Tuesday, June 9, 2020

आधुनिक_भारत_का_इतिहास

आधुनिक_भारत_का_इतिहास

#खिलाफ़त_और_असहयोग_आन्दोलन

ब्रिटिश शासन के प्रति बढ़ते क्रोध ने खिलाफत आन्दोलन और असहयोग आन्दोलन को जन्म दिया| तुर्की ने प्रथम विश्व युद्ध में ब्रिटेन के विरुद्ध भाग लिया था| तुर्की,जोकि पराजित देशों में से एक था,के साथ ब्रिटेन ने अन्याय किया|1919 ई. में मोहम्मद अली और शौकत अली (अली बंधुओं के नाम से प्रसिद्ध), मौलाना अबुल कलाम आज़ाद,हसरत मोहानी व कुछ अन्य के नेतृत्व में तुर्की के साथ हुए अन्याय के विरोध में खिलाफत आन्दोलन चलाया गया| तुर्की के सुल्तान को खलीफा अर्थात मुस्लिमों का धर्मगुरु भी माना जाता था| अतः तुर्की के साथ हुए अन्याय के मुद्दे को लेकर जो आन्दोलन शुरू हुआ,उसे ही खिलाफत आन्दोलन कहा गया| इसने असहयोग का आह्वाहन किया| खिलाफत के मुद्दे को लेकर शुरू हुआ आन्दोलन जल्द ही स्वराज और पंजाब में दमन के विरोध में चलाये जा रहे आन्दोलन के साथ मिल गया| गाँधी जी नेतृत्व में 1920 ई. में कलकत्ता में कांग्रेस के विशेष अधिवेशन में पहली बार और बाद में नागपुर के कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में सरकार के विरुद्ध संघर्ष हेतु एक नए कार्यक्रम को स्वीकृत किया गया | नागपुर अधिवेशन,जिसमे 15000 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था,में कांग्रेस के संविधान में संशोधन किया गया और “वैधानिक व शांतिपूर्ण तरीकों से भारतीयों के द्वारा स्वराज्य की प्राप्ति” को कांग्रेस के संविधान का प्रथम प्रावधान बना दिया गया|

यह आन्दोलन तुर्की और पंजाब में हुए अन्याय के विरोध और स्वराज्य की प्राप्ति के लिए शुरू हुआ था| इसमें अपनाये गए तरीकों के कारण इसे असहयोग आन्दोलन कहा गया, इसकी शुरुआत ब्रिटिशों द्वारा भारतीयों को प्रदान की जाने वाली ‘सर’ की उपाधि की वापसी के साथ हुई| सुब्रमण्यम अय्यर और रबिन्द्रनाथ टैगोर पहले ही ऐसा कर चुके थे| अगस्त 1920 में गाँधी ने अपनी कैसर-ए-हिन्द की उपाधि लौटा दी | अन्य लोगों ने भी ऐसा ही किया| ब्रिटिश सरकार से इन उपाधियों का प्राप्त करना अब भारतीयों के लिए सम्मान का विषय नहीं रह गया अतः सरकार के साथ असहयोग किया गया| बाद में विधायिकाओं का भी बहिष्कार किया गया|

अनेक लोगों ने विधायिकाओं के चुनाव में अपना मत देने से इंकार कर दिया| हजारों छात्रों व शिक्षकों ने स्कूलों व कॉलेजों को छोड़ दिया| जामिया मिलिया इस्लामिया,अलीगढ (जो बाद में दिल्ली में स्थापित हो गया था) और कशी विद्यापीठ,बनारस जैसे नए शिक्षा संस्थानों की स्थापना राष्ट्रवादियों द्वारा की गयी| सरकारी कर्मचारियों ने अपनी नौकरी छोड़ दी,वकीलों ने न्यायालयों का बहिष्कार किया,विदेशी वस्तुओं की होली जलाई गयी और पूरे देश में बंद व हड़तालों का आयोजन किया गया| आन्दोलन को अपार सफलता मिली और गोलीबारी व गिरफ्तारियां इसे रोक न सकीं|

वर्ष 1921 की समाप्ति से पूर्व तक लगभग 30,000 लोगों को जेल में डाल दिया गया था| इनमे कई प्रमुख नेता भी शामिल थे| गाँधी जी को किसी भी तरह से अभी गिरफ्तार नहीं किया जा सका था| केरल के कुछ हिस्सों में विद्रोह भड़क गया जिसमे ज्यादातर विद्रोही मोपला किसान थे,इसीलिए इसे मोपला विद्रोह कहा गया| विद्रोह को क्रूर तरीकों से दबा दिया गया | 2000 से ज्यादा मोपला विद्रोही मार दिए गए और 45,000 को गिरफ्तार कर लिया गया| एक स्थान से दुसरे स्थान पर ले जाते समय 67 कैदियों की एक रेलवे वैगन में दम घुटने से हुई मृत्यु इस क्रूरता का ही जीता जागता उदाहरण था|

1921 का कांग्रेस अधिवेशन अहमदाबाद में आयोजित हुआ था जिसकी अध्यक्षता हकीम अजमल खान  ने की थी| इस अधिवेशन में आन्दोलन को जारी रखने का निर्णय किया गया और असहयोग आन्दोलन के अंतिम चरण की शुरुआत करने का भी निर्णय किया गया|इस चरण की शुरुआत लोगों से कर अदा न करने की अपील के साथ होनी थी| इसकी शुरुआत गांधीजी ने गुजरात के बारदोली से की | यह चरण बहुत महत्वपूर्ण था क्योंकि जब लोग सरकार को कर अदा करना से मन कर देंगे तो सरकार की वैधानिकता पर ही प्रश्नचिह्न लग जायेगा| गाँधी जी हमेशा इस बात पर बल दिया कि पूरा आन्दोलन शंतिपूर्ण ढंग से होना चाहिए| लेकिन लोग स्वयं को संयमित नहीं रख सके |उत्तर प्रदेश के चौरी-चौरा में 5 फरवरी ,1922 को पुलिस ने बगैर किसी पूर्व सूचना के प्रदर्शन कर रही भीड़ पर गोली चला दी | लोगों ने गुस्से में आकर पुलिस स्टेशन पर धावा बोल दिया और उसमे आग लगा दी| पुलिस स्टेशन के अन्दर कैद 22 पुलिस वाले इस आग में मारे गए| चूँकि गाँधी जी ने यह शर्त रखी थी कि पूरा आन्दोलन शंतिपूर्ण होगा अतः इस घटना की खबर सुनने के बाद ही उन्होंने आन्दोलन को वापस ले लिया |

10 मार्च,1922 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और छह साल की सजा सुनाई गयी| इस आन्दोलन को वापस लेने के साथ ही राष्ट्रवादी आन्दोलन का एक और चरण समाप्त हो गया| इस आन्दोलन में पुरे देश से लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया था| यह गावों तक फ़ैल गया था|
[09/06, 8:55 AM] Raj Kumar: #आधुनिक_भारत_का_इतिहास :
#साइमन_कमीशन

भारत में 1922 के बाद से जो शांति छाई हुई थी वह 1927 में आकर टूटी|इस साल ब्रिटिश सरकार ने साइमन आयोग का गठन सर जॉन साइमन के नेतृत्व में भारत में भारतीय शासन अधिनियम -1919 की कार्यप्रणाली की जांच करने और प्रशासन में  सुधार हेतु सुझाव देने के लिए किया|इसके अध्यक्ष सर जॉन साइमन के नाम पर इस आयोग को साइमन आयोग के नाम से जाना गया|इसकी नियुक्ति भारतीय लोगों के लिए एक झटके जैसी थी क्योकि इसके सारे सदस्य अंग्रेज थे और एक भी भारतीय सदस्य को इसमें शामिल नहीं किया गया था|सरकार ने स्वराज की मांग के प्रति कोई झुकाव प्रदर्शित नहीं किया|आयोग की संरचना ने भारतियों की शंका को सच साबित कर दिया|आयोग की नियुक्ति से पूरे भारत में विरोध प्रदर्शनों की लहर सी दौड़ गयी|

1927 में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन मद्रास में आयोजित किया गया जिसमे आयोग के बहिष्कार का निर्णय लिया गया|मुस्लिम लीग ने भी इसका बहिष्कार किया|आयोग 3 फरवरी 1928 को भारत पहुंचा और इस दिन विरोधस्वरूप पुरे भारत में हड़ताल का आयोजन किया गया|उस दिन दोपहर के बाद,आयोग के गठन की निंदा करने के लिए,पूरे भारत में सभाएं की गयीं और यह घोषित किया कि भारत के लोगों का इस आयोग से कोई लेना-देना नहीं है|मद्रास में इन प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलायीं गयीं और अनेक अन्य जगहों पर लाठी-चार्ज की गयीं|आयोग जहाँ भी गया उसे विरोध प्रदर्शनों और हड़तालों का सामना करना पड़ा|केंद्रीय विधायिका ने बहुमत से यह निर्णय लिया कि उसे इस आयोग से कुछ लेना-देना नहीं है|पूरा भारत ‘साइमन वापस जाओ’ के नारे से गूँज रहा था|

पुलिस ने दमनात्मक उपायों का सहारा लिया और हजारों लोगों की पिटायी की गयी |इन्हीं विरोध प्रदर्शनों के दौरान शेर-ए-पंजाब नाम से प्रसिद्ध महान नेता लाला लाजपत राय की पुलिस द्वारा बर्बरता से पिटाई की गयी| पुलिस द्वारा की पिटायी से लगीं चोटों के कारण उनकी मृत्यु हो गयी|लखनऊ में नेहरु और गोविन्द बल्लभ पन्त को भी पुलिस की लाठियां खानी पड़ीं| इन लाठियों की मार ने गोविन्द बल्लभ पन्त को जीवन भर के लिए अपंग बना दिया था|

साइमन आयोग के विरोध के दौरान भारतियों ने एक बार फिर प्रदर्शित कर दिया कि वे स्वतंत्रता के एकजुट और द्रढ़प्रतिज्ञ हैं|उन्होंने स्वयं को अब एक बड़े संघर्ष के लिए तैयार कर लिया|डॉ. एम.ए.अंसारी की अध्यक्षता में मद्रास में हुए कांग्रेस के अधिवेशन में एक प्रस्ताव पारित किया गया और पूर्ण स्वतंत्रता की प्राप्ति को भारत के लोगों का लक्ष्य घोषित किया गया|यह प्रस्ताव नेहरु द्वारा प्रस्तुत किया गया था और एस.सत्यमूर्ति ने इसका समर्थन किया था|इसी दौरान पूर्ण स्वतंत्रता की मांग को मजबूती से प्रस्तुत करने के लिए इन्डियन इंडिपेंडेंस लीग नाम के एक संगठन की स्थापना की गयी|लीग का नेतृत्व जवाहर लाल नेहरु,सुभाष चन्द्र बोस व उनके बड़े भाई शरत चन्द्र बोस,श्रीनिवास अयंगर,सत्यमूर्ति जैसे महत्वपूर्ण नेताओं ने किया|

दिसंबर 1928 में मोतीलाल नेहरु की अध्यक्षता में कलकत्ता में कांग्रेस का सम्मलेन आयोजित हुआ|इस सम्मलेन में जवाहर लाल नेहरु,सुभाष चन्द्र बोस और कई एनी नेताओं ने कांग्रेस पर पूर्ण स्वतंत्रता की मांग करने के लिए दबाव डाला|लेकिन कांग्रेस ने डोमिनियन दर्जे की मांग से सम्बंधित प्रस्ताव पारित किया जोकि पूर्ण स्वतंत्रता की तुलना में कमतर थी| लेकिन यह घोषित किया गया कि अगर एक साल के भीतर डोमिनियन का दर्जा भारत को प्रदान नहीं किया गया तो कांग्रेस पूर्ण स्वतंत्रता की मांग करेगी और उसकी प्राप्ति के लिए एक जन-आन्दोलन भी चलाएगी|1929 के पूरे साल के दौरान इन्डियन इंडिपेंडेंस लीग पूर्ण स्वतंत्रता की मांग को लेकर लोगों को रैलियों के माध्यम से तैयार करती रही|जब तक कांग्रेस का अगला वार्षिक अधिवेशन आयोजित होता तब तक लोगों की सोच में परिवर्तन आ चुका था|

#निष्कर्ष

साइमन आयोग का गठन सर जॉन साइमन के नेतृत्व में भारत में संवैधानिक प्रणाली की कार्यप्रणाली की जांच करने और उसमे बदलाव हेतु सुझाव देने के लिए किया गया था|इसका औपचारिक नाम ‘भारतीय संविधायी आयोग’ था और इसमें ब्रिटिश संसद के दो कंजरवेटिव,दो लेबर और एक लिबरल सदस्य शामिल थे|आयोग का कोई भी सदस्य भारतीय नहीं था|इसीलिए उनके भारत आगमन का स्वागत ‘साइमन वापस जाओ’ के नारे के साथ किया गया था|विरोध प्रदर्शन को शांत करने के लिए वायसराय लॉर्ड इरविन ने अक्टूबर 1929 में भारत को ‘डोमिनियन’ का दर्जा देने की घोषणा की और भविष्य के संविधान पर विचार-विमर्श करने के लिए गोलमेज सम्मेलनों को आयोजित करने की भी घोषणा की गयी|


 #आंग्ल_मैसूर_युद्ध

मैसूर राज्य तथा अंग्रेजों के मध्य हुए संघर्ष को आंग्ल-मैसूर युद्ध के नाम से जाना जाता है। 1767-1799 के बीच कुल 4 युद्ध लड़े गए और इन आंग्ल-मैसूर युद्ध के पीछे कई कारण थे जिनमें से कुछ कारण निम्न हैं-

