Friday, January 23, 2026

लड़कियाँ or आख़िर लड़कियाँ सुरक्षित कहाँ हैं

 कुछ लड़कियाँ होती हैं किताब जैसी…

शांत, गहरी और कई पन्नों में छुपी हुई।

जो हर किसी के सामने खुलती नहीं,

पर जो पढ़ना जान ले - उसकी हो जाती हैं।

जो ज़्यादा बोलती नहीं,

पर आँखों से सब कुछ कह जाती हैं।

जो अपनी तकलीफें सबको नहीं बतातीं,

बस रात को तकिए में छुपाकर रो लेती हैं।

जो छोटी-छोटी बातों में खुश हो जाती हैं,

और बड़े-बड़े दुख अकेले झेल जाती हैं।

जो “मुझे कुछ नहीं चाहिए” कहकर

सब कुछ छोड़ देना जानती हैं।

जो रिश्तों में हिसाब नहीं करतीं,

बस निभाना जानती हैं।

किसी के लिए पूरा दिन इंतज़ार करने वाली,

और मिलने पर बस मुस्कुरा देने वाली लड़कियाँ।

जो नाराज़ भी होती हैं तो बस इसलिए,

क्योंकि प्यार बहुत ज्यादा करती हैं।

जो भीड़ में भी अकेली महसूस करती हैं,

और अकेले में पूरी दुनिया बसा लेती हैं।

जो किसी का हाथ थाम लें,

तो फिर छोड़ना नहीं जानतीं।

जो टूटकर भी किसी से शिकायत नहीं करतीं,

बस चुपचाप संभलना सीख लेती हैं।

जो अपनी खुशियों से ज्यादा

अपनों की खुशियों को जरूरी समझती हैं।

जो खुद के लिए कम,

और दूसरों के लिए ज्यादा जीती हैं।

ऐसी लड़कियाँ दिखावे की नहीं होतीं,

दिल की बहुत अमीर होती हैं।

इनकी हँसी में घर बसता है,

इनकी चुप्पी में पूरा समंदर।

सच कहूँ तो…

ऐसी लड़कियाँ किस्मत वालों को मिलती हैं।

जो इन्हें समझ ले,

उसकी दुनिया खूबसूरत हो जाती है।

और जो इन्हें खो दे…

उसे उम्र भर पछताना पड़ता है।


आख़िर लड़कियाँ सुरक्षित कहाँ हैं...


परिवार, बाहर या कार्यस्थल सच्चाई, ज़िम्मेदारी और समाधान...


एक सीधा लेकिन कठिन सवाल


जब भी किसी लड़की के साथ गलत होता है, पहला सवाल यही उठता है

“वो वहाँ गई ही क्यों?”

लेकिन शायद हमें यह पूछना चाहिए

“वो सुरक्षित क्यों नहीं थी?”


यह सवाल सिर्फ़ लड़कियों का नहीं, पूरे समाज की सोच का आईना है।


1. सुरक्षा क्या है? पहले इसे समझना ज़रूरी है


सुरक्षा का मतलब सिर्फ़ यह नहीं कि कोई शारीरिक नुकसान न हो।


सुरक्षा का मतलब है:


बिना डर के जीना


अपनी बात कह पाना


किसी के गलत स्पर्श या शब्द को रोक पाना


और मदद माँगने पर सुना जाना


अगर डर है, चुप्पी है और शर्म है तो वहाँ सुरक्षा नहीं है।


2. क्या परिवार सच में सबसे सुरक्षित जगह है?


हम बचपन से सुनते आए हैं

“घर सबसे सुरक्षित होता है”


लेकिन सच्चाई यह है कि:


कई बार शोषण जान-पहचान वालों से होता है


रिश्तों की वजह से बच्चा बोल नहीं पाता


परिवार “इज़्ज़त” बचाने के नाम पर चुप कर देता है


समस्या कहाँ है?


बच्चों से खुलकर बात नहीं होती


शरीर से जुड़े सवालों को “गलत” माना जाता है


डर सिखाया जाता है, समझ नहीं


समाधान:


परिवार तब सुरक्षित बनता है जब:


बच्चा बिना डर कुछ भी पूछ सके


माता-पिता सुनें, डाँटें नहीं


गलती बच्चे की नहीं, गलत करने वाले की मानी जाए


3. बाहर की दुनिया: डर के साथ जीना


लड़कियों को बचपन से सिखाया जाता है:


अकेले मत जाना


देर तक बाहर मत रहना


कपड़े संभलकर पहनना


पर सवाल यह है:


क्या लड़कों को भी यही सिखाया जाता है?


