* ज़्यादा पानी पीने से ब्रूस ली की मृत्य *
हम में से अधिकांश लोगों ने यह बात सुनी है:
“जितना ज़्यादा पानी पियोगे, उतने स्वस्थ रहोगे।”
लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है ?
2022 में कुछ शोधकर्ताओं ने यह संभावना व्यक्त की कि महान मार्शल आर्टिस्ट Bruce Lee जो मार्शल आर्ट के अभ्यास के दौरान ऊर्जा का स्तर अच्छा रखने के लिए बार बार ( अत्यधिक ) पानी पीते थे
की मृत्यु का एक कारण शरीर में पानी और सोडियम का बिगड़ा हुआ संतुलन भी हो सकता है।
यह अंतिम निष्कर्ष नहीं है, लेकिन इसने एक महत्वपूर्ण चर्चा को जन्म दिया।
क्योंकि हम अक्सर पानी की कमी के नुकसान तो सुनते हैं, लेकिन पानी की अधिकता के नुकसान पर बहुत कम बात करते हैं।
शरीर को केवल सादा पानी नहीं मिलता
जब हम कहते हैं कि “मैंने आज 2 लीटर पानी पिया”, तो हम अक्सर भूल जाते हैं कि शरीर को पानी केवल गिलास से नहीं मिलता।
पानी मिलता है:
* चाय से
* दूध से
* छाछ से
* नारियल पानी से
* फलों से
* सब्जियों से
* दाल और भोजन से
यानी शरीर के लिए पानी का हिसाब केवल बोतल से नहीं लगाया जा सकता।
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शरीर को पानी नहीं, संतुलन चाहिए
हमारा शरीर केवल H₂O से नहीं चलता।
उसे सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और अन्य खनिजों की भी आवश्यकता होती है।
विशेष रूप से सोडियम।
सोडियम की सहायता से:
* नसों में संदेश चलते हैं
* मांसपेशियाँ काम करती हैं
* मस्तिष्क सही ढंग से कार्य करता है
* रक्तचाप नियंत्रित रहता है
* कोशिकाओं के भीतर और बाहर पानी का संतुलन बना रहता है
सरल भाषा में:
सोडियम शरीर में पानी का ट्रैफिक कंट्रोलर है।
ज़्यादा पानी पीने पर क्या होता है ?
जब कोई व्यक्ति आवश्यकता से अधिक पानी पीता रहता है, तो शरीर उस अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने की कोशिश करता है।
लेकिन यदि पानी बहुत अधिक हो जाए, तो रक्त में मौजूद सोडियम पतला होने लगता है।
यही स्थिति आगे चलकर Hyponatremia कहलाती है।
शुरुआत में इसके लक्षण हो सकते हैं:
* सिरदर्द
* चक्कर
* कमजोरी
* मतली
* ध्यान न लगना
और गंभीर स्थिति में:
* भ्रम
* बेहोशी
* मस्तिष्क में सूजन
तक हो सकती है।
समझने योग्य बात ये है कि
हमारी किडनी कोई वॉशिंग मशीन नहीं है
आजकल एक और भ्रम बहुत प्रचलित है:
“जितना अधिक पानी, उतनी साफ किडनी।”
लेकिन किडनी का काम शरीर में पानी भरना नहीं, बल्कि संतुलन बनाए रखना है।
यदि आप ज़रूरत से अधिक पानी पीते हैं, तो किडनी को लगातार अतिरिक्त पानी बाहर निकालने का काम करना पड़ता है।
यह कोई अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ नहीं है।
यह केवल शरीर की संतुलन बनाए रखने की कोशिश है।
जिस प्रकार किसी मशीन को लगातार उसकी आवश्यकता से अधिक चलाना उसकी सेहत का प्रमाण नहीं होता, उसी प्रकार किडनी को भी बिना आवश्यकता अतिरिक्त काम करवाना स्वास्थ्य का प्रमाण नहीं है।
सबसे बड़ा भ्रम
आज सोशल मीडिया पर अक्सर कहा जाता है:
* दिन में 5 लीटर पानी पियो
* हर घंटे पानी पियो
* प्यास लगे या न लगे पानी पियो
* जितना ज़्यादा पानी, उतना ज़्यादा डिटॉक्स
लेकिन एक प्रश्न पूछिए:
यदि शरीर को पानी की आवश्यकता ही नहीं है, तो उसे ज़बरदस्ती क्यों दिया जाए?
क्या हम भूख न होने पर लगातार खाना खाते रहते हैं ?
नहीं।
तो फिर प्यास न होने पर लगातार पानी क्यों ?
शरीर का संकेत क्या है इसलिए ही मैं आपको हमेशा ये कहता हूँ कि शरीर के उन अलार्मिंग सिस्टम को पहचानना शुरू करे
जो आपको , भूख , प्यास , नींद , मल मूत्र त्याग के ग्रहण और विसर्जन की जानकारी देता है ।
स्वस्थ व्यक्ति के लिए सबसे बड़ा संकेत है:
प्यास।
प्यास शरीर की भाषा है।
जब शरीर को पानी चाहिए, वह संकेत देता है।
जब नहीं चाहिए, तब केवल किसी इंटरनेट पोस्ट, वीडियो या फैशन के कारण पानी पीते रहना हमेशा बुद्धिमानी नहीं है।
निष्कर्ष
कम पानी पीना हानिकारक हो सकता है।
लेकिन ज़रूरत से अधिक पानी पीना भी हमेशा लाभकारी नहीं होता।
याद रखिए:
शरीर को केवल पानी नहीं चाहिए,
शरीर को पानी और खनिजों का संतुलन चाहिए।
और शायद ब्रूस ली की मृत्यु पर हुई चर्चा हमें यही याद दिलाती है कि—
कभी-कभी समस्या पानी की कमी नहीं होती, बल्कि पानी की अधिकता भी हो सकती है।
स्वास्थ्य का नियम आज भी वही है:
न कमी अच्छी है, न अति।
शरीर को मात्रा नहीं, संतुलन चाहिए।
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