Saturday, June 13, 2020

Science Most Important Questions and Answer

Science Most Important Questions and Answer


प्रश्‍न – कार्बन डेटिंग विधि किसकी आयु निर्धारित करने के लिए अपनाई जाती है? उत्‍तर – जीवाश्‍मों की
प्रश्‍न – अत्‍यधिक शराब का सेवन करने से शरीर का कौन सा अंग विशेष रूप से प्रभावित होता है? उत्‍तर – यकृत  (Liver)
प्रश्‍न – शरीर में रक्‍त बैंक का काम कौनसा अंग करता है? उत्‍तर – तिल्‍ली (Spleen)
प्रश्‍न – हरे पौधों में प्रकाश संश्‍लेषण की इकाई क्‍या कहलाती है? उत्‍तर – क्‍वाण्‍टोसोम (Quanta some)
प्रश्‍न – शरीर में रक्‍त की सफेद कोशिकाओं का मुख्‍य कार्य क्‍या होता है? उत्‍तर – शरीर को बीमारियों से बचाना।
प्रश्‍न – मछली के हृदय में कितने प्रकोष्‍ठ होते हैं? उत्‍तर – दो (Two-Chambered)
प्रश्‍न – मानव शरीर में रक्‍त से अवांछनीय पदार्थों को पृथक करने का कार्य कौनसा अंग करता है? उत्‍तर – वृक्‍क (Kedney)


