Tuesday, February 3, 2026

नार्सिसिस्ट रिश्ते

 नार्सिसिस्ट रिश्ते

आपकी आत्मा को एक झटके में नहीं तोड़ते।

वे आपको धीरे-धीरे पहले आपके सर्कल, और फिर आपसे भी दूर कर देते हैं।


पहले आपकी हँसी बदलती है।

फिर आपकी पसंद।

फिर आपकी चुप्पी बढ़ने लगती है।


और एक दिन ऐसा आता है …

आप आईने में खुद को देखकर पूछती हैं -


“मैं असल में हूँ कौन?”

" मैं ऐसी तो नहीं थी "


यह प्रश्न सामान्य नहीं होता।

यह आपकी आत्मा की वह पुकार होती है

जिसे आपने किसी और को बचाने के लिए

खुद से ही दबा दिया होता है।


मनोविज्ञान इसे कहता है -

Identity Diffusion।


जब कोई स्त्री लंबे समय तक -


अपनी इच्छाओं को दबाती है


“ना” कहना भूल जाती है


हर टकराव से बचती है


हर गलती खुद पर ले लेती है


तो उसकी पहचान धुंधली होने लगती है।


धीरे-धीरे वह भूल जाती है -


“मैं क्या चाहती हूँ?”

और ये केवल जानती है कि -


“उसे क्या चाहिए?”


यहीं से आत्म-विस्मृति शुरू होती है।


सबसे बड़ा प्रश्न : आप निकल क्यों नहीं पातीं?


आप जानती हैं वह गलत है।

फिर भी आपका मन नहीं मानता।


क्यों?


क्योंकि यह रिश्ता

केवल भावनात्मक नहीं होता -

यह एक मानसिक सम्मोहन होता है।


मानव मन की प्रकृति : किसी विशेष चीज की प्राप्ति का आनंद 


कोई ऐसी चीज जो विशेष हो, उसकी प्राप्ति या उसका जीवन मे होना किसी भी मनुष्य को आनंद से भर देता है -


जैसे : -


किसी असाधारण व्यक्ति से प्रेम का मिलना 


विशेष मान्यता का मिलना 


“मैं खास हूँ” का एहसास 


अथवा किसी मूल्यवान वस्तु का स्वामित्व होना 


इनकी प्राप्ति के लिए मनुष्य अथक परिश्रम या कोई भी कीमत देने को, हर दुःख उठाने को तैयार हो जाता है। क्यूँ कि उस से प्राप्त आनंद (540Hz frequency) अतुलनीय होती है 


और एक Narcissist इतनी अच्छी ऐक्टिंग करता है, की वो एक स्त्री को उपरोक्त चारों अह्सास खुद के बारे मे करा देता है।


अब वह Narcissist केवल प्रेमी नही रहा, बल्कि उस स्त्री के लिए एक ऐसा अनमोल चीज हो जाता है जैसे कोई अनमोल "हीरा", जिसे दुनिया पहचान नही सकी और उसने हासिल कर लिया।


एक उदाहरण से उस स्त्री की मानसिक अवस्था को बेहतर समझ सकते हैं -


मान लीजिए किसी को

एक नकली हीरा मिल जाए।


जो देखने में बिल्कुल असली जैसा हो।


दस विशेषज्ञ कहें -

“यह नकली है।”


फिर भी वह व्यक्ति मानेगा नहीं।


क्यों?


क्योंकि उसका मन

पहले ही मान चुका है -


“मेरे पास कुछ बहुत कीमती है।”


"शायद बताने वाला ही मुझे गुमराह करना चाहता है" 


ठीक यही स्थिति

नार्सिसिस्ट रिश्ते में होती है। 


आपके सामने सच होता है -

लोग चेतावनी देते हैं -

संकेत मिलते हैं -

दर्द बढ़ता है -


फिर भी मन कहता है -


“नहीं… वह ऐसा नहीं हो सकता।”

"मेरा मन जानता है "

“वह अंदर से अच्छा है।”

“वह बदलेगा।”

“गलती मेरी है।”


वह मनुष्य एक स्त्री के नज़र में इतना अनमोल होता है कि, हज़ारों दर्द के बावजूद वो उसे खोना नहीं चाहती। बार बार Narcissist द्वारा अपमानित और प्रताड़ित होने के बाद भी उसका आकर्षण खत्म नही होता।


क्या करें?


