Home Remedies for Pitta - पित्त बढ़ गया है? घबराइए नहीं—इलाज आपके किचन में ही है - अगर आपको बार-बार जलन, मुंह में छाले, पूरे शरीर में अजीब सी गर्मी, बहुत ज़्यादा पसीना, हाथ-पैरों में आग लगने जैसा फील, या फिर पूरी बॉडी में बर्निंग सेंसेशन रहता है-तो समझ लीजिए पित्त ओवरएक्टिव हो चुका है।
इसके साथ अगर गुस्सा जल्दी आना, चिड़चिड़ापन, या फिर ब्लीडिंग से जुड़ी दिक्कतें (नाक से खून, पाइल्स में ब्लीडिंग, पीरियड्स में ज़्यादा ब्लड, स्किन पर लाल-लाल चकत्ते) भी जुड़ जाएं, तो ये सारे क्लासिक पित्त डिसऑर्डर के साइन हैं।
अब सवाल आता है-
“ठीक है, आयुर्वेद में इलाज तो बहुत बताए जाते हैं, लेकिन घर पर ऐसा क्या करें जिससे पित्त कंट्रोल में आए?”
आज हम बात करेंगे ऐसी 5 परफेक्ट चीज़ों की, जो:
आसानी से मिल जाती हैं
ज़्यादा महंगी नहीं हैं
और सही तरीके से इस्तेमाल की जाएं, तो पित्त को काफी हद तक शांत कर देती हैं
औषधि #1: कुष्मांड (पेठा / कोहड़ा / Ash Gourd)
सबसे पहले बात उस सब्ज़ी की जो पित्त के लिए किसी रामबाण से कम नहीं—कुष्मांड।
आप इसे पेठा, कोहड़ा, वाइट ऐश गार्ड या कहीं-कहीं पंपकिन भी कहते हैं (लेकिन यहां बात हरे छिलके और सफेद अंदर वाले कोहड़े की हो रही है)।
आयुर्वेद में इसके नाम में ही हिंट है-
“कु + ऊष्म”, यानी शरीर की ऊष्णता, हीट और जलन को दबाने वाली चीज़।
यह:
शरीर की अंदरूनी गर्मी कम करता है
पित्त से जुड़े ब्लड डिसऑर्डर्स में मदद करता है
जलन, बर्निंग और ओवरहीटिंग को शांत करता है
कैसे लें?
सब्ज़ी बनाकर
जूस के रूप में
घी और मिश्री डालकर हलवे जैसा बनाकर
किसी भी फॉर्म में, बस इसे डाइट में शामिल करें।
शरद ऋतु
15 सितंबर से लेकर लगभग 15 नवंबर तक का समय आयुर्वेद में शरद ऋतु माना जाता है।
इस दौरान वातावरण और शरीर—दोनों में पित्त बढ़ता है।
अगर आप पित्त प्रकृति के हैं या आपको गर्मी ज़्यादा लगती है, तो इस मौसम में कुष्मांड को इग्नोर मत कीजिए।
इसीलिए शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की रोशनी में खीर रखकर खाने की परंपरा है—ताकि बढ़ी हुई गर्मी को शांत किया जा सके।
औषधि #2: आंवला (Amla / Amlaki)
दूसरी सुपरहिट और बजट-फ्रेंडली औषधि है—आंवला।
आयुर्वेद के अनुसार आंवला होता है:
शीत (बेहद ठंडा)
रूक्ष (ड्राय)
ये खासतौर पर उस पित्त के लिए बेस्ट है जिसे आयुर्वेद में “गीला पित्त” कहते हैं।
गीला पित्त क्या होता है?
बहुत ज़्यादा पसीना
खुजली और लाल चकत्ते
चिपचिपा मोशन, तेज़ जलन
खट्टा-कड़वा पानी, एसिडिटी
नाक, मुंह, पाइल्स या पीरियड्स में ज़्यादा ब्लीडिंग
इन सब कंडीशन्स में आंवला गेम-चेंजर है।
कैसे लें?
