत्म-सम्मान वही है जो आपके अस्तित्व को महत्त्व देता है, जो आपकी कदर नहीं करता उससे दूरी बना लेना बेहतर है. किसी रिश्ते को परखना है तो उस रिश्ते से कोई उम्मीद करके देखिए, आपको जल्द हीं रिश्ते की मजबूती और गहराई का पता चल जाएगा...परिवर्तन से कभी ना डरे, जितना बेहतर आप खो रहे हैं,उससे लाख गुना बेहतर आपको जरुर मिलेगा...जीवन में प्रयास सदैव कीजिए, लक्ष्य मिले या अनुभव दोनो ही अमूल्य हैं। लक्ष्य वही सही है जो आपको सोने न दे। बड़ा लक्ष्य तय करो मेहनत खुद-ब-खुद दिखेगी...और हाँ Always remember...जितने वाले हमेशा सर झुका कर गोल्ड मेंडल हासिल करते है...Raj Sir...


रात की याद जज़्बात के साथ...


दोस्त हथेलियां तो मिल गईं थी,मगर लकीरों का मलाल रह गया...तेरे बिना किसी ओर को देखा तक नही,दिल तो क्या मेरी नजरें भी बेवफा नही हुईं दोस्त...मेरे जिंदगी की हर सुबह और शाम तेरे इंतजार में कटी, फिर तुमने क्यों अपनी रात किसी और हवाले कर दिया दोस्त...हम तो बिखर जाने के ख्याल से भी डरते, पर तुमने तो मुझे चकनाचूर कर के रख दिया दोस्त...जज्बातों के जरिये जिसने जिंदगी जीना सिखाया, उसीने जिस्म से जान निकाल कर जिन्दा जला दिया दोस्त...जिंदगी जीने के मशवरे उसे किस काम का दोस्त,जिसने अपनी भरी जवानी अपने हाथो से जला डाली हो...जो शख्स तेरी तस्वीर देखकर ही महक जाए करता है,सोच तेरे साथ से क्या हाल होता उसका दोस्त...सोंचा कुछ,किया कुछ, मिला कुछ और हुआ भी कुछ दोस्त...मुझे महंगे महंगे तोफे पसंद है, और वो वक्त, ऐतबार, इज़्ज़त, ईमानदारी है दोस्त…तेरी आहट से ही सजने लगते थे मेरे दिन,तेरे बग़ैर हसीन लम्हे भी खाक लगते है दोस्त...अपनी पीठ से निकले खंजरो को जब गिना मैंने,ठीक उतने ही निकले जितनों को मैंने गले लगाया था दोस्त...इस दुनिया में सिर्फ तू मेरी हो जाती न दोस्त,कसम मेरी पाक वफ़ा की हर एक किताब से बेवफा लफ्ज मिटा देता...दुनिया का सबसे मुश्किल काम है-समेटना,फिर चाहे वो बातें हो, रिश्ते हों, या फिर, बिखरा हुआ घर दोस्त...कुछ लोग गणित की समानान्तर रेखाओं की तरह होते हैं ,अनन्त तक जाने पर भी उनका मिलन नहीं हो पाता दोस्त...प्रेम की केवल सुगंध होती है व्याख्या, विज्ञापन या स्पष्टीकरण नहीं दोस्त...राज


30 Sentences of Beware...


1. Beware of pride...its purpose is to destroy all you have achieved and render you worthless...


2. Beware of betrayal...its goal is to rob you of great relationships and leave you dejected...


3. Beware of envy...its aim is to blind you from appreciating your own blessings...


4. Beware of anger...its purpose is to make you act foolishly and regret later...

 

