मोबाइल के दौर की मोहब्बत
पहले हम अजनबी थे,
फिर किसी बहाने एक बात हुई,
एक बात से दूसरी,
दूसरी से तीसरी,
और देखते ही देखते
हमारी सुबहें एक-दूसरे के नाम होने लगीं।
"गुड मॉर्निंग" में दिन उगता था,
"गुड नाइट" में रात ढलती थी,
बीच का हर लम्हा
एक-दूसरे की आवाज़,
एक-दूसरे की मौजूदगी,
और एक-दूसरे की आदत में गुजरता था।
धीरे-धीरे
हम बातों से बढ़कर
एक-दूसरे की दिनचर्या बन गए।
मगर फिर एक दिन
बातों की रफ्तार धीमी पड़ने लगी।
जो घंटों ऑनलाइन रहते थे,
अब मिनटों में गायब हो जाते थे।
जो कहते थे,
"तुम्हारे बिना दिन नहीं कटता",
वही अब दिनों-दिन
बिना किसी खबर के गुजारने लगे।
पहले जवाब देर से आया,
फिर और देर से,
फिर सिर्फ बहाने आने लगे।
"बहुत बिजी हूँ..."
यह एक ऐसा झूठ था
जो हर बार नया लिबास पहनकर आता था।
अजीब बात है ना...
जिस दौर में इंसान
अपने फोन को तकिए के नीचे रखकर सोता है,
जिस दौर में उंगलियाँ
दिन के दो-तिहाई हिस्से तक
स्क्रीन पर चलती रहती हैं,
उसी दौर में लोग कहते हैं—
"वक्त नहीं मिला।"
सच तो यह है कि
वक्त कभी खत्म नहीं होता,
बस हकदार बदल जाते हैं।
कोई इतना व्यस्त नहीं होता
कि चौबीस घंटे में
एक संदेश भी न भेज सके।
मगर लोग सच नहीं बोलते।
वे साफ-साफ नहीं कहते—
"अब तुम्हें याद करने का मन नहीं करता।"
वे नहीं कहते—
"अब किसी और ने तुम्हारी जगह ले ली है।"
वे नहीं कहते—
"तुम मेरी जरूरत थे,
मोहब्बत नहीं।"
इसलिए वे व्यस्तता का नकाब पहन लेते हैं,
ताकि धोखेबाज भी न कहलाएँ
और रिश्ता भी धीरे-धीरे मर जाए।
आजकल लोग
रिश्ते नहीं निभाते,
रिश्तों का इस्तेमाल करते हैं।
जब तक अकेले होते हैं,
तुम्हें ढूँढ़ते हैं।
जब तक उन्हें सहारे की जरूरत होती है,
तुम्हें याद करते हैं।
जब तक उनकी रातें सूनी होती हैं,
तुमसे बातें करते हैं।
और जिस दिन
कोई नया चेहरा,
कोई नई आवाज़,
कोई नई दिलचस्पी
उनकी जिंदगी में दाखिल हो जाती है,
तुम्हारा अध्याय वहीं खत्म कर दिया जाता है।
बिना विदाई।
बिना कारण।
बिना किसी पछतावे के।
तब समझ जाना...
तुम उनकी जिंदगी का हिस्सा नहीं थे,
तुम सिर्फ एक विकल्प थे।
एक खाली जगह भरने का जरिया।
और ऐसे लोग
प्यार नहीं देते,
सिर्फ घुटन देते हैं।
वे तुम्हें यह सोचने पर मजबूर कर देते हैं
कि शायद गलती तुम्हारी थी,
जबकि सच्चाई यह होती है
कि उनका चरित्र ही अस्थायी था।
इसलिए जिस दिन
किसी के बहाने
उसकी बातों से ज्यादा होने लगें,
जिस दिन
उसकी मौजूदगी से ज्यादा
उसकी अनुपस्थिति दिखने लगे,
जिस दिन
तुम्हें अपने होने का सबूत देना पड़े,
उस दिन
अपने दिल का दरवाजा बंद कर देना।
क्योंकि मोहब्बत
समय माँगती है,
बहाने नहीं।
और जो इंसान
तुम्हारे लिए एक संदेश तक नहीं निकाल सकता,
वह तुम्हारे लिए
अपनी जिंदगी में कोई जगह भी नहीं निकाल पाएगा।
याद रखना—
जो सच में तुम्हारा होगा,
वह व्यस्त दिनों में भी
तुम तक पहुँचने का रास्ता ढूँढ़ लेगा।
और जो सिर्फ वक्त काट रहा होगा,
वह खाली होकर भी
तुमसे दूर रहने का बहाना ढूँढ़ लेगा।
No comments:
Post a Comment