प्रश्‍न – चालीस वर्ष पूरे हो जाने पर चर्चित ‘अप्‍सरा’ क्‍या हे? उत्‍तर – न्‍यूक्‍लीयर रियेक्‍टर
प्रश्‍न – डायनमो का क्‍या कार्य है? उत्‍तर – यांत्रिक ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा का उत्‍पादन
प्रश्‍न – पिचब्‍लेण्‍डी से कौनसा रेडियोएक्टिव तत्‍व प्राप्‍त किया गया था? उत्‍तर – रेडियम
प्रश्‍न – गिरगिट की त्‍वचा में रंग बदलने का कारण क्‍या है? उत्‍तर – उसकी त्‍वचा में मेलेनोफोर नामक असंख्‍य रंगद्रव्‍य कोशिकाओं की उपस्थिति के कारण
प्रश्‍न – प्रकृति में सबसे अधिक मात्रा में पाए जाने वाला कार्बनिक यौगिक कौनसा है? उत्‍तर – सेल्‍यूलोज
प्रश्‍न – समुद्र के किनारे उगने वाले वृक्षों में वार्षिक वलय (Annual rings) क्‍यों नहीं होते? उत्‍तर – क्‍योंकि यहाँ की जलवायु में स्‍पष्‍ट भिन्‍नता नहीं होती है।
प्रश्‍न – वृद्धावस्‍था का अध्‍ययन विज्ञान की किस शाखा के अन्‍तर्गत किया जाता है? उत्‍तर – जिरेन्‍टोलॉजी
प्रश्‍न – डोलोमाइट (CaCO3) किसका अयस्‍क है? उत्‍तर – कैल्सियम का
प्रश्‍न – खट्टे फलों में कौनसा विटामिन पाया जाता है? उत्‍तर – विटामिन C
प्रश्‍न – ध्‍वनि की तीव्रता मापने वाला यंत्र क्‍या कहलाता है? उत्‍तर – ऑडियोमीटर
प्रश्‍न – दूध का खट्टा होना किसके द्वारा होता है? उत्‍तर – जीवाणु द्वारा
प्रश्‍न – श्‍वेत प्रकाश के वर्णक्रम (Spectrum) में प्रिज्‍म द्वारा सर्वाधिक विचलित (Deviate) होने वाला कौनसा रंग है? उत्‍तर – बैंगनी
प्रश्‍न – रेफ्रीजेरेटर में प्रशीतक (Regrigerant) क्‍या होता है? उत्‍तर – फ्रीयोन
प्रश्‍न – दूध से दही बनाने में कौनसा बैक्‍टीरिया सहायक होता है? उत्‍तर – लैक्‍टोबैसिलस (Lacto-bacillus)
प्रश्‍न – किस अंग के कार्य न करने पर डाइलेसिस (Dialysis) किया जाता है? उत्‍तर – वृक्‍क(Kidney)
प्रश्‍न – मनुष्‍य के मस्तिष्‍क का सबसे बड़ा भाग क्‍या होता है? उत्‍तर – प्रमस्तिष्‍क (Cerebrum)
प्रश्‍न – राइफल चलाने पर लगने वाला झटका किसके संरक्षण का उदाहरण है? उत्‍तर – रेखीय संवेग के संरक्षण (Conservation of linear momentum) का
प्रश्‍न – प्रयोगशाला में सर्वप्रथम जीन का संश्‍लेषण करने वाला वैज्ञानिक कौन है? उत्‍तर – हरगोविन्‍द खुराना
प्रश्‍न – चन्‍द्रमा पर वायुमण्‍डल न होने का क्‍या कारण हे? उत्‍तर – वहाँ सभी गैसों का वर्ग माध्‍य मूल वेग(Root mean square velocity) उनके पलायन वेग (Escape Velocity) से अधिक है।
प्रश्‍न – किस एक कोशिकीय शैवाल (Unicellular Algae) का उपयोग अन्‍तरिक्ष में खाद्य की समुचित पूर्ति के लिए किया जाता है? उत्‍तर – क्‍लोरेला (Chlorela)
प्रश्‍न – प्राकृतिक रबर किसका बहुलक (Polymer) है? उत्‍तर – आइसोप्रीन (Isoprene) का
प्रश्‍न – द्रव्‍य की चौथी अवस्‍था क्‍या कहलाती है? उत्‍तर – प्‍लाज्‍मा (Plasma)
प्रश्‍न – प्रत्‍यावर्ती धारा की माप किस यंत्र से की जाती हे? उत्‍तर – तप्‍त तार अमीटर (hot Wire Ammeter) से
प्रश्‍न – प्रकाश तरंगों के किस गुण से उनके अनुप्रस्‍थ होने का प्रमाण मिलता है? उत्‍तर – ध्रुवण(Polarisation) से
प्रश्‍न – एक वृत्‍ताकार वलय (Circular Ring) का गुरूत्‍व केन्‍द्र कहाँ होता है? उत्‍तर – वलय वृत्‍त के केन्‍द्र पर
प्रश्‍न – मानव रक्‍त का pH मान होता है? उत्‍तर –7.4
प्रश्‍न – खनिज संरचना की दृष्टि से हीरा क्‍या होता है? उत्‍तर – कार्बन
प्रश्‍न – ग्रह गति (Planetary Motion) का सिद्धान्‍त किसने प्रतिपादित किया? उत्‍तर – कोप्‍लर ने
प्रश्‍न – हाइड्रोजन बम किस सिद्धान्‍त पर आधारित है? उत्‍तर – नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion)पर
प्रश्‍न – प्रोट्रॉन की खोज किसने की थी? उत्‍तर – रदरफोर्ड ने
प्रश्‍न – कौनसा पदार्थ पृथ्‍वी पर तीनों अवस्‍थाओं में पाया जाता है? उत्‍तर – पानी
प्रश्‍न – हीरे के सम्‍बन्‍ध में कैरेट (Carat) क्‍या होता हे? उत्‍तर – हीरे के भार का मात्रक (Unit of Weight of diamond)
प्रश्‍न – गैल्‍वेनीकृत लोहे पर किसका लेप होता है? उत्‍तर – जिंक का
प्रश्‍न – भारत में 28 फरवरी को विज्ञान दिसव किस उपलक्ष्‍य में मनाया जाता है? उत्‍तर – सी.वी.रमन द्वारा रमन प्रभाव की खोज करने के दिन के उपलक्ष्‍य में
प्रश्‍न – 7 नवम्‍बर, 1888 भारत के किस महान वैज्ञानिक का जन्‍मदिन है? उत्‍तर – सी.वी.रमन का
प्रश्‍न – आयो‍डीन युक्‍त नमक का प्रयोग किस बीमारी की रोकथाम के लिए किया जाता है? उत्‍तर – गलगण्‍ड (Goitre)
प्रश्‍न – विद्युत मोटर का क्‍या कार्य है? उत्‍तर – विद्युत ऊर्जा का यांत्रिक ऊर्जा में रूपान्‍तरण करना।
प्रश्‍न – हरे पौधों में प्रकाश-संश्‍लेषण की इकाई क्‍या कहलाती है? उत्‍तर – क्‍वाण्‍टासोम(Quantasome)
प्रश्‍न – पृथ्‍वी का औसत घनत्‍व क्‍या है ? उत्‍तर –5.5 ग्राम/घन सेंटीमीटर
प्रश्‍न – सूर्य सदैव पूर्व में निकलता है, क्‍योंकि? उत्‍तर – पृथ्‍वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है।
प्रश्‍न – पौधों में वाष्‍पोत्‍सर्जन दर के निर्धारण के लिए किस यंत्र का उपयोग किया जाता है? उत्‍तर – पोटोमीटर का
प्रश्‍न – रेड लेड का रासायनिक सूत्र क्‍या है ? उत्‍तर –Pb3O4
प्रश्‍न – मानव शरीर में विटामिन K का निर्माण किस अंग में होता है? उत्‍तर – कोलन में बैक्‍टीरिया द्वारा
प्रश्‍न – ‘DARK AVENGER’ क्‍या है? उत्‍तर – एक प्रकार का प्रमुख कम्‍प्‍यूटर वायरस
प्रश्‍न – फाइकोलॉजी (Phycology) के तहत विज्ञान की किस शाखा का अध्‍ययन किया जाता है?उत्‍तर – शैवाल (Algae) का
प्रश्‍न – किस विटामिन में कोबाल्‍ट (Cobalt) पाया जाता है? उत्‍तर – विटामिन B12 में
प्रश्‍न – ‘मेनिनजाइटिस’ (तानिका शोध) नामक रोग में शरीर का कौन सा अंग प्रभावित हो जाता है? उत्‍तर – मस्तिष्‍क
प्रश्‍न – मानव शरीर में रक्‍त का थक्‍का नहीं बनने का प्रमुख कारण है? उत्‍तर – हिपेरिन की उपस्थिति
प्रश्‍न – चाय बनाने के लिए विद्युत द्वारा केतली में पानी किस विधि द्वारा गर्म होता है? उत्‍तर – कन्‍वेक्‍शन द्वारा
प्रश्‍न – वृद्धों के चिकित्‍साशास्‍त्रीय अध्‍ययन (Medical Study) को क्‍या कहा जाता है? उत्‍तर – गैरियाट्रिक्‍स (Geriatrics)
प्रश्‍न – हाइपोग्‍लाइसेमिया (Hypoglycemia) नामक रोग रक्‍त में किसकी कमी से होता है? उत्‍तर – ग्‍लूकोस
प्रश्‍न – एच.टी.एल.वी.-II नामक वायरस से कौन सा रोग फैलता है? उत्‍तर – एड्स (Aids)
प्रश्‍न – मानव शरीर में सबसे छोटी ग्रंथि है? उत्‍तर – पिट्यूटरी
प्रश्‍न – एन्‍जाइम मूलत: क्‍या है? उत्‍तर – प्रो‍टीन
प्रश्‍न – पित्‍त का निर्माण शरीर के किस भाग में होता है? उत्‍तर – यकृत (Liver) में
प्रश्‍न – कृष्‍ण छिद्र (Black hole)सिद्धान्‍त को प्रतिपादित किया था? उत्‍तर – एस. चन्‍द्रशेखर ने
प्रश्‍न – साइनोकोवालमिन क्‍या है? उत्‍तर – विटामिन B12
प्रश्‍न – टेट्रा डुथाइल लैड (TEL) पेट्रोल में क्‍यों मिलाया जाता हे? उत्‍तर – एन्‍टीनॉकिंग रेटिंग (अपस्‍फोटन की दर) को बढ़ाने के लिए
प्रश्‍न – हीरे की चमक होती है? उत्‍तर – पूर्ण आन्‍तरिक परावर्तन के कारण
प्रश्‍न – आपेक्षिक आर्द्रता (Relative humidity) नापी जाती है? उत्‍तर – हाइग्रोमीटर(Hygrometer) से
प्रश्‍न – रेटिना पर बनने वाला प्रतिबिम्‍ब होता है? उत्‍तर – वास्‍तविक, उल्‍टा तथा वस्‍तु से छोटा
प्रश्‍न – पोलिया का टीका सर्वप्रथम किसने तैयार किया था? उत्‍तर – जोन्‍स साल्‍क ने
प्रश्‍न – गोबर गैस का मुख्‍य संघटक क्‍या है? उत्‍तर – मीथेन
प्रश्‍न – हरे पौधों में प्रकाश संश्‍लेषण की इकाई क्‍या कहलाती है? उत्‍तर – क्‍वाण्‍टोसोम
प्रश्‍न – न्‍यूटन/किग्रा किस भौतिक राशि का मात्रक है? उत्‍तर – त्‍वरण (Acceleration) का
प्रश्‍न – ‘गॉयटर’ नामक रोग शरीर में किसकी कमी के कारण होता है? उत्‍तर – आयो‍डीन की कमी के कारण
प्रश्‍न – वाइरोलॉजी (Virology) में किसका अध्‍ययन किया जाता है? उत्‍तर – विषाणुओं (Virus) का
प्रश्‍न – विटामिन C का रासायनिक नाम क्‍या है? उत्‍तर – एस्‍कार्बिक एसिड (Ascorbic Acid)
प्रश्‍न – सामान्‍य व्‍यक्ति का अनुशीलक (Diastolic) रक्‍त दाब कितना होता है? उत्‍तर – 80 मिमि पारे के
प्रश्‍न – श्‍वेत प्रकाश के प्रिज्‍म द्वारा बने वर्णक्रम में किस रंग का विचलन सबसे अधिक होता है? उत्‍तर – बैंगनी रंग का
प्रश्‍न – कैलोमल क्‍या होता है? उत्‍तर – मरक्‍यूरस क्‍लोराइड (Hg2Cl2)
प्रश्‍न – सिन्‍दूर का रासायनिक नाम है? उत्‍तर – मरक्‍युरिक सल्‍फाइड (HgS)
प्रश्‍न – ‘झूठा सोना’ (Fool’s Gold) कहलाता है? उत्‍तर – प्रकृति में पाया जाने वाला आयरन सल्‍फाइड अथवा आयरन पाइराइट्स
प्रश्‍न – पेन्क्रियाटिक जूस मेंपाया जाने वाला एन्‍जाइम है? उत्‍तर – ट्रिप्सिन एन्‍जाइम
प्रश्‍न – आँतों (Intestine) में प्रोटीनों को अमीनो अम्‍ल में अपघटित करने में उत्‍प्रेरक होता है? उत्‍तर – पेप्सिन एन्‍जाइम
प्रश्‍न – ‘एस्‍ट्रो-डी’ (Astro-D) क्‍या है? उत्‍तर – ब्रह्माण्‍ड के विकास का अध्‍ययन करने वाला जापानी एक्‍स रे उपग्रह
प्रश्‍न – ध्रुवतारा (Pole star) आकाश में एक ही स्‍थान पर दिखाई देता है जबकि अन्‍य तारे नहीं इसका कारण है? उत्‍तर – ध्रुवतारा का पृथ्‍वी के घूर्णन अक्ष की दिशा में स्थित होना।
प्रश्‍न – मनुष्‍य हृदय में सामान्‍यत: प्रति मिनट कितनी बार स्‍पंदन करता है? उत्‍तर – 72 बार
प्रश्‍न – स्फिग्‍नोमैनोमीटर (Sphygnomanometer) नामक यंत्र से क्‍या नापते हैं? उत्‍तर – रक्‍त दाब(Blood Pressure)
प्रश्‍न – सन् 1902 में कार्ल लैन्‍डस्‍टीनर (Karl Landsteiner) ने किसकी खोज की थी? उत्‍तर – रक्‍त समूह की (Blood Group)
प्रश्‍न – समुद्र का जल नीला क्‍यों दिखाई देता है? उत्‍तर – जल के कणों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण
प्रश्‍न – प्रोटीन किस गैस का प्रमुख यौगिक है? उत्‍तर – नाइट्रोजन
प्रश्‍न – इथोलॉजी (Ethology) में किसका अध्‍ययन किया जाता है? उत्‍तर – जानवरों के व्‍यवहार का अध्‍ययन उनके सामान्‍य वातावरण में
प्रश्‍न – नोबेल पुरस्‍कार से सम्‍मानित होने वाली विश्‍व की प्रथम महिला विज्ञान के क्षेत्र की थी, वह कौन थी? उत्‍तर – मैडम क्‍यूरी (1930) भौतिक विज्ञान में
प्रश्‍न – पानी में सूई तो डूब जाती है, जबकि भारी-भारी समुद्री जहाज तैरते रहते हैं क्‍या कारण है? उत्‍तर – जहाज के डूबे हुए भाग से हटाए गए पानी का भार सारे जहाज के बराबर होती है, इसलिए वह प्‍लवन करता है, सूई के द्वारा हटाए गए पानी का भार सूई के भार से कम होता है जिससे सूई पानी में डूब जाती है।
प्रश्‍न – भारत का स्‍वदेश निर्मित (Indigenously built) दूसरी पीढ़ी का पहला उपग्रह कौनसा है?उत्‍तर – इनसेट-2A
प्रश्‍न – सूर्य के प्रकाश की सहायता से शरीर में किस विटामिन का निर्माण होता है? उत्‍तर – विटामिन Dका
प्रश्‍न – हैली पुच्‍छल तारा (Halley’s Comet) प्रति कितने वर्ष बाद दिखाई पड़ता है? उत्‍तर – 76 वर्ष
प्रश्‍न – किन तरंगों की सहायता से चमगादडें (Bats) रात में सुरक्षित उड़ती हैं? उत्‍तर – पराश्रव्‍यUltrasonic) तरंगों की सहायता से
प्रश्‍न – HIV विषाणु से कौन सा रोग होता है ? उत्‍तर –AIDS एड्स
प्रश्‍न – रक्‍त का थक्‍का जमाने में कौनसा विटामिन सहायक होता है? उत्‍तर – विटामिन K
प्रश्‍न – एम्पियर सेकेण्‍ड मात्रक है? उत्‍तर – आवेश की मात्रा
प्रश्‍न – लाफिंग गेस है? उत्‍तर – नाइट्रस ऑक्‍साइड
प्रश्‍न – बाह्य चुम्‍बकीय प्रभावों से वैज्ञानिक यंत्रों की रक्षा की जाती है? उत्‍तर – लौह कवर में रखकर
प्रश्‍न – परमाणु बिजली घरों में किस प्रकार की न्‍यूक्‍लीयर अभिक्रिया होती है? उत्‍तर – न्‍यूक्‍लीयर संलयन (Nuclear Fusion)
प्रश्‍न – gकिरणों पर किस प्रकार का आवेश हेाता है? उत्‍तर – किसी प्रकार का नहीं
प्रश्‍न – रेडियो कार्बन तिथि निर्धारण विधि का उपयोग होता है? उत्‍तर – जीवाश्‍मों की आयु का पता लगाने में
प्रश्‍न – शरीर का सारा रक्‍त किसके माध्‍यम से शुद्ध होता है? उत्‍तर – वृक्‍क (किडनी) के माध्‍यम से
प्रश्‍न – हाइड्रोफाइट किन्‍हें कहते हैं? उत्‍तर – जलीय पौधों को
प्रश्‍न – दो समान्‍तर दर्पणों के बीच रखी वस्‍तु के कितने प्रतिबिम्‍ब बनते हैं? उत्‍तर – अनन्‍त (Infinite)
प्रश्‍न – दो समान्‍तर दर्पणों के बीच रखी वस्‍तु का सबसे अधिक चमकीला प्रतिबिम्‍ब कौन सा होता है?उत्‍तर – दूसरा प्रतिबिम्‍ब
प्रश्‍न – तेल का जल के तल पर फैल जाने का क्‍या कारण है? उत्‍तर – तेल का पृष्‍ठ तनाव जल की अपेक्षा कम होने के कारण
प्रश्‍न – पेन्सिल का लैड होता है? उत्‍तर – ग्रेफाइट
प्रश्‍न – सड़क पर चलने की अपेक्षा बर्फ पर चलना कठिन क्‍यों होता है? उत्‍तर – बर्फ में सड़क की अपेक्षा घर्षण कम होता है।
प्रश्‍न – लोलक घडि़याँ गर्मियों में सुस्‍त क्‍यों हो जाती है? उत्‍तर – लोलक की लम्‍बाई बढ़ जाने से उनका आवर्तकाल बढ़ जाता है जिससे घड़ी सुस्‍त हो जाती है।
प्रश्‍न – ऊँचे स्‍थानों पर पानी 1000C से कम ताप पर क्‍यों उबलता है? उत्‍तर – क्‍योंकि वहाँ वायुमण्‍डलीय दाब कम होता है।
प्रश्‍न – पीतल मिश्र धातु हैं? उत्‍तर – जस्‍ता और तांबा की
प्रश्‍न – ‘गैसों के दाब’ ज्ञात करने वाला यंत्र क्‍या कहलाता है? उत्‍तर – मैनोमीटर
प्रश्‍न – भाभा एटॉमिक रिसर्च सेन्‍टर ट्रॉम्‍बे में स्थित पाँचवे न्‍यूक्लियर रिएक्‍टर का क्‍या नाम है? उत्‍तर – ध्रुव
प्रश्‍न – अग्‍नाशयी रस में पाया जाने वाला एन्‍जाइम ‘ट्रिप्सिन’, प्रोटीन या पेप्‍टोन को किसमें बदलता है?उत्‍तर – छोटे पेप्‍टाइड्स में
प्रश्‍न – मनुष्‍य में ‘दाद'(Ring worm) रोग के रोगकारक कवक का नाम क्‍या है? उत्‍तर – माइक्रोस्‍पोरम(Microsporum)
प्रश्‍न – ‘स्‍कर्वी’ नामक रोग किस विटामिन के अभाव में होता है? उत्‍तर – विटामिन सी
प्रश्‍न – सबसे भारी धातु कौनसीहै? उत्‍तर – ओसमियम
प्रश्‍न – विद्युत का सबसे अच्‍छा चालक क्‍या है? उत्‍तर – चाँदी
प्रश्‍न – पोटेशियम का अयस्‍क ‘कार्नेलाइट'(Carnallite) का सूत्र क्‍या है? उत्‍तर–KCl.MgCl2.6H2O
प्रश्‍न – यूरेनियम के नाभिकीय विघटन में अन्‍तत: क्‍या प्राप्‍त होता है? उत्‍तर – सीसा
प्रश्‍न – ध्‍वनि को मापने की इकाई क्‍या है? उत्‍तर – डेसीबल
प्रश्‍न – ‘स्‍टेनलेस स्‍टील’ किन धातुओं को मिश्रित करके बनाया जाता है? उत्‍तर – क्रोमियम, लोहा और निकेल
प्रश्‍न – वनस्‍पति विज्ञान की उस शाखा का क्‍या नाम है, जिसमें शैवाल (Algae) का अध्‍ययन किया जाता है? उत्‍तर – फाइकोलॉजी (Phycoligy)
प्रश्‍न – दूध से दही बनाने वाले जीवाणु का नाम  है? उत्‍तर – बैक्‍टेरियम लैक्टिसि एसीडाइ(Bacterium dactici acidi)
प्रश्‍न – मधुमेह के रोगी के पेशाब में किसकी अधिकता हो जाती है? उत्‍तर – शर्करा (Sugar) की
प्रश्‍न – स्‍वचालित ब्रेक (Hydraulic brakes) किस नियम के आधार पर बने है? उत्‍तर – पारकेल के नियम के आधार पर
प्रश्‍न – डी एन ए संश्‍लेषण का प्रतिपादन किसने किया था? उत्‍तर – कॉर्नबर्ग ने
प्रश्‍न – फोटोग्राफी में प्रयुक्‍त होने वाले ‘हाइपो’ का रासायनिक नाम क्‍या है? उत्‍तर – सोडियम थायो सल्‍फेट
प्रश्‍न – भोपाल गैस दुर्घटना में मिक (MIC) का रिसाव हुआ था इस गैस का पूरा नाम क्‍या है? उत्‍तर – मिथाइल आइसो सायनेट CH3NCO
प्रश्‍न – गेहूँ का वैज्ञानिक नाम क्‍या है? उत्‍तर – ट्रिटिकम ऐस्टिक्‍म (Triticum aestivum) तथा ट्रिटिकम वल्‍गेयर (Triticum Vulgare)
प्रश्‍न – ओक्‍जेनोमीटर (Auxanometer) से क्‍या नापा जाता है? उत्‍तर – पौधों की रेखीय वृद्धि दर(Linear growth rate of plants)
प्रश्‍न – कमरे में रखे रेफ्रीजरेटर का दरवाजा खोलने से कमरे के ताप पर क्‍या प्रभाव पड़ता है? उत्‍तर – ताप बढ़ जाता है।  Important Science Questions in Hindi
प्रश्‍न – ताप बढ़ानेपर अर्द्धचालकों (Semiconductors) की चालकता? उत्‍तर – बढ़ जाती है।
प्रश्‍न – मनुष्‍य की श्रव्‍यता की सीमा है? उत्‍तर – 20 हर्ट्स से 20000 हर्ट्स तक
प्रश्‍न – हरा कशीश का रासायनिक सूत्र है? उत्‍तर–FeSO4.7H2O
प्रश्‍न – कैलोमेल (Calomel) का रासायनिक नाम है? उत्‍तर – मरक्‍यूरस क्‍लोराइड
प्रश्‍न – हीरे की चमक का कारण है? उत्‍तर – प्रकाश का पूर्ण आन्‍तरिक परावर्तन
प्रश्‍न – विद्युत तीव्रता का मात्रक है? उत्‍तर – न्‍यूटन/कूलॉम
प्रश्‍न – विटामिन E का रासायनिक नाम है? उत्‍तर – टेकोफेरॉन
प्रश्‍न – भारी जल (Heavy Water) क्‍या है? उत्‍तर – ड्यूटीरियम ऑक्‍साइड
प्रश्‍न – ट्रैकोना रोग किस अंग से सम्‍बन्धित रोग है? उत्‍तर – आँख से
प्रश्‍न – हेपेटाइटिस-बी वायरस किस प्रमुख रोग के लिए जिम्‍मेदार है? उत्‍तर – पीलिया
प्रश्‍न – एपीलेप्‍सी रोग का सम्‍बन्‍ध है? उत्‍तर – नाड़ी संस्‍थान से
प्रश्‍न – AB रक्‍त समूह वाला व्‍यक्ति ‍किस रक्‍त समूह के व्‍यक्ति से रक्‍त ग्रहण कर सकता है? उत्‍तर–A, B, ABतथा O रक्‍त समूह के व्‍यक्ति से
प्रश्‍न – चेचक के टीके की खोज किसने की? उत्‍तर – एडवर्ड जेनर ने
प्रश्‍न – दूध एक आदर्श आहार है, लेकिन इसमें किन तत्‍वों की कमी होती है? उत्‍तर – आयरन एवं कॉपर Important Science Questions in Hindi
प्रश्‍न – शैलिंग प्रतिशत (Shelling percentage) मूँगफली की गुणवत्ता ज्ञात करने का एक आधार (Parameter) है। शैलिंग प्रतिशत से क्‍या ज्ञात किया जाता है? उत्‍तर – मूँगफली में दानों का प्रतिशत
प्रश्‍न – विश्‍व का सबसे पुराना खाद्यान्‍न कौनसा है? उत्‍तर – (Hot Vulgare)
प्रश्‍न – किस बकरी को ‘विश्‍व की दूध की रानी'(Milk Queen of world) के नाम से भी जाना जाता है? उत्‍तर – सानेन
प्रश्‍न – हस्‍त चालित चारा काटने की मशीन (Chaff cutter) में फ्लाई व्‍हील किस प्रकार के लोहे का बना होता है? उत्‍तर – ढलवाँ लोहे का
प्रश्‍न – प्रति सौ ग्राम भैंस के दूध से कितनी ऊर्जा प्राप्‍त होती है? उत्‍तर – लगभग 90 कैलोरी
प्रश्‍न – मनुष्‍य के रक्‍त में लाल रंग का कारण है? उत्‍तर – हीमोग्‍लोबिन (Haemoglobin)
प्रश्‍न – मनुष्‍यमें गेस्ट्रिक रस (Gastric Juice) किस अंग से स्रावित होता है? उत्‍तर– आमाशय से
प्रश्‍न – द ओरिजिन ऑफ स्‍पीशीज (The Origin of Species) पुस्‍तक किसने लिखी है? उत्‍तर – डॉर्विन ने
प्रश्‍न – प्रोसेसर की गति किस मात्रक में मापी जाती है? उत्‍तर – मेगाहर्ट्ज (Mega-Hertz) या गीगाहर्ट्ज (giga-Hertz) में
प्रश्‍न – डीटीपी का टीका बच्‍चों को किन रोगों से रक्षा के लिए लगाया जाता है? उत्‍तर – टिटेनस,डिप्‍थीरिया तथा हूपिंग कफ (Whooping Cough)
प्रश्‍न – वयस्‍क मनुष्‍य में हृदय चक्र (Cardiac Cycle) का समय कितना होता है? उत्‍तर–0.8सेकेण्‍डImportant Science Questions in Hindi
प्रश्‍न – मछलियों में श्‍वसन हेतु अंग है? उत्‍तर – क्‍लोम (Gills)
प्रश्‍न – वाटसन व क्रिक को जीवविज्ञान की किस खोज के लिए नोबेल पुरस्‍कार प्रदान यिका गया?उत्‍तर–DNA के डबल हैलीकल मॉडल की खोज के लिए
प्रश्‍न – बैक्‍टीरिया की खोज किसने की थी? उत्‍तर – एन्‍टोनी-वॉन-लुइवेन हॉक
प्रश्‍न – विज्ञान की शाखा एग्रोस्‍टोलॉजी (Agrostology) में किसका अध्‍ययन किया जाता है? उत्‍तर – घास (Grass) का
प्रश्‍न – मानव शरीर में विटामिन K का निर्माण किस अंग में होता है? उत्‍तर – कोलन में बैक्‍टीरिया द्वारा
प्रश्‍न – पीडियाट्रिक्‍स (Paediotries) का सम्‍बन्‍ध किससे है? उत्‍तर – बच्‍चों के रोगों से
प्रश्‍न – हाइपोग्‍लाइसेमिया (Hypoglycemia) नामक रोग रक्‍त में किसकी कमी से होता है? उत्‍तर – ग्‍लूकोस की कमी से
प्रश्‍न – हाइग्रोमीटर (Hygrometer) से क्‍या नापा जाता है? उत्‍तर – आपेक्षिक आर्द्रता (Relative Humidity)
प्रश्‍न – हाइड्रोमीटर (Hydrometer) यंत्रसे क्‍या नापा जाता है? उत्‍तर – आपेक्षिक घनत्‍व (Relative Density)
प्रश्‍न – रेड लैड का रासायनिक सूत्र है? उत्‍तर–Pb3O4
प्रश्‍न – रासायनिक दृष्टि से चीनी क्‍या है? उत्‍तर – कार्बोहाइड्रेट (सुक्रोज)
प्रश्‍न – किस खनिज को ‘बेवकूफों का सोना'(Food’s gold) कहते हैं? उत्‍तर – पायराइट को
प्रश्‍न – एण्‍टीपायरेटिक दवा ली जाती है? उत्‍तर – बुखार कम करने के लिए
प्रश्‍न – फोटोग्राफी में प्रयुक्‍त ‘हाइपो’ रासायनिक रूप से क्‍या है? उत्‍तर – सोडियम थायोसल्‍फेट
प्रश्‍न – मूत्र का पीला रंग किसके कारण होता है? उत्‍तर – यूरोक्रोम (Urochrome) के कारण
प्रश्‍न – हाइपोकोण्ड्रिया (Hypochondria) बीमारी क्‍या होती है? उत्‍तर – अपने स्‍वास्‍थ्‍य के विषय  में असामान्‍य मानसिक चिन्‍ता की बीमारी
प्रश्‍न –’नेत्रदान’ में रोगी में आँख के किस भाग का प्रतिरोपण (Transplantation) किया जाता है? उत्‍तर – कॉर्निया का
प्रश्‍न – पैलाग्रा (Pellagra) रोग किसकी कमी के कारण होता है? उत्‍तर – नियासिन की कमी के कारण
प्रश्‍न – चन्‍द्रमा के तल से आकाश का काला दिखना किस कारण होता है? उत्‍तर – प्रकाश का प्रकीर्णन
प्रश्‍न – खसरा (Measles) होने का कारक क्‍या है? उत्‍तर–वायरस (Virus)
प्रश्‍न – सामान्‍य स्थितियों में हृदय से आने वाले रक्‍त का कितना प्रतिशत भाग गुर्दे को मिलता है? उत्‍तर–24%
प्रश्‍न – नायलॉन प्‍लास्टिक्‍स के आविष्‍कारक कौन थे? उत्‍तर – कारोथर्स (1937)
प्रश्‍न – रूटाइल (TiO2) किस धातु का अयस्‍क है? उत्‍तर – टिटेनियम
प्रश्‍न – लेड ऑक्‍साइड (PbO) का व्‍यापारिक नाम क्‍या है? उत्‍तर – लिथार्ज
प्रश्‍न – हिन्‍दुस्‍तान ऑर्गेनिक केमीकल्‍स लिमिटेड कहाँ स्थित है? उत्‍तर – कोलाबा (महाराष्‍ट्र)
प्रश्‍न – स्‍तनधारी प्राणियों में रक्‍त का सबसे अधिकतापमान किस पशु का होता है? उत्‍तर–व्‍हेल में
प्रश्‍न – रेडियो एक्टिवता (Radio Activity) की इकाई क्‍या है? उत्‍तर – बेक्‍यूरेल (Becquerel)
प्रश्‍न – ध्‍वनि से संबंधित विज्ञान क्‍या कहलाता है? उत्‍तर – एकोस्टिक (Acoustic)
प्रश्‍न – इलेक्‍ट्रॉन की विराम ऊर्जा होती है? उत्‍तर–0.51 Mev
प्रश्‍न – प्र‍दीप्ति घनत्‍व का मात्रक क्‍या होता है? उत्‍तर – लक्‍स (LUX)
प्रश्‍न – बादल का हवा में तैरने का कारण क्‍या है? उत्‍तर – वायु की श्‍यानता (Viscosity) एवं अपने कम घनत्‍व के कारण
प्रश्‍न – जीवन के उद्भव का प्रथम वैज्ञानिक विवरण किस वैज्ञानिक ने प्रस्‍तुत किया? उत्‍तर–ए. आई. ओपेरिन ने
प्रश्‍न – इन्‍सुलिन की खोज किसने की थी? उत्‍तर – एफ. जी. बेण्टिंग ने
प्रश्‍न – विटामिन C का रासायनिक नाम है? उत्‍तर – एस्‍कार्बिक अम्‍ल
प्रश्‍न – सुपर फॉस्‍फेट उर्वरकों का सूत्र है? उत्‍तर – Ca(H2PO4)2
प्रश्‍न – पानी का अधिकतम घनत्‍व किस ताप पर होता है? उत्‍तर–40Cपर
प्रश्‍न – एपीलेप्‍सी रोग का सम्‍बन्‍ध है? उत्‍तर – नाड़ी संस्‍थान से
प्रश्‍न – ड्रॉप्‍सी (Dropsy) की बीमारी के लिए कौनसा मिलावटी तेल उत्‍तरदायी पाया गया? उत्‍तर –आर्जीमोन
प्रश्‍न – हड्डियों में फॉस्‍फोरस किस रूप में पाया जाता है? उत्‍तर – कैल्सियम फॉस्‍फेट के रूप में
प्रश्‍न – किस उपकरण द्वारा ध्‍वनि तरंगों का प्रयोग करके समुद्र की गहराई नापी जाती है? उत्‍तर – सोनार
प्रश्‍न – मूत्र में एल्‍युमिन (Albumin)आने से किस अंग के गड़बड़ होने की सम्‍भावना होती है? उत्‍तर –वृक्‍क(Kedney)
प्रश्‍न – मैनोमीटर से क्‍या नापते हैं? उत्‍तर – गैसों का दाब
प्रश्‍न – पाइरोडॉक्सिन किसका रासायनिक नाम है? उत्‍तर – विटामिन B6 का
प्रश्‍न – मैनोमीटर से क्‍या नापते हैं? उत्‍तर – गैस का दाब
प्रश्‍न – चार अर्द्धआयुओं के पश्‍चात किसी रेडियो एक्टिव पदार्थ का कितना भाग अविघटित रह जाएगा?उत्‍तर – 1/16 भाग (या 6.25%भाग)
प्रश्‍न – शुष्‍कछिपाक (Xeroph Thalmia) का कारण है? उत्‍तर – विटामिन A की कमी
प्रश्‍न – सोडियम के किस यौगिक को ‘वाटर ग्‍लास‘ कहा जाता है? उत्‍तर – सोडियम सिलिकेट को General Science MCQ Questions with Answers
प्रश्‍न – चुम्‍बकीय दृष्टि से ऑक्‍सीजन क्‍या है? उत्‍तर–अनुचुम्‍बकीय (Paramagnetic)
प्रश्‍न – एक रेडियोएक्टिव तत्‍व का परमाणु क्रमांक (Z) है, इससे एक ß- कण उत्‍सर्जित होने पर यह कितना हो जाएगा? उत्‍तर–(Z+1)
प्रश्‍न – रदरफोर्ड ने भौतिकी में किस मूल कण की खोज की थी? उत्‍तर – प्रोटॉन की
प्रश्‍न – रक्‍त का थक्‍का किस रोग में नहीं जमता? उत्‍तर – हीमोफीलिया में
प्रश्‍न – डीएनए (DNA) उपस्थित रहता है? उत्‍तर – केन्‍द्रक में
प्रश्‍न – आनुवंशिकता की भूमिका किसने निर्दिष्‍ट की थी? उत्‍तर – ग्रेगर जॉन मेण्‍डल ने
प्रश्‍न – एक परमाणु द्रव्‍यमान इकाई (1 AMU)को पूर्ण रूप से ऊर्जा में परिवर्तित करने पर कितनी ऊर्जा मुक्‍त होती है? उत्‍तर–931 MeV
प्रश्‍न – पानी में हवा का बुलबुला किस प्रकार के लैंस की भाँति कार्य करता है? उत्‍तर – अवतल लैंस की तरह
प्रश्‍न – ‘इलेक्‍ट्रॉन-वोल्‍ट’ किस भौतिक राशि का मात्रक है? उत्‍तर – ऊर्जा का
प्रश्‍न – साबुन के बुलबुले में प्रकाश की घटना के कारण रंग दिखाई देते हैं? उत्‍तर – व्‍यतिकरण के कारण  General Science MCQ Questions with Answers
प्रश्‍न – गतिमान आवेश उत्‍पन्‍न करता है? उत्‍तर – चुम्‍बकीय क्षेत्र तथा विद्युत क्षेत्र दोनों
प्रश्‍न – ‘डायनामाइट’ का आविष्‍कार किसने किया था? उत्‍तर – अल्‍फ्रेड नोबेल ने
प्रश्‍न – किसी तारे का रंग किसका परिचायक होता है? उत्‍तर – तारे के ताप का
प्रश्‍न – भारी जल (Heavy Water) होता है? उत्‍तर – ड्यूटेरियम का ऑक्‍साइड (D2O)
प्रश्‍न – ‘अर्जेन्‍टाइट’ किस धातु का अयस्‍क (Ore) है? उत्‍तर – चाँदी का
प्रश्‍न – दूध का pH का मान होता है? उत्‍तर–6.6
प्रश्‍न – मनुष्‍य के शरीर में पित्‍त कहाँ बनता है तथा कहाँ इकट्ठा होता है? उत्‍तर – पत्ति यकृत में बनता है तथा गाल ब्‍लैडर में एकत्रित होता है।
प्रश्‍न – मानव शरीर की सबसे छोटी माँसपेशी का क्‍या नाम है? उत्‍तर – स्‍टेपिडयस (Stapedius)
प्रश्‍न – हिस्‍टोलॉजी (Histology) में किसका अध्‍ययन किया जाता है? उत्‍तर – ऊतकों (Tissues) का
प्रश्‍न – न्‍यूटन/किग्रा किस भौतिक राशि का मात्रक है? उत्‍तर – त्‍वरण (Acceleration) का
प्रश्‍न – आयोडीन टिंक्‍चर क्‍या है? उत्‍तर – आयोडीन का एल्‍कोहॉली विलयन
प्रश्‍न – रेडियो तरंगें वायुमण्‍डल के किस मण्‍डल से परावर्तित होती है? उत्‍तर – आयनमण्‍डल (Ionosphere) से  General Science MCQ Questions with Answers
प्रश्‍न – टमाटर का रंग पकने पर लाल क्‍यों हो जाता है? उत्‍तर – क्रोमोप्‍लास्‍ट के कारण
प्रश्‍न – पारिस्थितिकी (Ecology) सम्‍बन्धित है? उत्‍तर – जीव व पर्यावरण के सह-सम्‍बन्‍धों से
प्रश्‍न – भारत में अन्‍तरिक्ष आयोग की स्‍थापना कब हुई? उत्‍तर – जून 1972
प्रश्‍न – सर्वप्रथम कृत्रिम गर्भाधान भारत में कब प्रारम्‍भ किया गया? उत्‍तर – सन् 1942 में
प्रश्‍न – आई राइट क्‍या है? उत्‍तर – विकलांगों का कम्‍प्‍यूटर
प्रश्‍न – पृथ्‍वी से पलायन वेग का मान कितना होता है? उत्‍तर–11.2 किमी/सेकण्‍ड
प्रश्‍न – इन्‍द्रधनुष किसका उदाहरण है? उत्‍तर – अपवर्तन, विक्षेपण, पूर्ण आन्‍तरिक परिवर्तन
प्रश्‍न – पुष्‍प विभिन्‍न रंगों के होते हैं, क्‍योंकि उनमें पाया जाता है? उत्‍तर – एन्‍थोसाइनिन
प्रश्‍न – सेब का खाने योग्‍य भाग है? उत्‍तर – रसदार थैलामस (Thalamas)
प्रश्‍न – मानव शरीर में एक मिनट में कितनी बार हार्ट बीट्स होती है? उत्‍तर-72 बार
प्रश्‍न – स्‍वयं बिना बदले रासायनिक अभिक्रिया की दर में परिवर्तन लाने वाले पदार्थ को क्‍या कहते हैं? उत्‍तर – उत्‍प्रेरक (Catalyst)
प्रश्‍न – फारेनहाइट पैमाने के अनुसार पानी का सामान्‍य क्‍वथनांक कितना है? उत्‍तर–2120F
प्रश्‍न – समान परमाणु संख्‍या लेकिन अलग द्रव्‍यमान संख्‍या वाले अणु कहलाते हैं? उत्‍तर – समस्‍थानिक (Isotope)
प्रश्‍न – इन्‍सुलिन की खोज किसने की थी? उत्‍तर – एफ. जी. बैंटिंग ने
प्रश्‍न – बोकारो स्‍टील प्‍लाण्‍ट किस देश के सहयोग से बना? उत्‍तर – पूर्व सोवियत संघ के सहयोग से
प्रश्‍न – राष्‍ट्रीय विज्ञान दिवस कब मनाया जाता है? उत्‍तर – 28 फरवरी को
प्रश्‍न – राइबोफ्लाविन है? उत्‍तर – विटामिन-B2
प्रश्‍न – मधुमक्खियों के काटने पर किसके कारण दर्द होता है? उत्‍तर – फार्मिक अम्‍ल के कारण
प्रश्‍न – संवेग कैसी राशि है सदिश अथवा अदिश? उत्‍तर – सदिश
प्रश्‍न – हेमेटाइट (Haematite) किसका अयस्‍क है? उत्‍तर – आयरन का
प्रश्‍न – सूर्य में ऊर्जा का निर्माण किस प्रक्रिया से होता है? उत्‍तर – नाभिकीय संलयन (Neuclear fusion) द्वारा
प्रश्‍न – भू-पर्पटी में सर्वाधिक पाया जाने वाला तत्‍व क्‍या है? उत्‍तर – ऑक्‍सीजन
प्रश्‍न – ध्‍वनि का वेग अनुमानत: कितना होता है? उत्‍तर–330 मी/से
प्रश्‍न – पानी का घनत्‍व किस ताप पर अधिकतम होता है? उत्‍तर–40C पर
प्रश्‍न – सर सी. वी. रमन को भौतिकी का नोबेल पुरस्‍कार कब मिला था? उत्‍तर – 1930 में
प्रश्‍न – कम्‍प्‍यूटरों के इन्‍टीग्रेटेड सर्किटों के लिए चिप्‍स साधारणतया किसके बनाए जाते है? उत्‍तर – सिलिकान के  General Science MCQ Questions with Answers
प्रश्‍न – मनुष्‍य शरीर की सबसे लम्‍बी हड्डी है? उत्‍तर – फीमर (Femur)
प्रश्‍न – ब्‍लू विट्रॉल के नाम से किसे जाना जाता है? उत्‍तर – कॉपर सल्‍फेट को
प्रश्‍न – पौधे के किस भाग से हल्‍दी प्राप्‍त होती है? उत्‍तर – तना से
प्रश्‍न – होलोग्राफी किसकी तकनीक है? उत्‍तर – वस्‍तु के त्रिविमीय प्रतिरूप को अंकित करने एवं पुनरावृत्ति करने की
प्रश्‍न – इन्‍सुलिन की खोज किसने की थी? उत्‍तर– एफ. जी. वेटिंग ने
प्रश्‍न – हड्डियों में फॉस्‍फेट किस रूप में पाया जाता है? उत्‍तर – कैल्सियम फॉस्‍फेट के रूप में
प्रश्‍न – मैनोमीटर से क्‍या नापा जाता है? उत्‍तर – गैस का दाब
प्रश्‍न – टेरामाइसिन नामक एण्‍टीबायोटिक किस जीवाणु से प्राप्‍त होता है? उत्‍तर – स्‍ट्रैप्‍टोकोकस रिमोसस से
प्रश्‍न – ध्‍वनि की चाल पर दाब का क्‍या प्रभावपड़ता है? उत्‍तर – कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
प्रश्‍न – कॉस्मिक किरणों की खोज किसने की थी? उत्‍तर – आर. ए. मिलीकन ने
प्रश्‍न – चालक की वैद्युत प्रतिरोधकता का मात्रक क्‍या है? उत्‍तर – ओम
प्रश्‍न – पृथ्‍वी का औसत घनत्‍व कितना है? उत्‍तर–5.5 ग्राम/सेमी3
प्रश्‍न – जर्मन सिल्‍वर में कौन-कौन से संघटक होते हैं? उत्‍तर – ताँबा, निकिल तथा जिंक
प्रश्‍न – चुम्‍बक झुकाव (Dip) की समान स्थिति दर्शाने वाली रेखा को क्‍या कहते हैं? उत्‍तर – आइसोक्‍लीनिक (Isoclinic) रेखा
प्रश्‍न – पक्षियों की पूंछ उनके किस काम आती है? उत्‍तर – हवा में उड़ते समय सन्‍तुलन बनाए रखने के लिए
प्रश्‍न –कोशिकाका ऊर्जा घर किसे कहते हैं? उत्‍तर – माइटोकॉण्ड्रिया को
प्रश्‍न – घरों में बिजली सप्‍लाई के लिए तीन तरह के तारों का प्रयोग करते हैं, लाइव, न्‍यूट्रल और अर्थ। इसी क्रम में तारों का रंग होता है? उत्‍तर – लाल, काला और हरा
प्रश्‍न – ध्रुवतारा अपने स्‍थान पर स्थिर प्र‍तीत क्‍यों होताहै? उत्‍तर – पृथ्‍वी के घूर्णन अक्ष की सीध में होने के कारण
प्रश्‍न – तारा बनने की प्रक्रिया का प्रारम्‍भ किन गैसों से होता है? उत्‍तर – हाइड्रोजन व हीलियम से
प्रश्‍न – कृत्रिम उपग्रह में ऊर्जा का स्रोत क्‍या होता है? उत्‍तर – सौर बैटरी
प्रश्‍न – आकाश का सबसे चमकीला सितारा है? उत्‍तर – साइरस
प्रश्‍न – ऑक्‍सीकरण की क्रिया में इलेक्‍ट्रानों में क्‍या होता है लाभ या हानि? उत्‍तर – हानि
प्रश्‍न – नोबल गैसें किस अन्‍य परमाणु से क्रिया क्‍यों नहीं करती? उत्‍तर – क्‍योंकि इनकी बाहरी कक्षा में आठ इलेक्‍ट्रॉन होते हैं।
प्रश्‍न – पानी में साबुन घोलने से पृष्‍ठ तनाव पर क्‍या प्रभाव पड़ता है? उत्‍तर–पृष्‍ठ तनाव कम हो जाता है।  General Science MCQ Questions with Answers
प्रश्‍न – पटाखों में लाल रंग किस तत्‍व की उपस्थित के कारण होता है? उत्‍तर – स्‍ट्रांशियम की उपस्थिति के कारण
प्रश्‍न – फलों को पकाने के लिए किस गैस का प्रयोग किया जाता है? उत्‍तर – एथिलीन (Ethylene)
प्रश्‍न – फलों का अध्‍ययन किया जाता है? उत्‍तर– पोमोलॉजी (Pomology) में
प्रश्‍न – रक्‍त कोष में रक्‍त किस रसायन के साथ मिलाकर रखा जाता है? उत्‍तर – सोडियम नाइट्रेट व डेक्‍सट्रेट के साथ

