Thursday, June 18, 2026

प्रेम का नशा क्या है?

 यह साधारण शराब की बात नहीं है। 

संसार की शराब आपकी चेतना को नीचे गिराती है, 

लेकिन प्रेम की शराब आपकी चेतना को ऊपर उठाती है। दोनों में नशा है, लेकिन दिशा अलग है।


जब कोई व्यक्ति सचमुच प्रेम में पड़ता है, 

तो उसके भीतर कुछ ऐसा घटता है जो तर्क से परे है। अचानक उसे लगता है कि जीवन में रंग भर गए हैं। वही पेड़, वही आकाश, वही रास्ते—

लेकिन सब कुछ नया दिखाई देने लगता है।


      प्रेम का नशा क्या है?

      जिस तरह शराब पीने वाला 

कुछ समय के लिए अपनी चिंताओं को भूल जाता है, वैसे ही प्रेम में डूबा व्यक्ति अपने अहंकार को भूलने लगता है।


      शराब कहती है,

     "दुनिया को भूल जाओ।" 

       प्रेम कहता है, 

     "अपने आप को भूल जाओ।"


      और जब "मैं" भूलने लगता है, 

      तभी आनंद पैदा होता है।


      और जब "मैं" भूलने लगता है, 

      तभी आनंद पैदा होता है...


● एक युवक किसी युवती से प्रेम करता है।

   कल तक वह केवल अपने बारे में सोचता था—

   मेरा लाभ, मेरी सफलता, मेरी प्रतिष्ठा।


   लेकिन प्रेम के बाद 

   पहली बार उसके मन में किसी और की 

   खुशी महत्वपूर्ण हो जाती है। 

   वह सोचता है, "वह खुश रहे।"

   यह परिवर्तन ही प्रेम की मस्ती है।


    #ओशो कहते

जब तक तुम अपने चारों ओर "मैं" की दीवार बनाकर जीते हो, तब तक जीवन बोझ लगता है।

    प्रेम उस दीवार में दरार डाल देता है।

    और जिस दिन दीवार गिर जाती है,

सी दिन परमात्मा की हवा भीतर प्रवेश कर जाती है।


   इसलिए प्रेमी अक्सर थोड़े पागल दिखाई देते हैं।

    वे कारणों से नहीं जीते, वे हृदय से जीते हैं।


       #नानक कहते हैं 

        परमात्मा का प्रेम ऐसा अमृत है 

 जिसे पीकर मनुष्य सदा के लिए तृप्त हो जाता है।


संसार की शराब का नशा सुबह उतर जाता है।लेकिन नाम और प्रेम का नशा जितना पुराना होता है, उतना ही गहरा होता जाता है।


    ● एक फकीर से पूछा गया, 

      "क्या तुमने कभी शराब पी है?"


        

      फकीर हंसा और बोला, 

"मैंने वह शराब पी है जिसके सामने सारी दुनिया की शराब फीकी है।"


  लोगों ने पूछा, "कौन सी?"

  फकीर ने कहा,

 "जब मैंने अपने भीतर परमात्मा की उपस्थिति को 

   महसूस किया, उसी दिन से मैं नशे में हूँ।"


प्रेम की मस्ती का अर्थ है—अहंकार का खो जाना।

जब तुम इतने प्रेम से भर जाओ कि "मैं" मिटने लगे, जब किसी की उपस्थिति तुम्हें गीत बना दे, जब वृक्ष अधिक हरे, आकाश अधिक नीला और जीवन अधिक सुंदर दिखाई दे,


        तब समझना कि 

     तुमने प्रेम की शराब का पहला घूंट पी लिया है।


       और जब यह प्रेम किसी व्यक्ति से उठकर 

       समस्त अस्तित्व तक फैल जाए, 

       तब वही मस्ती #ध्यान बन जाती है, 

       वही मस्ती #प्रार्थना बन जाती है, 

       वही मस्ती #परमात्मा बन जाती है...

        

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