ज़िंदगी में एक ऐसा दोस्त ज़रूर होना चाहिए…
जो आपकी आवाज़ सुनकर ही समझ जाए
कि “मैं ठीक हूँ” के पीछे कितना दर्द छिपा है…
जिसे आधी रात में बिना वजह कॉल कर सको,
और वो ये ना पूछे कि “क्या हुआ?”
बस इतना कहे
“रुक… मैं हूँ ना, बोल…”
एक ऐसा दोस्त…
जिसके सामने आप अपने आँसू छुपाने की कोशिश ना करें,
जो आपकी टूटी हुई बातों को भी
पूरी शिद्दत से सुन ले…
जो आपकी ख़ामोशी में भी
चीखता हुआ अकेलापन पढ़ ले…
जिससे लड़ सको, रूठ सको,
जिसे बेहिचक डांट सको,
और फिर अगले ही पल
उसके कंधे पर सिर रखकर रो सको…
जो आपकी हँसी की वजह भी बने
और दर्द का मरहम भी…
जिसके साथ बैठकर
कुछ पल के लिए ये दुनिया हल्की लगने लगे…
क्योंकि सच कहें तो…
आजकल लोगों के पास
“सलाह देने वाले” बहुत हैं,
लेकिन “बिना टोके सुनने वाले” बहुत कम…
हर रोज़ ना जाने कितने लोग
भीड़ में मुस्कुराते हुए भी
अंदर से टूट रहे होते हैं…
कई लोग सिर्फ इसलिए हार जाते हैं
क्योंकि उनके पास अपना दुःख कहने के लिए
कोई अपना नहीं होता…
आत्महत्याएँ सिर्फ मौत नहीं होतीं,
वो उस ख़ामोशी की चीख होती हैं
जिसे किसी ने कभी सुनने की कोशिश ही नहीं की…
इसलिए अगर आपकी ज़िंदगी में
कोई ऐसा दोस्त है
जिसके सामने आप बिना किसी डर,
बिना किसी दिखावे के
बस “आप” बन सकते हैं…
तो यकीन मानिए,
आप इस दुनिया के सबसे खुशनसीब इंसान हैं… 🌸
और अगर ऐसा कोई नहीं है…
तो कोशिश करिए
किसी के लिए वैसा दोस्त बनने की…
क्योंकि कई लोग शब्दों से नहीं,
सिर्फ एक सच्चे साथ से बच जाते हैं…
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