"प्रेम: दर्पण नहीं, खिड़की"
अधिकांश लोग संबंधों में किसी ऐसे व्यक्ति को खोजते हैं जो उन्हें समझ सके। लेकिन संबंध का सबसे बड़ा उपहार समझा जाना नहीं है; वह है एक नई दृष्टि प्राप्त करना।
जब दो लोग मिलते हैं, तो वे एक-दूसरे के जीवन में दर्पण बनकर नहीं आते। दर्पण केवल वही दिखाता है जो पहले से मौजूद है। एक गहरा संबंध खिड़की की तरह होता है वह ऐसे दृश्य दिखाता है जिन्हें तुम अकेले कभी नहीं देख पाते।
कभी कोई व्यक्ति तुम्हें धैर्य सिखाता है।
कभी कोई तुम्हारे भीतर छिपे साहस को जगा देता है।
कभी कोई तुम्हारी सीमाओं को उजागर कर देता है।
इसलिए हर महत्वपूर्ण संबंध एक पाठशाला है।
कुछ लोग तुम्हारे जीवन में सुख देने आते हैं।
कुछ लोग प्रश्न देने आते हैं।
कुछ लोग तुम्हें तोड़ते हैं ताकि तुम अपनी बनाई हुई झूठी पहचान को देख सको।
पर जो भी आता है, वह तुम्हारे विकास में एक भूमिका निभाता है।
सच्चा प्रेम वह नहीं जहाँ दो लोग एक हो जाएँ।
सच्चा प्रेम वह है जहाँ दोनों अपने-अपने आकाश को और विशाल बना लें।
न कोई किसी का मालिक हो।
न कोई किसी का उद्धारक हो।
दोनों केवल यात्री हों कुछ दूर साथ चलने वाले।
और यदि इस यात्रा में दोनों एक-दूसरे को थोड़ा अधिक सजग, थोड़ा अधिक करुणामय और थोड़ा अधिक जीवित बना दें, तो वही प्रेम की सबसे सुंदर उपलब्धि है।
क्योंकि प्रेम का उद्देश्य किसी को प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन को अधिक गहराई से अनुभव करना है।
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