Friday, June 12, 2020

24 - देव शक्ति गायत्री मंत्र

24 - देव शक्ति गायत्री मंत्र... 



इष्टसिद्धि मे मां गायत्री का ध्यान बहुत शुभ होता है। गायत्री उपासना के लिए गायत्री मंत्र बहुत ही चमत्कारी और शक्तिशाली माना गया है। शास्त्रों के मुताबिक इस मंत्र के 24 अक्षर 24 महाशक्तियों के प्रतीक हैं। 

एक गायत्री के महामंत्र द्वारा इन देवशक्तियों का स्मरण हो जाता है। 24 देव शक्तियों के ऐसे 24 चमत्कारी गायत्री मंत्र मे से, जो देवी-देवता आपके इष्ट है, उनका विशेष देव गायत्री मंत्र बोलने से चमत्कारी फल प्राप्त होता है। शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक व भौतिक शक्तियों की प्राप्ति के लिए गायत्री उपासना सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। 

गायत्री ही वह शक्ति है जो पूरी सृष्टि की रचना, स्थिति या पालन और संहार का कारण है। वेदों में गायत्री शक्ति ही प्राण, आयु, शक्ति, तेज, कीर्ति और धन देने वाली मानी गई है। गायत्री मंत्र को महामन्त्र पुकारा जाता है, जो शरीर की कई शक्तियों को जाग्रत करता है।

इष्टसिद्धी से मनोवांछित फ़ल के लिए गायत्री मंत्र के 24 अक्षरो के हर देवता विशेष के मंत्रों का स्मरण करें।

1👉 श्रीगणेश : मुश्किल कामों में कामयाबी, रुकावटों को दूर करने, बुद्धि लाभ के लिए इस गणेश गायत्री मंत्र का स्मरण करना चाहिए :

|| ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो बुद्धिः प्रचोदयात् ||

2👉 नृसिंह : शत्रु को हराने, बहादुरी, भय व दहशत दूर करने, पुरुषार्थी बनने व किसी भी आक्रमण से बचने के लिए नृसिंह गायत्री असरदार साबित होता है |

|| ॐ नृसिंहाय विद्महे, वज्रनखाय धीमहि। तन्नो नृसिंहः प्रचोदयात् ||

3👉 विष्णु : पालन-पोषण की क्षमता व काबिलियत बढ़ाने या किसी भी तरह से सबल बनने के लिए विष्णु गायत्री का महत्व है |

|| नारायणाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ||

4👉  शिव : दायित्वों व कर्तव्यों को लेकर दृढ़ बनने, अमंगल का नाश व शुभता को बढ़ाने के लिए शिव गायत्री मंत्र बड़ा ही प्रभावी माना गया है |

|| ॐ पञ्चवक्त्राय विद्महे, महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ||

5👉  कृष्ण : सक्रियता, समर्पण, निस्वार्थ व मोह से दूर रहकर काम करने, खूबसूरती व सरल स्वभाव की चाहत कृष्ण गायत्री मंत्र पूरी करता है |

|| ॐ देवकीनन्दाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि। तन्नो कृष्णः प्रचोदयात् ||

6👉 राधा : प्रेम भाव को बढ़ाने व द्वेष या घृणा को दूर रखने के लिए राधा गायत्री मंत्र का स्मरण बढ़ा ही लाभ देता है |

|| ॐ वृषभानुजायै विद्महे, कृष्णाप्रियायै धीमहि। तन्नो राधा प्रचोदयात् ||

7👉 लक्ष्मी : रुतबा, पैसा, पद, यश व भौतिक सुख-सुविधाओं की चाहत लक्ष्मी गायत्री मंत्र शीघ्र पूरी कर देता है |

|| ॐ महालक्ष्म्यै विद्महे, विष्णुप्रियायै धीमहि। तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ||

8👉 अग्रि : ताकत बढ़ाने, प्रभावशाल व होनहार बनने के लिए अग्निदेव का स्मरण अग्नि गायत्री मंत्र से करना शुभ होता है |

|| ॐ महाज्वालाय विद्महे, अग्निदेवाय धीमहि। तन्नो अग्निः प्रचोदयात् ||

9👉 इन्द्र : संयम के जरिए बीमारियों, हिंसा के भाव रोकने व भूत-प्रेत या अनिष्ट से रक्षा में इन्द्र गायत्री मंत्र प्रभावी माना गया है |

|| ॐ सहस्त्रनेत्राय विद्महे, वज्रहस्ताय धीमहि। तन्नो इन्द्रः प्रचोदयात् ||

10👉  सरस्वती : बुद्धि व विवेक, दूरदर्शिता, चतुराई से सफलता मां सरस्वती गायत्री मंत्र से फौरन मिलती है |

|| ॐ सरस्वत्यै विद्महे, ब्रह्मपुत्र्यै धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात् ||

11👉  दुर्गा : विघ्नों के नाश, दुर्जनों व शत्रुओं को मात व अहंकार के नाश के लिए दुर्गा गायत्री मंत्र का महत्व है |

|| ॐ गिरिजायै विद्महे, शिव प्रियायै धीमहि। तन्नो दुर्गा प्रचोदयात् ||

12👉  हनुमानजी : निष्ठावान, भरोसेमंद, संयमी, शक्तिशाली, निडर व दृढ़ संकल्पित होने के लिए हनुमान गायत्री मंत्र का अचूक माना गया है |

|| ॐ अञ्जनीसुताय विद्महे, वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो मारुतिः प्रचोदयात् ||

13👉  पृथ्वी : पृथ्वी गायत्री मंत्र सहनशील बनाने वाला, इरादों को मजबूत करने वाला व क्षमाभाव बढ़ाने वाला होता है |

|| ॐ पृथ्वी देव्यै विद्महे, सहस्त्र मूर्त्यै धीमहि। तन्नो पृथ्वी प्रचोदयात् ||

14👉 सूर्य : निरोगी बनने, लंबी आयु, तरक्की व दोषों का शमन करने के लिए सूर्य गायत्री मंत्र प्रभावी माना गया है |

|| ॐ भास्कराय विद्महे, दिवाकराय धीमहि। तन्नो सूर्य्यः प्रचोदयात् ||

15👉 राम : धर्म पालन, मर्यादा, स्वभाव में विनम्रता, मैत्री भाव की चाहत राम गायत्री मंत्र से पूरी होती है |

|| ॐ दाशरथये विद्महे, सीतावल्लभाय धीमहि। तन्नो रामः प्रचोदयात् ||

16👉 सीता : सीता गायत्री मंत्र मन, वचन व कर्म से विकारों को दूर कर पवित्र करता है। साथ ही स्वभाव मे भी मिठास घोलता है |

|| ॐ जनकनन्दिन्यै विद्महे, भूमिजायै धीमहि। तन्नो सीता प्रचोदयात् ||

17👉 चन्द्रमा : काम, क्रोध, लोभ, मोह, निराशा व शोक को दूर कर शांति व सुख की चाहत चन्द्र गायत्री मंत्र से पूरी होती है |

|| ॐ क्षीरपुत्रायै विद्महे, अमृततत्वाय धीमहि।तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात् ||

18👉 यम : मृत्यु सहित हर भय से छुटकारा, वक्त को अनुकूल बनाने व आलस्य दूर करने के लिए यम गायत्री मंत्र असरदार होता है |

|| ॐ सूर्यपुत्राय विद्महे, महाकालाय धीमहि। तन्नो यमः प्रचोदयात् ||

19👉 ब्रह्मा : किसी भी रूप में सृजन शक्ति व रचनात्कमता बढ़ाने के लिए ब्रह्मा गायत्री मंत्र मंगलकारी होता है |

|| ॐ चतुर्मुखाय विद्महे, हंसारुढ़ाय धीमहि।तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात् ||

20👉 वरुण : दया, करुणा, कला, प्रसन्नता, सौंदर्य व भावुकता की कामना वरुण गायत्री मंत्र पूरी करता है |

|| ॐ जलबिम्बाय विद्महे, नीलपुरुषाय धीमहि। तन्नो वरुणः प्रचोदयात् ||

21👉 नारायण : चरित्रवान बनने, महत्वकांक्षा पूरी करने, अनूठी खूबियां पैदा करने व प्रेरणास्त्रोत बनने के लिए नारायण गायत्री मंत्र शुभ होता है |

|| ॐ नारायणाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि। तन्नो नारायणः प्रचोदयात् ||

22👉 हयग्रीव : मुसीबतों को पछाड़ने, बुरे वक्त को टालने, साहसी बनने, उत्साह बढ़ाने व मेहनती बनने के कामना ह्यग्रीव गायत्री मंत्र पूरी करता है |

|| ॐ वाणीश्वराय विद्महे, हयग्रीवाय धीमहि। तन्नो हयग्रीवः प्रचोदयात् ||

23👉 हंस : यश, कीर्ति पीने के साथ संतोष व विवेक शक्ति जगाने के लिए हंस गायत्री मंत्र असरदार होता है |

|| ॐ परमहंसाय विद्महे, महाहंसाय धीमहि। तन्नो हंसः प्रचोदयात् ||

24👉  तुलसी : सेवा भावना, सच्चाई को अपनाने, सुखद दाम्पत्य, शांति व परोपकारी बनने की चाहत तुलसी गायत्री मंत्र पूरी करता है |

|| ॐ श्री तुलस्यै विद्महे, विष्णु प्रियायै धीमहि। तन्नो वृन्दा प्रचोदयात् ||

ये देवशक्तियां जाग्रत, आत्मिक और भौतिक शक्तियों से संपन्न मानी गई है। इष्टसिद्धि के नजरिए से मात्र एक गायत्री मंत्र जपने से ही 24 देवताओं का इष्ट और उनसे जुड़ी शक्ति पाना साधक को सिद्ध बना देता है।
।।जय माताजी ।।

64 कलाओं में महारत थे श्री कृष्ण



64 कलाओं में महारत थे श्री कृष्ण 

क्या आप जानते हैं कि कौन कौन सी होती है चौसठ कलायें... 