10–20 ml आंवला जूस
कच्चा आंवला काटकर
आंवले का पाउडर
या अगर सूट करता है तो आंवले का अचार
बोनस फायदा:
पित्त की वजह से बाल जल्दी सफेद होना, एजिंग जल्दी दिखना—इन सब में भी आंवला कमाल करता है।
औषधि #3: करेला - कड़वा, लेकिन असरदार
करेले का नाम सुनते ही लोग मुंह बना लेते हैं—
“छी, इतना कड़वा!”
लेकिन सच यही है कि इसी कड़वेपन में पित्त का इलाज छुपा है।
आयुर्वेद के अनुसार:
खट्टा, नमकीन, तीखा → पित्त बढ़ाते हैं
मीठा, कसैला, कड़वा → पित्त घटाते हैं
और इन तीनों में सबसे ताकतवर है—कड़वा रस (तिक्त रस)।
करेला:
अंदर की हीट कम करता है
छाले, जलन, पित्त वाली डिस्चार्ज को कंट्रोल करता है
कैसे खाएं?
घी में बनी करेले की सब्ज़ी
अगर पित्त है, तो करेले को लाइफस्टाइल से हटाइए मत—बस सही तरीके से खाइए।
औषधि #4: सिंघाड़ा (Water Chestnut)
अब बात उस चीज़ की जो:
ठंडी है
टेस्टी है
और शरीर को नरिशमेंट भी देती है
नाम है—सिंघाड़ा (संस्कृत: श्रृंगाटक)।
करेला पित्त घटाता है, लेकिन वज़न भी कम करता है।
अगर कोई बोले:
“मेरा पित्त तो है, लेकिन बॉडी पहले से ही कमज़ोर और सूखी है”
तो ऐसे केस में करेला नहीं—सिंघाड़ा बेहतर है।
कैसे लें?
कच्चा काटकर
सिंघाड़े का आटा
हलवा बनाकर
ये शुक्र धातु तक काम करता है,
जल्दी डिस्चार्ज, अंदरूनी जलन, और कमजोरी वाले केस में खास फायदेमंद।
औषधि #5: घी – पित्त शांत करने का राजा
आख़िर में, लेकिन सबसे ज़रूरी—घी (घृत)।
आयुर्वेद में पित्त को कंट्रोल करने के दो तरीके हैं:
दबाना (Shamana)
शरीर से बाहर निकालना (Shodhana)
पित्त को दबाने के लिए घी से बेहतर कुछ नहीं।
खासतौर पर उन लोगों के लिए:
जिन्हें बहुत गुस्सा आता है
जो ज़्यादा सोचते हैं
ब्रेन-वर्क, स्ट्रेस, लेट नाइट स्टडी
मानसिक थकान के कारण पित्त बढ़ा हुआ है
घी कैसे यूज़ करें?
रोज़ 10–15 ml खाने में
पैरों के तलवों पर मालिश
नाक में (नस्य)
मुंह के छालों में कुल्ला (देसी गाय का घी)
मज़बूत डाइजेशन वालों के लिए भैंस का घी भी चल सकता है।
जब ये सब करने के बाद भी पित्त कंट्रोल न हो…
अगर आपने खान-पान, ये सारी चीज़ें सब ट्राय कर लीं,
फिर भी पित्त बहुत ज़्यादा है—तो आयुर्वेद कहता है:
अब उसे दबाओ मत, निकालो।
इसके लिए:
विरेचन पंचकर्म (पित्त को मोशन के ज़रिये बाहर निकालना)
हर 6 महीने में रक्तमोक्षण (ब्लड निकालना)
लोकल पित्त में लीच थेरेपी / कपिंग
ये सब करने के बाद जब आप ऊपर बताई गई चीज़ें खाते हैं,
तो रिज़ल्ट कई गुना बेहतर आता है।
फाइनल बात
आज हमने सिर्फ 5 चीज़ों की बात की है,
लिस्ट इससे कहीं लंबी है।
अगर आप चाहते हैं:
और घरेलू उपाय
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या किसी खास पित्त प्रॉब्लम पर डीप वीडियो
तो कमेंट में ज़रूर बताइए:
आपने आज क्या सीखा
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