Wednesday, June 3, 2020

IAS MOTIVATION 1

कुछ_तो_लोग_कहेंगे_क्योंकि_इनका_काम_है_सिर्फ_कहना... 

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जब हम सिविल सेवा (#IAS) की तैयारी कर रहे होते हैं तो एक समस्या का सामना लगभग सभी करते हैं ..वह है लोगों के कमेंट्स.. तैयारी के दौरान बहुत से लोग आपसे कहेंगे कि IAS/IPS कोई बच्चों का खेल नहीं , कोई कहेगा कि गांव वाले आईएएस नहीं बन पाते, आईएएस बनने के लिए बैकग्राउंड आपका अच्छा होना चाहिए आपका फास्ट एकेडमी का स्कोर अच्छा होना चाहिए , कोई कहेगा कि आईएएस के लिए दिल्ली जाकर कोचिंग कीजिये, घर पर बैठकर कोई कलेक्टर नहीं बनता , यह बात यहीं नहीं रुकती अगर आप दिल्ली आ भी जाते हैं तो भी लोग यही कहेंगे कि कोई दिल्ली चले जाने से IAS नहीं बन जाता और आप जब दिल्ली आ जाते तो यहां भी नमूनों की कमी नहीं है यहां पर भी नमूनों बोलेंगे कि आप की शक्ल ही नहीं IAS बनने वाली और भी जाने कितने तरह के लोग और कितनी तरह की बातें ..और सबसे आश्चर्य वाली बात यह है कि इनकी बातें लगातार सुनकर ही लगभग 75 % लोग दिग्भ्रमित हो जाते हैं आखिर क्यों ..? एक बात बताइए आईएएस का सपना किसका है ?? आपका या उनका ..? IAS बनने के लिए परिश्रम किसको करना पड़ेगा आपको या उनको ..?? आईएएस बनने के बाद किसके नाम के आगे आईएएस लिखा जायेगा ..आपके या उनके .. ?? और अगर आप आईएएस नहीं बन पाए तो क्या ये लोग आकर आपसे कहेंगे कि माफ़ करना मेरी वजह से तुम्हारा सपना पूरा नहीं हो पाया ..?? नहीं ना.. आपके साथ अच्छा हो या बुरा सबका सामना आपको अकेले ही करना है तो फिर अपने मन और मस्तिष्क की क्यों नहीं सुनते ..?? क्यों अपने भाग्य का ठेका लोगों कि बातों पर डाल रखा है .. क्या इनकी बातें तय करेंगी कि आप क्या बन सकते हो और क्या नहीं ..?? एक बात हमेशा याद रखें इस तरह की बातें वही निकम्मे करते हैं जो खुद जिंदगी में कभी कुछ नहीं क्या रहता है वही दूसरों की जिंदगी में दखल अंदाज देकर उसे भी डिमोटिवेटेड करते रहते हैं क्योंकि जो सफल व्यक्ति रहते हैं और जो अपनी जिंदगी में मुकाम पाना चाहते वह अपनी लाइफ में इतनी व्यस्त होते हैं कि उसे दूसरों की जिंदगी में झांकने के लिए वक्त ही नहीं मिलता वह तो अपने आपके अंदर की कमियों को ढूंढ कर निकाल कर और बेहतर बनाने के लिए हमेशा व्यस्त रहते हैं मेरा सिर्फ इतना कहना है कि लोग तो तब भी कहेंगे जब आप कुछ नहीं करेंगे तो इससे अच्छा है कुछ कीजिये ना हो क्यों बैठे हैं.. ?? लोगों कि नहीं अपने मन और मस्तिष्क कि सुनिए और वही कीजिये जो आपका दिल कहता है , वो नहीं जो लोग कहते हैं ..जब आपने निश्चय कर ही लिया है कि आपको IAS बनना है तो फिर दुनिया की फालतू बातों मत सुनिए सिर्फ अपने अंदर की कमियों को ढूंढिए देखिए आपके अंदर क्या कमियां है जो आपको आपके लक्ष्य से अभी तक दूर रखा है एक दृढ़ संकल्प लीजिए हताश निराश मत होइए.. क्योंकि भगवान के घर में देर है अंधेर नहीं.. कोई जल्दी सफलता प्राप्त कर लेता है ... किसी को थोड़ा वक्त लगता है बस आप अपने कर्म में किसी भी तरह की कमियां मत छोड़िए.. आप लगातार मेहनत करते रहिए सफलता आपको जरूर मिलेगी... *गीता में साफ शब्दों में लिखा है.. कर्म करो फल की इच्छा मत करो*  अगर आपका कर्म अच्छा होगा तो फल निश्चय ही आपको मिलेगा !! "आज तक जिस जिस पर जग हंसा है वही इतिहास रचा है"... 

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सिविल_सेवा...

कहिए, #आईएएस मैं बनकर दिखाऊँगा...
...जीत तब आती हैं,जब आप सोचते हैं, "मैं जो चाहता हूँ वो पाकर रहूँगा" 
जब आप ठान लेते हैं कि मैं बनके दिखाऊंगा,तो अब आप #टाइम पास व #बहानेबाजी के लिए एक मिनट के लिए भी काम नहीं करते ......अब तो मस्तिष्क इस बात पर काम करना शुरू कर देता है कि #सपनों को कैसे #हकीकत में बदला जाए......

अब आप कई गुना बेहतर #अनुशासित रहने लग जाते है .....टाइम के हर पल में कुछ नया सीखने की कोशिश में लग जाते है..

..."जब मै ias बनकर दिखाऊंगा" की भावना से #पढ़ने लग जाते हैं तो पढ़ते -पढ़ते कब सूर्योदय से सूर्यास्त हो जाता हैं पता तक नहीं चलता.....

#लगनशीलता इतनी ज्यादा हो जाती हैं कि स्वादिष्ट खाने से कई गुना स्वाद देश -विदेश में घटित होने वाली अच्छी #घटनाओं में आने लग जाता है....अब #किताबों के पन्ने महबूबा की आंखों की तरह #अतिसुन्दर लगने लग जाते हैं.....
फिर क्या 👍...#मसूरी की टिकट कन्फर्म हो जाती हैं 😊.....

अंत में बस यही कहना चाहता हूं कि अपने #लक्ष्य को ध्यान में रखें ...
हंसते और मुस्कुराते रहिए...

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Goal UPSC...

#अकेलेपन से घबराइये नहीं, एकांत की तरह इस्तेमाल करिए...
कुछ साथी वरिष्ठ हो जाते है, बहुत वरिष्ठ हो जाते हैं लेकिन अपने लक्ष्य को बदलते नहीं और लगातार कोशिस करते हैं. उनका साहस और दृढ़ निश्चय नमन-योग्य है. कभी-कभी बहुत अकेलापन लगता है. समाज से कटा हुआ या काट दिया गया जैसा लगता है. शादियाँ, पार्टियाँ या अन्य किसी समारोह में या तो न्यौता नहीं आता या आता भी है तो जाते नहीं है. लोग सवाल बहुत पूछते हैं और हमारे पास मुस्कुरा देने के अलावा जवाब नहीं होता. मन बहुत संवेदनशील हो जाता है. छोटी सी बात से दुखी हो जाते हैं और बहुत छोटी सी बात से भी खुश हो जाते हैं. जीवन में अनिश्चितता,असुरक्षा और अभाव मिलकर एक ऐसा संसार गढ़ते हैं जहाँ लगता है कि हम हैं और बस ये चार दीवारें. किताबें भी वही कितनी बार पढ़ें ! सब खाली सा ! उदास सा ! हमारे अन्दर अकेलेपन का एक ऐसा संसार सृजित हो जाता है जहाँ हम '#एलिनेटेड' फील करने लगते हैं...
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अक्सर ऐसी स्थति में हमारा #अवचेतन मन हमारी दिशा तय करने लगता है. हम पढने की कोशिस करते हैं मगर बहुत थोड़े समय में ही उब जाते हैं उठ जाते हैं किसी दोस्त से बात करने लगते हैं, मिलने-जुलने लगते हैं, चाय की दूकान आदि पर समय गुजरने लगता है या आजकल #फेसबुक #व्हाट्सएप जैसी चीज भी है जहाँ वक़्त देते हैं...
जिन्हें पढने में थोड़ी बहुत रूचि रहती है वे कुछ बौद्धिक किताबों और पत्रिकाओं की और मुड जाते हैं राजनीतिक बहस-मुबाहिशों और बौद्धिक जुगालियों की और खिसक जाते हैं. इसमें थोडा-बहुत आत्मसंतोष भी होता है...
यह एक ट्रैप हैं जहाँ उलझकर नुकसान उठा लेना संभव है.सचमुच यह निर्धारित लक्ष्य और रास्ते से थोडा व्यतिक्रम है जो आपको समय से वहां पहुचने नहीं देता जहां आप जाना चाहते हैं. अकेलेपन की उपज है...

आप अवचेतन मन से संचालित होने के बजाय चेतन प्रयास करिए. कमरा मत छोडिये, मेज-कुर्सी-कापी-कलम-किताब मत छोडिये. और सबसे बड़ी बात अपनी चुनी हुई ज़िन्दगी को पाने की कोशिस को यथसंभव हमेशा मन में रखिये. यह अकेलापन आपके लिए भावुक दौर होता है. असुरक्षा में बार-बार आँसू आ सकते हैं मगर इन आँसुओं के बीच निश्चय दृढ होता है और दृढ़तर होता जाता है. इसे आप एकांत समझ लीजिये जो आपको पूरी ज़िन्दगी फिर नहीं मिलेगा और सदुपयोग करिए...
इस निश्चय के साथ दो बाते हमेशा जोड़ कर रखनी चाहिए....आपका विश्वास और #निरंतर_प्रयास..... विश्वास यह कि आप एक दिन कामयाब हो जायेंगे. निश्चित तैर पर कामयाब हो जायेंगे. अपने मन-मस्तिष्क को लगातार सन्देश देते रहिये. यह सकारात्मक सन्देश आपके व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव लायेगा यह तय है लेकिन सन्देश भी ऐसा होना होना चाहिए जिससे मन-मस्तिष्क को विश्वास होता रहे, उसका विश्वास बढ़ता रहे कि वास्तव में एक दिन हम कामयाब हो जायेंगे...
यह विश्वास तब तक खोखला लगता है जब तक आप परिश्रम के साथ उस परीक्षा के लिए नहीं पढ़ते जिसमें आप कामयाब होना चाहते हैं.. अथक प्रयास इसी को कहते हैं जो अक्सर आप सुनते हैं मगर उस पर गौर नहीं करते...आपका परिश्रम आपके अन्दर सकारात्मक मनोवैज्ञानिक बदलाव को ठोस आधार देता है. आपको खुद भी बड़ी दृढ़ता के साथ यह विश्वास होता है कि आप कामयाब हो जायेंगे और और आप देखेंगे कि आप एक दिन #कामयाब हो जायेंगे...

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अभी तो तुम्हे और ' जलील ' होना है और झेलना है  ...

क्या लगा था सिविल सर्विस इतना सरल है , आकर्षक है , रुतबा और सत्ता का सोर्स है , दुनिया मे छा जाने का रास्ता है .......
अभी तो तुमको बहुत झेलना है अपनी प्रेयसी को बेरोजगार होने के कारण बिछड़ते हुए देखना है ..मम्मी पापा के सपनो को हर एग्जाम के बाद टूटते देखना है .....खुद की उम्मीदों और सपने को दूर जाते देखना है ,,,,,मन करेगा लौट जाऊ वापस ,चला जाऊ शांति की तलाश में कही ,,,,पर असफल व्यक्ति के पास समझाने के लिए ,कहने के लिए बहुत कुछ होता है पर उसकी कोई सुनना नही चाहता .....खुद के बनाये आवरण में कैद होना है और ....
अभी तो तुम्हें रोज पल पल टूटना है ,कमरे में बंद होकर खुद के आंसू खुद ही पोछना है ,हर किसी की पैनी और नजरअंदाज करने वाली नजर से ' जलील ' होना है ...
प्रारम्भिक परीक्षा निकलने से उत्साहित होना है और नही qualify होने से असफल बहानों को अलग अलग लोगो के पास अलग अलग तरीके से पेश करके खुद में तिष्कृत होना है .....
मुख्य परीक्षा नही निकलने  से एक बुद्धिजीवी का बना हुआ आवरण का टूटना है जो कुछ महीने स्पेशल थे (मुख्य परीक्षा देने के कारण ) , अब बराबरी पर आकर खड़े हो जाना है और अनुभव का झुनझुना पकड़ लेना है...
इंटरवयू का पड़ाव ख़ुशी में बेतहासा वृद्धि तो कर देगा पर वहां की असफलता झकझोर कर रख देगी ...खुद की गलतियां दुसरो से ढूंढवाते फिरोगे ....कई बार विश्वास ही नही होगा selction लिस्ट के मापदण्डो पर और अचानक cool बुद्धिजीवी से आक्रमक अभ्यर्थी बन जाओगे  --

कुंठाये भी होगी , गुस्सा भी होगा ,भीतर की आक्रमकता और बाहरी तौर के परिपक्वता का द्वंद चलता रहेगा ,,,रोज खुद से लड़ोगे ,रोज खुद को समझाओगे ,रोज खुद में तडपोगे .....
और उस दिन की तलाश में जब selction लिस्ट में तुम्हारा नाम होगा , पापा को तुम पर गर्व होगा , मोहल्ले और अपने क्षेत्र के आदर्श बन जाओगे , नाम के साथ ' सरकारी ' शब्द जुड़ जाएगा पर उस दिन को पाने के लिए ...

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जब ख्वाब देखा हो #कलेक्टर बनने का तब क्या दिन या रात देखना ?... 

▪️भले ही सारे # नजारे सो गये हो लेकिन मेरा दावा हैं अभी भी सच्चे #upsc #प्रतिभागियों की कलमों में तेज रफ्तार होगी

▪️कोई #इतिहास से बातें कर रहा होगा तो कोई खुद इतिहास में अपना नाम दर्ज कराने को बेताब होगा ,
कोई #भूगोल से खेल रहा होगा तो कोई भारतीय संविधान में खोया होगा ,तो कोई अर्थशाश्त्र के साथ आँख मिचौली कर रहा होगा
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▪️कोई #टॉपिक छूट ना जाय इसलिये चाय के साथ भी किताबें आँखो के सामने हैं तो कोई अपने मित्र को बोलता होगा यार ब्रश ,- चाय बाद में पहले आन्सर राइटिंग तो कर लूँ # hahahah और गर कोई बोल दे भाई तू तो # टॉप करेगा तो सामने कहेंगे अरे ऐसा कूछ नही मैं तो बस थोड़ी बहूत ही पढाई कर पाता हूँ मैं कहाँ यार - - लेकिन ये लफ्ज सुनकर क्या खुशी होती हैं बयान नही किया जा सकता हैं
# मतलब woowwww क्या # फीलिंग्स होती हैं यार 

▪️.#दोस्तों क्या #गजब की दुनियाँ होती हैं हम सबकी , सारी #खुशियाँ किताबों में ढूँढ़ लेते हैं तो
#सारा दर्द , अपमान , तंगी हालात और #सब परेशानियां उन्ही किताबों में छुपा लेते है

▪️एक उम्मीद हैं #हौसला हैं की एक दिन सब कूछ बदल जायेगा अपनी भी जिंदगी #रंगीन हो जायेगी समस्याओं के बादल हमेशा के लिये छट जायेंगे
जो लोग हम सब पर हँसते हैं उन्हे #हँसने दो यारो उनकी खुशियाँ कम ! ना करो कैसे बताओगे उन्हे की वो जिंदगी ही क्या जो दूसरो के लिये ना जी जाय और दूसरो के होठों पर मुस्कान लाने से पहले खुद की #पलकों को भिगोना पड़ता हैं

▪️हम सब रातों में जागते हैं # बदलाव के लिये , समाज में कूछ योगदान कर सके #भूखों को रोटी दे सके , उन बच्चो की पढाई के लिये जो #मजबूर होकर मजदूर हो गये , जो बुरे रास्तों पर चल पड़े हैं उन्हे #समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिये उनकी ख्वाइशों को अपनी ख्वाइशे बना कर जीते हैं हम और इन सबकोव . पूरा करने के लिये I.a.s जैसे
# प्रभावशाली मंच से बेहतर क्या होगा .

▪️इस बात की फिक्र छोड़ो यार .कोई क्या कहता हैं .क्योंकि ये दुनियाँ आपके #रुतबे को सलाम करती है ..आपके संघर्ष का मूल्य ये क्या समझेंगे ..इसलिये लगे रहिए ..बेफिक्री से ..आपकी मेहनत से जो परिणामों कें फूल खिलेंगे ..उनकी महक फिजाओं मेँ गूंजती रहेगी ..ना दिन देखिए ना रात ..पानी की प्यास सा भोजन की भूख सा अपने लक्ष्य कें लिये भी बेताब रहिए ..सफलता तुम्हारी गोदी मेँ स्वयं आ बैठेगी ...

▪️मिल सके आसानी से उसकी ख्वाहिश किसे है जिद तो उसकी है जो मुकद्दर में लिखा ही नहीं जिद्द इतनी पक्की है कि जब तक तोड़ेंगे नहीं तब तक छोड़ेंगे नहीं...

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फेसबुक और व्हाट्सप आजकल प्रचंड क्रांति से गुजर रहें हैं... Guidence देने वालों की कमी नही दिख रही है..हमेशा याद रखिये किसी व्यक्ति को follow करने से या किताबो का ढेर लगाकर दिखावा करने से कोई  #IAS नही बन जाता... और न ही सर्वश्रेष्ठ कोचिंग join कर लेने से कोई आईएएस बन सकता है.. coaching हो, शिक्षक हो या कोई भी... 