श्री कृष्ण अपनी शिक्षा ग्रहण करने आवंतिपुर (उज्जैन) गुरु सांदीपनि के आश्रम में गए थे जहाँ वो मात्र 64 दिन रह थे। वहां पर उन्होंने ने मात्र 64 दिनों में ही अपने गुरु से 64 कलाओं की शिक्षा हासिल कर ली थी। हालांकि श्री कृष्ण भगवान के अवतार थे और यह कलाएं उन को पहले से ही आती थी। पर उनका जन्म एक साधारण मनुष्य के रूप में हुआ था इसलिए उन्होंने गुरु के पास जाकर यह पुनः सीखी।

निम्न 64 कलाओं में पारंगत थे श्रीकृष्ण

1- नृत्य – नाचना
2- वाद्य- तरह-तरह के बाजे बजाना
3- गायन विद्या – गायकी।
4- नाट्य – तरह-तरह के हाव-भाव व अभिनय
5- इंद्रजाल- जादूगरी
6- नाटक आख्यायिका आदि की रचना करना
7- सुगंधित चीजें- इत्र, तेल आदि बनाना
8- फूलों के आभूषणों से श्रृंगार करना
9- बेताल आदि को वश में रखने की विद्या
10- बच्चों के खेल
11- विजय प्राप्त कराने वाली विद्या
12- मन्त्रविद्या
13- शकुन-अपशकुन जानना, प्रश्नों उत्तर में शुभाशुभ बतलाना
14- रत्नों को अलग-अलग प्रकार के आकारों में काटना
15- कई प्रकार के मातृका यन्त्र बनाना
16- सांकेतिक भाषा बनाना
17- जल को बांधना।
18- बेल-बूटे बनाना
19- चावल और फूलों से पूजा के उपहार की रचना करना। (देव पूजन या अन्य शुभ मौकों पर कई रंगों से रंगे चावल, जौ आदि चीजों और फूलों को तरह-तरह से सजाना)
20- फूलों की सेज बनाना।
21- तोता-मैना आदि की बोलियां बोलना – इस कला के जरिए तोता-मैना की तरह बोलना या उनको बोल सिखाए जाते हैं।
22- वृक्षों की चिकित्सा
23- भेड़, मुर्गा, बटेर आदि को लड़ाने की रीति
24- उच्चाटन की विधि
25- घर आदि बनाने की कारीगरी
26- गलीचे, दरी आदि बनाना
27- बढ़ई की कारीगरी
28- पट्टी, बेंत, बाण आदि बनाना यानी आसन, कुर्सी, पलंग आदि को बेंत आदि चीजों से बनाना।
29- तरह-तरह खाने की चीजें बनाना यानी कई तरह सब्जी, रस, मीठे पकवान, कड़ी आदि बनाने की कला।
30- हाथ की फूर्ती के काम
31- चाहे जैसा वेष धारण कर लेना
32- तरह-तरह पीने के पदार्थ बनाना
33- द्यू्त क्रीड़ा
34- समस्त छन्दों का ज्ञान
35- वस्त्रों को छिपाने या बदलने की विद्या
36- दूर के मनुष्य या वस्तुओं का आकर्षण
37- कपड़े और गहने बनाना
38- हार-माला आदि बनाना
39- विचित्र सिद्धियां दिखलाना यानी ऐसे मंत्रों का प्रयोग या फिर जड़ी-बुटियों को मिलाकर ऐसी चीजें या औषधि बनाना जिससे शत्रु कमजोर हो या नुकसान उठाए।
40-कान और चोटी के फूलों के गहने बनाना – स्त्रियों की चोटी पर सजाने के लिए गहनों का रूप देकर फूलों को गूंथना।
41- कठपुतली बनाना, नाचना
42- प्रतिमा आदि बनाना
43- पहेलियां बूझना
44- सूई का काम यानी कपड़ों की सिलाई, रफू, कसीदाकारी व मोजे, बनियान या कच्छे बुनना।
45 – बालों की सफाई का कौशल
46- मुट्ठी की चीज या मनकी बात बता देना
47- कई देशों की भाषा का ज्ञान
48 – मलेच्छ-काव्यों का समझ लेना – ऐसे संकेतों को लिखने व समझने की कला जो उसे जानने वाला ही समझ सके।
49 – सोने, चांदी आदि धातु तथा हीरे-पन्ने आदि रत्नों की परीक्षा
50 – सोना-चांदी आदि बना लेना
51 – मणियों के रंग को पहचानना
52- खानों की पहचान
53- चित्रकारी
54- दांत, वस्त्र और अंगों को रंगना
55- शय्या-रचना
56- मणियों की फर्श बनाना यानी घर के फर्श के कुछ हिस्से में मोती, रत्नों से जड़ना।
57- कूटनीति
58- ग्रंथों को पढ़ाने की चातुराई
59- नई-नई बातें निकालना
60- समस्यापूर्ति करना
61- समस्त कोशों का ज्ञान
62- मन में कटक रचना करना यानी किसी श्लोक आदि में छूटे पद या चरण को मन से पूरा करना।
63-छल से काम निकालना
64- कानों के पत्तों की रचना करना यानी शंख, हाथीदांत सहित कई तरह के कान के गहने तैयार करना।

जीवन का रक्षा कवच हैं श्री गणेश के 12 पवित्र नाम...

जीवन का रक्षा कवच हैं श्री गणेश के 12 पवित्र नाम...
 
भगवान गणेश के 12 नाम लेने से सभी प्रकार की मनोकामना पूरी होती है। यह 12 नाम सुनकर श्री गणेश विशेष प्रसन्न होते हैं। वास्तव में जीवन का रक्षा कवच है श्री गणेश के 12 पवित्र नाम। इन्हें श्री गणेश के सामने धूप व दीपक लगाकर बोलें -

गणपर्तिविघ्रराजो लम्बतुण्डो गजानन:।
द्वेमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिप:।।
विनायकश्चारुकर्ण: पशुपालो भवात्मज:।
द्वाद्वशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय य: पठेत्।।
विश्वं तस्य भवे नित्यं न च विघ्नमं भवेद् क्वचिद्।

1- सुमुख - सुन्दर मुख वाले : - भगवान गणेश का बहुत सुंदर चेहरा भगवान शिव एवं माता पार्वती के तेज के कारण है जिसकी मुनियों ने वैज्ञानिक व्याख्या की है । भगवान गणेश का शरीर सूरज की तरह चमकदार होना बताया गया और चन्द्र मंडल में प्रवेश भी चंद्रमा की तरह शीतल होना दर्शाता है. 👌चंद्रमा को सौंदर्य के भगवान के रूप में जाना जाता है।

चन्द्र मंडल में प्रवेश करने पर, यह भगवान में चमकदार अनुभाग गणेश उसके साथ चंद्रमा के सभी प्रमुख विशेषताओं के साथ जीवन के लिए आया था, और इसलिए नाम सुमुख दिया गया था। भगवान गणेश किसी भी शुभ अवसर की शुरुआत में पूजा की जाती है जब भी अपने पवित्र और सुंदर चेहरा हमेशा हमारे ध्यान का केंद्र है। उनकी छोटी आँखों गंभीरता को दर्शाता है।

लंबी नाक उसकी लंबी फ्लैट कानों चरम प्रकृति के अपने ज्ञान कौशल के रूप में सुझाव जहां उसकी बुद्धि और बुद्धि, पता चलता है। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण हैं जो घटनाओं को सुनता है, इसलिए यह भी ध्यान से शिकायतों और उनके भक्तों की शिकायतों को सुनता है। दीर्घ कर्ण (लंबे कान) इस का मतलब है। उन्होंने यानी ब्रम्ह विष्णु और महेश ओमकार के एकीकृत प्रकृति भी इन सभी आयामों को एक साथ सुमु्रख के रूप में अपने नाम का औचित्य साबित होता है ।

2. एक दन्त - एक दांत वाले : - भगवान श्री गणेश जी की कोई प्रतिमा देखेंगे तो उसमे पाएंगे कि उनका एक दन्त खंडित है उनके एकदंती होने के पीछे एक कथा है । इस कथा के अनुसार तीनों लोकों की क्षत्रिय विहीन करने के पश्चात परशुराम जी अपने गुरुदेव भगवान शिव जी और गुरु माता से मिलने कैलाश पर्वत पहुंचे

 उस समय भगवान शिव जी विश्राम कर रहे थे और भगवान श्री गणेश जी द्वार पर पहरेदार के रूप में बैठे थे । द्वार पर भगवान श्री गणेश को देख कर परशुराम जी ने उन्हें नमस्कार किया और अन्दर के ओर जाने लगे , इस पर भगवान श्री गणेशजी ने उनको अन्दर जाने से रोका ।

धीरे धीरे दोनों के मध्य विवाद बढ़ता चला गया । परशुराम जी ने अपने अमोध फरसे को , जो की उनको श्री शिव भगवान ने दिया था , चला दिया ।फरसे के वार से भगवान गणेश जी का एक दन्त खंडित हो गया द्य तब से भगवान गणेशजी एकदंत के नाम से भी जाने जाते हैं ।

और एक दूसरी कथा के अनुसार महाभारत विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य है। महर्षि वेद व्यास के मुताबिक महाभारत धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की कथा है। इस ग्रंथ को लिखने के पीछे भी रोचक कथा है। कहा जाता है कि ब्रह्मा ने स्वप्न में महर्षि व्यास को महाभारत लिखने की प्रेरणा दी थी।

 महर्षि व्यास ने यह काम स्वीकार कर लिया, लेकिन उन्हें कोई इसे लिखने वाला न मिला। वे ऐसे किसी व्यक्ति की खोज में लग गए जो इसे लिख सके। महाभारत के प्रथम अध्याय में उल्लेख है कि वेद व्यास ने गणेशजी को इसे लिखने का प्रस्ताव दिया तो वे तैयार हो गए।

 उन्होंने लिखने के पहले शर्त रखी कि महर्षि कथा लिखवाते समय एक पल के लिए भी नहीं रुकेंगे। इस शर्त को मानते हुए महर्षि ने भी एक शर्त रख दी कि गणेश भी एक-एक वाक्य को बिना समझे नहीं लिखेंगे। इस तरह गणेशजी के समझने के दौरान महर्षि को सोचने का अवसर मिल गया।

3 .कपिल : - जिनके श्री विग्रह से नीले और पीले वर्ण की आभा का प्रसार होता है
जिनके श्री विग्रह से नीले और पीले वर्ण की आभा का प्रसार होता है। ग्रे रंग का एक विशेषण साधन है शक्की ग्रे रंग की गाय कपिला कहा जाता है गाय इसी प्रकार भगवान गणेश के रूप में ज्ञान और दूध के रूप में ज्ञान के रूप में दही घी देता है वह रंग में ग्रे है, हालांकि आदि घी दूध, दही, जैसे उत्पादों देकर उसे स्वस्थ रखने के लिए एक आदमी की जरूरतों को संतुष्ट अभिव्यक्ति की।

उन्होंने कहा कि आदमी को स्वस्थ बनाता है उसके सभी बुराइयों को नष्ट कर देता है और अपनी चिंताओं से दूर साफ करता है। इसलिए उसका नाम कपिल यह किया जाता है, इस अर्थ में फिट बैठता है।

4. गजकर्णक - हाथी के कान वाले : - श्री गणेश लंबे एवं बड़े कानों वाले हैं। उनका एक नाम गजकर्ण भी है। लंबे कान वालों को भाग्यशाली भी कहा जाता है। श्री गणेश तो भाग्य विधाता और शुभ फल दाता हैं। गणेश जी के कानों से यह संदेश मिलता है कि मनुष्य को सुननी सबकी चाहिए, लेकिन अपने बुद्धि विवेक से ही किसी कार्य का क्रियान्वयन करना चाहिए।

 गणेश जी के लंबे कानों का एक रहस्य यह भी है कि क्षुद्र कानों वाला व्यक्ति सदैव व्यर्थ की बातों को सुनकर अपना ही अहित करने लगता है। इसलिए व्यक्ति को अपने कान इतने बड़े कर लेने चाहिए कि हजारों निन्दकों की भली-बुरी बातें उनमें इस तरह समा जाए कि वे बातें कभी मुंह से बाहर न निकल सकें।

5. लम्बोदर - लम्बे उदर (पेट) वाले : - भगवान् श्री गणेश का लम्बोदर अवतार सत्स्वरूप तथा ब्रह्मशक्ति का धारक है, भगवान लम्बोदर को क्रोधासुर का वध करने वाला तथा मूषक वाहन पर चलने वाला कहा जाता है । कथारू- एक बार भगवान विष्णु के मोहिनी रुप को देखकर भगवान शिव कामातुर हो गये ।

जब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप का त्याग किया तो कामातुर भगवान् शिव का मन दुखी हो गया । उसी समय उनका शुक्र धरती पर स्खलित हो गया । उससे एक प्रतापी काले रंग का असुर पैदा हुआ।

उसके नेत्र तांबे की तरह चमकदार थे । वह असुर शुक्राचार्य के पास गया और उनके समक्ष अपनी इच्छा प्रकट की । शुक्राचार्य कुछ क्षण विचार करने के बाद उस असुर का नाम क्रोधासुर रखा और उसे अपनी शिष्यता से अभिभूत किया । फिर उन्होंने शम्बर दैत्य की रूपवती कन्या प्रीति के साथ उसका विवाह कर दिया ।

 एक दिन क्रोधासुर ने आचार्य के समक्ष हाथ जोड़कर कहा - ‘मैं आप की आज्ञा से सम्पूर्ण ब्रह्माण्डों पर विजय प्राप्त करना चाहता हूँ । अतरू आप मुझे यश प्रदान करने वाला मन्त्र देने की कृपा करें ।’ शुक्राचार्य ने उसे सविधि सूर्य-मन्त्र की दीक्षा दी। क्रोधासुर शुक्राचार्य की आज्ञा लेकर वन मे चल गया । वहाँ उसने एक पैर पर खड़े होकर सूर्य-मन्त्र का जप किया ।

 उस धैर्यशाली दैत्य ने निराहार रह कर वर्षा, शीत और धूप का कष्ट सहन करते हुए कठोर तप किया । असुर के हजारों वर्षो की तपस्या के बाद भगवान सूर्य प्रकट हुए । क्रोधासुर ने उनका भक्ति पूर्वक पूजन किया । भगवान सूर्य को प्रसन्न देख कर उसने कहा- ‘प्रभो ! मेरी मृत्यु न हो । मैं सम्पूर्ण ब्रह्माण्डों को जीत लूँ । सभी योद्धाओं में श्रेष्ठ सिद्ध होऊँ ।’ तथास्तु ! कहकर भगवान सूर्य अन्तर्धान हो गये ।

घर लोटकर क्रोधासुर ने शुक्राचार्य के चरणों में प्रणाम किया। शुक्राचार्य ने उसका आवेश्पुरी में दैत्यों के राजा के पद पर अभिषेक कर दिया । कुछ दिनों के बाद उसने असुरों से ब्रह्माण्ड विजय की इच्छा व्यक्त की। असुर बड़े प्रसन्न हुए । विजय यात्रा प्रारम्भ हुई। उसने पृथ्वी पर सहज ही अधिकार कर लिया। इसी प्रकार वैकुण्ठ और कैलाश पर भी उस महादैत्य का राज्य स्थापित हो गया । क्रोधासुर ने भगवान सूर्य के सूर्य लोक को भी जीत लिया।

 वरदान देने के कारण उन्होंने भी सूर्यलोक का दुखी ह्रदय से त्याग कर दिया । अत्यंत दुखी देवताओं और ऋषियों ने आराधना की । इससे संतुष्ट होकर लम्बोदर प्रकट हुए । उन्होंने कहा - ’देवताओं और ऋषियों ! मैं क्रोधासुर का अहंकार चूर्ण कर दूंगा । आप लोग निश्चिंत हो जायें । लम्बोदर के साथ क्रोधासुर का भीषण संग्राम हुआ । देवगण भी असुरों का संहार करने लगे ।

 क्रोधासुर के बड़े - बड़े योद्धा युद्ध भूमि में आहत होकर गिर पड़े । क्रोधासुर दुखी होकर लम्बोदर के चरणों में गिर गया तथा उनकी भक्ति भाव से स्तुति कर ने लगा । सहज कृपालु लम्बोदर ने उसे अभयदान दे दिया । क्रोधासुर भगवान लम्बोदर का आशीर्वाद और भक्ति प्राप्त कर शान्त जीवन लिए पाताल चला गया । देवता अभय और प्रसन्न होकर भगवान लम्बोदर का गुणगान करने लगे ।

6. विकट - सर्वश्रेष्ठ : - भगवान श्रीगणेश को विकट नाम से भी जाना जाता है। दरअसल यह बप्पा के एक अवतार का नाम है। उन्होंने यह अवतार कामासुर के संहार के लिए लिया था। कहते हैं कि भगवान विष्णु जब जालंधर के वध के लिए वृन्दा का तप नष्ट करने गए तभी उसी समय उनके शुक्र से अत्यंत तेजस्वी दैत्य कामासुर पैदा हुआ।

 कामासुर ने अपनी पूरी शिक्षा दैत्यासुर शुक्राचार्य से ली। उन्हीं की आज्ञा पाकर वह भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तप किया। उसकी कठिन तप से खुश होकर। भगवान शिव उसके समक्ष प्रकट हुए। कामासुर ने वर मांगा कि उसे ब्रह्मांड का राज्य और शिवभक्ति प्रदान करें। इसके साथ ही उसे निर्भय और मृत्युंजयी होने का वरदान भी दें।

