हर किसी को अपना मत समझिए... क्योंकि हर सुनने वाला हमदर्द नहीं होता।
ज़िंदगी की सबसे अनमोल नेमत धन, दौलत या शोहरत नहीं है। सबसे बड़ी नेमत वह इंसान है जो आपके टूटे हुए मन की आवाज़ भी सुन ले, बिना किसी स्वार्थ के आपका हाथ थाम ले, और अंधेरे रास्तों में भी आपको उजाले की दिशा दिखाता रहे।
ऐसे लोग भीड़ में नहीं मिलते... वे किस्मत की किताब में लिखे जाते हैं।
आज की दुनिया में चेहरे बहुत हैं, लेकिन चरित्र कम हैं। शब्द बहुत हैं, लेकिन संवेदनाएँ कम हैं। लोग आपके सामने ऐसे बैठेंगे मानो आपकी पीड़ा उनके सीने में उतर गई हो, मानो आपकी आँखों का हर आँसू उनकी पलकों पर ठहर गया हो। मगर जैसे ही आप अपनी कहानी उनके हवाले करते हैं, वही कहानी किसी और की महफ़िल में चर्चा बन जाती है।
आप अपना दर्द सुनाते हैं...
और दुनिया उसे मनोरंजन की तरह सुनती है।
आपके घावों की गहराई जिनके लिए रातों की नींद छीन लेती है, वही घाव किसी और के लिए चाय की चुस्कियों के बीच सुनाया जाने वाला एक दिलचस्प किस्सा बन जाते हैं।
यही कारण है कि हर दर्द को बाज़ार में नहीं ले जाना चाहिए।
कुछ आँसू इतने पवित्र होते हैं कि उन्हें केवल ईश्वर और अपनी आत्मा के बीच ही रहने देना चाहिए।
हाँ, यह भी सच है कि इस भीड़ में कभी-कभी कोई ऐसा भी मिलता है जो सचमुच चाहता है कि आप संभल जाएँ, मुस्कुरा दें, फिर से खड़े हो जाएँ। वह आपकी कमज़ोरियों का हिसाब नहीं रखता, आपकी तकलीफ़ों का प्रदर्शन नहीं करता। उसकी अपनी मजबूरियाँ हो सकती हैं, उसके हाथ सीमित हो सकते हैं, लेकिन उसकी नीयत निर्मल होती है।
ऐसे लोग समुद्र के किनारे पड़ी साधारण रेत नहीं, बल्कि गहराइयों में छिपे मोती होते हैं।
इसलिए अपनी हर पीड़ा को दुनिया के सामने मत खोलिए।
हर दरवाज़े पर अपनी उदासी मत रखिए।
हर मुस्कुराते चेहरे को अपना राज़दार मत बनाइए।
क्योंकि दुनिया उतनी सरल नहीं है जितनी दिखाई देती है, और नक़ाबों के इस मेले में सच्चे चेहरे पहचानना सबसे कठिन कला है।
अपने दुःख को अपनी शक्ति बनाइए, अपनी कमज़ोरी नहीं।
अपनी चुप्पी को अपनी गरिमा बनाइए, अपनी हार नहीं।
और जब कभी जीवन में कोई ऐसा इंसान मिल जाए जो आपके आँसुओं का सम्मान करे, आपकी अनुपस्थिति में भी आपकी इज़्ज़त की रक्षा करे, और आपकी भलाई को अपना धर्म समझे...
तो उसे संभाल कर रखिए।
क्योंकि ऐसे लोग रिश्तों के नाम पर नहीं मिलते, वे ऊपरवाले की तरफ़ से भेजी गई वह दुआ होते हैं जो हर किसी के हिस्से में नहीं आती।
सोचिए... आपकी ज़िंदगी में जो लोग आपके दुःख जानते हैं, उनमें से कितने लोग सचमुच आपके साथ खड़े हैं, और कितने लोग केवल आपकी कहानी जानते हैं?
यही प्रश्न कई बार पूरी ज़िंदगी का सबसे सच्चा उत्तर बन जाता है।
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