ये लोग आपको सिर्फ  guide कर सकते है लेकिन संघर्ष आपको ही करना है...
श्री कृष्ण ने रणभूमि में अर्जुन को अपने ज्ञान और शक्तियों से काफी प्रेरित किया लेकिन रणभूमि में योद्धा बनकर अर्जुन को ही लड़ना पड़ा था... 
कोई इंसान आपके जिंदगी को नही बदल सकता.. जब तक आप नही चाहेंगे...
#आईएएस एक job नही बल्कि एक रणभूमि है.. इस रणभूमि में तन,मन, धन सबकुछ समर्पण करके ही विजय पाया जा सकता है.. इस दंगल में जो जितने ही  परिस्थितियों से लड़ कर खुद को कठोर बनायेगा, उसकी success के chances उतने ही ज्यादा होंगें ..यहाँ लड़ाई सिर्फ संघर्षशील व्यक्तियों को बीच होती है.. जो दिन रात अपने सपनो के लिए कार्यरत रहते है और ऐसे लोग मात्र 5-10% रहते है ...
वैसे आपको बता दूं इस दंगल के लिए फार्म भरने के लिए जहाँ 10-12 लाख भरते है  वही 6-7 लाख अभ्यर्थी exam हाल में बैठने की हिम्मत ही नही जुटा पाते है.. जी हाँ , सही सुना आपने.. इस exam में फार्म भरने वाले में से 50% अभ्यर्थी exam में नही बैठते है ..और ऐसा हर साल होता है..ऐसा नही है की इनके पास वो सब पुस्तको का बम्बारमेंट नही होता है, और ये अनपढ़ होते है.. ये वही लोग होते है जो सिर्फ सपने पाल रखते है लेकिन कर्म करने की चाहत नही रखते..!
किसी भी मंजिल के तैयारी से पहले उसके बारे में जान समझ लेना बहुत जरूरी होता है.. खैर जो भी हो अगर आपने इस युद्धभूमि के बारे में अच्छे से जान लिया है तो...तय आपको ही करना है कि आपको इन भीड़ भरे अभ्यर्थियों में रह कर केवल सपने देखना है या सफल बनना है.. अगर सफल बनने की दृढ इच्छा है तो आज ही ठान ले की करना है तो करना है.. 
केवल सोचे नही उस पर action ले ..daily newspaper पर read किया कीजिये.. current अफेयर्स पर ध्यान दे..सप्ताह में दो निबंध अवश्य लिख कर अभ्यास करें.. साथ ही मुख्य परीक्षा के लिए रोजाना कम से कम एक प्रश्न अभ्यास जरूर करे.. किसी भी topic को पढ़े तो उस topic पर आधारित पिछले वर्षों के प्रश्न अभ्यास अवश्य करे...
pre और mains को एक साथ लेकर चले... pre+mains एक साथ लेकर चलिएगा तभी सफल हो पाइयेगा वर्ना भीड़ का हिस्सा बन कर रह जायेंगे..तो सोचना क्या है अब चलो लग जाओ.. मै आपके साथ हूँ ... पर पहले करने के लिए #हौसला और आग के लौ जैसा #जूनून तो पैदा करो...

"हौसला बाजार मे नहीं मिलता..
 पैदा किया जाता है..
 नीलकंठ तो बनना है सबको ...
 पर सबसे जहर पिया नहीं जाता है..
 तड़प हो तो.. पर्वत का सीना चीर नीर फूट पड़ता है..
 कदम बढ़ाओ दोस्त ..upsc के जंग में  मौका मांगा नहीं छीन
 लिया जाता है.."

हार के बैठोगे तो खो जाओगे दुनिया के भीड़ में.. 
#शान और #पहचान बनाना है तो अपना सबकुछ दांव पर लगा दो...

7

जिन्दगी में ऊंचाई पर जाने की तमन्ना हर किसी की
होती है मगर क्या हम सभी अपने सपनों को हकीकत में
बदल पाते हैं??
जवाब सब जानते हैं – नहीं!
आखिर ऐसा क्या भिन्न होता है उन दो अभ्यर्थियों
में जिनके पास एक जैसी शिक्षा, समान पुस्तकें और
अन्य भौतिक समरूपताएं होती हैं फिर भी उनमें से एक
तो कामयाबी का स्वाद चख लेता है और दूसरा
फिरसे एक बार कसम खाता है कि इस बार परीक्षा
का फार्म भरते ही पढूंगा। प्रायः ऐसे अभ्यर्थी अपनी
नाकामयाबियों का बोझ रिश्वत, मीडियम और
शहर-ग्रामीण के जालदार शब्दों पर डाल देते हैं।
मित्रों, विश्वास करें कि यह जिन्दगी इतनी कीमती
है कि आप इसके साथ यह परीक्षण नहीं कर सकते हैं कि
अगली बार………..सचमुच अगली बार पक्का !
एक बार खुद को ईमानदारी से झोंक कर तो देखें अपने
सपनों के पीछे, बिना किसी नकारात्मकता,पूर्वाग्रह
या लीपा पोती के। एक बार किसी दिन सुबह से शाम
तक अपने सपने को अपने साथ-साथ चलाइए, उसका
आनंद
उठाइए और सोचिए कि आगे चार-पांच साल के बाद
अगर आपको आपके सपने नहीं मिले तो आप क्या करेंगे
उसके बिना। सारी जिन्दगी औरों के लिए तालियां
बजाने के लिए थोड़ी जन्में हैं हम। अपने वजूद को
साकार न कर पाने के मलाल के साथ गुमनामी के पन्नों
में बहुत से लोग मर जाते हैं। हमें नहीं मरना है, हम अपने
सपनों को सच करने के लिए अपनी तमाम क्षमताओं के
साथ न्याय करेंगे। जब तक हम कामयाब नहीं हो जाते
हैं तब तक हम केवल अपनी धुन में रहेंगे, अपने सपने के
पीछे…हमारा संसार होगा हमारे सपने, हमारी
किताबें और परिवेश में बिखरा ज्ञान। हम अगर ठोकर
भी खायेंगे तो फिर उठेंगे, अड़े रहेंगे, डटे रहेंगे और एक
दिन तालियों की करतल ध्वनियों के बीच हम देखेंगे
अपने सपने को अपनी आँखों के सामने साकार होते
और मुस्कुराते हुए। ऊंचाई पर जाने की तमन्ना या
तो करो ही मत और अगर कर लेते हो तो फिर संघर्ष के
लिए तैयार रहो। मां शारदे का वरदहस्त न तो
खिलंदड़पन में मिलता है और ना ही कागजी तैयारी
में। मैं एक बात स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि कामयाबी
का रिश्ता ना तो 13-14 घंटे की पढ़ाई से है और ना
किताबों के ढेर से या चैक-जैक से। ये तो हारे हुए के
लिए खुद की तसल्ली के साधन हैं। कामयाबी का
सम्बन्ध तो उचित तैयारी के साथ है जो आपको
किसी विषय वस्तु का विश्लेषण करना सीखा दे और
अभिव्यक्त करने का सामर्थ्य दे दे। विनम्रता के साथ
सीखने की अनवरत तथा अनथक कोशिश और खुद पर
भरोसा ही मेरी नज़र में सबसे बड़ी ताकत है। हार मत
मानिए, लगे रहिए और बता दीजिए पूरी दुनिया को
कि आपका जन्म निराश लोगों में खड़े रहने के लिए
नहीं हुआ है, अपितु सफलता की नई इबारत रखने केलिए हुआ है।

आखिर में आप सभी तैयारी करने वाले साथियों से सिर्फ इतना ही कहना चाहती हूँ कि आम से ख़ास की तरफ बढ़िये, वरना जीते तो सभी हैं – वे भी जो कतार के सबसे पीछे हैं और वे भी, जो जहां खड़े होते हैं, कतार वहीं से शुरू होती है। चुनना आपके हाथ में है कि आप चंद कामयाब लोगों में शुमार होना चाहते हैं जिन्होंने इतिहास में अपना नाम दर्ज करवा लिया है या उन करोड़ों लोगों की तरह जीवन व्यतीत करना चाहते है जिन्हें ना आप जानते ना मै, जो बेनाम वाली ज़िंदगी जी कर चले गये।... 

8

"इंतजार मत करो जितना तुम सोचते हो जिंदगी उससे कहीं तेज निकल रही है " 

डॉन ब्रैडमैन ने जब रिकॉर्ड बनाये थे तब किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि सचिन तेंदुलकर जैसा कोई बल्लेबाज होगा जो क्रिकेट का भगवान बनकर सामने आएगा ....ठीक यही बात सचिन के समय में भी किसी ने नहीं सोची थी कि विराट कोहली जैसा महान बल्लेबाज भी जन्म लेगा जो कम उम्र में ही पुराने रिकार्ड्स की धज्जियाँ उड़ाना शुरू कर देगा ..यही होता है कोई भी शिखर अंतिम नहीं होता बशर्ते आपमें वो ताकत और हौसला होना चाहिए कि आप उससे भी ऊपर अपने सफलता के ध्वज को गाड़ सको ! 
एक सामान्य सी चीज बताता हूँ और ये शत प्रतिशत सच है कि किसी भी मुश्किल लक्ष्य के बारे में अगर 100 लोगो से पूछा जाता है तो उसमे 95 लोगों का उत्तर होता है "" असंभव "" ...और सिर्फ 5 लोग ही कहते हैं कि हाँ मैं ये कर सकता हूँ ...और वो पांच ही उस लक्ष्य तक पहुँचते हैं ...हाँ कोई आगे या कोई पीछे जरूर होता है पर पहुँचते सब हैं ....... अब जरा सोचिये उन 5 ने क्या किया ? ....सिर्फ एक अलग तरह से सोचा ना ...? ...और इसी सोच ने उन्हें दूसरों से अलग कर दिया ...तो हम लोग क्यों उस 95 वाली भीड़ का हिस्सा बनते जा रहे हैं ...क्यों नहीं सोच सकते कुछ अलग .... और याद रखिये जिस दिन आपने कुछ अलग सोच लिया ना ..दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती आपको उस लक्ष्य को पाने से .!! 
जिंदगी का कोई ऐसा टाइम नहीं होता जिसमे हम एक नयी शुरुआत नहीं कर सकते ...जाने कितनों ने ये करके दिखाया है ...यूँ कहें कि "" सफलताएं उम्र की मोहताज नहीं होती वो तो किसी भी जगह . किसी भी समय , और किसी भी तरह से आपसे मिलने को तैयार रहती हैं बशर्ते आप खुद को उनके लिए साबित करके तो दिखाओ "' 

अरे यार दो पल की जिंदगी हैं...और याद रहे कि जैसी भी है दोबारा नहीं मिलने वाली ..तो क्यों हर पल को बहुत ज्यादा कठिन बनाते जा रहे हो .....बोझ सी जिंदगी और फिर मौत का इंतजार ...बस इत्तू सी है जिंदगी ..? 
छू ले आसमान जमीं की तलाश ना कर , जी ले जिंदगी ख़ुशी की तलाश ना कर , तकदीर बदल जाएगी खुद ही मेरे दोस्त , मुस्कुराना सीख ले वजह की तलाश ना कर !! 
जरा सोचकर देखो भगत सिंह , सुखदेव , चंद्रशेखर आजाद , राजगुरु और भी जाने कितने ....जो ज्यादा तो नहीं जी पाए पर खुद को हमेशा के लिए अमर कर गए ...
9

क्या-क्या कहते हैं जमाने के लोग 
जब कदम बढाते हैं आप #सिविल सर्विस की तैयारी के लिए...
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देखिए एक नमूना.......
.. कलेक्टर बनना मुश्किल ही नही, नामुमकिन है। 
(पड़ोसी) 
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. तेवारी का लडका कोचिंग पोचिंग सब किया था 
10 साल दिल्ली में रहकर पढा 
कुछौ नही हुआ..... खाली हाथ लौटकर आवा... अब चौराहे पर मोबाईल रिचार्ज की दुकान चलाता है। 
. (गांव वाले) 
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एतना साल तक गांव में रहत हो गइल....... कबहुं सुने हो कि गांव में अगल बगल केहु का लरका लरकी कलेक्टर बना है 
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. बडे़ बडे़ नही कुछ उखाड़ पाये अब तुम उखाड़ के दिखाओगे 
उखाडो...... देखते हैं तुम्हरा भी जोर बल 
(छोटी नौकरी की तलाश वाले) 
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इहां ग्रूप थर्ड में तो नौकरी मिल ही नही रहा है और ई ससुर कलेक्टर बनने का ख्वाब देख रहे हैं। 
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. का कहे रहे हो.... हिन्दी मीडियम से तैयारी करोगे 
तब तो बस भूल ही जाओ........... कुछौ न होगा। 
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जहां पहुंच और शिफारिश हैं। उहां तो रूपिया पइसा देय से भी कुछ ना होई रहा और ऊ कह रहा है कि हम कलेकटरै बनब 
(रिश्तेदार) 
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. न खेत न बारी..... कलेक्टर बनै का इंतजारी 
सच बतायें तो....... भइया शिरिफ रुपिया की बर्बादी है। 
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. बरा बरा शहर में जाके....... लरका लरकी खराब होई जात हैं
बहुत देखें हैं भइया...... दिल्ली बंबई में शहरी कल्चर 
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. कोचिंग वाले सब चूतिया बनाते हैं। कुछ नही पढाते हैं सब धंधा बिजनेस है। बच्चों को लूट कर लावारिस छोड़ देते हैं।............ सेलेक्शन , घंटा करवाते हैं। 
सेलेक्शन के बारे में तो भूल ही जाओ। 
(साथी - दोस्त ) 
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.हमारी बात मानो तो भाई SSC, Railway, Bank की तैयारी करो जल्दी नौकरी मिल जाएगी। 
हम तो 7 साल से IAS /PCS दे रहे हैं 
अबे तक कुछौ न हुआ 
(सीनियर्स) 
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. फलां-फलां आप्शनल सब्जेक्ट ले लो। बहुत नंबर मिलता है। 
जल्दी कलेक्टर बन जाओगे 
हमारे यहां से पढो.......... फीस कम करा देंगे। 
( कोचिंग वाले) 
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लौंडा, पढ़ाई तो खूब कर रहा है 
देखते हैं प्री पास हो जाएगा कि नही
प्री परीक्षा पास हो जाने पर 
अरे तुक्के से पास हो गया 
मेंस पास करके दिखाये तो...... जाने 
(रूम पार्टनर ) 
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. अब बहुत कंपटीशन है भाई इस फील्ड में 
IIT, IIM, AIIMS वाले सब इधर ही हांथ पांव मार रहे हैं। 
हम तो कहेंगे कि - पहले छोटी मोटी नौकरी हांथ में ले लो 
तब कलेक्टरी के बारे में सोंचना 
( एक दो बार प्री दे चुके कैंडिडेट) 
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. बहुत किताब पढना पडता है। 16 घंटे रोज पढोगे 
तब कलेक्टर बन पाओगे। इतनी बड़ी और भारी भरकम परीक्षा में सफल होने के लिए 2-4 घंटे में कुछ नही होगा। 
(टापर्स के कथन) 
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. और क्या चल रहा है? तैयारी ठीकठाक हो गई है। कहीं हो रहा है कि नही? मतलब होने का चांस है कि नही 
(घर जाने पर पड़ोसी) 
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. इस बार पेपर कैसा हुआ? सुना है प्री में बहुत कठिन प्रश्न पूंछा था। (मोहल्ले के यार दोस्त) 
.तुम्हारे पीछे लाखों रुपिया फूंक दिये। ऊहां दिल्ली में मस्तीबाजी कर रहे हो। हम और नही पढा सकते हैं । बोरिया बिस्तर बांधों और इहां आके खेतीबाड़ी में मदद करो। नाहि त ब्याह शादी कर दें। कौनो काम धंधा करो। हमे और बच्चों का भविष्य भी देखना है। तुम्हरे पीछे परिवार को भूखों नही मारना है। ( गुस्सैल बाप) 
. तैयारी करो बेटा.......... देखा जाएगा 
जब तक जान है। कसर नही छोडेंगे 
चाहे खेत बाडी सब बिक जाये 
छोटी सी नौकरी में जो कुछ हो सकता है सब करेंगे। 
जो भी रूपिया पैसा की जरूरत हो...... बताना 
हमेशा पढते ही मत रहना 
तबियत का भी ख्याल रखना। 
इस बार न सही, अगली बार सही 
बस निराश मत होना, 
(सामान्य मा बाप /भाई बहन) 
. - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - 
इन सभी कथनो से आपका सामना होगा। जब आप सिविल सर्विस की तैयारी करेंगे। यदि इनसे विचलित हो गये तो डूब जाओगे। लेकिन अगर तैरते रहे........ धाराओं के प्रतिकूल भी तो दरिया पार कर जाओगे।। और दरिया पार कर जाने पर सब कहेंगे कि - 
. - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - 
. फलाने का लडका बहुत मेहनती था भाई । आखिरकार कलेक्टर बनकर ही दम लिया। 
सोंच रहे हैं कि............ हम भी अपने बचवा को आई ए एस की तैयारी करवाते हैं। जब उनका लडका कर सकता है तो हमारा क्यों नही कर सकता? 
कुछ समझे कि नही मेहनत करनी पड़ेगी भाई.......
और अंत में मित्रों हौसला अफजाई के लिए नीदा फ़ाज़ली की इक पंक्ति है

सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो 
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो

इधर उधर कई मंज़िल हैं चल सको तो चलो 
बने बनाये हैं साँचे जो ढल सको तो चलो

किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं 
तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो

यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता 
मुझे गिराके अगर तुम सम्भल सको तो चलो

यही है ज़िन्दगी कुछ ख़्वाब चन्द उम्मीदें 
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो

हर इक सफ़र को है महफ़ूस रास्तों की तलाश 
हिफ़ाज़तों की रिवायत बदल सको तो चलो

कहीं नहीं कोई सूरज, धुआँ धुआँ है फ़िज़ा 
ख़ुद अपने आप से बाहर निकल सको तो चलो...