 भगवान शिव ने कामासुर को यह वरदान दे दिया। कामासुर प्रसन्न होकर दैत्यगुरु शुक्राचार्य के पास लौट आया। शुक्राचार्य ने कामासुर से प्रसन्न होकर महिषासुर की रूपवती पुत्री तृष्णा के साथ उसका विवाह कर दिया। वहीं सभी दैत्यों ने भी कामासुर के अधीन रहने का आश्वासन दिया। कामासुर ने अत्यंत सुंदर शहर रतिद को अपनी राजधानी बनाई। उसने कई दैत्यों को अपनी सेना में प्रधान बनाया। उस महा असुर ने पृथ्वी के सभी राजाओं को जीत लिया और स्वर्ग पर चढ़ाई की।

 इंद्र आदि देव भी उसके पराक्रम से घवरा कर हार गए। इस तरह चारों तरफ झूठ-कपट और छल का राज्य हो गया। चारों तरफ इस तरह का आतंक देखकर सभी देवता घबरा गए, तभी देवर्षि नारद वहां पहुंचे उन्होंने देवताओं को महर्षि मुद्गल से मिलने को कहा, महर्षि सभी देवताओं को लेकर गणेशधाम पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने मयूरवाहन गणेश की उपासना की।

 भगवान प्रकट हुए। उन्होंने कामासुर के आतंक से मुक्त कराने का वचन दिया। भगवान विकट रूप में प्रकट हुए, जिनका वाहन मोर था। वह कामासुर से युद्ध करने चले गए। भयानक युद्ध हुआ जिसमें कामासुर के पुत्र भी मारे गए।

 कामासुर मूर्छित हो गया। वह इतना थक चुका था कि युद्ध करने की स्थिति में नहीं था। आखिर कामासुर ने हार मान ली और उसने भगवान विकट से क्षमा मांगी। इस तरह कामासुर भगवान विकट की शरण में आ गया।

7. विघ्ननाश-विघ्नों (संकटों ) का नाश करने वाले : - सर्वप्रथम भगवान श्री गणेश जी का स्मरण किया जाता है। जिस कारण इन्हें विघ्नेश्वर, विघ्न हर्ता कहा जाता है। इनकी उपासना करने से सभी विघ्नों का नाश होता है तथा सुख-समृद्ध व ज्ञान की प्राप्ति होती है। विघ्नेश्वर नामक एक दैत्य का वध करने के कारण ही इसका नाम श्विघ्नेश्वर विनायकश् हुआ था।

 तभी से यहाँ भगवान श्री गणेश सभी विघ्नों को नष्ट करने वाले माने जाते हैं। एक अन्य कथानुसार अभयदान मांगते समय विघनसुर दैत्य की प्रार्थना थी कि गणेशजी के नाम के पहले उसका भी नाम लिया जाए, इसलिए गणपति को विघ्नहर्ता या विघ्नेश्वर का नाम यहीं से मिला।

एक कहानीके मुताबिक विघ्नासुर राक्षसको देवताके राजा इंद्र द्वारा राजा अभिनंदन द्वारा आयोजितप्रार्थना को नष्ट करने के लिए बनाया गया था, हालांकि, दानव एक कदम आगे चला गया और सभीवैदिक, धार्मिक कार्यको नष्ट कर दिया, उसी समय लोगोकी प्राथनासे प्रसन्न होके गणेशजी उसका वध करने के लिए आये थे पर कहानी के मुताबिक राक्षसने गणेशजीको विनंती करके दया बक्षने के लिए कहा था।

उस समय गणेशजीने उसको बक्ष दिया था परंतु एक शर्त रखी थी और वो येथी के जहा गणेश पूजा हो रही हाई वहा वो राक्षस नहीं जा पाएगा और उसके बदलेमे राक्षसने गणेशजी से यह वरदान माँगा था की आपके साथ मेरे नामभी जुड़ना चाहिए और तबसे यहाँ गणेशजीको विघ्नेश्वरध्विघ्नहर गणेशजी के नामसे जाना जाता हैं. यहाँ के गनेशको श्री विघ्नेश्वर विनायकभी कहा जाता हैं.

8. विनायक विशिष्ट नायक : - विनायक विशिष्ट नायक या स्वामी भगवान गणेश का नाम है। भगवान गणेश विघ्नकर्ता और हर्ता दोनों हैं। कहा जाता है भगवान गणेश की परिक्रमा कर के पूजा की जानी चाहिए। परिक्रमा करते वक्त अपनी इच्छाओं को लगातार दोहराते रहना चाहिए। भगवान ऐसा करने वाले भक्तों की मनोकामना जरुर पूरी करते हैं।

 भक्तों को विनायक के मंदिर की तीन परिक्रमा करनी चाहिए। इसके अलावा भक्त अगर भगवान विनायक को खुश करना चाहते हैं और अपनी इच्छाओं के पूरा करना चाहते हैं तो उन्हें विनायक के नाम से तर्पण करना चाहिए। सिद्धि विनायक गणेश जी का सबसे लोकप्रिय रूप है।

 गणेश जी जिन प्रतिमाओं की सूड़ दाईं तरह मुड़ी होती है, वे सिद्घपीठ से जुड़ी होती हैं और उनके मंदिर सिद्घिविनायक मंदिर कहलाते हैं। कहते हैं कि सिद्धि विनायक की महिमा अपरंपार है, वे भक्तों की मनोकामना को तुरंत पूरा करते हैं। मान्यता है कि ऐसे गणपति बहुत ही जल्दी प्रसन्न होते हैं और उतनी ही जल्दी कुपित भी होते हैं। सिद्धि विनायक की दूसरी विशेषता यह है कि वह चतुर्भुजी विग्रह है।

 उनके ऊपरी दाएं हाथ में कमल और बाएं हाथ में अंकुश है और नीचे के दाहिने हाथ में मोतियों की माला और बाएं हाथ में मोदक (लड्डुओं) भरा कटोरा है। गणपति के दोनों ओर उनकी दोनो पत्नियां रिद्धि और सिद्धि मौजूद हैं जो धन, ऐश्वर्य, सफलता और सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने का प्रतीक है।

मस्तक पर अपने पिता शिव के समान एक तीसरा नेत्र और गले में एक सर्प हार के स्थान पर लिपटा है। सिद्धि विनायक का विग्रह ढाई फीट ऊंचा होता है और यह दो फीट चैड़े एक ही काले शिलाखंड से बना होता है। गणेश जी प्रतीक हैं मनुष्य और अन्य जीवों के सह अस्तित्व के ,जो इस प्रकृति में एक दूसरे पर आश्रित हैं । इनके अस्तित्व की मूल कल्पना बहुत ही वृहद है ,जिसे अध्ययन और ज्ञान के द्वारा ही समझा जा सकता है ।

हम अपने हर मंगल कार्य में भगवान गणेश की पूजा सबसे पहले करते हैं जो कार्य को निर्विघ्न सम्पन्न करवाने में हर जीव का आवाह्न है । जो इसे नकारते हैं उनको बस इतना ही कहना है की भारतीय हिन्दू संस्कृति के धार्मिक प्रतीक मनुष्य के अस्तित्व की पहचान हैं।

9. धूम्रकेतु : - धुएं के से वर्ण की ध्वजा वाले।
भविष्य पुराण के अनुसार, नाम धूम्रकेतु द्वारा गणेश के चैथे अवतार कलयुग में जन्म लेते हैं और अनर्थकारी नष्ट कर देगा। इस गणेश की एक भयंकर रूप माना जाता है और वह एक नीले घोड़े पर सवारी करेंगे। इस रूप में वह एक अंत कलियुग लाना होगा और सृष्टि के अगले चक्र के लिए ब्रह्मांड साफ होगा। धूम्रकेतु राख या धूम्रपान की तरह रंग में ग्रे है। उन्होंने कहा कि या तो दो या दो से चार हथियार है।

उन्होंने अपने पर्वत के रूप में एक नीला घोड़ा है। उन्होंने कहा की गिरावट समाप्त करने के लिए आ जाएगा कलियुग । इस अवतार के दौरान उन्होंने कई राक्षसों को मारता है। ग्रिम्स गणेश के इस अवतार और के दसवें और अंतिम अवतार के बीच एक समानांतर है कि कलियुग, वर्तमान युग उम्र में भ्रम की स्थिति, आतंकवाद, लालच और अराजकता की है।

 गणेश की चैथी अभिव्यक्ति धूम्रकेतु आना अभी बाकी है। गणेश पुराण में, यह आतंकवाद, नकारात्मक और अंधेरे शक्तियों को नष्ट करने के लिए (ब्लू अनंत का प्रतीक) धूम्रकेतु एक नीले घोड़े की सवारी कलियुग के अंत तक आ जाएगा कि लिखा है।

10 गणाध्यक्ष - गणों के स्वामी गणाध्यक्ष : - गणों के स्वामी यह श्री गणेश दसवीं नाम है । यह भी दो अर्थ वहन करती है. एक स्वामी या ऐसी बातों के एक नियंत्रक, जो गिना जा सकता है. दूसरा अर्थ स्वामी या ळंदंे के एक नियंत्रक है. (सामान्य लोग) (पुरुष) नर, असुर (डेमन) (सांप) नाग (चारों वेदों) चार पुरुषार्थ ....... गणेश इन सब के स्वामी है. विज्ञान इन सभी के स्वामी के रूप में गणेश कहता है. विज्ञान पूरे (ब्रम्ह) ब्रह्मांड इसलिए गणेशा अधिपति के रूप में जाना जाता है ।

 गणेश सैंकड़ों पुत्रों और सैकड़ों गणों से भी बढ़ कर है, इसलिए देवनिर्मित अमृतमय मोदक मैं इसी को प्रदान करती हूं। माता-पिता की भक्ति के कारण गणेश यज्ञादि में सर्वत्र अग्रपूज्य होगा।श् तब शिवजी बोले, श्इस गणेश की अग्रपूजा से ही समस्त देवगण प्रसन्न हों।श् साथ ही उन्हें गणों का अध्यक्ष भी बना दिया। इस तरह गणेश जी मोदकप्रेमी बने।

अगर पैसे की कमी न हो तो इन्हें 21 मोदक चढ़ाने चाहिए। पैसा न होने की स्थिति में 5 मोदक तो अवश्य चढ़ाने चाहिए। घर में बने मोदक, लड्डू उन्हें ज्यादा आनंद देते हैं, इसमें आपकी श्रद्धा और प्रेम जो मिला होता है। मूंग की दाल के बने लड्डू इन्हें बहुत प्रिय हैं तो माघ में तिल के लड्डू गणेश जी को बहुत पसंद हैं।

11. भाल चन्द्र - मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाले : - भगवान श्रीगणेश का एक स्वरूप भालचन्द्र के नाम से भी पूजनीय है। सरल शब्दों में श्भालचन्द्रश् का अर्थ है भाल यानी मस्तक पर चंद्र धारण करने वाले। श्रीगणेश के इस नाम में सफल जीवन का अहम सूत्र है। चूंकि शास्त्रों में चन्द्रमा को सभी जीवों के मन का नियंत्रक माना गया है, तो वहीं गणेश बुद्धि दाता हैं। मस्तक भी बुद्धि केन्द्र है।

श्रीगणेश ने मस्तक पर ही चन्द्र को धारण किया है। चन्द्र की प्रकृति शीतल व शांत होती है। इस तरह संकेत है कि सफलता और जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए मन-मस्तिष्क को शांत रख बुरी और नकारात्मक सोच से बचा जाए। मानसिक धैर्य, संयम व सूझबूझ ही कामयाबी और दायित्वों की राह में आने वाले हर उतार-चढ़ाव में दक्षता के साथ आगे बढने में मददगार साबित होते हैं।

 बुधवार को श्रीगणेश उपासना के दौरान भालचन्द्र स्वरूप का ध्यान कर सुनिश्चित सफलता का यही सूत्र अपनाना बड़ा ही असरदार उपाय माना गया है।

इसके लिए सुबह या शाम के वक्त इस विशेष मंत्र का ध्यान श्रीगणेश को सिंदूर, अक्षत व दूर्वा चढ़ाकर व यथाशक्ति लड्डुओं का भोग लगाकर कार्यसिद्धि की कामनाओं के साथ करें। पति की दीर्घायु एवं अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस दिन भालचन्द्र गणेश जी की अर्चना की जाती है।

 करवाचैथ में भी संकष्टीगणेश चतुर्थी की तरह दिन भर उपवास रखकर रात में चन्द्रमा को अर्घ्य देने के उपरांत ही भोजन करने का विधान है। वर्तमान समय में करवाचैथ व्रतोत्सव ज्यादातर महिलाएं अपने परिवार में प्रचलित प्रथा के अनुसार ही मनाती हैं लेकिन अधिकतर स्त्रियां निराहार रहकर चन्द्रोदय की प्रतीक्षा करती हैं।

12. गजानन - हाथी के मुख वाले ?????

शिव और पार्वती पुत्र भगवान गणेश का ही नाम गजानन है। लिंग पुराण के अनुसार एक बार देवताओं ने भगवान शिव की उपासना करके उनसे सुरद्रोही दानवों के दुष्टकर्म में विघ्न उपस्थित करने के लिये वर माँगा। आशुतोष शिव ने तथास्तु कहकर देवताओं को संतुष्ट कर दिया।

समय आने पर गणेश जी का प्राकट्य हुआ। उनका मुख हाथीके समान था और उनके एक हाथ में त्रिशूल तथा दूसरे में पाश था। देवताओं ने सुमन-वृष्टि करते हुए गजानन के चरणों में बार-बार प्रणाम किया। भगवान शिव ने गणेश जी को दैत्यों के कार्यों में विघ्न उपस्थित करके देवताओं और ब्राह्मणों का उपकार करने का आदेश दिया। द्वापर युग में उनका वर्ण लाल है।

 वे चार भुजाओं वाले और मूषक वाहनवाले हैं तथा गजानन नाम से प्रसिद्ध हैं।किसी नवजात शिशु का मस्तक उसके धड़ से लगा दो। एक गजराज का नवजात शिशु मिला उस समय। उसी का मस्तक पाकर वह बालक गजानन हो गया।

एक समय जब माता पार्वती मानसरोवर में स्नान कर रही थी तब उन्होंने स्नानस्थल पर कोई आ न सके इस हेतु अपनी माया से गणेश को जन्म देकर ‘बाल गणेश’ को पहरा देने के लिए नियुक्त कर दिया। इसी दौरान भगवान शिव उधर आ जाते हैं। महादेव इस बात से अंजान थे की बाल गणेश उनके पुत्र है गणेशजी उन्हें रोक कर कहते हैं कि आप उधर नहीं जा सकते हैं।

महादेव ने बालक से पूछा की आप कौन है? बाल गणेश ने कहा में माता पार्वती का पुत्र हूँद्य महादेव ने कहा की में पार्वती का पति हूँ मुझे अंदर जाने दो। किन्तु गणेश ने अनुमति नही दी। महादेव अपना क्रोध शांत करके वहां से चले गये। महादेव ने अपने गण को वहां भेजा।

 गणेश ने उनके साथ युद्ध किया गणेश ने उनकी ऐसी हालत कर दी की वह भगवान शिव की शरण में चले गये। उन्होंने अपनी व्यथा महादेव के आगे व्यक्त की। उनकी व्यथा सुनकर महादेव क्रोधित हो जाते हैं और पुनः वह गणेश से युद्ध करने चले जाते है। महादेव गणेश जी को रास्ते से हटने का कहते हैं किंतु गणेश जी अड़े रहते हैं तब दोनों में युद्ध हो जाता है।

 युद्ध के दौरान क्रोधित होकर शिवजी बाल गणेश का सिर धड़ से अलग कर देते हैं। शिव के इस कृत्य का जब पार्वती को पता चलता है तो वे विलाप और क्रोध से प्रलय का सृजन करते हुए कहती है कि तुमने मेरे पुत्र को मार डाला। यह सुनकर महादेव को आश्चर्य होता हैद्य माता का रौद्ररूप देख महादेव अपने गण को कहते है की वह उत्तर दिशा की ओर जाये और कोई भी पहला प्राणी मिले तो उसका सर काटकर शाम होने से पूर्व ले आये।

 शिवगण उत्तर की ओर जाते है। उन्हें पहले दो हिरन मिले किन्तु वह माता पुत्र थे। यह देखकर गण आगे गये। फिर उन्हें एक हाथी मिला। हाथी ने गण को अपना शीष काटने की अनुमति दी। वह जल्दी से महादेव के पास गये।

  महादेव हाथी का सिर गणेश के धड़ से जोड़कर गणेश जी को पुनरूजीवित कर देते हैं। तभी से भगवान गणेश को गजानन गणेश कहा जाने लगा।लगा।

आधुनिक_भारत_का_इतिहास fantastic


आधुनिक_भारत_का_इतिहास :

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#अगस्त_प्रस्ताव

भारत के वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो ने 8 अगस्त 1940 को शिमला से एक वक्तव्य जारी किया, जिसे अगस्त प्रस्ताव कहा गया|यह प्रस्ताव कांग्रेस द्वारा ब्रिटेन से भारत की स्वतंत्रता के लक्ष्य को लेकर पूछे गए सवाल के जबाव में लाया गया था|

#अगस्त_प्रस्ताव_के_प्रावधान

• सलाहकारी युद्ध परिषद् की स्थापना

• युद्ध के पश्चात भारत के संविधान निर्माण के लिए प्रतिनिधिक भारतीय निकाय की स्थापना करना

• वायसराय की कार्यकारी परिषद् का तत्काल विस्तार

• अल्पसंख्यकों को यह आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार,शासन के किसी ऐसे तंत्र को सत्ता नहीं सौंपेगी जिसके प्राधिकार को भारतीय राष्ट्रीय जीवन के किसी बड़े और शक्तिशाली तबके द्वारा स्वीकार न किया गया हो

यह प्रथम अवसर था जब भारतीयों के संविधान निर्माण के अधिकार को स्वीकार किया गया और कांग्रेस ने संविधान सभा के गठन को सहमति प्रदान की| कांग्रेस ने अगस्त प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया| जवाहर लाल नेहरु ने कहा कि डोमिनियन दर्जे का सिद्धांत अब मृतप्राय हो चुका है| गाँधी ने कहा कि इस घोषणा नेराष्ट्रवादियों और ब्रिटिश शासकों के बीच की खाई को और चौड़ा कर दिया है| मुस्लिम लीग इसमें दिए गए वीटो अधिकार के चलते खुश थी और उसने कहा कि राजनीतिक गतिरोध को दूर करने का एकमात्र उपाय विभाजन है| कांग्रेस द्वारा प्रस्तुत की गयी मांगों को स्वीकार न करने से व्याप्त व्यापक असंतोष के सन्दर्भ में गाँधी ने वर्धा में हुई कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में अपनी व्यक्तिगत सविनय अवज्ञा को शुरू करने की योजना को प्रस्तुत किया|

#निष्कर्ष

यह भारत के वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो के द्वारा जारी किया गया औपचारिक वक्तव्य था,जिसने संविधान निर्माण प्रक्रिया की नींव रखी और कांग्रेस ने संविधान सभा के गठन को सहमति प्रदान की|