5. Beware of laziness...its goal is to waste your potential and opportunities...


6. Beware of greed...its aim is to make you lose what truly matters...


7. Beware of gossip...its purpose is to stain your reputation silently...


8. Beware of procrastination...its goal is to delay your success endlessly...


9. Beware of jealousy...its aim is to block you from celebrating your journey...


10. Beware of arrogance...its purpose is to alienate you from true friends and helpers...


11. Beware of impatience...its goal is to make you miss out on well-deserved rewards...


12. Beware of disloyalty...its aim is to weaken the bonds that strengthen you...


13. Beware of bitterness...its purpose is to poison your heart against good things...


14. Beware of selfishness...its goal is to isolate you from meaningful relationships...


15. Beware of fear...its aim is to paralyze your dreams before they even start...


16. Beware of dishonesty...its purpose is to build walls where bridges should exist...


17. Beware of hatred...its goal is to consume your joy and peace...


18. Beware of arrogance, its aim is to make you think you need no one else...


19. Beware of mediocrity...its purpose is to keep you from realizing your greatness...


20. Beware of negative thinking...its goal is to destroy your hopes before they grow...


21. Beware of impatience...its aim is to rush you into mistakes you could have avoided...


22. Beware of carelessness...its purpose is to undo years of hard work...


23. Beware of mockery...its goal is to push people away from you...


24. Beware of intolerance...its aim is to limit your understanding of others...


25. Beware of stinginess...its purpose is to block your own blessings...


26. Beware of hard-heartedness...its goal is to make you miss out on love...


27. Beware of blaming others...its aim is to prevent you from taking responsibility...


28. Beware of stubbornness...its purpose is to stop you from learning and growing...


29. Beware of disobedience...its goal is to cut you off from wise counsel...


30. Beware of deceit...its aim is to trap you in webs of your own making...


Friends...Life will always present you with choices some leading to growth and others to destruction. Beware of attitudes and actions that seem harmless at first but are designed to tear you down slowly. Stay humble, stay teachable, stay wise, and always choose the path that builds you into a better, stronger, and more fulfilled person. The greatness you are meant to achieve is too precious to be wasted by careless living. Choose wisely and protect your future...


Have a very good night friends... ❤️❤️❤️❤️

Thursday, August 28, 2025

Raj Sir's Words




दोस्तों...अच्छे समय का अहंकार ही बुरे समय को निमंत्रण देता है...समय और भाग्य परिवर्तनशील है,इन पर कभी अहंकार ना करें...हर बीतता समय यही सिखा रहा हैं अगर,हम कामयाब नहीं हुए तो हमारा अपना कोई नहीं होगा...इस युग में भले ही विचार नये रखिये परंतु संस्कार और मर्यादा हमेशा पुरानी ही अच्छी लगती है...समाज हमेशा चाहता है कि आप उनकी तरह बने,क्योंकि आपका अलग होना उन्हें डराता रहता है...केवल मात्राओं का फर्क है दुनिया भर के लोगो में,इन चार शब्दों से परेशान हैं बाबू,बाबा ,बेबी और बीबी... Mind on this matter bibi always is better than beby...एक कामयाब पुरुष के पीछे किसी औरत का हाथ नहीं, पापा की बेल्ट और मम्मी की झाड़ू बहुत जरूरी है...एक दुखद घटना घटती है उसके बाद ही समझ आता है कि शक्तिशाली बनना कितना ज़रूरी है...इसलिए दुख से कभी भी अचंभित न हो... Raj Sir


ख़ामोशी खा गई जज़्बात मेरे...


प्रेमी,आशिक, पागल,अवारा,दीवाना, मज्जानू तू जो भी समझ मुझे,इन सब का प्यार तो बस मैंने तुझे ही दिया है दोस्त...तेरी तिजोरी का सोना तो राज आज भी है, पर तू किसी और के प्यार में पीतल कैसे बन गईं दोस्त...मेरी हथेली पर तुमने अपना नाम खुद ही लिखा था, फिर क्यूं तुमने अपने हाथो पर किसी और के नाम की मेंहदी रछाई दोस्त...मै बहुत बुरा था दोस्त, सिर्फ अपने लिए...ख़ामोशी खा गई जज़्बात मेरे,और अब शोर पूछता रहा माजरा क्या है दोस्त...Love is the most important things in the world but the best feeling & understanding about own lover is superior to any other things in the world friend...जरुरी नहीं है कुछ तोड़ने के लिए पत्थर ही मारा जाए,अंदाज बदल के बोलने से भी बहुत कुछ टूट जाता है दोस्त...गुजरा हुआ कल हो जाउंगा,याद तो आऊंगा पर अब लौट कर नहीं आऊंगा दोस्त...जिसे पा नहीं सकते,उसे सोचते रहना भी इश्क़ है दोस्त...राज

Love is Not a Feeling...

Love is not a feeling — but love produces feelings. You don’t fall in love — you choose to love. Love is a decision, a covenant of hearts. Feelings fade and shift, but true love stands firm...

Love is a daily commitment—supporting despite the cost, forgiving even when it hurts. Offense is inevitable, but love does not keep score. It wipes the slate clean and chooses grace over grudges...

Love is patient when tempers flare, and kind when words could wound. It doesn’t shout or shame. Love listens with respect, speaks with tenderness, acts with humility. Love holds back anger and reaches out in peace...

Love never gives up — it trusts, hopes, and fights for the bond through every storm. Love stays when it’s hard, believes when it’s bleak, and keeps building when life feels broken. True love is resilient and relentless...


Love is not sex, though intimacy blossoms in loving marriages. Love is the soil where trust, tenderness, and passion grow. Love never fails. What fails is a false version of love — not love itself. Real love lasts forever...