▪️हैदर अली के उत्कर्ष से अंग्रेज उसे अपने प्रमुख प्रतिद्वन्द्वी के रूप में देखने लगे थे।
▪️अंग्रेजों और हैदर अली के मध्य संघर्ष होने का एक प्रमुख कारण यह भी था कि दोनों ही अपने क्षेत्र में वृद्धि करने को उत्सुक थे।
▪️अंग्रेजों का मराठों तथा हैदराबाद के निजाम के साथ साठ-गाँठ करना हैदर अली की आँखों में खटकता रहा।
▪️हैदर अली अंग्रेजों के कट्टर विरोधी फ्रांसीसियों की ओर अधिक आकर्षित था।
▪️हैदर अली अपनी नौ-सेना बनाना चाहता था, जिसके लिए उसने अपनी सीमाओं का विस्तार समुद्र तट तक करने का प्रयास किया। पर अंग्रेजों ने उसके हर प्रयास को असफल करा और गुन्टूर तथा माही पर अधिकार कर लिया।

#4_आंग्ल_मैसूर_युद्ध (1767-1799)

#प्रथम_आंग्ल_मैसूर_युद्ध (1767-1769)

▪️अंग्रेजों ने मराठों और हैदराबाद के निजाम के साथ मिलकर मैसूर पर हमला किया। अंग्रेजों का नेतृत्व जनरल जोसेफ स्मिथ ने किया।
▪️हैदर अली ने कूटनीति का प्रयोग कर मराठों और हैदराबाद के निजाम को अपनी तरफ मिला लिया और इस युद्ध में अंग्रेजों को बुरी तरह हराया।
▪️उसने मराठों और निजाम के साथ मिलकर मद्रास को घेर लिया। जिससे अंग्रेज बुरी तरह भयभीत हो गये और उन्होंने 4 अप्रैल, 1769 को मद्रास की संधि कर ली। संधि के तहत –
▪️अंग्रेज बंदियों को छोड़ दिया गया।
▪️दोनो एक दूसरे के क्षेत्र पर कब्जा छोड़ेंगे।
▪️अंग्रेज युद्ध के दौरान हुयी युद्ध हानि का जुर्माना भरेंगे।
▪️किसी भी विपत्ति के समय दोनों एक दूसरे का सहयोग करेंगे।

▪️परन्तु अंग्रेजों ने धोखा दिया और 1771 में जब तीसरी बार मराठों ने मैसूर पर आक्रमण किया तब अंग्रेजों ने हैदर अली की मद्द करने से इनकार कर दिया। जिस कारण हैदर अली जब तक जिया तब तक अंग्रेजों से नफरत करता रहा।

#द्वितीय_आंग्ल_मैसूर_युद्ध (1780-1784)

▪️प्रथम युद्ध की संधि केवल नाम मात्र की थी। संधि होने के बावजूद भी अंग्रेजों तथा हैदर अली के मध्य संबंध अच्छे नहीं थे। अंग्रेजों को बस अपना काम निकालना था।
▪️1773 में गवर्नर जनरल का पद शुरू हो गया था। 1780 के दौरान बंगाल का गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स था।
▪️इस युद्ध में हैदर अली ने मराठों और हैदराबाद के निजाम के साथ मिलकर अंग्रेजी सेना के साथ युद्ध किया। अंग्रेज कर्नल बेली को हराकर कर्नाटक की राजधानी अर्काट पर अधिकार कर लिया।
▪️परन्तु 7 दिसंबर 1782 में हैदर अली की मृत्यु हो गयी।
▪️इसका बेटा टीपू सुल्तान मैसूर का अलगा शासक बना, और उसने युद्ध को जारी रखा।
▪️मार्च 1784 में टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के साथ मंगलौर की संधि की और द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध का अंत हुआ।

#तृतीय_आंग्ल_मैसूर_युद्ध (1790-1792)

▪️अंग्रेजों की शासन नीति के अनुसार युद्ध के बाद होने वाली संधियाँ केवल अगले आक्रमण से पहले का आराम भर होती थी। अंग्रेजों ने इसी नियत से मंगलौर की संधि भी करी थी।
▪️1790 में लॉर्ड कॉर्नवालिस ने मराठों और निजाम के साथ मिलकर टीपू के विरूद्ध एक त्रिदलीय संगठन बना लिया।
▪️1792 को लार्ड कार्नवालिस के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना ने वैल्लौर, अम्बूर तथा बंगलौर को जीत लिया और श्रीरंगपट्टनम को घेर लिया। टीपू सुल्तान ने इसका विरोध करते हुए युद्ध जारी रखा पर अंततः जब उसने देखा कि इस युद्ध में जीत हासिल करना असंभव है तो उसने संधि कर ली। 1792 में श्रीरंगपट्टनम की संधि से तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध समाप्त हुआ –
▪️श्रीरंगपट्टनम की संधि- 1792
▪️टीपू सुल्तान को अपने प्रदेश का लगभग आधा भाग अंग्रेजों तथा उसके साथियों को देना पड़ा।
▪️टीपू सुल्तान को 3 करोड़ रुपये युद्ध हानि के रूप में भरने पड़े।

▪️श्रीरंगपट्टनम वर्तमान कर्नाटक में है।
▪️इस समय बंगाल का गवर्नर जनरल लॉर्ड कॉर्नवालिस था। इसी के नेतृत्व में ये यद्ध भी लड़ा गया था। ▪️कार्नवालिस ने अपने शब्दों में इस युद्ध की विजय को कुछ इस तरह वर्णित किया “हमने अपने शत्रु को लगभग पंगु बना दिया है तथा इसके साथ ही अपने सहयोगियों को और शक्तिशाली नहीं बनने दिया”।
▪️1796 में टीपू सुल्तान ने नौसेना बोर्ड का गठन किया।
▪️इसी वर्ष टीपू सुल्तान ने नई राइफलों की फैक्ट्री तथा फ्रांसीसी दूतावास भी स्थापित किया।

#चतुर्थ_आंग्ल_मैसूर_युद्ध (1799)

▪️अंग्रेजों का ध्यान फिर से मैसूर की तरफ आकर्षित होने लगा।
▪️तृतीय मैसूर-युद्ध के उपरान्त टीपू की शक्ति काफी कम हो चुकी थी।
▪️अंग्रेजों तथा टीपू सुल्तान के मध्य संधि भी हो चुकी थी, परन्तु टीपू सुल्तान अपनी पराजय को भूला नहीं था तथा वो अग्रेंजो से बदला लेना चाहता था।
▪️इसके चलते ही उसने यूरोप में फ्रांस की सरकार से संपर्क स्थापित किया। उसने फ्रांसीसियों को अपनी सेना में भी भर्ती किया।
▪️वेलेजली ने भारत आते ही परिस्थिति का शीघ्र ही अध्ययन कर लिया और ये समझ गया कि युद्ध अवश्यम्भावी है।
▪️वेलेजली ने युद्ध की तैयारी आरम्भ कर दी। मगर इससे पूर्व उसने निजाम तथा मराठों को अपनी तरफ मिला लिया।
▪️1799 में जब बंगाल के गवर्नर जनरल लार्ड वेलेजली ने टीपू सुल्तान के पास सहायक संधि का प्रस्ताव भेजा, जिसे टीपू सुल्तान ने अस्वीकार कर दिया। यही चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध का मुख्य कारण बना।
▪️इसी के बाद लार्ड वेलेजली ने मैसूर पर आक्रमण कर दिया और अंत में 4 मई, 1799 में चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध में लड़ते हुये ही टीपू सुल्तान की श्रीरंगपट्टनम के दुर्ग के पास मृत्यु हो गयी। और इसके साथ ही आंग्ल-मैसूर संघर्ष भी समाप्त हो गया।


#आधुनिक_भारत_का_इतिहास :
#स्वराज_दल

असहयोग आन्दोलन को वापस लेने के बाद कांग्रेस पार्टी दो भागों में बंट गयी| जब असहयोग आन्दोलन प्रारंभ हुआ था तो उस समय विधायिकाओं के बहिष्कार का निर्णय लिया गया था|चितरंजन दास,मोतीलाल नेहरु और विट्ठलभाई पटेल के नेतृत्व वाले एक गुट का मानना था की कांग्रेस को चुनाव में भाग लेना चाहिए और विधायिकाओं के अन्दर पहुँचकर उनके काम को बाधित जाना चाहिए| वल्लभभाई पटेल,सी.राजगोपालाचारी और राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व वाले गुट ने इसका विरोध किया| वे कांग्रेस को रचनात्मक कार्यों में लगाना चाहते थे|

1922 में गया में आयोजित कांग्रेस के अधिवेशन,जिसकी अध्यक्षता चितरंजन दास ने की थी,में विधायिकाओं में प्रवेश सम्बन्धी प्रस्ताव अस्वीकृत हो गया |इस प्रस्ताव के समर्थकों ने 1923 में कांग्रेस खिलाफत स्वराज पार्टी,जो स्वराज पार्टी के नाम से प्रसिद्ध हुई,की स्थापना की|1923 में अबुल कलाम आज़ाद की अध्यक्षता में दिल्ली में आयोजित कांग्रेस के विशेष अधिवेशन में कांग्रेस ने  स्वराजियों को चुनाव में भाग लेने की अनुमति प्रदान कर दी| स्वराजियों ने केंद्रीय व प्रांतीय विधायिकाओं में बड़ी संख्या में सीटें जीतीं| वृहद् स्तर की राजनीतिक गतिविधियों के अभाव के इस दौर में स्वाराजियों ने ब्रिटिश विरोधी प्रदर्शन व भावना को जीवित बनाये रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था| उन्होंने ब्रिटिश शासकों की नीतियों व प्रस्तावों का विधायिकाओं से पारित होना लगभग असंभव बना दिया |उदाहरण के लिए 1928 में एक बिल लाया गया जिसमें ब्रिटिश सरकार को यह शक्ति प्रदान करने का प्रावधान था कि वह किसी भी ऐसे गैर-भारतीय को भारत से बाहर निकाल सकती है जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का समर्थन करता हो| स्वराजियों के विरोध के कारण यह बिल पारित न हो सका| जब सरकार ने इस बिल को दोबारा पेश किया तो विट्ठलभाई पटेल,जोकि सदन के अध्यक्ष थे, ने ऐसा करने की अनुमति प्रदान नहीं की| विधायिकाओं में होने वाली बहसों,जिनमें भारतीय सदस्य प्रायः अपनी दलीलों से सरकार को मत दे देते थे,को पूरे भारत में जोश और रूचि के साथ पढ़ा जाता था|

सन 1030 में जब जन राजनीतिक संघर्ष को पुनः प्रारंभ किया तो फिर से विधायिकाओं का बहिष्कार किया जाने लगा| गाँधी जी को फरवरी 1924 में जेल से रिहा कर दिया गया और रचनात्मक कार्यक्रम,जिन्हें कांग्रेस के दोनों गुटों ने स्वीकृत किया था,कांग्रेस की प्रमुख गतिविधियाँ बन गयीं| रचनात्मक कार्यक्रमों के सबसे महत्वपूर्ण घटक खादी का प्रसार,हिन्दू-मुस्लिम एकता को बढावा और अस्पृश्यता की समाप्ति थे| किसी भी कांग्रेस समिति के सदस्य के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया की वह किसी राजनीतिक या कांग्रेस की गतिविधियों में भाग लेते समय हाथ से बुनी हुई खद्दर ही धारण करे और प्रति माह 2000 यार्ड सूत की बुनाई करे| अखिल भारतीय बुनकर संघ की स्थापना की गयी और पूरे देश में खद्दर भंडारों खोले गए| गाँधी जी खादी को गरीबों को उनकी निर्धनता से मुक्ति का और देश की आर्थिक समृद्धि का प्रमुख साधन मानते थे| इसने लाखों लोगों को आजीविका के अवसर प्रदान किये और स्वतंत्रता संघर्ष के सन्देश को देश के कोने-कोने तक पहुँचाया,विशेषकर ग्रामीण भागों में| इसने आम आदमी को कांग्रेस के साथ जोड़ा और आम जनता के उत्थान को कांग्रेस के कार्यों का अभिन्न अंग बना दिया| चरखा स्वतंत्रता संघर्ष का प्रतीक बन गया|

असहयोग आन्दोलन को वापस लेने के बाद देश के कुछ भागों में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए |स्वतंत्रता संघर्ष को जारी रखने और लोगों की एकता को बनाये रखने और मजबूत करने के लिए साम्प्रदायिकता के जहर से लड़ना जरुरी था| गाँधी जी का छुआछुत/अस्पृश्यता विरोधी कार्यक्रम भारतीय समाज की सबसे भयंकर बुराई को समाप्त करने और समाज के दलित वर्ग को स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ने के लिए बहुत महत्वपूर्ण था|


#हैदर_अली_का_उत्कर्ष

हैदर अली का जन्म 1721 में बुढ़ीकोटा (कर्नाटक) में हुआ था। हैदर अली के पिता का नाम फतेह महोम्मद था और वह मैसूर राज्य की सेना में फौजदार थे। मैसूर का वास्तविक संस्थापक हैदर अली को कहा जाता है। हैदर अली 1761 में वह मैसूर का शासक बना।

