Saturday, July 4, 2026

अजीब बात है

लंबी यात्रा में

खिड़की वाली सीट पर बैठा इंसान

सिर्फ़ नज़ारे नहीं देखता,

वो हर गुज़रते पेड़ के साथ

अपनी बीती यादों को भी

एक-एक कर गिनता है।


पटरी पर दौड़ती हुई ट्रेन

उसे मंज़िल तक कम,

अपने अतीत तक ज़्यादा ले जाती है।


कभी कोई स्टेशन आता है,

तो उसे किसी की पहली मुलाक़ात याद आ जाती है।

कभी कोई सुनसान खेत गुजरता है,

तो किसी की ख़ामोशी का दर्द साथ चलने लगता है।


खिड़की के बाहर सब कुछ भाग रहा होता है,

लेकिन भीतर...

कुछ भी नहीं भागता।


कुछ चेहरे वहीं ठहरे रहते हैं,

कुछ आवाज़ें वहीं अटकी रहती हैं,

कुछ अधूरी बातें

आज भी उसी मोड़ पर खड़ी मिलती हैं

जहाँ उन्हें आख़िरी बार छोड़ा था।


अजीब बात है...


सफ़र जितना लंबा होता जाता है,

दिल उतना ही पीछे लौटने लगता है।


वो उन दिनों में चला जाता है

जब किसी का नाम सुनकर मुस्कुराहट आ जाती थी,

जब मोबाइल की एक घंटी

पूरे दिन की थकान मिटा देती थी,

जब किसी के "कैसे हो?" में

पूरी दुनिया की मोहब्बत छुपी लगती थी।


फिर अचानक याद आता है

कि अब न वो दिन हैं,

न वो बातें हैं,

न वो साथ है।


बस यादें हैं...


और यादों की भी अपनी ज़िद होती है।


वे तब आती हैं

जब इंसान अकेला होता है,

जब रात थोड़ी गहरी होती है,

या जब किसी ट्रेन की खिड़की के पास बैठा

दूर तक फैले आसमान को देख रहा होता है।


मैं भी आज

उसी खिड़की के पास बैठा हूँ।


बाहर पेड़ भाग रहे हैं,

खेत पीछे छूट रहे हैं,

स्टेशन आते-जाते जा रहे हैं।


लेकिन एक तुम हो...


जो न पीछे छूटती हो,

न आगे मिलती हो।


तुम मेरी उस यात्रा जैसी हो

जिसका टिकट तो कट चुका है,

मगर मंज़िल का पता नहीं।


मैंने तुम्हें भुलाने की

कितनी ही कोशिशें कीं,

मगर हर कोशिश के बाद

तुम पहले से ज़्यादा याद आईं।


शायद कुछ लोग

ज़िंदगी में साथ रहने के लिए नहीं आते,

बल्कि इतना गहरा असर छोड़ने आते हैं

कि उनके जाने के बाद भी

दिल उन्हें जाने नहीं देता।


ट्रेन अपनी रफ़्तार से दौड़ रही है,

समय अपनी चाल से गुजर रहा है,

और मैं...


मैं अब भी उसी जगह खड़ा हूँ

जहाँ तुमने मेरा हाथ छोड़ा था।


फ़र्क बस इतना है कि

उस दिन प्लेटफ़ॉर्म पीछे छूट गया था,

और आज पूरी ज़िंदगी।


कभी-कभी लगता है,

सबसे लंबी यात्राएँ

शहरों के बीच नहीं होतीं...


वे दिल और यादों के बीच होती हैं।


और यक़ीन मानो,


उन यात्राओं का

कोई अंतिम स्टेशन नहीं होता...

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