Sunday, May 31, 2026

पेट के आयुर्वेद

 Navel displacement - आजकल बहुत लोग एक ऐसी समस्या से परेशान रहते हैं जिसे गांव-देहात में “धरण पड़ना”, “नाभि खिसकना” या “पेट की नस चढ़ना” कहा जाता है। 


इसमें पेट हमेशा भारी लगता है, गैस बनती रहती है, कब्ज हो जाती है, कभी अचानक दस्त लग जाते हैं, भूख कम लगती है और शरीर में कमजोरी महसूस होने लगती है। 


कई लोगों को ऐसा लगता है जैसे पेट अंदर से खिंचा हुआ है और कोई भी चीज ठीक से हजम नहीं हो रही।


आयुर्वेद के अनुसार जब आंतें कमजोर हो जाती हैं, पेट की नसों पर दबाव पड़ता है, ज्यादा खाली पेट मेहनत की जाती है या शरीर में पर्याप्त स्निग्धता और पोषण नहीं रहता, तब धरण की समस्या बार-बार होने लगती है।


इस पोस्ट में आसान घरेलू तरीके से धरण ठीक करने, धरण के बाद क्या खाना चाहिए और भविष्य में धरण दोबारा ना पड़े उसके लिए पूरी डाइट और आयुर्वेदिक सपोर्ट जानेगें।


धरण निकालने का सबसे आसान तरीका

धरण निकालने के कई तरीके हैं, लेकिन सबसे आसान और सुरक्षित तरीका यह है:


सुबह खाली पेट पेट के बल लेट जाइए। पेट हल्का होना चाहिए ताकि पेट की नसों और आंतों पर आसानी से काम हो सके। अब पैरों के नीचे एक तकिया रख लें। इसके बाद किसी हल्के वजन वाले व्यक्ति से कहें कि वह आपकी पिंडलियों को हल्के दबाव से दबाए।


पिंडलियों के अंदर आयुर्वेद में वज्र नाड़ी मानी जाती है, जिसका संबंध पेट और नाभि क्षेत्र से माना जाता है। 


जब पिंडलियों पर हल्का दबाव दिया जाता है तो पेट की खिंची हुई नसों को आराम मिलता है। लगभग 3 से 5 मिनट में काफी लोगों को राहत महसूस होने लगती है।


जैसे ही धरण अपनी जगह आए, उसके बाद तुरंत कुछ हल्का और ताकत देने वाला खाना जरूरी होता है। अगर खाली पेट ही छोड़ दिया जाए तो धरण दोबारा खिंच सकती है।


धरण ठीक होने के बाद क्या खाना चाहिए

धरण के बाद ऐसी चीजें लेनी चाहिए जो जल्दी पचें और तुरंत पेट को ताकत दें।


आप इनमें से कोई भी चीज ले सकते हैं:


नारियल की गिरी

नारियल पानी की मलाई

गुड़ का हलवा देसी घी में

खीर

केला

मक्खन

पतली मीठी लस्सी

थोड़ा दही


इन चीजों का फायदा यह है कि ये पेट को तुरंत ऊर्जा देती हैं और आंतों को सपोर्ट करती हैं।


खाली पेट एक्सरसाइज करने वालों के लिए जरूरी बात

बहुत लोग सुबह खाली पेट भारी एक्सरसाइज, वजन उठाना या ज्यादा मेहनत कर लेते हैं। जिन लोगों की आंतें कमजोर होती हैं, उनमें यही आदत धरण का सबसे बड़ा कारण बनती है।


योग, प्राणायाम और ध्यान खाली पेट करना सही है, लेकिन अगर आपको बार-बार धरण पड़ती है तो कुछ समय तक सुबह हल्का खाकर ही व्यायाम करें।


सुबह उठकर आप यह ले सकते हैं:


भीगे हुए बादाम

भीगे मुनक्के

अंजीर

अखरोट

भुना काला चना

मूंगफली

थोड़ा दही या छाछ


इसके बाद हल्का व्यायाम करें। इससे पेट को सपोर्ट मिलेगा और धरण दोबारा नहीं पड़ेगी।