10

अगर आप परीक्षा को लेकर तनाव में हैं तो इस पोस्ट को पूरा पढ़ें और आंकलन करें...

 #तैयारी के कुछ मुख्य बिंदु...(नए अभ्यर्थी मित्रों के लिए)

●जब तक सिलेबस को ठीक से नही पढ़ेंगे,पढ़ाई में व्यवधान स्वाभाविक ही रहेगा...
●फ़ोन/fb/wtsapp बन्द करने की जगह कम use करें,
क्योंकि इनके बिना भी काम नही चलने वाला ।
●लगभग दिन में जब भी पढ़ के उठे तो हर बार अपना वो लक्ष्य याद करें जो आप पाना चाहते हैं..
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●एक दिन में कम से कम 3 सब्जेक्ट्स पढ़ें,अगले दिन कुछ नया पढ़ने से पहले पुराने पढ़े हुए मैटर का #revision करें...
●अभी आपको पढ़ाई करते करते बोरियत हो सकती है
लगेगा कोई मेरी तरफ ध्यान ही नही दे रहा,
जबकि मैं इतना पढ़ रहा/रही हूँ
उस समय आपको अपना धैर्य बना के रखना होगा,
क्योंकि 1 साल की लगातार तैयारी ही आपको सिलेक्शन दिलवा सकती है।
●सबसे बड़ी बात गैप न करे;
यदि गैप हुआ तो चीजों में निरंतरता का अभाव रहेगा..ऐसी स्थिति में भूलने की समस्या रहेगी।
●जो भी पढ़ें वो इस तरह पढ़ें जैसे बचपन में पढ़ने की आदत थी,मतलब लगन से,
जितना लगन से उतनी जल्दी याद होगा।
●भगवान में आस्था बनाएं रखे
पहले ही प्रयास में आप सफल होंगे ये विश्वास दिल में बनाएं रखें।
●ध्यान रखिए जिस दिन रिजल्ट आता है उस दिन के वो हँसते हुए चेहरे लगभग 1 साल तक अनवरत अध्ययन/लगभग बहुत ही कम मनोरंजन से जी हुई जिदंगी का फल होते हैं।
इसलिए अपने शेड्यूल का कड़ाई से पालन करें...
●जब भी हौसलें टूटें,थकान हो, तो अपने #सपने को याद करें ।
●1 घण्टे की पढ़ाई में कम से कम 10 मिनट का गैप रखें जिससे याद की हुई पढ़ाई स्थिर हो सके...
●अपने #नोट्स बनाते चलें..
करंट अफेयर्स daily की daily तैयार करें।
●सबसे बड़ी बात जीवन में प्यार को महत्च दें और अपनी भावनाओं को भी,लेकिन किसी भी तरह की उम्मीद न पालें किसी से क्योंकि लक्ष्य आपको हासिल करना है तो लिहाजा मेहनत आपकी ही होगी।
●अपनी पढ़ाई के लिए जो जगह और समय व्यवस्थित करें उसी समय पढ़ें
जरा सा आलस आपको लक्ष्य से दूर कर देगा।
●आखिरी बात जीवन में 'योग्यतम जीविता का सिद्धान्त' हमेशा लागू होता है..
यदि आप नही पढेंगे तो कोई और आपकी जगह लेने को हमेशा तैयार है...

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अब बस तभी रुकना हैं जब सफलता हमारे कदमों में हो ... 

ये आपका फैसला होगा कि आसमान की ऊंचाइयों से खूबसूरत दुनिया को देखते हो या असफलता के चौखट में ही रहकर सिमट जाते हो 
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क्या आप असफलता की चौखट पर ही अपना दम तोड़ देना चाहते हैं , क्या आप भूल गए कि आप घर से बाहर इसलिए निकले थे ताकि आप अपने सर पर जीत का ताज पहन के घर पहुंचे , क्या आप भूल गए उनके ख्वाहिशों को ,अरमानों को जिन्होंने आपके लिए वर्षों से संजो कर रखे हैं , आखिर हुआ क्या है आपको ,आखिर क्यों आप आज उस तरीके से नहीं लड़ रहे जिस तरीके से आप को लड़ना चाहिए ! क्यों आप उन कसमों से दूर भाग रहे हैं जो आपको जीत दिलाती हैं आखिर क्यों आप एक नादान परिंदे की तरह गुलामी की जंजीरों में जकड़े हुए खामोश बैठे हैं , क्यों अभी तक आपके अंदर का मानव जगा नहीं !

बहुत कुछ तो मैं नहीं कहना चाहता पर इतना जरूर बता दूं कि आप वह है जिसके अंदर से ही शख्सियत निकलती है , आप वह है जो कर्मो का तूफ़ान पैदा कर इतिहास बदल सकता है , आप वह है जो लकीर को इतनी लंबी खींच सकता है कि आगे आने वाले वर्षों तक वह सुनहरा बनकर चमकता रहेगा ! वक्त बहुत नहीं है पर वक्त इतना जरूर है कि आप अपने जिंदगी को अपने जीवन को साकार कर जाइए !

गौर कीजिए आपने आज तक क्या किया जब आप अपने घर से बाहर निकले थे तो आप की आंखों में कुछ ख्वाब थे , आपके होठों पर कुछ जज्बात थे , आपके चेहरे पर एक चमक थी और आपके कर्मों में एक तूफान था ! आखिर क्यों आप थम सा गए हैं आपकी सिद्दत कहां गई , आपका जुनून कहां गया , ऐसा तो नहीं कि आप जिंदा लाश बन गए हैं ! जनाब याद रखिए दुनिया उन्हीं को याद रखती है जो याद रखने जैसा कुछ कर जाते हैं !

कल का तो मुझे पता नहीं पर आपसे इतना जरूर कहूंगा कि आप इस कदर मेहनत करो की खुद को सुकून मिले ! इतिहास गवाह है इतिहास उन्हीं का लिखा जाता है जो संघर्षों से गुजरते हुए खुद को खुद के लिए खड़ा कर लेते हैं आपके अंदर –

दम है
ताकत है
शिद्दत है
जुनून है
जज्बा है
जज्बात है
ख्वाब है
ख्यालात है

याद रखिये आप इंसान हैं जो लड़ सकता है गिर के उठ सकता है जो हार के भी जीत सकता है और जीत के भी जीत सकता है ! 

आपके लिये चंद लाइने – 

हौंसले हो बुलंद तो हर मुश्किल को आसां बना देंगे , 
छोटी टहनियों की क्या बिसात, हम बरगद को ही हिला देंगे ! 
वो और हैं जो बैठ जाते हैं थक कर मंजिल से पहले , 
हम बुलंद हौंसलों के दम पर आसमां को ही झुका देंगे ! 

हम कैसे हार मान सकते हैं अपनी मंजिल, अपने ख्वाबों से पहले, कैसे भाग सकते हैं अपनी जिम्मेदारियों से किसी के भी प्रति ! बहुत लोगों की उम्मीद की किरण हैं हम, चाहे वो हमारे माता-पिता हो, चाहे हो भाई बहन, चाहे हो रिस्तेदार कोई, चाहे तो हमारा अपना समाज (Society), चाहे हो शहर अपना, हो चाहे हमारा अपना देश.

तो दोस्तो पूरी ताकत से जुट जाइये और अब बस तभी रुकना हैं जब सफलता हमारे कदमों में हो ! ऐसी कोई चीज नहीं है, जो हम मेहनत, लगन व आत्मविश्वास से नहीं पा सकते. खुद पर भरोसा कर इंसान अपनी किस्मत खुद बना सकता है... 

Tuesday, June 2, 2020

यूपीएससी_परीक्षा_में_सफलता_का_राज

यूपीएससी_परीक्षा_में_सफलता_का_राज


1. नियोजित अध्ययन, कड़ी मेहनत और आंतरिक प्रेरणा सफलता की कुंजी है।
2. सशक्त इच्छाशक्ति और ईश्वर पर विश्वास सफलता की कुंजी है।
3. कड़ी मेहनत, ध्यान केंद्रित दृष्टिकोण और भगवान पर विश्वास कदम आगे बढ़ रहे हैं- सफलता के लिए पत्थर
4. कड़ी मेहनत, अच्छी योजना और सकारात्मक दृष्टिकोण
5. समर्पण, समय प्रबंधन और कड़ी मेहनत सफलता के रहस्य हैं।
6. आत्मविश्वास, नियोजन और व्यवस्थित अध्ययन सफलतापूर्वक कदम उठा रहे हैं।
7. प्रेरणा और आत्मविश्वास सफलता की कुंजी हैं
8. निर्धारण, सकारात्मक दृष्टिकोण - सफलता की कुंजी
9. धैर्य, विकल्प का चयन, कड़ी मेहनत और शुभकामनाएँ।
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कठोर परिश्रम:
याद रखें कि कड़ी मेहनत के लिए कोई विकल्प नहीं है। कोई भी नहीं आएगा और आपकी सहायता करेगा। आपको अपने पूरे पाठ्यक्रम को पूरा करना होगा सिविल सेवा प्रतियोगिता एक मैराथन दौड़ की तरह है इसके लिए किसी भी प्रतियोगी परीक्षा / यहां तक ​​कि यह पूरी दुनिया एक प्रतियोगी दुनिया है। सिविल सेवाओं की उम्मीदवार अच्छी तरह से शिक्षित हैं और 50% से अधिक उम्मीदवार गंभीर हैं। एक, जिसने आत्मविश्वास दिया है कि वह इस परीक्षा में सफल हो सकता है और सफल हो सकता है, केवल तभी दिखाई देगा। यूपीएससी के आँकड़ों में यह भी पता चलता है कि कुल आवेदकों के लगभग 50% केवल प्रारंभिक परीक्षा में दिखाई देते हैं।

गंभीर उम्मीदवारों में से 50 प्रतिशत के बीच, 20 प्रतिशत से ज्यादा कड़ी मेहनतकश हैं, यानी 50,000 से ज्यादा उम्मीदवार प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, जो वास्तव में कड़ी मेहनत कर रहे हैं। सभी में लगभग 400 पद हैं तो, इसे 400 में बनाने के लिए, वास्तव में वास्तविक कड़ी मेहनत, अच्छे लेखन कौशल, अनूठी शैली को एक साथ रखा जाना चाहिए। यह एक विश्वविद्यालय परीक्षा नहीं है जो कोई अतिरिक्त कड़ी मेहनत, अभ्यास और अनूठी प्रस्तुति देता है, वह सफल होगा यानी शीर्ष 400 में से होगा। इसलिए सभी सफल उम्मीदवारों ने सफलता के लिए कड़ी मेहनत की पहली पूर्व-आवश्यकताएं दीं।

सफलता और कड़ी मेहनत के लिए कोई कम कटौती नहीं है, कभी भी अप्रत्याशित न हो। तैयारी के दौरान कई उतार-चढ़ाव हैं यह "डाउन" है जिसे अधिक सख़्त और कुशलता से निपटने की जरूरत है - भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर और अधिक। इन पंक्तियों को याद रखें - "आप वर्षों तक निर्माण करते हैं, एक पल में तोड़ा जा सकता है - वैसे भी निर्माण करें"।

*निष्ठा:*
अपने कर्तव्य की ओर समर्पण हमेशा जीवन में भुगतान करता है अपनी पढ़ाई में पूरी तरह से समर्पित और केंद्रित रहें। बड़ी चीजों को प्राप्त करने के लिए आपको अपने जीवन के इस स्तर पर कुछ ऐसी फिल्में, पार्टियां, और मनोरंजन आदि का त्याग करना है। बस दिन और दिन बाहर काम करते हैं और आगे चलते हैं जैसा कि पिछले विषय में बताया गया है, किसी को लक्ष्य के प्रति समर्पण होना चाहिए अन्यथा ये हासिल करना बहुत कठिन है। मानक अध्ययन पुस्तकों का चयन करें / नोट्स तैयार करना, पढ़ने के रूप में ही इस अवधि के दौरान आपके पास एकमात्र मनोरंजन होना चाहिए।

*धैर्य :*
चूंकि सीएसई तैयारी एक वर्ष का न्यूनतम, प्रारंभिक चरण से साक्षात्कार के राज्य तक फैल जाती है, इसके लिए आपको अपने गति को बनाए रखने के लिए बहुत धैर्य की आवश्यकता होती है। कभी-कभी आप अपनी तैयारी के दौरान थका हुआ और आगे पढ़ाई के बीमार महसूस कर सकते हैं। अध्ययन के एकरसता को तोड़ने के लिए अपने शांत और धैर्य बनाए रखें। दोस्तों और माता-पिता से बात करें वे आपके साथ बहुत आवश्यक भावनात्मक समर्थन प्रदान करेंगे। प्रत्येक उम्मीदवार पहले प्रयास में खुद को शीर्ष करने की कोशिश करता है यदि आप के माध्यम से नहीं मिलता है, निराश मत हो अपनी गति को धीमा न करें और साथ ही आपको सफलता के फल काटने के लिए दूसरे वर्ष के लिए धैर्य रखना चाहिए। इसलिए सफलतापूर्वक तैयारी की अवधि के दौरान किसी को धीरज और गति को नहीं खोना चाहिए।

*आत्मविश्वास:*
आपका आत्मविश्वास फर्क पड़ सकता है यदि आप अपने आप में विश्वास नहीं करते हैं और तब प्राप्त करने की आपकी क्षमता, चाहे आप कितना मुश्किल हो आप असफल रहने का अंत करेंगे तो आपका आत्मविश्वास हमेशा एक उच्च स्तर पर होना चाहिए - हमेशा आप लोगों की कंपनी में होना चाहिए, जो आपके प्रेरक स्तर को बढ़ा सकते हैं और आप को प्रेरित कर सकते हैं। नज़दीकी मित्रों के एक समूह का निर्माण करें, जो निर्धारित किए गए हैं कि आप इसे सिविल सेवा परीक्षा में बना सकते हैं। अच्छे दोस्त रखें, वे हमेशा प्रेरणा और प्रेरणा का स्रोत हैं।

*भगवान / भाग्य में विश्वास:*
1. सिविल सेवाओं को पारित कर दिया गया है / मंजूरी दे दी है / सबसे ज्यादा उम्मीदवारों ने इसे सफलता की एक प्रमुख कुंजी के रूप में जोड़ दिया है। क्यों हर कोई कहता है इसके पीछे एक कारण है अप्रत्याशित कारण नीचे सूचीबद्ध हैं:

2. आम तौर पर, उम्मीदवार एक मानक फार्मूला स्वीकार करते हैं, जो एक बार आइंस्टीन के बारे में कहा गया था - "जीनियस 90 प्रतिशत पसीना और 10 प्रतिशत प्रेरणा" है। कुछ लोग कह सकते हैं कि यह 99 फीसदी कड़ी मेहनत और 1 फीसदी भाग्य है। यह अच्छी तरह से कूदने जैसा है चाहे वह 90 प्रतिशत या 99 प्रतिशत हो, तो केवल एक ही घाटा होगा 1 से 10 प्रतिशत भिन्नता के लिए कारक क्या हैं व्यक्ति से अलग

3. यह अक्सर ऐसा होता है कि एक विषय को छोड़कर सभी विषयों को अच्छी तरह से पढ़ाया जाता है, जैसा कि उसने सोचा कि वह विषय उसके लिए अच्छी तरह से जाना जाता है। परीक्षा में सवाल उस विषय से स्वयं प्रकट हो सकता है उम्मीदवार संतुष्ट रूप से सवाल का जवाब देने में सक्षम नहीं हो सकता है, लेकिन उसके पास उसके नियंत्रण के तहत इतना अधिक है

4. कुछ समय पूर्व में, अनजाने में, उम्मीदवार गलत विकल्प को चिह्नित करते हैं, हालांकि उन्हें जवाब पता है। यह एक मानसिक गलती है उम्मीदवार को अधिक सतर्क होना चाहिए था इसलिए, मानसिक चेतावनी सार का है। यह उम्मीदवार के नियंत्रण में भी एक संकाय है। प्रीमिम्स में, यदि आप संदेह में हैं, तो आप दो समान विकल्पों के बीच भ्रमित होने के लिए बाध्य हैं। इसलिए, प्रश्न को ध्यान से समझें और किसी भी विकल्प को न मानें, जब तक आप प्रश्न के संदर्भ में प्रत्येक विकल्प को सावधानी से संतुलित नहीं करते।

5. मुख्य करने के लिए, आपके नौ कागज़ात हैं भाषा के कागजात को छोड़ दें क्योंकि वे एक योग्यता प्रकृति के हैं और मुख्य परीक्षा के स्कोर पर नहीं जोड़ा जा रहे हैं इसके अलावा, भाषा ऐसा कुछ नहीं है जिसे रातोंरात तैयार किया जा सकता है। नियमित रूप से समाचार पत्रों और पत्रिकाओं को नियमित रूप से पढ़ना जारी रखें। अन्य सात कागजात प्रकृति में अलग होने जा रहे हैं

6. यद्यपि यूपीसीसी द्वारा की गई चाबी यद्यपि दी गई है, यह निश्चित नहीं है कि मूल्यांकनकर्ता अलग-अलग विद्यार्थियों को एक ही अंक के लिए उसी अंक का पुरस्कार देगा या नहीं।