▪️जब मैसूर का राजा चिपका कृष्णराज था, तब उसके समय में सत्ता को धोखे से हथियाने की प्रथा चालू हो गयी।
▪️1732 में मैसूर पर 2 भाईयों देवराज और नंद राज का शासन था। जो पहले राजा चिपका कृष्णराज के मंत्री थे।
▪️हैदर अली इनकी ही सेना में सैनिक था।
▪️हैदर अली के पूर्वज दिल्ली प्रदेश के मूल निवासी थे। जोकि बाद में दक्षिण की ओर पलायन कर गए।
▪️सन 1728 ई० में पिता के देहांत के बाद हैदर अली को अनेक प्रारम्भिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। ▪️यही एक प्रमुख कारण था कि हैदर की शिक्षा की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया और वो आजीवन अशिक्षित ही रहा। परन्तु इन चुनौतियों ने उसे दृढ़ निश्चयी, उत्साही, प्रखर बुद्धी और वीर योद्धा बनाया।
▪️हैदर अली की बहादुरी से प्रसन्न होकर नंदराज ने उसे 1755 में डिंडीगुल (तमिलनाडू) का फौजदार (मिलट्री कमाण्डर) बना दिया गया।
▪️ड़िडीगुल में ही हैदर अली ने फ्रांसीसियों की सहायता से शस्त्रागार स्थापित किया। अपने सैनिकों को फ्रांसीसी सेनापतियों से प्रशिक्षण दिलवाया।
▪️1759 में मराठों ने मैसूर पर आक्रमण किया तब हैदर अली ने ही मैसूर को सुरक्षित बचाया।
▪️इस विजय से खुश होकर नंदराज ने हैदर अली को मुख्य सेनापति नियुक्त कर दिया।
▪️कुछ समय उपरान्त उसे नंदराज के साथ त्रिचनापल्ली के घेरे में कार्य करने का अवसर मिला। इस अभियान में उसने अंग्रेजों की एक सैनिक टुकड़ी से बहुत सी बन्दूकें तथा भारी मात्रा में गोलाबारूद छीन लिया, इसके परिणामस्वरूप इसकी सैन्य शक्ति में असाधारण वृद्धि हो गई।
▪️1760 में सेनापति हैदर अली ने नंदराज की हत्या करके सारा शासन अपने कब्जे में कर लिया।
▪️तब जाकर 1761 में हैदर अली मैसूर का वास्तविक शासक बना।
▪️हैदर अली एक योग्य सुलतान था। सत्ता हाथ में आते ही अपने राज्य का विस्तार किया।
▪️उसने 1763 में बंदनूर पर अधिकर कर उसका नाम बदल कर हैदराबाद रखा। इसके अतिरिक्त सुण्डा, सेरा, कनारा, रायदुर्ग आदि पर भी अधिकार कर लिया।
▪️कालीकट, कोचीन तथा पालघाट के राजाओं को भी अपनी अधीनता स्वीकार करने पर विवश किया।
▪️हैदर अली ने श्रीरंगपटनम को अपनी राजधानी बनाया।
▪️उसके राज्य विस्तार से निकटवर्ती राज्य (ब्रिटिशर, निजाम और मराठे) भयभीत हो गये। ये सभी हैदरअली को अपना प्रबल प्रतिद्वंद्वी मानने लगे।
▪️मराठों ने माधव राव प्रथम के नेतृत्व में मैसूर पर 3 बार आक्रमण किया। तीनों ही युद्धों में हैदर अली को हार का सामना करना पड़ा। इन युद्धों में मराठों ने हैदर अली से धन और राज्य का कुछ भाग अपने अधिकार में कर लिया।

▪️पहला आक्रमण-1764
▪️दूसरा आक्रमण- 1766
▪️तीसरा आक्रमण- 1771

▪️1772 में माधवराव की मृत्यु उपरान्त हैदर अली ने 1774 से 1776 तक मराठों से संघर्ष कर अपने हारे हुए क्षेत्र को दुबारा प्राप्त कर लिया।
▪️अंग्रेजों ने भी मराठों की तरह ही मैसूर पर आक्रमण किया। इस संघर्ष में कुल 4 युद्ध लड़े गये थे। इन युद्धों को आंग्ल-मैसूर युद्ध के नाम से जाना जाता है तथा ये सभी युद्ध 1767 से 1799 के बीच में लड़े गये।

▪️प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध (1767-1769)
▪️द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध (1780-1784)
▪️तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध (1790-1792)
▪️चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध (1799)

▪️द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध के दौरान ही हैदर अली की मृत्यु हो गयी और अगला शासक उसका पुत्र टीपू सुल्तान बना।
▪️टीपू सुल्तान ने ही तृतीय और चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध लड़े और चतुर्थ संघर्ष के दौरान ही इसकी भी मृत्यु हो गयी। और इसके साथ ही मैसूर को ब्रिटिश शासन के अधीन ले लिया गया।


#आधुनिक_भारत_का_इतिहास :
#मुडीमैन_समिति_1924

भारतीय नेताओं की मांगों को पूरा करने और 1920 के दशक के आरंभिक वर्षों में स्वराज पार्टी द्वारा स्वीकृत किये गए प्रस्ताव को ध्यान में रखते हुए ब्रिटिश सरकार ने सर अलेक्जेंडर मुडीनमैन की अध्यक्षता में एक समिति,जिसे मुडीनमैन समिति के नाम से भी जाना जाता है,गठित की| समिति में ब्रिटिशों के अतिरिक्त चार भारतीय सदस्य भी शामिल थे| भारतीय सदस्यों में निम्नलिखित शामिल थे-

a. सर शिवास्वामी अय्यर,

b. डॉ.आर.पी.परांजपे,

c. सर तेज बहादुर सप्रे

d. मोहम्मद अली जिन्ना

इस समिति के गठन के पीछे का कारण भारतीय परिषद् अधिनियम,1919 के तहत 1921 में स्थापित संविधान और द्वैध शासन प्रणाली की कामकाज की समीक्षा करना था| इस समिति की रिपोर्ट को 1925 में प्रस्तुत किया गया जो दो भागों में विभाजित थी-अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक रिपोर्ट|

• बहुसंख्यक/बहुमत रिपोर्ट: इसमें सरकारी कर्मचारी और निष्ठावान लोग शामिल थे| इन्होने घोषित किया कि द्वैध शासन स्थापित नहीं हो सका है | उनका यह भी मानना था कि प्रणाली को सही तरह से मौका नहीं दिया गया है अतः केवल छोटे-मोटे बदलावों की अनुशंसा की|

• अल्पसंख्यक/अल्पमत रिपोर्ट: इसमें केवल गैर-सरकारी भारतीय शामिल थे | इसका मानना था कि 1919 का एक्ट असफल साबित हुआ है| इसमें यह भी बताया गया कि स्थायी और भविष्य की प्रगति को स्वयं प्रेरित करने वाले संविधान में क्या क्या शामिल होना चाहिए|

अतः इस समिति ने शाही आयोग/रॉयल कमीशन की नियुक्ति की सिफारिश की| भारत सचिव लॉर्ड बिर्केनहेड ने कहा कि बहुमत/बहुसंख्यक की रिपोर्ट के आधार पर कदम उठाये जायेंगे|

सौर मण्डल Special

सौर_मण्डल...

सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने वाले ग्रहों, उपग्रहों, धूमकेतुओं, क्षुद्रग्रहों तथा अन्य अनेक आकाशीय पिण्डों के समूह या परिवार को सौरमण्डल कहते हैं। कोई भी ग्रह एक विशाल, ठंडा खगोलीय पिण्ड होता है जो एकनिश्चित कक्षा में अपने सूर्य की परिक्रमा करता है। सूर्य हमारे सौरमण्डल का केंद्र है, जिसके चारों ओर ग्रह- बुध, शुक्र, मंगल, पृथ्वी, बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेप्च्यून चक्कर लगाते हैं। अधिकतर ग्रहों के उपग्रह भी होते हैं जो अपने ग्रहों की परिक्रमा करते हैं। दो वर्ष पूर्व प्लूटो से ग्रह का दर्जा छीन लिया गया था, जिसकी वजह से अब हमारे सौर मण्डल में मात्र 8 ही ग्रह रह गये हैं। हमारे सौरमण्डल के ग्रहों का विभाजन आंतरिक ग्रहों और बाह्य ग्रहों के रूप में किया गया है। आंतरिक ग्रह हैं- बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल। आंतरिक ग्रहों का निर्माण धात्विक तत्वों एवँ कठोर पाषाणों से हुआ है। इन ग्रहों का घनत्व अत्यन्त उच्च होता है। इसमें पृथ्वी सबसे बड़ा ग्रह है। बाह्य ग्रह-बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेप्च्यून अत्यन्त विशाल हैं। इनका निर्माण प्राय: हाइड्र्रोजन व हीलियम गैसों से हुआ है। ये सभी ग्रह अत्यन्त द्रुतगति से घूमते हैं।

#सूर्य ▪️

सूर्य अन्य तारों की भांति गर्म गैस का गोला है और सौरमण्डल का केंद्र है। यद्यपि सूर्य अन्य तारों की तुलना में औसत आकार का बताया जाता है, किंतु 'मिल्की वे आकाशगंगा के 80 प्रतिशत तारों की तुलना में सूर्य का द्रव्यमान और चमक ज्यादा है। इसके गर्भ में स्थित हाइड्रोजन गैस सदैव हीलियम गैस में परिवर्तित होती रहती है। इस प्रक्रिया की वजह से सूर्य से प्रकाश एवँ ऊर्जा का उत्सर्जन होता है। सूर्य का 95 प्रतिशत हिस्सा हाइड्रोजन से निर्मित है। इसके केंद्र में हीलियम का एक क्रोड स्थित है। इस क्रोड के चारों ओर प्रत्येक सेकेण्ड सूर्य का 40 लाख टन पदार्थ ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है। सूर्य में नाभिकीय संलयन से प्रत्येक सेकेण्ड 60 करोड़ टन हाइड्रोजन हीलियम गैस में परिवर्तित हो जाता है। यह प्रक्रिया अगले  5 अरब वर्षों तक चलती रहेगी। पृथ्वी की भांति सूर्य के भी कई स्तर होते हैं। पृथ्वी से दिखाई देने वाले भाग को सूर्यमण्डल कहते हैं। सूर्यमण्डल का ऊपरी भाग जो गुलाबी गैसों का बना है, को वर्णमण्डल कहते हैं। यह सदैव एक स्थिर गति में रहता है। अक्सर वर्णमण्डल से 100,000 मील लम्बी सौर अग्नि निकलती है। वर्णमण्डल के ऊपर एक विशाल आभामंडल होता है, इसे सिर्फ सूर्यग्रहण के समय देखा जा सकता है। इसे परिमंडल कहते हैं।

#बुध▪️

बुध सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह है।  यह भी एक तथ्य है कि बुध के तापमान में काफी विविधता रहती है। जहाँ इसके सूर्य प्रकाशित भाग का तापमान 450°से. होता है वहीं अंधेरे भाग का तापमान -1800°से.तक गिर जाता है। बुध, सूर्य की परिक्रमा 88 दिनों में 30 मील/सेकेंड की रफ्तार से करता है। बुध के रात व दिन काफी लम्बे होते हैं। यह अपने अक्ष पर एक परिक्रमण 59 दिनों में पूरा करता है।

#शुक्र ▪️

शुक्र के वायुमंडल के मुख्य अवयव कार्बन डाईऑक्साइड और नाइट्रोजन हैं जो क्रमश: 95 एवं 2.5 प्रतिशत हैं। शुक्र के वायुमंडल का निर्माण घने बादलों से हुआ है। इन बादलों में सल्फ्यूरिक अम्ल एवँ जल के कण पाये जाते हैं। शुक्र के रात-दिन के तापमान में अंतर नहीं होता है। यह ग्रह सूर्य एवं चंद्रमा के बाद सौरमण्डल का सबसे चमकीला खगोलीय पिण्ड है।
यह 224.7 दिनों में सूर्य का एक परिक्रमण करता है। सोवियत अंतरिक्षयान 'बेनेरा 3 शुक्र की सतह पर उतरने वाला प्रथम मानव निर्मित उपग्रह बना। सन् 1989 में भेजे गए 'मैगेलान नामक अंतरिक्षयान ने शुक्र पर 1600 ज्वालामुखियों का पता लगाया और यहाँ की ऊंची पहाडिय़ों के भी चित्र लिए।

#पृथ्वी ▪️

पृथ्वी के वायुमंडल का निर्माण 79 प्रतिशत नाइट्रोजन, 21 प्रतिशत ऑक्सीजन, 1 प्रतिशत जल एवँ 0.3 प्रतिशत ऑर्गन से हुआ है। पृथ्वी, सूर्य से तीसरा ग्रह है और यह सौरमंडल का अकेला ऐसा ग्रह है, जहां जीवन की उपस्थिति है। अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी नीले-सफेद रंग के गोले के रूप में दिखाई देती है। पृथ्वी की सूर्य से माध्य दूरी 9.3 करोड़ मील है। यह सूर्य की परिक्रमा 67,000 मील प्रति घण्टे की रफ्तार से करती हुई एक परिक्रमा पूरी करने में 365 दिन, 5 घण्टे, 48 मिनट और 45.51 सेकेण्ड का समय लेती है। अपनी धुरी पर एक परिक्रमण 23 घण्टे, 56 मिनट और 4.09 सेकेण्ड में पूरा करती है। पृथ्वी पूर्णतया गोलाकार नहीं है। इसका विषुवत रेखा पर व्यास 9,727 मील और ध्रुवों पर व्यास इससे कुछ कम है।
इसका अनुमानित द्रव्यमान 6.6 सेक्सटिलियन टन है एवँ औसत घनत्व 5.52 ग्राम प्रति घन सेमी. है। पृथ्वी का क्षेत्रफल 196,949,970 मील है। जिसका 3/4 भाग जल है।
हाल की खोजों में वैज्ञानिकों को ज्ञात हुआ कि पृथ्वी का क्रोड पूर्णतया गोलाकार नहीं है। पृथ्वी के क्रोड के एक्स-रे चित्रों से ज्ञात होता है कि वहाँ 6.7 मील ऊँचे पर्वत एवँ इतनी ही गहरी घाटियाँ मौजूद हैं।