बाहर असुरक्षा क्यों है?


छेड़छाड़ को “मज़ाक” समझा जाता है


देखने, बोलने, पीछा करने पर रोक नहीं


देखने वाले चुप रहते हैं


जब समाज चुप रहता है, अपराधी मज़बूत होता है।


4. स्कूल, कॉलेज और कार्यस्थल: जहाँ भविष्य बनता है, वहीं डर


आज लड़कियाँ पढ़ भी रही हैं, काम भी कर रही हैं।

फिर भी...


वहाँ क्या होता है?


टीचर, सीनियर या बॉस का दबाव


मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न


शिकायत करने पर बदनाम होने का डर


अक्सर कहा जाता है: “करियर खराब हो जाएगा, चुप रहो”


यह चुप्पी ही सबसे बड़ी समस्या है।


5. आख़िर ज़िम्मेदार कौन है?


यह सवाल बहुत ज़रूरी है।


ज़िम्मेदार कौन नहीं?


लड़की नहीं


उसके कपड़े नहीं


उसका बाहर जाना नहीं


ज़िम्मेदार कौन है?


गलत सोच रखने वाला व्यक्ति


उसे रोकने में असफल समाज


चुप रहने वाले लोग


और सही शिक्षा न देने वाली व्यवस्था


जब तक ज़िम्मेदारी साफ़ नहीं होगी, समाधान नहीं मिलेगा।


6. फिजिकल (शारीरिक) जानकारी क्यों ज़रूरी है?


हम अक्सर कहते हैं “बच्चे छोटे हैं, ये सब मत बताओ”


पर सच यह है:


जानकारी की कमी बच्चों को कमज़ोर बनाती है


शारीरिक जानकारी का मतलब:


अपने शरीर के अंगों की पहचान


कौन छू सकता है, कौन नहीं


अच्छा और बुरा स्पर्श


“ना” कहने का अधिकार


यह जानकारी लड़का और लड़की दोनों के लिए बराबर ज़रूरी है।


7. अगर जानकारी नहीं दी तो क्या होता है?


बच्चा समझ नहीं पाता कि उसके साथ गलत हो रहा है


अपराधबोध में जीता है


डर की वजह से चुप रहता है


और अपराधी बच जाता है


जानकारी बच्चे को सुरक्षित बनाती है, बिगाड़ती नहीं।


8. अभिभावकों की सबसे बड़ी भूमिका


माता-पिता बच्चे की पहली दुनिया होते हैं।


उन्हें क्या करना चाहिए?


सवालों से भागना नहीं


उम्र के अनुसार सही बात बताना


बेटे-बेटी में फर्क न करना


डर नहीं, समझ सिखाना


अगर बच्चा घर में सुरक्षित महसूस करेगा, तो वह बाहर भी मज़बूत रहेगा।


9. लड़कों की शिक्षा भी उतनी ही ज़रूरी


अक्सर सुरक्षा की बातें सिर्फ़ लड़कियों तक सीमित रहती हैं।


लेकिन लड़कों को सिखाना ज़रूरी है:


सम्मान क्या होता है


सहमति (Consent) का मतलब


“ना” का सम्मान


और ताकत का गलत इस्तेमाल न करना


लड़कों को अच्छा इंसान बनाना, समाज को सुरक्षित बनाता है।


10. समाज और कानून की ज़िम्मेदारी


पीड़ित को दोष देना बंद करना


शिकायत करने वालों को समर्थन देना


कड़े और तेज़ न्याय की व्यवस्था


और संवेदनशील सोच


कानून तभी काम करता है, जब समाज साथ दे।


सुरक्षा कोई जगह नहीं, सोच है


लड़कियाँ तब सुरक्षित होंगी जब:


घर समझदार होगा


समाज जागरूक होगा


शिक्षा ईमानदार होगी


और चुप्पी टूटेगी


सुरक्षा ताले से नहीं, सोच बदलने से आती है।




                 

No comments:

Post a Comment