दुनिया की सारी कल्पनाएँ, परिकल्पनाएँ
सारी बहसें, सारे निष्कर्ष एक तरफ
और एक पुरुष को समझने की मेरी यात्रा एक तरफ
मैंने पुरुषों पर बहुत कुछ सुना था
बहुत कुछ पढ़ा था
बहुत कुछ कहा भी था
कभी आलोचनाएँ की
कभी प्रश्न उठाए
कभी उनके मौन को कठोरता समझा
कभी उनकी दूरी को संवेदनहीनता
फिर तुम मिले
और मैंने जाना कि
हर पुरुष एक जैसा नहीं होता
तुममें मैंने एक ऐसा पुरुष देखा
जो पहाड़ की तरह दृढ़ था
पर भीतर कहीं नदी की तरह बहता भी था
जिसकी आवाज़ में कठोरता थी
पर भावनाओं में कोमलता भी
जिसने अपने दुःखों का प्रदर्शन नहीं किया
पर दूसरों के दुःखों को महसूस करना जाना
तुम्हें जानकर लगा
पुरुष केवल वह नहीं होते
जो दुनिया को दिखाई देते हैं
उनके भीतर भी
अनकहे डर होते हैं
अधूरे सपने होते हैं
छिपे हुए घाव होते हैं
और प्रेम करने की उतनी ही गहरी क्षमता होती है
जितनी किसी और इंसान में
तुम्हारे साथ मैंने
एक पुरुष की संवेदनशीलता को देखा
उसकी चुप्पियों को सुना
उसके संघर्षों को महसूस किया
और शायद इसी दौरान
मेरे भीतर की कई धारणाएँ बदल गईं
अब जब पीछे मुड़कर देखती हूँ
तो लगता है कि
मैंने केवल किसी व्यक्ति को नहीं जाना
मैंने एक पुरुष के उस पक्ष को जाना
जिसे दुनिया अक्सर देख ही नहीं पाती
इसके लिए तुम्हारा धन्यवाद
उस स्नेह के लिए
उस विश्वास के लिए
और उन अनुभवों के लिए
जिन्होंने मुझे सिखाया कि
कभी-कभी एक पुरुष
सारी बहसों से बड़ा उत्तर होता है
और कुछ लोग
हमारी ज़िंदगी में आकर
हमें दुनिया नहीं
खुद को समझा जाते हैं।
तुम उन्हीं लोगों में से एक हो
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