Tuesday, June 2, 2026

मैं बहुत बिजी हूँ

 वो कहती हैं — "मैं बहुत बिजी हूँ"


वो कहती हैं—

"मैं बहुत बिजी हूँ..."


और मैं सोचता हूँ,


क्या सचमुच इतना बिजी कोई इंसान हो सकता है

कि चौबीस घंटे में

तीस सेकंड का एक संदेश भी न लिख सके?


या फिर

सच यह है कि

जिसे याद करना हो,

उसे कभी व्यस्तता रोकती नहीं,

और जिसे भूलना हो,

उसके लिए बहाने खुद चलकर आ जाते हैं।


कितना आसान हो गया है न

इस दौर में झूठ बोलना।


हाथ में फोन,

आँखों में स्क्रीन,

उंगलियाँ लगातार चलती हुई,

स्टेटस अपडेट,

रील्स पर हँसी,

दूसरों की पोस्ट पर टिप्पणियाँ,


लेकिन जब बात तुम्हारी आती है,

तो अचानक उन्हें

"समय नहीं मिलता।"


समय नहीं मिलता...


या दिल नहीं करता?


साफ-साफ क्यों नहीं कहते—


कि अब कोई और

तुमसे ज्यादा दिलचस्प लगने लगा है।


कि अब किसी और की चैट

तुम्हारी चैट से ऊपर पिन हो चुकी है।


कि अब तुम्हारे संदेश

नोटिफिकेशन नहीं,

बोझ लगने लगे हैं।


मगर नहीं...


सच बोलने के लिए

जिगर चाहिए।


और झूठ बोलने के लिए

सिर्फ एक बहाना।


इसलिए वे बहाने चुनते हैं।


पहले कहते हैं—

"तुम बहुत खास हो।"


फिर कहते हैं—

"समझा करो, मैं व्यस्त हूँ।"


और अंत में

इतने दूर चले जाते हैं

जैसे कभी जानते ही न हों।


हैरानी की बात यह नहीं है

कि लोग बदल जाते हैं।


हैरानी की बात यह है

कि बदलने के बाद भी

वो खुद को वफादार साबित करने की कोशिश करते हैं।


जिस दिन उनका मन भर जाता है,

उसी दिन से

तुम्हारी अहमियत कम होने लगती है।


तुम्हारी बातों में कमियाँ दिखने लगती हैं।


तुम्हारी मोहब्बत

उन्हें बंधन लगने लगती है।


और तुम्हारी मौजूदगी

उन्हें परेशान करने लगती है।


जबकि सच यह होता है

कि दोष तुम्हारा नहीं,


उनकी फितरत का होता है।


कुछ लोग मोहब्बत नहीं करते,

वे सिर्फ खालीपन भरते हैं।


अकेले होते हैं

तो तुम्हें ढूँढ़ते हैं।


उदास होते हैं

तो तुम्हें पुकारते हैं।


टूटे होते हैं

तो तुम्हारे कंधे पर सिर रखते हैं।


और जैसे ही

उन्हें नया सहारा मिल जाता है,


वे तुम्हें ऐसे छोड़ देते हैं

जैसे रास्ते में पड़ी

कोई पुरानी टिकट।


जिसका काम खत्म,

उसकी कीमत खत्म।


ऐसे लोग प्रेमी नहीं होते।


वे भावनाओं के व्यापारी होते हैं।


तुम्हारा समय लेते हैं,

तुम्हारी नींद लेते हैं,

तुम्हारा विश्वास लेते हैं,

तुम्हारा दिल लेते हैं,


और बदले में

एक दिन सिर्फ इतना लौटाते हैं—


"सॉरी, मैं बहुत बिजी हूँ..."


अगर कोई इंसान

तुम्हें खोने के डर से नहीं डरता,


तो यकीन मानो,

वह तुम्हें पाने की खुशी भी कभी महसूस नहीं करता था।


इसलिए ऐसे लोगों के पीछे मत भागो।


उनके नंबर मिटा दो,

उनकी चैट मिटा दो,

उनकी यादों की कब्र पर

आखिरी मुट्ठी मिट्टी डाल दो।


क्योंकि जो इंसान

तुम्हें रोज़ याद करने से

महीनों तक गायब हो सकता है,


वह प्रेमी नहीं,


तुम्हारी जिंदगी का

सबसे खूबसूरत झूठ था।

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