स्त्री और पुरुष का रिश्ता तब सुंदर होता है
जब दोनों एक दूसरे की थकान समझ लेते है,
और बिना बोले एक दूसरे का सहारा बन जाते है।
प्रेम तब पवित्र होता है,
जब स्त्री सम्मान दे, और पुरुष संवेदनाएं समझे __
यही से रिश्तों की जड़े गहरी होती है।
स्त्री दिन से जुड़ती है, पुरुष जिम्मेदारी से.....
जब दोनों एक दूसरे की भाषा सीख लेते है,
तभी प्रेम पूर्ण होता है।
रिश्ता शरीर से नहीं, आत्मा से बंधे तो लंबा चलता है
क्योंकि सुंदरता बदलती है, पर समझ और विश्वास नहीं।
स्त्री को साथ चाहिए, पुरुष को विश्वास __
जब दोनों को दोनों मिल जाएँ, तो जीवन वरदान बन जाता है
जहां पुरुष सुरक्षा बनता है, और स्त्री शांति __
वही प्रेम अपना असली रूप लेता है।
स्त्री और पुरुष तब परिपक्क होते है,
जब जीत हार भूल कर रिश्ते को साथ निभाने की कला सीख जाते है।
जहां स्त्री को सुना जाता है,
और पुरुष को समझा जाता है__
वहां प्रेम संघर्ष नहीं, एक साधना बन जाता है।
रिश्ता तब मजबूत होता है, जब दोनों में से कोई भी
खुद को "सही" साबित करने पर अड़ा न हो__
बल्कि "हम" को बचाने पर टिका हो।
स्त्री प्रेम में गहराई लाती है, पुरुष प्रेम में स्थिरता__
और इन दोनों का संतुलन ही घर को घर बनाता है।
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