#मंगल ▪️

मंगल के वायुमंडल में 95 प्रतिशत कार्बन डाईऑक्साइड, 3 प्रतिशत नाइट्रोजन, 2 प्रतिशत ऑर्गन गैस पाई जाती हैं। मिट्टी में आयरन ऑक्साइड होने की वजह से यह ग्रह लाल रंग का दिखाई देता है।मंगल का एक दिन 24 घण्टे 37 मिनट के बराबर होता है। यह पृथ्वी के एक दिन के लगभग बराबर है। किंतु इसका एक वर्ष लगभग 686 दिनों का होता है। मंगल अत्यन्त ठंडा ग्रह है जिसका औसत तापमान -90°से. से -230°से. तक होता है। मंगल का वायुमंडल अत्यन्त विरल है। मंगल पर अक्सर धूल भरी आंधियाँ चलती हैं। मंगल ग्रह का सबसे विस्मयकारी तथ्य है कि यहाँ कभी महासागर स्थित थे और यहां का  वायुमंडल काफी घना था। इस वायुमंडल की उपस्थिति का कारण ज्वालामुखियों से निकलने वाली गैसें रही होंगी। इस वायुमण्डल के कारण इसकी सतह पर जल उपस्थित रहा होगा। अंतरिक्षयान 'पाथफाइंडर द्वारा भेजे गए चित्रों से ज्ञात हुआ है कि करोड़ों वर्ष पूर्व मंगल पर जल अत्याधिक मात्रा में पाया जाता था। नासा के 'मार्स ग्लोबल सर्वेयर ने मंगल की विषुवत रेखा के निकट प्राचीन पनतापीय प्रणाली के स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत किए हैं।

#बृहस्पति ▪️

बृहस्पति के वायुमंडल का निर्माण 89 प्रतिशत आणविक हाइड्रोजन और 11 प्रतिशत हीलियम से हुआ है। बृहस्पति सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। इसका द्रव्यमान सौरमंडल के अन्य सभी ग्रहों के कुल द्रव्यमान से 2.5 गुना अधिक है। इसमें 1300 पृथ्वी समा सकती हैं। यह अपनी धुरी पर एक चक्कर अत्यन्त तीव्र गति से 9 घण्टे 55 मिनट में पूरा करता है। सूर्य की परिक्रमा यह लगभग 12 वर्षों में पूरी करता है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह इतना विशाल ग्रह है कि तारा बन सकता था। 'वॉयजर 1 नामक अंतरिक्षयान से भेजे गए चित्रों से एक महत्वपूर्ण जानकारी यह प्राप्त हुई कि शनि की भांति बृहस्पति का भी एक छल्ला है जो उसकी सतह से 300,000 किमी. दूरी तक फैला है।  वैज्ञानिकों के अनुसार इसके उपग्रह 'यूरोपा की बर्फीली सतह के नीचे मौजूद पानी जीवन का पोषक हो सकता है।हमारे सौरमण्डल में संभवत: सबसे बड़ी संरचना बृहस्पति का चुम्बकीयमंडल है। यह अंतरिक्ष का वह क्षेत्र है, जहाँ बृहस्पति का चुम्बकीय क्षेत्र स्थित है। बृहस्पति के अभी तक खोजे गए 61 उपग्रहों में से 21 उपग्रहों की खोज 2003 में की गई। इसके चार मुख्य चंद्रमाओं- इयो, यूरोपा, गैनीमीड और कैलिस्टो की खोज गैलीलियो ने 1610 में की थी।

#शनि▪️

शनि सौरमण्डल का छठवाँ एवँ बृहस्पति के पश्चात् सबसे विशाल ग्रह है। बृहस्पति की भांति ही शनि का निर्माण हाइड्रोजन, हीलियम एवँ अन्य गैसों से हुआ है। सौरमण्डल का दूसरा सबसे विशाल ग्रह होने के बावजूद इसका द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का 95 गुना है और घनत्व 0.70 ग्राम प्रति घन सेमी. है। शनि की उच्च चक्रण गति (प्रत्येक 10 घण्टे, 12 मिनट में एक) उसे सभी ग्रहों में सबसे ज्यादा चपटा बनाते हैं। वॉयजर 1 अंतरिक्षयान ने शनि के छल्लों की सँख्या 1,000 निर्धारित की थी। लेकिन अब इसके छल्लों की सँख्या एक लाख निर्धारित की गई है। इन छल्लों का निर्माण बर्फ के कणों से हुआ है। अभी तक शनि के 31 ज्ञात उपग्रह हैं। इसका सबसे बड़ा उपग्रह 'टाइटन है। यह सौरमण्डल का ऐसा अकेला उपग्रह है जिस पर वायुमंडल की उपस्थिति है।

#यूरेनस▪️

यूरेनस की खोज 1781 ई. में सर विलियम हर्शेल ने की थी। इसकी सूर्य से माध्य दूरी 286.9 करोड़ किमी. है। यह अपनी धुरी पर 970 पर झुका हुआ है और इसके इस अप्रत्याशित झुकाव की वजह से ध्रुवीय क्षेत्रों को एक वर्ष के दौरान अधिक सूर्य की किरणें मिलती हैं। एक यूरेनस वर्ष 84 पृथ्वी वर्षों के बराबर होता है। मीथेन की उपस्थिति की वजह से ग्रह का रंग हल्का हरा है। यह एकमात्र ऐसा ग्रह है जो एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक अपनी प्रदक्षिणा कक्षा में लगातार सूर्य के सामने रहता है।

#नेप्च्यून ▪️

नेप्च्यून, सूर्य से औसतन 2.8 अरब मील की दूरी पर स्थित है और 165 वर्षों में सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करता है। नेप्च्यून सौरमंडल का आठवाँ ग्रह है। इसके वायुमंडल के मुख्य अवयव हाइड्रोजन और हीलियम हैं। वायुमंडल में मीथेन की उपस्थिति की वजह से इसका रंग हल्का नीला है। अभी तक नेप्च्यून के 11 ज्ञात चंद्रमा हैं। ट्राइटन इसका सबसे बड़ा उपग्रह है। ट्राइटन की विशेषता है कि यह नेप्च्यून की दिशा के विपरीत परिक्रमण करता है। 'वॉयजर 2 ने  नेप्च्यून पर कई काले धब्बे पाए थे।इसमें से सबसे बड़ा धब्बा पृथ्वी के आकार का है।

#चंद्रमा ▪️

चंद्रमा पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है। इसका व्यास पृथ्वी के व्यास का 1/4 है। (2,160 मील या 3,476 किमी. है)। इसकी  गुरूत्वाकर्षण शक्ति पृथ्वी की गुरूत्वाकर्षण शक्ति के छठवें भाग के बराबर है। चंद्रमा द्वारा पृथ्वी का परिक्रमा पथ वृत्ताकार न होकर अंडाकार है। चंद्रमा, पृथ्वी की परिक्रमा 27.3 दिन में पूरी करता है। चंद्रमा पर वायुमंडल की उपस्थिति नहीं है, क्योंकि इसका क्षीण गुरूत्वाकर्षण बल वायुमंडल के निर्माण में असमर्थ है। जनवरी 1998 में प्रक्षेपित किए गए 'लूनर प्रॉस्पेक्टरÓ  अंतरिक्षयान द्वारा भेजे गए चित्रों से ज्ञात होता है कि चंद्रमा के ध्रुवों के विशाल गढ्ढों में लगभग 3 अरब मीट्रिक टन बर्फ दबी हुई है। यह जल संभवत: धूमकेतु के चंद्रमा की सतह पर टकराने की वजह से उत्पन्न हुआ होगा।


1. सूर्य से ग्रह की दूरी को क्या कहा जाता है?
*-- उपसौर*

2.  सूर्य के धरातल का तापमान लगभग कितना है?
*-- 6000°C*

3. मध्य रात्रि का सूर्य किस क्षेत्र में दिखाई देता है?
*-- आर्कटिक क्षेत्र में*

4. सूर्य के रासायनिक संगठन में हाइड्रोजन का % कितना है?
*-- 71%*

5. कौन-सा ग्रह सूर्य के सबसे निकट है?
*-- बुध*

6. बुध ग्रह सूर्य का एक चक्कर लगाने में कितना समय लेता है?
*-- 88 दिन*

7. सूर्य से सबसे दूर कौन-सा ग्रह है?
*-- वरुण*

8. कौन-से ग्रह जिनके उपग्रह नहीं हैं?
*-- बुध व शुक्र*

9. कौन-सा ग्रह सूर्य का चक्कर सबसे कम समय में लगाता है?
*--  बुध*

10.  किस ग्रह को पृथ्वी की बहन कहा जाता है?
*-- शुक्र*

11. किस ग्रह पर जीव रहते हैं?
*-- पृथ्वी*
12. पृथ्वी का उपग्रह कौन ह?
*-- चंद्रमा*

13. पृथ्वी अपने अक्ष पर एक चक्कर कितने दिन में लगाती है?
*-- 365 दिन 5 घंटा 48 मिनटर 46 सेकेंड*

14.  पृथ्वी को नीला ग्रह क्यो कहा जाता है?
*-- जल की उपस्थिति के कारण*

15.  किस उपग्रह को जीवाश्म ग्रह कहा जाता है?
*-- चंद्रमा को*


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Monday, June 8, 2020

इंडियन सिविल सर्विस की जानकारी

इंडियन सिविल सर्विस  की जानकारी

_*🎤आखिर हम सिविल सेवक के रूप में अपना कॅरियर क्यों चुनना चाहते हैं-* क्या सिर्फ देश सेवा के लिये? वो तो अन्य रूपों में भी की जा सकती है। या फिर सिर्फ पैसों के लिये? लेकिन इससे अधिक वेतन तो अन्य नौकरियों एवं व्यवसायों में मिल सकता है। फिर ऐसी क्या वजह है कि सिविल सेवा हमें इतना आकर्षित करती है? आइये, अब हम आपको सिविल सेवा की कुछ खूबियों से अवगत कराते हैं जो इसे आकर्षण का केंद्र बनाती है

_🎤यदि हम एक सिविल सेवक बनना चाहते हैं तो स्वाभाविक है कि हम ये भी जानें कि एक सिविल सेवक बनकर हम क्या-क्या कर सकते हैं? इस परीक्षा को पास करके हम किन-किन पदों पर नियुक्त होते हैं? हमारे पास क्या अधिकार होंगे? हमें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा? इसमें हमारी भूमिका क्या और कितनी परिवर्तनशील होगी इत्यादि।_

_🎤अगर शासन व्यवस्था के स्तर पर देखें तो कार्यपालिका के महत्त्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन सिविल सेवकों के माध्यम से ही होता है। वस्तुतः औपनिवेशिक काल से ही सिविल सेवा को इस्पाती ढाँचे के रूप में देखा जाता रहा है। हालाँकि, स्वतंत्रता प्राप्ति के लगभग 70 साल पूरे होने को हैं, तथापि इसकी महत्ता ज्यों की त्यों बनी हुई है, लेकिन इसमें कुछ संरचनात्मक बदलाव अवश्य आए हैं।_

_🎤पहले, जहाँ यह नियंत्रक की भूमिका में थी, वहीं अब इसकी भूमिका कल्याणकारी राज्य के अभिकर्ता (Procurator) के रूप में तब्दील हो गई है, जिसके मूल में देश और व्यक्ति का विकास निहित है।_

_🎤आज सिविल सेवकों के पास कार्य करने की व्यापक शक्तियाँ हैं, जिस कारण कई बार उनकी आलोचना भी की जाती है। लेकिन, यदि इस शक्ति का सही से इस्तेमाल किया जाए तो वह देश की दशा और दिशा दोनों बदल सकता है। यही वजह है कि बड़े बदलाव या कुछ अच्छा कर गुज़रने की चाह रखने वाले युवा इस नौकरी की ओर आकर्षित होते हैं और इस बड़ी भूमिका में खुद को शामिल करने के लिये सिविल सेवा परीक्षा में सम्मिलित होते हैं।_

_🎤यह एकमात्र ऐसी परीक्षा है जिसमें सफल होने के बाद विभिन्न क्षेत्रों में प्रशासन के उच्च पदों पर आसीन होने और नीति-निर्माण में प्रभावी भूमिका निभाने का मौका मिलता है।_

_🎤इसमें  केवल आकर्षक वेतन, पद की सुरक्षा, कार्य क्षेत्र का वैविध्य और अन्य तमाम प्रकार की सुविधाएँ ही नहीं मिलती हैं बल्कि देश के प्रशासन में शीर्ष पर पहुँचने के अवसर के साथ-साथ उच्च सामाजिक प्रतिष्ठा भी मिलती है।_

_🎤हमें आए दिन ऐसे आईएएस, आईपीएस अधिकारियों के बारे में पढ़ने-सुनने को मिलता है, जिन्होंने अपने ज़िले या किसी अन्य क्षेत्र में कमाल का काम किया हो। इस कमाल के पीछे उनकी व्यक्तिगत मेहनत तो होती ही है, साथ ही इसमें बड़ा योगदान इस सेवा की प्रकृति का भी है जो उन्हें ढेर सारे विकल्प और उन विकल्पों पर सफलतापूर्वक कार्य करने का अवसर प्रदान करती है।_

_🎤नीति-निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने के कारण ही सिविल सेवक नीतिगत सुधारों को मूर्त रूप प्रदान कर पाते हैं।_

_ 🎤ऐसे अनेक सिविल सेवक हैं जिनके कार्य हमारे लिये प्रेरणास्रोत के समान हैं। जैसे- एक आईएएस अधिकारी  एस.आर. शंकरण जीवनभर बंधुआ मज़दूरी के खिलाफ लड़ते रहे तथा उन्हीं के प्रयासों से “बंधुआ श्रम व्यवस्था (उन्मूलन) अधिनियम,1976” जैसा कानून बना। इसी तरह बी.डी. शर्मा जैसे आईएएस अधिकारी ने पूरी संवेदनशीलता के साथ नक्सलवाद की समस्या को सुलझाने का प्रयास किया तथा आदिवासी इलाकों में सफलतापूर्वक कई गतिशील योजनाओं को संचालित कर खासे लोकप्रिय हुए। इसी तरह, अनिल बोर्डिया जैसे आईएएस अधिकारी ने शिक्षा के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण काम किया। ऐसे अनेक उदाहरण हैं जिनमें इस सेवा के अंतर्गत ही अनेक महान कार्य करने के अवसर प्राप्त हुए, जिसके कारण यह सेवा अभ्यर्थियों को काफी आकर्षित करती है।_

_🎤स्थायित्व, सम्मान एवं कार्य करने की व्यापक, अनुकूल एवं मनोचित दशाओं इत्यादि का बेहतर मंच उपलब्ध कराने के कारण ये सेवाएँ अभ्यर्थियों एवं समाज के बीच सदैव प्राथमिकता एवं प्रतिष्ठा की विषयवस्तु रही हैं।_

 🎤कुल मिलाकर, सिविल सेवा में जाने के बाद हमारे पास आगे बढ़ने और देश को आगे बढ़ाने के _अनेक अवसर होते हैं। सबसे बढ़कर हम एक साथ कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रबंधन जैसे_ _विभिन्न क्षेत्रों के विकास में योगदान कर सकते हैं जो किसी अन्य सार्वजनिक क्षेत्र में शायद ही सम्भव है।_
         *🧘‍♂🏇UPSC Dream🚨🚔*

Some Most Questions of Bioscience

Some Questions of Bioscience...

