Thursday, February 12, 2026

यूरिन में झाग आ

 Ayurvedic Kidney Support - यूरिन में झाग आना: कब नॉर्मल, कब सीरियस? इस पोस्ट में बात कर रहे हैं जो बहुत लोगों को परेशान करता है — यूरिन में झाग आना।


कभी-कभी टॉयलेट में देखते हैं कि पेशाब में झाग बन रहा है और तुरंत दिमाग में डर आ जाता है -

“क्या किडनी खराब हो रही है?”

“क्या प्रोटीन लीक हो रहा है?”


तो इस पूरे मामले को साइंटिफिक तरीके से समझते हैं।


झाग बनता क्यों है? (Science Behind Foam)

झाग बनना एक सर्फेक्टेंट प्रॉपर्टी (Surfactant Property) की वजह से होता है।


जैसे साबुन या डिटर्जेंट में झाग बनता है, वैसे ही कुछ केमिकल्स और प्रोटीन में भी यह गुण होता है कि वे झाग बना सकते हैं।


यूरिन के अंदर क्या-क्या होता है?


यूरिया

क्रिएटिनिन

इलेक्ट्रोलाइट्स

यूरिक एसिड

अमोनिया

और शरीर के कई वेस्ट प्रोडक्ट


इनमें से कुछ में भी हल्की सर्फेक्टेंट प्रॉपर्टी हो सकती है। इसलिए हर झाग = प्रोटीन लीक नहीं।


झाग आने के सामान्य कारण (जो बीमारी नहीं हैं)

1. डिहाइड्रेशन (पानी कम पीना)

अगर आपने पानी कम पिया है तो यूरिन कंसंट्रेटेड हो जाता है।

जब वह बाहर आता है तो ज्यादा गाढ़ा होने की वजह से झाग दिख सकता है।


2. तेज धार से पेशाब आना

अगर ब्लैडर फुल हो गया और फिर तेज प्रेशर से यूरिन निकला —

तो उसकी स्पीड और प्रेशर की वजह से भी झाग बन सकता है।


यह बिल्कुल वैसा है जैसे पानी ऊंचाई से गिरता है तो बबल बनते हैं।


3. ज्यादा देर तक रोककर रखना

बच्चे या महिलाएं कई बार पेशाब रोककर रखती हैं।

जब एकदम से निकलता है तो प्रेशर ज्यादा होता है - झाग बन सकता है।


4. यूरिन इन्फेक्शन

कुछ बैक्टीरिया भी झाग बना सकते हैं।

UTI में कभी-कभी झाग दिख सकता है।


5. दवाइयों का असर

कुछ दवाइयों में भी ऐसे तत्व होते हैं जो झाग बना सकते हैं।


कब शक करें कि यह प्रोटीन यूरिया हो सकता है?

अब असली सवाल — कैसे पहचानें कि झाग नॉर्मल है या प्रोटीन लीक की वजह से?


लगातार हर बार झाग आ रहा है

अगर हर पेशाब में झाग दिख रहा है — तब ध्यान देने की जरूरत है।


 झाग का रंग कैसा है?

नॉर्मल झाग - ट्रांसपेरेंट, हल्का, फ्लश करते ही गायब

प्रोटीन वाला झाग - सफेद, घना, देर तक टिकने वाला


साथ में ये लक्षण भी हों:

पैरों या चेहरे पर सूजन

पेशाब कम होना

हाई ब्लड प्रेशर

डायबिटीज

कमजोरी


 जांच कैसे करें?

1. 24 घंटे का यूरिन प्रोटीन टेस्ट

नॉर्मल: 150 mg से कम

लेकिन यह टेस्ट करना थोड़ा मुश्किल होता है — पूरे 24 घंटे कलेक्शन करना पड़ता है।


2. Spot Urine Protein/Creatinine Ratio

आजकल यह ज्यादा आसान तरीका है।

एक सैंपल से अंदाजा लग जाता है कि 24 घंटे में कितना प्रोटीन निकल रहा है।


अगर रिपोर्ट नॉर्मल है - चिंता खत्म।

अगर बढ़ा हुआ है - नेफ्रोलॉजिस्ट से मिलें।


अगर प्रोटीन निकल रहा है तो क्या करें?

सबसे पहले समझिए -

प्रोटीन यूरिया खुद में बीमारी नहीं, बल्कि बीमारी का संकेत है।


अक्सर कारण होते हैं:


डायबिटीज

हाई ब्लड प्रेशर

किडनी की बीमारी

प्रोटीन यूरिया कंट्रोल कैसे करें?

