अपनेपन का ढोंग ना कर ऐ दोस्त,चेहरे पढ़ने की बुरी आदत है हममे...बिछड़कर भी क्या लौटेंगे वो लोग,जो साथ रहकर भी हमारे नहीं थे दोस्त...खिलाड़ी तो हम तुमसे भी बेहतरीन हैं, पर अफ़सोस रिश्तों से खेलना हमारे संस्कारों में नहीं है दोस्त...ये निभाने वाले ही तो नहीं मिलते,चाहने वाले तो हर मोड़ पे खड़े हैं दोस्त...वक्त पर छोड़ कर भागे हुए लोग जब,बेवक्त लौटते हैं तब बहुत बदसूरत और बेवजह लगते हैं दोस्त...हमेशा जुड़े रहने के लिए बेइंतेहा भरोसा चाहिए,और बिछड़ने के लिए एक गलतफहमी ही काफी है...उम्र की दहलीज पर जब सांझ की आहट होती है,तब ख्वाहिशें कम और सुकून की तलाश ज्यादा होती है दोस्त...ईमानदारी और इंसानियत के साथ-साथ हमदर्दी भी रखते है अपने किरदार में दोस्त,बेसक लोग हमें आवारा,पागल,दीवाना कहते है गद्दारी का इल्जाम कोई नहीं लगा सकता...ज़िम्मेदारियों में जीना मैंने सौदे की तरह सीखा है,हर फ़र्ज़ के बदले कोई न कोई ख़्वाहिश दफ़न की है मैंने दोस्त...आने वाला कितना भी बेहतरीन क्यों ना हो,जाने वाले की जगह नहीं ले सकता दोस्त...
कुछ लोगों के लिए किसी का सरल और सच्चा मन कोई मायने नहीं रखता,वे अक्सर उसी इंसान को सबसे ज़्यादा ठेस पहुँचाते हैं जो बिना किसी छल के उनके साथ खड़ा रहता है शायद इसलिए इस दुनिया में मासूमियत सबसे खूबसूरत होकर भी सबसे ज़्यादा अनदेखी रह जाती है...दोस्त
Your life is not random. It is built by your daily routine. Change what you do eavryday and everything will start changing...विपत्ति में धैर्य, वैभव में दया और संकट में सहनशीलता ही श्रेष्ठ व्यक्ति के लक्षण हैं.सब्र सबसे नहीं होता पर सब्र से सब होता है...जब लोग दाग ढूँढने मे व्यस्त हो तब समझ लेना आपकी चमक उनसे बर्दास्त नही हो रही है.लोग बहुत अच्छे होते है अगर हमारा वक्त अच्छा हो तो। तारीफ करने वाला आपकी स्थिति देखता है और चिंता करने वाला आपकी परिस्थिति देखता है.चतुर युग चल रहा है इसलिए ये विचार छोड़ दीजिए कि बिना स्वार्थ के लोग आपसे रिश्ता रखेंगे...बिना किताबों के जो पढ़ाई सीखी जाती है उसे ज़िंदगी कहते हैं...नीयत साफ हो तो उपरवाला झुकने नही देता,ना किसी कि नज़रों मैं और ना ही कदमों मैं...व्यक्ति बनकर नहीं बल्कि व्यक्तित्व बनकर जियो क्यूकी, व्यक्ति एक दिन विदा हो जाता है और व्यक्तित्व हमेशा जीवित रहता है...मर्यादा में रहकर भी जब आत्मसम्मान न मिले तो सीमाएँ लांघ कर स्वाभिमान को आगे रखना अनुचित नहीं है फिर चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों...राज Sir
परिवार और समाज दोनों ही बर्बाद होने लगते हैं,जब समझदार मौन और नासमझ बोलने लगते हैं।
Hitler was a socialist, therefore all socialists are Hitler...
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