7. एक मूल्यांकनकर्ता श्री ए की शैली को पसंद कर सकता है, लेकिन वह भी श्री बी के उत्तर को पसंद नहीं कर सकते हैं, हालांकि अंक समान हैं, लेकिन प्रस्तुति की शैली अलग है

8. मुख्य साधन भी एक इंसान है; वह हमेशा एक ही तरीके से उसी अंक को पुरस्कार देने के लिए व्यवहार नहीं कर सकता है। मूल्यांकनकर्ता एक मशीन नहीं है, जो समान रूप से व्यवहार करेगा और हर समय एक ही मूड में है।

9. पेपर के सुधार के समय मूल्यांकन और मूल्यांकनकर्ता की मनोदशा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

10. सभी सात कागजात विभिन्न व्यक्तित्वों के पास जाते हैं और मूल्यांकनकर्ताओं की क्षमता भी एक समान नहीं है।

11. एक व्यक्ति सभी कागजात का मूल्यांकन नहीं करता है विभिन्न पृष्ठभूमि के विभिन्न मूल्यांकनकर्ताओं ने एक ही विषय का मूल्यांकन किया। वहां बहुत ही मज़ेदार और कठिन लोग भी मौजूद हैं। मान लीजिए कि कोई मूल्यांकनकर्ता एक प्रश्न के लिए एक अंक देने के लिए थोड़ा उदार है। एक साथ रखे सभी कागजात उम्मीदवार के लिए एक और 30 अंक अधिक जोड़ देंगे जो मेरिट सूची में आपके अंतिम स्थान पर वास्तव में अंतर की दुनिया बना सकते हैं। इस तरह के प्रतियोगिता में, एक अंक भी अंतर बना सकता है।

12. साक्षात्कार के चरण में भी, बोर्ड के अध्यक्ष और विभिन्न पृष्ठभूमि वाले सदस्य बोर्ड में बैठते हैं। दो अलग-अलग बोर्डों में एक व्यक्ति को समान अंकों की संख्या को देना असंभव है। यहां सवाल उठाया, समय, बोर्ड के सदस्य एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

13. एक साक्षात्कार के 30-40 मिनट का एक छात्र की क्षमता का न्याय करने का सबसे अच्छा तरीका नहीं है।

14. कई बार, परिचित प्रश्न, जो उम्मीदवार के लिए दिलचस्प लगते हैं, पूछा जा सकता है कि निश्चित रूप से उम्मीदवारों के लिए क्या बढ़त होगी। दूसरी बार, बोर्ड से पहले भी उम्मीदवार द्वारा अच्छे उत्तर भी व्यक्त नहीं किए जा सकते हैं।

15. अच्छी तरह से ज्ञात मामले हैं जहां उम्मीदवार को अलग-अलग अंक दिए गए थे, जो एक परीक्षा से दूसरे तक 100 के दशक में अलग-अलग थे। एक व्यक्ति को पहले प्रयास में 210/300 अंक मिले, वही व्यक्ति को साक्षात्कार में 150/300 की अगली कोशिश में मिला। निष्कर्ष क्या हो सकता है? क्या हम निष्कर्ष निकालते हैं कि एक ही व्यक्ति एक वर्ष की अवधि में खराब हो गया है? नहीं, यहां उनके सामने दिए प्रश्न उनसे अलग हैं जो पिछले वर्ष में पेश किए गए थे।

16. सबसे ऊपर, परीक्षा के दौरान एक को अच्छे स्वास्थ्य रखना चाहिए। यद्यपि यह आपके नियंत्रण में हो सकता है, कुछ चीजें एक के नियंत्रण से बाहर हैं। इससे उम्मीदवार की सफलता की संभावना बढ़ सकती है।

17. उपरोक्त कारणों के लिए, उम्मीदवार कहते हैं कि भाग्य / भगवान की कृपा से भी एक प्रमुख भूमिका निभाता है। इस प्रतिस्पर्धी दुनिया में बड़ी सफलता के लिए उनके पक्ष में उपर्युक्त कारकों को भी खेलना चाहिए। निष्कर्ष यह है कि अगर आपको विफलता का सामना करना होगा तो आपको चिंता नहीं करनी चाहिए अनियंत्रित कारक हैं, जो हमारे ज्ञान के बिना भी हमारे साथ खेलते हैं, इसलिए कड़ी मेहनत और अतिरिक्त कड़ी मेहनत करें और बाकी को सर्वशक्तिमान को छोड़ दें।

18. फिर भी, याद रखें कि कड़ी मेहनत के लिए कोई विकल्प नहीं है। और यह भी मानना ​​है कि भगवान आपके पक्ष में हैं और पूरा दृढ़ संकल्प और बुद्धिमान अध्ययन और अभ्यास के साथ आगे बढ़ें, जो आपके लिए सफलता लाएगा।

UPSC मुख्य परीक्षा का फॉर्म कैसे भरें?

UPSC मुख्य परीक्षा का फॉर्म कैसे भरें?

मुख्य परीक्षा का फॉर्म भरते समय क्या सावधानियाँ बरतें ?
आवश्यकता क्यों ?... 

हर वर्ष प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम के तुरंत बाद सफल उम्मीदवारों के सामने एक परेशानी यह आती है कि वे मुख्य परीक्षा का फॉर्म भरते समय क्या सावधानियाँ बरतें? ये सावधानियाँ इसलिये  ज़रूरी हैं क्योंकि इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य इसी फॉर्म की जानकारियों के आधार पर आपसे सवाल-जवाब करते हैं और आपका मूल्यांकन करते हैं।

हम हर वर्ष इंटरव्यू के समय ऐसे उम्मीदवारों को देखते हैं जिन्हें अफसोस होता है कि उन्होंने मुख्य परीक्षा के फॉर्म में कोई बात क्यों लिख दी थी? कई बार यह अफसोस अंतिम परिणाम के बाद होता है क्योंकि विभिन्न सेवाओं या राज्यों के संबंध में गलत प्राथमिकता भर देने के कारण व्यक्ति की पूरी ज़िंदगी दाँव पर लग जाती है। 

कुछ सफल अभ्यर्थी ऐसे हैं जिन्होंने लापरवाही से आई.ए.एस. (भारतीय प्रशासनिक सेवा) के बाद आई.एफ.एस. (भारतीय विदेश सेवा) को अपनी वरीयता सूची में लिख दिया था और संयोग ऐसा बना कि उन्हें वही सेवा मिल गई। उनका व्यक्तित्व ऐसा है कि वे देश के भीतर रहना और कोई महत्त्वपूर्ण कार्य करना चाहते हैं पर उनकी सेवा में ऐसा मौका मिल नहीं पाता। 

वे इतना साहस भी नहीं कर पाते कि नौकरी को छोड़कर पुनः परीक्षा दे दें क्योंकि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वे पुनः सफल होंगे। बाकी सेवाओं में रहते हुए तो उम्मीदवार पुनः इस परीक्षा में बैठ सकता है किंतु नियम है कि अगर कोई उम्मीदवार  भारतीय विदेश सेवा के लिये  चयनित हो गया है तो वह इस्तीफा देकर ही इस परीक्षा में पुनः बैठ सकता है। 

यह और ऐसी ही कई अन्य गलतियाँ हैं जो फॉर्म भरते समय उम्मीदवारों से हो जाती हैं और बाद में उन्हें निरंतर परेशान करती हैं। 

मूल समस्या यह है कि फॉर्म भरते समय उम्मीदवारों को विभिन्न सेवाओं आदि से संबंधित अधिकांश पक्षों की जानकारी ही नहीं होती और जानकारी के इसी अभाव के कारण वे ऐसी गलतियाँ कर बैठते हैं। 

कुछ वर्ष पहले तक उम्मीदवारों को यह मौका मिलता था कि वे इंटरव्यू के समय अपनी सेवा संबंधी वरीयताएँ बदल सकते थे पर अब ऐसा नहीं है। इसलिये  यह और ज़रूरी हो जाता है कि मुख्य परीक्षा का फॉर्म भरते समय हम लापरवाही न करें। 

वर्तमान भारत सरकार इन नियमों को लचीला बनाने पर विचार कर रही है (जैसे यह कि उम्मीदवार अपनी सेवा या राज्य संबंधी वरीयताएँ बदल सकें) किंतु जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक तो उम्मीदवारों को विशेष सावधानी बरतनी ही चाहिये।

फॉर्म के विभिन्न खंडों से जुड़ी समस्याएँ और अपेक्षित सावधानियाँ

अभिरुचियाँ (Hobbies)

जो प्रश्न मुख्य परीक्षा के उम्मीदवारों को सबसे ज़्यादा परेशान करता है, वह यही है कि वे अभिरुचियों के अंतर्गत कुछ भरें या नहीं; और अगर भरें तो क्या भरें?

गौरतलब है कि मुख्य परीक्षा के फॉर्म में प्रश्न संख्या 18 (डी) का संबंध रुचियों से है। इसकी भाषा है- ‘अन्य पाठ्येतर गतिविधियाँ व रुचियाँ (जैसे कि अभिरुचियाँ आदि)’ [Other Extra Curricular Activities and Interests (Such as hobbies etc.)]। 

इस प्रश्न का भाव है कि उम्मीदवार ने पढ़ाई के अलावा किन गतिविधियों में हिस्सा लिया है या उसकी रुचि अथवा अभिरुचि किन विषयों में रही है?

चूँकि इंटरव्यू में प्रायः रुचियों से जुड़े प्रश्न ठीक-ठाक संख्या में पूछे जाते हैं, इसलिये  कई उम्मीदवार इस बात से बेहद डरे रहते हैं कि वे इस कॉलम में क्या लिखें? कई उम्मीदवार तो घबराहट के मारे इस कॉलम को खाली ही छोड़ देते हैं।

इस संबंध में हमारी सबसे पहली सलाह यह है कि आप भूल कर भी इस कॉलम को खाली न छोड़ें। इस कॉलम के खाली होने का मतलब है कि आप पढ़ाई के अलावा कुछ भी करना पसंद नहीं करते। 

याद रहे कि इंटरव्यू बोर्ड ऐसे प्रत्याशियों की तलाश करता है जो सामान्य जीवन के प्रति सहज और ज़िंदादिल हैं। उसे ऐसे उम्मीदवार बिल्कुल पसंद नहीं आते जो सामान्य जीवन के प्रति अरुचि या असहजता का प्रदर्शन करते हैं। अगर कोई उम्मीदवार अपनी कोई रुचि नहीं लिखता है तो उसके बारे में इंटरव्यू बोर्ड में बेहद नकारात्मक छवि बन जाती है।

दूसरा प्रश्न है कि अगर रुचि लिखनी ही है तो एक रुचि लिखी जाए या एक से अधिक रुचियाँ भी लिखी जा सकती हैं? इस संबंध में आपको खुद ही निर्णय करना चाहिये । अगर आप एक ही रुचि के संबंध में सहज हैं तो एक ही लिखें और यदि एक से अधिक में सहज हैं तो उन सभी का ज़िक्र करें। कोशिश करनी चाहिये  कि 2-3 से अधिक रुचियाँ न लिखी जाएँ। अधिक रुचियाँ लिखने से एक तो उम्मीदवार के जटिल प्रश्नों में फँसने की संभावना बढ़ जाती है और दूसरी संभावना यह भी बनती है कि बहुत सी रुचियाँ देखकर इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य उस ओर ध्यान न दें।

अब सवाल है कि कौन सी रुचियाँ भरने योग्य हैं और कौन सी नहीं? अच्छी रुचियाँ वे हैं जो आपको एक सहज व्यक्ति के तौर पर प्रदर्शित करती हैं, न कि आपके ऊपर महानता का आवरण चढ़ाती हैं। उदाहरण के लिये , ‘फिल्में देखना’ या ‘चित्रकारी करना’ अच्छी रुचियाँ मानी जाती हैं किंतु जब कोई उम्मीदवार रुचियों के नाम पर ‘बूढ़ों की सेवा करना’, ‘विकलांगों की सहायता करना’, ‘बच्चों से बातचीत करना और उन्हें पढ़ाना’ जैसी बातें लिखता है तो इंटरव्यू बोर्ड के सदस्यों के मन में उसके प्रति अच्छी छवि नहीं बनती। उन्हें महसूस होता है कि यह उम्मीदवार उन्हें प्रभावित करने के लिये  झूठ और कपट का सहारा ले रहा है। अतः रुचियों के अंतर्गत खुद को महान बताने से बचना चाहिये ।

अच्छी रुचियाँ वे होंगी जो बोर्ड सदस्यों के भीतर जिज्ञासा पैदा करें। अगर आप चाहते हैं कि आपसे रुचियों पर बात की जाए तो कुछ ऐसा लिखें कि बोर्ड के सदस्य उस विषय पर बात करने को उत्सुक हो जाएँ। उदाहरण के लिये , अगर कोई उम्मीदवार ‘नई तकनीकों को समझना’, ‘साहसिक खेल खेलना’, ‘पशु-पक्षियों के स्वभाव को समझना’ जैसी कोई रुचि लिखता है तो तय हो जाता है कि उसके इंटरव्यू में रुचियों पर चर्चा होगी और अगर वह चर्चा को रुचिकर बना पाया तो 30 मिनट के इंटरव्यू में 10-15 मिनट तक उसी विषय पर चर्चा को केंद्रित रख सकेगा जो उसके लिये  बेहद लाभदायक सिद्ध हो सकता है। 

अगर आप चाहते हैं कि आपसे रुचियों पर प्रश्न न पूछे जाएँ तो आप ऐसी रुचियाँ लिखें जिन्हें पढ़कर बोर्ड के सदस्यों के मन में कोई जिज्ञासा या उत्साह पैदा न हो। ‘योग करना’, ‘सैर करना’, ‘अखबार पढ़ना’, ‘क्रिकेट खेलना’, ‘उपन्यास पढ़ना’ जैसी रुचियाँ इतनी प्रचलित हैं कि लगभग हर दूसरा उम्मीदवार इन्हीं में से कोई रुचि लिखता है। कभी-कभी सदस्य इन रुचियों पर बात कर लेते हैं किंतु सहज मनोविज्ञान यही है कि उनके मन में ऐसे विषयों पर बातचीत करने के लिये  उत्साह पैदा नहीं होता।

रुचियों के संबंध में कुछ सामान्य बातें 

ऐसी रुचि न लिखें जो आपके अभिजात वर्ग से होने को सूचित करती हो, जैसे ‘कार रेसिंग में भाग लेना’, ‘घुड़सवारी करना’, ‘देश-विदेश में भ्रमण करना’ इत्यादि। (अगर आप देश-विदेश में भ्रमण अपनी आय से करते हैं तो डरने की आवश्यकता नहीं है। माता-पिता के धन के आधार पर चलने वाली रुचियों को लिखने से बचना चाहिये ।)

ऐसी रुचि न लिखें जो समाज के खिलाफ जाने का संकेत करती हो, जैसे ‘नए-नए हथियारों का संग्रह करना’, ‘स्मोकिंग करना’, ‘तेज़ गति में ड्राइविंग करना’ इत्यादि।
(BY:- Rishi Ranjan)
वही रुचि लिखें जिस पर आपकी ठीक-ठाक समझ हो। बोर्ड के सदस्य आपसे अपनी रुचि के संबंध में किसी विशेषज्ञता की उम्मीद नहीं करते। वे सिर्फ इतना चाहते हैं कि जो कार्य करना आपको अच्छा लगता है, उसके संबंध में आप उन प्रश्नों का जवाब ज़रूर दें जो सामान्य जानकारियों से जुड़े हैं। उदाहरण के लिये , अगर आप ‘फिल्म देखना’ अपनी रुचि बताते हैं तो आप यह नहीं कह सकते कि ‘मैं गुरुदत्त या राज कपूर की फिल्मों के बारे में नहीं जानता हूँ’। इसका एक तरीका यह भी है कि आप मुख्य परीक्षा देने के बाद अपनी रुचि से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ इकट्ठी कर लें। इसके लिये  3-4 दिन की मेहनत पर्याप्त होनी चाहिये।

जहाँ तक संभव हो, अपनी रुचि का क्षेत्र सीमित और स्पष्ट रखना चाहिये। उदाहरण के लिये , अगर आप सिर्फ मनोरंजन के लिये  फिल्में देखते हैं और सिर्फ आजकल की फिल्में ही देखते हैं तो अपनी रुचि में ‘फिल्म देखना’ जैसी व्यापक बात न लिखें। आपको लिखना चाहिये - ‘समकालीन मनोरंजनपरक फिल्में देखना’। ऐसा होने पर बोर्ड के सदस्य आपसे बहुत दूर-दराज के प्रश्न नहीं पूछेंगे; और अगर पूछेंगे भी तो आपका माफी मांगना उचित होगा क्योंकि आपकी रुचि का क्षेत्र सीमित था। कुछ अन्य उदाहरण लें तो ‘उपन्यास पढ़ना’ से बेहतर होगा कि ‘पिछले दो दशकों के उपन्यास पढ़ना’ लिखा जाए।

अगर आपके पास कोई ऐसी रुचि नहीं है जिस पर आप बात कर सकें तो बेहतर होगा कि आप कोई ऐसी रुचि लिख दें जिस पर बहुत अधिक प्रश्न न बनते हों; और बनते भी हों तो उनके जवाब आसानी से दिए जा सकते हों। ऐसी कुछ रुचियाँ हैं- ‘पत्र-पत्रिकाएँ पढ़ना’, ‘पत्र लिखना’, ‘मंच पर कविता पाठ करना’, ‘चुटकुले सुनना और सुनाना’, ‘साइकिल चलाना’, ‘व्यायाम करना’, ‘दोस्तों से बातचीत करना’ इत्यादि। इनमें से जो आपके व्यक्तित्व से जुड़ती हो, आप वह लिख दें।