ऐसी स्थिति से निकलने की पहली शर्त है भ्रम का टूटना।

जब तक भ्रम नहीं टूटता,

Healing शुरू ही नहीं होती।


सवाल खुद से पूछिए,


जिस रिश्ते को पाने में -


आपकी नींद चली गई


आत्म-सम्मान टूट गया


मानसिक शांति खत्म हो गई


आत्मविश्वास मर गया


आप खुद तिल तिल मर रही हैं 


ऐसे में यदि वो हीरा असली भी है, तो उस “हीरे” का आप करेंगी क्या? उसका उपयोग क्या है आपके जीवन मे?


क्या कोई चीज़

आपकी जान से ज्यादा कीमती है?


नहीं।


कभी नहीं।


निष्पक्ष दृष्टि रखें : सच्चाई का आईना


अब खुद से ईमानदारी से पूछिए 


अगर किसी रिश्ते में आपके हिस्से में -


केवल तनाव है


केवल डर है


केवल भ्रम है


केवल अकेलापन है


तो शायद वह प्रेम नहीं है।


वह केवल भावनात्मक शोषण है।


और सच्चाई यह है -


नार्सिसिस्ट आपको तब तक ही चाहता है

जब तक आपकी ऊर्जा बची है या कोई और विकल्प नहीं है।


जब आप खाली हो जाती हैं -

वह आपको ऐसे फेंक देता है

जैसे कोई इस्तेमाल किया हुआ काग़ज़। क्यूँ कि एक Narcissist बिना कोई मतलब किसी से सम्बन्ध रखता ही नहीं।

किसी ने उसे छोड़ा नहीं है, पर जो लोग उसे जानते हैं,

उन्हें अच्छे से पता होता है कि, ये इंसान भरोसे के लायक नहीं। आपने केवल एकतरफ़ा कहानियाँ उसके मुँह से सुनी हैं, जिसमें वो victim तथा पूरी दुनियाँ अत्याचारी और मतलबी है। 


कभी एक बार तो सोचें, कि "सारी दुनिया ही गलत कैसे हो सकती है?" कहीं ये इंसान ही तो गलत नहीं? और आपके साथ भी तो वही कर रहा है... कहीं ऐसा तो नही कि आप ही नकली हीरे के मोहपाश में बंधी हैं?


स्मरण रखिए : यदि आप किसी के लिए केवल विकल्प हैं तो उसका अर्थ केवल इतना ही है कि आपकी जरूरत स्थायी नहीं, अस्थायी है।


आप किसी की ज़रूरत पूरी करने की मशीन नहीं हैं।


आप किसी का प्रोजेक्ट नहीं हैं।


आप के जीवन का उद्देश्य किसी को सुधारने की ठेकेदारी नहीं हैं।


आप एक पूर्ण आत्मा हैं।


आपका अस्तित्व

किसी की स्वीकृति पर निर्भर नहीं।


यदि उपरोक्त बात आपको समझ आ जाए तो आप स्वयं की ओर लौटने लगती हैं।

मोह तत्क्षण खत्म हो जाता है ।


Healing का रास्ता कहीं बाहर नहीं, आपके ही भीतर है।


1️⃣ अपनी स्पष्ट आवाज़ वापस लाएँ

2️⃣ “ना” कहना सीखें

3️⃣ अपराधबोध छोड़ें

4️⃣ सीमाएँ बनाएँ

5️⃣ खुद को प्राथमिकता दें


शुरुआत कठिन होगी।

अकेलापन आएगा।

डर लगेगा।


लेकिन याद रखिए -


यह डर

गुलामी से बेहतर है।


याद रखें : 

यह अनुभव

आपको कमज़ोर बनाने नहीं आया।


यह आपको

जगाने आया है।


आप अब वही नहीं रहेंगी

जो चुप रहती थी।


आप अब वह बनेंगी

जो खुद के लिए खड़ी होती है।


और जब आप खुद को चुन लेंगी 


तो पाएँगी नाहक ही आपने एक भ्रम के पीछे अपने जीवन के कीमती क्षणों को व्यर्थ कर दिया।

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