2

#आधुनिक_भारत_का_इतिहास :
#नेहरू_रिपोर्ट
 
12 फरवरी, 1928 को डॉ.एम.ए.अंसारी की अध्यक्षता में दिल्ली में सर्वदलीय सम्मलेन बुलाया गया जिसमे 29 संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे| इस सम्मलेन का आयोजन भारत सचिव लॉर्ड बिर्केन्हेड की चुनौती और साइमन आयोग के प्रत्युत्तर में किया गया था| बम्बई में 19 मई 1928 को इस सम्मलेन की बैठक में मोतीलाल नेहरु की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गयी जिसका उद्देश्य भारत के संविधान की रुपरेखा व सिद्धांतों का निर्धारण करना था|

#नेहरु_रिपोर्ट_की_अनुशंसाएं

• भारत को डोमिनियन का दर्जा दिया जाये और संसदीय रूप की सरकार स्थापित की जाये जिसमे द्विसदनीय विधायिका- सीनेट और प्रतिनिधि सदन,हो|

• सीनेट का गठन सात साल के लिए चुने जाने वाले दो सौ सदस्यों से मिलकर हो और प्रतिनिध सदन में पांच साल के लिए चुने जाने वाले पांच सौ सदस्य शामिल हों|गवर्नर जनरल कार्यकारी परिषद् की सलाह पर कार्य करे जो सामूहिक रूप से संसद के प्रति उत्तरदायी हो|

• भारत में संघीय रूप की सरकार स्थापित की जाये जिसमे अवशिष्ट शक्तियां केंद्र को प्रदान की गयीं हों |अल्पसंख्यकों के लिए पृथक निर्वाचन प्रणाली को समाप्त कर दिया जाये क्योकि यह सांप्रदायिक भावनाओं को जाग्रत करती है और संयुक्त निर्वाचन प्रणाली स्थापित की जाये|

• पंजाब व बंगाल में समुदायों के लिए कोई सीट आरक्षित नहीं हो लेकिन उन राज्यों में,जहाँ मुस्लिम जनसंख्या उस राज्य की कुल जनसंख्या के दस प्रतिशत से भी कम है,मुस्लिमों के लिए सीटों का आरक्षण किया जा सकता है|

• न्यायपालिका विधायिका से स्वतंत्र हो|

• केंद्र में एक चौथाई मुस्लिम प्रतिनिधित्व होना चाहिए|

• सिंध को बम्बई प्रान्त से अलग किया जाये|

#निष्कर्ष

नेहरु रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता है| इस रिपोर्ट ने अमेरिका के अधिकार पत्र से प्रेरणा ग्रहण की, जिसने भारत के संविधान में मूल अधिकारों सम्बन्धी प्रावधानों की आधारशिला रखी थी|

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#आधुनिक_भारत_का_इतिहास :
#साम्प्रदायिक_अधिनिर्णय_और_पूना_समझौता

16 अगस्त,1932 को मैकडोनाल्ड ने सांप्रदायिक अधिनिर्णय के रूप में चर्चित प्रस्ताव की घोषणा की,जिसमें सांप्रदायिक निर्वाचक मंडल की संस्तुति की गयी थी| इसे ‘मैकडोनाल्ड अवार्ड’ के रूप में भी जाना जाता है| देश में लगभग सभी जगह जनसभाएं आयोजित की गयीं, मदनमोहन मालवीय, बी.आर.अम्बेडकर और एम.सी.रजा जैसे विभिन्न धडों के नेता सक्रिय हो गए|इसका अंत एक समझौते के रूप में हुआ जिसे ‘पूना समझौता’ के रूप में जाना गया|

#सांप्रदायिक_अधिनिर्णय (16 अगस्त,1932)

16 अगस्त,1932 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैमसे मैकडोनाल्ड ने ब्रिटिश भारत में उच्च जातियों, निम्न जातियों, मुस्लिमों, बौद्धों, सिखों, भारतीय ईसाईयों, आंग्ल-भारतियों ,यूरोपियों, और अछूतों (जिन्हें अब दलितों के रूप में जाना जाता है) के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की व्यवस्था प्रदान करने के लिए इसकी घोषणा की|

#पूना_समझौता (24 सितम्बर1932)

यह समझौता बी.आर.अम्बेडकर और महात्मा गाँधी के बीच पुणे की यरवदा सेंट्रल जेल में हुआ था और सरकार ने इस समझौते को सांप्रदायिक अधिनिर्णय में संशोधन के रूप में अनुमति प्रदान की|

#समझौते_के_प्रमुख_बिंदु

• समझौते में दलित वर्ग के लिए पृथक निर्वाचक मंडल को त्याग दिया गया लेकिन दलित वर्ग के लिए आरक्षित सीटों की संख्या प्रांतीय विधानमंडलों में 71 से बढ़ाकर 147 और केन्द्रीय विधायिका में कुल सीटों की 18% कर दीं गयीं|

• सीटों का चुनाव संयुक्त निर्वाचक मंडल द्वारा होगा लेकिन उसकी प्रक्रिया निम्नलिखित होगी: किसी निर्वाचन क्षेत्र की सामान्य निर्वाचन सूची में दर्ज सभी दलित सदस्य मिलकर एक निर्वाचक मंडल बनायेंगे| यह निर्वाचक मंडल प्रत्येक आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र के लिए, एक मत प्रणाली के माध्यम से, दलित वर्ग के चार सदस्यों के एक पैनल का चयन करेगा| इस प्राथमिक मतदान में सबसे ज्यादा मतों को प्राप्त करने वाले चार व्यक्ति ही सामान्य निर्वाचन मंडल के लिए प्रत्याशी होंगे|

• प्राथमिक निर्वाचन और चार सदस्यीय पैनल की ऊपर वर्णित प्रणाली दस वर्षों के बाद समाप्त हो जाएगी,बशर्ते उससे पूर्व आपसी सहमति के द्वारा इसे ख़त्म न किया गया हो|

• आरक्षित सीटों के माध्यम से दलित वर्गों के प्रतिनिधित्व की प्रणाली निश्चित समय तक ही लागू होगी अन्यथा इसे सम्बंधित समुदायों की आपसी सहमति के द्वारा समाप्त किया जा सकता है|

• दलित वर्ग का मताधिकार लोथियन समिति (भारतीय मताधिकार समिति) की रिपोर्ट के अनुसार होगा|

• स्थानीय निकायों के चुनाव और लोक सेवा में नियुक्ति के लिए कोई भी व्यक्ति केवल इस आधार पर निर्योग्य नहीं माना जायेगा कि वह किसी दलित वर्ग का सदस्य है| इस सन्दर्भ में दलित वर्ग के उचित प्रतिनिधित्व की रक्षा करने के लिए हर तरह का प्रयास किया जायेगा|


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#आधुनिक_भारत_का_इतिहास :
#मुडीमैन_समिति_1924

भारतीय नेताओं की मांगों को पूरा करने और 1920 के दशक के आरंभिक वर्षों में स्वराज पार्टी द्वारा स्वीकृत किये गए प्रस्ताव को ध्यान में रखते हुए ब्रिटिश सरकार ने सर अलेक्जेंडर मुडीनमैन की अध्यक्षता में एक समिति,जिसे मुडीनमैन समिति के नाम से भी जाना जाता है,गठित की| समिति में ब्रिटिशों के अतिरिक्त चार भारतीय सदस्य भी शामिल थे| भारतीय सदस्यों में निम्नलिखित शामिल थे-

a. सर शिवास्वामी अय्यर,

b. डॉ.आर.पी.परांजपे,

c. सर तेज बहादुर सप्रे

d. मोहम्मद अली जिन्ना

इस समिति के गठन के पीछे का कारण भारतीय परिषद् अधिनियम,1919 के तहत 1921 में स्थापित संविधान और द्वैध शासन प्रणाली की कामकाज की समीक्षा करना था| इस समिति की रिपोर्ट को 1925 में प्रस्तुत किया गया जो दो भागों में विभाजित थी-अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक रिपोर्ट|

• बहुसंख्यक/बहुमत रिपोर्ट: इसमें सरकारी कर्मचारी और निष्ठावान लोग शामिल थे| इन्होने घोषित किया कि द्वैध शासन स्थापित नहीं हो सका है | उनका यह भी मानना था कि प्रणाली को सही तरह से मौका नहीं दिया गया है अतः केवल छोटे-मोटे बदलावों की अनुशंसा की|

• अल्पसंख्यक/अल्पमत रिपोर्ट: इसमें केवल गैर-सरकारी भारतीय शामिल थे | इसका मानना था कि 1919 का एक्ट असफल साबित हुआ है| इसमें यह भी बताया गया कि स्थायी और भविष्य की प्रगति को स्वयं प्रेरित करने वाले संविधान में क्या क्या शामिल होना चाहिए|

अतः इस समिति ने शाही आयोग/रॉयल कमीशन की नियुक्ति की सिफारिश की| भारत सचिव लॉर्ड बिर्केनहेड ने कहा कि बहुमत/बहुसंख्यक की रिपोर्ट के आधार पर कदम उठाये जायेंगे|

विश्व_का_भूगोल SPECIAL

विश्व_का_भूगोल :

#पृथ्वी_का_भूगर्भिक_इतिहास

उल्का पिंडों एवं चन्द्रमा के चट्‌टानों के नमूनों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि हमारी पृथ्वी की आयु 4.6 अरब वर्ष है । पृथ्वी पर सबसे प्राचीन पत्थर नमूनों के रेडियोधर्मी तत्वों के परीक्षण से उसके 3.9 बिलियन वर्ष पुराना होने का पता चला है ।

रेडियोसक्रिय पदार्थों के अध्ययन के द्वारा पृथ्वी के आयु की सबसे विश्वसनीय व्याख्या हो सकी है । पियरे क्यूरी एवं रदरफोर्ड ने इनके आधार पर पृथ्वी की आयु दो से तीन अरब वर्ष अनुमानित की है

पृथ्वी के भूगर्भिक इतिहास की व्याख्या का सर्वप्रथम प्रयास फ्रांसीसी वैज्ञानिक कास्ते-द-बफन ने किया । वर्तमान समय में पृथ्वी के इतिहास को कई कल्प (Era) में विभाजित किया गया है । ये कल्प पुनः क्रमिक रूप से युगों (Epoch) में व्यवस्थित किए गए हैं ।

प्रत्येक युग पुनः छोटे उपविभागों में विभक्त किया गया है, जिन्हें ‘शक’ (Period) कहा जाता है । प्रत्येक शक की कालावधि निर्धारित की गई है तथा जीवों और वनस्पतियों के विकास पर भी प्रकाश डाला गया है ।

#पृथ्वी_के_भूगर्भिक_इतिहास_से_सम्बंधित_प्रमुख_तथ्य:

1. #आद्य_कल्प (Pre-Paleozoic Era):

इसे आर्कियन व प्री-कैम्ब्रियन दो भागों में बाँटा गया है:

i. #आर्कियन_काल (Archean Era):

इस काल के शैलों में जीवाश्मों का पूर्णतः अभाव है । इसलिए इसे प्राग्जैविक (Azoic) काल भी कहते हैं । इन चट्‌टानों में ग्रेनाइट और नीस की प्रधानता है, जिनमें सोना और लोहा पाया जाता है । इसी काल में कनाडियन व फेनोस्केंडिया शील्ड निर्मित हुए हैं ।

ii. #प्री_कैम्ब्रियन_काल (Pre-Cambrian Period):

इस काल में रीढ़विहीन जीव का प्रादुर्भाव हो गया था । इस काल में गर्म सागरों में मुख्यतः नर्म त्वचा वाले रीढ़विहीन जीव थे । यद्यपि समुद्रों में रीढ़युक्त जीवों का भी प्रादुर्भाव हो गया, परंतु स्थलभाग जीवरहित था । भारत में प्री-कैम्ब्रियन काल में ही अरावली पर्वत व धारवाड़ क्रम की चट्‌टानों का निर्माण हुआ ।

2. #पुराजीवी_महाकल्प (Paleozoic Era):

इसे प्राथमिक युग भी कहा जाता है ।

इसके निम्न उपभाग हैं:

i. #कैम्ब्रियन_काल (Cambrian Period):

इस काल में प्रथम बार स्थल भागों पर समुद्रों का अतिक्रमण हुआ । प्राचीनतम अवसादी शैलों (Sedimentary Rocks) का निर्माण कैम्ब्रियन काल में ही हुआ था । भारत में विंध्याचल पर्वतमाला का निर्माण इसी काल में हुआ था ।

पृथ्वी पर इसी काल में सर्वप्रथम वनस्पति एवं जीवों की उत्पत्ति हुई । ये जीव बिना रीढ़ की हड्‌डी वाले थे । इसी समय समुद्रों में घास की उत्पत्ति हुई ।

ii. #आर्डोविसियन_काल (Ordovician Period):

इस काल में समुद्र के विस्तार ने उत्तरी अमेरिका का आधा भाग डुबो दिया, जबकि पूर्वी अमेरिका टैकोनियन पर्वत निर्माणकारी गतिविधियों से प्रभावित हुआ । इस काल में वनस्पतियों का विस्तार हुआ तथा समुद्र में रेंगने वाले जीव भी उत्पन्न हुए । स्थल भाग अभी भी जीवविहीन था ।

iii. #सिल्यूरियन_काल (Silurian Period):

इस काल में सभी महाद्वीप पृथ्वी की कैलीडोनियन हलचल से प्रभावित हुए तथा इस काल में रीढ़ वाले जीवों का सर्वप्रथम आविर्भाव हुआ एवं समुद्रों में मछलियों की उत्पत्ति हुई । सिल्यूरियन काल में रीढ़ वाले जीवों का विस्तार मिलता है, इसलिए इसे ‘रीढ़ वाले जीवों का काल’ (Age of Vertebrates) कहते हैं ।

इस काल में प्रवाल जीवों का विस्तार मिलता है । स्थल पर पहली बार पौधों का उद्‌भव इसी समय हुआ । ये पौधे पत्ती विहीन थे तथा आस्ट्रेलिया में उत्पन्न हुए थे । यह काल व्यापक कैलिडोनियन पर्वतीय हलचलों का काल भी है । इसी समय स्कैंडिनेविया व स्कॉटलैंड के पर्वतों का निर्माण हुआ ।

iv. #डिवोनियन_काल (Devonian Period):

इस काल में कैलीडोनियन हलचल के परिणामस्वरूप सभी महाद्वीपों पर ऊँची पर्वत शृंखलाएँ विकसित हुई, जिसके प्रमाण स्कैंडिनेविया, दक्षिण-पश्चिम स्कॉटलैण्ड, उत्तरी आयरलैण्ड एवं पूर्वी अमेरिका में देखे जा सकते हैं । इस काल में पृथ्वी की जलवायु समुद्री जीवों विशेषकर मछलियों के सर्वाधिक अनुकूल थी । इसी समय शार्क मछली का भी आविर्भाव हुआ ।

अतः इसे ‘मत्स्य युग’ (Fish Age) के रूप में जाना जाता है । इसी समय उभयचर जीवों (Amphibians) की उत्पत्ति हुई तथा फर्न वनस्पतियों की भी उत्पत्ति हुई । पौधों की ऊँचाई 40 फीट तक पहुँच गई थी । इस समय कैलिडोनियन पर्वतीकरण भी बड़े पैमाने पर हुआ तथा ज्वालामुखी क्रियाएँ भी सक्रिय हुईं ।

v. #कार्बोनीफेरस_काल (Carboniferous Period):

इस काल में कैलीडोनियन हलचलों का स्थान आर्मेरिकन हलचलों ने ले लिया, जिससे ब्रिटेन एवं फ्रांस सर्वाधिक प्रभावित हुए तथा इस युग में उभयचरों का विकास व विस्तार बढ़ता गया । रेंगने वाले जीव (Raptiles) का भी स्थल पर आविर्भाव हुआ।

इस काल में 100 फीट ऊँचे पेड़ भी उत्पन्न हुए । यह ‘बड़े वृक्षों (ग्लोसोप्टिरस वनस्पतियों) का काल’ कहलाता है । इस समय बने भ्रंशों में पेड़ों के दब जाने से गोंडवाना क्रम के चट्‌टानों का निर्माण हुआ, जिसमें कोयले के व्यापक निक्षेप मिलते हैं ।

vi. #पर्मियन_काल (Permian Age):

इस काल में वैरीसन हलचल हुई, जिसने मुख्य रूप से यूरोप को प्रभावित किया । जलवायु धीरे-धीरे शुष्क होने लगी तथा इस समय वैरीसन हलचल के फलस्वरूप भ्रंशों के निर्माण के कारण ब्लैक फॉरेस्ट व वास्जेज जैसे भ्रंशोत्थ पर्वतों का निर्माण हुआ ।

स्पेनिश मेसेटा, अल्ताई, तिएनशान, अप्लेशियन जैसे पर्वत भी इसी काल में निर्मित हुए । इस समय स्थल पर जीवों व वनस्पतियों की अनेक प्रजातियों का विकास देखा गया । भ्रंशन के कारण उत्पन्न आंतरिक झीलों के वाष्पीकरण से पृथ्वी पर पोटाश भंडारों का निर्माण हुआ ।

3. #मध्यजीवी_महाकल्प (Mesozoic Era):

इसे द्वितीयक युग भी कहा जाता है ।

इसे ट्रियासिक, जुरैसिक व क्रिटेशियस कालों में बाँटा गया है:

i. #ट्रियासिक_काल (Triassic Period):

इस काल में स्थल पर बड़े-बड़े रेंगने वाले जीव का विकास हुआ । इसीलिए इसे ‘रेंगने वाले जीवों का काल’ (Age of Reptiles) कहा जाता है । यह काल आर्कियोप्टेरिक्स की उत्पत्ति का काल था । ये स्थल एवं आकाश दोनों में चल सकते थे ।

इस समय तीव्र गति से तैरने वाले लॉबस्टर (केकड़ा समूह का प्राणी) का उद्‌भव भी हुआ । स्तनधारी भी उत्पन्न होने लगे थे । मांसाहारी मत्स्यतुल्य रेप्टाइल्स सागरों में उत्पन्न हुए । रेप्टाइल्स में भी स्तनधारियों की उत्पत्ति हो गई थी ।

ii. #जुरैसिक_काल (Jurassic Period):

इस काल में मगरमच्छ के समान मुख और मछली के समान धड़ वाले जीव, डायनासोर रेप्टाइल्स का विस्तार हुआ एवं लॉबस्टर प्राणी बढ़ते चले गए तथा इस काल में जलचर, स्थलचर व नभचर तीनों का आविर्भाव हो गया था । जूरा पर्वत का सम्बंध इसी काल से जोड़ा जाता है । पुष्पयुक्त वनस्पतियाँ इसी काल में आई थीं ।

iii. #क्रिटेशियस_काल (Cretaceous Period):

इस काल में एंजियोस्पर्म (आवृत्तबीजी) पौधों का विकास प्रारंभ हुआ । बड़े-बड़े कछुओं का उद्‌भव भी इस काल में देखा गया । मैग्नेलिया व पोपनार जैसे शीतोष्ण पतझड़ वन के वृक्ष विकसित हुए । उत्तरी-पश्चिमी अलास्का, कनाडा, मैक्सिको, ब्रिटेन के डोबर क्षेत्र व आस्ट्रेलिया आदि में खड़िया मिट्‌टी का जमाव हुआ ।