Have a great day...Friends


हम तो एक बदन दो जान थे, पता नहीं कैसे तूने बटवरा कर दिया दोस्त...चल आज अपनी आरजू मै खाक करता हूँ, पर तु तो बता क्या तेरे तम्मना पुरे हुए है दोस्त...इजहार मेरी थीं,एतबार और इकरार तो तेरे ही थे,फिर क्यों तुमने इकरार करने वजाय इंकार दिया दोस्त...आज तू तो बहुत खुश है दोस्त, पर तेरा अपना दोस्त गम की तन्हाई यों तेरे यादो गुमनाम रहता है...दोस्त तुम्हे मालूम नहीं कैसि जिंदिगी जीता हूँ, मै वो जिंगदी जीता हूँ जो आज के लोग जीना नहीं चाहते...तुझे और क्या बताव हर घडी बेखुदी और बेवसी है, फिर भी जीता हू मै किसी अनजान याद में दोस्त... तुझे तो मालूम नहीं जवानी की आहोस, पर मेरी जिंदगानी तुमने हीं बदनाम कर दिया दोस्त....मै मानता हूँ की इश्क का नाम जुदाई है, पर प्यर में दोस्त तू पराई है ये आज भी राज नहीं मानता...दर्द दवा है लोग कहते थे,पर तुमने ये बात बताई है दोस्त...वो अभिमानी और गुमानी दोनों में पीएचडी थीं दोस्त, पर इतना गिर जयगा ये मालूम न था दोस्त... दिल की आवाज...राज


ADVICE TO those all EMPLOYEES Who servent of thier of thier own instation...


1. Build a home earlier. Be it rural home or urban home. Building a house at 50 is not an achievement. Don't get used to government houses. This comfort is so dangerous. Let all your family have good time in your house.


2. Go home. Don't stick at work all the year. You are not the pillar of your department. If you drop dead today, you will be replaced immediately and operations will continue. Make your family a priority.


3. Don't chase promotions. Master your skills and be excellent at what you do. If they want to promote you, that's fine if they don't, stay positive to your personal.

development.


4. Avoid office or work gossip. Avoid things that tarnish your name or reputation. Don't join the bandwagon that backbites your bosses and colleagues. Stay away from negative gatherings that have only people as their agenda.


5. Don't ever compete with your bosses. You will burn your fingers. Don't compete with your colleagues, you will fry your brain.


6. Ensure you have a side business. Your salary will not sustain your needs in the long run.


7. Save some money. Let it be deducted automatically from your payslip. 


8. Borrow a loan to invest in a business or to change a situation not to buy luxury. Buy luxury from your profit.


9. Keep your life,marriage and family private. Let them stay away from your work. This is very important.  


10. Be loyal to yourself and believe in your work. Hanging around your boss will alienate you from your colleagues and your boss may finally dump you when he leaves. 


11. Retire early. The best way to plan for your exit was when you received the employment letter. The other best time is today. By 40 to 50 be out. 


12. Join work welfare and be an active member always. It will help you a lot when any eventuality occurs.


13.Take leave days utilize them by developing yr future home or projects..usually what you do during yr leave days is a reflection of how you'll live after retirement..If it means you spend it all holding a remote control watching series on Zee world, expect nothing different after retirement.


14. Start a project whilst still serving or working. Let your project run whilst at work and if it doesn't do well, start another one till it's running viably. When your project is viably running then retire to manage your business. Most people or pensioners fail in life because they retire to start a project instead of retiring to run a project. 


15. Pension money is not for starting a project or buy a stand or build a house but it's money for your upkeep or to maintain yourself in good health. Pension money is not for paying school fees or marrying a young wife but to look after yourself.


16. Always remember, when you retire never be a case study for living a miserable life after retirement but be a role model for colleagues to think of retiring too. 


17. Don't retire just because you are finished or you are now a burden to the company and just wait for your day to die. Retire young or whilst energetic to enjoy waking up for a cup of coffee, enjoy the sun, receive money from your business, visit nice place that you missed and spend good time with family. Those who retire late, spend about 95% of their time at work than with their family and that's why they see it difficult to spend time with their family when they retire but end looking for another job till they die. If they don't get another job, they die early.


18. Retire at your house than at government accommodation so that when you retire you can easily fit into the society that raised you. It's not easy to adjust to live in a location after spending more years at company house or at government house.


19. Never let your employment benefits make you forget about your retirement. Employment benefits are just meant to make you relax, get finished whilst time is moving. Remember when you retire no one will call you boss if you don't have a viable business.


20. Don't hate to retire because one day you will retire either voluntarily or involuntarily. 


Have a good night दोस्त...