• मनुष्य का वैज्ञानिक नाम क्या है?- होमो सैपियंस
• मेढक का वैज्ञानिक नाम क्या है?- राना टिग्रिना
• बिल्ली का वैज्ञानिक नाम क्या है?- फेलिस डोमेस्टिका
• चूहा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- Rattus
छिपकली का वैज्ञानिक नाम क्या है?- Lacertilia
• कुत्ता का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कैनिस फैमिलियर्स
• गाय का वैज्ञानिक नाम क्या है?- बॉस इंडिकस
• भैँस का वैज्ञानिक नाम क्या है?- बुबालस बुबालिस
• बैल का वैज्ञानिक नाम क्या है?- बॉस प्रिमिजिनियस टारस
• बकरी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- केप्टा हिटमस
• भेँड़ का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ओवीज अराइज
• सुअर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- सुसस्फ्रोका डोमेस्टिका
• शेर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पैँथरा लियो
• बाघ का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पैँथरा टाइग्रिस
• चीता का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पैँथरा पार्डुस
• भालू का वैज्ञानिक नाम क्या है?- उर्सुस मैटिटिमस कार्नीवेरा
• खरगोश का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ऑरिक्टोलेगस कुनिकुलस
• हिरण का वैज्ञानिक नाम क्या है?- सर्वस एलाफस
• ऊँट का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कैमेलस डोमेडेरियस
• लोमडी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कैनीडे
• लंगूर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- होमिनोडिया
• बारहसिंगा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- रुसर्वस डुवाउसेली
• मक्खी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- मस्का डोमेस्टिका
• मोर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पैवो क्रिस्टेटस
• हाथी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- एफिलास इंडिका
• डॉल्फिन का वैज्ञानिक नाम क्या है?- प्लैटिनिस्ट गैंगेटिका
• घोड़ा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ईक्वस कैबेलस
• गधा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- इक्विस असिनस
• आम का वैज्ञानिक नाम क्या है?- मैग्नीफेरा इंडिका
• अंगुर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- विटियस
• संतरा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- साइट्रस सीनेन्सिस
• नारियल का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कोको न्यूसीफेरा
• सेब का वैज्ञानिक नाम क्या है?- मेलस प्यूमिया/डोमेस्टिका
• अनानास का वैज्ञानिक नाम क्या है?- आननास कॉमोजस
• पपीता का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कैरीका पपीता
• नाशपाती का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पाइरस क्यूमिनिस
• केला का वैज्ञानिक नाम क्या है?- म्यूजा पेराडिसिएका
• लीची का वैज्ञानिक नाम क्या है?- लीची चिन्नीसिस
• इमली का वैज्ञानिक नाम क्या है?- तामार इंडस इंडिका
• खीरा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कुसुमिस सैटिवस
• बेर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ज़िज़ीफस मौरीतियाना
• चुकंदर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- बीटा वाल्गारिस
• जामुन का वैज्ञानिक नाम क्या है?- शायजियम क्यूमिनी
• गन्ना का वैज्ञानिक नाम क्या है?- सुगरेन्स औफिसीनेरम
• मक्का का वैज्ञानिक नाम क्या है?- जिया मेज
• बाजरा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पेनिसिटम अमेरीकोनम
• धान का वैज्ञानिक नाम क्या है?- औरिजया सैटिवाट
• गेहूँ का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ट्रिक्टिकम एस्टिवियम
• कपास का वैज्ञानिक नाम क्या है?- गैसीपीयम
• सरसोँ का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ब्रेसिका कम्पेस्टरीज
• कॉफी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कॉफिया अरेबिका
• चाय का वैज्ञानिक नाम क्या है?- थिया साइनेनिसस
• तुलसी का वैज्ञानिक नाम क्या हैं?- ऑक्सीमेन्ट टेन्यूफ़्लोरम
• एलोविरा का वैज्ञानिक नाम क्या हैं?- एलोविरा
• अफीम का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पपवर सोम्निफेरुम
• काजू का वैज्ञानिक नाम क्या है?- एनाकार्डियम अरोमैटिकम
• बादाम का वैज्ञानिक नाम क्या है?- प्रुनस अरमेनिका
• मुंगफली का वैज्ञानिक नाम क्या है?- एरैकिस हाइजोपिया
• लालमिर्च का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कैप्सियम एनुअम
• कालीमिर्च का वैज्ञानिक नाम क्या है?- पाइपर नाइग्रम
• केसर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- क्रोकस सैटिवियस
• सौफ (Fennel) का वैज्ञानिक नाम क्या है?- फ़ीनिकुलम वल्गेरे
• जीरा का वैज्ञानिक नाम क्या है?- क्यूमीनियम सिमिनियम
• हल्दी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कुरकुमा लोँगा
• नीबू का वैज्ञानिक नाम क्या है?- साइट्रस लिंबोन
• आंवला(gooseberry) का वैज्ञानिक नाम क्या है?- फ़िलेन्थस इम्ब्लिका
• धनिया का वैज्ञानिक नाम क्या है?- कोरियेंडम सटिवुम
• टमाटर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- लाइकोप्रेसिकन एस्कुलेँटम
• पालक का वैज्ञानिक नाम क्या है?- स्पिनिया ओलेरसाइए
• बैगन का वैज्ञानिक नाम क्या है?- एकोनिटियम हेटरोफिलम
• फूलगोभी का वैज्ञानिक नाम क्या है?- ब्रासिका औलिरेशिया
• अदरक का वैज्ञानिक नाम क्या है?- जिँजिबर ऑफिसिनेल
• लहसून का वैज्ञानिक नाम क्या है?- एलियम सेराइवन
• गाजर का वैज्ञानिक नाम क्या है?- डाकस कैरोटा
• मूली का वैज्ञानिक नाम क्या है?- रेफेनस सैटाइविस

Sunday, June 7, 2020

Some SPECIAL आयोग & योजना

Some  SPECIAL आयोग & योजना

😎 नीति आयोग 👉1 जनवरी 2015
😎ह्रदय योजना👉 21 जनवरी 2015
😎बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं 👉22 जनवरी 2015
😎सुकन्या समृद्धि योजना 👉22 जनवरी 2015
😎मुद्रा बैंक योजना 👉8 अप्रैल 2015
😎प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना 👉9 मई 2015
😎अटल पेंशन योजना👉 9 मई 2015
😎प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना 👉9 मई 2015
😎उस्ताद योजना (USTAD) 👉14 मई 2015
😎प्रधानमंत्री आवास योजना 👉25 जून 2015
😎अमरुत योजना(AMRUT)👉 25 जून 2015
😎स्मार्ट सिटी योजना 👉25 जून 2015
😎डिजिटल इंडिया मिशन👉 1 जुलाई 2015
😎स्किल इंडिया मिशन 👉15 जुलाई 2015
😎दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना 👉25 जुलाई 2015
😎नई मंजिल 👉8 अगस्त 2015
😎सहज योजना 👉30 अगस्त 2015
😎स्वावलंबन स्वास्थ्य योजना👉 21 सितंबर 2015
😎मेक इन इंडिया👉 25 सितंबर 2015
😎इमप्रिण्ट इंडिया योजना👉 5 नवंबर 2015
😎स्वर्ण मौद्रीकरण योजना 👉5 नवंबर 2015
😎उदय योजना (UDAY) 👉5 नवंबर 2015
😎वन रैंक वन पेंशन योजना 👉7 नवंबर 2015
😎ज्ञान योजना 👉30 नवंबर 2015
😎किलकारी योजना 👉25 दिसंबर 2015
😎नगामि गंगे, अभियान का पहला चरण आरंभ 👉
5जनवरी 2016
😎स्टार्ट अप इंडिया 👉16 जनवरी 2016
😎प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 👉18 फरवरी 2016
😎सेतु भारतम परियोजना 👉4 मार्च 2016

😎स्टैंड अप इंडिया योजना👉 5 अप्रैल 2016
😎ग्रामोदय से भारत उदय अभियान 👉14अप्रैल 2016
😎प्रधानमंत्री अज्वला योजना👉 1 मई 2016
😎प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना👉 31 मई 2016
😎राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना 👉1 जून 2016
😎नगामी गंगे कार्यक्रम 👉7 जुलाई 2016
😎गैस फॉर इंडिया 👉6 सितंबर 2016
😎उड़ान योजना 👉21 अक्टूबर 2016
😎सौर सुजला योजना 👉1 नवंबर 2016
😎प्रधानमंत्री युवा योजना 👉9 नवंबर 2016
😎भीम एप👉 30 दिसंबर 2016
😎भारतनेट परियोजना फेज - 2 👉19 जुलाई 2017
😎प्रधानमंत्री वय वंदना योजना 👉21 जुलाई 2017
😎आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना 👉21 अगस्त 2017
😎प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना- सौभाग्य 👉25 सितंबर 2017
😎साथी अभियान👉 24 अक्टूबर 2017
😎दीनदयाल स्पर्श योजना👉 3 नवंबर 2017

भारत के प्रमुख भौगोलिक उपनाम

भारत के प्रमुख भौगोलिक उपनाम
          
1. ईश्वर का निवास स्थान
 *→ प्रयाग*

2. पांच नदियों की भूमि 
*→ पंजाब*

3. सात टापुओं का नगर?
*→ मुंबई*

4. बुनकरों का शहर?
*→ पानीपत*

5. अंतरिक्ष का शहर?
*→ बेंगलुरू*

6. डायमंड हार्बर?
*→ कोलकाता*

7. इलेक्ट्रॉनिक नगर?
*→ बेंगलुरू*

8. त्योहारों का नगर? 
*→ मदुरै*

9. स्वर्ण मंदिर का शहर?
*→ अमृतसर*

10. महलों का शहर?
*→ कोलकाता*

11. नवाबों का शहर? 
*→ लखनऊ*

12. इस्पात नगरी? 
*→ जमशेदपुर*

13. पर्वतों की रानी? 
*→ मसूरी*

14. रैलियों का नगर? 
*→ नई दिल्ली*

15. भारत का प्रवेश द्वार?
*→ मुंबई*

16. पूर्व का वेनिस? 
*→ कोच्चि*

17. भारत का पिट्सबर्ग?
*→ जमशेदपुर*

18. भारत का मैनचेस्टर?
 *→ अहमदाबाद*

19 मसालों का बगीचा?
 *→ केरल*

20 गुलाबी नगर?
*→ जयपुर*

21 क्वीन ऑफ डेकन?
*→ पुणे*

22 भारत का हॉलीवुड?
*→ मुंबई*

23. झीलों का नगर?
*→ श्रीनगर*

24. फलोद्यानों का स्वर्ग? 
*→ सिक्किम*

25. पहाड़ी की मल्लिका? 
*→ नेतरहाट*

26. भारत का डेट्राइट? 
*→ पीथमपुर*

27. पूर्व का पेरिस? 
*→ जयपुर*

28. सॉल्ट सिटी? 
*→ गुजरात*

29. सोया प्रदेश? 
*→ मध्य प्रदेश*

30. मलय का देश? 
*→ कर्नाटक*

31. दक्षिण भारत की गंगा? 
*→ कावेरी*

32. काली नदी? 
*→ शारदा*

33. ब्लू माउंटेन? 
*→ नीलगिरी पहाड़ियां*

34. एशिया के अंडों की टोकरी?
 *→ आंध्र प्रदेश*

35. राजस्थान का हृदय? 
*→ अजमेर*

रेलवे के कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न...

रेलवे के कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न... 


