Tuesday, February 3, 2026

HbA1c सात से नीचे क्यों नहीं आ रहा?

 HbA1c - HbA1c सात से नीचे क्यों नहीं आ रहा? डायबिटीज़ कंट्रोल को सही तरह समझना ज़रूरी है - डायबिटीज़ से जूझ रहे ज़्यादातर लोग एक ही सवाल बार-बार पूछते हैं- “हमारी शुगर तो कभी-कभी ठीक रहती है, फिर HbA1c सात से नीचे क्यों नहीं आ रहा?”


WHO की गाइडलाइन्स के मुताबिक अगर HbA1c 7 से कम है, तो उसे अच्छा कंट्रोल माना जाता है।

अगर 6 से नीचे आ जाए, तो उसे और बेहतर कंट्रोल कहा जाता है।

यानी हर डायबिटीज़ वाले व्यक्ति का टारगेट यही होना चाहिए कि HbA1c सात से नीचे आए।


लेकिन इसके लिए सिर्फ़ दवा खाना या कभी-कभार शुगर चेक करना काफ़ी नहीं होता।


HbA1c आखिर होता क्या है?

HbA1c को आसान भाषा में समझें तो यह

पिछले 2–3 महीनों की औसत ब्लड शुगर की रिपोर्ट होती है।


जब भी ब्लड में शुगर बढ़ती है, तो उसका एक हिस्सा हमारे खून में मौजूद हीमोग्लोबिन से चिपक जाता है।

इसी चिपकी हुई शुगर को कहा जाता है Glycosylated Hemoglobin, यानी HbA1c।


अगर खाली पेट शुगर ज़्यादातर समय 100 से कम

और खाने के बाद 140 से कम रहती है

तो HbA1c लगभग 6 के आसपास आ सकता है।


सिर्फ़ एक टाइम शुगर ठीक होना काफ़ी नहीं

यह सबसे बड़ी गलतफहमी है कि

“सुबह की शुगर ठीक है, तो कंट्रोल अच्छा है।”


HbA1c कम करने के लिए ज़रूरी है कि:


खाली पेट

नाश्ते के बाद

लंच से पहले और बाद

डिनर के आसपास


हर समय शुगर एक लिमिट में रहे।


टारगेट ये होना चाहिए:


खाली पेट: 100 से कम

खाने से पहले: 120 से कम


यह आसान नहीं है, लेकिन नामुमकिन भी नहीं।


HbA1c कम करना है तो Monitoring बदलनी पड़ेगी

अधिकतर लोग क्या करते हैं?

महीने में एक बार या दो महीने में एक बार शुगर चेक करवा लेते हैं।


लेकिन अगर HbA1c सात से नीचे लाना है,

तो कम से कम रोज़ एक बार शुगर चेक करना पड़ेगा।


हर दिन एक ही समय नहीं—


कभी खाली पेट

कभी नाश्ते के बाद

कभी लंच से पहले या बाद

कभी डिनर के आसपास


ताकि ये समझ आए कि

शुगर किस टाइम सबसे ज़्यादा बिगड़ रही है।


जब तक यह पता नहीं चलेगा, सुधार कैसे होगा?


इसी वजह से सिर्फ़ भारत में ही नहीं,

बल्कि अमेरिका और यूके जैसे देशों में भी

क़रीब 50% डायबिटीज़ मरीजों का HbA1c 8 से ऊपर रहता है।

कारण वही—डेली मॉनिटरिंग और लाइफस्टाइल कंट्रोल की कमी।


डाइट, एक्सरसाइज़ और दवा—तीनों का बैलेंस ज़रूरी

HbA1c कंट्रोल करने के लिए

सिर्फ़ दवा या सिर्फ़ डाइट से काम नहीं चलता।

तीनों का तालमेल ज़रूरी है।


1. कार्बोहाइड्रेट का सही हिसाब

डेली कैलोरी में:


कार्बोहाइड्रेट 50% से ज़्यादा नहीं होने चाहिए


हम इंडियन लोग ज़्यादातर:


रोटी

चावल

बाजरा

ओट्स

आलू

मटर

इनसे बहुत ज़्यादा कार्ब्स ले लेते हैं।


एक ग्राम कार्बोहाइड्रेट = 4 कैलोरी


अगर किसी की रोज़ की ज़रूरत 1600 कैलोरी है,

तो उसमें से अधिकतम:


200 ग्राम कार्बोहाइड्रेट ही लेने चाहिए।


कार्ब्स को पूरे दिन में सही तरह बाँटना

कार्ब्स एक साथ नहीं, पूरे दिन में फैलाकर लें:


नाश्ता: 20–25%

लंच: 25–30%

डिनर: 25–30%

बीच के स्नैक्स: बाकी


नाश्ता कैसा हो?

1 रोटी

थोड़ा स्प्राउट

दही

1–2 अंडे


इससे प्रोटीन और फाइबर बढ़ता है और शुगर धीरे बढ़ती है।


लंच में:

2 रोटी

बिना आलू की सब्ज़ी

दाल

दही या सलाद

चाहें तो थोड़ा चिकन या अंडा


डिनर हल्का रखें:

1 रोटी

सब्ज़ी

थोड़ा प्रोटीन

सलाद


स्नैक्स में:

10-15 बादाम

भुने चने

एक कप दूध

हल्की चाय (बिना शुगर)


छोटे हिस्सों में खाने से

शुगर धीरे बढ़ती है और कंट्रोल में रहती है।


एक्सरसाइज़ और रूटीन का रोल

डाइट के साथ-साथ:


रोज़ 30–40 मिनट तेज़ चलना

या कोई भी रेगुलर फिज़िकल एक्टिविटी


बहुत ज़रूरी है।


दवाइयाँ:


समय पर लें

और शुगर का रिकॉर्ड रखें


अगर शुगर बार-बार लिमिट से बाहर जा रही है,

तो पहले:


डाइट सुधारें

एक्सरसाइज़ बढ़ाएँ


और ज़रूरत पड़े तो डॉक्टर से सलाह लें।


HbA1c सात से नीचे लाना संभव है

अगर आप चाहते हैं कि HbA1c सच में सात से नीचे आए,

तो उसके लिए:


मेहनत

अनुशासन

और consistency


तीनों चाहिए।


यह कोई एक दिन का काम नहीं है,

लेकिन सही तरीके से किया जाए

तो कंट्रोल बिल्कुल मुमकिन है।


डायबिटीज़ को हराना नहीं,

समझदारी से मैनेज करना सीखना पड़ता है

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