चाहिए क्या औरत को???? बस इतना सा
मांग का सिंदूर, बिंदी भाल की,
लाली अधर की, तुम गले का सूत्र मंगल, पांव की पायल बनो।
ए सुनो! ए जी सुनो...
तुम बनो मेरी अधूरी प्यास में मधुमास का पल।
शोर में भी शांति के सुंदर, सुलभ आभास का पल।
मैं विजय कर लूंगी सारे रण कहो क्या बन सकोगे?
डगमगाती आस में मेरे अडिग विश्वास का पल।
पोछ दें आंसु मेरे वो स्नेहमय आंचल बनो।
ए सुनो....
बाग तुमसे, पुष्प तुमसे, पुष्प में है गंध तुमसे।
छंद तुमसे, गीत तुमसे, गीत का हर बंध तुमसे।
मित्र तुमको, प्रीत तुमको, मान कर अर्धांग तुमको,
लिख दिए है प्रेम में संभव सभी संबंध तुमसे।
अब तुम्हीं पर है नयन का" जल" बनो "काजल" बनो..
ए सुनो....
दिल में है कितनी मुहब्बत दिल में आ कर देख लेना।
तुम विरह की आग को सूरज बुझा कर देख लेना।
इस ज़माने में कोई भी मिल नहीं पाएगा मुझ सा,
आ "ज़माने" में किसी दिन "आज़मा" कर देख लेना।
मैं दीवानी बस तुम्हारी तुम मेरे पागल बनो
ए सुनो....
जो गढ़े प्रतिमान ऐसी प्रेम की प्रस्तावना हो।
हों कई तूफ़ान लेकिन प्रेम में बदलाव ना हो।
इक यही मन्नत हजारों बार मांगी मंदिरों में,
मेरी प्रगति से तुम्हें प्रतियोगिता का भाव ना हो।
मैं बनूं संबल तुम्हारा तुम मेरे भुजबल बनो,
ए सुनो...
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