1. शुगर कंट्रोल रखें

HbA1c 7% से नीचे रखें।

फास्टिंग और पोस्ट मील शुगर कंट्रोल करें।


2. ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखें

110–135 (सिस्टोलिक)

डायस्टोलिक 90 से कम


3. नमक कम करें

ज्यादा नमक प्रोटीन लीकेज बढ़ा सकता है।

3–5 ग्राम से ज्यादा नमक न लें।


4. वजन कंट्रोल

मोटापा किडनी पर प्रेशर डालता है।


5. हेल्दी लाइफस्टाइल

रोज 30–45 मिनट वॉक


स्मोकिंग बंद

अल्कोहल बंद

पर्याप्त पानी (अगर किडनी फेल्योर नहीं है तो 6–8 गिलास)

कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएं?

अगर:


प्रोटीन 1 ग्राम से ज्यादा


सूजन बढ़ रही है

किडनी फंक्शन टेस्ट खराब

शुगर या बीपी अनकंट्रोल

तो तुरंत किडनी स्पेशलिस्ट से मिलें।


सबसे जरूरी बात

हर झाग प्रोटीन नहीं होता

डिहाइड्रेशन और प्रेशर से भी झाग बन सकता है


लगातार सफेद झाग + सूजन - जांच कराएं

बॉर्डरलाइन प्रोटीन - लाइफस्टाइल से कंट्रोल हो सकता है

ज्यादा प्रोटीन यूरिया - डॉक्टर की देखरेख जरूरी


घबराना नहीं है, समझदारी से जांच करानी है।


आयुर्वेद की नज़र से: यूरिन में झाग क्यों आता है?

अब तक हमने मॉडर्न साइंस के हिसाब से समझा कि यूरिन में झाग कई कारणों से बन सकता है।

लेकिन आयुर्वेद इस पूरे विषय को थोड़ा अलग एंगल से देखता है।


आयुर्वेद में यूरिन को “मूत्र” कहा गया है और यह शरीर के तीन मुख्य मल (मल, मूत्र, स्वेद) में से एक है। मूत्र का काम है शरीर से अतिरिक्त जल, कचरा पदार्थ (विष), और दोषों का निकास।


अगर मूत्र में बार-बार झाग दिख रहा है, तो आयुर्वेद इसे सिर्फ “प्रोटीन लीक” तक सीमित नहीं मानता, बल्कि इसे दोष असंतुलन और धातु कमजोरी का संकेत मानता है।


कफ दोष और झाग

आयुर्वेद के अनुसार झाग का संबंध अक्सर कफ दोष से जोड़ा जाता है।


कफ में स्वाभाविक रूप से चिकनापन (स्निग्धता) और भारीपन होता है।

जब शरीर में कफ बढ़ जाता है, तो मूत्र में भी हल्की चिकनाहट और फेन (झाग) दिख सकता है।


अगर झाग के साथ ये लक्षण हों:


शरीर में भारीपन

सूजन

आलस

वजन बढ़ना

बार-बार सर्दी

तो यह कफ वृद्धि की तरफ इशारा हो सकता है।


पित्त दोष और मूत्र की तीव्रता

अगर झाग के साथ:


जलन

पीला या गहरा रंग

तेज गंध

बार-बार प्यास

हो रही है, तो आयुर्वेद इसे पित्त वृद्धि से जोड़ता है।


पित्त बढ़ने पर शरीर में गर्मी और अम्लता बढ़ती है, जिससे मूत्र अधिक concentrated हो सकता है और उसमें फेन दिख सकता है।


3. वात दोष और धातु क्षीणता

अगर लंबे समय तक झाग बना रहता है, शरीर में कमजोरी है, वजन घट रहा है, या सूखापन है, तो आयुर्वेद इसे वात वृद्धि और धातु क्षीणता से जोड़ता है।


आयुर्वेद कहता है कि जब मेद धातु या अन्य धातुएँ कमजोर होती हैं, तो उनका पोषण ठीक से नहीं होता और मूत्र में असामान्य तत्व दिख सकते हैं।


4. प्रमेह का कॉन्सेप्ट

आयुर्वेद में एक बड़ी बीमारी बताई गई है — “प्रमेह”।

यह केवल डायबिटीज नहीं है, बल्कि मूत्र संबंधी 20 प्रकार की समस्याओं का समूह है।


प्रमेह में:


मूत्र अधिक मात्रा में

बार-बार

चिपचिपा या झागदार

मीठी गंध वाला

हो सकता है।


कफज प्रमेह में विशेष रूप से मूत्र में फेन (झाग) का वर्णन मिलता है।


इसलिए अगर किसी को शुगर, मोटापा, या मेटाबॉलिक समस्या है और झाग भी है, तो आयुर्वेद इसे गंभीरता से लेने की सलाह देता है।


आयुर्वेद क्या सलाह देता है?