Que : ब्राड गेज रेल की चौडाई कितनी है
Ans : 1.676 मीटर

Que : भारत की सबसे लम्बी रेलगाड़ी है-
Ans : प्रयागराज-एक्सप्रेस

Que : भारत की पहली विधुत रेल कौन सी थी
Ans : डेक्कन क्वीन (कल्याण से पुणे)

Que : भारतीय Railway का मुख्यालय कहाँ स्थित है
Ans : नई दिल्ली में

Que : आर. आर. एफ. की फुल फार्म क्या है
Ans : रेलवे रिर्जवेशन फोर्म

Que : भारत में रेलवे जोनों तथा रेलवे डिवीजनों की संख्या कितनी हैं?
Ans : 17 रेलवे जोन तथा 67 डिवीजन

Que : भारत में भूमिगत रेल कहाँ चलती हैं?
Ans : कोलकाता, दिल्ली व बंगलुरू

Que : भारत का सबसे व्यस्त railway स्टेशन कौन सा है
Ans : लखनऊ

Que : भारत का सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशन है-
Ans : लखनऊ

Que : मेट्रो मैन उपनाम से कौन जाने जाते हैं?
Ans : श्रीधरन

Que : रेल कोच फैक्टरी आर. एस. एफ. कहां पर स्थित है
Ans : कपूरथला

Que : टी. टी. ई. की फुल फार्म क्या है
Ans : ट्रैवलिगं टिकट एग्जेमिनर

Que : Indian railway का स्लोगन क्या है
Ans : लाईफ लाईन आफ द नेशन

Que : मैत्री एक्सप्रेस किन दो देशों के बीच चलती है?
Ans : भारत-बांग्लादेश

Que : भारत की सबसे तेज ट्रेन कौन सी है
Ans : शताब्दी एक्सप्रेस

Que : भारत का पहला कम्पयुट्रीकृत आरक्षण कहाँ शुरू हुआ
Ans : नई दिल्ली

Que : आर. आर. बी. की फुल फार्म क्या है
Ans : रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड

Que : भारत में कर्मचारियों की भर्ती हेतु कितने रेलवे भर्ती बोर्ड हैं?
Ans : 19

Que : भारतीय Railway की स्थापना कब हुई
Ans : 16 अप्रैल 1853

Que : भारत की पहली railway सुरंग का क्या नाम था
Ans : पारसिक रेलवे

Que : भारत में रेल लाइन बिछाने का श्रेय किसे प्राप्त है?
Ans : लार्ड डलहौजी

Que : भारत का सबसे लम्बा प्लेटफॉर्म कहाँ हैं?
Ans : खड़गपुर ( प. बंगाल )

Que : रेल बजट पेश करने वाला पहला भारतीय
Ans : जोन मथाई

Que : डिजल लोकोमोटिव मोडरनीजेशन वर्कस कहां पर स्थित है
Ans : पटियाला (पजांब)

Que : भारत-पाकिस्तान के बीच कौनसी ट्रेन चलती हैं?
Ans : समझौता एक्सप्रेस व थार एक्सप्रेस

Que : भारतीय रेलवे का स्थायी शुभंकर क्या हैं?
Ans : भोलू ( गार्ड के रूप में गज, हरी बत्ती वाली लालटेन उठाए )

Que : भारत के आजाद होने के बाद सबसे पहला रेल मंत्री कौन बना
Ans : जोन मथाई

Que : Indian Railway म्यूजियम कहाँ पर स्थित है
Ans : चाणक्यापुरी (नई दिल्ली)

Que : आर. पी. एफ. की फुल फार्म क्या है
Ans : रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स

Que : भारतीय रेलवे का राष्ट्रीयकरण किस वर्ष हुआ?
Ans : 1950 में

Que : भारत का सबसे बडा railway platform कहां पर स्थित है
Ans : गोरखपुर में

Que : भारत की पहली महिला रेल मंत्री कौन थी
Ans : ममता बैनर्जी

Que : रेलवे मैनेजमेंट गुरू के नाम से कौन रेलमंत्री प्रसिद्ध् हैं?
Ans : लालू प्रसाद यादव

Que : Indian railway का विश्व में कौन सा स्थान है
Ans : दूसरा

Que : भारतीय Railway को कितने जोन में बांटा गया है
Ans : 17 जोन

Que : रेल व्हील फैक्टरी कहां पर स्थित है
Ans : यालाहकां (बैंगलुरू)

Que : पी. आर. एस. की फुल फार्म क्या है
Ans : पैसेजंर रिजर्वेशन सिस्टम

Que : भारत में सबसे लम्बा रेलमार्ग कौनसा हैं?
Ans : डिब्रूगढ़ से कन्याकुमारी

Que : भारतीय रेलवे बोर्ड की स्थापना कब की गई थी?
Ans : मार्च 1905 में

Que : भारत के किन राज्यों में railway सुविधा नही है
Ans : मेघालय और सिक्किम

Que : भारतीय रेलवे का सबसे ऊँचा रेलवे स्टेशन कौनसा हैं?
Ans : सिमिलीगुड़ा

Que : इंटिगर्ल कोच फैक्टरीआई. सी. एफ. कहां पर स्थित है
Ans : चेन्नई

Que : स्टेशन टिकट का वर्तमान मूल्य क्या है?
Ans : 5 रुपया

Que : आई. आर. एस. की फुल फार्म क्या है
Ans : इंडियन रेलवे स्टैंडर्ड

Que : भारत की पहली मैट्रो ट्रेन कहाँ चली
Ans : कोलकाता

Que : देश की सबसे लम्बी दूरी तय करने वाली रेलगाड़ी हैं
Ans : विवेक एक्सप्रेस

Que : भारत का सबसे बडा railway यार्ड कहां पर स्थित है
Ans : मुगल सराय

Que : रेलवे बोर्ड कब स्थापित किया गया था
Ans : 1905 मे

Que : Railway staff collage कहाँ पर स्थित है
Ans : वडौदरा में

Que : भारतीय Railway पर किसका एकाधिकार है
Ans : भारत सरकार का

Que : भारतीय रेलवे में सबसे बड़ी आमदनी का जरिया क्या हैं?
Ans : माल भाड़ा

Que : पी. एन. आर. की फुल फार्म क्या है
Ans : पैसेजंर नेम रिकार्ड

Que : भारत में सबसे छोटी रेलवे दूरी है-
Ans : नागपुर से अजनी ( 3 किमी. )

Que : किस रेल का रूट सबसे लम्बा है
Ans : विवेक एक्सप्रेस

मानव शरीर में तत्वों की मात्रा

मानव शरीर में तत्वों की मात्रा

1. ऑक्सीजन -- 65%
2. कार्बन -- 18%
3. हायड्रोजन -- 10%
4. नाइट्रोजन -- 3%
5. कैल्शियम -- 2%
6. फास्फोरस -- 1%
7. पोटेशियम -- 0.35%
8. सल्फर -- 0.25%
9. सोडियम -- 0.15%
10. क्लोरीन -- 0.15%
11. मैग्नीशियम -- 0.05%
12. कॉपर -- 0.05%
13. लोहा - 0.004%

Indian राष्ट्रपति_शासन SPECIAL

Indian राष्ट्रपति_शासन SPECIAL 


राष्ट्रपति_शासन_लगाने_से_जुड़ा_वह_सब_जिसे_आपको_जानने_और_समझने_की_आवश्यकता_है

चुनावी नतीजों के तीन हफ्ते बाद भी सरकार गठन को लेकर अनिश्चितता में फंसे महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लग सकता है. 
खबर है कि राज्य के राजनीतिक हालात पर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने अपनी रिपोर्ट केंद्र को भेज दी है. बताया जा रहा है कि इसमें उन्होंने राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की है. कुछ खबरों में यह भी कहा गया है कि केंद्र ने भी इसकी अनुशंसा कर दी है. आइए जानते हैं, राष्ट्रपति शासन लगाने से जुड़े संवैधानिक प्रावधान और इस पर सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश,

#संवैधानिक_प्रावधान

राष्ट्रपति शासन से जुड़े प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 356 और 365 में हैं.

आर्टिकल 356 के मुताबिक राष्ट्रपति किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा सकते हैं यदि वे इस बात से संतुष्ट हों कि राज्य सरकार संविधान के विभिन्न प्रावधानों के मुताबिक काम नहीं कर रही है. ऐसा जरूरी नहीं है कि वे राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर ही करे.

राष्ट्रपति शासन लगाये जाने के दो महीनों के अंदर संसद के दोनों सदनों द्वारा इसका अनुमोदन किया जाना जरूरी है. यदि इस बीच लोकसभा भंग हो जाती है तो इसका राज्यसभा द्वारा अनुमोदन किये जाने के बाद नई लोकसभा द्वारा अपने गठन के एक महीने के भीतर अनुमोदन किया जाना जरूरी है.

अनुच्छेद 365 के मुताबिक यदि राज्य सरकार केंद्र सरकार द्वारा दिये गये संवैधानिक निर्देशों का पालन नहीं करती है तो उस हालत में भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है.

#सर्वोच्च_न्यायालय_की_व्याख्या

1994 में बोम्मई मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकारिया आयोग की रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रपति शासन लगाये जाने संबंधी विस्तृत दिशानिर्देश दिये थे. इन्हें मोटे तौर पर तीन भागों में बांटा जा सकता है.

#इन_परिस्थितियों_में_राष्ट्रपति_शासन_लगाना_उचित_है

1- यदि चुनाव के बाद किसी पार्टी को बहुमत न मिला हो.

2- यदि जिस पार्टी को बहुमत मिला हो वह सरकार बनाने से इनकार कर दे और राज्यपाल को दूसरा कोई ऐसा गठबंधन न मिले जो सरकार बनाने की हालत में हो.

3- यदि राज्य सरकार विधानसभा में हार के बाद इस्तीफा दे दे और दूसरे दल सरकार बनाने के इच्छुक या ऐसी हालत में न हों.

4- यदि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के संवैधानिक निर्देशों का पालन न किया हो.

5- यदि कोई राज्य सरकार जान-बूझकर आंतरिक अशांति को बढ़ावा या जन्म दे रही हो.

6- यदि राज्य सरकार अपने संवैधानिक दायित्यों का निर्वाह न कर रही हो.

#इन_परिस्थितियों_में_राष्ट्रपति_शासन_लगाना_अनुचित_है

1- यदि राज्य सरकार विधानसभा में बहुमत हारने पाने के बाद इस्तीफा दे दे और राज्यपाल बिना किसी अन्य संभावना को तलाशे राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा कर दे.

2- यदि राज्य सरकार को विधानसभा में बहुमत सिद्ध करने का मौका दिये बिना राज्यपाल सिर्फ अपने अनुमान के आधार पर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दे.

3- यदि राज्य में सरकार चलाने वाली पार्टी लोकसभा के चुनाव में बुरी तरह हार जाये (जैसा कि जनता पार्टी सरकार ने अपातकाल के बाद 9 राज्य सरकारों को बर्खास्त करके किया था. और इंदिरा सरकार ने उसके बाद इतनी ही सरकारों को बर्खास्त करके किया था).

4- राज्य में आंतरिक अशांति तो हो लेकिन उसमें राज्य सरकार का हाथ न हो और कानून और व्यवस्था बुरी तरह से चरमराई न हो.

5- यदि प्रशासन ठीक से काम न कर रहा हो या राज्य सरकार के महत्वपूर्ण घटकों पर भ्रष्टाचार के आरोप हों या वित्त संबंधी आपात स्थिति दरपेश हो.

6- कुछ चरम आपात स्थितियों को छोड़कर यदि राज्य सरकार को खुद में सुधार संबंधी अग्रिम चेतावनी न दी गई हो.

7- यदि किसी किस्म का राजनीतिक हिसाब-किताब निपटाया जा रहा हो.

#अदालत_की_भूमिका

1975 में आपातकाल के दौरान इंदिरा सरकार ने 38वें संविधान संशोधन के जरिये अदालतों से राष्ट्रपति शासन की न्यायिक समीक्षा का अधिकार छीन लिया था. बाद में जनता पार्टी की सरकार ने 44वें संविधान संशोधन के जरिये उसे फिर से पहले जैसा कर दिया. बाद में बोम्मई मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायिक समीक्षा के लिए कुछ मोटे प्रावधान तय किये.

1- राष्ट्पति शासन लगाये जाने की समीक्षा अदालत द्वारा की जा सकती है.

2- सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट राष्ट्रपति शासन को खारिज कर सकता है यदि उसे लगता है कि इसे सही कारणों से नहीं लगाया गया.

3- राष्ट्रपति शासन लगाने के औचित्य को ठहराने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है और उसके द्वारा ऐसा न कर पाने की हालत में कोर्ट राष्ट्रपति शासन को असंवैधानिक और अवैध करार दे सकता है.

4- अदालत राष्ट्रपति शासन को असंवैधानिक और अवैध करार देने के साथ-साथ बर्खास्त, निलंबित या भंग की गई राज्य सरकार को बहाल कर सकती है, जैसा उसने उत्तराखंड में हरीश रावत की सरकार के मामले में किया है.

✍️​बहाने (Excuses) बनाम (Vs) सफलता (Success)

​बहाने (Excuses) बनाम (Vs) सफलता  (Success)... 



