Sunday, May 31, 2026

जीवनसाथी कुंडली मिलान क्यों जरूरी

 जीवनसाथी कुंडली मिलान क्यों जरूरी!


कुंडली मिलान का अर्थ यह नहीं है की गुण देख लिए जाएं और मैचिंग देख ली जाए और कह दिया जाए की कुंडली अच्छी है,   36 में से 24 या 32 गुण मिल रहे हैं आप विवाह कर सकते हैं


माता पिता को इस बात की चिंता रहती है कि बच्चे का विवाह कब होगा तो इसलिए उनका ध्यान केवल इस बात पर होता है की बहू पढ़ी-लिखी हो और सुंदर हो, अच्छे घर से संबंधित हो, और लड़का पढ़ा लिखा हो, अच्छा कमाता हो, दिल्ली, नोएडा, बैंगलोर या विदेश में नौकरी करता हो,


बस यहां पर बात समाप्त हो जाती है, वह ज्यादा से ज्यादा पंडित जी को कुंडली दिखा देते हैं और पंडित जी मोबाइल के सॉफ्टवेयर से गुण मिलान देख लेते हैं और कह देते हैं कि हां अच्छा है आप कर सकते हैं


पंडित जी इंकार भी करते हैं तब भी माता पिता कह देते हैं कि पंडित जी फिर से देख लीजिए अच्छी तरह देख लीजिए हमें इसी से विवाह करना है अपने बच्चे का, तो आप किसी तरह से कुंडली मिलान करवा दीजिए, और फिर पंडित जी माया के वशीभूत होकर मिलान करवा देते हैं


(कुंडली मिलान केवल ज्योतिषी से करवाना चाहिए )


अक्सर माता-पिता किसी को रिजेक्ट करने का रिस्क नहीं लेते हैं और यह कह देते हैं कि हमें ज्योतिष पर विश्वास नहीं है,  लेकिन आगे चलकर समस्या ग्रस्त होने पर फिर ज्योतिषी के पास चक्कर लगाना शुरू कर देते हैं और फिर यह कहते हैं कि गुरु जी कुछ उपाय बता दीजिए कि सब कुछ ठीक हो जाए,  


ऐसी स्थिति में कुछ भी नहीं किया जा सकता है,  बस इतना ही हो सकता है कि गुरुजी लोगों की जेब गर्म हो सकती है


और यह एक मजबूत कारण है,  दिनोंदिन तलाक के मामले बढ़ने का

दूसरा एक और मजबूत कारण है लव मैरिज,  लड़के लड़कियां अपने माता-पिता से कहते हैं कि हमें इसी से विवाह करना है और इसलिए फिर कुंडली मिलान करना पीछे छूट जाता है,  ऐसे लड़के लड़कियां भी यही कह देते हैं कि हमें ज्योतिष पर विश्वास नहीं क्योंकि वह बचना चाहते हैं,  उनका सोचना है कि कहीं अगर पंडित जी ने या गुरुजी ने,  ज्योतिषी जी ने, यह कह दिया कि कुंडली नहीं मिलती है फिर क्या होगा,  तो सबसे अच्छा तरीका यह है की कुंडली मिलान करवाई ही ना जाए


मेरे कहने का अर्थ यह है कि आप लव मैरिज तो करें लेकिन कुंडली मिलान जरूर करवा लें,  मेरे विचारों से लव मैरिज इसलिए अच्छी है क्योंकि व्यक्ति एक दूसरे को कुछ ना कुछ तो जानता ही है,   उसके स्वभाव से परिचित हो जाता है


मैं बहुत वर्षों से ज्योतिष के क्षेत्र में कार्य कर रहा हूं, और अब तक कम से कम 10000 कुंडलियां देख चुका हूं, तो इतने वर्षों का मेरा अनुभव यह कहता है की विवाह में लाखों रुपए खर्च होते हैं, तो यदि कुंडली मिलान में 10 ₹20000 खर्च हो जाएं और 7 - 8 रिश्ते भी कैंसिल हो जाएं तो भी यह महंगा सौदा नहीं है,  क्योंकि यह व्यक्ति के पूरे जीवन का प्रश्न है


वैवाहिक जीवन का असर आपके पूरे जीवन पर ही नहीं आपके पूरे परिवार पर पड़ता है और आपकी होने वाली संतान पर भी पड़ता है, संतान के भविष्य पर भी पड़ता है


कुंडली मिलान के बारे में मेरी कई पोस्ट हैं,  वैवाहिक जीवन के बारे में भी मेरी बहुत सारी पोस्ट हैं,  पिछले दो दिनों में मैंने पति और पत्नी के स्वभाव के बारे में संक्षिप्त पोस्ट दी है,  अब मैं जीवनसाथी के मानसिक स्थिति के बारे में कुछ बातें लिख रहा हूं,  बातें तो बहुत सारी हैं,  जिन पर स्वतंत्र रूप से एक पुस्तक लिखी जा सकती है,   कुंडली मिलान करते समय इन बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए


जातक अथवा जातिका, कितने भी पढ़े-लिखे हों, सुंदर हों पैसे वाले हों,  लेकिन जीवन निर्वाह जातक जातिका के व्यवहार पर ही निर्भर करता है,  और व्यवहार जातक जातिका की मानसिक अवस्था पर निर्भर करता है,  यानी व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य अच्छा होना चाहिए


मानसिक स्वास्थ्य   लग्न,  लग्नेश,  चंद्रमा व चंद्र राशीश,  बुद्ध,  पंचम भाव एवं पंचमेश पर निर्भर करता है


पंचम भाव बुद्धि विवेक एवं भावनाओं का भाव है, इसके साथ ही चतुर्थ भाव एवं भावेश पर भी ध्यान देना चाहिए क्योंकि चतुर्थ भाव मन का भाव ।

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