IBS in Ayurveda - IBS क्या है और क्यों होता है? (Ayurveda की भाषा में) आईबीएस यानी Irritable Bowel Syndrome – एक ऐसी समस्या जिसमें पेट बार-बार परेशान रहता है। कभी कब्ज़, कभी loose motion, कभी पेट भारी, कभी गैस, तो कभी जलन।
आयुर्वेद में IBS को सीधे IBS नहीं कहा गया, बल्कि इसे ग्रहणी रोग के नाम से समझाया गया है।
ग्रहणी क्या है?
ग्रहणी वह हिस्सा है जो
आमाशय (stomach)
और पक्वाशय (large intestine)
के बीच का functional zone होता है।
यहीं से तय होता है कि खाना ठीक से पचेगा या नहीं।
जड़ में समस्या कहाँ है? – मंद अग्नि
आयुर्वेद साफ़ कहता है:
जब अग्नि (digestive fire) कमजोर होती है, तब ग्रहणी बिगड़ती है।
इसी कमजोर अग्नि से जुड़ी तीन बड़ी बीमारियाँ बताई गई हैं:
1. अतिसार – बार-बार loose motion
2. ग्रहणी (IBS) – कभी loose, कभी constipation
3. अर्श (Piles)
मतलब साफ है:
पाचन गड़बड़ = पेट की बड़ी बीमारियाँ
IBS सबका एक जैसा नहीं होता
यह बहुत ज़रूरी बात है।
IBS के चार प्रकार बताए गए हैं:
वातज ग्रहणी – गैस, पेट फूलना, कब्ज़
पित्तज ग्रहणी – जलन, एसिडिटी, loose motion, burning
कफज ग्रहणी – भारीपन, sticky stool, आलस
सन्निपातज ग्रहणी – तीनों दोष एक साथ
इसलिए आयुर्वेद में one-diet-fits-all जैसा कुछ नहीं होता।
सबसे ज़रूरी बात: क्या न करें (Diet से पहले)
IBS में “क्या खाना है” से ज़्यादा important है
क्या नहीं करना है
1. दस्त के तुरंत बाद खाना
Loose motion के बाद जब तक भूख सही से न लगे, खाना पेट को और खराब करता है।
2. भूख लगने पर भी न खाना
ऑफिस, फास्टिंग, देर से lunch –
भूख को दबाना भी IBS को न्योता देता है।
3. अधपचा खाना ऊपर से खाना
पहला खाना digest नहीं हुआ
और ऊपर से दूसरा –
यही IBS की classic गलती है।
4. बार-बार कुछ न कुछ खाते रहना
सुबह नाश्ता → fruit → snack → lunch → चाय → street food → dinner → दूध
ऐसा pattern अग्नि को पूरी तरह confuse कर देता है।
5. अनियमित timing
कभी 9 बजे खाना, कभी 12 बजे, कभी skip –
इसे आयुर्वेद में विषमाशन कहते हैं।
6. जानते हुए भी गलत खाना
पता है कि पानीपुरी से acidity होती है,
फिर भी खाना – यही असात्म्य भोजन है।
खाना कैसा हो – Heavy नहीं, Smart
IBS में rule simple है:
जितना हल्का खाना, उतना फायदा।
Juice नहीं, Soup से शुरुआत
कच्चे जूस (पालक, धनिया, नींबू)
कमज़ोर पेट को और irritate करते हैं।
बेहतर है:
मूंग दाल का पानी
अरहर / चना का सूप
जौ (barley) का पानी
ये सब अग्नि संस्कार से गुज़रे होते हैं, इसलिए digest होते हैं।
धीरे-धीरे मसाले जोड़ें
जब digestion सुधरने लगे:
जीरा
धनिया
हल्दी
थोड़ा सा घी
धीरे-धीरे introduce करें।
छाछ – सही तरीके से, सही इंसान के लिए
छाछ (तक्र) IBS में बहुत उपयोगी है, लेकिन हर किसी के लिए नहीं।
पतली छाछ से शुरू करें
मसाले: काली मिर्च, सोंठ
गर्मी में
bleeding, चक्कर, ज़्यादा heat वालों में सावधानी
Loose motion वाले IBS में क्या खाएँ?
अनार
बेल
पाठा
जीरे का पानी
ये stool को normalize करते हैं।
Constipation वाले IBS में क्या करें?
करेला
परवल
ज्वार, बाजरा
गेहूं अगर suit न करे तो avoid
Dairy अगर suit नहीं करती?