प्रिय मित्रों

✍️​बहाने (Excuses) बनाम (Vs) सफलता  (Success)​ अवश्य पढ़े प्रेरणादायक (Must Read! Very Motivational)

✍️बहाना 1 :- मेरे पास ​धन नही....​
जवाब :- इन्फोसिस के पूर्व चेयरमैन ​नारायणमूर्ति​ के पास भी ​धन नही था,​ उन्होंने अपनी ​पत्नी के गहने बेचने पड़े.....​

✍️बहाना 2 :- मुझे ​बचपन से परिवार की जिम्मेदारी उठानी पङी.....​
जवाब :- ​लता मंगेशकर​ को भी ​बचपन से परिवार की जिम्मेदारी उठानी पङी थी....​

✍️बहाना 3 :- मैं ​अत्यंत गरीब घर से हूँ....​
जवाब :- पूर्व राष्ट्रपति ​अब्दुल कलाम भी गरीब घर से थे....​

✍️बहाना 4 :- बचपन में ही मेरे ​पिता का देहाँत हो गया था....​
जवाब :- प्रख्यात संगीतकार ​ए.आर.रहमान के पिता का भी देहांत बचपन में हो गया था....​

✍️बहाना 5 :- मुझे ​उचित शिक्षा लेने का अवसर नही मिला....​
जवाब :- ​उचित शिक्षा का अवसर फोर्ड मोटर्स के मालिक हेनरी फोर्ड को भी नही मिला....​

✍️बहाना 6 :- मेरी ​उम्र बहुत ज्यादा है....​
जवाब :- ​विश्व प्रसिद्ध केंटुकी फ्राइड चिकेन के मालिक ने 60 साल की उम्र मे पहला रेस्तरा खोला था....​

✍️बहाना 7 :- मेरी ​लंबाई बहुत कम है....​
जवाब :- ​सचिन तेंदुलकर की भी लंबाई कम है....​

✍️बहाना 8 :- ​बचपन से ही अस्वस्थ था....​
जवाब :- ​आँस्कर विजेता अभिनेत्री मरली मेटलिन भी बचपन से बहरी व अस्वस्थ थी....​

✍️बहाना 9 :- मैं ​इतनी बार हार चूका, अब हिम्मत नहीं...​
जवाब :- ​अब्राहम लिंकन 15 बार चुनाव हारने के बाद राष्ट्रपति बने....​

✍️बहाना 10 :- ​एक दुर्घटना मे अपाहिज होने के बाद मेरी हिम्मत चली गयी.....​
जवाब :- ​प्रख्यात नृत्यांगना सुधा चन्द्रन के पैर नकली है....​

✍️बहाना 11 :- मुझे ​ढ़ेरों बीमारियां है.....​
जवाब :- ​वर्जिन एयरलाइंस के प्रमुख भी अनेको बीमारियो थी, राष्ट्रपति रुजवेल्ट के दोनो पैर काम नही करते थे.....​

✍️बहाना 12 :- मैंने ​साइकिल पर घूमकर आधी ज़िंदगी गुजारी है....​
जवाब :- ​निरमा के करसन भाई पटेल ने भी साइकिल पर निरमा बेचकर आधी ज़िंदगी गुजारी....​

✍️बहाना 13 :- मुझे ​बचपन से मंद बुद्धि कहा जाता है....​
जवाब :- ​थामस अल्वा एडीसन को भी बचपन से मंदबुद्धि कहा जाता था....​

✍️बहाना 14 :- मैं ​एक छोटी सी नौकरी करता हूँ, इससे क्या होगा....​
जवाब :- ​धीरु अंबानी भी छोटी नौकरी करते थे....​

✍️बहाना 15 :- मेरी ​कम्पनी एक बार दिवालिया हो चुकी है, अब मुझ पर कौन भरोसा करेगा....​
जवाब :- ​दुनिया की सबसे बड़ी शीतल पेय निर्माता पेप्सी कोला भी दो बार दिवालिया हो चुकी है....​

✍️बहाना 16 :- मेरा ​दो बार नर्वस ब्रेकडाउन हो चुका है, अब क्या कर पाउँगा....​
जवाब :- ​डिज्नीलैंड बनाने के पहले वाल्ट डिज्नी का तीन बार नर्वस ब्रेकडाउन हुआ था.....​

✍️बहाना 17 :- मेरे पास ​बहुमूल्य आइडिया है पर लोग अस्वीकार कर देते है...​
जवाब :- ​जेराँक्स फोटो कॉपी मशीन के आईडिया को भी ढेरो कंपनियो ने अस्वीकार किया था,​ लेकिन आज परिणाम सबके सामने है.....

✒️शिक्षा:- आज आप जहाँ भी है या कल जहाँ भी होंगे इसके लिए आप किसी और को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते, इसलिए आज चुनाव कीजिए,
सफलता और सपने चाहिए या खोखले बहाने????

✍️_:आपको आने वाले कल की शुभकामनाए...​आप अपनी जेब में या तो बहाने रख सकते हो या फिर पैसा.....​

कुछ पंक्तियां आप सभी के लिए... FROM MY SIDE SPECIAL FOR YOU ALL...

अरे कह दो परिस्थितियों को
थोड़ा खराब हो जाए,
कह दो चुनौतियों को थोड़ा
और कठोर हो जाए,
क्योंकि उन से टकराने
एक जिद्दी आ गया है...

SPECIAL COLLECTION & SLECTION BY RAJ SIR...

विश्व_का_भूगोल...

विश्व_का_भूगोल...

ब्रह्मांड


#प्रारंभिक_स्वरूप

आज से 14 अरब वर्ष पूर्व ब्रह्मांड का कोई अस्तित्व नहीं था। पूरा ब्रह्मांड एक छोटे से अति सघन बिंदु में सिमटा हुआ था। अचानक एक जबर्दस्त विस्फोट - बिग बैंग (Big Bang) हुआ और ब्रह्मांड अस्तित्व में आया। महाविस्फोट के प्रारंभिक क्षणों में आदि पदार्थ (Proto matter) व प्रकाश का मिला-जुला गर्म लावा तेजी से चारों तरफ बिखरने लगा।  कुछ ही क्षणों में ब्रह्मांड  व्यापक हो गया। लगभग चार लाख साल बाद फैलने की गति धीरे-धीरे कुछ धीमी हुई। ब्रह्मांड  थोड़ा ठंडा व विरल हुआ और प्रकाश बिना पदार्थ से टकराये बेरोकटोक लम्बी दूरी तय करने लगा और ब्रह्मांड प्रकाशमान होने लगा। तब से आज तक ब्रह्मांड हजार गुना अधिक विस्तार ले चुका है।

#ब्रह्मांड_का_व्यापक_स्वरूप

आकाशगंगाओं में केवल अरबों-खरबों तारे ही नहीं बल्कि धूल व गैस के विशाल बादल बिखरे पड़े हैं। सैकड़ों प्रकाशवर्ष दूर तक फैले इन बादलों में लाखों- तारों के पदार्थ सिमटे हुए हैं। इन्हें निहारिकाएँ (nebule) कहते हैं। ये सैकड़ों भ्रूण तारों को अपने गर्भ में समेटे रहती हैं। हमारी अपनी आकाशगंगा में भी हजारों निहारिकाएं हैं, जिनसे हर पल सैकड़ों तारे पैदा होते हैं। तारों  की भी एक निश्चित आयु होती हैै। सूर्य जैसे मध्यम आकार के तारों की जीवन यात्रा लगभग 10 अरब वर्ष लम्बी है। सूर्य के आधे आकार के तारों की उम्र इससे भी दुगुनी होती है। पर भारी-भरकम तारों की जीवन-लीला कुछ करोड़ वर्षों में ही समाप्त हो जाती है। तारों का अंत सुपरनोवा विस्फोट के रूप में होता है। 

#आधुनिक_खगोलशास्त्र_का_उदय

सन् 1929 में एडविन हब्बल और मिल्टन हुमासान  ने एक महत्वपूर्ण खोज की। उन्होंने पाया कि दूरस्थ आकाशगंगाओं के प्रकाश में विशेष रहस्य छिपे हैं। हब्बल व हुमासान ने आकाशगंगाओं की दूरी और इनकी गति का तुलनात्मक अध्ययन किया। जिससे पता चला कि सुदूर अंतरिक्ष में बिखरी पड़ी अनगिनत आकाशगंगाएँ हमसे जितनी दूर हैं उतनी ही अधिक तेजी से वह और दूर भाग रही हैं। इस खोज ने यह स्पष्टï कर दिया कि हमारी आकाशगंगा से परे न सिर्फ पूरा ब्रह्मांड व्यापक जाँच-पड़ताल की प्रतीक्षा में है बल्कि यह लगातार फैलता जा रहा है। इस खोज ने ब्रह्मांड की उत्पत्ति की जड़ तक पहुँचने में सफलता दिलाई और यह तथ्य उभरकर सामने आया कि पूरा का पूरा ब्रह्मïांड कभी एक अति सघन छोटे से बिंदु में सिमटा हुआ था। इसकी महाविस्फोट से शुरुआत हुई और तभी से यह लगातार फैलता जा रहा है। नजदीकी तारों का प्रकाश कुछ  वर्षों में हम तक पहुँचता है और दूरस्थ आकाशगंगाओं का प्रकाश हम तक पहुँचने में अरबों साल लग सकते हैं। हम आकाशगंगाओं का जो दृश्य देखते हैं वह करोड़ों-अरबों साल पहले का होता है क्योंकि प्रकाश इतने ही वर्षों में हम तक पहुँचता है। इस लंबी दूरी को व्यक्त करने के लिए प्रकाश वर्ष एक प्रचलित पैमाना है।

#अंतरिक्षीय_विकिरण

अंतरिक्षीय विकिरण के रूप में एक महत्वपूर्ण खोज सन् 1964 में विल्सन व पेनजिऑस द्वारा की गई जिसने ब्रह्मांड को खंगालने की एक नई विधा हमारे हाथ में पकड़ा दी। विकिरण की सर्वव्यापकता व निरंतरता इस बात की गवाह है कि आकाशगंगाओं, इनके झुण्डों और ग्रहों आदि जैसी संरचना निर्मित होने के भी बहुत पहले अतीत काल से ही विकिरण चला आ रहा है। इस सहज प्रवाह के कारण हम विकिरण के गुणों की प्रामाणिक पहचान कर सकते हैं। इस कार्य को ठीक से करने के लिए सन् 1989 में पृथ्वी की कक्षा में एक कॉस्मिक बैकग्राउंड एक्सप्लोरर उपग्रह भेजा गया। यह प्रारंभिक ब्रह्मïांड द्वारा उत्सर्जन का परीक्षण करने में सफल रहा। ब्रह्मांड का लगातार प्रसार हो रहा है और शुरुआती समय की अपेक्षा यह विकिरण सतरंगी पट्टी के सूक्ष्म तरंगीय हिस्से में दिखाई देने वाले तरंगदैध्र्य के परे लाल रंग की तरफ झुका था। विल्सन व पेनजिऑस द्वारा अन्वेषित सूक्ष्म तरंगीय आकाश हमारी अपनी आकाशगंगा के स्तर को छोड़कर पूरी तरह शांत था। लेकिन इस स्तर के ऊपर व नीचे के विकिरण में कोई उतार-चढ़ाव नहीं था। कॉस्मिक बैकग्राउंड एक्सप्लोरर यानि कोबे उपग्रह ने बहुत हल्का उतार-चढ़ाव दर्ज किया है। फिर भी सूक्ष्म तरंगीय विकिरण हलचल मुक्त ही है। यह उतार-चढ़ाव- एक लाख में एक भाग-बिग बैंग के लगभग चार लाख साल बाद प्रारंभिक ब्रह्मांड के तापमान में हुए बदलाव का प्रभाव है। सन् 2001 में कोबे से 100 गुना अधिक संवेदनशील उपग्रह के सहारे वैज्ञानिकों ने अधिक आँकड़ों को समेटे एक सूक्ष्म तरंगीय आसमान का मानचित्र तैयार किया। इसमें भी बहुत हल्का उतार-चढ़ाव पाया गया, जो नवजात ब्रह्मांड में पदार्थों के इकट्ठे होने की ओर संकेत करता है। अरबों साल में ये पदार्थ सघन हुए  और गुरुत्व बल के प्रभाव से चारों तरफ के अधिकाधिक पदार्थों को अपनी ओर खींचने लगे। यह प्रक्रिया आगे बढ़ते हुए आकाशगंगाओं तक जा पहुँची। नजदीकी आकाशगंगाओं के समूह से अन्तहीन जाल जैसी संरचनाएं बन गई। यह बीज ब्रह्मांड के जन्म के समय ही पड़ा और काल के प्रवाह में अरबों-खरबों आकाशगंगाओं  का वटवृक्ष खड़ा हुआ जिन्हें आज हम देख रहे हैं। उपग्रहीय अवलोकन ने कुछ और अज्ञात, अनजाने तथ्यों के साथ-साथ अदृश्य पदार्थ के अस्तित्व को भी प्रमाणित किया।

