Friday, June 19, 2026

स्त्री हर युग की सबसे सुंदर विद्यार्थी है

 पुरुषों ने इतिहास लिखा होगा,पर स्त्रियों ने पीढ़ियाँ गढ़ी हैं...


जिस स्त्री के हाथों तक किताबें नहीं पहुँचीं,

उसने रिश्तों को पढ़ना सीख लिया।

जिसके हाथों में शिक्षा आई,

उसने सपनों को आकार देना सीख लिया।


जिसे शिक्षा का अवसर मिला,

उसने घर की चौखट और कर्मभूमि दोनों को संतुलित करना सीखा।


वह कभी एक घर की धुरी बनी,

कभी समाज की शक्ति।


समय बदलता रहा,

भूमिकाएँ बदलती रहीं,

पर एक बात कभी नहीं बदली


स्त्री ने हर दौर में स्वयं को गढ़ना,

सीखना और आगे बढ़ना सीखा।


वह अपने सपनों को टाल सकती है,

अपनी इच्छाओं को पीछे रख सकती है,

पर अपने उत्तरदायित्वों से मुँह मोड़ना नहीं जानती।


विपरीत परिस्थितियों में भी

उसने बिखरे हुए घरों को समेटा है,

टूटते रिश्तों को जोड़ा है,

और आने वाली पीढ़ियों के लिए

अपनी मुस्कान तक गिरवी रख दी है।


स्त्रियाँ जिम्मेदारियाँ छोड़ना नहीं,

उन्हें निभाते हुए आगे बढ़ना सीखती हैं।


स्त्री हर युग की सबसे सुंदर विद्यार्थी है,

जो उम्र भर सीखती है...

पर अपने उत्तरदायित्वों को कभी अधूरा नहीं छोड़ती...


"इतिहास त्याग कर जाने वालों को याद रखता है,

पर सभ्यता उन स्त्रियों के कंधों पर खड़ी है जिन्होंने रुककर सबको संभाला है।"


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