Ayurvedic Tridosha Treatment - वात, पित्त और कफ तीनों बिगड़ जाएं तो क्या करें?
जब तीनों दोष बिगड़ जाएँ – इसे ही सन्निपात कहते हैं - आयुर्वेद में सबसे चुनौतीपूर्ण स्थिति तब मानी जाती है जब शरीर के तीनों दोष – वात, पित्त और कफ – एक साथ असंतुलित हो जाते हैं। इस अवस्था को सन्निपात कहा जाता है।
यहीं पर लोग सबसे बड़ी गलती करते हैं। वे किसी एक दोष को ठीक करने की दवा या उपाय शुरू करते हैं और अनजाने में दूसरा दोष और ज्यादा बिगड़ जाता है।
आज हम उन्हीं आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित पाँच ऐसे तरीकों की बात करेंगे, जिनसे तीनों दोषों को एक साथ बैलेंस किया जा सकता है और शरीर को दोबारा ट्रैक पर लाया जा सकता है।
त्रिदोष क्यों बिगड़ते हैं – असली जड़ क्या है?
आयुर्वेद के अनुसार त्रिदोष का असंतुलन तब शुरू होता है जब जठराग्नि यानी डाइजेस्टिव फायर कमजोर पड़ जाती है।
कमज़ोर अग्नि की वजह से शरीर में आम यानी टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं और यहीं से रोगों की चेन रिएक्शन शुरू होती है।
इसीलिए इलाज की शुरुआत हमेशा अग्नि सुधारने से होती है, दवा से नहीं।
पहला स्टेप: लंघन – शरीर को खुद को साफ करने का मौका दें
सबसे पहले तीन दिन तक सिर्फ गुनगुना पानी पिएँ और मूंग दाल की पतली खिचड़ी लें।
आयुर्वेद में इसे लंघन कहा जाता है।
लॉजिक साफ़ है – जब सिस्टम पर लोड कम होगा, तभी शरीर खुद की सफाई कर पाएगा। यह शरीर को रीसेट करने जैसा है।
क्यों पहले वात को बैलेंस करना ज़रूरी है?
आयुर्वेद का एक मूल सिद्धांत है –
“वायुना विना दोषाणां गतिर्नास्ति”
मतलब, बिना वात के पित्त और कफ हिल भी नहीं सकते।
इसलिए जब तीनों दोष बिगड़े हों, तो सबसे पहले वात को शांत करना जरूरी है।
वात संतुलन का सबसे सरल उपाय
तिल के तेल से रोज़ हल्की मालिश।
यह शरीर के सूखेपन को खत्म करता है और नर्वस सिस्टम को शांत करता है।
दूसरा स्टेप: पित्त के लिए घी क्यों ज़रूरी है?
पित्त का मतलब सिर्फ गर्मी नहीं, बल्कि ओवरएक्टिव मेटाबॉलिज़्म भी है।
देसी घी पित्त को ठंडा करता है, लेकिन अग्नि को कमजोर नहीं करता।
इसीलिए पित्त संतुलन के लिए घी को आयुर्वेद में अमृत कहा गया है।
तीसरा स्टेप: कफ के लिए शहद और मूवमेंट
कफ का नेचर है भारीपन और जड़ता।
शहद कफ को काटता है और हल्का व्यायाम कफ को जमा नहीं होने देता।
ध्यान रहे – शहद हमेशा कच्चा लें, गर्म न करें।
जब तीनों दोष बिगड़े हों, तो डाइट कैसी होनी चाहिए?
ऐसी डाइट जो न बहुत ठंडी हो, न बहुत गर्म।
आयुर्वेद इसे सामान्य आहार कहता है।
अब अपनी थाली में ये पाँच बदलाव आज से शुरू करें।
1. अनाज – हल्का लेकिन पोषक
भारी गेहूं की रोटियाँ फिलहाल कम करें।
उसकी जगह:
पुराना चावल
जौ
मूंग की दाल
मूंग दाल इकलौती ऐसी दाल है जो वात, पित्त और कफ – तीनों को बैलेंस करती है।
2. सब्ज़ियाँ – हमेशा पकी हुई
कच्चा प्याज़ बिल्कुल बंद करें। यह वात बढ़ाता है।
हमेशा पकी हुई सब्ज़ियाँ खाएँ जैसे:
लौकी
तोरई
कद्दू
परवल
ये पचने में हल्की होती हैं और सिस्टम पर बोझ नहीं डालतीं।
3. फल – हर फल आपके लिए नहीं
इस समय सबसे सुरक्षित फल हैं:
अनार
पपीता
बहुत खट्टे या बहुत मीठे फलों से अभी दूरी बनाए रखें।
4. मसाले – कम लेकिन सही
लाल मिर्च को फिलहाल रसोई से बाहर रखें।
उसकी जगह:
जीरा
धनिया
सौंफ
ये तीनों मिलकर पाचन सुधारते हैं बिना पित्त को भड़काए।
5. कुकिंग फैट – देसी घी क्यों सबसे बेस्ट है?
रिफाइंड तेल छोड़ें।
देसी घी:
वात को चिकनाई देता है
पित्त को शांत करता है
कफ को जमा नहीं होने देता
इसीलिए यह त्रिदोष संतुलन का सबसे सुरक्षित फैट है।
शुरुआत समझ नहीं आ रही? ये करें
3 से 7 दिन तक सिर्फ मूंग दाल की खिचड़ी खाएँ।
यह आपके पाचन तंत्र के लिए फैक्ट्री रिसेट जैसा काम करता है।
कुछ चीज़ें जो तीनों दोषों पर काम करती हैं
1. आंवला
इकलौता फल जो:
पित्त को ठंडा करता है
वात को शांत करता है
कफ को सुखाता है
2. गिलोय
इसे त्रिदोष शामक कहा जाता है।
यह खून साफ करती है और शरीर में बैलेंस बनाती है।
3. त्रिफला – सही तरीके से लें
रात को गुनगुने पानी से लें - वात और पित्त को बाहर निकालता है
शहद के साथ लें - कफ को काटता है
दवा ले रहे हैं लेकिन गलत खाना खा रहे हैं?
तो त्रिदोष कभी ठीक नहीं होंगे।
इन विरुद्ध आहार से बचें:
दूध के साथ नमक या खट्टे फल
रात में दही
ठंडा पानी
ठंडा पानी वात और कफ को तुरंत बिगाड़ देता है।
समय का पालन – आयुर्वेद का सबसे अनदेखा नियम
रात 10 बजे तक सो जाएँ
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें
रोज़ 15 मिनट अनुलोम-विलोम या नाड़ी शोधन करें
यह प्राण वायु को संतुलित करता है और तीनों दोषों को स्थिर करता है।
Conclusion
त्रिदोष को बैलेंस करने के लिए:
पाचन सुधारें
आंवला और गिलोय को शामिल करें
विरुद्ध आहार से बचें
त्रिदोष का इलाज धैर्य माँगता है, लेकिन सही दिशा में किया गया प्रयास शरीर को स्थायी संतुलन देता है।
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