यदि आपको लगता है कि आप अकेले हैं…
यदि कभी आपको ऐसा महसूस हो कि आप अकेले हैं, तो संभव है कि आप भीड़ से आगे चल रहे हों।
जो व्यक्ति भीड़ से अलग सोचता है, वह कुछ समय के लिए अकेला दिखाई देता है।
अकेलापन हमेशा कमजोरी का संकेत नहीं होता
कभी-कभी वह इस बात का प्रमाण होता है कि आप अपने विजन पर केंद्रित हैं।
हाँ, यह भी संभव है कि आप थक गए हों।
क्योंकि जो व्यक्ति बदलाव के लिए जीता है, वह सामान्य जीवन से अधिक मानसिक और भावनात्मक श्रम करता है।
पर फर्क यहाँ है:
थका हुआ व्यक्ति रुकना चाहता है।
विजन वाला व्यक्ति रुककर भी दिशा नहीं छोड़ता।
"ऊर्जा सबमें समान है, अंतर जागरूकता का है"
प्रकृति ने ऊर्जा किसी एक को अधिक और किसी को कम नहीं दी।
हर मनुष्य के भीतर अपार संभावना है।
फिर भी इतिहास में कुछ ही नाम क्यों दर्ज होते हैं?
क्योंकि:
अधिकांश लोग परिस्थितियों से संचालित होते हैं।
कुछ लोग अपने विचारों और उद्देश्य से संचालित होते हैं।
जो व्यक्ति दुनिया की समझ से चलता है, वह भीड़ का हिस्सा बन जाता है।
जो व्यक्ति अपनी समझ विकसित करता है वह दिशा बन जाता है।
इतिहास रचना क्या है?
इतिहास रचना का अर्थ केवल बड़ा आविष्कार करना या प्रसिद्ध होना नहीं है।
इतिहास रचना का अर्थ है....प्रभाव छोड़ना।
एक शिक्षक जो किसी एक बच्चे का जीवन बदल दे.....वह इतिहास रचता है।
एक किसान जो अपनी पीढ़ी को नई सोच दे वह इतिहास रचता है।
एक लेखक जो एक मन को जागृत कर दे वह इतिहास रचता है।
एक साधारण कर्मचारी जो अपने कार्य में ईमानदारी और उत्कृष्टता की मिसाल बने वह भी इतिहास रचता है।
गाँव का भी इतिहास होता है।
शहर का भी इतिहास होता है।
परिवार का भी इतिहास होता है।
आप उस इतिहास का अध्याय बन सकते हैं
यदि आप सजग होकर जीवन जीते हैं।
"विजन: केवल सपना नहीं, जीवन की दिशा"
सपना वह है जो आप सोते समय देखते हैं।
विजन वह है जो आपको सोने नहीं देता।
विजन वह स्पष्टता है जिसमें आपको पता होता है:....
मैं क्या कर रहा हूँ
क्यों कर रहा हूँ
और किसके लिए कर रहा हूँ
जब व्यक्ति विजन पर जीता है, तो उसका हर कार्य अर्थपूर्ण हो जाता है।
तब वह केवल जीवित नहीं रहता वह उद्देश्यपूर्ण जीवन जीता है।
"ध्यान: सफलता का आंतरिक विज्ञान"
विजन बिना ध्यान के टिक नहीं सकता।
ध्यान का अर्थ केवल आँखें बंद करके बैठना नहीं है।
ध्यान का वास्तविक अर्थ है....
जिस कार्य में हों, उसमें पूर्णतः उपस्थित होना।
यदि आप लिख रहे हैं....तो पूरी चेतना से लिखें।
यदि आप काम कर रहे हैं....तो उसी क्षण में रहें।
यदि आप किसी से बात कर रहे हैं... तो मन भटकने न दें।
ध्यान का अभ्यास क्यों आवश्यक है?
क्योंकि:
जो आप बार-बार करते हैं, वही आपके अवचेतन मन में बैठता है।
अवचेतन मन ही आपके भविष्य के निर्णयों को संचालित करता है।
वर्तमान की आदतें ही भविष्य का स्वरूप बनाती हैं।
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इसलिए: आप आज जैसा सोचते हैं वैसा ही कल बनते हैं।
इन्द्रियाँ और मन: शत्रु नहीं, साधन हैं
अधिकतर लोग अपनी इन्द्रियों और मन को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं।
पर नियंत्रण से पहले मित्रता आवश्यक है।
यदि आपका मन भटकता है तो उसे दोष न दें।
उसे दिशा दें।
यदि आपकी इन्द्रियाँ आकर्षित होती हैं
तो उन्हें उद्देश्य की ओर मोड़ें।
जिस दिन मन आपका मित्र बन गया,
उस दिन आपकी ऊर्जा बिखरेगी नहीं केंद्रित होगी।
सकारात्मक वर्तमान .....सशक्त भविष्य
यदि वर्तमान में आपके पास लक्ष्य नहीं है,
तो भविष्य संयोग पर निर्भर रहेगा।
पर यदि वर्तमान में:
स्पष्ट लक्ष्य है
सकारात्मक सोच है
निरंतर अभ्यास है
तो भविष्य निर्माणाधीन है और निर्माण आपके हाथ में है।
"हर क्षेत्र में इतिहास संभव है"
आप ऑफिस में हैं?
वहाँ उत्कृष्टता की परिभाषा बदल दीजिए।
आप व्यवसाय में हैं?
ईमानदारी को संस्कृति बना दीजिए।
आप लेखक हैं?
विचारों से चेतना जगाइए।
आप घर संभालते हैं?
संस्कारों की विरासत बना दीजिए।
इतिहास पद से नहीं बनता
दृष्टिकोण से बनता है।
अपनी क्षमता को पहचानिए।
उसे व्यर्थ मत जाने दीजिए।
आपको दुनिया बदलने की आवश्यकता नहीं —
बस जहाँ हैं, वहाँ परिवर्तन का बीज बो दीजिए।
यदि एक भी व्यक्ति आपसे प्रभावित होकर बेहतर बनता है,
तो समझिए आपने इतिहास की दिशा में एक कदम रख दिया है।
और याद रखिए....
अकेलापन कभी-कभी इस बात का संकेत होता है
कि आप भीड़ से अलग नहीं,
भीड़ से आगे चल रहे हैं।
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