🤔आखिर कैसे हुई बुद्ध की मृत्यु? महापरिनिर्वाण का सच🤔
लगभग 2500 साल पहले, 80 वर्ष की आयु में गौतम बुद्ध ने अपना अंतिम समय बिताया। उनकी मृत्यु आज भी इतिहासकारों और बौद्ध विद्वानों के बीच चर्चा का विषय है।
अंतिम यात्रा की कहानी
बुद्ध अपनी अंतिम यात्रा पर थे और वे वर्तमान कुशीनगर की ओर जा रहे थे। रास्ते में वे पावा नामक स्थान पहुँचे, जहाँ चुंद नामक एक लोहार ने उन्हें भोजन कराया।
बौद्ध ग्रंथों के अनुसार उस भोजन में "सूकर्मद्दव" (Sukara-Maddava) नामक एक विशेष व्यंजन था।
यहीं से विवाद शुरू होता है।
"सूकर्मद्दव" आखिर था क्या?
इसको लेकर विद्वानों के बीच तीन प्रमुख मत हैं:
1. सूअर का मांस
कुछ विद्वान मानते हैं कि इसका अर्थ "कोमल सूअर का मांस" था।
2. मशरूम
कई आधुनिक शोधकर्ताओं का मानना है कि यह कोई दुर्लभ जंगली मशरूम था जो गलती से जहरीला हो सकता था।
3. जंगली कंद या वनस्पति
कुछ विद्वानों का मत है कि यह कोई विशेष पौधा या कंद था जिसे सूअर खोजकर खाते थे।
लेकिन आज तक इसका निश्चित उत्तर नहीं मिला है।
भोजन के बाद क्या हुआ?
भोजन करने के कुछ समय बाद बुद्ध को पेट में तेज दर्द हुआ।
रक्तयुक्त दस्त (Bloody Dysentery) शुरू हो गए।
शरीर अत्यधिक कमजोर हो गया।
पर फिर भी उन्होंने अपनी यात्रा जारी रखी।
लेकिन सोचने वाली बात ये है कि उन्होंने 80 वर्ष की आयु में गंभीर बीमारी के होते हुए, कई किलोमीटर पैदल चलकर मृत्यु के अंतिम दिन तकअपने शिष्यों को अंतिम उपदेश दिया।
क्या उन्हें ज़हर दिया गया था?
लोकप्रिय कहानियों में कभी-कभी कहा जाता है कि बुद्ध को ज़हर दिया गया था।
लेकिन इतिहास में इसका कोई प्रमाण नहीं मिलता।
यदि किसी ने जानबूझकर ज़हर दिया होता तो बौद्ध ग्रंथों में उसका उल्लेख अवश्य मिलता।
इसके विपरीत, बुद्ध ने स्वयं अपने शिष्यों से कहा:
"चुंद को दोष मत देना। उसने श्रद्धा और सम्मान से भोजन कराया था।"
यानी स्वयं बुद्ध ने चुंद को निर्दोष घोषित कर दिया था।
आधुनिक इतिहासकार क्या कहते हैं?
आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञों ने विभिन्न संभावनाएँ बताई हैं:
फूड पॉइज़निंग
दूषित भोजन से गंभीर संक्रमण हुआ हो सकता है।
पेचिश (Dysentery)
रक्तयुक्त दस्त के वर्णन से यह संभावना मजबूत लगती है।
आंतों का संक्रमण
कुछ डॉक्टरों का मानना है कि उन्हें तीव्र गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण हुआ होगा।
वृद्धावस्था
80 वर्ष की आयु उस समय बहुत अधिक मानी जाती थी। इसलिए बीमारी और बढ़ती उम्र का संयुक्त प्रभाव भी मृत्यु का कारण हो सकता है।
बुद्ध के अंतिम शब्द
कहा जाता है कि महापरिनिर्वाण से पहले बुद्ध ने अपने शिष्यों से कहा:
"संसार की सभी वस्तुएँ नश्वर हैं। अपने उद्धार के लिए परिश्रम करते रहो।"
यह संदेश उनके पूरे दर्शन का सार माना जाता है।
इतिहास के उपलब्ध प्रमाणों के अनुसार:
बुद्ध की मृत्यु के पीछे किसी षड्यंत्र या ज़हर दिए जाने का प्रमाण नहीं है।
सबसे संभावित कारण दूषित भोजन, आंतों का संक्रमण या पेचिश जैसी बीमारी थी।
उनकी बढ़ती आयु ने भी बीमारी को घातक बना दिया।
स्वयं बुद्ध ने अंतिम भोजन कराने वाले चुंद को निर्दोष बताया था।
यही कारण है कि अधिकांश इतिहासकार मानते हैं कि बुद्ध की मृत्यु एक प्राकृतिक चिकित्सीय कारण से हुई थी, न कि किसी हत्या या साज़िश के कारण।
No comments:
Post a Comment