सुंदरता और रिश्तों की दर्शनशास्त्र...
सुंदरता, जो हम देखते हैं, वह अक्सर केवल प्रकाश की परत होती है एक झिलमिलाहट, एक चमक, एक तात्कालिक आकर्षण। हम इसे देखकर निर्णय करते हैं, और उसी पर भरोसा कर रिश्तों की नींव रखते हैं। पर क्या यह वास्तविक सुंदरता है..???
वास्तविक सुंदरता वह है जो दिखाई नहीं देती। वह हमारी आँखों से नहीं, बल्कि हमारे अंतरमन की दृष्टि से महसूस की जाती है। चेहरे की रेखाएँ, चमक-धमक, मापी-तुली आकृतियाँ ये सब समय के साथ फीके पड़ जाते हैं। वह जो आज हमें लुभा रहा है, कल वही सामान्य, यहां तक कि उबाऊ भी लग सकता है।
हम अपने रिश्तों में अक्सर वही गलती करते हैं हम बाहरी आकर्षण को मूल्य देते हैं और आत्मा की गहराई को अनदेखा कर देते हैं। और यही अनदेखा की गई गहराई समय के साथ अपनी उपस्थिति जताती है वह झगड़े में, शिकायतों में, अनसुलझे सवालों में प्रकट होती है।
सोचिए....क्या कुरूपता वास्तव में उस व्यक्ति में है? या यह हमारी चयन की दृष्टि में कमी है? जब हमने रिश्ता बनाते समय केवल चमक और दिखावे को चुना, तो हमारे मन की अपेक्षाएँ इतनी बड़ी हो जाती हैं कि कोई भी असली इंसान उसे पूरा नहीं कर सकता। इसलिए जो कभी सुंदर था, वही अब संदिग्ध और बेस्वाद लगने लगता है।
दुनिया में हर इंसान अपने आप में अद्वितीय और सुंदर है। हर आत्मा में अपनी रचनात्मकता, सहनशीलता और प्रेम छिपा है। किसी की हँसी में, किसी की चुप्पी में, किसी की संवेदनशीलता में सौंदर्य छिपा है। पर हमने उसे बाज़ार में रख दिया, जहाँ मूल्य तय होता है केवल देखने और दिखाने की क्षमता से।
और इसलिए रिश्ते न केवल टिकते नहीं, बल्कि जल्दी खत्म हो जाते हैं। क्योंकि बाहरी सुंदरता एक छलावा है, एक रूपक, जो समय के साथ बदलता है। केवल आत्मिक सुंदरता वही है जो स्थायी है, जो समय के आँच में और भी गहरी होती है।
संबंध का असली विज्ञान यही है जो दिल से महसूस किया जाए।
जो आत्मा को समझे, उसकी गहराई में उतर सके।
जो खामोशी में भी सुकून दे,
और अंतरात्मा को छू सके।
यदि हम चाहें कि हमारे रिश्ते स्थायी हों, तो हमें सौंदर्य की परिभाषा बदलनी होगी।
हमें चमक-धमक से परे देखना होगा।
हमें उस इंसान के भीतर की रचना, उसकी संवेदनाएँ, उसके विचार और उसका जीवन दृष्टिकोण देखना होगा।
क्योंकि जब आत्मा से आत्मा जुड़ती है,
वह संबंध अनंत और अटूट बन जाता है।
वह संबंध केवल आँखों के लिए नहीं, बल्कि मन और आत्मा के लिए होता है।
और वही सच्ची सुंदरता है जो समय के साथ फीकी नहीं होती, बल्कि गहरी होती जाती है।
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