अगर झाग कभी-कभार दिख रहा है और बाकी सब नॉर्मल है, तो घबराने की जरूरत नहीं।


लेकिन अगर बार-बार दिख रहा है, तो ये कदम मदद कर सकते हैं:


1. अग्नि सुधारें (पाचन मजबूत करें)

कमजोर पाचन से “आम” बनता है।

आम शरीर में जाकर चैनल्स (स्रोतस) को ब्लॉक करता है।


सुबह गुनगुना पानी

हल्दी + जीरा पानी

भारी, तला-भुना कम करें


2. कफ कंट्रोल करें

मीठा और मैदा कम

डेयरी सीमित

नियमित व्यायाम

शहद की थोड़ी मात्रा


 3. पित्त शांत करें

आंवला

नारियल पानी

धनिया पानी

ज्यादा मसालेदार खाना कम


 4. मूत्रवह स्रोतस की सफाई

आयुर्वेद में किडनी और यूरिन सिस्टम को “मूत्रवह स्रोतस” कहा गया है।


इसे संतुलित रखने के लिए पारंपरिक जड़ी-बूटियां:


1. पुनर्नवा (Punarnava)

काम: सूजन कम करना, किडनी सपोर्ट, मूत्र बढ़ाना (mild diuretic)


पाउडर (चूर्ण)

3–5 ग्राम


दिन में 1–2 बार

गुनगुने पानी के साथ


काढ़ा

20–30 ml


दिन में 1–2 बार

खाली पेट या खाने से पहले


टेबलेट/कैप्सूल (स्टैंडर्ड एक्सट्रैक्ट)

250–500 mg


दिन में 1–2 बार

2. गोक्षुरा (Gokshura)

काम: मूत्र मार्ग सपोर्ट, सूजन में मदद, किडनी टोनिक


चूर्ण

3–6 ग्राम


दिन में 1–2 बार

गुनगुने पानी या दूध के साथ


काढ़ा

20–40 ml


दिन में 2 बार


कैप्सूल

250–500 mg


दिन में 1–2 बार

3. वरुण (Varun)

काम: मूत्र तंत्र की सफाई, स्टोन सपोर्ट, मूत्र प्रवाह सुधार


 चूर्ण

3–5 ग्राम

दिन में 1–2 बार


काढ़ा

20–30 ml


दिन में 2 बार


कैप्सूल

250–500 mg

दिन में 1–2 बार

4. गिलोय (Giloy)

काम: दोष संतुलन, इम्यून सपोर्ट, पित्त-कफ कंट्रोल


चूर्ण

3–5 ग्राम


दिन में 1–2 बार

गिलोय रस

10–20 ml


दिन में 1–2 बार

खाली पेट बेहतर


कैप्सूल

300–500 mg

दिन में 1–2 बार


कितने समय तक लें?

हल्की समस्या: 4–6 हफ्ते

क्रॉनिक समस्या: वैद्य की निगरानी में


सावधानियां

लो BP वालों में पुनर्नवा सावधानी से

प्रेग्नेंसी में बिना सलाह न लें

अगर पहले से डायबिटीज/किडनी मेडिसिन चल रही है तो डॉक्टर से पूछें

ज्यादा मात्रा में लेने से इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो सकता है


एक सिंपल कॉम्बिनेशन (जनरल सपोर्ट के लिए)

सुबह:

गिलोय रस 15 ml + गुनगुना पानी


शाम:

पुनर्नवा या गोक्षुरा 3 ग्राम


(लेकिन यह भी पर्सनल कंडीशन के हिसाब से बदलेगा)


(इनका उपयोग वैद्य की सलाह से ही करें)


कब तुरंत डॉक्टर दिखाएं?

चाहे आप आयुर्वेद फॉलो करें या मॉडर्न मेडिसिन, अगर:


लगातार झाग

पैरों/चेहरे में सूजन

शुगर या बीपी

कमजोरी

यूरिन में झाग के साथ सफेदपन

तो जांच जरूर कराएं।


आयुर्वेद भी कहता है,

“रोग प्रारंभ में ही पकड़ लिया जाए तो उपचार सरल होता है।”


Bottom Line 

हर झाग प्रोटीन लीकेज नहीं होता।

लेकिन बार-बार झाग शरीर के अंदर असंतुलन का संकेत हो सकता है।


आयुर्वेद इसे दोष, अग्नि और धातु संतुलन से जोड़कर देखता है।

अगर लाइफस्टाइल ठीक कर लें, पाचन सुधार लें और दोष संतुलित रखें — तो ज्यादातर मामलों में स्थिति नियंत्रित हो सकती है।


संतुलन ही स्वास्थ्य है - यही आयुर्वेद का मूल मंत्र है।



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