सेवा संबंधी वरीयताएँ (Service Preferences)

सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम के आधार पर लगभग 22-25 सेवाओं का आबंटन किया जाता है जिनमें से 2 (I.A.S. तथा I.P.S.) अखिल भारतीय सेवाएँ हैं जबकि शेष सभी केंद्रीय सेवाएँ। उम्मीदवार को वही सेवा मिलती है जो उसके रैंक तथा उसकी वरीयता सूची के आधार पर उसके हिस्से में आती है। 

उम्मीदवारों को सभी सेवाओं के सामने वरीयता-क्रम भरना चाहिये, किसी भी सेवा को छोड़ना नहीं चाहिये । 

कुछ उम्मीदवार अति-आत्मविश्वास के शिकार होकर कुछ ही सेवाओं को भरते हैं। सरकार की दृष्टि में इसका अर्थ यह है कि अगर आपको उन सेवाओं में से कोई नहीं मिलती है तो शेष सभी सेवाएँ आपके लिये बराबर हैं। अगर आपका रैंक कुछ पीछे रह गया तो सरकार पहले आपसे पीछे के रैंक वाले अभ्यर्थियों को उनकी वरीयता के अनुसार सेवा आबंटित करेगी और अंत में जिस भी सेवा में कोई स्थान बचेगा, वह आपको आबंटित कर दी जाएगी। 

कई बार ऐसा होता है कि अच्छा रैंक आने के बावजूद कोई अभ्यर्थी बहुत प्रभावहीन सेवा में चला जाता है क्योंकि उसने कुछ ही वरीयताएँ भरी थीं या गलत वरीयता-क्रम भर दिया था।

अगर आप पहले से किसी सेवा मे हैं तो बेहतर है कि आप अपनी वरीयता सूची में उतनी ही सेवाएँ भरें जिनमें आपकी रुचि है। उदाहरण के लिये , अगर आप पहले से भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में चयनित हैं तो स्वाभाविक तौर पर आपको 2 या 3 सेवाएँ ही भरनी चाहिये।

अगर आप किसी सेवा के लिये स्वास्थ्य संबंधी कारणों से अयोग्य हैं तो आप उस सेवा को छोड़ भी सकते हैं और चाहें तो भर भी सकते हैं। अगर आपने वह विकल्प भरा है और स्वास्थ्य परीक्षण में आप उसके लिये अयोग्य घोषित हो जाते हैं तो आपको अपने आप वरीयता सूची में वर्णित अगली सेवा मिल जाएगी। उदाहरण के लिये, अगर आपकी लंबाई आई.पी.एस. के लिये  पर्याप्त नहीं है और आपने वरीयता सूची में दूसरे क्रम पर आई.पी.एस. तथा तीसरे क्रम पर आई.आर.एस. को भरा है तो आई.पी.एस. में अयोग्य होने पर आपको आई.आर.एस. में अपने आप स्थान मिल जाएगा, बशर्ते आपका रैंक उसके लिये  पर्याप्त हो। 

वैसे तो प्रत्येक व्यक्ति की सेवा संबंधी वरीयताएँ अलग होती हैं, किंतु फिर भी विभिन्न सेवाओं में मिलने वाले अवसरों, सुविधाओं और करियर-ग्रोथ जैसे मानकों के आधार पर एक सामान्य वरीयता-क्रम बनाया जा सकता है। अपनी रुचि के अनुसार आवश्यक संशोधन करते हुए आप इसका प्रयोग कर सकते हैं।

 सेवा/पद का नाम    
(Name of Service/Post)

 क्रम (Order)

 Indian Administrative Service

 1

 Indian Foreign Service

 3

 Indian Police Service

 2

 Indian P & T Accounts & Finance Service, Group A

 18 

 Indian Audit & Accounts Service, Group A

 7 

 (I.R.S.) Indian Customs and Central Excise Service Group-A

 5 

 Indian Defence Accounts Service, Group A

 15 

 Indian Revenue Service (IT) Gr-A

 4 

 Indian Ordnance Factories Service, Group A (Asstt. Works Manager, Administration)

 21 

 Indian Postal Service, Group-A

 20 

 Indian Civil Acc. Service, Gr-A

 9 

 Indian Railway Traffic Service, Group A

 6 

 Indian Railway Accounts Service, Group A

 8 

 Indian Railway Personnel Service, Group A

 10 

 Asst. Security Commissioner, Group-A in Rail. Prot. Force

 11 

 Indian Defence Estates Service, Group A

 12 

 Indian Information Service, Jr. Grade Group A

 19 

 Indian Trade Service, Gruop A (Grade III)

 17 

 Indian Coporate Law Service, Group A

 16

 Armed Forces Headquarters Services, Group-B (Sec. Off.)

 22

 Delhi, Andaman-Nicobar, Lakshadweep, Daman-Diu and Dadra-Nagar Haveli Civil Service, Group B

 14 

 Delhi, Andaman-Nicobar, Lakshadweep, Daman-Diu and Dadra-Nagar Haveli Police Service, Group B

 13 

 Pondicherry Police Service, Group B

 23 

इस सूची में आई.पी.एस. को दूसरे क्रम पर रखा गया है और आई.एफ.एस. को तीसरे क्रम पर। हमारी समझ है कि हिंदी माध्यम के उम्मीदवार प्रायः आई.एफ.एस. में नहीं जाना चाहते। जो उम्मीदवार शारीरिक दृष्टि से आई.पी.एस. के लिये  योग्य है, वह इस क्रम को निश्चिंत होकर भर सकता है क्योंकि अगर उसे आई.पी.एस. नहीं मिलेगा तो आई.एफ.एस. भी नहीं मिलेगा क्योंकि आई.एफ.एस. की कट-ऑफ आई.पी.एस. से ऊँची होती है। ऐसी स्थिति में उसे अपने आप चौथी वरीयता वाली सेवा मिल जाएगी। 

किंतु अगर कोई उम्मीदवार आई.पी.एस. के लिये  अयोग्य हो जाए और उसका रैंक इतना अच्छा हो कि वह आई.ए.एस. में तो न आ पा रहा हो किंतु आई.एफ.एस. की कट-ऑफ से ऊपर हो तो वह आई.एफ.एस. में चुन लिया जाएगा और अगर उसकी रुचि इस सेवा में नहीं है तो वह जीवन भर परेशान रहेगा। इस संभावना से बचने के लिये  बेहतर होगा कि वे अभ्यर्थी (जो आई.पी.एस. के लिये  शारीरिक रूप से अयोग्य हैं और आई.एफ.एस. में नहीं जाना चाहते हैं) आई.एफ.एस. को आई.आर.एस. के बाद रखें।

इसी प्रकार, इस वरीयता क्रम में दिल्ली से जुड़ी 2 सेवाओं डानिक्स और डानिप्स को क्रमशः 14वें और 13वें क्रम पर रखा गया है। जो उम्मीदवार दिल्ली में रहने की इच्छा रखते हों, वे इन सेवाओं को और ऊँची वरीयता दे सकते हैं जबकि जिन्हें दिल्ली से कोई लगाव नहीं है, वे इन्हें कुछ नीचे कर सकते हैं।

राज्य संबंधी वरीयताएँ (State Preferences)

पिछले कुछ वर्षों से लागू व्यवस्था के तहत उम्मीदवारों को यह वरीयता-क्रम देना होता है कि अगर उन्हें आई.ए.एस. या आई.पी.एस. अर्थात् किसी अखिल भारतीय सेवा में शामिल किया जाता है तो वे अपने काडर के तौर पर विभिन्न राज्यों को किस क्रम में चुनना चाहेंगे? 5-7 वर्ष पहले तक काडर मिलना सिर्फ तुक्के पर आधारित होता था किंतु अब वरीयता-क्रम की व्यवस्था लागू होने के कारण अधिकांश उम्मीदवारों को अपने राज्य या उसके आस-पास के किसी राज्य में काम करने का मौका मिल जाता है।

इस संबंध में अभ्यर्थियों को यह सलाह दी जाती है कि वे सभी राज्यों के सामने वरीयता क्रम लिखें। आम तौर पर उन्हें अपने राज्य को पहले क्रम पर रखना चाहिये किंतु अगर उनके पास कोई ठोस कारण हो तो ऐसा नहीं भी कर सकते हैं। 

राज्यों का क्रम तय करते हुए प्रायः उम्मीदवार यही तर्क ध्यान में रखते हैं कि कौन सा राज्य उनके गृह राज्य के निकट है। यह आधार सही है, साथ ही कुछ अन्य आधार भी ध्यान में रखे जाएँ तो बेहतर है क्योंकि अलग-अलग राज्यों में विभिन्न कार्य संस्कृतियाँ हैं। कई बार दूर-दराज के राज्य सेवा संबंधी संतुष्टि की दृष्टि से गृह राज्य या आस-पड़ोस के राज्यों से बेहतर साबित होते हैं। कुछ अन्य कारक भी महत्त्वपूर्ण हैं, जैसे हरियाणा और पंजाब को दिल्ली के निकट होने और अच्छी परिवहन सुविधाओं आदि के कारण कई लोग वरीयता देते हैं।

राज्य संबंधी वरीयताएँ भी हर व्यक्ति की अलग हो सकती हैं किंतु ऊपर बताए गए आधारों पर हमने एक सूची तैयार की है। उम्मीदवारों को चाहिये  कि इसमें अपने हिसाब से कुछ परिवर्तन कर लें, जैसे-

1. पहले क्रम पर उन्हें अपने गृह राज्य को रखना चाहिये। अगर किसी कारण से आप गृह राज्य में काम नहीं करना चाहते तो उसे छोड़ भी सकते हैं।
2. उसके बाद अपने आस-पड़ोस के राज्यों को रखना चाहिये । अगर आस-पड़ोस के राज्यों में कोई गंभीर संकट या आपकी अरुचि है तो उन्हें छोड़ भी सकते हैं।
3. उसके बाद सामान्यतः अपने गृह राज्य से दूरी तथा परिवहन सुविधाओं के आधार पर आपको इस सूची में बदलाव कर लेना चाहिये ।
4. अगर आपको पहाड़ी राज्यों या जनजाति बहुल राज्यों से विशेष लगाव या अलगाव है तो उसके आधार पर भी सूची को संशोधित कर सकते हैं।
5. इस सूची में कुछ स्थानों पर आई.ए.एस. तथा आई.पी.एस. के लिये  राज्यों के वरीयता क्रम को अलग-अलग रखा गया है। इसका आधार यह है कि उस राज्य विशेष में इन दोनों सेवाओं की तुलनात्मक स्थिति क्या है? उदाहरण के लिये , आग्मुट काडर (अर्थात् दिल्ली, अन्य केंद्रशासित प्रदेश तथा कुछ अन्य राज्य) को आई.पी.एस. के लिये ज़्यादा ऊँची वरीयता दी गई है क्योंकि इस काडर की अधिकांश पोस्टिंग्स दिल्ली में होती हैं और दिल्ली पुलिस पर सीधे केंद्र सरकार का नियंत्रण होने के कारण उसके अधिकारी अन्य राज्यों की पुलिस की तुलना मेंज़्यादा स्वायत्तता के साथ कार्य कर पाते हैं।
6. यह क्रम उत्तर भारत के हिंदी भाषी अभ्यर्थियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। अगर आप किसी अन्य क्षेत्र से हैं तो आपको इस सूची में गंभीर बदलाव कर लेने चाहिये।

कृपया फॉर्म भरते समय निम्नलिखित बातों पर भी ध्यान दें-

वर्तनी संबंधी अशुद्धियाँ (Spelling Mistakes) भूलकर भी न करें। कभी-कभी पूरा इंटरव्यू ऐसी गलतियों की भेंट चढ़ जाता है।

अगर आपका स्थायी पता किसी ग्रामीण क्षेत्र का है तो वही दें क्योंकि ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को इंटरव्यू में कुछ लाभ मिलने की संभावना रहती है।

अगर आप दिल्ली या इलाहाबाद जैसे शहर में रहकर तैयारी कर रहे हैं तो भी बेहतर होगा कि अपना वर्तमान पता वही बताएँ जहाँ आपके माता-पिता रहते हैं या जहाँ आप पढ़ाई या नौकरी करते रहे हैं। यह बात सामने नहीं आनी चाहिये  कि आप इस परीक्षा की तैयारी के लिये  दिल्ली जैसे शहर में रह रहे हैं।

अगर आपने स्नातक स्तर की पढ़ाई के बाद कोई अतिरिक्त डिग्री हासिल की है तो सामान्यतः उसकी जानकारी दी जानी चाहिये। अगर आप उसमें सहज हैं तो जानकारी ज़रूर दें ताकि यह न लगे कि आप कई वर्षों से खाली बैठे हैं। हाँ, यदि आपने एल.एल.बी. या एम.सी.ए. जैसी कोई तकनीकी डिग्री ली है और उसकी अवधारणाओं व जानकारियों से आप एकदम वंचित हैं तो ऐसी डिग्री की चर्चा करने से बचें।

अगर आपने कहीं नौकरी की है तो उपयुक्त कॉलम में उसकी चर्चा ज़रूर करें। इससे इंटरव्यू बोर्ड पर अच्छा असर पड़ता है। बस शर्त यह है कि आपके पास नौकरी संबंधी प्रमाण व बुनियादी जानकारी होनी चाहिये । कई लोग तो गैप-ईयर की समस्या से बचने के लिये  नौकरी के प्रमाण-पत्र बनवा लेते हैं और बोर्ड को आश्वस्त भी कर देते हैं।

परीक्षा के केंद्र से परिणाम पर कैसा असर पड़ेगा, इसके संबंध में कोई अनिवार्य निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। कुछ लोगों को दिल्ली केंद्र पर लाभ महसूस हुआ है तो कुछ को छोटे केंद्रों पर। सामान्य मान्यता है कि छोटे केंद्रों पर तुलनात्मक रूप से कुछ लाभ मिल जाता है। अगर आपके पास सुविधा हो तो दिल्ली की बजाय जयपुर, भोपाल, इलाहाबाद जैसा परीक्षा केंद्र चुन सकते हैं, हालाँकि इससे फायदा होने की कोई गारंटी नहीं है।

अगर आप पहले दी गई सिविल सेवा या अन्य परीक्षाओं के अनुक्रमांक भूल गए हैं तो डरें नहीं। केवल परीक्षा का वर्ष और नाम लिखकर छोड़ दें...


आईएएस क्रेक करने की फुल जानकारी... 

#UPSC_क्या_है ?

UPSC(Union public service commison) यानी हिंदी में कहे तो #संघ_लोक_सेवा_आयोग
इसका का गठन आजादी से पहले 1 अक्तूबर 1926 को लोक सेवा आयोग नाम से हुआ था| लेकिन सवैधानिक प्रावधानों के तहत 26 अक्तूबर 1950 लोक सेवा आयोग का पुनर्निर्माण हुआ|

जिसका नाम संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) रखा गया| इस आयोग को  अनुछेद 315 के तहत सवैंधानिक दर्जा(मान्यता) प्रदान की गई है | 

यह commison(upsc) लगभग 13 प्रकार के exam का आयोजन करता 

जैसे:- ICS(indian civil service) 
IES (indian Engineering Services),NDA,INA,CDS,CAPF और भी है लेकिन उसका चर्चा यहाँ नही करेंगे...

UPSC द्वारा आयोजित इन सभी exam में सर्वश्रेष्ठ exam है..जिसकी हमलोग तैयारी कर रहे है इसे ICS(indian civil service) यानी  हिंदी में भारतीय सिविल सेवा परीक्षा कहा जाता है.. इसके तहत  24 तरह की service के लिए selection होता है..जिसमे सबसे टॉप post/service आईएएस (IAS) होता है.. कोई जरूरी नही की आप इस exam को पास कर सीधे IAS बन जायेंगे.. आप अपने rank/perfomance के आधार नीचे दिए गए 24 सेवाओं में किसी के लिए भी चयन किये जा सकते है..

(i) Indian Administrative Service.
(ii) Indian Foreign Service.
(iii) Indian Police Service.
(iv) Indian P & T Accounts & Finance Service, Group ‘A’.
(v) Indian Audit and Accounts Service, Group ‘A’.
(vi) Indian Revenue Service (Customs and Central Excise), Group ‘A’.
(vii) Indian Defence Accounts Service, Group ‘A’.
(viii) Indian Revenue Service (I.T.), Group ‘A’.
(ix) Indian Ordnance Factories Service, Group ‘A’ (Assistant Works Manager, Administration).
(x) Indian Postal Service, Group ‘A’.
(xi) Indian Civil Accounts Service, Group ‘A’.(xii) Indian Railway Traffic Service, Group ‘A’.
(xiii) Indian Railway Accounts Service, Group 'A'.
(xiv) Indian Railway Personnel Service, Group ‘A’.
(xv) Post of Assistant Security Commissioner in Railway Protection Force, Group ‘A’
(xvi) Indian Defence Estates Service, Group ‘A’.
(xvii) Indian Information Service (Junior Grade), Group ‘A’.
(xviii) Indian Trade Service, Group 'A' (Gr. III)
.(xix) Indian Corporate Law Service, Group "A".
(xx) Armed Forces Headquarters Civil Service, Group ‘B’ (Section Officer’s Grade).(xxi) Delhi, Andaman & Nicobar Islands, Lakshadweep, Daman & Diu and Dadra & NagarHaveli Civil Service, Group 'B'.
(xxii) Delhi, Andaman & Nicobar Islands, Lakshadweep, Daman & Diu and Dadra & NagarHaveli Police Service, Group 'B'.
(xxiii) Pondicherry Civil Service, Group 'B'.(xxiv) Pondicherry Police Service, Group ‘B

चलिए अब हम बात करते है इसकी योग्यता और attempt के बारे में..