पर्वतीकरण अत्यधिक सक्रिय था । रॉकी व एंडीज की उत्पत्ति आरंभ हो गई । भारत के पठारी भाग में क्रिटेशियस काल में ही ज्वालामुखी लावा का दरारी उद्‌भेदन हुआ, जिससे ‘दक्कन ट्रैप’ व काली मिट्‌टी का निर्माण हुआ है ।

4. #नवजीवी_महाकल्प (Cenozoic Era):

इस कल्प को तृतीयक या ‘टर्शियरी युग’ भी कहा जाता है । इसे पैल्योसीन, इओसीन, ओलीगोसीन, मायोसीन व प्लायोसीन कालों में बाँटा गया है । इसी कल्प के विभिन्न कालों में अल्पाइन पर्वतीकरण हुए तथा विश्व के सभी नवीन मोड़दार पर्वतों आल्प्स, हिमालय, रॉकी, एंडीज आदि की उत्पत्ति हुई ।

i. #पैल्योसीन_काल (Paleocene Period):

इस युग के दौरान हुई लैरामाइड हलचल के फलस्वरूप उत्तरी अमेरिका में रॉकी पर्वतमाला का निर्माण हुआ तथा स्थल पर स्तनपाइयों का विस्तार हुआ । इसी कल्प में सर्वप्रथम स्तनपाई (Mammalians) जीवों व पुच्छहीन बंदरों (Ape) का आविर्भाव हुआ ।

ii. #इओसीन_काल (Eocene Period):

इस युग में भूतल पर विभिन्न दरारों के माध्यम से ज्वालामुखी का उद्‌गार हुआ तथा स्थल पर रेंगने वाले जीव प्रायः विलुप्त हो गए । प्राचीन बंदर व गिब्बन म्यांमार में उत्पन्न हुए । हाथी, घोड़ा, रेनोसेरस (गैंडा), सूअर के पूर्वजों का आविर्भाव हुआ ।

iii. #ओलीगोसीन_काल (Oligocene Period):

इस काल में ‘अल्पाइन पर्वतीकरण’ प्रारंभ हुआ एवं इसी काल में बिल्ली, कुत्ता, भालू आदि की उत्पत्ति हुई । इसी काल में पुच्छहीन बंदर का आविर्भाव हुआ, जिसे मानव का पूर्वज कहा जा सकता है । ‘वृहत् हिमालय’ की उत्पत्ति का मुख्यकाल यही है ।

iv. #मायोसीन_काल (Miocene Period):

इस काल में अल्पाइन पर्वत निर्माणकारी गतिविधियों द्वारा सम्पूर्ण यूरोप एवं एशिया में वलनों का विकास हुआ, जिनके विस्तार की दिशा पूर्व-पश्चिम था ।

इस काल में बड़े आकार के (60 फीट) शार्क मछली, प्रोकानसल (पुच्छहीन बंदर), जल पक्षी (हंस, बत्तख) पेंग्विन आदि उत्पन्न हुए । हाथी का भी विकास इसी काल में हुआ । मध्य या लघु हिमालय की उत्पत्ति का मुख्य काल यही है ।

v. #प्लायोसीन_काल:

इस काल में समुद्रों के निरन्तर अवसादीकरण से यूरोप, मेसोपोटामिया, उत्तरी भारत, सिन्ध एवं उत्तरी अमेरिका में विस्तृत मैदानों का विकास हुआ तथा इस काल में बड़े स्तनपाई प्राणियों की संख्या में कमी आई । शार्क का विनाश हो गया, मानव के पूर्वज का विकास हुआ तथाआधुनिक स्तनपाइयों का आविर्भाव हुआ ।

शिवालिक की उत्पत्ति इसी काल में हुई । हिमालय पर्वतमाला एवं दक्षिण के प्रायद्वीपीय भाग के बीच स्थित जलपूर्ण द्रोणी टेथिस भू-सन्नति में अवसादों के जमाव से उत्तरी विशाल मैदान का आविर्भाव इसी काल में होने लगा था ।

5. #नूतन_महाकल्प (Neozoic Era):

इसे चतुर्थक युग भी कहा जाता है ।

प्लीस्टोसीन व होलोसीन इसके दो उपभाग हैं:

i. #प्लीस्टोसीन_काल (Pleistocene Period):

इस युग में तापमान का स्तर नीचे आ गया, जिसके कारण यूरोप ने क्रमशः चार हिमयुग देखा । जो इस प्रकार हैं- गुंज (Gunz), मिन्डेल (Mindel), रिस (Riss) एवं वुर्म (Wurm) । विभिन्न हिमकालों के बीच में अंतर्हिम काल (Inter Glacial Age) देखे गए जो तुलनात्मक रूप से उष्णकाल था । मिन्हेल व रिस के बीच का अंतर्हिम काल सर्वाधिक लम्बी अवधि का था ।

उत्तरी अमेरिका में इस समय नेब्रास्कन, कन्सान, इलीनोइन या आयोवा व विंस्कासिन हिमकाल देखे गए । नेब्रास्कन व कन्सान के बीच अफ्टोनियन, कन्सान व इलीनोइन के बीच यारमाउथ, इलीनोइन व विंस्कासिन के बीच संगमन अंतर्हिम काल था ।

इस युग के अंत में हिम चादर पिघलते चले गए एवं स्कैंडिनेवियन क्षेत्र की ऊँचाई में निरंतर वृद्धि हुई । पृथ्वी पर उड़ने वाले ‘पक्षियों का आविर्भाव’ प्लीस्टोसीन काल में ही माना जाता है । मानव तथा अन्य स्तनपाई जीव वर्तमान स्वरूप में इसी काल में विकसित हुए ।

ii. #होलोसीन_या_अभिनव_काल (Holocene or Innovative Period):

इस काल में तापमान वृद्धि के कारण प्लीस्टोसीन काल के हिम की समाप्ति हो गई तथा विश्व की वर्तमान दशा प्राप्त हुई जो अभी भी जारी है । इसी समय सागरीय जीव वर्तमान अवस्था को प्राप्त हुए । स्थल पर मनुष्य ने कृषि कार्य तथा पशुपालन प्रारंभ कर दिया ।

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#विश्व_का_भूगोल :
#पृथ्वी_की_गतियां

पृथ्वी की गति दो प्रकार की है

▪️घूर्णन अथवा दैनिक गति – पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूमना घूर्णन कहलाता है।
▪️परिक्रमण अथवा वार्षिक गति– सूर्य के चारों ओर एक स्थिर कक्ष में पृथ्वी की गति को परिक्रमण कहते हैं।

#घूर्णन_अथवा_दैनिक_गति:

पृथ्वी सदैव अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व लट्‌टू की भांति घूमती रहती है, जिसे ‘पृथ्वी का घूर्णन या परिभ्रमण’ कहते हैं । इसके कारण दिन व रात होते हैं । अतः इस गति को ‘दैनिक गति’ भी कहते हैं ।

i. #नक्षत्र_दिवस :

एक मध्याह्न रेखा के ऊपर किसी निश्चित नक्षत्र के उत्तरोत्तर दो बार गुजरने के बीच की अवधि को नक्षत्र दिवस कहते हैं । यह 23 घंटे व 56 मिनट अवधि की होती है ।

ii. #सौर_दिवस :

जब सूर्य को गतिहीन मानकर पृथ्वी द्वारा उसके परिक्रमण की गणना दिवसों के रूप में की जाती है तब सौर दिवस ज्ञात होता है । इसकी अवधि पूरे 24 घंटे की होती है ।

#परिक्रमण_अथवा_वार्षिक_गति:

पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमने के साथ-साथ सूर्य के चारों ओर एक अंडाकार मार्ग (Geoid) पर 365 दिन तथा 6 घंटे में एक चक्कर पूरा करती है । पृथ्वी के इस अंडाकार मार्ग को ‘भू-कक्षा’ (Earth Orbit) कहते हैं । पृथ्वी की इस गति को परिक्रमण या वार्षिक गति कहते हैं ।

i. #उपसौर :

पृथ्वी जब सूर्य के अत्यधिक पास होती है तो इसे उपसौर कहते हैं । ऐसी स्थिति 3 जनवरी को होती है ।

ii. #अपसौर :

पृथ्वी जब सूर्य से अधिकतम दूरी पर होती है तो इसे अपसौर कहते हैं । ऐसी स्थिति 4 जुलाई को होती है ।

#दिन_रात_का_छोटा_व_बड़ा_होना:

यदि पृथ्वी अपनी धुरी पर झुकी हुई न होती तो सर्वत्र दिन-रात बराबर होते । इसी प्रकार यदि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा न करती तो एक गोलार्द्ध में दिन सदा ही बड़े और रातें छोटी रहती जबकि दूसरे गोलार्द्ध में रातें बड़ी और दिन छोटे होते । परंतु विषुवतरेखीय भाग को छोड़कर विश्व के अन्य सभी भागों में विभिन्न ऋतुओं में दिन-रात की लम्बाई में अंतर पाया जाता है ।

विषुवत रेखा पर सदैव दिन-रात बराबर होते हैं, क्योंकि इसे प्रकाश वृत्त हमेशा दो बराबर भागों में बाँटता है । अतः विषुवत रेखा का आधा भाग प्रत्येक स्थिति में प्रकाश प्राप्त करता है ।

#पृथ्वी_पर_दिन_और_रात_की_स्थिति :

21 मार्च से 23 सितम्बर की अवधि में उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य का प्रकाश 12 घंटे या अधिक समय तक प्राप्त करता है । अतः यहाँ दिन बड़े एवं रातें छोटी होती हैं । जैसे-जैसे उत्तरी ध्रुव की ओर बढ़ते जाते हैं, दिन की अवधि भी बढ़ती जाती है ।

उत्तरी ध्रुव पर तो दिन की अवधि छः महीने की होती है । 23 सितम्बर से 21 मार्च तक सूर्य का प्रकाश दक्षिणी गोलार्द्ध में 12 घंटे या अधिक समय तक प्राप्त होता है ।

जैसे-जैसे दक्षिणी ध्रुव की ओर बढ़ते हैं, दिन की अवधि भी बढ़ती है । दक्षिणी ध्रुव पर इसी कारण छः महीने तक दिन रहता है । इस प्रकार उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव दोनों पर ही छः महीने तक दिन व छः महीने तक रात रहती है ।

#ऋतु_परिवर्तन :

चूंकि पृथ्वी न सिर्फ अपने अक्ष पर घूमती है वरन् सूर्य की परिक्रमा भी करती है । अतः पृथ्वी की सूर्य से सापेक्ष स्थितियाँ बदलती रहती हैं ।

पृथ्वी के परिक्रमण में चार मुख्य अवस्थाएँ आती हैं तथा इन अवस्थाओं में ऋतु परिवर्तन होते हैं:

i. #21_जून_की_स्थिति :

इस समय सूर्य कर्क रेखा पर लम्बवत् चमकता है । इस स्थिति को ग्रीष्म अयनांत (Summer Solistice) कहते हैं । वस्तुतः 21 मार्च के बाद सूर्य उत्तरायण होने लगता है तथा उत्तरी गोलार्द्ध में दिन की अवधि बढ़ने लगती है, जिससे वहाँ ग्रीष्म ऋतु का आगमन होता है ।

21 जून को उत्तरी गोलार्द्ध में दिन की लम्बाई सबसे अधिक रहती है । दक्षिणी गोलार्द्ध में इस समय शीत ऋतु होती है । 21 जून के पश्चात् 23 सितम्बर तक सूर्य पुनः विषुवत रेखा की ओर उन्मुख होता है । परिणामस्वरूप धीरे-धीरे उत्तरी गोलार्द्ध में गर्मी कम होने लगती है ।

ii. #22_दिसम्बर_की_स्थिति :

इस समय सूर्य मकर रेखा पर लम्बवत् चमकता है । इस स्थिति को शीत अयनांत (Winter Solistice) कहते हैं । इस समय दक्षिणी गोलार्द्ध में दिन की अवधि लम्बी व रात छोटी होती हैं ।

वस्तुतः सूर्य के दक्षिणायन होने अर्थात् दक्षिणी गोलार्द्ध में उन्मुख होने की प्रक्रिया 23 सितम्बर के बाद प्रारंभ हो जाती है, जिससे दक्षिणी गोलार्द्ध में दिन बड़े व रातें छोटी होने लगती हैं ।

इस समय उत्तरी गोलार्द्ध में ठीक विपरीत स्थिति देखी जाती है । 22 दिसम्बर के उपरान्त 21 मार्च तक सूर्य पुनः विषुवत रेखा की ओर उन्मुख होता है तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में धीरे-धीरे ग्रीष्म ऋतु की समाप्ति हो जाती है ।

iii. #21_मार्च_व_23_सितम्बर_की_स्थितियाँ :

इन दोनों स्थितियों में सूर्य विषुवत रेखा पर लम्बवत चमकता है । अतः इस समय समस्त अक्षांश रेखाओं का आधा भाग सूर्य का प्रकाश प्राप्त करता है । अतः सर्वत्र दिन व रात की अवधि बराबर होती है ।

इस समय दिन व रात की अवधि के बराबर रहने एवं ऋतु की समानता के कारण इन दोनों स्थितियों को ‘विषुव’ अथवा ‘सम रात-दिन’ (Equinox) कहा जाता है । 21 मार्च की स्थिति को ‘बसंत विषुव’ (Spring Equinox) एवं 23 सितम्बर वाली स्थिति को ‘शरद विषुव’ (Autumn Equinox) कहा जाता है ।

#ज्वार_भाटा :

सूर्य व चन्द्रमा की आकर्षण शक्तियों के कारण सागरीय जल के ऊपर उठने तथा गिरने को ‘ज्वार भाटा’ कहा जाता है । इससे उत्पन्न तरंगों को ज्वारीय तरंग कहते हैं । विभिन्न स्थानों पर ज्वार-भाटा की ऊँचाई में पर्याप्त भिन्नता होती है, जो सागर में जल की गहराई, सागरीय तट की रूपरेखा तथा सागर के खुले होने या बंद होने पर आधारित होती है ।

यद्यपि सूर्य चन्द्रमा से बहुत बड़ा है, तथापि सूर्य की अपेक्षा चन्द्रमा की आकर्षण शक्ति का प्रभाव दोगुना है । इसका कारण सूर्य का चन्द्रमा की तुलना में पृथ्वी से दूर होना है ।

24 घंटे में प्रत्येक स्थान पर दो बार ज्वार भाटा आता है । जब सूर्य, पृथ्वी तथा चन्द्रमा एक सीधी रेखा में होते हैं तो इस समय उनकी सम्मिलित शक्ति के परिणामस्वरूप दीर्घ ज्वार का अनुभव किया जाता है । यह स्थिति सिजिगी (Syzygy) कहलाती है । ऐसा पूर्णमासी व अमावस्या को होता है ।

इसके विपरीत जब सूर्य, पृथ्वी व चन्द्रमा मिलकर समकोण बनाते हैं तो चन्द्रमा व सूर्य का आकर्षण बल एक दूसरे के विपरीत कार्य करते हैं । फलस्वरूप निम्न ज्वार का अनुभव किया जाता है । ऐसी स्थिति कृष्ण पक्ष एवं शुक्ल पक्ष के सप्तमी या अष्टमी को देखा जाता है । लघु ज्वार सामान्य ज्वार से 20% नीचा व दीर्घ ज्वार सामान्य ज्वार से 20% ऊँचा होता है ।

पृथ्वी पर चन्द्रमा के सम्मुख स्थित भाग पर चन्द्रमा की आकर्षण शक्ति के कारण ज्वार आता है, किन्तु इसी समय पृथ्वी पर चन्द्राविमुखी भाग पर ज्वार आता है । इसका कारण पृथ्वी के घूर्णन को संतुलित करने के लिए अपकेन्द्री बल (Centrifugal Force) का शक्तिशाली होना है ।

उपरोक्त बलों के प्रभाव के कारण प्रत्येक स्थान पर 12 घंटे के बाद ज्वार आना चाहिए किन्तु यह प्रति दिन लगभग 26 मिनट की देरी से आता है । इसका कारण चन्द्रमा का पृथ्वी के सापेक्ष गतिशील होना है ।

कनाडा के न्यू ब्रंसविक तथा नोवा स्कोशिया के मध्य स्थित फंडी की खाड़ी में ज्वार की ऊँचाई सर्वाधिक (15 से 18 मी.) होती है, जबकि भारत के ओखा तट पर मात्र 2.7 मी. होती है ।

इंग्लैंड के दक्षिणी तट पर स्थित साउथैम्पटन में प्रतिदिन चार बार ज्वार आते हैं । ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ये दो बार इंग्लिश चैनल होकर एवं दो बार उत्तरी सागर से होकर विभिन्न अंतरालों पर वहाँ पहुँचते हैं ।

नदियों को बड़े जलयानों के लिए नौ संचालन योग्य बनाने में ज्वार सहायक होतेहैं । टेम्स और हुगली नदियों में प्रवेश करने वाले ज्वारीय धाराओं के कारण ही क्रमशः लंदन व कोलकाता महत्वपूर्ण पत्तन बन सके हैं । नदियों द्वारा लाए गए अवसाद भाटा के साथ बहकर समुद्र में चले जाते हैं तथा इस प्रकार डेल्टा निर्माण की प्रक्रिया में बाधा पहुँचती है ।

जल विद्युत के उत्पादन हेतु भी ज्वारीय ऊर्जा का प्रयोग किया जाता है । फ्रांस व जापान में ज्वारीय ऊर्जा पर आधारित कुछ विद्युत केन्द्र विकसित किए गए हैं । भारत में खंभात की खाड़ी व कच्छ की खाड़ी में इसके विकास की अच्छी संभावना है ।

#ज्वार_भाटा_के_उत्पत्ति_की_संकल्पनाएँ :

i. न्यूटन का गुरूत्वाकर्षण बल सिद्धान्त (1687 ई.)
ii. लाप्लास का गतिक सिद्धान्त (1755 ई.)
iii. ह्वैवेल का प्रगामी तरंग सिद्धांत (1833 ई.)
iv. एयरी का नहर सिद्धांत (1842 ई.)
v. हैरिस का स्थैतिक तरंग सिद्धान्त

#सूर्यग्रहण_और_चन्द्रग्रहण :

पृथ्वी और चन्द्रमा दोनों को प्रकाश सूर्य से मिलता है । पृथ्वी पर से चन्द्रमा का एक भाग ही दिखता है, क्योंकि पृथ्वी और चन्द्रमा की घूर्णन गति समान है । पृथ्वी पर चन्द्रमा का सम्पूर्ण प्रकाशित भाग महीने में केवल एक बार अर्थात् पूर्णिमा (Full Moon) को दिखाई देता है ।

इसी प्रकार महीने में एक बार चन्द्रमा का सम्पूर्ण अप्रकाशित भाग पृथ्वी के सामने होता है तथा तब चन्द्रमा दिखाई नहीं देता; इसे अमावस्या (New Moon) कहते हैं ।

जब सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा एक सरल रेखा में होते हैं तो इस स्थिति को युति-वियुति (Conjuction) या सिजिगी (Syzygy) कहते हैं, जिसमें युति सूर्यग्रहण की स्थिति में व वियुति (Opposition) चन्द्रग्रहण की स्थिति में बनते हैं ।

