Friday, June 12, 2026

एक लड़की से प्यार

उस घर में शोर बहुत था, मगर अपनापन हमेशा दबे पाँव चलता था। कोई ऊँची आवाज़ में हँसता, कोई बेवजह डाँटता, कोई बात-बात पर अकड़ दिखाता लेकिन उन सबके बीच जो चीज़ सबसे कम दिखाई देती थी, वही सबसे गहरी थी: लोगों का एक-दूसरे के लिए चुपचाप बदल जाना।


लड़की को पहले लगा था कि यह आदमी पत्थर है। चेहरा ऐसा जैसे हर वाक्य लड़ाई हो, चाल ऐसी जैसे दुनिया से उसे कोई मतलब ही न हो। वह बात करता तो शब्द नहीं निकलते, नुकीले किनारे निकलते। और लड़की? वह तो जैसे हवा की उल्टी दिशा थी। जहाँ रोक लगती, वहीं जाकर खड़ी हो जाती। उसे लोगों की आँखों में छुपी हुई बातें पकड़ने की आदत थी।


उस रात जब उसकी आँख खुली, तो सबसे पहले उसे अपने हाथ अजीब लगे। उँगलियों पर बने बारीक निशान बता रहे थे कि कोई देर तक जागा है। बड़ी अजीब बात है जिस व्यक्ति के पास कहने के लिए कुछ नहीं बचता, वही सबसे ज़्यादा चीज़ें बनाने लगता है। कोई चाय बना देता है, कोई बाल समेट देता है, कोई चुपचाप रज़ाई खींच देता है… और कोई किसी की हथेलियों पर रंग छोड़ जाता है।


वह देर तक सोचती रही।


जिस आदमी को लोगों के बीच बैठना पसंद नहीं, जिसने अपने चेहरे पर हमेशा खीझ टाँग रखी हो, वह किसी के लिए इतनी देर तक क्यों जागेगा?


फिर उसने उसे देखा।


सोते हुए लोग सबसे सच्चे लगते हैं। वहाँ न तर्क होता है, न अभिमान। आदमी की सारी बनावट नींद में उतर जाती है। वह भी वैसा ही था शांत, थका हुआ, और भीतर से कहीं टूटा हुआ।


तभी उसके होंठों से एक नाम निकला।


ऐसा नाम, जिसे सुनते ही लड़की को लगा जैसे कमरे की हवा बदल गई हो।


उसे पहली बार समझ आया कि कुछ लोग वर्तमान में रहते ज़रूर हैं, लेकिन उनका दिल अब भी किसी पुराने मोड़ पर बैठा होता है। वे आगे बढ़ते हैं, हँसते हैं, नए लोगों से मिलते हैं, मगर भीतर कहीं कोई अधूरा संवाद लगातार चलता रहता है।


उसने चाहा तो था कि उस पल वह गुस्सा करे। मगर नहीं कर पाई।


क्योंकि उसे अचानक उस आदमी पर तरस आ गया।


जो इंसान हर समय चिढ़ा हुआ दिखता है, वह अक्सर दुनिया से नहीं, अपने ही अतीत से लड़ रहा होता है।


सुबह जब दोनों की बहस हुई तो देखने वालों को लगा वे बस एक-दूसरे को परेशान कर रहे हैं। लड़की ताने मार रही थी, लड़का झल्ला रहा था। मगर असल में वहाँ कुछ और चल रहा था।


लड़की पहली बार उसकी दीवारों के भीतर झाँक आई थी।


और लड़का पहली बार डर गया था कि कहीं कोई उसे सच में समझ न ले।


उसने पैसे माँगे, उसने जानबूझकर बहुत छोटा नोट पकड़ाया। लोग हँसे। लड़की नाराज़ हुई। मगर उस पल की सबसे अनदेखी बात कोई नहीं समझा जिस आदमी ने कभी किसी को अपने हिस्से की चीज़ देना नहीं सीखा, उसने पहली बार किसी को मज़ाक में ही सही, अपने हाथ से कुछ दिया था।


यहीं से रिश्ते बदलते हैं।


बड़े इज़हारों से नहीं।


इन छोटी, बेढंगी, आधी-अधूरी हरकतों से… जहाँ लोग प्रेम बोलते नहीं, गलती से कर बैठते हैं।


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