#ब्रह्मांड_का_भविष्य

ब्रह्मांड का आने वाले समय में क्या भविष्य क्या है, सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है? क्या अनंत ब्रह्मांड अनंतकाल तक विस्तार लेता ही जाएगा? सैद्धांतिक दृष्टि से इस बारे में तीन तस्वीरें उभरती हैं। सुदूर में अदृश्य व दृश्य पदार्थ के वर्चस्व मे गुरुत्व बल भारी पड़ा और ब्रह्मांड के फैलने की गति धीमी हुई। ब्रह्मांड के बढ़ते आकार में धीरे-धीरे पदार्थों की ताकत घटने लगी और अदृश्य ऊर्जा रूपी विकर्षण शक्ति अपना प्रभाव जमाने लगी। फलत: ब्रह्मांड के फैलने की दर तेज हुई। अगले 100 अरब साल तक यदि यह दर स्थिर भी रहे तो बहुत सी आकाशगंगाओं का अंतिम प्रकाश भी हम तक नहीं पहुँच पाएगा। अदृश्य ऊर्जा का प्रभुत्व बढऩे पर फैलने की दर तेज होती हुई आकाशगंगाओं, सौर परिवार, ग्रहों, हमारी पृथ्वी और इसी क्रम में अणुओं के नाभिक  तक को 'नष्ठ भष्ठ कर देगी। इसके बाद क्या होगा इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। लेकिन यदि अदृश्य ऊर्जा के पतन से पदार्थों का साम्राज्य पुन: स्थापित होता है यानि पदार्थ सघन होकर गुरुत्वीय प्रभाव को और अधिक बलशाली बना देते हैं तो दूरस्थ आकाशगंगाएँ भी हमें आसानी से नजर आने लगेंगी। यदि अदृश्य ऊर्जा ऋणात्मक हो जाती है तो ब्रह्मांड पहले धीरे-धीरे और फिर तेजी से अपने आदिस्वरूप के छोटे बिंदु में सिमटने के लिए विवश होगा। निर्वात भौतिकी या शून्यता ब्रह्मïांंड का भविष्य निश्चित करेगी। अमेरिकी ऊर्जा विभाग और नासा ने मिलकर अंतरिक्ष आधारित एक अति महत्वकांक्षी परियोजना 'ज्वाइंट डार्क एनर्जी मिशन का प्रस्ताव रक्खा है। अगले दशक में पूर्ण होने वाली इस परियोजना में दो मीटर व्यास की एक अंतरिक्षीय दूरबीन स्थापित की जानी है। यूरोपीय स्पेस एजेंसी ने भी 2007 में प्लांक अंतरिक्ष यान प्रक्षेपित किया है। यह अंतरिक्ष यान प्रारम्भिक अंतरिक्षीय विकिरण का अध्ययन अधिक गहराई और सूक्ष्मता से कर सकता है।

#आकाशगंगा

आकाशगंगाएँ तारों का विशाल पुंज होती हैं, जिनमें अरबों तारे होते हैं। आकाशगंगाओं का निर्माण शायद 'महाविस्फोट के 1 अरब वर्ष पश्चात् हुआ होगा। खगोलशास्त्री भी आकाशगंगाओं की कुल सँख्या का अनुमान नहीं लगा सके हैं। आकाशगंगाएँ इतनी विशाल होती हैं कि उन्हें 'द्विपीय ब्रह्मांड भी कहते हैं। आकाशगंगाएँ मुख्यत: तीन आकारों- सर्पिल, दीर्घवृत्तीय और अनियमित होती हैं। हमारी आकाशगंगा 'मिल्की वे सर्पिल आकार की है। आकाशगंगाएँ अक्सर समूहों में ब्रह्मांड की परिक्रमा करती हैं। हमारी आकाशगंगा 'मिल्की वे 20 आकाशगंगाओं के समूह की सदस्य है। कुछ आकाशगंगाओं के समूह में हजारों आकाशगंगाएँ शामिल होती हैं।

#मिल्की_वे_आकाशगंगा

हमारी आकाशगंगा का नाम 'मिल्की वे है। इसमें लगभग 100 अरब तारे शामिल हैं। हमारा सौरमंडल और सूर्य 'मिल्की वे के केंद्र के किनारे से आधी दूरी पर स्थित है। 'मिल्की वे के एक सिरे से दूसरे सिरे तक यात्रा करने में प्रकाश को 100,000 वर्ष लगते हैं। 'मिल्की वे ब्रह्मांड की परिक्रमा करती है। सूर्य को 'मिल्की वेÓ के केंद्र की परिक्रमा करने में 22.5 करोड़ वर्ष का समय लगता है, जिसे आकाशगंगीय वर्ष कहते हैं।

#तारे 

तारे विशाल चमकदार गैसों के पिण्ड होते हैं जो स्वयँ के गुरूत्वाकर्षण बल से बंधे होते हैं। भार के अनुपात में तारों में 70 प्रतिशत हाइड्रोजन, 28 प्रतिशत हीलियम, 1.5 प्रतिशत कार्बन, नाइट्रोजन व ऑक्सीजन तथा 0.5 प्रतिशत लौह तथा अन्य भारी तत्व होते हैं। ब्रह्मांड का अधिकाँश द्रव्यमान तारों के रूप में ही है। तारों का जन्म समूहों में होता है। गैस व धूल के बादल जिन्हें अभ्रिका कहते हैं, जब लाखों वर्ष पश्चात् छोटे बादलों में टूटकर विभाजित हो जाते हैं तब अपने ही गुरूत्वाकर्षण बल से आपस में जुड़कर तारों का निर्माण करते हैं। तारों की ऊष्मा हाइड्रोजन को एक अन्य गैस हीलियम में परिवर्तित कर देती है। इस परिवर्तन के साथ ही 'नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है, जिससे अत्यन्त उच्चस्तरीय ऊर्जा उत्पन्न होती है। इसी ऊर्जा के स्रोत से तारे चमकते हैं। ब्रह्मांड के लगभग 50 प्रतिशत तारे युग्म में पाए जाते हैं। उन्हें 'युग्म तारे के नाम से जाना जाता है। जब किसी तारे का हाइड्रोजन ईंधन चुकने लगता है तो उसका अंतकाल नजदीक आ जाता है। तारे के बाह्य क्षेत्र का फूलना और उसका लाल होना उसकी वृद्धावस्था का प्रथम संकेत होता है। इस तरह के बूढ़े तथा फूले तारे को 'रक्त दानव कहते हैं। अपना सूर्य जो कि मध्यम आयु का तारा है, संभवत: 5 अरब वर्ष बाद 'रक्त दानव में परिवर्तित हो जाएगा।  जब ऐसे तारे का सारा ईंधन समाप्त हो जाता है तो वह अपने केंद्र में पर्याप्त दबाव नहीं उत्पन्न कर पाता, जिससे वह अपने गुरूत्वाकर्षण बल को सम्भाल नहीं सकता है। तारा अपने भार के बल की वजह से छोटा होने लगता है। यदि यह छोटा तारा है तो वह श्वेत विवर में परिवर्तित हो जाता है। खगोलशास्त्रियों के अनुसार सूर्य भी 5 अरब वर्ष पश्चात् एक श्वेत विवर में परिवर्तित हो जाएगा। किंतु बड़े तारे में एक जबर्दस्त विस्फोट होता है और उसका पदार्थ ब्रह्मांड में फैल जाता है।

भारतीय संविधान के संशोधन

भारतीय संविधान के संशोधन

● पहला संशोधन (1951) —इस संशोधन द्वारा नौवीं अनुसूची को शामिल किया गया।
● दूसरा संशोधन (1952) —संसद में राज्यों के प्रतिनिधित्व को निर्धारित किया गया।
● सातवां संशोधन (1956) —इस संशोधन द्वारा राज्यों का अ, ब, स और द वर्गों में विभाजन समाप्त कर उन्हें 14 राज्यों और 6 केंद्रशासित क्षेत्रों में विभक्त कर दिया गया।
● दसवां संशोधन (1961) —दादरा और नगर हवेली को भारतीय संघ में शामिल कर उन्हें संघीय क्षेत्र की स्थिति प्रदान की गई।
● 12वां संशोधन (1962) —गोवा, दमन और दीव का भारतीय संघ में एकीकरण किया गया।
● 13वां संशोधन (1962) —संविधान में एक नया अनुच्छेद 371 (अ) जोड़ा गया, जिसमें नागालैंड के प्रशासन के लिए कुछ विशेष प्रावधान किए गए। 1दिसंबर, 1963 को नागालैंड को एक राज्य की स्थिति प्रदान कर दी गई।
● 14वां संशोधन (1963) —पांडिचेरी को संघ राज्य क्षेत्र के रूप में प्रथम अनुसूची में जोड़ा गया तथा इन संघ राज्य क्षेत्रों (हिमाचल प्रदेश, गोवा, दमन और दीव, पांडिचेरी और मणिपुर) में विधानसभाओं की स्थापना की व्यवस्था की गई।
● 21वां संशोधन (1967) —आठवीं अनुसूची में ‘सिंधी’ भाषा को जोड़ा गया।
● 22वां संशोधन (1968) —संसद को मेघालय को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में स्थापित करने तथा उसके लिए विधानमंडल और मंत्रिपरिषद का उपबंध करने की शक्ति प्रदान की गई।
● 24वां संशोधन (1971) —संसद को मौलिक अधिकारों सहित संविधान के किसी भी भाग में संशोधन का अधिकार दिया गया।
● 27वां संशोधन (1971) —उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र के पाँच राज्यों तत्कालीन असम, नागालैंड, मेघालय, मणिपुर व त्रिपुरा तथा दो संघीय क्षेत्रों मिजोरम और अरुणालच प्रदेश का गठन किया गया तथा इनमें समन्वय और सहयोग के लिए एक ‘पूर्वोत्तर सीमांत परिषद्’ की स्थापना की गई।
● 31वां संशोधन (1974) —लोकसभा की अधिकतम सदंस्य संख्या 547 निश्चित की गई। इनमें से 545 निर्वाचित व 2 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होंगे।
● 36वां संशोधन (1975) —सिक्किम को भारतीय संघ में संघ के 22वें राज्य के रूप में प्रवेश प्रदान किया गया।
● 37वां संशोधन (1975) —अरुणाचल प्रदेश में व्यवस्थापिका तथा मंत्रिपरिषद् की स्थापना की गई।
● 42वां संशोधन (1976) —इसे ‘लघु संविधान’ (Mini Constitution) की संज्ञा प्रदान की गई है।
—इसके द्वारा संविधान की प्रस्तावना में ‘धर्मनिरपेक्ष’, ‘समाजवादी’ और ‘अखंडता’ शब्द जोड़े गए।
—इसके द्वारा अधिकारों के साथ-साथ कत्र्तव्यों की व्यवस्था करते हुए नागरिकों के 10 मूल कर्त्तव्य निश्चित किए गए।
—लोकसभा तथा विधानसभाओं के कार्यकाल में एक वर्ष की वृद्धि की गई।
—नीति-निर्देशक तत्वों में कुछ नवीन तत्व जोड़े गए।
—इसके द्वारा शिक्षा, नाप-तौल, वन और जंगली जानवर तथा पक्षियों की रक्षा, ये विषय राज्य सूची से निकालकर समवर्ती सूची में रख दिए गए।
—यह व्यवस्था की गई कि अनुच्छेद 352 के अन्तर्गत आपातकाल संपूर्ण देश में लागू किया जा सकता है या देश के किसी एक या कुछ भागों के लिए।
—संसद द्वारा किए गए संविधान संशोधन को न्यायालय में चुनौती देने से वर्जित कर दिया गया।
● 44वां संशोधन (1978) —संपत्ति के मूलाधिकार को समाप्त करके इसे विधिक अधिकार बना दिया गया।
—लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं की अवधि पुनः 5 वर्ष कर दी गई।
—राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष्ज्ञ के चुनाव विवादों की सुनवाई का अधिकार पुनः सर्वोच्च तथा उच्च न्यायालय को ही दे दिया गया।
— मंत्रिमंडल द्वारा राष्ट्रपति को जो भी परामार्श दिया जाएगा, राष्ट्रपति मंत्रिमंडल को उस पर दोबारा विचार करने लिए कह सकेंगे लेकिन पुनर्विचार के बाद मंत्रिमंडल राष्ट्रपति को जो भी परामर्श देगा, राष्ट्रपति उस परामर्श को अनिवार्यतः स्वीकार करेंगे।
—‘व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार’ को शासन के द्वारा आपातकाल में भी स्थगित या सीमित नहीं किया जा सकता, आदि।
● 52वां संशोधन (1985) —इस संशेधन द्वारा संविधान में दसवीं अनुसूची जोड़ी गई। इसके द्वारा राजनीतिक दल-बदल पर कानूनी रोक लगाने की चेष्टा की गई है।
● 55वां संशोधन (1986) —अरुणाचल प्रदेश को भारतीय संघ के अन्तर्गत राज्य की दर्जा प्रदान किया गया।
● 56वां संशोधन (1987) —इसमें गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा देने तथा ‘दमन व दीव’ को नया संघीय क्षेत्र बनाने की व्यवस्था है।
● 61वां संशोधन (1989) —मताधिकार के लिए न्यूनतम आवश्यक आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई।
● 65वां संशोधन (1990) —‘अनुसूचित जाति तथा जनजाति आयोग’ के गठन की व्यवस्था की गई।
● 69वां संशोधन (1991) —दिल्ली का नाम ‘राष्ट्रीय राजधानी राज्य क्षेत्र दिल्ली’ किया गया तथा इसके लिए 70 सदस्यीय विधानसभा तथा 7 सदस्यीय मंत्रिमंडल के गठन का प्रावधान किया गया।
● 70वां संशोधन (1992) —दिल्ली तथा पांडिचेरी संघ राज्य क्षेत्रों की विधानसभाओं के सदस्यों को राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में शामिल करने का प्रावधान किया गया।
● 71वां संशोधन (1992) —तीन और भाषाओं कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली को संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित किया गया।
● 73वां संशोधन (1992) —संविधान में एक नया भाग 9 तथा एक नई अनुसूची ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी गई और पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया।
● 74वां संशोधन (1993) —संविधान में एक नया भाग 9क और एक नई अनुसूची 12वीं अनुसूची जोड़कर शहरी क्षेत्र की स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया।
● 91वां संशोधन (2003) —इसमें दल-बदल विरोधी कानून में संशोधन किया गया।
● 92वां संशोधन (2003) —इसमें आठवीं अनुसूची में चार और भाषाओं-मैथिली, डोगरी, बोडो और संथाली को जोड़ा गया।
● 93वां संशोधन (2005) —इसमें एससी/एसटी व ओबीसी बच्चों के लिए गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रखने का प्रावधान किया गया।
● 97वां संशोधन (2011) —इसमें संविधान के भाग 9 में भाग 9ख जोड़ा गया और हर नागरिक को कोऑपरेटिव सोसाइटी के गठन का अधिकार दिया गया