Tuesday, November 4, 2025

ज्ञान का नेतृत्व

 ज्ञान का नेतृत्व


कभी झिझकती थी उसकी परछाई,

खामोशी में बंधे सवालों के साथ।

आज वही परछाई नहीं,

वो विचारों की तेज़ धार है,

जो अंधेरों को चीरती है और असंभव को चुनौती देती है।


सहमापन कभी उसका कवच था,

अब उसकी दृष्टि उसका अस्त्र।

हर शब्द में विचार,

हर निर्णय में अनुभव,

हर मुस्कान में गहरी समझ।


दुनिया की हलचल उसे प्रभावित नहीं करती,

वो अपनी सोच के गुरुत्व में स्थिर है।

जहाँ बहस होती है, वहाँ उसकी मौन शक्ति बोलती है,

जहाँ मार्ग नहीं दिखता, वहाँ उसकी तर्कपूर्ण दृष्टि दीपक बन जाती है।


सिर्फ़ नेतृत्व नहीं,

ये ज्ञान का नेतृत्व है,

जो डर को दरकिनार करता है,

सवाल को सम्मान देता है,

और हर क्षण में भविष्य को आकार देता है।


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