Friday, June 19, 2026

तुम्हारी आँखों में झाँकना

 तुम्हें चाहना वैसा है

जैसे किसी खगोलशास्त्री का पहली बार देखना एक अनाम आकाशगंगा को—


जिसके अस्तित्व का अनुमान तो था, पर जिसकी रोशनी अब जाकर पहुँची है हृदय तक।


तुम्हारे होंठों पर रखा गया एक चुम्बन


प्रकाश-वर्षों की दूरी तय करती उस किरण जैसा है, जो करोड़ों वर्षों बाद भी अपना ताप नहीं खोती।


तुम्हारी कमर का वक्र


भूगोल की किसी नदी नहीं, बल्कि पृथ्वी की समस्त तटरेखाओं का एक साथ खिंचा हुआ मानचित्र है,


जहाँ मेरी दृष्टि बार-बार भटक जाती है और हर बार तुम्हीं तक पहुँचती है।


तुम्हारी नाभि—


ब्रह्मांड का वह गुरुत्व-केंद्र,


जहाँ आकर मेरे सारे तर्क, सारे सिद्धांत, सारे वैज्ञानिक निष्कर्ष


अपने घुटने टेक देते हैं।


इतिहास कहता है सभ्यताएँ नदियों के किनारे बसीं,


पर मेरा इतिहास कहता है एक सम्पूर्ण जीवन तुम्हारी मुस्कान के किनारे बस सकता है।


गणित के सारे सूत्र उस दिन व्यर्थ हो गए,


जब मैंने पाया कि


अनंत + अनंत = तुम


और शून्य ÷ प्रेम = फिर भी तुम।


तुम्हारी आँखों में झाँकना


किसी दूरबीन से आकाशगंगा देखने जैसा नहीं,


बल्कि स्वयं एक नक्षत्र बन जाने जैसा है।


और जब तुम अपने सिर को मेरे सीने पर रखती हो,


तब लगता है


न्यूटन के नियम, आइंस्टीन की सापेक्षता, आर्यभट्ट के गणित, और वेदों के समस्त श्लोक


एक ही सत्य पर आकर ठहर गए हैं—


कि ब्रह्मांड का सबसे जटिल रहस्य प्रेम है।


और यदि कभी समय हमें अलग भी कर दे,


यदि इतिहास हमारी कथा को धूल में दबा दे,

यदि तारे बुझ जाएँ, यदि आकाशगंगाएँ विलीन हो जाएँ,

तब भी मैं तुम्हें खोज लूँगा,

क्योंकि तुम्हारा नाम मेरी आत्मा में किसी समीकरण की तरह नहीं,

एक शाश्वत सत्य की तरह लिखा है—


जिसे न समय बदल सकता है, न मृत्यु सिद्ध कर सकती है, न अनंत मिटा सकता है।॥

No comments:

Post a Comment