धरण दोबारा ना पड़े इसके लिए 5 सबसे जरूरी चीजें

1. आम और दूध

धरण में चूसने वाला आम बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसे 1-2 घंटे पानी में भिगोकर रखें ताकि इसकी गर्मी निकल जाए। फिर आम चूसने के बाद ऊपर से दूध पी लें।


अगर दूध ना पचे तो पतली कच्ची लस्सी ले सकते हैं।

आम में कैलोरी, मिनरल्स और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भरपूर होते हैं जो शरीर और आंतों को ताकत देते हैं।


2. गाय का घी

गाय का देसी घी आंतों को चिकनाई और मजबूती देता है। इसे आप:


दाल में

सब्जी में

सूप में

गुनगुने दूध में


मिलाकर ले सकते हैं।


जिन लोगों को दूध से कफ बनता है, वे घी दाल या सब्जी में लें। घी पेट को सूखने नहीं देता और धरण की संभावना कम करता है।


3. दही और चूना

हल्का फेंटा हुआ दही धरण में बहुत अच्छा है। इसमें गेहूं के दाने जितना शुद्ध खाद्य चूना मिलाकर लिया जा सकता है।

यह शरीर को कैल्शियम देता है और आंतों की कमजोरी दूर करने में मदद करता है।

अगर दही में ना लेना चाहें तो दाल, सब्जी या दूध में भी थोड़ा चूना मिलाया जा सकता है।


ध्यान रखें कि चूना बहुत कम मात्रा में ही लेना है।


4. मिल्क प्रोडक्ट्स

धरण वाले लोगों को शरीर में स्निग्धता और पोषण की जरूरत होती है। इसलिए यह चीजें फायदेमंद मानी जाती हैं:


छाछ

पनीर

मक्खन

मलाई

खीर

दही

बरफी


ये आंतों को मजबूत बनाती हैं और शरीर को झटके सहने की ताकत देती हैं।


धरण में और कौन-कौन सी चीजें फायदेमंद हैं

मूंग दाल

हरी मूंग दाल हल्की, जल्दी पचने वाली और ताकत देने वाली होती है। धरण में यह बहुत उपयोगी मानी जाती है।


मखाने

भुने हुए मखाने या मखाने की खीर शरीर को कैल्शियम और ताकत देते हैं। रोज एक मुट्ठी लेना फायदेमंद हो सकता है।


सब्जा बीज

सब्जा बीज शरीर की गर्मी कम करते हैं और पेट को ठंडक देते हैं। आधा चम्मच रात को भिगो दें और सुबह शरबत या दही में मिलाकर लें।


आंवला

आंवला पाचन सुधारता है और पेट की सूजन कम करने में मदद करता है।


मोती पिष्टी

आयुर्वेद में इसे शरीर की गर्मी और कमजोरी कम करने के लिए उपयोग किया जाता है।


सामान्य मात्रा:

125 mg से 250 mg तक शहद या मलाई के साथ, चिकित्सकीय सलाह अनुसार।


धरण वालों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

खाली पेट भारी वजन ना उठाएं


ज्यादा उछल-कूद से बचें

कब्ज ना रहने दें

शरीर में पानी और स्निग्धता बनाए रखें

देर रात तक जागना कम करें

बहुत सूखा और बासी खाना कम खाएं

भोजन को अच्छे से चबाकर खाएं


अगर पेट को सही पोषण, चिकनाई और आराम मिलता रहेगा तो धरण की समस्या धीरे-धीरे कम होने लगती है।


जरूरी सावधानी

लगातार पेट दर्द, उल्टी, वजन घटना, खून आना, तेज कब्ज या बार-बार दस्त जैसी समस्याएं हों तो डॉक्टर से जांच जरूर करवाएं। कई बार गैस्ट्रिक, हर्निया, IBS या दूसरी बीमारियां भी ऐसे लक्षण दे सकती हैं।

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