मतलब शरीर में कफ + पित्त ज़्यादा है।
ऐसे में:
दूध
दही
छाछ
temporary avoid करें।
Ayurveda में ऐसे cases में
शोधन (Panchakarma) की ज़रूरत पड़ती है
जैसे:
कफ dominant - वमन
पित्त dominant - विरेचन
Ulcerative Colitis और IBS
Ayurveda disease का इलाज नाम से नहीं,
दोष से करता है।
Ulcers = पित्त का बढ़ना
इसलिए:
गूलर
नागरमोथा
नागकेसर
बहुत effective रहते हैं।
एक बात हमेशा याद रखें
चरक संहिता का golden rule:
“पुरुषं पुरुषं वीक्ष्य”
हर इंसान अलग है।
जो एक को suit करे, ज़रूरी नहीं दूसरे को भी करे।
Self-medication क्यों dangerous है?
कभी ज़्यादा ठंडी दवा - कफ बढ़ गया
कभी ज़्यादा गर्म दवा - पित्त flare हो गया
इसलिए IBS में:
random YouTube advice
एक नाम सुनकर दवा लेना
काम नहीं करता।
IBS / ग्रहणी – आयुर्वेदिक औषधि
आयुर्वेद में दवा का उद्देश्य सिर्फ symptoms दबाना नहीं होता, बल्कि
अग्नि सुधार + दोष संतुलन + आंतों की healing करना होता है।
1. अग्नि सुधारने की दवाएँ
जब तक अग्नि ठीक नहीं होगी, IBS बार-बार लौटेगा।
हिंग्वाष्टक चूर्ण
काम: गैस, bloating, indigestion
Dose: 1/2 चम्मच
कैसे लें: गुनगुने पानी या छाछ के साथ
कब: खाने से पहले
अजमोदादि चूर्ण
काम: वातजन्य IBS, पेट फूलना
Dose:1/2 चम्मच
कब: रात में
2. पित्त शमन (Acidity, Burning, Loose motion)
अगर IBS में
जलन
खट्टे डकार
पतले दस्त
गुदा में जलन
होती है, तो पित्त dominant है।
प्रवाल पंचामृत
काम: एसिडिटी, burning, ulcer tendency
Dose: 125 mg
कैसे: शहद या मिश्री पानी के साथ
कब: भोजन के बाद
कामदुधा रस (मुक्ता युक्त)
काम: तीव्र पित्त शमन
Dose: 125 mg
कब: दिन में 1–2 बार
3. Loose Motion dominant IBS (IBS-D)
कुटज घन वटी
काम: बार-बार दस्त, mucus, urgency
Dose: 1–2 गोली
कब: दिन में 2 बार
बिल्वादि चूर्ण
काम: stool binding, ग्रहणी strength
Dose: ½ चम्मच
कैसे: छाछ के साथ
4. Constipation dominant IBS (IBS-C)
त्रिफला चूर्ण
काम: bowel regulation
Dose: ½–1 चम्मच
कब: रात को, गुनगुने पानी के साथ
एरण्ड भृष्ट हरितकी
काम: hard stool, gas
Dose: 1–2 गोली
कब: रात में
5. मानसिक तनाव से जुड़ा IBS (Mind–Gut Connection)
Ayurveda IBS को सिर्फ पेट की बीमारी नहीं मानता।
Stress = अग्नि disturbance
ब्राह्मी वटी
काम: anxiety, overthinking
Dose: 1 गोली
कब: सुबह-शाम
अश्वगंधा चूर्ण
काम: nervous system support
Dose: 1/2 चम्मच
कैसे: गुनगुने पानी / दूध (दूध अगर suit करे)
7. Colon Healing & Strengthening
शंख वटी
काम: IBS pain, spasm
Dose: 1 गोली
कब: खाने के बाद
घृत (घी) चिकित्सा
पुराने IBS में
डॉक्टर की देखरेख में medicated ghee उपयोगी
बहुत ज़रूरी सावधानी
एक साथ बहुत सारी दवाएँ न लें
YouTube देखकर heavy रस-औषधि न शुरू करें
Pitta वाले व्यक्ति वात की दवा खुद से न लें
दोष, उम्र, strength और symptoms देखकर selection ज़रूरी है. Consult your local Ayurvedic Doctor.
आयुर्वेदिक Golden Rule (Charak)
“न हि सर्वेषु रोगेषु एकमेवौषधं हितम्”
हर रोगी के लिए एक ही दवा सही नहीं होती।
Bottom Line
IBS कोई single disease नहीं है।
ये गलत digestion + गलत lifestyle + गलत timing का result है।
हल्का खाना
regular timing
दोष के हिसाब से diet
दोष, उम्र, strength और symptoms देखकर medicine selection
और ज़रूरत पड़े तो Panchakarma
यही आयुर्वेद का रास्ता है।
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