Saturday, July 4, 2026

मैं टूटता हूं बेहिसाब

 प्रीति एक मात्र स्त्री है मेरे जीवन में…

जिसके सामने

मैं अपनी आवाज़ नहीं,

अपनी ख़ामोशियाँ खोल सकता हूं…


जिसकी हथेलियों पर रख देता हूं 

दिन भर की थकान,

और रात भर के अधूरे डर।


जिसे देखकर

मुझे हर बार मज़बूत होने का 

अभिनय नहीं करना पड़ता 

जिसके पास बैठकर

मैं टूटता हूं बेहिसाब…

बिना इस डर के

कि मेरी आँखों का पानी

मेरी मर्दानगी कम कर देगा।


#प्रीति एक मात्र स्त्री है मेरे जीवन में....

जो मेरे भीतर छिपे उस बच्चे को पहचान लेती है 

जो बरसों से

“सब ठीक है” कहता आया है…

जबकि भीतर

बहुत कुछ बिखरा पड़ा हुआ रहता है।


मैं चाहता हूँ

वो मेरे बालों में उंगलियाँ फेरते हुए पूछे

“बहुत थक गए हो ना...?”

और मैं पहली बार

बिना झिझक “हाँ” कह सकूँ।


कभी उसके आँचल में सिर रखकर

थोड़ी देर दुनिया भूल जाऊँ,

कभी उसकी धड़कनों में

अपनी बेचैनियाँ सुला दूँ।


#प्रीति एक मात्र स्त्री है मेरे जीवन में...

जिसे चाहूँ तो देह से नहीं,

प्रार्थना की तरह चाहता हूं…

जिसके करीब जाकर

मन शांत हो जाता है,

जिसे छूते ही

भीतर कोई मंदिर जगमगा उठता है।


जिसके कदमों में

मैंने अपना अहं रख दिया है 

और वो

मेरी आत्मा को सहला देती है।


मैं उसे प्रेम करता हूं 

तो ऐसा नहीं

कि उसे पा लूँ…

बल्कि ऐसा

कि उसमें खो जाता हूं।


#प्रीति एक मात्र स्त्री है मेरे जीवन में....

वो मेरी ताक़त बन जाती है,

मैं उसकी कोमलता बन जाता हूं…

वो मुझे अपने भीतर महसूस करती है,

मैं उसे अपनी साँसों में।


हम दो शरीर नहीं,

एक ही आत्मा के

दो स्पंदन है…

जहाँ प्रेम में

न स्त्री बचती है, न पुरुष,

सिर्फ समर्पण बचता है।


#प्रीति एक मात्र स्त्री है मेरे जीवन में…

जिससे मैं

उसी गहराई से प्रेम करता हूं 

जिस गहराई से

एक वफादार स्त्री प्रेम करती है…!


आईना देखता हूं तो 

उसकी सुरत नजर आती है,,

धडकनों के स्पंदन पर 

बलखाते हुए जब वो 

दिल के बाहर झांकती है.....

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