जब पृथ्वी, सूर्य और चन्द्रमा के बीच आ जाता है तो सूर्य की रोशनी चन्द्रमा तक नहीं पहुँच पाती तथा पृथ्वी की छाया के कारण उस पर अंधेरा छा जाता है । इस स्थिति को चन्द्रग्रहण (Lunar Eclipse) कहते हैं । चन्द्रग्रहण हमेशा पूर्णिमा की रात को होता है ।

सूर्यग्रहण की स्थिति तब बनती है, जब सूर्य एवं पृथ्वी के बीच चन्द्रमा आ जाए तथा पृथ्वी पर सूर्य का प्रकाश न पड़कर चन्द्रमा की परछाईं पड़े । सूर्यग्रहण (Solar Eclipse) हमेशा अमावस्या को होता है । प्रत्येक अमावस्या को सूर्यग्रहण एवं प्रत्येक पूर्णिमा को चन्द्रग्रहण लगना चाहिए, परंतु ऐसा नहीं होता क्योंकि चन्द्रमा अपने अक्ष पर 50 झुकाव लिए हुए है ।

जब चन्द्रमा और पृथ्वी एक ही बिंदु पर परिक्रमण पथ में पहुँचती हैं तो उस समय चन्द्रमा अपने अक्षीय झुकाव के कारण थोड़ा आगे निकल जाता है ।

इसी कारण प्रत्येक पूर्णिमा और अमावस्या की स्थिति में ग्रहण नहीं लगता एक वर्ष में अधिकतम सात चन्द्रग्रहण एवं सूर्यग्रहण की स्थिति हो सकती है पूर्ण सूर्यग्रहण देखे जाते हैं, परंतु पूर्ण चन्द्र ग्रहण प्रायः नहीं देखा जाता, क्योंकि सूर्य, चन्द्रमा एवं पृथ्वी के आकार में पर्याप्त अंतर है ।

22 जुलाई, 2009 को 21वीं सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्यग्रहण देखा गया । सूर्यग्रहण के समय बड़ी मात्रा में पराबैंगनी (Ultra Violet) किरणें उत्सर्जित होती हैं इसीलिए नंगी आँखों से सूर्य ग्रहण देखने से मना किया जाता है । पूर्ण सूर्यग्रहण के समय सूर्य के परिधीय क्षेत्रों में हीरक वलय (Diamond Ring) की स्थिति बनती है ।


3

#विश्व_का_भूगोल :
#अक्षांश_और_देशांतर_रेखाएं

पृथ्वी में किसी स्थान की भौगोलिक स्थिति का निर्धारण अक्षांश (latitude) और देशांतर (Longitude) रेखाओं द्वारा किया जाता है।

किसी स्थान का अक्षांश (latitude), धरातल पर उस स्थान की  “उत्तर से दक्षिण” की स्थिति को तथा किसी स्थान का देशांतर (Longitude), धरातल पर उस स्थान की “पूर्व से पश्चिम” की स्थिति को प्रदर्शित करता है। उत्तरी ध्रुवों (North Pole) व दक्षिणी ध्रुवों (South Pole) के अक्षांश (latitude) क्रमशः 90° उत्तर तथा 90° दक्षिण है।

नोट : किसी भी स्थान के देशांतर (Longitude) को प्रधान याम्योत्तर (Prime Mediterranean) के सापेक्ष अभिव्यक्त किया जाता है।

#अक्षांश_रेखाएँ (Latitude lines)

भूमध्य रेखा (Equator) के समानांतर से किसी भी स्थान की उत्तरी अथवा दक्षिणी ध्रुव की ओर की ओर खींची गई रेखाओं को अक्षांश (latitude) रेखा कहते है। भूमध्य रेखा (Equator) को (0°) की अक्षांश रेखा माना गया है। भूमध्य रेखा (Equator) से उत्तरी ध्रुव की ओर की सभी दूरियाँ उत्तरी अक्षांश और दक्षिणी ध्रुव की ओर की सभी दूरियाँ दक्षिणी अक्षांश में मापी जाती है। ध्रुवों की ओर बढ़ने पर भूमध्य रेखा (Equator) से अक्षांश (latitude) की दूरी बढ़ने लगती है। इसके अतिरिक्त सभी अक्षांश रेखाएँ (Latitude lines) परस्पर समानांतर और पूर्ण वृत्त होती हैं। ध्रुवों की ओर जाने से वृत्त छोटे होने लगते हैं। 90° का अक्षांश ध्रुव पर एक बिंदु में परिवर्तित हो जाता है।

#महत्वपूर्ण_वृत्त

▪️विषुवत् वृत्त (0°) (E)
▪️उत्तर ध्रुव (90°)
▪️दक्षिण ध्रुव (90°)

#महत्त्वपूर्ण_अक्षांश_रेखाएँ

▪️विषुवत्  रेखा (0°) (Equator Line)
▪️उत्तरी गोलार्ध में कर्क रेखा (23.5°) (Cancer Line)
▪️दक्षिणी गोलार्ध में मकर रेखा (23.5°)  (Capcorian line)

#पृथ्वी_के_ताप_कटिबंध

#उष्ण_कटिबंध – कर्क रेखा एवं मकर रेखा के बीच के सभी अक्षांशों पर सूर्य वर्ष में एक बार दोपहर में सिर के ठीक ऊपर होता है। इसलिए इस क्षेत्र में सबसे अधिक ऊष्मा प्राप्त होती है तथा इसे उष्ण कटिबंध कहा जाता है। कर्क रेखा तथा मकर रेखा के बाद किसी भी अक्षांश पर दोपहर का सूर्य कभी भी सिर के ऊपर नहीं होता है। ध्रुव की तरफ सूर्य की किरणें तिरछी होती जाती हैं।

#शीतोष्ण_कटिबंध – उत्तरी गोलार्ध में कर्क रेखा एवं उत्तर ध्रुव वृत्त तथा दक्षिणी गोलार्ध में मकर रेखा एवं दक्षिण ध्रुव वृत्त के बीच वाले क्षेत्र का तापमान मध्यम रहता है। इसलिए इन्हें, शीतोष्ण कटिबंध कहा जाता है।

#शीत_कटिबंध – उत्तरी गोलार्ध में उत्तर ध्रुव वृत्त एव  उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिण ध्रुव वृत्त एव  दक्षिणी ध्रुव  के बीच के क्षेत्र में ठडं बहतु होती है। क्योंकि, यहाँ सूर्य क्षितिज से ज़्यादा ऊपर नहीं आ पाता है। इसलिए ये शीत कटिबंध कहलाते हैं।

#देशांतर_रेखाएँ (Longitudes lines)

उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव को मिलाने वाली 360 डिग्री रेखाओं को देशांतर रेखाएं कहा जाता है, यह ग्‍लोब पर उत्तर से दक्षिण  दोनों भूगोलीय ध्रुवों (उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव ) के बीच खींची हुई काल्पनिक मध्याह्न रेखाओं को देशांतर रेखाएं कहा जाता है । जो मध्याह्न रेखा जिस बिंदु या स्थान से गुजरती है उसका कोणीय मान उस स्थान का देशांतर होता है। सभी देशांतर रेखाएं अर्ध-वृत्ताकार होती हैं। ये समांनांतर नहीं होती हैं व उत्तरी व दक्षिणी ध्रुवों पर अभिसरित होकर मिल जाती हैं।

ग्रीनविच , जहाँ ब्रिटिश राजकीय वेधशाला स्थित है, से गुजरने वाली याम्योत्तर से पूर्व और पश्चिम की ओर गिनती शुरू की जाए। इस याम्योत्तर को प्रमुख याम्योत्तर (Prime Mediterranean)  कहते हैं। इसका मान 0° देशांतर है तथा यहाँ से हम 180° पूर्व या 180° पश्चिम तक गणना करते हैं। प्रधान याम्योत्तर (Prime Mediterranean) तथा 180° याम्योत्तर मिलकर पृथ्वी को दो समान भागों, पूर्वी गोलार्ध एवं पश्चिमी गोलार्ध में विभक्त करती है। इसलिए किसी स्थान के देशांतर के आगे पूर्व के लिए अक्षर पू. तथा पश्चिम के लिए अक्षर प. का उपयोग करते हैं।  180° पूर्व और 180° पश्चिम याम्योत्तर एक ही रेखा पर स्थित हैं।

#देशांतर_और_समय (Longitude & Time)

समय को मापने का सबसे अच्छा साधन पृथ्वी, चंद्रमा एवं ग्रहों की गति है। सूर्योदय एवं सूर्यास्त प्रतिदिन होता है। अतः स्वाभाविक ही है कि यह पूरे विश्व में समय निर्धारण का सबसे अच्छा साधन है। स्थानीय समय का अनुमान सूर्य के द्वारा बनने वाली परछाईं से लगाया जा सकता है, जो दोपहर में सबसे छोटी एवं सूर्योदय तथा सूर्यास्त केसमय सबसे लंबी होती है।

ग्रीनविच  पर स्थित प्रमुख याम्योत्तर पर सूर्य जिस समय आकाश के सबसे ऊँचे बिंदु पर होगा, उस समय याम्योत्तर पर स्थित सभी स्थानों
पर दोपहर होगी। चूँकि, पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर चक्कर लगाती है, अतः वे स्थान जो  ग्रीनविच  के पूर्व में हैं, उनका समय ग्रीनविच समय से आगे होगा तथा जो पश्चिम में हैं, उनका समय पीछे होगा ।

भारत के मध्य भाग इलाहाबाद के मिर्जापुर के नैनी से होकर गुजरने वाली  याम्योत्तर रेखा (82,1/2°) (Standard Mediterranean Line) के स्थानीय समय को देश का मानक समय माना जाता है।
पृथ्वी लगभग 24 घंटे में अपने अक्ष पर 360° घूम जाती है अर्थात्  1 घंटे में (360/24) 15°  एवं 4 मिनट में 1° घूमती है। अर्थात डिग्री देशांतर दुरी तय करने में 4 Minute का समय लगता है
भारत में गुजरात के द्वारका तथा असम के डिब्रूगढ़ वेफ स्थानीय समय में लगभग 1 घंटा 45 मिनट का अंतर है।
भारत और ग्रीनविच (लंदन) के समय में 5:30 घंटे का अंतर  है , इसलिए जब लंदन में दोपहर के 2 बजे होंगे, तब भारत में शाम के 7ः30 बजे होंगे।
कुछ देशों का देशांतरीय विस्तार अधिक होता है, जिसके कारण वहाँ एक से अधिक मानक समय अपनाए गए हैं। उदाहरण के लिए, रूस में 11 मानक समयों को अपनाया गया है।
विषुवत रेखा पर इसके बीच की दूरी अधिकतम 111.32 Km होती है।

Wonderful Questions

प्रश्नों का संकलन बहुत ही सुन्दर ढंग से किया गया है...


बहुत आराम से पढ़िएगा मजा अन्तिम में आएगा। हमने आपको बता दिया खैर कोई बात नहीं आनंदित होइए ।।


*1.* क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान का देश में कौन सा स्थान है ?
*2.* मोदी सरकार का यह  कौन-सा कार्यकाल है ?
*3.* कितने चम्मच से एक टेबल स्पून बनता है ?
*4*  हिन्दू पुराणों में कितने वेद होते हैं ?
*5*. राष्ट्रपति का कार्यकाल कितने-कितने वर्ष का होता है ?
*6*. भारत की तुलना में और कितने देशों का क्षेत्रफल बड़ा  है ?
*7.* पानी का Ph. मान क्या होता है ?
*8*. सौर मण्डल में कुल कितने ग्रह हैं ?
*9*.संविधान की कौन सी अनुसूची प्रथम संशोधन द्वारा शामिल की गयी ?
*10.* कितने मिलीमीटर का एक सेण्टीमीटर बनता है ?
*11.* एक फुटबॉल टीम में कितने खिलाड़ी होते हैं ?
*12.* कितने इंच का एक फीट  होता है ?
*13* उद्देश्य प्रस्ताव दिसम्बर की किस तारीख को प्रस्तुत किया गया था ?
*14*. लोकसभा में पारित बजट को राज्यसभा कितने दिनों तक रोक सकती है ?
*15.* एक समय का वाहन कर कितने वर्षों के लिए वैध होता है ?
*16.* शटल कॉक में कितने पंख होते हैं ?
*17*. भारतीय मुद्रा में कितनी भाषाएँ छपी होती हैं ?
*18*. महाभारत में कुल कितने अध्याय हैं ?
*19*.वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार संविधान के किस अनुच्छेद में है ?
*20*. टी -20 क्रिकेट में प्रति टीम कितने ओवर होते हैं ?
*21*. महात्मा गाँधी ने दक्षिण अफ्रीका में कुल कितने वर्ष गुजारे थे ?
*22*. भारत के संविधान में मूलतः कितने भाग हैं ?
*23*.मानव शरीर में कुल कितने जोड़ी गुणसूत्र (क्रोमोजोम) होते हैं ?
*24*. एक अशोक चक्र में कुल कितनी लाइन्स होती हैं ?
*25*. M.L.A. बनने के लिए कम से कम कितने वर्ष आयु की अनिवार्यता होती है ?

                *.....*उत्तर*....*

*सभी प्रश्नों के उत्तर उनके *क्रमांक* ही हैं।

                       🙏🏻🙏🏻

Wednesday, June 10, 2020

चार_युग_और_उनकी_विशेषताएं

चार_युग_और_उनकी_विशेषताएं

#युग शब्द का अर्थ होता है एक निर्धारित संख्या के वर्षों की काल-अवधि। जैसे सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, कलियुग आदि। आज में हम चारों युगों का वर्णन करेंगें। युग वर्णन से तात्पर्य है कि उस युग में किस प्रकार से व्यक्ति का जीवन, आयु, ऊँचाई, एवं उनमें होने वाले अवतारों के बारे में विस्तार से परिचय देना। प्रत्येक युग के वर्ष प्रमाण और उनकी विस्तृत जानकारी कुछ इस तरह है –

⚜️ #सत्ययुग- यह प्रथम युग है इस युग की विशेषताएं इस प्रकार है –

सत्ययुग का तीर्थ – पुष्कर है ।

इस युग में पाप की मात्र – 0 विश्वा अर्थात् (0%) होती है ।
इस युग में पुण्य की मात्रा – 20 विश्वा अर्थात् (100%) होती है !

इस युग के अवतार – मत्स्य, कूर्म, वाराह, नृसिंह (सभी अमानवीय अवतार हुए) है ! अवतार होने का कारण – शंखासुर का वध एंव वेदों का उद्धार, पृथ्वी का भार हरण, हरिण्याक्ष दैत्य का वध, हिरण्यकश्यपु का वध एवं प्रह्लाद को सुख देने के लिए।

इस युग की मुद्रा – रत्नमय है ।
इस युग के पात्र – स्वर्ण के है ।
काल - 17,28000 वर्ष
मनुष्य की लंबाई - 32 फ़ीट
आयु - 1 लाख वर्ष

⚜️ 2) #त्रेतायुग – यह द्वितीय युग है इस युग की विशेषताएं इस प्रकार है –

त्रेतायुग का तीर्थ – नैमिषारण्य है ।

इस युग में पाप की मात्रा – 5 विश्वा अर्थात् (25%) होती है ।
इस युग में पुण्य की मात्रा – 15 विश्वा अर्थात् (75%) होती है ।
इस युग के अवतार – वामन, परशुराम, राम (राजा दशरथ के घर)

अवतार होने के कारण – बलि का उद्धार कर पाताल भेजा, मदान्ध क्षत्रियों का संहार, रावण-वध एवं देवों को बन्धनमुक्त करने के लिए ।

इस युग की मुद्रा – स्वर्ण है ।
इस युग के पात्र – चाँदी के है ।
काल - 12,96,000 वर्ष
मनुष्य की लंबाई - 21 फ़ीट
आयु - 10,000 वर्ष

⚜️ 3) #द्वापरयुग – यह तृतीय युग है इस युग की विशेषताएं इस प्रकार है –

द्वापरयुग का तीर्थ – कुरुक्षेत्र है ।

इस युग में पाप की मात्रा – 10 विश्वा अर्थात् (50%) होती है ।
इस युग में पुण्य की मात्रा – 10 विश्वा अर्थात् (50%) होती है ।
इस युग के अवतार – कृष्ण, (देवकी के गर्भ से एंव नंद के घर पालन-पोषण)।

अवतार होने के कारण – कंसादि दुष्टो का संहार एंव गोपों की भलाई, दैत्यो को मोहित करने के लिए ।
इस युग की मुद्रा – चाँदी है ।
इस युग के पात्र – ताम्र के हैं ।
काल - 8,64,000 वर्ष
मनुष्य की लंबाई - 11 फ़ीट
आयु - 1,000 वर्ष

⚜️ 4) #कलियुग – यह चतुर्थ युग है इस युग की विशेषताएं इस प्रकार है –

कलियुग का तीर्थ – गंगा है ।

इस युग में पाप की मात्रा – 15 विश्वा अर्थात् (75%) होती है ।
इस युग में पुण्य की मात्रा – 5 विश्वा अर्थात् (25%) होती है ।
इस युग के अवतार – कल्कि (ब्राह्मण विष्णु यश के घर) ।

अवतार होने के कारण – मनुष्य जाति के उद्धार अधर्मियों का विनाश एंव धर्म कि रक्षा के लिए।

इस युग की मुद्रा – लोहा है।
इस युग के पात्र – मिट्टी के है।
काल - 4,32,000 वर्ष
मनुष्य की लंबाई - 5.5 फ़ीट
आयु - 60-100 वर्ष.

Tuesday, June 9, 2020

Special इंडिया या About India

Special इंडिया या About India...

भारत के आविष्कार व खोज...

*पाई का मान भारत की देन है।*

*योग की शुरूआत भारत में हुई।*

*70% मसाले भारत की देन है।*

*शैंपू का आविष्कार भारत में हुआ।*

*बटन का आविष्कार भारत में हुआ।*

*लोहे का आविष्कार भारत में हुआ।*

*चीनी का आविष्कार भारत में हुआ।*

*स्याही का आविष्कार भारत में हुआ।*

*USB का आविष्कार भारत में*

*चाँद पर पानी की खोज भारत ने की।*

*Ruler का आविष्कार भारत में हुआ।*

*Chess का आविष्कार भारत में हुआ।*

*दशमलव का आविष्कार भारत में हुआ*

*बाइनरी कोड का आविष्कार भारत में हुआ।*

*पेंटियम चिप का आविष्कार भारत में हुआ।*

*स्केल (फुटा) का आविष्कार भारत में हुआ।*

*ताश के खेल का आविष्कार भारत में हुआ।*

*फ्लश टॉयलेट का आविष्कार भारत में हुआ।*

*प्लास्टिक सर्जरी का आविष्कार भारत में हुआ।*

*नौकायन की कला का आविष्कार भारत में हुआ।*

*ऑप्टिकल फाइबर का आविष्कार भारत में हुआ।*

*Steel का उत्पादन करने वाला भारत पहला देश है।*

*0, Zero का आविष्कार भारत के आर्यभट्ट ने किया।*

*सांप-सीढ़ी और लूडो के खेल का आविष्कार भारत में हुआ।*

*दुनिया के पहले फिंगरप्रिंट ब्यरों की स्थापना 1897 में भारत में हुई।*

*दुनिया की पहली मोतियाबिंद सर्जरी भारत में हुई!!*

*दुनिया का पहला विश्वविद्यालय ‘तक्षशिला’ भारत में है!!*