योग्यता:-
इसके लिए आपको विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (U.G.C) की धारा 1956, द्वारा मान्यता प्राप्त, किसी भी university से graduate होना चाहिए.. इस exam के लिए graduation का subject matter नही करता की आप आर्ट्स से किये है science से.... upsc के फॉर्म भरने के लिए बस आपके  पास valid बैचलर डिग्री(बी.टेक/BA/BSC/BCOM)  होना चाहिए....graduation अंतिम वर्ष के छात्र भी इस फॉर्म को भर सकते है 

★अगर age की बात करे तो
♠Age Limit: आवेदक की न्यूनतम आयु 21 वर्ष की होनी चाहिए और अधिकतम 32 वर्ष की उम्र से अधिक नहीं होनी चाहिए।हालांकि विकलांग अभ्यार्थी और सैन्य परिवार तथा पिछड़े वर्ग के व्यक्ति के लिए उम्र सीमा में छूट दी जाती है...

NOTE:- उम्र की गिनती अगस्त माह तक की जाती है

♠परीक्षा में #attempt की संख्या:- ओपन श्रेणी 6 प्रयास, ओबीसी श्रेणी के लिए 9 प्रयासों और अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार के लिए कोई सीमा नहीं है।.....

💐फार्म_सम्बंधित_जानकारी

सामान्यतः UPSC(civil service) का notification feb-march में आता है और pre exam जून में होता है ..फिर pre quallify करने के बाद मुख्य परीक्षा के लिए एक फार्म भरा जाता है जिसे DAF कहा जाता है ..interview में इसी DAF फार्म में जो आप अपने बारे में जो भरते है उसी सम्बंधित शुरूआती प्रश्न पूछे जाते हैं....

इसकी मुख्य परीक्षा october-november में होती है ..interview मार्च_अप्रैल में लेकर final परिणाम मई_जून में जारी कर दिया जाता है...

#form_कैसे_भरे ?★★

सर्वप्रथम आप..एक से अधिक आवदेन देने से बचें।
Pre का फॉर्म भरते समय आपसे  आपका centre choice , mains किस माध्यम से देना है..mains में optional sub क्या लेना है ? Etc भरना होता है..फार्म में सही विवरण दें। क्योकि बाद में सुधार नही कर सकते है ..साथ ही आवेदन करते समय अपना सही ई-मेल आईडी साथ रखें।

★●● #Exam_syllabus

इस परीक्षा को पास करने के लिए आपको तीन चरण पास करने होते है पहला है Preliminary Exam(इसका अंक मेरिट में नही जुड़ता )
 दूसरा है Mains Exam और तृतीय हैInterview / Personality Test 

Syllabus के बारे में यहाँ ज्यादा आपसे जिक्र नही करूँगा! Syllabus की जानकारी.. मै पहले की पोस्ट मे बता चुका हूं... आगे भी सिलेबस चर्चा जारी रहेगी...

Syllabus को deeply समझना सबसे जरूरी चीज है क्योकि syllabus को जितना बेहतर से आप समझ कर उसके according तैयारी करेंगे उतना ही आपकी success का chance ज्यादा होगा ! .

इसका syllabus कोई छोटा-मोटा नही होता है.. इसकी गहरी समझ बेहतर न होने के कारण  काफी Aspirant गलत दिशा में मेहनत करने लगते है. है..उनको यह पता नही होता है की किस खण्ड से ज्यादा प्रश्न पूछे जाते है किस खण्ड से कम.. आप चाहे तो syllabus को खंड-खंड में अच्छे से बाटे,साथ ही उस खण्ड में यह भी mention कर दे की इस खंड से pre और mains में कितने अंक के प्रश्न आते है ..और इसको तैयार करके आप अपने study room में चिपका भी सकते है ... 

IAS Tips

IAS TIPS... 

1

आईएएस_कोचिंग_क्यों?... 

यदि आप यूपीएससी पाठ्यक्रम, नवीनतम पैटर्न, आईएएस किताबों के बारे में पूरी तरह से अनजान हैं और अपने लिये एक रणनीति तैयार नहीं कर सकते हैं।

यदि आपके पास समय कम है (परीक्षा से पहले 2 या 3 महीने पहले), तब आपको एक क्रैश कोर्स की जरूरत है।

यदि आप एक ऐसे व्यक्ति हैं, जो अकेले रहने या तैयारी करने में आत्मविश्वास महसूस नहीं करते।

यदि आप सिविल सेवा मुख्य परीक्षा देना चाहते हैं और आपके द्वारा चयनित वैकल्पिक विषय में आपको बहुत ही कम ज्ञान हो, व उसके लिये सटीक रणनीति का अभाव हो।

आप उन सभी अच्छी वेबसाइटों की मदद लें जो आईएएस अध्ययन सामग्री और मार्गदर्शन प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त  नि:शुल्क शिपिंग और कैश ऑन डिलीवरी की सुविधा का लाभ उठाते हुए, भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए आवश्यक सभी पुस्तकों को प्राप्त कर सकते हैं। और यदि आप ये सब भी नहीं जुटा सकते, तब आपको एक अच्छे कोचिंग संस्थान  से जुड़ना चाहिये।

??#आपको_सिविल_सेवा_परीक्षा_कोचिंग_की_आवश्यकता_कब_नहीं_होती_है?

जब आपको यह पूर्णत: विश्वास हो, कि आप अपनी खुद की मेहनत और सूझबूझ से यह एग्जाम क्रैक कर सकते हैं।

जब आप आश्वस्त हों कि आप यूपीएससी के पटर्न को अच्छी तरह समझते हैं और तदनुसार रणनीति बना कर अध्ययन कर सकते हैं, तो कोचिंग संस्थानों की आवश्यकता ना के बराबर हो जाती है।

यदि आप भारत में जेएनयू या आईआईटी जैसे शीर्ष संस्थानों में से किसी एक में अध्ययन प्राप्त अभ्यर्थी रह चुके हों और आपको विभिन्न विषयों के बारे उपयुक्त जानकारी पहले से ही हो।

यदि आपने पहले से ही एक कोचिंग के साथ इस परीक्षा का प्रयास किए हों। (यानि आपको पहले से ही पैटर्न, आवश्यक किताबें और पाठ्यक्रम पता हो तथा एक बार फिर कक्षाओं समय देने पर आप ऊब महसूस करें)।
 #निष्कर्ष:  एक सिविल सेवा अभ्यर्थी बिना कोचिंग के आईएएस परीक्षा पास कर सकते हैं।... 

2

अखबार_कैसे_पढ़ा_जाए... 

*ये सवाल हर उस परीक्षार्थी के मन में आता हैं जो प्रशासनिक  परीक्षा की तैयारी कर रहा हैं....

#द_हिन्दू अखबार में मनोरंजन या मसाला खबरे नहीं आती हैं,लेकिन ऐसा भी नहीं हैं के आपको सब पढ़ना हैं। वो भी समय की बाध्यता को देखते हुए हमे अखबार के कुछ हिस्सो को ही पढ़ना हैं जिससे परीक्षा की दृष्टि से हमें उपयोगी बिंदु मिल जाए। आपको सिर्फ इन चार भागो को पढ़ना हैं –*
• प्रथम पृष्ठ_
_• राष्ट्रीय खबरे_
_• अंतर्राष्ट्री खबरे_
_• व्यापर/कारोबार खबरे_

ऐसे कोई भी खबर मत पढ़िए जो परीक्षा की दृष्टि से लाभदायक नहीं हैं। सबसे पहले एक रजिस्टर या कॉपी ले और उसे अर्थशास्त्र,विज्ञानं,भूगोल,संविधान आदि विषयानुसार भागो में बाँट ले और सम्बंधित खबर उसी विषय में लिखे, इससे अगर आपको करेंट अफेयर का पुनरावलोकन करने में आसानी होगी।*
_उदाहरण से समझते हैं इसको_
_मान लीजिये आपके शहर में_ _*किसी मन्नू लाल की कार दुर्घटना में मृत्यु हो गयी हैं, तो क्या*_ _*आपको लगता हैं की ये खबर कभी यूपीएससी में पूछी जाएगी?
_जवाब नहीं।*_

_दूसरे तथ्य को देखे तो मान लीजिये आज सोना का भाव गिर गया या उठ गया, या शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल आया तो ऐसे प्रश्न भी परीक्षा में कभी नहीं आएँगे। कम से कम यूपीएससी में तो कभी नहीं।_
*समाचार की बजाय मुद्दे पर ध्यान दें:*
*मान लीजिए कि एक समाचार “शीर्ष सीट के न्यायाधीश को अपनी सीट से हटा दिया गया है” के रूप में शीर्षक है। तो पढ़िए कि – उसने क्या किया कि वह हटा दिया गया, वह कब निकाल दिया गया? “कैसे एक सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जा सकता है” पर फोकस, “हमारे संविधान को सीट से न्यायाधीश को हटाने के लिए क्या प्रावधान है”, “हमारे राष्ट्र और आगामी पीढ़ी पर क्या प्रभाव पड़ सकता है” इत्यादि ।*

*कुछ श्रेणियों में समाचार को वर्गीकृत करने की कोशिश करें-*

*अंतर्राष्ट्रीय संबंध, पर्यावरण और जैव विविधता, व्यक्तित्व और पुरस्कार, सरकारी नीतियां और योजनाएं, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, आर्थिक नीतियां, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और चिकित्सा, विविध आदि जैसे कुछ श्रेणियों में समाचार या मुद्दों को विभाजित करें।*
*ऐसा भी नहीं हैं कि आप ने द हिन्दू पढ़ लिया तो आप ने गंगा नहा ली हैं। अखबार में दिए गये तथ्य ही पर्याप्त नहीं है: इस बारे में और अधिक जानने के लिए इंटरनेट का प्रयोग करें ।*

*उदाहरण-*
_हाल ही में एच्1 बी वीजा समाचार में है और हिंदू संपादकीय में भी देखा जा सकता है। संपादकीय इसके बारे में कुछ बिंदुओं और विचार देगा, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है,इसके लियेआप गूगल देवता के शरण में जाइये और आपके दिमाग में उभर रहे सवालों जैसे “एच्1 बी वीजा का क्या असर नौकरी पेशा लोगो पर क्या पड़ेगा ? क्या इससे भारत और अमेरिका के रिश्तो में खटास आएगी? इसमें क्या सुधर किये जा सकते हैं या किये जा रहे हैं ?आदि को खंगाले।_
.
*समाचार पढ़ने के बाद ये देखे ये किस विषय से सम्बंधित हैं उसे उस विषय में लिख ले ,लेकिन तारीख के अनुसार नहीं विषय के अनुसार अंग्रेजी माध्यम के छात्रों के लिए हिन्दू अखबार को समझना बहुत मुश्किल नहीं हैं ,लेकिन जब बात हिंदी माध्यम के छात्रों की आती हैं तो उनके लिए हिन्दू पढ़ना टेढ़ी खीर बन जाता हैं। देखिये उनको क्या करना चाहिए –*
• *हिन्दू अखबार में एक मजबूत पकड़ बनाने के लिए आपको कम से कम दो से तीन माह का समय लग जाएगा तो यहाँ आप को आवश्यक हैं एक रजिस्टर और पेन की।*
• *अब जो बिंदु मैंने आपको ऊपर बताये हैं उसी हिसाब से पढ़िए और जो शब्दावली आपको नहीं समझ आ रही हैं आप उसके लिए डिक्शनरी (ऑनलाइन या ऑफलाइन) का प्रयोग करिये और उन शब्दो को अपने रजिस्टर में लिखिए हो सके तो वाक्यो के साथ उदहारण के तौर पर समझने के लिए लिखे और उन्हें लगातार दोहराते रहे ,क्यों कि आपको अंगरेजी भाग भी उत्तीर्ण करना  हैं तो इससे आपका वह भाग धीरे-धीरे तैयार होता जाएगा...

3

बहुत से छात्र या कुछ अभिवावक जिनके भाई या बहन अभी 12th में हैं हमसे पूछते हैं कि क्या sir  अभी से NCERT या बुक्स से तैयारी प्रारम्भ कर देनी चाहिए ?
हम कभी सलाह नहीं देना चाहेंगे कि कक्षा 12 या इससे कम के विद्यार्थी NCERT या अन्य किताबें अभी से पढ़नी शुरू करें ....क्योंकि कक्षा 12 में खुद किताबों और पढाई का इतना बोझ रहता है कि आप उसके साथ इसे मैनेज नहीं कर सकते और अगर जबरदस्ती दोनों तरह कि किताबें पढ़ने का प्रयास करेंगे तो यह आपके खुद के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है !
.follow me for upsc related any problem mohit Dagar 
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पिछले कुछ वर्षों से संघ लोक सेवा आयोग करंट अफेयर्स से बहुत ज्यादा प्रश्न पूछ रहा है ...और वर्ष 2016 की परीक्षा में तो यह आंकड़ा बहुत ऊपर पहुँच गया ! . ऐसी स्थिति में अगर आप अभी से न्यूज़ पेपर का अनुसरण आरम्भ कर देंगे तो जाहिर सी बात है इस एक साल में न सिर्फ आप बहुत सारा ज्ञान अर्जित कर लेंगे बल्कि न्यूज़ पेपर के अवयव के साथ परीक्षा के स्वरुप और आयोग की मांग को भी भली भांति जान लेंगे !
. अभी से आप प्रतिदिन किसी एक राष्ट्रीय स्तर का न्यूज़ पेपर फॉलो करना शुरू कर दीजिये ! हमारे भारत में क्या हो रहा है ? , विदेश में क्या हो रहा है ? .. सरकार की योजनाएं ..वैज्ञानिकों के अविष्कार .. नयी नीतियां ... पर्यावरण , कला एवं संस्कृति और भारत के साथ विदेशों के सम्बन्ध आदि बहुत सारे मुद्दे हैं जिनपर आपकी पैनी नजर होनी चाहिए .._आईएएस गुरू शरद_ और सबसे बड़ी बात सिर्फ इन मुद्दों को पढ़िए मत इनके बारे में इंटरनेट से जानकारी निकालने का प्रयास कीजिये ! लेकिन यह काम आप अपनी कक्षा वाली पढाई से अलग हटकर खाली समय में कीजिये .... जो समय आप वीडिओ गेम , सोशल मीडिया ( फेसबुक , व्हाट्सप्प ) या गॉसिप में बर्बाद करते हैं उसे बचाकर आप इसमें समय दीजिये ..... इससे न सिर्फ आपकी जानकारी बढ़ेगी बल्कि आपका बौद्धिक स्तर में भी बृद्धि होगी ! . न्यूज़ पेपर में सिर्फ आपको खबरे पढ़कर छोड़ नहीं देना है बल्कि उसका पोस्टमार्डम करना है कैसे ? ..एक टॉपिक लेकर मैं समझाता हूँ --उदाहरण के लिए एक खबर अपने पढ़ी """ टॉपिक है कि "" राजाजी नेशनल पार्क को NTCA द्वारा टाइगर रिज़र्व के रूप में अधिसूचित किया गया ..इस खबर से जो आपके मन में सवाल उठेंगे वह हैं कि .. NTCA क्या है ..? ... राजाजी नेशनल पार्क एवं उत्तराखंड कि मानचित्र में स्थिति .? ... इस देश में और कौन कौन से टाइगर रिज़र्व हैं ..? ... सबसे ज्यादा टाइगर किन किन राज्यों में पाये जाते हैं ..? ... इस समय भारत में कुल कितने बाघ है ..? .. टाइगर सरंक्षण के लिए भारत में कितनी योजनाएं चलायी जा रही हैं ..? ..आदि .. !! यानि एक खबर के बाद बाघ का किस्सा ख़त्म .. !! ...अब जरा सोचिये एक न्यूज़ पेपर से आप एक दिन में कितने विषयों कि तैयारी कर सकते हैं ..? और इन सभी प्रश्नों के उत्तर इंटरनेट में मौजूद हैं तो आपको अभी से किताबें नहीं खरीदनी पड़ेंगी !! ... आशा है आप ठीक तरह से समझ गए होंगे ..क्योकि एक अधिकारी वाली विश्लेषणात्मक और विस्तृत सोच तो आपको अभी से विकसित करनी ही होगी ...

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अगर आप IAS अध‍िकारी बनना चाहते हैं तो इसकी तैयारी की शुरुआत कैसे और कहां से करें, जान‍ििये... 

यह एक सामान्य सा, बहुत ही सरल और व्यावहारिक वैज्ञानिक फॉर्मूला है कि यदि आपको कोई बड़ा काम करना है, तो इसके लिए उतनी ही अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है. इस जरूरत में दो ऊर्जाएं मुख्य होती हैं- एक शारीरिक ऊर्जा तथा दूसरी मानसिक ऊर्जा. मुझे यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि यदि आपने IAS बनने का फैसला किया है, तो यह एक बहुत बड़ा काम करने का फैसला है. यह सरकारी तंत्र में प्रवेश करने का सबसे ऊपर का स्तर है. इसके लिए प्रतियोगी परीक्षा की जो प्रणाली तैयार की गई है, वह इस परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक बना देती है. यदि लगभग 12 लाख युवाओं में से केवल एक हजार को सफल होना हो, तो कठिनता का अंदाजा इन आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है.
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जाहिर है कि यह एक कठिन और बड़ा ही नहीं, बल्कि बेहद कठिन और बहुत बड़ा काम है. इसलिए इसके बारे में अंतिम निर्णय लेने से पहले आपको जायजा इस बात का लेना चाहिए कि इसके लायक शारीरिक और मानसिक ऊर्जा आपके पास है या नहीं. यह बात मुझे इसलिए बतानी पड़ रही है, क्योंकि लाखों अबोध-अनजान युवा इस IAS के ग्लैमर में आकर, जो बहुत स्वाभाविक है, इसकी तैयारी में लग जाते हैं. काफी समय तक लगे रहते हैं, लेकिन अंत तक उन्हें कुछ भी हासिल नहीं हो पाता. तो इसे आप खुद के मूल्यांकन की पहली और सबसे महत्वपूर्ण कसौटी कह सकते हैं.आइए, इसे हम व्यावहारिक स्तर पर जानें.

