बच्चों को उठा उठा कर जमीन पर पटक कर मार दिया
उसे उस बच्चे की मां से शादी करनी थी उसे उससे प्यार हो गया था
क्या कोई प्यार करने वाला व्यक्ति किसी को मार सकता है❓
एक पत्नी ने अपने प्रेमी के चक्कर में अपने पति को मार कर लेते ड्रम में भर दिया
क्या इस औरत को वास्तव में किसी से प्यार हो सकता है❓
किसी ने किसी को मार कर कहीं फेंक दिया कोई किसी को जला गया किसी ने किसी का रेप कर दिया क्या यह आदमी जो यह घटनाओं को अंजाम दे रहा है क्या इस आदमी के अंदर कहीं भी प्रेम दिखाई पड़ता है❓
आदमी के जीवन में जो भी श्रेष्ठ है सुंदर है और सत्य है उसे जिया जा सकता है जाना जा सकता है हुआ जा सकता है लेकिन कहना बहुत मुश्किल है और दुर्घटना और दुर्भाग्य यह है कि जिसमें जिया जाना चाहिए जिसमें हुआ जाना चाहिए उसके संबंध में मनुष्य जाति 5000 वर्ष से केवल बातें कर रही है प्रेम की बात चल रही है प्रेम के गीत गाए जा रहे हैं प्रेम के भजन गाए जा रहे हैं और प्रेम का मनुष्य के जीवन में कोई स्थान नहीं है अगर आदमी के भीतर खोजने में जाए तो प्रेम से ज्यादा असत्य शब्द दूसरा नहीं मिलेगा और जिन लोगों ने प्रेम को असत्य सिद्ध किया है और जिन्होंने प्रेम की समस्त धाराओं के अवरुद्ध कर दिया है और बड़ा दुर्भाग्य है कि वे लोग समझते हैं की प्रेम के जन्मदाता भी हैं
धर्म प्रेम की बातें करता है लेकिन आज तक जिस प्रकार का धर्म मनुष्य जाति के ऊपर दुर्भाग्य के की भांति छाया हुआ है उसे धर्म ने ही मनुष्य के जीवन से प्रेम के सारे द्वारा बंद कर दिए हैं और मैं इस संबंध में पूरब और पश्चिम में कोई फर्क है ना हिंदुस्तान मैं अमेरिका में कोई फर्क है मनुष्य के जीवन में प्रेम की धारा प्रकट ही नहीं हो पाई और नहीं हो पाए तो हम दोष देते देते हैं कि मनुष्य बुरा है इसलिए प्रकट नहीं हो पाई हम दोष देते हैं कि यह मन ही जहर है इसलिए प्रकट नहीं हो पाई
मन जहर नहीं है और जो लोग मन को जहर कहते रहे हैं उन्होंने ही प्रेम को जहरीला कर दिया प्रेम को प्रकट नहीं होने दिया है मन जहर कैसे हो सकता है ❓
इस जगत में कुछ भी जहर नहीं है परमात्मा के इस सारे उपकरण में कुछ भी विश नहीं है सब अमृत है लेकिन आदमी ने सारे अमृत अमृत को जहर कर लिया है और इस जहर को करने में शिक्षक साधु संत तथा कथित धार्मिक लोगों का सबसे बड़ा हाथ है इस बात को थोड़ा समझ लेना जरूरी है क्योंकि अगर यह बात दिखाई ना पड़े तो मनुष्य के जीवन में कभी भी प्रेम भविष्य में नहीं हो सकेगा क्योंकि जिन कर्म से प्रेम पैदा नहीं हो सकता उन्हें कर्म को हम प्रेम प्रकट करने के आधार और कारण बना रहे हैं हालत ऐसी है कि गलत सिद्धांतों को अगर हजारों वर्षों तक दोहराया जाए तो हम फिर भूल जाते हैं कि सिद्धांत गलत है और दिखाई पड़ने लगता है आदमी गलत है क्योंकि उन सिद्धांतों को वह कभी पूरा नहीं कर पा रहा है
यह आदमी पैदा हुआ है 5 -6000 या 10000 वर्ष की संस्कृति का यह आदमी फल है लेकिन संस्कृति गलत नहीं है यह आदमी गलत है आदमी मरता जा रहा है रोज और संस्कृति की दुहाई चलती जा रही है की महान संस्कृति महान धर्म महान सब कुछ और उसका यह फल है यह आदमी इस संस्कृति से गुजरा है और उसका परिणाम है उसका
लेकिन नहीं आदमी गलत है उसको नहीं बदलना चाहिए अपने को
और कोई कहने की हिम्मत नहीं उठाता कहीं ऐसा तो नहीं है कि 10000 वर्षों में जो संस्कृति और धर्म आदमी को प्रेम से नहीं भर पाए वह संस्कृति और धर्म गलत हो और अगर 10000 वर्षों में आदमी प्रेम से नहीं भर पाया तो आगे कोई संभावना है इस धर्म और इसी संस्कृति के आधार पर की आगे भी भी प्रेम से भर पाएगा
10000 वर्षों में जो नहीं हो पाया वह आने वाले 10000 वर्षों में होने वाला नहीं है क्योंकि आदमी यही है कल भी यही होगा आदमी हमेशा से यही है और यही होगा और संस्कृति और धर्म जिनके हम नारे दिए चले जाते हैं और साधु संतों और महात्माओं की जिनकी दुहाई दिए चले जाते हैं
सोचने के लिए हम तैयार नहीं कहीं हमारी बुनियादी चिंतन की दिशा तो गलत नहीं है मैं कहना चाहता हूं वह गलत है और गलत का सबूत है यह आदमी और क्या सबूत होता है एक बीज को हम बोय और फल जहरीले और कड़वे हो तो क्या सिद्ध होगा सिद्ध होता है कि वह भी जहरीला और कड़वा रहा होगा क्योंकि बीज से पता लगाना मुश्किल है उसे जो फल पैदा होंगे वह कड़वे पैदा होंगे बीज से कुछ भी खोज नहीं की जा सकती बीज को तोड़ो फोड़ो कुछ पता नहीं चल सकता इससे जो फल पैदा होंगे वह कड़वे होंगे बीज को वह 100 वर्ष लग जाएंगे वर्षों का बड़ा होगा आकाश में फैलेगा तब फल आएंगे और पता चलेगा वह कड़वे हैं
10000 वर्ष में संस्कृति और धर्म के जो बीज बोए गए हैं यह आदमी उसका फल है और यह कड़वा है और यह घृणा से भरा हुआ है लेकिन उसी की दुहाई दिए चले जाते हैं और हम रोज सोचते हैं उसे प्रेम हो जाएगा मैं आपसे कहना चाहता हूं उससे प्रेम नहीं हो सकता क्योंकि प्रेम के पैदा होने की जो बुनियादी संभावना है धर्म ने उसकी हत्या कर दी है उसमें जहर बोल दिया है
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