दोस्तों नजरिये की गहराई आपकी जिंदगी की ऊंचाई तय करती है इसलिए अपनी नजरिया अपने टारगेट पर रखने की कोशिश कीजिये और एक बात याद रखना अगर आदतें नहीं बदली तो वख़्त कभी नहीं बदलेगा...समय से ज़्यादा महंगी होती हैं भावनाएं,इस लिए जो समझ सके उसी पर खर्च करना,हर किसी के लिए भावनाएं रखना आसान है,मगर अपना वक़्त देना ये सबसे बड़ी कुर्बानी होती है...लोग वायरल होने को सबसे बड़ी जीत मानते है लेकिन आज के समय में यही सबसे बड़ी कमजोरी है ,क्योंकि वायरल होना बड़ी बात नहीं है ग्रो करना बड़ी बात है therefore Try to encore your inner will & wish since your imegnenation is creation of your so many unbelievable dream...प्रसिद्धि मर्यादा तोड़कर मिल सकती है, पर असली गौरव तभी है जब इंसान संयम और संस्कारों में रहकर  

लोगों के दिलों में सम्मान पाता है। एक बात हमेशा याद रखना, तूफान,कश्तियाँ और घमंड में हस्तियाँ डूब जाती है...Raj Sir


मोहब्बत सभी करते हैं दोस्त, पर कोई हमारी तरह निभा ले तो जरूर बता देना...जमाना बदल गया है मेरे दोस्त,आज के ज़माने में एक ताले की कई चाबियां होती हैं...मर्यादा लांघकर चर्चित हो जाना कोई बड़ी बात नहीं दोस्त, सुकून तो तब है जब संस्कारों की सीमा में रहकर दिलों में जगह बनाई जाए...सादगी इतनी कि तुम्हारे क़दमों में बैठ जाऊं,स्वाभिमान इतना कि तू सदा हर मोड़ पर खुश रहे दोस्त...माना कि हम दोनों को वख़्त सता रहा है,मगर बहुत कुछ सिखा भी रहा है दोस्त... U can feel &See my love & लाइफ... This is my loyal love...राज


थोड़ा पढ़ना, ज्यादा सोचना,कम बोलना, ज्यादा सुनना

यही बुद्धिमान बनने का उपाय है...अपनी अमीरी पर कभी भी अहंकार मत कीजिये क्यूंकि काबलियत का करिश्मा आपको कही पर भी मात दे सकती है...सेवा, समर्पण, साधना और निश्छल सम्बन्ध जिंदगी की परम पूजी है...Money may be many things but It can never take place of every things... Raj Sir


कभी आरजू थी की हर कोई जाने हमें, मगर अब तलब है की गुमनाम ही रहें हम दोस्त...ज़िन्दगी उस दौर में है दोस्त,जहाँ ज़िन्दगी ही पसंद नहीं आ रही..फूलों से एक ही बात सीखी है मैने,लोग तोड़ते भी उसे ही हैं जो बेहतरीन होते है दोस्त...मैं नहीं कहता कि आठों पहर मैं तेरी यादों में रहूं,ताल्लुक है दिल से तो याद एक पहर आनी ही चाहिए दोस्त...जिस प्यार की तपस्या पूजा समझ किय,उसी प्यार ने त्याग दिया मुझे दोस्त...खुद को हटा लेना हार नहीं होता,यह आत्मसम्मान की सबसे सुंदर भाषा भी है दोस्त...जिस्म से सुंदर स्त्री अक्सर निगाहों को भाती है,और उसका आकर्षण बिस्तर तक सिमट जाता है दोस्त...ना हमें तुम सा ना तुम्हें हम सा मिलेगा,तुम अनमोल ठहरे और हम नायाब दोस्त... राज


Have a wonderful night friends...

तम्माम उम्र तपस्या कि जिसकी मोहब्बत की खातिर, उसी मोहब्बत को किसी ने एक पल में त्याग दिया दोस्त...तमन्ना नहीं रही दुनिया में मशहूर होने की दोस्त, अब तो तलब ये है की अपनों से थोड़ी दूरिया बनी रहे...तुम्हे याद तो हम जरूर आते होंगे अकेले में, पर अफ़सोस उन तन्हाईयों अपने इश्क़ का सरूर नहीं होता होगा दोस्त...चल रही इस जिंदगी से शायद तू खुश हो, पर जीने वाली जिंदगी तो कब का दफन हो चूका है दोस्त...मेरी चाहत की चीख तो तेरे रूह तक थीं, पता नहीं कैसे तुमने जिस्मो की पुकार सुन ली दोस्त...दर्द की भी अपनी एक अदा है, वो भी सहने वालों पर ही फिदा होती दोस्त...तेरी याद बस राज के साथ