शारीरिक ऊर्जा का संबंध यहां बहुत अच्छे स्वास्थ्य तथा इस बात से नहीं है कि आप एक बार में कितने दंड-बैठक लगा सकते हैं. न ही इसका कोई संबंध आपकी भुजाओं के मसल्स तथा पेट के एब्स से है.

स्वास्थ्य के स्तर पर यह परीक्षा आपसे केवल दो बातों की मांग करती है. पहला यह कि आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता ठीक-ठाक हो. यानी कि कहीं ऐसा तो नहीं कि आपको बीमार करने के लिए दोयम दर्जे का छोटा सा जीवाणु या जीवन-पद्धति में आया थोड़ा सा बदलाव पर्याप्त है. इस परीक्षा की तैयारी के लिए एक ठीक-ठाक स्वास्थ्य की अपेक्षा इसलिए की जाती है, क्योंकि इसकी तैयारी एक लम्बे वक्त की मांग करती है. यह ‘लम्बा वक्त‘ जहां दैनिक जीवन से जुड़ा हुआ है, वहीं वर्ष से भी. यानी यह एक मैराथन दौड़ है. क्या आपके पास इस दूरी को पूरा करने की शारीरिक ऊर्जा है, वह भी दौड़ते हुए? बीच में रुककर सुस्ताने की गुंजाइश नहीं है.

जहां तक मानसिक ऊर्जा का सवाल है, यह मुख्यतः तीन बातों से जुड़ी हुई है. पहला यह कि आपको हताश और निराश करने के लिए बाहरी किन परिस्थितियों और कितनी मेहनत की जरूरत होगी. यानी आप अपने उद्देश्य के प्रति मानसिक रूप से कितने मजबूत हैं. कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी ने थोड़ा सा इसके खिलाफ बोल दिया, या किसी की असफलता की बात सुन ली, और आप हथियार डाल कर बैठ गए. आप बड़ा काम करने जा रहे है. काम जितना बड़ा होगा, उसमें सफल होने की संभावना उतनी ही कम होगी. इसलिए जब लोग आपकी सफलता पर अपना संदेह व्यक्त करेंगे, तो उनके संदेह के सच होने की उम्मीद ज्यादा होगी. क्या आप इस नकारात्मक वातावरण से स्वयं को अप्रभावित रख पाएंगे?

इस परीक्षा के तीन स्तर होते हैं. इन तीनों स्तरों को आपको एक ही साथ पार करना होता है. ज्यादातर यही होता है कि सफलता को पाने से पहले कई-कई बार आप की भेंट असफलता से होगी. क्या आप इसे संभाल पाएंगे? कहीं ऐसा तो नहीं कि इन असफलताओं के कारण आप स्वयं पर से अपना विश्वास ही खो दें! आईएएस बनने का निर्णय लेने से पहले आपको चाहिए कि आप इन बिंदुओं पर इत्मीनान के साथ विचार kre...

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‘द हिन्दू’ अखबार कैसे पढ़ा जाए ?*
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*ये सवाल हर उस परीक्षार्थी के मन में आता हैं जो प्रशासनिक परीक्षा की तैयारी कर रहा हैं.*
*द हिन्दू अखबार में मनोरंजन या मसाला खबरे नहीं आती हैं,लेकिन ऐसा भी नहीं हैं के आपको सब पढ़ना हैं। वो भी समय की बाध्यता को देखते हुए हमे अखबार के कुछ हिस्सो को ही पढ़ना हैं जिससे परीक्षा की दृष्टि से हमें उपयोगी बिंदु मिल जाए। आपको सिर्फ इन चार भागो को पढ़ना हैं –*
• प्रथम पृष्ठ
• राष्ट्रीय खबरे
• अंतर्राष्ट्री खबरे
• व्यापर/कारोबार खबरे
*ऐसे कोई भी खबर मत पढ़िए जो परीक्षा की दृष्टि से लाभदायक नहीं हैं। सबसे पहले एक रजिस्टर या कॉपी ले और उसे अर्थशास्त्र,विज्ञानं,भूगोल,संविधान आदि विषयानुसार भागो में बाँट ले और सम्बंधित खबर उसी विषय में लिखे, इससे अगर आपको करेंट अफेयर का पुनरावलोकन करने में आसानी होगी।*
उदाहरण से समझते हैं इसको –
मान लीजिये आपके शहर में किसी मन्नू लाल की कार दुर्घटना में मृत्यु हो गयी हैं, तो क्या आपको लगता हैं की ये खबर कभी यूपीएससी में पूछी जाएगी?
जवाब – नहीं।

दूसरे तथ्य को देखे तो मान लीजिये आज सोना का भाव गिर गया या उठ गया, या शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल आया तो ऐसे प्रश्न भी परीक्षा में कभी नहीं आएँगे। कम से कम यूपीएससी में तो कभी नहीं।
*समाचार की बजाय मुद्दे पर ध्यान दें:*
*मान लीजिए कि एक समाचार “शीर्ष सीट के न्यायाधीश को अपनी सीट से हटा दिया गया है” के रूप में शीर्षक है। तो पढ़िए कि – उसने क्या किया कि वह हटा दिया गया, वह कब निकाल दिया गया? “कैसे एक सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जा सकता है” पर फोकस, “हमारे संविधान को सीट से न्यायाधीश को हटाने के लिए क्या प्रावधान है”, “हमारे राष्ट्र और आगामी पीढ़ी पर क्या प्रभाव पड़ सकता है” इत्यादि ।*

*कुछ श्रेणियों में समाचार को वर्गीकृत करने की कोशिश करें-*

*अंतर्राष्ट्रीय संबंध, पर्यावरण और जैव विविधता, व्यक्तित्व और पुरस्कार, सरकारी नीतियां और योजनाएं, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, आर्थिक नीतियां, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और चिकित्सा, विविध आदि जैसे कुछ श्रेणियों में समाचार या मुद्दों को विभाजित करें।*
*ऐसा भी नहीं हैं कि आप ने द हिन्दू पढ़ लिया तो आप ने गंगा नहा ली हैं। अखबार में दिए गये तथ्य ही पर्याप्त नहीं है: इस बारे में और अधिक जानने के लिए इंटरनेट का प्रयोग करें ।*
उदाहरण-
हाल ही में एच्1 बी वीजा समाचार में है और हिंदू संपादकीय में भी देखा जा सकता है। संपादकीय इसके बारे में कुछ बिंदुओं और विचार देगा, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है,इसके लियेआप गूगल देवता के शरण में जाइये और आपके दिमाग में उभर रहे सवालों जैसे “एच्1 बी वीजा का क्या असर नौकरी पेशा लोगो पर क्या पड़ेगा ? क्या इससे भारत और अमेरिका के रिश्तो में खटास आएगी? इसमें क्या सुधर किये जा सकते हैं या किये जा रहे हैं ?आदि को खंगाले।
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*समाचार पढ़ने के बाद ये देखे ये किस विषय से सम्बंधित हैं उसे उस विषय में लिख ले ,लेकिन तारीख के अनुसार नहीं विषय के अनुसार अंग्रेजी माध्यम के छात्रों के लिए हिन्दू अखबार को समझना बहुत मुश्किल नहीं हैं ,लेकिन जब बात हिंदी माध्यम के छात्रों की आती हैं तो उनके लिए हिन्दू पढ़ना टेढ़ी खीर बन जाता हैं। देखिये उनको क्या करना चाहिए –*
• *हिन्दू अखबार में एक मजबूत पकड़ बनाने के लिए आपको कम से कम दो से तीन माह का समय लग जाएगा तो यहाँ आप को आवश्यक हैं एक रजिस्टर और पेन की।*
• *अब जो बिंदु मैंने आपको ऊपर बताये हैं उसी हिसाब से पढ़िए और जो शब्दावली आपको नहीं समझ आ रही हैं आप उसके लिए डिक्शनरी (ऑनलाइन या ऑफलाइन) का प्रयोग करिये और उन शब्दो को अपने रजिस्टर में लिखिए हो सके तो वाक्यो के साथ उदहारण के तौर पर समझने के लिए लिखे और उन्हें लगातार दोहराते रहे ,क्यों कि आपको अंगरेजी भाग भी उत्तीर्ण करना  हैं तो इससे आपका वह भाग धीरे-धीरे तैयार होता जाएगा... 
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जानें, IAS ऑफिसर बनने के लिए कब तक और कितनी बार दे सकेंगे एग्जाम... 

अगर आप अधिकतम आयु सीमा को पार कर गए हैं तो फिर आप IAS ऑफिसर नहीं बन पाएंगे।   

IAS Officer Age limit: हर साल संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) सिविल सर्विसेज के एग्जाम का आयोजन करता है। इसी परीक्षा को क्रैक करके आप IAS या IPS ऑफिसर बन सकेंगे। परीक्षा में बैठने के लिए न्यूनतम और अधिकतम आयु सीमा तय है। अगर आप अधिकतम आयु सीमा को पार कर गए हैं तो फिर आप IAS ऑफिसर नहीं बन पाएंगे।
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आयु सीमा
सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम आयु सीमा 21 साल और अधिकतम आयु सीमा 32 साल है। जहां न्यूनतम आयु सीमा सभी वर्ग के लिए 21 वर्ष ही है, वहीं अधिकतम आयु सीमा समाज के अलग-अलग वर्गों के लिए अलग हैं जिनका विवरण नीचे दिया गया है...

सामान्य श्रेणी के लिए अधिकतम आयु सीमा32 सालअन्य पिछड़ा वर्ग के लिए अधिकतम आयु सीमा35 सालअनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए अधिकतम आयु सीमा37 सालरक्षा सेवा के जवान जो किसी देश के साथ युद्ध के दौरान या किसी अशांत क्षेत्र में ऑपरेशन में दिव्यांग हुए हों और उसके बाद सेवामुक्त हो गए हों35 सालभूतपूर्व सैनिकों के लिए ऊपरी आयु सीमा। इसमें कमीशंड ऑफिसर्स एवं ईसीओ/एसएससीओ शामिल हैं जिन्होंने सैन्य सेवा में कम से कम पांच साल दिए हों37 सालदिव्यांग (सामान्य श्रेणी)42 साल
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आयु की गणना कैसे होती है?
न्यूनतम और अधिकतम आयु सीमा 1 अगस्त के मुताबिक निर्धारित होती है। जैसे अगर किसी का जन्म 6 अप्रैल, 1986 का हुआ है तो उसकी आयु 1 अगस्त, 2019 को होगी 33 साल 3 महीना और 25 दिन यानी अगर वह व्यक्ति 2019 में पेपर देना चाहता है तो नहीं दे पाएगा। वह व्यक्ति 2018 में भी पेपर देने के योग्य नहीं था क्योंकि उसकी उम्र उस समय 32 साल 3 महीने 25 दिन हो रही थी यानी 3 महीने ज्यादा।

कितने प्रयास

कौन कैंडिडेट कितनी बार सिविल सर्विसेज की परीक्षा दे सकता है, यह भी उस वर्ग से निर्धारित होता है जिससे उसका संबंध है। आमतौर पर सामान्य वर्ग के कैंडिडेट्स को 32 साल की उम्र तक 6 चांस मिलता है। यानी सामान्य वर्ग का कैंडिडेट 32 साल की उम्र तक छह बार सिविल सर्विसेज का एग्जाम दे सकता है।

ओबीसी वर्ग के कैंडिडेट्स 35 सालों की उम्र तक 9 बार एग्जाम दे सकेंगे।
एससी/एसटी वर्ग के कैंडिडेट्स को 37 साल तक जितनी बार चाहें, पेपर दे सकेंगे। उनके लिए कोई सीमा तय नहीं है।
सामान्य वर्ग के दिव्यांग छात्र 42 साल की उम्र तक 9 बार एग्जाम दे सकेंगे... 

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Friends agar prelims nikalna hai to aapko poora syllabus cover karna hi padega aur revision bhi achche se karna padega...... 
Aap ye sab karoge to aap upsc prelims nikal paoge.... 

1. Aapko drishti ya vision ka test schedule download karna hai.. Usme diya hua hai ki first test me topics diye hai jo aapko 8 se 10 din me cover karne hote hai....  Topics ko padho aur phir test series ka test solve karo poori imaandari ke sath me...... 

Test series 2020 ke liye me aapko provide karwa dunga free of cost..... 

2. Current affairs ke liye me nahi bolunga ki newspaper padho... Last year 7 question aaye h current affairs se... Aap drishti current affairs today padh lo dono medium me aati hai.... 

100 % cover ho jayega.... 

3. Source ke liye aap ncrts padh skte hai...... Market me bahut books available hai bas koi padhne wala hona chahiye...... 

4. Time management bahut jaruri hai..... 

5. Health ka dhyan rakhna.... Padhte padhte khate peete rahna.... 

6. Quality and quantity ka dhyan rakhe    ... 

7 aapko ncrts + syllabus + current affairs ko sath me lekar Chalna hai... 

8. Answer writting practice karte rahe.... 

9.jitna jaldi so jaye syllabus ko cover kar do..... Jisase main exam par focus kiya jaye...

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3 महीनों की तैयारी में इस तरह आप भी बन सकते हैं IAS ऑफिसर... 

भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) को पहले इंपीरियल सिविल सर्विस (ICS) के रूप में जाना जाता था, जो कि सिविल सेवा परीक्षा और भारत की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक है। यह अखिल भारतीय प्रशासनिक सिविल सेवा के लिए अधिकारियों की भर्ती के लिए संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित किया जाता है।

इसके अलावा भारतीय प्रशासनिक सेवा में चुने गए एक अधिकारी को कलेक्टर, आयुक्त, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के प्रमुख, मुख्य सचिव, कैबिनेट सचिव इत्यादि जैसी बहुत ही विविध भूमिकाओं में काम करने का मौका मिलता है।

लोकप्रिय रूप से IAS परीक्षा के रूप में जाना जाता है, आधिकारिक तौर पर इसे सिविल सेवा परीक्षा (CSE) कहा जाता है, जो हर साल केंद्रीय भर्ती एजेंसी, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित की जाती है।

IAS भारत में स्थायी नौकरशाही है और कार्यकारी शाखा का एक हिस्सा है। यह तीन अखिल भारतीय सेवाओं में से एक है, इसके कैडर को केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों दोनों द्वारा नियोजित किया जा सकता है।

भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) को 24 सरकारी सेवाओं जैसे IPS, IFS (फॉरेन), IFS (फॉरेस्ट), IP & TAFS, IAAS, IRS, IDAS, CMSE, IRTS, IRAS, IRPS में से एक के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। , ITS, CAPF-AF कुछ नाम।

कैसे बनें आईएएस ऑफिसर-

आईएएस परीक्षा को आधिकारिक तौर पर यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा कहा जाता है। यूपीएससी सीएसई में 3 चरण होते हैं - प्रीलिम, मेन और इंटरव्यू। भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल होना एक तरह की प्रतिस्पर्धा होने के साथ-साथ पूरी तैयारी की परीक्षा है।

सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई)-

यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) सही उम्मीदवारों का चयन करने के लिए जिम्मेदार सरकारी एजेंसी है। हर साल संयुक्त रूप से सभी 24 सेवाओं के लिए लगभग 1000 उम्मीदवार चुने जाते हैं। परीक्षा का पहला चरण यानि कि प्रीलिम्स आमतौर पर जून के आसपास आयोजित किया जाता है, जबकि दूसरा चरण, मेन (लिखित) अक्टूबर के आसपास आयोजित किया जाता है। जो लोग दोनों चरणों को पास कर लेते हैं उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है।

वार्षिक रूप से, UPSC, IAS, IPS और IFS जैसी 20 से अधिक सेवाओं के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने के लिए सिविल सेवा परीक्षा (CSE) आयोजित करता है। IAS परीक्षा के लिए औसतन आठ लाख से अधिक उम्मीदवार पंजीकरण करते हैं और लगभग पांच लाख उम्मीदवार परीक्षा के लिए उपस्थित होते हैं।

आईएएस परीक्षा के लिए योग्यता मानदंड-

किसी भी विषय में ग्रेजुएशन डिग्री होना जरूरी है।
इसके अलावा कॉलेज के आखिरी साल के छात्र भी आवेदन कर सकते हैं।

कितनी बार दे सकते हैं आईएएस परीक्षा-
यूपीएससी सीएसई में एक सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार के लिए परीक्षा देने के लिए प्रयासों की संख्या 6 है। ओबीसी उम्मीदवारों के लिए प्रयासों की संख्या 9 है, जबकि अनुसूचित जाति /अनुसूचित जनजाति वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आईएएस परीक्षा के लिए असीमित प्रयास हैं।

क्या उम्र की सीमा है?
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए उपस्थित होने की न्यूनतम उम्र 21 साल है। सामान्य श्रेणी के लिए ऊपरी आयु सीमा 32 साल है और ओबीसी के लिए यह 35 साल है।

IAS परीक्षा का सिलेबस-

यूपीएससी परीक्षा के लिए उसके सिलेबस को समझना सबसे पहले जरूरी है। सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में 200 अंक (सामान्य अध्ययन पेपर I और सामान्य अध्ययन पेपर II) के दो पेपर होते हैं। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में उम्मीदवार की रैंक केवल मेन और इंटरव्यू में बनाए गए स्कोर पर निर्भर करती है। लिखित परीक्षा (मुख्य) में 9 पेपर होते हैं लेकिन अंतिम योग्यता रैंकिंग के लिए केवल 7 पेपरों को ही माना जाता है... 


ब्रांड अंबेस्टर (योजना/ अभियान एवं संस्थान )

ब्रांड अंबेस्टर (योजना/ अभियान एवं संस्थान )

 ▪भारत में 'ला लीगा' के ब्रांड एंबेसडर- रोहित शर्मा
▪ 'पेप्सी' का ब्रांड एंबेस्डर सलमान खान 
▪भारत के पहले प्लानिंग  एंबेसडर -रीपुदमन बेवली
▪ नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (एनएडीए )-अभिनेता सुनील शेट्टी
▪ स्वदेशी लोगों के लिए यूनेस्को सद्भावना दूत- यलित्जा अपारिसियो
▪'भारत की लक्ष्मी'  पहल की अंबेसडर -दीपिका पादुकोण एवं पीवी सिंधु
▪ 'मोबिल इंडिया' का ब्रांड एंबेसडर - बजरंग पुनिया
▪ भुगतान प्रौद्योगिकी कंपनी 'वीजा'- पीवी सिंधु
▪ मध्यप्रदेश राज्य के अंबेस्टर -अभिनेता गोविंदा
▪ यूपीआई पेमेंट एप  Bharatpe का ब्रांड   एंबेसडर -सलमान खान
▪ संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के सद्भावना दूत- दीया मिर्जा 
▪बस टिकटिंग प्लेटफॉर्म 'रेडबस' का ब्रांड अंबेसडर- महेंद्र सिंह धोनी
▪ गौ सेवा आयोग उत्तर प्रदेश -हेमा मालिनी
 ▪ फेंटेसी 11 के ब्रांड एंबेसडर( ट्रेडमार्क राजदूत)- मुरली कार्तिक 
▪संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के गुडविल एंबेसडर- पद्मालक्ष्मी
▪ एसबीआई( SBI) के डिजिटल ऐप 'योनो' के ब्रांड अंबेस्डर- स्वपना बर्मन
▪  सबसे युवा यूनिसेफ गुडविल एम्बेसडर- मिली बॉबी ब्राउन 
▪यूनिसेफ इंडिया का युवा अंबेसडर -हिमादास
▪ 2019 महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप- मैरीकॉम 
▪नोकिया इंडिया- आलिया भट्ट 
▪नेपाल टूरिज्म -जयाप्रदा
▪ बीएसएनएल/ ट्राइब्स इंडिया -मैरीकॉम
▪ कौशल भारत अभियान- वरुण धवन एवं अनुष्का शर्मा
▪ सड़क सुरक्षा अभियान/ स्वच्छ भारत मिशन- अक्षय कुमार 
▪डिजिटल इंडिया- अंकित फाडिया 

▪मेक इन इंडिया- पीरु खम्बत्ता
▪ फिट इंडिया अभियान- सोनू सूद
▪ व्हर्लपूल -कृति सैनन और सुशांत सिंह राजपूत
▪ सुमाधुरा समूह-  एम०एस० धोनी 
▪WHOगुडविल अंबेसडर (ऑटिज्म के लिए)- साइमा वाजिद हुसैन
▪ remit 2 india/ फिलिप्स इंडिया -विराट कोहली
 ▪dream11/ इंडिगो पेंट- महेंद्र सिंह धोनी 
▪पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास- एम०सी० मैरीकॉम
 ▪पल्स पोलियो /मुथूट ग्रुप- अमिताभ बच्चन 
▪एजुकेट गर्ल्स /स्मार्ट फोन वनप्लस -अमिताभ बच्चन
▪ तेलुगु टाइगर्स- राना दग्गुबती
▪ असम राज्य पर्यटन- प्रियंका चोपड़ा
▪ असम राज्य खेल- हिमा दास
▪ अरुणाचल प्रदेश राज्य- जॉन अब्राहिम 
▪केरला आयुर्वेद- स्टैफी ग्राफ
▪ हरियाणा स्वास्थ्य कार्यक्रम -गौरी सौरान
▪ हरियाणा योग और आयुर्वेद- योग गुरु बाबा रामदेव
▪ तेलंगना राज्य- सानिया मिर्जा और महेश बाबू
▪ सिक्किम राज्य- ए० आर० रहमान
▪ फ्लिपकार्ट- रणबीर कपूर और श्रद्धा कपूर
▪ गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी )-अमिताभ बच्चन
▪ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड- शोएब अख्तर
▪ लुब्रिकेंट इंडिया (हिंदुजा ग्रुप)- हार्दिक पांड्या
▪ कामनवेल्थ यूथ अंबेस्डर- प्रिंस हैरी
▪ VIVOइंडिया/ फोन पे- आमिर खान 
▪उवर इंडिया (पहला ब्रांड अंबेस्डर)- विराट कोहली
▪  टी20 मुंबई लीग-सचिन तेंदुलकर 
▪ स्वच्छ आदत स्वच्छ भारत -काजोल
▪ मास्टरकार्ड के पहले भारतीय अंबेस्डर -इरफान खान 
▪स्वच्छ आंध्र मिशन- पीवी सिंधु 
▪स्वच्छता ही सेवा -बिलाल डार
▪ स्वच्छ भारत अभियान/ हेपेटाइटिस बी उन्मूलन- अमिताभ बच्चन
▪ भारत के लिए संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सद्भावना दूत -दीया मिर्जा 
▪भारतीय वन्यजीव ट्रस्ट (वाइल्डलाइफ ट्रस्ट )-दीया मिर्जा 
▪संयुक्त राज्य पर्यावरण के लिए वैश्विक सद्भावना दूत- एली गोल्डिंग
▪ यूनिसेफ /स्किल इंडिया अभियान -प्रियंका चोपड़ा 
▪मां अभियान -माधुरी दीक्षित 
▪पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी)- विराट कोहली
▪ अतुल्य भारत अभियान- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
▪ बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ- माधुरी दीक्षित
▪ बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (हरियाणा सरकार द्वारा)- साक्षी मलिक
▪ दरवाजा बंद अभियान- अमिताभ बच्चन ,अनुष्का शर्मा
▪डावर(त्वचा देखभाल ब्रांड महिला )-कृति सैनन
▪ रेनॉल्ट इंडिया- रणबीर कपूर 
▪फ्रूट जूस appy fizz -सलमान खान 
▪ऑनलाइन दवा कंपनी- महेंद्र सिंह धोनी 
▪स्नीकर्स चॉकलेट- महेंद्र सिंह धोनी
▪ डीडी किसान चैनल- अमिताभ बच्चन 
▪इंटेक्स -माधुरी दीक्षित
 ▪मेकमायट्रिप -आलिया भट्ट और रणबीर

IAS Officer)_कैसे_बने_पूरी_जानकारी

IAS Officer_कैसे_बने_पूरी_जानकारी

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 1🛑. 12वी क्लास पास करे किसी भी सब्जेक्ट से
अगर आपको आईएएस ऑफिसर (IAS Officer) बनना है तो इसके लिए सबसे पहले आपको 12वी की परीक्षा पास करनी होगी अगर आप अभी स्कूल में है तो किसी भी स्ट्रीम (Stream) से चाहे वो साइंस (Science) , कॉमर्स (Commerce) हो या फिर आर्ट्स (Arts) सब्जेक्ट हो बस आपको सबसे पहले बारवी पास करनी होगी
2.🛑अब ग्रेजुएशन पूरी करे किसी भी कोर्स में
3.🛑UPSC एग्जाम के लिए अप्लाई करे
4.🛑अब Preliminary Exam एग्जाम क्लियर करे
यूपीएससी एग्जाम में अप्लाई करने के बाद अब आपको सबसे पहला एग्जाम क्लियर करना होगा जिसका नाम है The preliminary exam, इसमें दो पेपर होते है और दोनों ही ऑब्जेक्टिव वाले सवाल होते है यानि की चार आप्शन वाले तो दोनों पेपर 200 – 200 के होंगे तो नेक्स्ट राउंड में जाने के लिए आपको इस एग्जाम को क्लियर करना होगा जो की बेहद जरुरी है आईएएस ऑफिसर (IAS Officer) बनने के लिए.
 5. 🛑अब Main Exam क्लियर करे
जैसे ही आप पहले एग्जाम को क्लियर करलेते है इसके बाद अब आपको मेन एग्जाम क्लियर करना होगा जो की बहोत मुस्किल होता है इसमें आपको टोटल 9 पेपर देने होंगे जिसमे आपको रिटेन (Written Exam) के साथ साथ इंटरव्यू भी देना होता है ये थोडा मुस्किल होता है तो इस एग्जाम को बहोत लोग क्लियर नहीं कर पाते तो अगर आपको आईपीएस ऑफिसर बनना है तो आपको अच्छे से और एग्जाम में टॉपमार्क्स लाने होगे तो आपको आईएएस एग्जाम क्लियर करने के लिए धयान से पढना हो.

 6. 🛑अब इंटरव्यू राउंड क्लियर करे
जैसे ही आपके दोनों राउंड क्लियर होजये उसके बाद अब आपको पर्सनल इंटरव्यू (Personal interview) के लिए बुलाया जाता है जो की करीब 45 मिनट का होता है तो आपको इंटरव्यू क्लियर करना होगा यहाँ पर कई इंटरव्यू लेने वाले पैनल होते है जो आपसे काफी मुस्किल और ट्रिकी सवाल पूछते है तो आपको इसके लिए तैयार रहना होगा और आपको इस राउंड को भी क्लियर करना होगा तभी आप एक आईएएस ऑफिसर (IAS Officer) बन पाएंगे
तो इस तरह आप एक आईएएस ऑफिसर (IAS Officer) बन जायेंगे लेकिन याद रहे ये इतना आसान नहीं है इसके लिए आपको हो सकता है अलग से टयूसन लेना होगा या अगर आप सेल्फ स्टडी करके एग्जाम पास करना चाहते है तो कर सकते है याद रहे ये एग्जाम इंडिया का सबसे मुस्किल एग्जाम माना जाता है... 

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अक्सर जो छात्र अभी ग्रेजुएशन में हैं या कही बाहर जाकर तैयारी नहीं कर पा रहे और वो आईएएस की तयारी शुरू करना चाहते हैं उनके मन में ढेरों सवाल होते हैं ? … आईएएस के लिए क्या क्या पढ़ना पड़ेगा ? .. कैसे पढ़ना पड़ेगा ..?..कौन कौन सी बुक्स पढ़नी पड़ेंगी .? न्यूज़ पेपर और मैगजीन जरुरी है क्या ..? अगर हाँ तो कौन सी ..?… उनके लिए इस पोस्ट को मैंने तैयार किया है ..आशा है की हमेशा की तरह आपकी कुछ मदद करेगी :–
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👌👌मैं आपको 10 टिप्स दे रहा हूँ जो आपको आईएएस की तैयारी में मदद करेंगी !👌👌
👉1 . आईएएस की तैयारी की शुरुआत NCERT की बुक्स से कीजिये .. उनका कोई भी विकल्प नहीं है ..NCERT आपका Base क्लियर करने के काम में आती हैं .. ऐसे छात्र जिनकी पृष्ठभूमि कला क्षेत्र से न रही हो ..उनके लिए ये सबसे अधिक महत्वपूर्ण है …NCERT को ख़त्म करने का टारगेट बनाइये और दो माह में इसे ख़त्म कर दीजिये .. इस दौरान आपको नोट्स नहीं बनानी हैं .. सिर्फ महत्वपूर्ण तथ्य जो आपको आगे सहायता प्रदान करेंगे उन्हें हाईलाइट करते हुए चलना है ! कम से कम चार विषय जिसमे इतिहास , भूगोल , राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र आदि की 6 से 12 तक की तो ख़त्म ही कर लीजिये !!
👉2 . जब NCERT ख़त्म हो जाये फिर आपको हर विषय की मुख्य किताब लेनी होगी …हर विषय के विशेषज्ञों की अलग अलग किताबे हैं… अब एक एक विषय को लीजिये और उसकी NCERT भी लीजिये फिर उसे पढ़कर नोट्स बनाते जाइये जिसमे NCERT की भी मदद लीजिये !! जब एक विषय पूरा हो जाये फिर दूसरा ले लीजिये और उसी दौरान पहले का रिवीजन करते जाइये .फिर तीसरी , चौथी आदि .इसी तरह प्रक्रिया आगे बढाइये .. !!
👉3 . आईएएस की तैयारी के दौरान सबसे महत्वपूर्ण है समाचार पत्र … आखिर आपको राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय गतिविधियों का पता होना चाहिए !! अब सवाल ये आता है की कौन सा समाचार पत्र ..? ..कई लोगों ने मुझसे कहा था कि सर हमारे यहाँ THE HINDU नहीं आता .. ऐसे भी बहुत लोग है जिन्हे अंग्रेजी में समस्या होती है … तो देखिये समाचार पत्र जरुरी नहीं कि THE HINDU ही हो ..अगर आपको नहीं मिल पा रहा या नहीं समझ आ रहा तो आप कोई भी एक राष्ट्रीय पेपर फॉलो कर सकते हो .. समाचार पत्र में मुख्य पृष्ठ पढ़ने के बाद , देश विदेश , अर्थव्यवस्था वाला पेज .. इसके बाद सीधे सम्पादकीय पृष्ठ पर जाइये , खेल और बाकि सरसरी निगाह से देख लीजिये !!
👉4 . अब बारी आती है मासिक पत्रिका की ..कुछ लोग प्रतियोगिता दर्पण कहते हैं ..पर यहाँ पर मैं एक चीज कहना चाहूंगा कि अगर आप पीसीएस की तैयारी कर रहे हो तो  प्रतियोगिता दर्पण ठीक है पर आईएएस की तैयारी के लिए सिविल सर्विस क्रॉनिकल , सिविल सर्विसेज टाइम्स या फ्रॉन्टलाइन इनमे से किसी एक पत्रिका को नियमित फॉलो कीजिये जब तक आप सफल नहीं हो जाते तब तक ..किसी भी माह की पत्रिका छूट न पाये !!
👉5 . सिविल सर्विसेज प्रारंभिक परीक्षा हो या मुख्य परीक्षा इसमें UNSOLVED पेपर्स बहुत अहमियत रखते हैं … मैं कहता हूँ कि आप सब तैयारी शुरू करने से पहले ही UNSOLVED पेपर्स देख ले …इससे आपको आईएएस परीक्षा के प्रश्नों के स्वरुप का पता चलता है ..क्योकि इस परीक्षा में प्रश्नो का स्वरुप अन्य सभी BANK , SSC  आदि से भिन्न होता है !! इसलिए पेपर्स ले लेकर प्रश्नो के स्वरुप को ठीक तरह से समझ ले !!
👉6 . एक सबसे महत्वपूर्ण काम जो आपको पूरी तैयारी के दौरान करना है कि आप रोज किन्ही २ प्रश्नो को लेकर Answer राइटिंग कि प्रैक्टिस कीजिये ..वो प्रश्न किसी भी चीज से सम्बंधित हो सकते है ..विषय से या समसामयिक मुद्दे से … क्योकि आईएएस मुख्य परीक्षा में सफलता का एक मात्र आधार आपका उत्तर लेखन ही है !!
😊शेष 4 टिप्स अगले अंक में …………

🙏🙏दोस्तों आईएएस में सफलता का एक ही फार्मूला है नियमित और विश्लेषणात्मक अध्ययन … यहाँ सिर्फ पढ़ना नहीं बल्कि आपको पता होना चाहिए कि किस तरह पढ़ना है …अगर आप सही दिशा में अध्ययन कर रहे हैं तो १० माह में भी सफल हो जायेंगे और अगर आप दिशाविहीन तैयारी कर रहे हैं तो १० वर्ष भी आप परिश्रम कर लें कुछ नहीं हासिल होने वाला …🙏🙏

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सिविल सेवा परीक्षा मे उपस्थित होने हेतु प्रमुख योग्यताए निम्न है 
1. आप भारत के नागरिक हो 
2. किसी भी मापदंड अधिकृत विश्वविद्यालय से स्नातक हों
3. आपकी आयु 21 से 32 वर्ष के मध्य हो , आरक्षित वर्ग को नियमानुसार छूट ।
4. प्रयासों की संख्या 
सामान्य वर्ग - 6 
अ.पि.वर्ग - 9
अनुसूचित जाति तथा जनजाति वर्ग  - असीमित 
केन्द्र सरकार के कर्मचारियों को नियमानुसार छूट 
 
4. IPS पद हेतु न्यूनतम ऊँचाई पुरुष - 170 cm 
महिला - 155 Cm 
5. परीक्षा तीन चरणों मे 
A. प्रारंभिक परीक्षा  (2 पेपर ):-  सामान्य अध्ययन - 200 अंक 
CSAT - 200 अंक
B. मुख्य परीक्षा (9 पेपर)
अंग्रेजी (300 अंक) 
हिन्दी या upsc द्वारा विवरण मे दी गई कोई भी भाषा(300 अंक)
इन दोनों पेपर मे बस आपको उत्तीर्ण होना है 33% अंक

मेरिट आधारित पेपर 
निबंध (250अंक)
सामान्य अध्ययन 1 (250 अंक)
सामान्य अध्ययन 2( 250 अंक)
सामान्य अध्ययन 3( 250 अंक)
सामान्य अध्ययन 4 (250 अंक)
वैकल्पिक विषय के दो पेपर (500अंक)
कुल 1750 अंक

साक्षात्कार - 275 अंक